कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन) · पृष्ठ — 7 से 26
यह पन्ना किसलिए — पढ़ाने से पहले अध्याय पर अपनी पकड़ पक्की करने के लिए: अध्याय किस क्रम में आगे बढ़ता है, किताब की संख्याएँ और परिभाषाएँ, प्रश्नावली और बीच की गतिविधियों के उत्तर, और वे जगहें जहाँ बच्चे अकसर भटकते हैं। कक्षा में किस कालांश में क्या करना है, वह पाठ योजना में है। अध्याय के कई चित्र हमने दोबारा बनाए हैं; वे रिवीजन नोट्स में हैं।
सारे पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं। उद्धरण-चिह्न सिर्फ़ किताब के अपने शब्दों पर लगे हैं, उसी वर्तनी में जो किताब में छपी है, और साथ में पृष्ठ-संख्या दी गई है। जो बात किताब की नहीं, हमारी अपनी है, उसके साथ हमारी ओर से लिखा है।
अध्याय की पकड़
अध्याय का तर्क — किताब किस क्रम में सोचती है
अध्याय एक सीढ़ी की तरह चढ़ता है। पहले एक छोटे नगर का मानचित्र पढ़ना, फिर पूरी पृथ्वी को कागज़ पर उतारने की मुश्किल, फिर पृथ्वी पर किसी जगह का पता बताने का तरीका, और आख़िर में उसी पते से उस जगह का समय। हर सीढ़ी पिछली पर टिकी है।
| सीढ़ी | किताब क्या करती है | पृष्ठ |
|---|---|---|
| 1. मानचित्र | एक काल्पनिक लघु नगर के मानचित्र (चित्र 1.1) से शुरुआत; मानचित्र, एटलस और मानचित्रों के तीन प्रकार | 8–9 |
| 2. तीन घटक | दूरी (स्केल), दिशा और प्रतीक चिह्न | 9–11 |
| 3. गोल पृथ्वी | संतरे का छिलका समतल नहीं बिछता; इसलिए ग्लोब | 12 |
| 4. पता बताने का तरीका | बाज़ार में दुकान की पंक्ति और शतरंज की चाल: निर्देशांक प्रणाली | 12–13 |
| 5. अक्षांश और देशांतर | दो निर्देशांक, ग्रिड, ग्रिनिच और उज्जयिनी की मध्य रेखा, भारत का फैलाव | 13–18 |
| 6. देशांतर से समय | 15° पर एक घंटा, स्थानीय समय, मानक समय, समय क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा | 19–22 |
दूसरी सीढ़ी की नींव यह पंक्ति है: “किसी भी मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं— दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।” (पृष्ठ 9)
अध्याय का मोड़ पृष्ठ 15 पर है। वहाँ किताब कहती है, “अक्षांश और देशांतर मिलकर एक स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।” और पृथ्वी के घूमने से जोड़कर, “इसी कारण एक स्थान के देशांतर के माप द्वारा हम उस स्थान के समय को भी मापेंगे।” यानी देशांतर पता भी है और घड़ी भी। अध्याय का आख़िरी हिस्सा इसी एक बात को खोलता है।
हमारी ओर से — पढ़ाते समय: चौथी सीढ़ी को जल्दी मत निपटाइए। दुकान की पंक्ति और शतरंज के खाने समझ में आ जाएँ, तो अक्षांश और देशांतर दो संख्याओं वाला पता बन जाते हैं। यह छूट जाए, तो वे ग्लोब पर खिंची बेमतलब रेखाएँ लगती हैं।
संख्याएँ और तथ्य — एक नज़र में
| बात | किताब में | पृष्ठ |
|---|---|---|
| आर्यभट्ट का कथन | पृथ्वी गोलाकार है; आर्यभट्ट, लगभग 500 सा.सं. | 7 |
| स्केल के उदाहरण | 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर; चित्र 5.2 में 2.5 से.मी. = 500 किलोमीटर | 10 |
| दिशाएँ | चार प्रधान (उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम) और चार मध्यवर्ती | 10 |
| पृथ्वी का आकार | लगभग गोलाकार, ध्रुवों पर थोड़ी चपटी | 12 |
| अक्षांश | 0° (भूमध्य रेखा) से 90° उ. और 90° द. (ध्रुव) तक | 14 |
| देशांतर | 0° (प्रमुख याम्योत्तर) से 180° तक, पू. या प. के साथ; 180° अकेला लिखा जाता है | 15 |
| प्रमुख याम्योत्तर | वर्ष 1884 में कुछ देशों ने ग्रिनिच (लंदन, इंग्लैंड) से गुजरने वाली याम्योत्तर को अंतर्राष्ट्रीय मानक माना | 15 |
| पूर्णांक में उदाहरण | दिल्ली 29° उ., 77° पू.; न्यूयॉर्क 74° प.; टोक्यो 140° पू. | 15 |
