Chapter 1पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

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NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6), अध्याय 1

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यह पन्ना परीक्षा से पहले दोहराने के लिए है। हर भाग के शुरू में किताब के पृष्ठ लिखे हैं, ताकि शक हो तो वहीं खोलकर देख लीजिए। पृष्ठ संख्याएँ 2026-27 में छपी किताब की हैं। अंश, घंटे और दूसरे आँकड़े किताब के हैं; जहाँ हिसाब हमारा है, वहाँ लिखा है। परीक्षा में यही लिखिए।

तारों का मतलब: ★★किताब के ‘प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ’ (प्रश्न 1–8) में सीधे पूछा गया · ★उन उत्तरों में काम आता है · बिना तारे के: पृष्ठभूमि या किताब की गतिविधि।


1. अध्याय एक नज़र में

किताब यह अध्याय तीन महत्वपूर्ण प्रश्नों से शुरू करती है। पूरा अध्याय इन्हीं के उत्तर देता है:

  1. “मानचित्र क्या है और हम इसका उपयोग कैसे करते हैं? इसके मुख्य घटक क्या हैं?”
  2. “निर्देशांक क्या हैं? पृथ्वी पर किसी स्थान को अंकित करने के लिए अक्षांश और देशांतर का उपयोग कैसे किया जा सकता है?”
  3. “देशांतर से स्थानीय समय और मानक समय कैसे संबंधित हैं?”

पूरा अध्याय एक चित्र में

सवालकोई जगह कहाँ है, और वहाँ कितने बजे हैं?तीनों प्रश्नों का निचोड़, हमारे शब्दों में
मानचित्रऊपर से देखी गई सतह का प्रतीकात्मक चित्रणतीन मुख्य घटक: दूरी · दिशा · प्रतीक चिह्न
ग्लोबपृथ्वी जैसा गोलाकार नमूनासमतल मानचित्र से बेहतर चित्रण
अक्षांशभूमध्य रेखा से दूरी0° से 90° उ. या 90° द. तक
देशांतरप्रमुख याम्योत्तर से दूरी0° से 180° पू. या प. तक
स्थानीय समयहर 15° पर एक घंटे का अंतरपूर्व में आगे, पश्चिम में पीछे
मानक समयभारत में आई.एस.टी.जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे
तिथि रेखालगभग 180° देशांतर परपार करने पर तिथि में एक दिन का बदलाव
NCERT, पृष्ठ 7–22 के आधार पर

2. मानचित्र और उसके घटक★★

किताब के पृष्ठ 8–11 · प्रश्नावली में: प्रश्न 1, 3, 4; प्रश्न 8 (खाना 2, 3)

  • किताब लघु नगर के मानचित्र (चित्र 1.1) से शुरू करती है। इसमें उत्तर ऊपर है, और ऊपर दाएँ कोने में दिशा-सूचक बना है।
  • मानचित्र किसी क्षेत्र का “प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन” है। “मानचित्र में आप सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे आप उसे ऊपर से देखते हैं।”
  • एटलस (मानचित्रावली): “मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह”।
मानचित्र का प्रकारक्या दिखाता हैकिताब में उदाहरण
भौतिकमुख्य रूप से प्राकृतिक आकृतियाँ: पर्वत, महासागर, नदियाँचित्र 5.2
राजनैतिकदेश या राज्य, सीमाएँ, नगर आदिसभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और राजधानियों वाला भारत का मानचित्र
थिमैटिककिसी ख़ास प्रकार की सूचनाचित्र 6.3 और 8.1

मानचित्र के तीन मुख्य घटक

मानचित्रकिसी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रणसतह ऐसी दिखती है जैसे ऊपर से देख रहे हों
दूरीस्केल सेमानचित्र का 1 से.मी. ज़मीन पर कितनी दूरी
दिशाउ. लिखा तीर4 प्रधान और 4 मध्यवर्ती दिशाएँ
प्रतीक चिह्नछोटे तय निशानसीमित जगह में अनेक विवरण
NCERT, पृष्ठ 9–11

दूरी: स्केल से

  • मानचित्र का हर सेंटीमीटर ज़मीन पर एक तय दूरी दिखाता है। किताब का उदाहरण: अगर यह दूरी 500 मीटर मानें, तो स्केल 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर है। हमारे शब्दों में: स्केल बताता है कि मानचित्र की दूरी ज़मीन पर कितनी असली दूरी है।
  • अध्याय 5 के चित्र 5.2 में स्केल एक रूलर से दिखाया गया है: मानचित्र पर 2.5 से.मी. ज़मीन पर 500 किलोमीटर दिखाता है।
  • दो बिंदुओं के बीच की असली दूरी उस मानचित्र के स्केल पर निर्भर करती है।
  • हमारा तरीका: 2.5 से.मी. = 500 कि.मी. हो, तो 1 से.मी. = 500 ÷ 2.5 = 200 कि.मी.। फिर मानचित्र पर नापी गई दूरी (से.मी. में) को 200 से गुणा कीजिए। हमारा उदाहरण: दो जगहों के बीच 5 से.मी. नपे, तो असली दूरी 5 × 200 = 1000 कि.मी.।

दिशा

दिशाएँकौन-सीपृष्ठ
चतुर्दिश या प्रधान बिंदुऊपर उत्तर, फिर घड़ी के काँटे की दिशा में पूर्व, दक्षिण, पश्चिम10
मध्यवर्ती दिशाएँउत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम10
  • अधिकतर मानचित्रों में ‘उ.’ लिखा एक तीर होता है, जो उत्तर दिशा बताता है।
उत्तरदक्षिणपूर्वपश्चिमउत्तर-पश्चिमउत्तर-पूर्वदक्षिण-पश्चिमदक्षिण-पूर्व
आठ दिशाएँ: चार प्रधान और चार मध्यवर्तीकिताब के पृष्ठ 10 के चित्र के आधार पर हमारा बनाया चित्र

चित्र को पढ़िए.

  1. 1उत्तर से घड़ी के काँटे की दिशा में चलिए। पहली मध्यवर्ती दिशा कौन-सी आती है?
  2. 2उत्तर-पश्चिम की ठीक उलटी दिशा कौन-सी है?
  3. 3पश्चिम और दक्षिण के बीच कौन-सी दिशा है?
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा): (1) उत्तर-पूर्व। (2) दक्षिण-पूर्व। (3) दक्षिण-पश्चिम। मध्यवर्ती दिशा का नाम उसके दोनों ओर की प्रधान दिशाओं से बनता है; किताब के चारों नामों में उत्तर या दक्षिण पहले आता है।

