मास्टर शिक्षण नोट्स — कक्षा 6, सामाजिक विज्ञान
स्रोत: NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे — भाग 1, कक्षा 6। अध्याय 11, पृष्ठ 163–172 (विषय-सूत्र: शासन और लोकतंत्र)। PDF:
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0. यह अध्याय किस बारे में है
यह अध्याय 10 का सीधा अगला भाग है — शीर्षक तक में ‘भाग 2’ लिखा है।
अध्याय 10 ने एक पिरामिड दिखाया था (चित्र 10.4) — केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकार — और कहा था कि स्थानीय सरकार उसका आधार है, तथा “आगे के दो अध्यायों में इसे विस्तार से समझेंगे।”
यह अध्याय उसी आधार को खोलता है — और केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए।
पुस्तक अपना पहला ही वाक्य इसी घोषणा से शुरू करती है (पृ. 163): “आइए, अब देखें कि सरकार स्थानीय स्तर पर किस प्रकार से कार्य करती है। इस अध्याय में हमारा ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय सरकार पर होगा। अगले अध्याय में हम नगरीय क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे।”
अध्याय की रीढ़ — एक और पिरामिड, और उसके तीन स्तर★★
पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों पर काम करती है, और पुस्तक उसे भी एक पिरामिड से दिखाती है (चित्र 11.1, पृ. 164):
| स्तर | संस्था का नाम (पुस्तक के अनुसार) |
|---|---|
| जिला स्तर | जिला पंचायत / जिला परिषद |
| खंड स्तर | खंड पंचायत / पंचायत समिति / मंडल परिषद |
| ग्राम स्तर | ग्राम परिषद / ग्राम पंचायत |
यह ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली कहलाती है (पृ. 165) — और यह शब्द याद कराने योग्य है। पुस्तक कहती है कि यह “निम्न से उच्च स्तर तक” कार्य करती है।
!! और यहीं इस अध्याय का सबसे बड़ा जाल है
अध्याय 10 में भी एक पिरामिड था, और उसमें भी तीन स्तर थे। अध्याय 11 में भी एक पिरामिड है, और उसमें भी तीन स्तर हैं।
पर वे दो अलग-अलग चीज़ें हैं —
चित्र 10.4 चित्र 11.1 किसके स्तर पूरी सरकार के केवल पंचायती राज के तीन स्तर केंद्र · राज्य · स्थानीय जिला · खंड · ग्राम आपस में संबंध — चित्र 11.1 का पूरा पिरामिड, चित्र 10.4 के पिरामिड का सबसे नीचे वाला हिस्सा है ★यही वाक्य कक्षा में बोर्ड पर लिखिए: “पिछला पिरामिड पूरे देश का था। यह पिरामिड उसके सबसे नीचे वाले हिस्से का है।”
! यह भेद न बनाने पर बच्चा परीक्षा में लिखता है — “पंचायती राज के तीन स्तर हैं: केंद्र, राज्य और स्थानीय।” यह इस अध्याय की सबसे आम भूल है।
1. आवरण पृष्ठ (पृ. 163)
उद्धरण
“असली भारत, गाँवों में बसता है।” — मोहनदास करमचंद गाँधी
★यह उद्धरण पूरे अध्याय की भूमिका है, और उसका कारण अगला ही अनुच्छेद देता है — भारत की दो-तिहाई जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।
! ध्यान दीजिए कि पुस्तक ने ‘महात्मा’ नहीं, पूरा नाम — ‘मोहनदास करमचंद गाँधी’ — दिया है।
तीन महत्वपूर्ण प्रश्न(पृ. 163)
- पंचायती राज संस्थाएँ क्या हैं?
- उनके क्या कार्य हैं?
- शासन और लोकतंत्र में ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
★ये तीनों प्रश्न ठीक उसी क्रम में उत्तर पाते हैं — पहला पृ. 164 पर, दूसरा पृ. 165–169 पर, और तीसरा पृ. 171 के ‘आगे बढ़ने से पहले’ में।
भारत के आँकड़े — याद कराने योग्य★★
| क्या | कितना |
|---|---|
| गाँव | लगभग 6,00,000 |
| कस्बे | 8,000 |
| नगर | 4,000 से अधिक |
| जनसंख्या | लगभग 1.4 अरब पार |
| ★ग्रामीण क्षेत्रों में | दो-तिहाई भाग |
और फिर पुस्तक का प्रश्न, जो पूरे अध्याय का द्वार है:
“इस प्रकार की विविधता वाले समाज में हम अपना शासन किस प्रकार चलाते हैं?”
! सत्यापन: ‘8,000 कस्बे’ और ‘4,000 से अधिक नगर’ — ये दोनों आँकड़े जोड़े नहीं जाते। विवरण
10-Verification-Log.mdमें है। कक्षा में इन्हें जोड़ने को मत कहिए।
आवरण-चित्र
पृष्ठ के निचले आधे भाग में एक चित्र है — पहाड़ियों की ढलानों पर बसा एक गाँव, हरे-भरे खेत, रंगीन छतों वाले घर, चरती हुई गायें, और दूर बर्फ़ से ढकी चोटियाँ। यह चित्र अगले पृष्ठ की ‘लक्ष्मणपुर’ वाली कहानी की भूमिका है।
2. लक्ष्मणपुर — एक काल्पनिक गाँव (पृ. 164)★
पुस्तक एक गाँव में ले जाती है, और यह तरीक़ा अध्याय 9 की शालिनी और तेनजिंग वाली कहानियों जैसा ही है।
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | हिमालय की तराई में बसा एक छोटा-सा गाँव |
| घर | 200 |
| जनसंख्या | लगभग 700 |
| अधिकांश लोग | कृषक (किसान) — अपनी भूमि पर खेती, और गाय या बकरियाँ पालते हैं |
| कुछ संबंधी | सेना में सेवाएँ दे रहे हैं |
| कुछ युवा | आजीविका की खोज में नगर चले गए हैं |
गाँव की आवश्यकताएँ — पुस्तक की अपनी सूची★★
“इस गाँव की आवश्यकताएँ क्या हैं — संभवत: खेतों के लिए पानी, भारी वर्षा से खराब हुई मुख्य सड़क का रख-रखाव और गाँव के प्राथमिक विद्यालय का रख-रखाव।”
और फिर चार प्रश्न, एक के बाद एक —
- “दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाली ऐसी स्थितियों पर गाँव के लोग किस प्रकार निर्णय लेंगे?”