| उज्जयिनी की मध्य रेखा | चित्र 1.5 में 75.8° पू. लिखा है; वराहमिहिर लगभग 1500 वर्ष पूर्व यहाँ रहे | 16–17 |
| भारत का फैलाव | अक्षांश लगभग 8° उ. से 37° उ., देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. | 18 |
| पृथ्वी का एक चक्कर | 24 घंटे में 360°, यानी हर घंटे 15° | 19 |
| पोरबंदर और तिनसुकिया | देशांतर में 30° का अंतर | 20 |
| भारतीय मानक समय | जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे; चित्र 1.8 में भारत के पास +5½ | 20–21 |
| बड़े देश | संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 और रूस में 11 समय क्षेत्र | 21 |
| अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा | लगभग 180° देशांतर पर; +12 और –12 समय क्षेत्र यहाँ एक-दूसरे को छूते हैं | 21 |
मुख्य शब्द — किताब की परिभाषाएँ
| शब्द | किताब क्या कहती है | पृष्ठ |
|---|---|---|
| मानचित्र | “मानचित्र किसी भी क्षेत्र का एक प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है” | 9 |
| एटलस | “एटलस (मानचित्रावली) मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।” | 9 |
| मानचित्रों के प्रकार | भौतिक, राजनैतिक और थिमैटिक; भौतिक का उदाहरण चित्र 5.2, थिमैटिक के चित्र 6.3 और 8.1 | 9 |
| स्केल | “इसलिए मानचित्र पर चिह्नित किन्हीं दो बिंदुओं के बीच की वास्तविक दूरी उस स्केल पर निर्भर है, जिसका मानचित्र उपयोग करता है।” | 10 |
| चतुर्दिश | उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम: “इन्हें चतुर्दिश या प्रधान बिंदु भी कहा जाता है।” इनके बीच चार मध्यवर्ती दिशाएँ | 10 |
| प्रतीक चिह्न | “सरकारी निकाय भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने भारत (या भारत के भागों) के मानचित्रों के लिए प्रतीक चिह्नों का एक संकलन निर्धारित किया है।” | 11 |
| ग्लोब | “किसी समतल मानचित्र की तुलना में पृथ्वी के भूगोल का बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।” | 12 |
| निर्देशांक प्रणाली | दुकान की पंक्ति और शतरंज के बाद: “इन दो उदाहरणों में प्रयुक्त प्रणाली को निर्देशांक प्रणाली कहा जा सकता है।” | 13 |
| अक्षांश (समानांतर) | रेखा भूमध्य रेखा के समानांतर पूर्व से पश्चिम चलती है; “अक्षांश, भूमध्य रेखा से इसी दूरी को मापता है।” | 13 |
| भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) | अक्षांश का सबसे बड़ा वृत्त, 0° | 13–14 |
| देशांतरीय याम्योत्तर | “ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।” | 14 |
| प्रमुख याम्योत्तर | ग्रिनिच से गुजरने वाली याम्योत्तर, 0° देशांतर | 15 |
| देशांतर | “देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का एक माप है।” | 15 |
| ग्रिड | “यह सभी रेखाएँ मिलकर ग्लोब पर एक ग्रिड बनाती है जिन्हें ग्रिड रेखाएँ भी कहा जाता है।” | 15 |
| मध्य रेखा | भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर, जो उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) के मध्य से गुजरती थी | 16 |
| मानक समय | “इसी कारण अधिकतर देश उनके मध्य से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय को अपनाते हैं।” | 20 |
| भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.) | ग्रिनिच के स्थानीय समय (जी.एम.टी.) से 5 घंटे 30 मिनट आगे | 20 |
| अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा | “ग्रिनिच पर स्थिर मुख्य याम्योत्तर, जिसके विपरीत की रेखा लगभग 180° देशांतर पर है, उसे अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है।” | 21 |
| मुहाना | “मुहाना वह स्थान जहाँ नदी समुद्र में मिलती है।” | 23 |