प्रतीक चिह्न

  • किसी बड़े नगर या देश के मानचित्र पर हर भवन का छोटा चित्र बनाने की जगह नहीं होती, इसलिए चिह्नों से काम लिया जाता है। “इस तरीके से मानचित्र पर उपलब्ध सीमित स्थान पर अनेक विवरण दर्शाए जा सकते हैं।”
  • मानचित्र बनाने वाले तय प्रतीक चिह्न इसलिए इस्तेमाल करते हैं कि अलग-अलग उपयोगकर्ता मानचित्र आसानी से समझ सकें। अलग-अलग देश चिह्नों के अलग-अलग समुच्चय इस्तेमाल करते हैं।
  • भारत के मानचित्रों के लिए चिह्नों का संकलन सरकारी निकाय भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तय किया है। इनमें से कुछ चित्र 1.2 में हैं: रेलवे लाइन और स्टेशन, पक्की और कच्ची सड़कें, सीमाएँ, नदी, कुआँ, तालाब, नहर, सेतु, मंदिर, गिरजाघर, मस्जिद, छत्री, बस्तियाँ, डाकघर, पुलिस स्टेशन, वृक्ष और घास।
  • रंग भी देखिए: चित्र 1.2 में नदी और तालाब नीले, वृक्ष और घास हरे, और बस्तियाँ लाल रंग में हैं। रंगों का यह मिलान हमारा है, चित्र देखकर।
बड़ी लाइनछोटी लाइनRSरेलवे स्टेशनपक्की सड़ककच्ची सड़कअंतर्राष्ट्रीय सीमाराज्य सीमाजिला सीमानदीकुआँतालाबनहरसेतुमंदिरगिरजाघरमस्जिदछत्रीPOडाकघरPTOडाक एवं टेलीग्राफकार्यालयPSपुलिस स्टेशनबस्तियाँकब्रिस्तानवृक्षघास
चित्र 1.2 — मानचित्रों में सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले प्रतीक चिह्नकिताब के पृष्ठ 11 के चित्र 1.2 के आधार पर हमारा बनाया चित्र

चित्र को पढ़िए.

  1. 1बड़ी लाइन और छोटी लाइन के चिह्न में क्या अंतर है?
  2. 2तीनों सीमाओं के चिह्न आपस में कैसे पहचानेंगे?
  3. 3PO, PTO और PS किन भवनों के चिह्न हैं?
  4. 4नदी और नहर, दोनों में पानी बहता है। चित्र में इनके चिह्न अलग कैसे हैं?
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा): (1) बड़ी लाइन एक मोटी पट्टी है जिसमें काले और सफ़ेद खाने बारी-बारी से आते हैं; छोटी लाइन एक पतली रेखा है जिस पर छोटी-छोटी खड़ी रेखाएँ हैं। (2) अंतर्राष्ट्रीय और राज्य सीमा, दोनों में रेखा के टुकड़े और बिंदु बारी-बारी से आते हैं; अंतर्राष्ट्रीय सीमा के टुकड़े लंबे हैं (किताब के चित्र में दो टुकड़े, दो बिंदु), राज्य सीमा के छोटे (तीन टुकड़े, दो बिंदु)। जिला सीमा में केवल रेखा के टुकड़े हैं, बिंदु नहीं। (3) PO डाकघर, PTO डाक एवं टेलीग्राफ कार्यालय, PS पुलिस स्टेशन। (4) नदी नीले रंग की चौड़ी, लहरदार पट्टी है; नहर काली, पतली, समानांतर रेखाओं से बनी है।

3. गोल पृथ्वी और ग्लोब★

किताब के पृष्ठ 12 · प्रश्नावली में: प्रश्न 8 (खाना 5)

  • पृथ्वी “लगभग गोलाकार” है और “ध्रुवों पर थोड़ी चपटी” है। फिर भी काम के लिए हम इसे गोलाकार ही मानते हैं।
  • संतरे वाला प्रयोग: संतरे का छिलका तीन या चार टुकड़ों में उतारिए और उसे समतल करने की कोशिश कीजिए। किनारे फाड़े बिना यह पूरा समतल नहीं होता। हमारी बात: इसी तरह गोल पृथ्वी को समतल कागज़ पर पूरा उतारना आसान नहीं।
  • ग्लोब गोल आकार पर बना मानचित्र है। ग्लोब पृथ्वी, चंद्रमा, मंगल ग्रह, या तारों और तारा-मंडल का भी हो सकता है। यह सामान्यतः धातु, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड से बनता है।
  • पृथ्वी का ग्लोब समतल मानचित्र से बेहतर चित्रण है, क्योंकि उसका आकार पृथ्वी जैसा गोलाकार है।

4. निर्देशांक: किसी जगह का ठीक पता★

किताब के पृष्ठ 12–13, 15 · प्रश्नावली में: प्रश्न 8 (खाना 7)

  • बाज़ार का उदाहरण: “प्रवेश द्वार से 5वीं पंक्ति की 7वीं दुकान पर सायं 6 बजे मुझसे मिलें।” दो संख्याएँ, पंक्ति 5 और दुकान 7, उस दुकान को ठीक-ठीक तय कर देती हैं।
  • शतरंज का उदाहरण: बिसात के हर खाने को एक अक्षर (‘क’ से ‘ज’) और एक संख्या (1 से 8) से पहचानते हैं। किताब का उदाहरण: “प्यादा ‘घ’ 2 से ‘घ’ 4 की ओर आगे बढ़ा है।”
  • दोनों उदाहरणों में दो चीज़ें मिलकर एक जगह ठीक-ठीक तय करती हैं। इस तरीके को निर्देशांक प्रणाली कहते हैं।
  • पृथ्वी पर ये दो निर्देशांक हैं: “अक्षांश और देशांतर मिलकर एक स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।”
ककखखगगघघङङचचछछजज1122334455667788
शतरंज की बिसात: हर खाने का पता एक अक्षर और एक संख्याकिताब के पृष्ठ 12 के चित्र के आधार पर हमारा बनाया चित्र; बाकी मोहरे नहीं दिखाए; बिंदुदार प्यादा और तीर हमने जोड़े हैं, ताकि प्यादे की चाल दिखे

चित्र को पढ़िए.

  1. 1प्यादा किस खाने से किस खाने पर गया?
  2. 2बिसात के बाएँ-नीचे वाले कोने के खाने का पता क्या है? दाएँ-ऊपर वाले कोने का?
  3. 3‘घ’ 4 से उसी पंक्ति में दो खाने दाईं ओर कौन-सा खाना है?
  4. 4बिसात पर एक अक्षर और एक संख्या मिलकर खाना बताते हैं। पृथ्वी पर कौन-से दो निर्देशांक मिलकर जगह बताते हैं?
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा): (1) ‘घ’ 2 से ‘घ’ 4। (2) ‘क’ 1 और ‘ज’ 8। (3) ‘च’ 4: ‘घ’ के बाद ‘ङ’, फिर ‘च’। (4) अक्षांश और देशांतर।

5. अक्षांश: भूमध्य रेखा से दूरी★★

किताब के पृष्ठ 13–14 · प्रश्नावली में: प्रश्न 7 (कथन 1, 3, 6); प्रश्न 8 (खाना 9, 12)

  • ग्लोब घुमाने पर ऊपर और नीचे के बिंदु दो ध्रुव हैं: उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव। इनके बीच में भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) है।
  • भूमध्य रेखा से किसी ध्रुव की ओर चलें, तो भूमध्य रेखा से दूरी बढ़ती जाती है। “अक्षांश, भूमध्य रेखा से इसी दूरी को मापता है।”
  • भूमध्य रेखा के समानांतर, पूर्व से पश्चिम जाने वाली काल्पनिक रेखा अक्षांश (समानांतर) कहलाती है। यह पृथ्वी के चारों ओर एक वृत्त बनाती है।
  • “सबसे बड़ा वृत्त, विषुवत वृत्त है”; उत्तर या दक्षिण की ओर बढ़ने पर अक्षांश के वृत्त छोटे होते जाते हैं।
  • अक्षांश अंशों (डिग्री) में लिखे जाते हैं: भूमध्य रेखा 0°, उत्तर ध्रुव 90° उ., दक्षिण ध्रुव 90° द.।

अक्षांश और जलवायु:

कहाँजलवायु
भूमध्य रेखा के चारों ओरसामान्यतः गरम (उष्ण)
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ते हुएशीतोष्ण
उत्तर या दक्षिण ध्रुव के पासशीत (ठंडी)

6. देशांतर और प्रमुख याम्योत्तर★★

किताब के पृष्ठ 14–16 · प्रश्नावली में: प्रश्न 6; प्रश्न 7 (कथन 2); प्रश्न 8 (खाना 4, 8, 10)

  • कल्पना कीजिए कि आप उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव तक संभवतः सबसे छोटी रेखा पर यात्रा कर रहे हैं। यूरोप और अफ़्रीका के मार्ग से जाइए या एशिया के मार्ग से, दूरी एक समान होगी। ऐसी रेखाएँ देशांतरीय याम्योत्तर (मेरिडियन ऑफ लाँगिट्यूड) कहलाती हैं। “ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।”
  • प्रमुख याम्योत्तर (ग्रिनिच याम्योत्तर): वर्ष 1884 में कुछ देशों ने तय किया कि इंग्लैंड में लंदन के एक क्षेत्र ग्रिनिच से गुजरने वाली याम्योत्तर, प्रमुख याम्योत्तर के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक मानी जाएगी। इसका देशांतर 0° है।
  • “देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का एक माप है”। यह 0° से 180° तक होता है; प्रमुख याम्योत्तर के पश्चिम में ‘प.’ और पूर्व में ‘पू.’ लिखते हैं।
  • किताब के उदाहरण, पूर्णांक में: न्यूयॉर्क 74° प. · दिल्ली 77° पू. · टोक्यो 140° पू.
  • “180° प. और 180° पू. एक ही देशांतर हैं”, इसलिए इसे सिर्फ़ 180° लिखते हैं।
  • दोनों निर्देशांक साथ: “दिल्ली 29° उ. अक्षांश और 77° पू. देशांतर पर स्थित है”। किताब साथ ही कहती है: “यद्यपि यह डिग्री आनुमानिक रूप से पूर्ण है, किंतु सटीक नहीं है।”
  • ग्लोब पर अक्षांश और देशांतर की रेखाएँ मिलकर एक जाल बनाती हैं, जिसे ग्रिड कहते हैं; इन रेखाओं को ग्रिड रेखाएँ कहते हैं।
  • गोलार्ध (चित्र 1.4): भूमध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटती है; ग्रिनिच याम्योत्तर पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में।
बातअक्षांशदेशांतर
क्या मापता हैभूमध्य रेखा से दूरीप्रमुख याम्योत्तर से दूरी
रेखा कैसी हैपूरा वृत्त, पूर्व से पश्चिमअर्धवृत्त, ध्रुव से ध्रुव
रेखाओं की लंबाईभूमध्य रेखा सबसे बड़ी; ध्रुवों की ओर छोटीयूरोप-अफ़्रीका के मार्ग से हो या एशिया के, ध्रुव से ध्रुव तक दूरी एक समान
0° कहाँभूमध्य रेखाग्रिनिच से गुजरने वाली प्रमुख याम्योत्तर
सबसे बड़ा मान90° उ. और 90° द., ध्रुवों पर180°
किससे जुड़ाजलवायुसमय

7. उज्जयिनी की मध्य रेखा और भारत का विस्तार

किताब का बॉक्स और चित्र, पृष्ठ 16–18। प्रश्नावली में नहीं।

  • किताब कहती है: “ग्रिनिच याम्योत्तर, पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर रेखा नहीं है”।
  • यूरोप से अनेक शताब्दियों पहले भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर थी, जिसे मध्य रेखा कहा जाता था। यह उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) से गुजरती थी।
  • उज्जैन अनेक शताब्दियों तक खगोल विद्या का प्रतिष्ठित केंद्र रहा। लगभग 1500 वर्ष पहले प्रसिद्ध खगोलविद वराहमिहिर यहीं रहे और काम किया।
  • भारतीय खगोलविद शून्य और प्रमुख याम्योत्तर सहित अक्षांश और देशांतर से परिचित थे। उज्जयिनी याम्योत्तर सभी भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं का प्रमुख संदर्भ बन गया था।
  • पुराने शहर इस रेखा पर ठीक-ठीक नहीं हैं; कुछ बहुत पास हैं, कुछ थोड़ी दूरी पर। कारण: देशांतर नापने के लिए सही-सही समय रखना ज़रूरी है, और तब यह आज जितना सटीक नहीं था।

चित्र 1.5 के पुराने शहर: किताब के चित्र में मध्य रेखा पर 75.8° पू. लिखा है, और किताब का चित्र पैमाने पर आधारित नहीं है।

प्राचीन नामआज का नाम
रोहितकरोहतक
मालवंगरानगर
उज्जयिनीउज्जैन
माहिष्मतिमहेश्वर
कुमारीकन्या कुमारी
  • चित्र में कुरूक्षेत्र एक ही नाम से है। आज के पाँच शहर (दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई) अलग निशान से दिखाए गए हैं; ये पुराने शहरों के नए नाम नहीं हैं।
75.8° पू.कुरूक्षेत्ररोहितक/रोहतकदिल्लीमालवंगरा/नगरउज्जयिनी/उज्जैनमाहिष्मति/महेश्वरमुंबईकोलकाताबेंगलुरुचेन्नईकुमारी/कन्या कुमारीप्राचीन नगरआधुनिक नगर
चित्र 1.5 — उज्जयिनी की मध्य रेखा (75.8° पू.), उसके पास के प्राचीन नगर और आज के पाँच शहरकिताब के पृष्ठ 17 के चित्र 1.5 के आधार पर हमारा बनाया चित्र; शहर उनकी असली जगह पर, मालवंगरा/नगर किताब के चित्र के अनुसार; उभार: Natural Earth (public domain); आज की सीमाएँ नहीं दिखाई गई हैं

चित्र को पढ़िए.

  1. 1प्राचीन नगरों को उत्तर से दक्षिण के क्रम में लिखिए।
  2. 2कौन-सा प्राचीन नगर मध्य रेखा पर लगभग ठीक बैठता है?
  3. 3आज के पाँच शहरों में कौन-सा मध्य रेखा से सबसे दूर है, और किस दिशा में?
  4. 4पुराने नगर इस रेखा पर ठीक-ठीक क्यों नहीं हैं?
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा): (1) कुरूक्षेत्र, रोहितक, मालवंगरा, उज्जयिनी, माहिष्मति, कुमारी। (2) उज्जयिनी (उज्जैन); माहिष्मति (महेश्वर) भी बहुत पास है, थोड़ा पश्चिम में। (3) कोलकाता, पूर्व में। (4) किताब का कारण: देशांतर नापने के लिए सही-सही समय रखना पड़ता है, और तब यह आज जितना सटीक नहीं था।

  • भारत का विस्तार (चित्र 1.6): भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्र के अनुसार भारत का अक्षांश लगभग 8° उ. से 37° उ. तक और देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. तक फैला है।
70° पू.80° पू.90° पू.10° उ.20° उ.30° उ.37° उ.अक्षांश8° उ.68° पू.देशांतर97° पू.
चित्र 1.6 — भारत का फैलाव: अक्षांश लगभग 8° उ. से 37° उ. तक, देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. तककिताब के पृष्ठ 18 के चित्र 1.6 के आधार पर हमारा बनाया चित्र; भारत की सीमा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के उसी मानचित्र में देखिए; उभार: Natural Earth (public domain); आज की सीमाएँ नहीं दिखाई गई हैं

चित्र को पढ़िए.