- “उन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधन कहाँ से जुटाएँगे?”
- “यदि किसी भूमि को लेकर विवाद है अथवा किसी की कृषि उपज चोरी हो गई है, तो क्या होगा?”
- ★और निर्णायक प्रश्न: “क्या ऐसी प्रत्येक समस्याओं के लिए गाँव के लोग राज्य या राष्ट्र की राजधानी जा सकते हैं?”
★यह चौथा प्रश्न ही पूरे अध्याय का उत्तर माँगता है
उत्तर स्पष्ट है — नहीं जा सकते। और इसीलिए स्थानीय सरकार चाहिए।
कक्षा में यही प्रश्न पूछिए और उत्तर आने दीजिए। फिर ‘पंचायत’ शब्द दीजिए, पहले नहीं।
★और यह अध्याय 10 की बल्ब वाली उपमा से सीधा जुड़ता है — ऊपर का स्तर तभी आता है जब नीचे का स्तर सँभाल न सके। यहाँ पुस्तक वही बात उलटी तरफ़ से पूछ रही है।
3. पंचायती राज व्यवस्था (पृ. 164)★★
पुस्तक की परिभाषाएँ — तीनों महत्वपूर्ण
“भारत के प्रत्येक गाँव की भाँति लक्ष्मणपुर के लोगों के पास भी ‘पंचायत’ नामक स्थानीय शासन व्यवस्था है, जिसे एक ग्रामीण परिषद कह सकते हैं।”
“पंचायत, शासन को लोगों के समीप लाती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी संभव बनाती है।”
★★“यही कारण है कि पंचायती व्यवस्था, जिसे पंचायती राज के नाम से भी जाना जाता है, स्व-शासन का एक रूप है।”
‘स्व-शासन’ — इस अध्याय का केंद्रीय शब्द★
यह शब्द अध्याय 10 की ‘आधारभूत लोकतंत्र’ वाली परिभाषा का ही दूसरा नाम है।
अध्याय 10, पृ. 160: ”…जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है… नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।”
अध्याय 11, पृ. 164: ”…निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी संभव बनाती है… स्व-शासन का एक रूप है।”
★यह जोड़ कक्षा में अवश्य बनाइए। यह दिखाता है कि अध्याय 11 अध्याय 10 का वादा पूरा कर रहा है।
पंचायत की तीन भूमिकाएँ — पुस्तक के अपने शब्दों में
“स्थानीय समस्याओं को हल करने, विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और सरकारी योजनाओं के लाभ को जनसाधारण तक पहुँचाने में पंचायत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”
★ये तीन भूमिकाएँ अलग-अलग लिखवाइए। परीक्षा में यही पूछा जाता है, और बच्चे प्राय: केवल पहली लिखते हैं।
चित्र 11.1 — पिरामिड (पृ. 164)
तीन परतों का पिरामिड, जिसमें बाईं ओर स्तर और दाईं ओर संस्थाओं के नाम हैं —
| परत | बाईं ओर | दाईं ओर | रंग |
|---|---|---|---|
| ऊपर | जिला स्तर | जिला पंचायत / जिला परिषद | नीला-हरा |
| बीच | खंड स्तर | खंड पंचायत / पंचायत समिति / मंडल परिषद | नारंगी |
| नीचे | ग्राम स्तर | ग्राम परिषद / ग्राम पंचायत | हरा |
! ध्यान दीजिए — हर स्तर के दो या तीन नाम हैं। इसका कारण पुस्तक आगे पृष्ठ 170 पर देती है: ”…पूरे देश के विभिन्न राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं के गठन और कार्यों में विविधताएँ हो सकती हैं।”
★कक्षा में इसे इस तरह कहिए: “एक ही चीज़, अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम।” यह अध्याय 8 की ‘तेरह नाम, एक त्योहार’ वाली बात से भी जुड़ जाता है।
4. ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली और उसके कार्य (पृ. 165)★
“जैसा कि चित्र से स्पष्ट है कि पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों — ग्राम, खंड और जिला स्तर — पर निम्न से उच्च स्तर तक कार्य करती है। यह ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली कहलाती है।”
ये संस्थाएँ क्या-क्या करती हैं — पुस्तक की पूरी सूची★★
“ये संस्थाएँ एक साथ मिलकर कृषि, आवास, सड़कों का रख-रखाव, जल संसाधनों का प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से लेकर सांस्कृतिक गतिविधियों तक जीवन के सभी पक्षों से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करती हैं।”
| # | कार्य |
|---|---|
| 1 | कृषि |
| 2 | आवास |
| 3 | सड़कों का रख-रखाव |
| 4 | जल संसाधनों का प्रबंधन |
| 5 | शिक्षा |
| 6 | स्वास्थ्य |
| 7 | सामाजिक कल्याण |
| 8 | सांस्कृतिक गतिविधियाँ |
★यह सूची लक्ष्मणपुर वाली आवश्यकताओं से मिलाइए — खेतों के लिए पानी → जल संसाधन; मुख्य सड़क → सड़कों का रख-रखाव; प्राथमिक विद्यालय → शिक्षा। पुस्तक ने प्रश्न पहले पूछे और उत्तर एक पृष्ठ बाद दिए। यह जोड़ कक्षा में बनवाइए।