किताब ख़ुद कहाँ आगे-पीछे जोड़ती है
- अध्याय 5 का चित्र 5.2: स्केल समझाते हुए किताब इसी मानचित्र को देखने को कहती है, और प्रश्न 1 का हिसाब भी इसी पर है। अध्याय 5 शायद तब तक पढ़ाया न गया हो, इसलिए यह मानचित्र पहले से खोलकर रखिए (यह सलाह हमारी ओर से है)।
- मानचित्रों के प्रकार: भौतिक मानचित्र के लिए किताब चित्र 5.2 की ओर, और थिमैटिक मानचित्रों के लिए चित्र 6.3 और 8.1 की ओर भेजती है। ये चित्र किताब के आगे के अध्यायों में हैं; अभी बस नाम बताइए (यह सलाह हमारी ओर से है)।
- विज्ञान: भूमध्य रेखा के पास गर्मी और ध्रुवों के पास ठंड क्यों है, और हम ऋतुओं का अनुभव क्यों करते हैं, यह किताब विज्ञान पर छोड़ती है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की पूरी बात भी विज्ञान में आएगी, पर यहाँ किताब उसे टेबल लैंप और ग्लोब से सरल ढंग से दिखाती है (पृष्ठ 15) और बताती है कि पृथ्वी 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है (पृष्ठ 19)।
किताब की प्रश्नावली के उत्तर
पाठ के बीच की गतिविधियाँ — उत्तर और तरीका
किताब इन गतिविधियों के उत्तर नहीं छापती। नीचे के सारे उत्तर और तरीके हमारी ओर से हैं; पढ़ाने से पहले किताब का वही चित्र सामने रखकर एक बार मिला लीजिए।
चित्र 1.1 पर तीन सवाल (पृष्ठ 9)
नमूना उत्तर — चिकित्सालय नगर के लगभग बीच में है; बच्चे उसे चित्र पर अंकित करें। नीले क्षेत्र पानी हैं: स्टेशन के पास की झील और ऊपर से उसमें आती धारा। रेलवे स्टेशन पश्चिम में है; विद्यालय उसके ठीक दक्षिण में पास ही है, नगर पंचायत बीच से थोड़ा पूर्व में, और सार्वजनिक उद्यान पूर्वी छोर पर। किताब इन्हीं तीन जगहों में से चुनने को कहती है, और इनमें स्टेशन से सबसे दूर सार्वजनिक उद्यान है।
अपने विद्यालय का मानचित्र, समूहों में (पृष्ठ 9)
नमूना उत्तर — हर समूह का मानचित्र अलग होगा, और गतिविधि का मक़सद भी यही तुलना है। तुलना करते समय तीन बातें देखिए: ऊपर उत्तर लिखा है या नहीं; रास्ते और आसपास के भवन सही दिशा में हैं या नहीं; और एक जैसी चीज़ के लिए सबने एक जैसा चिह्न बनाया है या नहीं। तीसरी बात से ही बच्चों को आगे आने वाले तय प्रतीक चिह्नों की ज़रूरत अपने-आप समझ आती है।
चित्र 1.1 पर सही या ग़लत (पृष्ठ 10)
नमूना उत्तर — चित्र में उत्तर ऊपर है। हर कथन में दूसरी जगह पर खड़े होकर पहली जगह को देखिए; जैसे पहले कथन में चिकित्सालय से बाज़ार की ओर।
- 1ग़लत: बाज़ार चिकित्सालय से दक्षिण में है, थोड़ा पूर्व की ओर।
- 2लगभग सही: संग्रहालय बैंक से दक्षिण में है, थोड़ा पूर्व की ओर।
- 3लगभग सही: स्टेशन चिकित्सालय से पश्चिम में है, कुछ उत्तर की ओर।
- 4ग़लत: झील आवासीय भवनों से दक्षिण-पश्चिम में है। चित्र में जगहें ठीक आठ दिशाओं की रेखाओं पर नहीं बनी हैं, इसलिए
- 2और
- 3पर कक्षा में बात कीजिए: कोई जगह कब दक्षिण कहलाएगी और कब दक्षिण-पूर्व?
खेल-मैदान का मानचित्र (पृष्ठ 10)
नमूना उत्तर — 40 ÷ 10 = 4 से.मी. लंबा और 30 ÷ 10 = 3 से.मी. चौड़ा आयत बनेगा। ठीक खींचने पर विकर्ण 5 से.मी. नपेगा, यानी वास्तविक लंबाई 5 × 10 = 50 मीटर। किसी बच्चे का विकर्ण 5 से.मी. से थोड़ा कम-ज़्यादा आए, तो पहले उसका आयत और रूलर पकड़ने का तरीका देखिए।
विद्यालय से घर किस दिशा में (पृष्ठ 10)
नमूना उत्तर — हर बच्चे का अलग। किताब ख़ुद कहती है, “अपने शिक्षक और माता-पिता से चर्चा कीजिए।” पहले विद्यालय की कोई तय चीज़, जैसे मुख्य द्वार, किस दिशा में है, यह आप बता दीजिए; फिर बच्चे से घर की ओर इशारा करवाइए और आठ दिशाओं में से सबसे पास की दिशा कहलवाइए।
अपने गाँव या मोहल्ले का मानचित्र (पृष्ठ 11)