  1. 1भारत उत्तर से दक्षिण कितने अंश अक्षांश में फैला है?
  2. 2पश्चिम से पूर्व कितने अंश देशांतर में?
  3. 3चित्र की तीन खड़ी रेखाओं में से उज्जयिनी की मध्य रेखा (75.8° पू.) किसके सबसे पास है?
  4. 4भारत के सबसे पश्चिमी और सबसे पूर्वी हिस्से के स्थानीय समय में लगभग कितना अंतर होगा? (भाग 8 का हिसाब लगाइए।)
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा): (1) लगभग 29°: 37 − 8 = 29। (2) लगभग 29°: 97 − 68 = 29। (3) 80° पू.: 75.8° पू. 70° और 80° के बीच है, पर 80° के ज़्यादा पास। (4) लगभग 2 घंटे: 29 × 4 = 116 मिनट। किताब (पृष्ठ 20) संकेत देती है कि पोरबंदर (गुजरात) और तिनसुकिया (असम) के बीच देशांतर में 30° का अंतर है; 1° पर 4 मिनट के हिसाब से यह 30 × 4 = 120 मिनट, यानी 2 घंटे बनता है। इसीलिए तिनसुकिया में सूरज डूब चुका है, जबकि पोरबंदर में अभी दिन का प्रकाश है।

8. समय: स्थानीय समय, मानक समय और समय क्षेत्र★★

किताब के पृष्ठ 15, 19–21 · प्रश्नावली में: प्रश्न 2, 5, 6; प्रश्न 7 (कथन 4, 5); प्रश्न 8 (खाना 1)

हर 15° पर एक घंटा

  • पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर अपनी धुरी पर घूमती है और हर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है। एक पूरा चक्कर 360° है, इसलिए प्रति घंटा 15° (15 × 24 = 360)।
  • किसी जगह का समय उसके देशांतर से मापा जाता है। इसीलिए अलग-अलग याम्योत्तरों पर स्थानीय समय अलग होता है।

हर 15° पर एक घंटा

पृथ्वी24 घंटे में एक चक्कर, यानी 360°इसलिए प्रति घंटा 15°
पश्चिम की ओर15° प. पर सुबह 11 बजे30° प. पर सुबह 10 बजे; समय घटता है
पूर्व की ओर15° पू. पर दोपहर 1 बजे30° पू. पर दोपहर 2 बजे; समय बढ़ता है
NCERT, पृष्ठ 19
  • हमारा हिसाब: 1 घंटा = 60 मिनट = 15°, इसलिए 1° = 4 मिनट।
  • चित्र 1.7: नीचे 45° प. से 45° पू. तक के देशांतर दिखाए गए हैं। किताब के चित्र के शीर्षक में इस पंक्ति को “अक्षांश” कहा गया है; पर 0°, 15° पू., 15° प. देशांतर हैं, क्योंकि ये प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी बताते हैं। “प्रत्येक रंग एक याम्योत्तर पर केंद्रित 15° का एक क्षेत्र है।”
9पूर्वाह्न45° प.10पूर्वाह्न30° प.11पूर्वाह्न15° प.12मध्याह्न0°1अपराह्न15° पू.2अपराह्न30° पू.3अपराह्न45° पू.15°
चित्र 1.7 — प्रमुख याम्योत्तर के दोनों ओर स्थानीय समय: नीचे देशांतर, ऊपर समय; हर रंग एक याम्योत्तर पर केंद्रित 15° का क्षेत्रकिताब के पृष्ठ 19 के चित्र 1.7 के आधार पर हमारा बनाया चित्र

चित्र को पढ़िए.

  1. 145° पू. पर स्थानीय समय क्या है?
  2. 245° प. और 45° पू. के स्थानीय समय में कितने घंटे का अंतर है?
  3. 3पूर्व की ओर एक पट्टी पार करने पर समय बढ़ता है या घटता है, और कितना?
  4. 4चित्र से आगे सोचिए: ग्रिनिच पर दोपहर 12 बजे हों, तो 60° पू. पर कितने बजे होंगे?
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा): (1) 3 अपराह्न। (2) 6 घंटे: 9 पूर्वाह्न से 3 अपराह्न तक; दोनों के बीच 90° है, और 90 ÷ 15 = 6। (3) एक घंटा बढ़ता है। (4) 4 अपराह्न: 60 ÷ 15 = 4, यानी ग्रिनिच से 4 घंटे आगे।

स्थानीय समय से मानक समय

  • पोरबंदर और तिनसुकिया: किताब की गतिविधि में दो मित्र हैं, एक पोरबंदर (गुजरात) में और एक तिनसुकिया (असम) में। ढलती दोपहर में तिनसुकिया में अंधेरा हो चुका है, जबकि पोरबंदर में अभी उजाला है। दोनों के देशांतर में 30° का अंतर है।
  • हमारा हिसाब: 30° ÷ 15° = 2 घंटे। तिनसुकिया में पहले अंधेरा हुआ, यानी वह पूर्व की ओर है; इसलिए तिनसुकिया का स्थानीय समय पोरबंदर से 2 घंटे आगे है।
  • यह तरीका पृथ्वी पर किसी भी जगह का स्थानीय समय निकालने में काम आता है, पर एक देश के भीतर अनेक स्थानीय समय उचित नहीं होंगे। इसी कारण “अधिकतर देश उनके मध्य से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय को अपनाते हैं।” यही मानक समय है।
  • भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.) ग्रिनिच के स्थानीय समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। ग्रिनिच के समय को ग्रिनिच मीन टाइम (जी.एम.टी.) भी कहते हैं।

स्थानीय समय से मानक समय तक

स्थानीय समयहर याम्योत्तर का अपना समयपोरबंदर और तिनसुकिया में 30° का अंतर
मानक समयदेश के मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर पर आधारितअधिकतर देश यही अपनाते हैं
आई.एस.टी.भारतीय मानक समयग्रिनिच के स्थानीय समय (जी.एम.टी.) से 5 घंटे 30 मिनट आगे
NCERT, पृष्ठ 20

समय क्षेत्र

  • दुनिया समय क्षेत्रों में बँटी है। ये मोटे तौर पर चित्र 1.7 के 15° वाले क्षेत्रों के साथ चलते हैं।
  • विश्व के मानचित्र (चित्र 1.8) में समय क्षेत्रों को बाँटने वाली रेखाएँ “पूर्णतया सीधी नहीं होती हैं”, क्योंकि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ चलकर हर देश के मानक समय का ध्यान रखना पड़ता है।
  • मानचित्र में किसी देश के भीतर लिखी संख्या + वाली हो, तो उसे जी.एम.टी. में जोड़िए; − वाली हो, तो घटाइए। उस देश का मानक समय मिल जाएगा। चित्र 1.8 में भारत पर +5½ लिखा है।
  • हर देश में एक ही मानक समय नहीं होता। रूस, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे बहुत बड़े देशों में कई समय क्षेत्र हैं: “संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 समय क्षेत्र और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं”। रूस को पूर्व से पश्चिम पार करते हुए घड़ी 10 बार बदलनी पड़ेगी।

9. अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा★

किताब के पृष्ठ 21–22 · प्रश्नावली में: प्रश्न 8 (खाना 11)