5. ग्राम पंचायत — और इस अध्याय का सबसे बड़ा भेद (पृ. 165)★★
“ग्राम पंचायत, जो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सबसे निकट है, के सदस्य ग्राम सभा द्वारा सीधे चुने जाते हैं, जो कि मतदाता के रूप में नामांकित गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वयस्कों का समूह होता है।”
“ग्राम सभा में स्त्री एवं पुरुष अपने क्षेत्र से जुड़े सभी मामलों पर विचार-विमर्श करते हैं और निर्णय लेते हैं।”
“प्रत्येक ग्राम पंचायत, एक प्रमुख या अध्यक्ष जिसे ‘सरपंच’ या ‘प्रधान’ कहा जाता है, का चयन करती है।”
“गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं।”
★★★ग्राम सभा और ग्राम पंचायत — यही इस अध्याय का सबसे ज़रूरी भेद है
ग्राम सभा ग्राम पंचायत कौन है गाँव के सभी वयस्क मतदाताओं का समूह चुने हुए सदस्यों की परिषद कैसे बनती है कोई चुनाव नहीं — मतदाता होना ही सदस्यता है ग्राम सभा उसे चुनती है कौन बड़ा है ग्राम सभा — वह चुनती है पंचायत — वह चुनी जाती है प्रमुख — सरपंच या प्रधान ★एक वाक्य में: ग्राम सभा चुनती है; ग्राम पंचायत चुनी जाती है।
! बच्चे लगभग हमेशा दोनों को एक समझ लेते हैं। यह तालिका बोर्ड पर बनवाइए।
★और यह अध्याय 10 से भी जुड़ता है: ग्राम सभा में हर वयस्क स्वयं निर्णय में भाग लेता है — यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र है। ग्राम पंचायत चुने हुए प्रतिनिधियों से बनती है — यह प्रतिनिधि लोकतंत्र है। दोनों एक ही गाँव में, एक साथ काम कर रहे हैं। यह बहुत सुंदर बिंदु है और पुस्तक इसे पृष्ठ 171 पर स्वयं कह देती है।
चित्र (पृ. 165)
एक ग्राम सभा की बैठक — बरामदे में कुर्सियों पर पाँच लोग बैठे हैं (जिनमें दो महिलाएँ हैं), और उनके सामने ज़मीन पर बहुत से गाँववाले बैठे हैं — पुरुष, महिलाएँ और बच्चे।
★यह चित्र दिखाकर पूछिए: “कुर्सी पर कौन बैठे हैं और ज़मीन पर कौन?” — और फिर बताइए कि ज़मीन पर बैठे सब लोग मिलकर ग्राम सभा हैं।
6. आदर्श सरपंच — तीन उदाहरण (पृ. 166)★
यह पूरा पृष्ठ तीन चित्रों और तीन कहानियों का है।
(क) दयानेश्वर कांबले — महाराष्ट्र
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कब | 2017 |
| कहाँ | महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का तरंगफल गाँव |
| कौन | किन्नर समुदाय से |
| आदर्श वाक्य | ‘लोक सेवा, ग्राम सेवा’ — “यानी गाँव की सेवा, जनता की सेवा है” |
| ★चुनाव | छह अन्य उम्मीदवारों को हराया |
(ख) वंदना बहादुर मैदा — मध्य प्रदेश
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | मध्य प्रदेश का खानखांडवी गाँव |
| समुदाय | भील |
| क्या किया | पितृसत्तात्मक मान्यताओं के विरुद्ध जाकर गाँव की पहली महिला सरपंच बनीं |
| फिर | गाँव की महिलाओं को सभा की बैठकों में आने के लिए प्रेरित किया |
| कौन-से मुद्दे उठाए | शिक्षा एवं स्वच्छता |
| परिणाम | “दूर-दूर तक व्यापक रूप से पहचान मिली” |
पुस्तक का अपना निष्कर्ष: “वंदना की यह यात्रा दर्शाती है कि किस प्रकार महिलाएँ ग्रामीण भारत को बदलने में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकती हैं।”
(ग) पोपटराव बागुजी पवार — महाराष्ट्र
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का गाँव हिवरे बाजार |
| समस्या | बार-बार सूखा और कम कृषि उपज |
| क्या किया | अन्ना हजारे के वर्षा जल-संचयन, जल-संरक्षण और लाखों पेड़ लगाने के मॉडल को लागू करना शुरू किया |
| कैसे | उनके प्रयास और ग्रामवासियों के सहयोग से |
| परिणाम | “कुछ ही वर्षों में हरा-भरा और समृद्ध गाँव बन गया” |
| सम्मान | 2020 में पद्मश्री |
★अध्याय 9 से जोड़ बनाइए: वहाँ हलमा था — भील समुदाय, झाबुआ, बिना पारिश्रमिक जल-संचयन। यहाँ हिवरे बाजार है — वही काम, अलग राज्य, अलग तरीक़ा। और दोनों में पद्मश्री मिला — 2019 में महेश शर्मा को, 2020 में पोपटराव पवार को।
★तीनों कहानियों में एक साझा बात है — इसे कक्षा से निकलवाइए
तीनों सरपंच किसी न किसी रूप में ‘बाहर’ से आए — एक किन्नर समुदाय से, एक जनजातीय समुदाय की महिला, और एक ऐसे सूखाग्रस्त गाँव से जहाँ कुछ भी नहीं था।
पुस्तक ने यह निष्कर्ष नहीं लिखा। पर तीनों उदाहरण एक साथ रखकर उसने वह कह दिया है। कक्षा में पूछिए: “इन तीनों में क्या समान है?”