नमूना उत्तर — हर बच्चे का अलग। जाँचने के लिए चार बातें: घर और विद्यालय दिखाए गए हैं; आसपास की दो-तीन पहचान की जगहें हैं; चारों मुख्य दिशाएँ लिखी हैं; और चिह्न चित्र 1.2 वाले हैं।
शतरंज में काले की चाल (पृष्ठ 13)
नमूना उत्तर — कई सही उत्तर हो सकते हैं। एक उदाहरण: प्यादा ‘घ’ 7 से ‘घ’ 5। शतरंज के चित्र में काले मोहरे ऊपर की पंक्तियों 7 और 8 में हैं, इसलिए काला प्यादा 7 से नीचे की ओर चलता है। देखिए कि बच्चे ने किताब की तरह पहले अक्षर (क से ज) और फिर संख्या (1 से 8) लिखी है, जैसे “प्यादा ‘घ’ 2 से ‘घ’ 4 की ओर आगे बढ़ा है।”
मुंबई, कोलकाता, सिंगापुर और पेरिस के अक्षांश-देशांतर (पृष्ठ 16)
नमूना उत्तर — किताब ये मान नहीं देती; बच्चे इन्हें एटलस या ग्लोब से पढ़ेंगे। तरीका: सबसे पास की अक्षांश रेखा पढ़िए, भूमध्य रेखा के उत्तर में हो तो उ. और दक्षिण में हो तो द. लिखिए; फिर सबसे पास की देशांतर रेखा, ग्रिनिच के पूर्व में हो तो पू. और पश्चिम में हो तो प.। पूर्णांक में लिखवाइए, जैसे किताब ने दिल्ली के लिए 29° उ., 77° पू. लिखा है। अलग-अलग एटलस से एक-दो अंश का फ़र्क़ आए, तो उसे ग़लत मत मानिए।
पोरबंदर और तिनसुकिया: अंधेरा पहले कहाँ (पृष्ठ 20)
नमूना उत्तर — पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए पूर्व की जगहों में दिन पहले ढलता है। तिनसुकिया में पहले अंधेरा हुआ, यानी वह पूर्व की ओर है। अंतर: 30° ÷ 15° = 2 घंटे; तिनसुकिया का स्थानीय समय पोरबंदर से 2 घंटे आगे है।
वही दो मित्र: स्थानीय समय और मानक समय (पृष्ठ 20)
नमूना उत्तर — स्थानीय समय के हिसाब से तिनसुकिया पोरबंदर से 2 घंटे आगे है। पर दोनों शहर भारतीय मानक समय मानते हैं, इसलिए दोनों मित्रों की घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं। घड़ी में एक ही समय, फिर भी एक जगह अंधेरा और दूसरी जगह उजाला: यही स्थानीय समय (देशांतर के हिसाब से) और मानक समय (पूरे देश के लिए एक) का अंतर है।
1 से 4 तक — दूरी, समय, चिह्न और दिशाएँ
किताब के सारे प्रश्न पृष्ठ 23–25 पर हैं। हर प्रश्न के आगे वह पृष्ठ लिखा है जहाँ उसकी बात पाठ में आती है।
प्रश्न 1 — नर्मदा के मुहाने से गंगा के मुहाने तक की वास्तविक दूरी (पृष्ठ 10)
नमूना उत्तर — किताब कोई संख्या नहीं देती; यह दूरी हर बच्चा अध्याय 5 के चित्र 5.2 पर ख़ुद नापेगा। किताब के हाशिये पर लिखा है: “मुहाना वह स्थान जहाँ नदी समुद्र में मिलती है।” तरीका:
- रूलर से नर्मदा के मुहाने से गंगा के मुहाने तक सीधी दूरी सेंटीमीटर में नापिए, और संकेत के अनुसार उसे सरल संख्या में पूर्णांकित कीजिए।
- स्केल 2.5 से.मी. = 500 कि.मी. है, यानी 1 से.मी. = 500 ÷ 2.5 = 200 कि.मी.।
- अपनी माप को 200 से गुणा कीजिए।
हमारी ओर से उदाहरण (सिर्फ़ तरीका समझाने के लिए; यह नर्मदा और गंगा की माप नहीं है): मानचित्र पर 5 से.मी. नपे, तो वास्तविक दूरी 5 × 200 = 1000 कि.मी. होगी।
जाँचते समय: बच्चों की माप थोड़ी अलग-अलग आएगी। माप, स्केल और हिसाब, तीनों लिखे हों तो उत्तर पूरा है।
प्रश्न 2 — लंदन में दोपहर 12, तो भारत में सायं 5:30 क्यों (पृष्ठ 19–20)
नमूना उत्तर — प्रमुख याम्योत्तर इंग्लैंड में लंदन के एक क्षेत्र ग्रिनिच से गुजरती है, इसलिए लंदन के दोपहर 12 बजे को ग्रिनिच का समय (जी.एम.टी.) मानकर चलिए; यह मान्यता हमारी ओर से है, प्रश्न इसे अलग से नहीं कहता। भारत ग्रिनिच के पूर्व में है; उसका देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. तक है। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, और प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व की ओर हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा बढ़ता है। पूरा भारत एक मानक समय, भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.), मानता है, जो जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। इसलिए जब लंदन में दोपहर 12 बजते हैं, तब भारत में 12 + 5:30 = सायं 5:30 बजते हैं।