  • “ग्रिनिच पर स्थिर मुख्य याम्योत्तर, जिसके विपरीत की रेखा लगभग 180° देशांतर पर है, उसे अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है।”
  • इस रेखा पर +12 और −12 वाले समय क्षेत्र एक-दूसरे को छूते हैं। जहाज़ या विमान से इसे पार करें, तो घड़ी की तिथि बदलनी पड़ती है।

तिथि रेखा पार करने पर

तिथि रेखाप्रमुख याम्योत्तर के विपरीत, लगभग 180° देशांतर परयहाँ +12 और −12 वाले समय क्षेत्र मिलते हैं
पूर्व की ओर जाते हुए पारएक दिन घटाइएजैसे सोमवार से रविवार
पश्चिम की ओर जाते हुए पारएक दिन जोड़िएजैसे रविवार से सोमवार
NCERT, पृष्ठ 21–22
  • रेखा लगभग 180° पर है, पर यह टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है, ताकि कुछ देशों में एक ही दिन का बँटवारा न हो।

10. ज़रूरी शब्द★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 8 (वर्ग पहेली के ज़्यादातर उत्तर इन्हीं शब्दों में हैं)

शब्दमतलब (हमारे शब्दों में)पृष्ठ
मानचित्रकिसी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण, जैसे ऊपर से देखा गया हो9
एटलस (मानचित्रावली)मानचित्रों की किताब या संग्रह9
स्केलमानचित्र की दूरी और ज़मीन की असली दूरी का रिश्ता, जैसे 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर10
चतुर्दिश (प्रधान बिंदु)उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम10
मध्यवर्ती दिशाएँप्रधान दिशाओं के बीच की चार दिशाएँ: उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम10
प्रतीक चिह्नमानचित्र पर चीज़ें दिखाने वाले छोटे, तय निशान11
ग्लोबगोल आकार पर बना मानचित्र12
निर्देशांकदो माप, जो मिलकर किसी जगह की ठीक स्थिति बताते हैं13, 15
भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त)दोनों ध्रुवों के बीच, 0° अक्षांश वाला सबसे बड़ा वृत्त13–14
अक्षांशभूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी का माप, अंशों में13–14
याम्योत्तरएक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाने वाली अर्धवृत्त रेखा14
प्रमुख याम्योत्तर0° देशांतर वाली याम्योत्तर, जो ग्रिनिच से गुजरती है15
देशांतरप्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी का माप, 0° से 180° तक15
ग्रिडअक्षांश और देशांतर की रेखाओं का जाल15
गोलार्धपृथ्वी का आधा भाग: उत्तरी और दक्षिणी (भूमध्य रेखा से), पूर्वी और पश्चिमी (ग्रिनिच याम्योत्तर से)16
मध्य रेखाउज्जयिनी से गुजरने वाली भारत की पुरानी प्रमुख याम्योत्तर16
स्थानीय समयकिसी जगह का अपना समय, जो उसके देशांतर से तय होता है15, 19
मानक समयदेश के मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर पर आधारित, पूरे देश के लिए अपनाया गया समय20
भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.)भारत का मानक समय; जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे20
जी.एम.टी. (ग्रिनिच मीन टाइम)ग्रिनिच का स्थानीय समय20
समय क्षेत्रवह क्षेत्र जहाँ एक मानक समय चलता है; मोटे तौर पर 15° का19–20
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखाप्रमुख याम्योत्तर के विपरीत, लगभग 180° देशांतर वाली रेखा; पार करने पर तिथि में एक दिन का बदलाव21–22

11. आँकड़े और नाम एक जगह★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 1, 2, 6 (इन्हीं आँकड़ों से हिसाब बनता है)

आँकड़ा या नामकिसकापृष्ठ
1 सेंटीमीटर = 500 मीटरकिताब का माना हुआ स्केल (उदाहरण)10
2.5 से.मी. = 500 कि.मी.अध्याय 5 के चित्र 5.2 का स्केल; प्रश्न 1 में यही10, 23
40 मीटर × 30 मीटर · 1 सेंटीमीटर = 10 मीटरखेल-मैदान वाली गतिविधि10
4 और 4प्रधान दिशाएँ · मध्यवर्ती दिशाएँ10
0° · 90° उ. · 90° द.भूमध्य रेखा · उत्तर ध्रुव · दक्षिण ध्रुव14
1884कुछ देशों ने ग्रिनिच याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर माना15
0° से 180°देशांतर, पू. या प. के साथ15
74° प. · 77° पू. · 140° पू.न्यूयॉर्क · दिल्ली · टोक्यो का देशांतर (पूर्णांक में)15
29° उ., 77° पू.दिल्ली के निर्देशांक (पूर्णांक में, सटीक नहीं)15
लगभग 1500 वर्ष पहलेवराहमिहिर उज्जैन में रहे और काम किया16
75.8° पू.चित्र 1.5 में उज्जयिनी की मध्य रेखा17
लगभग 8° उ. से 37° उ. · 68° पू. से 97° पू.भारत का अक्षांश · देशांतर फैलाव18
24 घंटे · 360° · प्रति घंटा 15°पृथ्वी का एक चक्कर19
30°पोरबंदर और तिनसुकिया के देशांतर का अंतर20
5 घंटे 30 मिनटआई.एस.टी. जी.एम.टी. से इतना आगे20
+5½चित्र 1.8 में भारत21
6 · 11संयुक्त राज्य अमेरिका · रूस के समय क्षेत्र21
10 बाररूस पार करते हुए घड़ी इतनी बार बदलनी पड़ेगी21
+12 और −12ये समय क्षेत्र तिथि रेखा पर मिलते हैं21
लगभग 180°अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा का देशांतर21
29° उ. · 13° उ. · लगभग 77° पू.प्रश्न 6: दिल्ली और बेंगलुरु के अक्षांश · दोनों का देशांतर23
ग्रिनिचइंग्लैंड में लंदन का क्षेत्र, जहाँ से प्रमुख याम्योत्तर गुजरती है15
भारतीय सर्वेक्षण विभागभारत के मानचित्रों के प्रतीक चिह्न तय करता है; चित्र 1.6 भी इसी का है11, 18
वराहमिहिरउज्जैन में रहे प्रसिद्ध खगोलविद16