! सत्यापन: तीनों कहानियों की स्वतंत्र जाँच
10-Verification-Log.mdमें है। तीनों पुष्ट निकलीं, कुछ छोटे विवरणों के साथ जो कक्षा में उठाने योग्य नहीं हैं।
7. पंचायत सचिव और पटवारी (पृ. 167)
“ग्राम पंचायत की सहायता के लिए एक पंचायत सचिव होता है, जो बैठकों के आयोजन और अभिलेखों के रख-रखाव जैसे प्रशासनिक कार्य करता है।”
“अधिकांश ग्राम पंचायतों में एक प्रशासनिक अधिकारी भी होता है जिसे भारत के कई भागों में ‘पटवारी’ कहा जाता है। पटवारी गाँव के भू-अभिलेखों का रख-रखाव करता है। कई जगह तो उसके पास पीढ़ियों पुराने मानचित्र भी रखे होते हैं।”
| पंचायत सचिव | पटवारी | |
|---|---|---|
| क्या करता है | बैठकों का आयोजन और अभिलेखों का रख-रखाव | भू-अभिलेखों का रख-रखाव |
| विशेष | — | कई जगह पीढ़ियों पुराने मानचित्र भी |
! ये दोनों चुने हुए नहीं होते — ये नियुक्त अधिकारी हैं। पुस्तक यह शब्द नहीं देती, पर वह भेद स्पष्ट है: सरपंच चुना जाता है; सचिव और पटवारी नियुक्त होते हैं। ★यह अध्याय 10 के ‘कार्यपालिका’ वाले विचार से जुड़ता है — ये लोग निर्णय लागू करवाते हैं।
आइए विचार करें(पृ. 167)
“क्या आप सोचते हैं कि ये पुराने मानचित्र हमारे किसी काम आ सकते हैं? क्या यह अतीत और वर्तमान के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं?”
चित्र (पृ. 167): एक मेज़ पर बिछा हुआ पुराना मानचित्र, जिसके चारों ओर तीन लोग खड़े होकर उसे देख रहे हैं।
★यह प्रश्न अध्याय 4 से जुड़ता है — इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत। भू-अभिलेख भी एक ऐतिहासिक स्रोत हैं। यह जोड़ बहुत अच्छा लगता है और तीस सेकंड लेता है।
8. बाल हितैषी पंचायत की पहल (पृ. 167–168)★★
यह अध्याय का सबसे रोचक खंड है, और वह पूरी तरह बच्चों के बारे में है।
“पंचायतों को सभी ग्रामवासियों की बात सुननी होती है — जिसमें बच्चे भी सम्मिलित हैं।”
“बाल हितैषी पंचायत की पहल से बच्चों की भलाई से जुड़े मामलों पर स्वयं बच्चों को अपने विचार और राय रखने का अवसर मिलता है।”
अनेक राज्यों में — बाल सभाएँ और बाल पंचायतें, “जहाँ गाँव के बड़े-बुजुर्ग उनकी समस्याओं के समाधान ढूँढ़ने का प्रयास करते हैं।”
उदाहरण 1 — महाराष्ट्र
“महाराष्ट्र में कुछ बाल पंचायतों ने बाल-श्रम और बाल-विवाह को समाप्त करने पर कार्य किया है।” “बाल पंचायत के सदस्य एक साथ मिलकर अभिभावकों और अन्य वयस्कों को समझाते हैं कि अपने बच्चों को पुन: विद्यालय भेजें और बालिकाओं को पढ़ाएँ तथा पढ़ने की आयु में उनका विवाह न करें।”
उदाहरण 2 — सिक्किम
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | पश्चिमी सिक्किम की सांगखू राधू खांडू ग्राम पंचायत |
| क्या किया | विद्यालयों के परिसर की दीवारें बनवाईं |
| और | विद्यालयों में रसोईघर बनवाए, ताकि मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) विद्यालय में ही सफाई से बना मिल सके |
| परिणाम | गाँव को बाल हितैषी ग्राम पंचायत घोषित किया गया |
उदाहरण 3 — राजस्थान की ‘बाल संसद’★
| क्या | विवरण |
|---|---|
| किसने शुरू की | बंकर रॉय ने, कुछ दशक पूर्व |
| किसकी शाखा | ‘बेयरफुट कॉलेज’ की |
| किसके लिए | राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित वर्ग के बच्चे |
| किस उम्र के | 8–14 वर्ष |
| कहाँ | रात्रि विद्यालय |
| कैसे | संसद की तरह के चुनावों के माध्यम से |
| क्या सीखते हैं | शासन की प्रक्रियाओं, लोकतंत्र और सामाजिक दायित्व के बारे में |
| उनकी ‘संसद’ | मतदाता के पहचान-पत्र और प्रचार-प्रसार सहित सभी औपचारिक प्रक्रियाओं का पालन करती है |
| निर्वाचित प्रतिनिधि | ‘मंत्रिमंडल’ का गठन करते हैं |
| वह क्या करता है | विद्यालय प्रबंधन का निरीक्षण और सामुदायिक आवश्यकताओं का समर्थन |
| ★सम्मान | वर्ष 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड सहित कई पुरस्कार |
और पुस्तक का निष्कर्ष —
“ये पहल बच्चों में नेतृत्व के गुण और सामाजिक जागरूकता को विकसित करती है, जिससे बच्चे सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने में समर्थ होते हैं और परिवर्तन की पैरोकारी कर सकते हैं।”
“समाज के विकास के लिए शिक्षा तक पहुँच, स्वच्छता और सामाजिक समानता प्रदान करने के लिए बच्चे सक्रिय रूप से इन समस्याओं को उठाते हैं।”
★★यह खंड कक्षा में क्यों सबसे अच्छा चलता है
क्योंकि यह अकेला खंड है जिसमें पुस्तक बच्चों को विषय नहीं, कर्ता बनाकर दिखाती है।
कक्षा में पूछिए: “अगर हमारी कक्षा एक बाल पंचायत होती, तो हम कौन-सी तीन समस्याएँ उठाते?” और सूची बोर्ड पर लिखिए। यह पृष्ठ 169 की गतिविधि की सीधी तैयारी है।
चित्र (पृ. 168): एक पेड़ के नीचे बच्चों की सभा — एक लड़का खड़ा होकर काग़ज़ पकड़े बोल रहा है, और बाक़ी बच्चे ज़मीन पर बैठे सुन रहे हैं।
आइए पता लगाएँ(पृ. 169)
“कक्षा की गतिविधि के रूप में चार अथवा पाँच विद्यार्थी मिलकर एक बाल पंचायत का गठन करें और कक्षा के शेष विद्यार्थी स्वयं को ग्रामवासी मान लें। यह ग्राम सभा किन विषयों पर विचार-विमर्श करेगी? कौन-सी चुनौतियों का सामना करेगी? यह कौन-से समाधान प्रस्तावित करेगी?”