जाँचते समय दो बातें देखिए: भारत को ग्रिनिच के पूर्व में बताया गया है, और आई.एस.टी. को जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे।
प्रश्न 3 — मानचित्र में प्रतीक चिह्न और रंग क्यों (पृष्ठ 11)
नमूना उत्तर — प्रतीक चिह्न: किसी बड़े नगर या देश के मानचित्र पर हर भवन, सड़क या पेड़ का चित्र बनाने की जगह नहीं होती; छोटे चिह्नों से मानचित्र के सीमित स्थान में बहुत-से विवरण दिख जाते हैं। चिह्न तय हों, तो अलग-अलग लोग एक ही मानचित्र को आसानी से समझ लेते हैं; भारत के मानचित्रों के लिए ये चिह्न भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तय किए हैं। रंग: किताब रंगों का कारण शब्दों में नहीं लिखती, पर उसके चित्र दिखाते हैं कि रंग चीज़ों को एक नज़र में अलग पहचानने में मदद करते हैं (यह निष्कर्ष हमारी ओर से है)। चित्र 1.2 में नदी और तालाब नीले, वृक्ष हरे और बस्तियाँ लाल हैं; चित्र 1.1 में नीला रंग झील और उसमें आती धारा दिखाता है; चित्र 1.7 में हर रंग 15° का एक क्षेत्र है।
प्रश्न 4 — घर या विद्यालय की आठ दिशाओं में क्या है (पृष्ठ 10)
नमूना उत्तर — यह बच्चे की अपनी खोज है, इसलिए हर उत्तर अलग होगा। तरीका:
- 1घर या विद्यालय के बीच खड़े होकर उत्तर दिशा पहचानिए; ज़रूरत हो तो शिक्षक या माता-पिता की मदद लीजिए।
- 2कागज़ पर ऊपर उत्तर लिखिए, फिर घड़ी के काँटे की दिशा में पूर्व, दक्षिण और पश्चिम; इनके बीच चार मध्यवर्ती दिशाएँ, उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम।
- 3हर दिशा में जो दिखे, वह उसके आगे लिखिए और ऊपर ‘उ.’ वाला तीर बनाइए।
हमारी ओर से उदाहरण (किसी एक विद्यालय का; हर विद्यालय का अलग होगा): उत्तर में खेल का मैदान, उत्तर-पूर्व में पानी की टंकी, पूर्व में मुख्य सड़क, दक्षिण-पूर्व में दुकानें, दक्षिण में पंचायत भवन, दक्षिण-पश्चिम में खेत, पश्चिम में आँगनबाड़ी और उत्तर-पश्चिम में मंदिर।
5 से 7 तक — स्थानीय समय, मानक समय, सही-ग़लत
प्रश्न 5 — स्थानीय समय और मानक समय का अंतर, 100–150 शब्दों में (पृष्ठ 19–20)
नमूना उत्तर (हमारी ओर से; समूहों के उत्तर इससे मिलाइए) — पृथ्वी अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक चक्कर, यानी 360°, घूमती है; इसलिए हर घंटे 15°। किसी जगह का समय उसके देशांतर से मापा जाता है, इसलिए हर याम्योत्तर का अपना समय होता है। यही उस जगह का स्थानीय समय है। प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व की ओर हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा बढ़ता है और पश्चिम की ओर एक घंटा घटता है। जैसे पोरबंदर और तिनसुकिया के देशांतर में 30° का अंतर है, तो उनके स्थानीय समय में 2 घंटे का अंतर होगा। अगर देश का हर शहर अपना स्थानीय समय माने, तो एक देश में अनेक समय चलेंगे, जो उचित नहीं। इसलिए अधिकतर देश अपने मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर का समय पूरे देश के लिए अपनाते हैं। इसे मानक समय कहते हैं। भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.) जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
जाँचते समय तीन बातें देखिए: स्थानीय समय देशांतर से तय होता है; एक देश में अनेक स्थानीय समय उचित नहीं; इसलिए मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर पर एक मानक समय।
प्रश्न 6 — दिल्ली और बेंगलुरु के स्थानीय समय में अंतर (पृष्ठ 15)