12. ये ग़लतियाँ मत कीजिएध्यान

ग़लतीसही बातपृष्ठ
अक्षांश की सभी रेखाओं को बराबर लंबा माननाभूमध्य रेखा सबसे बड़ा वृत्त है; ध्रुवों की ओर वृत्त छोटे होते जाते हैं13
याम्योत्तर को पूरा वृत्त समझनायाम्योत्तर अर्धवृत्त है, एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक14
अक्षांश और देशांतर की परिभाषा उलट देनाअक्षांश = भूमध्य रेखा से दूरी; देशांतर = प्रमुख याम्योत्तर से दूरी13, 15
देशांतर को 90° तक ही माननादेशांतर 0° से 180° तक जाता है; 90° तक अक्षांश जाता है14, 15
अक्षांश के साथ पू. या प., और देशांतर के साथ उ. या द. लिखनाअक्षांश के साथ उ. या द.; देशांतर के साथ पू. या प.14, 15
180° के साथ पू. या प. लिखना180° प. और 180° पू. एक ही देशांतर हैं; सिर्फ़ 180° लिखिए15
पूर्व की ओर जाने पर समय घटानाप्रमुख याम्योत्तर से पूर्व में हर 15° पर एक घंटा जुड़ता है; पश्चिम में घटता है19
यह मानना कि अक्षांश बदलने से स्थानीय समय बदलता हैस्थानीय समय देशांतर से तय होता है; इसीलिए प्रश्न 6 में अंतर लगभग शून्य है15, 19
समय क्षेत्रों की रेखाओं को बिलकुल सीधी याम्योत्तर माननाये पूर्णतया सीधी नहीं होतीं; देशों की सीमाओं के साथ चलती हैं20
हर देश में एक ही मानक समय माननासंयुक्त राज्य अमेरिका में 6 और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं21
तिथि रेखा पर दिन जोड़ना और घटाना उलट देनापूर्व की ओर यात्रा करते हुए पार: एक दिन घटाइए (सोमवार से रविवार); पश्चिम की ओर यात्रा करते हुए पार: एक दिन जोड़िए (रविवार से सोमवार)21–22
ग्रिनिच याम्योत्तर को पहली प्रमुख याम्योत्तर माननाभारत की मध्य रेखा, जो उज्जयिनी से गुजरती थी, यूरोप से अनेक शताब्दियों पहले की है16
चित्र 1.5 में दिल्ली, मुंबई जैसे आज के शहरों को पुराने शहरों के नए नाम समझनाजोड़े ये हैं: रोहितक-रोहतक, मालवंगरा-नगर, उज्जयिनी-उज्जैन, माहिष्मति-महेश्वर, कुमारी-कन्या कुमारी (कुरूक्षेत्र का एक ही नाम दिया है); दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई अलग से दिखाए गए आज के शहर हैं17
दिल्ली के 29° उ., 77° पू. को सटीक मान समझनाये पूर्णांक हैं; किताब ख़ुद कहती है कि ये सटीक नहीं हैं15

13. अपने को जाँचिए: किताब के प्रश्न और उत्तर★★

हर उत्तर पहले ख़ुद सोचिए, फिर खोलकर मिलाइए।

प्रश्न 1. इस पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 10 और अध्याय 5 में चित्र 5.2 के संदर्भ में, 2.5 से.मी. = 500 कि.मी. का पैमाना लेते हुए, नर्मदा नदी के मुहाने से गंगा नदी के मुहाने तक की वास्तविक दूरी की गणना कीजिए (संकेत – मानचित्र पर अपनी माप को एक सरल संख्या में पूर्णांकित कीजिए)।

उत्तर देखिए

उत्तर: यह दूरी आपको चित्र 5.2 पर ख़ुद नापकर निकालनी है; किताब संख्या नहीं देती। मुहाना वह स्थान है जहाँ नदी समुद्र में मिलती है। तरीका: (1) अध्याय 5 के चित्र 5.2 में नर्मदा के मुहाने से गंगा के मुहाने तक रूलर से सीधी दूरी सेंटीमीटर में नापिए। (2) संकेत के अनुसार इस माप को सरल संख्या में पूर्णांकित कीजिए। (3) स्केल 2.5 से.मी. = 500 कि.मी. है, यानी 1 से.मी. = 500 ÷ 2.5 = 200 कि.मी.। (4) अपनी माप को 200 से गुणा कीजिए। हमारा उदाहरण (सिर्फ़ तरीका समझाने के लिए, यह नर्मदा और गंगा की माप नहीं है): मानचित्र पर दो जगहों के बीच 5 से.मी. नपे, तो वास्तविक दूरी 5 × 200 = 1000 कि.मी. होगी। उत्तर में अपनी माप, स्केल और हिसाब, तीनों लिखिए।

प्रश्न 2. जब लंदन में दोपहर 12 बजे का समय होता है, तो उसी समय भारत में सायं के 5:30 बजते हैं, क्यों?

उत्तर देखिए

उत्तर: प्रमुख याम्योत्तर इंग्लैंड में लंदन के एक क्षेत्र ग्रिनिच से गुजरती है, इसलिए हम लंदन के दोपहर 12 बजे को ग्रिनिच का समय (जी.एम.टी.) मानकर चल रहे हैं (यह मान्यता हमारी है; प्रश्न इसे अलग से नहीं कहता)। भारत ग्रिनिच के पूर्व में है; उसका देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. तक है। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, और प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व की ओर हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा बढ़ता है। पूरा भारत एक मानक समय, भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.), मानता है, जो जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। इसलिए जब लंदन में दोपहर 12 बजते हैं, तब भारत में 12 + 5:30 = सायं 5:30 बजते हैं।

प्रश्न 3. हमें मानचित्र में प्रतीक चिह्नों और रंगों की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: प्रतीक चिह्न: किसी बड़े नगर या देश के मानचित्र पर हर भवन, सड़क या पेड़ का चित्र बनाने की जगह नहीं होती। छोटे प्रतीक चिह्नों से मानचित्र के सीमित स्थान में अनेक विवरण दिखाए जा सकते हैं। तय चिह्न होने से अलग-अलग लोग मानचित्र आसानी से समझ लेते हैं; भारत के मानचित्रों के लिए ये चिह्न भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तय किए हैं। रंग: किताब रंगों का कारण शब्दों में नहीं लिखती, पर उसके चित्र दिखाते हैं कि रंग चीज़ों को एक नज़र में अलग पहचानने में मदद करते हैं (यह निष्कर्ष हमारा है)। चित्र 1.2 में नदी और तालाब नीले, वृक्ष हरे और बस्तियाँ लाल हैं; चित्र 1.1 में नीला रंग झील दिखाता है; चित्र 1.7 में हर रंग 15° का एक क्षेत्र है।

प्रश्न 4. आपके घर या विद्यालय की आठ दिशाओं में क्या-क्या स्थित है? पता लगाइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: यह आपकी अपनी खोज है, इसलिए हर विद्यार्थी का उत्तर अलग होगा। तरीका: (1) घर या विद्यालय के बीच खड़े होकर उत्तर दिशा पहचानिए; इस पर अपने शिक्षक और माता-पिता से चर्चा कीजिए, जैसा पृष्ठ 10 की गतिविधि भी कहती है। (2) कागज़ पर ऊपर उत्तर लिखिए, फिर घड़ी के काँटे की दिशा में पूर्व, दक्षिण और पश्चिम; इनके बीच चार मध्यवर्ती दिशाएँ, उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम। (3) हर दिशा में जो दिखे, वह उसके आगे लिखिए और ऊपर ‘उ.’ वाला तीर बनाइए। हमारा उदाहरण (किसी एक विद्यालय का; आपका अलग होगा): उत्तर में खेल का मैदान, उत्तर-पूर्व में पानी की टंकी, पूर्व में मुख्य सड़क, दक्षिण-पूर्व में दुकानें, दक्षिण में पंचायत भवन, दक्षिण-पश्चिम में खेत, पश्चिम में आँगनबाड़ी और उत्तर-पश्चिम में मंदिर।

प्रश्न 5. स्थानीय समय और मानक समय के बीच क्या अंतर है? समूहों में चर्चा कीजिए और फिर प्रत्येक समूह 100–150 शब्दों तक का एक उत्तर लिखे। उत्तरों की तुलना कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: (हमारा नमूना उत्तर; अपने समूह का उत्तर लिखकर इससे मिलाइए।) पृथ्वी अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक चक्कर, यानी 360°, घूमती है; इसलिए हर घंटे 15°। किसी जगह का समय उसके देशांतर से मापा जाता है, इसलिए हर याम्योत्तर का अपना समय होता है। यही उस जगह का स्थानीय समय है। प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व की ओर हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा बढ़ता है और पश्चिम की ओर एक घंटा घटता है। जैसे पोरबंदर और तिनसुकिया के देशांतर में 30° का अंतर है, तो उनके स्थानीय समय में 2 घंटे का अंतर होगा। अगर देश का हर शहर अपना स्थानीय समय माने, तो एक देश में अनेक समय चलेंगे, जो उचित नहीं। इसलिए अधिकतर देश अपने मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर का समय पूरे देश के लिए अपनाते हैं। इसे मानक समय कहते हैं। भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.) जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

प्रश्न 6. दिल्ली और बेंगलुरु के अक्षांश क्रमशः 29° उ. और 13° उ. हैं और उनका देशांतर लगभग 77° पू. एक ही है। दोनों नगरों के बीच स्थानीय समय में कितना अंतर होगा?