★यह गतिविधि इस अध्याय का सबसे अच्छा शिक्षण-उपकरण है, और उसे छोड़ना नहीं चाहिए। ध्यान दीजिए कि पुस्तक ने यहाँ ‘ग्राम सभा’ शब्द का प्रयोग किया है — यानी बाक़ी पूरी कक्षा ग्राम सभा है, और चार-पाँच विद्यार्थी पंचायत। यही वह भेद है जो खंड 5 में सिखाया गया था।
9. पंचायत समिति और जिला परिषद (पृ. 169)★
“इसी प्रकार की संस्थाएँ खंड स्तर और जिला स्तर पर भी होती हैं जो कि ग्राम स्तर से ऊपर होती हैं। उनके नाम पृष्ठ 164 पर चित्र 11.1 के पिरामिडीय आरेख में दिए गए हैं।”
पंचायत समिति — एक कड़ी★★
“खंड स्तर पर पंचायत समिति, ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है।”
इसके सदस्य कौन होते हैं
“इन संस्थाओं के सदस्य स्थानीय लोगों द्वारा चुने जाते हैं, परंतु उसमें क्षेत्र के गाँवों के सरपंच और राज्य विधान सभा के स्थानीय सदस्य जैसे अन्य सदस्य भी हो सकते हैं।”
★यह वाक्य बहुत महत्वपूर्ण है और प्राय: छूट जाता है। इसका अर्थ यह है कि पंचायत समिति में तीन तरह के लोग हो सकते हैं — (1) सीधे चुने हुए सदस्य; (2) गाँवों के सरपंच; (3) विधान सभा के स्थानीय सदस्य (यानी विधायक)।
★और यह अध्याय 10 से जुड़ता है — विधायक वहाँ ‘राज्य स्तर का प्रतिनिधि’ था। वह यहाँ भी बैठता है। यानी स्तर आपस में जुड़े हुए हैं, कटे हुए नहीं।
राज्य-दर-राज्य विविधता, पर उद्देश्य एक
“पंचायत समिति का गठन राज्य-दर-राज्य भिन्न होता है, परंतु स्थानीय जनता की भागीदारी मजबूत करने की उनकी भूमिका समान रहती है।”
इसके तीन काम
| # | काम | पुस्तक के शब्द |
|---|---|---|
| 1 | योजनाएँ ऊपर पहुँचाना | “ये सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके उन्हें क्रमश: जिला या राज्य स्तर पर प्रस्तुत करती हैं।” |
| 2 | धनराशि के आवंटन में मदद | ”…विकासात्मक कार्यों और ग्रामीण इलाकों में बारहमासी सड़कों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी सरकारी योजनाओं के लिए धनराशि के आवंटन में मदद करती है।” |
| 3 | कड़ी बनना | ग्राम पंचायत ↔ जिला परिषद |
★‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ इस अध्याय का एकमात्र नामित सरकारी कार्यक्रम है — और वह लक्ष्मणपुर की ‘भारी वर्षा से खराब हुई मुख्य सड़क’ से सीधा जुड़ता है। यह जोड़ बनाइए। यह पूरा अध्याय एक वृत्त बन जाता है।
आरक्षण — तीनों स्तरों पर★★
“सभी तीनों स्तरों पर विशेष नियम बनाए गए हैं ताकि जनसमुदाय में से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे वंचित वर्ग के लोगों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और उनकी समस्याएँ सुनी जा सकें।”
★“इन संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का भी प्रावधान है।”
! ‘एक-तिहाई’ यह अध्याय का सबसे परीक्षा-योग्य आँकड़ा है। और ध्यान दीजिए कि यह तीनों स्तरों पर लागू है, केवल ग्राम पंचायत पर नहीं।
★और यह पृष्ठ 165 की उस पंक्ति से जुड़ता है — “गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं” — तथा पृष्ठ 166 की वंदना बहादुर मैदा की कहानी से। तीनों को एक साथ पढ़ाइए। अलग-अलग पढ़ाने पर तीनों आधे रह जाते हैं।
आइए विचार करें(पृ. 169)
“आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि सरकार को समाज के वंचित वर्गों की आवश्यकताओं और समस्याओं पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है?”