नमूना उत्तर — लगभग कोई अंतर नहीं, यानी शून्य। स्थानीय समय देशांतर से तय होता है: प्रमुख याम्योत्तर से हर 15° पर एक घंटे का अंतर आता है। दिल्ली और बेंगलुरु का देशांतर लगभग एक ही, 77° पू. है, इसलिए दोनों का स्थानीय समय लगभग एक जैसा होगा। दोनों के अक्षांश अलग हैं (29° उ. और 13° उ.), यानी दिल्ली भूमध्य रेखा से ज़्यादा दूर, उत्तर में है; पर अक्षांश के अंतर से स्थानीय समय नहीं बदलता।
हमारी ओर से: यह प्रश्न जाँचता है कि बच्चा अक्षांश और देशांतर का काम अलग-अलग पहचानता है या नहीं।
प्रश्न 7 — छह कथन, सही या ग़लत (पृष्ठ 13–14, 20)
किताब कथनों पर नंबर नहीं लगाती; नीचे के नंबर हमारी ओर से हैं।
| कथन | नमूना उत्तर | एक-दो वाक्य में कारण |
|---|---|---|
| 1. “अक्षांशों के सभी समानांतरों की लंबाई समान होती है।” | ग़लत | भूमध्य रेखा अक्षांश का सबसे बड़ा वृत्त है; उत्तर या दक्षिण की ओर बढ़ने पर अक्षांश के वृत्त छोटे होते जाते हैं। |
| 2. “देशांतर के एक याम्योत्तर की लंबाई भूमध्य रेखा की आधी होती है।” | सही | याम्योत्तर एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाने वाला अर्धवृत्त है, जबकि भूमध्य रेखा पूरा वृत्त; यहाँ पृथ्वी को गोलाकार माना गया है। |
| 3. “दक्षिण ध्रुव का अक्षांश 90° द. है।” | सही | दोनों ध्रुवों के अक्षांश 90° उ. और 90° द. हैं। |
| 4. “असम में स्थानीय समय और आई.एस.टी. (भारतीय मानक समय) एक ही है।” | ग़लत | स्थानीय समय अपने देशांतर से तय होता है, जबकि आई.एस.टी. पूरे देश के लिए एक है। पोरबंदर-तिनसुकिया वाली गतिविधि में तिनसुकिया (असम) में पहले अंधेरा होता है, यानी असम बहुत पूर्व में है, इसलिए वहाँ का स्थानीय समय आई.एस.टी. से आगे होगा। यह निष्कर्ष हमारी ओर से है; किताब असम के लिए इसे सीधे नहीं लिखती। |
| 5. “समय क्षेत्र को पृथक करने वाली रेखाएँ देशांतर के याम्योत्तर के समान होती हैं।” | ग़लत | ये रेखाएँ मोटे तौर पर 15° के क्षेत्रों के साथ चलती हैं, पर याम्योत्तरों की तरह पूर्णतया सीधी नहीं होतीं; वे अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ चलती हैं। |
| 6. “भूमध्य रेखा एक अक्षांश वृत्त भी है।” | सही | भूमध्य रेखा 0° अक्षांश है और अक्षांश का सबसे बड़ा वृत्त भी। |
8 — वर्ग पहेली की कुंजी
किताब के संकेत पृष्ठ 25 पर हैं, ग्रिड उससे पहले वाले पन्ने पर।
| संकेत | किस ओर | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | बाएँ से दाएँ | भारतीय मानक समय |
| 2 | ऊपर से नीचे | मानचित्र |
| 3 | बाएँ से दाएँ | स्केल |
| 4 | ऊपर से नीचे | ग्रिड |
| 5 | बाएँ से दाएँ | ग्लोब |
| 6 | ऊपर से नीचे | ध्रुव, यानी उत्तर ध्रुव |
| 7 | बाएँ से दाएँ | निर्देशांक |
| 8 | ऊपर से नीचे | ग्रिनिच |
| 9 | बाएँ से दाएँ | अक्षांश |
| 10 | ऊपर से नीचे | देशांतर |
| 11 | बाएँ से दाएँ | अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा |
| 12 | ऊपर से नीचे | भूमध्य रेखा |
हमारी ओर से — जाँचने का तरीका: हर खाने में एक अक्षर, उसकी मात्रा या संयुक्ताक्षर समेत; जैसे भा-र-ती-य-मा-न-क-स-म-य के दस खाने। कटते खाने भी मिलने चाहिए: 1 और 2 में मा, 7 और 8 में नि, 7 और 10 में शां, 11 और 12 में खा। संकेत 11 में किताब “शब्द-संक्षेप” लिखती है, पर नौ खानों में पूरा नाम ही बैठता है: अं-त-र्रा-ष्ट्री-य-ति-थि-रे-खा। यही कुंजी रिवीजन नोट्स में भी है।
कक्षा में
बच्चे कहाँ भटकते हैं — दस आम भूलें
1. सारी अक्षांश रेखाओं को बराबर लंबा मानना। भूमध्य रेखा अक्षांश का सबसे बड़ा वृत्त है और ध्रुवों की ओर वृत्त छोटे होते जाते हैं (पृष्ठ 13, चित्र 1.3)। ग्लोब पर धागा लपेटकर दिखाइए: भूमध्य रेखा पर धागा सबसे लंबा, ध्रुव के पास छोटा।