उत्तर देखिए

उत्तर: लगभग कोई अंतर नहीं, यानी शून्य। स्थानीय समय देशांतर से तय होता है: प्रमुख याम्योत्तर से हर 15° पर एक घंटे का अंतर आता है। दिल्ली और बेंगलुरु का देशांतर लगभग एक ही, 77° पू. है, इसलिए दोनों का स्थानीय समय लगभग एक जैसा होगा। दोनों के अक्षांश अलग हैं (29° उ. और 13° उ.), यानी दिल्ली भूमध्य रेखा से ज़्यादा दूर, उत्तर में है; पर अक्षांश के अंतर से स्थानीय समय नहीं बदलता।

प्रश्न 7. निम्नलिखित कथनों पर सही या गलत का चिह्न लगाइए और इसे एक या दो वाक्यों में समझाइए।

  1. अक्षांशों के सभी समानांतरों की लंबाई समान होती है।
  2. देशांतर के एक याम्योत्तर की लंबाई भूमध्य रेखा की आधी होती है।
  3. दक्षिण ध्रुव का अक्षांश 90° द. है।
  4. असम में स्थानीय समय और आई.एस.टी. (भारतीय मानक समय) एक ही है।
  5. समय क्षेत्र को पृथक करने वाली रेखाएँ देशांतर के याम्योत्तर के समान होती हैं।
  6. भूमध्य रेखा एक अक्षांश वृत्त भी है।

(कथनों के नंबर हमने दिए हैं।)

उत्तर देखिए

उत्तर: (1) ग़लत: भूमध्य रेखा अक्षांश का सबसे बड़ा वृत्त है; उत्तर या दक्षिण की ओर बढ़ने पर अक्षांश के वृत्त छोटे होते जाते हैं। (2) सही: याम्योत्तर एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाने वाला अर्धवृत्त है, यानी गोल पृथ्वी का आधा चक्कर, जबकि भूमध्य रेखा पूरा चक्कर है; यहाँ पृथ्वी को गोलाकार माना गया है। (3) सही: दोनों ध्रुवों के अक्षांश 90° उ. और 90° द. हैं। (4) ग़लत: किसी जगह का स्थानीय समय उसके अपने देशांतर से तय होता है, जबकि अधिकतर देश अपने मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय अपनाते हैं। पृष्ठ 20 की गतिविधि में तिनसुकिया (असम) में पोरबंदर से पहले अंधेरा हो जाता है, यानी असम बहुत पूर्व में है। इसलिए असम का स्थानीय समय आई.एस.टी. से अलग, आगे होगा (यह निष्कर्ष हमारा है; किताब असम के लिए इसे सीधे नहीं लिखती)। (5) ग़लत: समय क्षेत्रों को बाँटने वाली रेखाएँ मोटे तौर पर 15° के क्षेत्रों के साथ चलती हैं, पर याम्योत्तरों की तरह पूर्णतया सीधी नहीं होतीं; वे अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ चलती हैं। (6) सही: भूमध्य रेखा 0° अक्षांश है और अक्षांश का सबसे बड़ा वृत्त भी।

प्रश्न 8. नीचे दी गई वर्ग पहेली को हल कीजिए।

123456789101112
वर्ग पहेली: हर सफ़ेद खाने में एक अक्षरकिताब के पृष्ठ 24 की वर्ग पहेली के आधार पर हमारा बनाया चित्र

किताब के संकेत (पृष्ठ 25), बाएँ से दाएँ:

  • 1. वह समय जिसका हम भारत में अनुसरण करते हैं।
  • 3. मानचित्र में एक वृहद क्षेत्र को लघु रूप में दिखाना
  • 5. एक सुविधाजनक गोलाकार वस्तु
  • 7. ये दोनों मिलकर किसी स्थान का पता लगाने में सहायक होते हैं।
  • 9. भूमध्य रेखा से दूरी की एक माप
  • 11. एक रेखा के लिए शब्द-संक्षेप जिसके आर-पार दिन और तिथि में परिवर्तन होता है।

ऊपर से नीचे:

  • 2. मार्ग को खोजने का सरल साधन
  • 4. जो अक्षांश और देशांतर मिलकर बनाते हैं।
  • 6. जो विश्व के शीर्ष पर है।
  • 8. वह स्थान जहाँ से प्रमुख याम्योत्तर गुजरती है।
  • 10. प्रमुख याम्योत्तर से दूरी की एक माप
  • 12. सबसे लंबी समानांतर अक्षांश रेखा
उत्तर देखिए

उत्तर: बाएँ से दाएँ: 1. भारतीय मानक समय · 3. स्केल · 5. ग्लोब · 7. निर्देशांक · 9. अक्षांश · 11. अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा। ऊपर से नीचे: 2. मानचित्र · 4. ग्रिड · 6. ध्रुव, यानी उत्तर ध्रुव · 8. ग्रिनिच · 10. देशांतर · 12. भूमध्य रेखा। जाँचने का हमारा तरीका: हर खाने में एक अक्षर, उसकी मात्रा या संयुक्ताक्षर समेत, जैसे भा-र-ती-य-मा-न-क-स-म-य के दस खाने। कटते खाने भी मिलने चाहिए: 1 और 2 में मा, 7 और 8 में नि, 7 और 10 में शां, 11 और 12 में खा।

भारतीयमानकसमयनस्केलचिग्रिध्रुत्रडवग्रिदेनिर्देशांकग्लोबभूचतमरअक्षांशध्यरेअंतर्राष्ट्रीयतिथिरेखा
वर्ग पहेली का हल: हर खाने में एक अक्षरहल हमारा; खाने किताब के पृष्ठ 24 की वर्ग पहेली जैसे

किताब की गतिविधियाँ

गतिविधियाँ यहाँ छोटी करके, हमारे शब्दों में लिखी हैं; पूरी बात किताब के उसी पृष्ठ पर पढ़िए।

उत्तरदक्षिणपूर्वपश्चिमरेलवे स्टेशनझीलआवासीय भवनचिकित्सालयनगर पंचायतबैंकसार्वजनिकउद्यानविद्यालयबाजारसंग्रहालय
चित्र 1.1 — एक काल्पनिक लघु नगर का मानचित्रकिताब के पृष्ठ 8 के चित्र 1.1 के आधार पर हमारा बनाया चित्र

गतिविधि (पृष्ठ 9). चित्र 1.1 (लघु नगर का मानचित्र) में चिकित्सालय को अंकित कीजिए। नीले रंग से दिखाए गए क्षेत्र क्या दर्शा रहे हैं? विद्यालय, नगर पंचायत या सार्वजनिक उद्यान में से रेलवे स्टेशन से कौन-सा स्थान सबसे अधिक दूरी पर है?

उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): चिकित्सालय नगर के लगभग बीच में है; उस पर गोला लगाइए। नीले क्षेत्र पानी हैं: स्टेशन के पास की झील और ऊपर से उसमें आती धारा। रेलवे स्टेशन पश्चिम में है; विद्यालय उसके ठीक दक्षिण में पास ही है, नगर पंचायत बीच से थोड़ा पूर्व में, और सार्वजनिक उद्यान पूर्वी छोर पर, स्टेशन से सबसे दूर। इसलिए उत्तर है: सार्वजनिक उद्यान।

गतिविधि (पृष्ठ 10). चित्र 1.1 देखकर बताइए कि ये कथन सही हैं या गलत:

  1. 1बाजार, चिकित्सालय के उत्तर में है।
  2. 2संग्रहालय, बैंक के दक्षिण-पूर्व में है।
  3. 3रेलवे स्टेशन, चिकित्सालय के उत्तर-पश्चिम में है।
  4. 4झील, आवासीय भवन के उत्तर-पश्चिम में है।
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): चित्र 1.1 में उत्तर ऊपर है। हर कथन में दूसरी जगह पर खड़े होकर पहली जगह की ओर देखिए; जैसे (1) में चिकित्सालय से बाजार की ओर। (1) ग़लत: बाजार चिकित्सालय से नीचे, यानी दक्षिण में है (थोड़ा पूर्व की ओर)। (2) लगभग सही: संग्रहालय बैंक से नीचे और ज़रा-सा दाईं ओर है, यानी दक्षिण में, थोड़ा पूर्व की ओर। (3) लगभग सही: स्टेशन चिकित्सालय से बाईं ओर और कुछ ऊपर है, यानी उत्तर-पश्चिम की ओर। (4) ग़लत: झील आवासीय भवनों से बाईं ओर और कुछ नीचे है, यानी दक्षिण-पश्चिम की ओर। चित्र में जगहें ठीक आठ दिशाओं की रेखाओं पर नहीं बनी हैं, इसलिए (2) और (3) पर कक्षा में बात कीजिए: कोई जगह कब “दक्षिण” कहलाएगी और कब “दक्षिण-पूर्व”?

गतिविधि (पृष्ठ 10). विद्यालय के खेल-मैदान का मानचित्र बनाइए: 40 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा आयताकार क्षेत्र, 1 सेंटीमीटर = 10 मीटर के स्केल पर। फिर विकर्ण नापिए और उसकी वास्तविक लंबाई मीटर में निकालिए।

उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): 40 ÷ 10 = 4 से.मी. लंबा और 30 ÷ 10 = 3 से.मी. चौड़ा आयत बनेगा। ठीक खींचने पर विकर्ण 5 से.मी. नपेगा। वास्तविक लंबाई: 5 × 10 = 50 मीटर।

गतिविधि (पृष्ठ 13). अगर आपको काले पक्ष की ओर से खेलना हो और उसी तरीके से जवाब देना हो, तो इन्हीं नियमों से अपनी चाल लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): कई सही उत्तर हो सकते हैं। एक उदाहरण: प्यादा घ 7 से घ 5। पृष्ठ 12 के चित्र में काले मोहरे ऊपर की पंक्तियों 7 और 8 में हैं, इसलिए काला प्यादा 7 से नीचे की ओर चलता है।

गतिविधि (पृष्ठ 16). ग्लोब या एटलस में देखकर मुंबई, कोलकाता, सिंगापुर और पेरिस के अक्षांश और देशांतर लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): इनके मान अपने एटलस से पढ़िए; किताब ये मान नहीं देती। तरीका: शहर के सबसे पास की अक्षांश रेखा पढ़िए और भूमध्य रेखा के उत्तर में हो तो उ., दक्षिण में हो तो द. लिखिए। फिर सबसे पास की देशांतर रेखा पढ़िए और ग्रिनिच के पूर्व में हो तो पू., पश्चिम में हो तो प. लिखिए। पूर्णांक में लिखिए, जैसे किताब ने दिल्ली के लिए 29° उ., 77° पू. लिखा।

गतिविधि (पृष्ठ 20). पोरबंदर (गुजरात) और तिनसुकिया (असम) के दो मित्रों के उदाहरण में, ढलती दोपहर में तिनसुकिया में अंधेरा हो चुका है, पर पोरबंदर में अभी उजाला है। ऐसा क्यों है? दोनों शहरों के स्थानीय समय का अंतर निकालिए (दोनों के देशांतर में 30° का अंतर है)।

उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए पूर्व की जगहों में सूरज पहले डूबता है। तिनसुकिया में पहले अंधेरा हुआ, यानी वह पूर्व की ओर है। अंतर: 30° ÷ 15° = 2 घंटे; तिनसुकिया का स्थानीय समय पोरबंदर से 2 घंटे आगे है।

गतिविधि (पृष्ठ 20). गुजरात और असम के वही दो मित्र: इस उदाहरण से स्थानीय समय और मानक समय का अंतर समझाइए।

उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): स्थानीय समय के हिसाब से तिनसुकिया पोरबंदर से 2 घंटे आगे है। पर दोनों शहर भारतीय मानक समय मानते हैं, इसलिए दोनों मित्रों की घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं। घड़ी में एक ही समय होने पर भी तिनसुकिया में अंधेरा हो चुका है और पोरबंदर में अभी उजाला है। यही स्थानीय समय (देशांतर के हिसाब से) और मानक समय (पूरे देश के लिए एक) का अंतर है।

झटपट दोहराइए

1. मानचित्र के तीन मुख्य घटक कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।

2. भारत के मानचित्रों के प्रतीक चिह्न किसने तय किए हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: सरकारी निकाय भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने।

3. पृथ्वी का आकार कैसा है?

उत्तर देखिए

उत्तर: लगभग गोलाकार, ध्रुवों पर थोड़ी चपटी।

4. अक्षांश का सबसे बड़ा वृत्त कौन-सा है, और उसका अक्षांश कितना है?

उत्तर देखिए

उत्तर: भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त); 0°।

5. प्रमुख याम्योत्तर कहाँ से गुजरती है, और इसे कब तय किया गया?

उत्तर देखिए

उत्तर: इंग्लैंड में लंदन के क्षेत्र ग्रिनिच से; वर्ष 1884 में।

6. 180° प. और 180° पू. में क्या अंतर है?

उत्तर देखिए

उत्तर: कोई नहीं; दोनों एक ही देशांतर हैं, इसलिए सिर्फ़ 180° लिखते हैं।

7. भारत की पुरानी प्रमुख याम्योत्तर को क्या कहते थे, और यह कहाँ से गुजरती थी?

उत्तर देखिए

उत्तर: मध्य रेखा; यह उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) से गुजरती थी।

8. ग्रिनिच पर दोपहर 12 बजे हों, तो 30° पू. और 30° प. पर कितने बजे होंगे?

उत्तर देखिए

उत्तर: 30° पू. पर दोपहर 2 बजे, 30° प. पर सुबह 10 बजे।

9. भारतीय मानक समय जी.एम.टी. से कितना आगे है?

उत्तर देखिए

उत्तर: 5 घंटे 30 मिनट।

10. पश्चिम की ओर यात्रा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पार करें, तो तिथि में क्या करेंगे?

उत्तर देखिए

उत्तर: एक दिन जोड़ेंगे, जैसे रविवार से सोमवार।