! यह मत का प्रश्न है और पुस्तक ने इसका उत्तर नहीं दिया। इसे खुला रहने दीजिए।
10. आइए पता लगाएँ (पृ. 170) — और राज्य-दर-राज्य विविधता
दो प्रश्न —
- “आप केंद्र स्तर और पंचायत स्तर पर शासन प्रणाली के बीच क्या विभिन्नताएँ और समानताएँ पाते हैं? (संकेत — यदि आवश्यक हो, तो अध्याय 10 देखें)”
- “यदि आपको पंचायत के कुछ सदस्यों से मिलने का अवसर मिलता है, तो आप उनसे क्या प्रश्न पूछेंगे? छोटे समूहों में चर्चा कीजिए और एक प्रश्नावली तैयार कीजिए। कुछ ग्राम पंचायत सदस्यों से भेंट कीजिए या उन्हें अपने विद्यालय में आमंत्रित कीजिए… और एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।”
★पहला प्रश्न पुस्तक स्वयं अध्याय 10 की ओर भेजता है। यह संकेत छोड़िए मत।
और फिर वह वाक्य जो पूरे अध्याय की सावधानी है —
“हमें यह याद रखना चाहिए कि पूरे देश के विभिन्न राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं के गठन और कार्यों में विविधताएँ हो सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन संस्थानों पर राज्यों का अधिकार है, किंतु उनके लक्ष्य समान हैं — यह ग्रामवासियों को अपने गाँवों और स्थानीय क्षेत्रों में प्रबंधन और विकास के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाती हैं।”
★★यह वाक्य दो काम करता है — (1) यह बताता है कि चित्र 11.1 में हर स्तर के दो-तीन नाम क्यों हैं; (2) और यह अध्याय 10 की तालिका से जुड़ता है, जहाँ ‘स्थानीय सरकार’ राज्य सरकार के कार्यों की सूची में थी।
यानी पंचायतें राज्य के अधिकार क्षेत्र में हैं — और यह बात अध्याय 10 पहले ही कह चुका था।
11. ध्यान रखें — ‘अर्थशास्त्र’ (पृ. 170)★
पुस्तक के इस बॉक्स को एक पुराने, फटे काग़ज़ की तरह छापा गया है।
“शासन पर ‘अर्थशास्त्र’ एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसे लगभग 2300 वर्ष पहले ‘कौटिल्य’ (जिन्हें बाद में ‘चाणक्य’ नाम से भी जाना गया) ने लिखा था।”
ग्रंथ में क्या है —
”…राज्य के गठन, संचालन, अर्थव्यवस्था कैसे समृद्ध हो सकती है, शासक के कर्तव्य क्या हैं और युद्ध किस प्रकार किए जाएँ, इस बारे में विस्तार से बताया गया है।”
और फिर वह उद्धरण, जो इस अध्याय से जुड़ता है★★
“राजा प्रत्येक 10 गाँवों पर एक ‘संग्रहण’ (उप-जिला मुख्यालय); प्रत्येक 100 गाँवों पर ‘करवाटिका’ (जिला मुख्यालय), प्रत्येक 400 गाँवों पर ‘द्रोणमुख’ और प्रत्येक 800 गाँवों पर ‘स्थानीय’ (प्रांतीय मुख्यालय) स्थापित करे।”
| इकाई | कितने गाँवों पर | पुस्तक का कोष्ठक |
|---|---|---|
| संग्रहण | 10 | उप-जिला मुख्यालय |
| करवाटिका | 100 | जिला मुख्यालय |
| द्रोणमुख | 400 | — |
| स्थानीय | 800 | प्रांतीय मुख्यालय |
और पुस्तक का प्रश्न —
“आधुनिक भाषा में हम उक्त चार प्रवर्गों को क्या नाम देंगे? क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है कि बहुत पहले इसी प्रकार की संरचना के बारे में सोचा गया था?”
★यह बॉक्स यहाँ क्यों है
क्योंकि यह अध्याय की पूरी बात को दो हज़ार साल पीछे ले जाता है।
आज तीन स्तर हैं — ग्राम, खंड, जिला। तब चार प्रवर्ग थे — संग्रहण, करवाटिका, द्रोणमुख, स्थानीय। और दोनों का सिद्धांत एक ही है: गाँवों के समूह पर एक केंद्र।
! पर सावधानी: पुस्तक यह नहीं कह रही कि आज की पंचायती राज व्यवस्था अर्थशास्त्र से ‘निकली’ है। वह केवल पूछ रही है — “क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है…?” यह हेज मत गिराइए।
! सत्यापन: ‘करवाटिका’ के लिए कुछ अनुवादों में 100 और कुछ में 200 गाँव मिलते हैं, और अर्थशास्त्र की तिथि तथा एकल लेखकत्व पर विद्वानों में वास्तविक मतभेद है। दोनों बातें
10-Verification-Log.mdमें हैं। कक्षा में इन्हें मत उठाइए।
12. आगे बढ़ने से पहले… (पृ. 171)
पुस्तक के तीन अंतिम बिंदु — शब्दश::
- “ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार को एक त्रिस्तरीय व्यवस्था के अंतर्गत गठित किया जाता है।”
- ★“पंचायती राज व्यवस्था में लोकतंत्र जनता द्वारा प्रत्यक्ष भागीदारी और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों, दोनों द्वारा कार्य करता है।”
- “पंचायती राज संस्थाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वशासन का अधिकार देती हैं ताकि वे अपने मामले स्वयं सुलझा सकें और विकासात्मक कार्यों में सहयोग दें।”
★★दूसरा बिंदु इस अध्याय की सबसे गहरी बात है
”…प्रत्यक्ष भागीदारी और निर्वाचित प्रतिनिधियों, दोनों द्वारा…”
अध्याय 10 ने प्रत्यक्ष और प्रतिनिधि लोकतंत्र को दो अलग प्रकार बताया था। अध्याय 11 दिखाता है कि एक ही गाँव में दोनों एक साथ काम करते हैं — ग्राम सभा = प्रत्यक्ष लोकतंत्र। ग्राम पंचायत = प्रतिनिधि लोकतंत्र।
★यह जोड़ बोर्ड पर बनवाइए। यह दोनों अध्यायों को एक साथ बाँध देता है।
अभ्यास — प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ (पृ. 171)
- स्वयं को जाँचिए — ऊपर दिए गए पाठ को देखे बिना क्या आप पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर बता सकते हैं? तीनों स्तरों में प्रत्येक के मुख्य कार्य क्या हैं?