2. रेखा किस दिशा में चलती है और क्या नापती है, इसे एक समझना। अक्षांश की रेखा भूमध्य रेखा के समानांतर पूर्व से पश्चिम चलती है, पर नापती है भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी: “अक्षांश, भूमध्य रेखा से इसी दूरी को मापता है।” (पृष्ठ 13) याम्योत्तर ध्रुव से ध्रुव तक चलती है, पर देशांतर नापता है प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी।
3. ग़लत अक्षर या ग़लत सीमा। अक्षांश के साथ उ. या द., और वह 90° तक; देशांतर के साथ पू. या प., और वह 180° तक। 180° के साथ कुछ नहीं लगता: “180° प. और 180° पू. एक ही देशांतर हैं। इसलिए इस देशांतर को प. या पू. न लिखकर 180° ही लिखा जाता है।” (पृष्ठ 15)
4. याम्योत्तर को पूरा वृत्त समझना। “ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।” (पृष्ठ 14) यही बात प्रश्न 7 के दूसरे कथन में लौटती है।
5. पूर्व की ओर जाते हुए समय घटाना। “यदि ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे मध्याह्न है, तो प्रत्येक 15° याम्योत्तर पर स्थानीय समय का एक घंटा जुड़ता जाता है।” (पृष्ठ 19) पूर्व में जोड़िए, पश्चिम में घटाइए। हमारी ओर से याद रखने का तरीका: पूर्व में दिन पहले ढलता है (तिनसुकिया में पहले अंधेरा), इसलिए वहाँ की घड़ी आगे।
6. यह मानना कि अक्षांश बदलने से समय बदलता है। प्रश्न 6 यही जाँचता है: दिल्ली और बेंगलुरु के अक्षांश अलग हैं, देशांतर लगभग एक, इसलिए स्थानीय समय लगभग एक।
7. हर देश में एक ही मानक समय मानना। किताब ख़ुद चेताती है: “यह हर एक देश में एक जैसा नहीं होता।” संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं; रूस में पूर्व से पश्चिम की ओर यात्रा करने पर घड़ी 10 बार बदलनी पड़ेगी (पृष्ठ 21)।
8. ग्रिनिच को पहली प्रमुख याम्योत्तर मानना। “वास्तव में ग्रिनिच याम्योत्तर, पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर रेखा नहीं है।” (पृष्ठ 16) भारत की मध्य रेखा उज्जयिनी से गुजरती थी और यूरोप से अनेक शताब्दियों पहले की है। 1884 में कुछ देशों ने ग्रिनिच को अंतर्राष्ट्रीय मानक माना; वह पहली रेखा नहीं थी।
9. चित्र 1.5 के आज के नगरों को पुराने नगरों के नए नाम समझना। गोले वाले नगर खगोलीय ग्रंथों में आए नगर हैं, जिनके आधुनिक नाम साथ में दिए हैं: रोहितक-रोहतक, मालवंगरा-नगर, उज्जयिनी-उज्जैन, माहिष्मति-महेश्वर, कुमारी-कन्या कुमारी; कुरूक्षेत्र का एक ही नाम है। चौकोर निशान वाले दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई अलग से दिखाए गए आज के नगर हैं (पृष्ठ 17)।
10. दिल्ली के 29° उ., 77° पू. को सटीक मान समझना। किताब ख़ुद कहती है: “यद्यपि यह डिग्री आनुमानिक रूप से पूर्ण है, किंतु सटीक नहीं है।” (पृष्ठ 15)
दो जगहें जहाँ किताब को ध्यान से पढ़िए
चित्र 1.7 का शीर्षक (पृष्ठ 19)। शीर्षक कहता है: “इस ग्राफ में प्रमुख याम्योत्तर के संदर्भ में नीचे अक्षांश और ऊपर स्थानीय समय को दर्शाया गया है।” पर नीचे की पंक्ति में 45° प., 30° प., 15° प., 0°, 15° पू., 30° पू., 45° पू. लिखे हैं। प. और पू. देशांतर के साथ लगते हैं, और 0° प्रमुख याम्योत्तर पर है; इसलिए नीचे की पंक्ति देशांतर की है। बच्चों से कहिए कि चित्र 1.7 को देशांतर और स्थानीय समय का ग्राफ़ पढ़ें: नीचे हर 15° देशांतर बढ़ने पर ऊपर एक घंटा बदलता है। रिवीजन नोट्स में दोबारा बने चित्र पर नीचे देशांतर ही लिखा है।
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पर दिन (पृष्ठ 21–22)। किताब लिखती है: “यदि आप पूर्व की ओर से यात्रा करते हुए इसे पार करते हैं, तो आप एक दिन (मान लीजिए, सोमवार से रविवार) घटाएँगे।” और फिर: “यदि आप पश्चिम की ओर से इसे पार करते हैं, तो आप एक दिन (रविवार से सोमवार) जोड़ेंगे।” बच्चे “पूर्व की ओर से” को पूर्व से आते हुए भी पढ़ सकते हैं। यहाँ इसका अर्थ है पूर्व दिशा में जाते हुए (यह पढ़त हमारी ओर से है)।