- गाँव की सड़क के किनारे पड़ी प्लास्टिक थैलियों से संबंधित विषय पर सरपंच को पत्र लिखिए।
- आपके विचार से किस प्रकार का व्यक्ति ग्राम पंचायत का सदस्य हो सकता है?
- मान लीजिए, आप एक गाँव के विद्यालय में पढ़ते हैं। विद्यालय राजमार्ग पर है तथा विद्यार्थियों को विद्यालय आते-जाते समय सड़क पार करने में कठिनाई होती है। इस समस्या के समाधानों के विकल्प क्या-क्या हो सकते हैं? इसमें पंचायती राज की कौन-सी संस्थाएँ आपकी मदद कर सकती हैं? विद्यार्थी इसमें क्या कर सकते हैं?
उत्तर-कुंजी — पुस्तक मेंनहीं छपी हैध्यान
(नीचे के उत्तर अध्याय के भीतर से बने हैं। ये शिक्षक के लिए हैं।)
1. तीन स्तर और उनके मुख्य कार्य —
| स्तर | संस्था | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| ग्राम | ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) | लोगों के सबसे निकट; सदस्य ग्राम सभा द्वारा सीधे चुने जाते हैं; सरपंच/प्रधान का चयन; स्थानीय समस्याओं का समाधान |
| खंड | पंचायत समिति (खंड पंचायत / मंडल परिषद) | ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी; सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके ऊपर प्रस्तुत करना; धनराशि के आवंटन में मदद |
| जिला | जिला परिषद (जिला पंचायत) | पिरामिड का सबसे ऊपर का स्तर; योजनाएँ जिला या राज्य स्तर पर आगे बढ़ाना |
★पूरे अंक के उत्तर में यह भी आना चाहिए कि यह ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली है और यह “निम्न से उच्च स्तर तक” कार्य करती है।
2. सरपंच को पत्र — यह लेखन-कौशल का प्रश्न है। ★अपेक्षित बिंदु: सही संबोधन (सेवा में, श्रीमान सरपंच महोदय); समस्या का स्पष्ट विवरण (सड़क किनारे प्लास्टिक थैलियाँ); उसका प्रभाव (पशु, नाली, वर्षा का पानी, गंदगी); एक या दो सुझाव (कूड़ेदान, सफ़ाई अभियान, ग्राम सभा में विषय रखना); और विनम्र समापन। ! मूल्यांकन में विषय-वस्तु पर अंक दीजिए, केवल प्रारूप पर नहीं।
3. किस प्रकार का व्यक्ति ग्राम पंचायत का सदस्य हो सकता है — ! यह मत का प्रश्न है और पुस्तक ने कोई पात्रता-नियम नहीं दिए हैं। अध्याय के भीतर से केवल इतना निश्चित है कि सदस्य ग्राम सभा द्वारा सीधे चुने जाते हैं, यानी गाँव के मतदाता उन्हें चुनते हैं। ★सर्वोत्तम उत्तर वे हैं जो पृष्ठ 166 की तीनों कहानियों से गुण निकालें — सेवा-भाव (कांबले का ‘लोक सेवा, ग्राम सेवा’), साहस और नेतृत्व (वंदना बहादुर मैदा), और दूरदृष्टि तथा ग्रामवासियों को साथ लेकर चलना (पोपटराव पवार)। ! किसी बच्चे के उत्तर को ‘ग़लत’ मत कहिए। पर कारण अवश्य माँगिए।
4. राजमार्ग वाली समस्या — यह योग्यता-आधारित प्रश्न है और इसे तीन हिस्सों में देखना चाहिए:
| क्या पूछा | अपेक्षित उत्तर |
|---|---|
| समाधान के विकल्प | ज़ेब्रा क्रॉसिंग · गति-अवरोधक · चेतावनी-संकेत · विद्यालय के समय पर यातायात नियंत्रण · पैदल पुल |
| कौन-सी संस्थाएँ मदद कर सकती हैं | ग्राम पंचायत (विषय उठाना); पंचायत समिति (सड़क-निर्माण और धनराशि — पुस्तक ने स्वयं ‘बारहमासी सड़कों’ और ग्राम सड़क योजना का उल्लेख किया है); और आवश्यकता पड़ने पर जिला परिषद |
| विद्यार्थी क्या कर सकते हैं | बाल पंचायत बनाकर विषय उठाना; ग्राम सभा में प्रस्तुत करना; सरपंच को पत्र लिखना; हस्ताक्षर या सर्वेक्षण करना |
★★सबसे अच्छे उत्तर वे हैं जो ‘विद्यार्थी क्या कर सकते हैं’ के लिए बाल पंचायत का उल्लेख करें — क्योंकि पूरा पृष्ठ 167–168 ठीक इसी के लिए है।
पृष्ठ 172 — ‘नूडल्स’
अध्याय का अंतिम पृष्ठ खाली है, शीर्षक ‘नूडल्स’, और नीचे वही टिप्पणी: “नोट्स (Notes) और डूडल्स (Doodles) को मिलाकर बना शब्द-संक्षेप। इस स्थान का उपयोग टिप्पणी और चित्रांकन हेतु कीजिए।”
★यहाँ विद्यार्थियों से चित्र 11.1 का पिरामिड अपने हाथ से बनवाइए, तीनों स्तरों के सभी नामों के साथ। यह सबसे अच्छा उपयोग है।
पूरे अध्याय की एक-पृष्ठीय रूपरेखा★
| पृष्ठ | खंड | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 163 | आवरण | गाँधी का उद्धरण · तीन महत्वपूर्ण प्रश्न · 6,00,000 गाँव · 8,000 कस्बे · 4,000+ नगर · 1.4 अरब · दो-तिहाई ग्रामीण |
| 164 | लक्ष्मणपुर | 200 घर · ~700 जनसंख्या · आवश्यकताएँ · “क्या राजधानी जा सकते हैं?” |
| 164 | पंचायती राज | स्थानीय शासन व्यवस्था · ग्रामीण परिषद · स्व-शासन · चित्र 11.1 का पिरामिड |
| 165 | त्रिस्तरीय प्रणाली | ग्राम · खंड · जिला — निम्न से उच्च तक · आठ कार्य |
| 165 | ग्राम पंचायत | ★ग्राम सभा चुनती है · सरपंच/प्रधान · “अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं” |
| 166 | आदर्श सरपंच | कांबले (2017) · वंदना बहादुर मैदा · पोपटराव पवार (पद्मश्री 2020) |
| 167 | सचिव और पटवारी | बैठक और अभिलेख · भू-अभिलेख और पुराने मानचित्र |
| 167–168 | बाल हितैषी पंचायत | महाराष्ट्र · सिक्किम · राजस्थान की बाल संसद (2001) |
| 169 | पंचायत समिति और जिला परिषद | कड़ी · योजनाएँ ऊपर · ग्राम सड़क योजना · ★एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए |
| 170 | विविधता | “राज्यों का अधिकार है, किंतु लक्ष्य समान हैं” |
| 170 | अर्थशास्त्र | कौटिल्य/चाणक्य · ~2300 वर्ष · 10/100/400/800 |
| 171 | आगे बढ़ने से पहले | ★प्रत्यक्ष भागीदारी और निर्वाचित प्रतिनिधि, दोनों |
इस अध्याय के जाल — शिक्षक की सूचीध्यान
| # | जाल | सही बात |
|---|---|---|
| 1 | ★★★ग्राम सभा और ग्राम पंचायत को एक समझना | ग्राम सभा = सभी वयस्क मतदाता · ग्राम पंचायत = चुने हुए सदस्य · सभा चुनती है, पंचायत चुनी जाती है |
| 2 | ★★अध्याय 10 और 11 के पिरामिड मिला देना | चित्र 10.4 = केंद्र/राज्य/स्थानीय · चित्र 11.1 = जिला/खंड/ग्राम · दूसरा, पहले के आधार के भीतर है |
| 3 | तीनों स्तरों के नाम याद न रखना | हर स्तर के दो-तीन नाम हैं, क्योंकि राज्यों में विविधता है |
| 4 | सरपंच और प्रधान को अलग समझना | ये एक ही पद के दो नाम हैं |
| 5 | पंचायत सचिव और पटवारी उलट देना | सचिव = बैठक और अभिलेख · पटवारी = भू-अभिलेख |
| 6 | ‘एक-तिहाई’ को केवल ग्राम पंचायत का समझना | यह तीनों स्तरों पर लागू है |
| 7 | वर्ष उलट देना | 2017 = कांबले · 2020 = पोपटराव पवार का पद्मश्री · 2001 = बाल संसद का पुरस्कार |
| 8 | संख्याएँ मिला देना | 200 घर, ~700 जनसंख्या = लक्ष्मणपुर · 8–14 वर्ष = बाल संसद · 10/100/400/800 = अर्थशास्त्र |
| 9 | अर्थशास्त्र को पंचायती राज का ‘मूल’ कह देना | पुस्तक केवल पूछती है — “क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है…?” |
| 10 | ‘8,000 कस्बे’ और ‘4,000 नगर’ जोड़ देना | ये जोड़े नहीं जाते — विवरण सत्यापन-अभिलेख में |
पिछले अध्यायों से जोड़★
| जोड़ | कहाँ |
|---|---|
| ★★‘आधारभूत लोकतंत्र’ और पिरामिड का आधार | अध्याय 10, पृ. 160 और चित्र 10.4 → पूरा अध्याय 11 |
| प्रत्यक्ष ↔ प्रतिनिधि लोकतंत्र | अध्याय 10, पृ. 160 → ग्राम सभा ↔ ग्राम पंचायत (पृ. 171 का दूसरा बिंदु) |
| ‘स्थानीय सरकार’ राज्य के अधिकार में | अध्याय 10, चित्र 10.5 → अध्याय 11, पृ. 170 |
| विधायक | अध्याय 10, पृ. 159 → पंचायत समिति के सदस्य (पृ. 169) |
| जल-संचयन और पद्मश्री | अध्याय 9 — हलमा, महेश शर्मा, 2019 ↔ अध्याय 11 — हिवरे बाजार, पोपटराव पवार, 2020 |
| पुराने मानचित्र = ऐतिहासिक स्रोत | अध्याय 4 ↔ अध्याय 11, पृ. 167 (पटवारी) |
| एक चीज़, अनेक नाम | अध्याय 8 ↔ चित्र 11.1 के दो-तीन नाम प्रति स्तर |