हमारी ओर से जाँच, चित्र 1.8 से: ऊपर की पट्टी में तिथि रेखा के पश्चिम में +12 है और पूर्व में –12। पूर्व दिशा में जाते हुए रेखा पार करने पर आप +12 से –12 में पहुँचते हैं, यानी घड़ी जी.एम.टी. से 12 घंटे आगे से 12 घंटे पीछे हो जाती है: पूरा एक दिन पीछे। इसलिए पूर्व दिशा में जाते हुए दिन घटता है (सोमवार से रविवार), और पश्चिम दिशा में जाते हुए बढ़ता है (रविवार से सोमवार)। बोर्ड पर यही शब्द लिखिए: पूर्व की ओर यात्रा करते हुए पार करें तो एक दिन घटाइए, पश्चिम की ओर यात्रा करते हुए पार करें तो एक दिन जोड़िए।
किताब की पंक्तियाँ जो उत्तर में काम आती हैं
ये पंक्तियाँ रटवाने के लिए नहीं हैं। पहले बात समझाइए, फिर उत्तर में यह पंक्ति लिखवाइए; किताब के अपने शब्द उत्तर को सधा हुआ बनाते हैं।
| पंक्ति | पृष्ठ | कहाँ काम आती है |
|---|---|---|
| “किसी भी मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं— दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।” | 9 | मानचित्र के घटक |
| “पृथ्वी अंतरिक्ष में स्थित है, जो जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु से बनी है और यह गोलाकार है। यह सभी स्थलीय और जलीय प्राणियों से घिरी हुई है।” (आर्यभट्ट) | 7 | पृथ्वी का आकार, भारतीय खगोल |
| “अक्षांश और देशांतर मिलकर एक स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।” | 15 | निर्देशांक; पहेली का संकेत 7 |
| “इसी कारण एक स्थान के देशांतर के माप द्वारा हम उस स्थान के समय को भी मापेंगे।” | 15 | प्रश्न 5 और 6 |
| “एक पूरा चक्कर 360° है, अतः इसका अर्थ है — प्रति घंटा 15°(15×24 = 360)।” | 19 | 15° का हिसाब |
| “लेकिन यह विधि किसी देश के अंदर अनेक स्थानीय समयों के उपयोग के संदर्भ में उचित नहीं होगी।” | 20 | प्रश्न 5 |
| “भारतीय मानक समय (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम या आई.एस.टी.) ग्रिनिच (जिसे ग्रिनिच मीन टाइम या जी.एम.टी. भी कहा जाता है) पर स्थानीय समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।” | 20 | प्रश्न 2 और 5 |
| “समय क्षेत्र को विभाजित करने वाली रेखाएँ पूर्णतया सीधी नहीं होती हैं।” | 20 | प्रश्न 7, कथन 5 |
| “भारतीय खगोलविद शून्य और प्रमुख याम्योत्तर सहित अक्षांश और देशांतर से परिचित थे।” | 16 | मध्य रेखा |
| “अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पार करने पर तिथि में एक दिन का परिवर्तन होता है।” | 23 | तिथि रेखा |
बच्चे ये सवाल पूछेंगे
उत्तर किताब के भीतर रहकर दीजिए; जहाँ किताब चुप है, वहाँ यही कहिए।
भारत तो 68° पू. से 97° पू. तक फैला है, फिर पूरे देश में एक ही समय क्यों? किताब इतना कहती है कि एक देश के भीतर अनेक स्थानीय समय उचित नहीं होंगे, और “इसी कारण अधिकतर देश उनके मध्य से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय को अपनाते हैं।” (पृष्ठ 20) भारत ने एक ही समय क्षेत्र क्यों चुना, इसका अलग कारण यह अध्याय नहीं देता; बच्चों से यही कहिए। पोरबंदर-तिनसुकिया वाली गतिविधि से दिखाइए कि घड़ी एक होने पर भी उजाला अलग-अलग रहता है।
चीन में अभी कितने बजे होंगे? चित्र 1.8 में चीन के पास +8 छपा है, यानी जी.एम.टी. से 8 घंटे आगे, और भारत के पास +5½ (पृष्ठ 21)। हमारी ओर से हिसाब, बच्चों से करवाइए: 8 − 5½ = 2½, यानी चीन की घड़ी भारत से ढाई घंटे आगे।
तिथि रेखा सीधी क्यों नहीं? “यह कुछ देशों में एक ही दिन का विभाजन होने से बचने के लिए टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है।” (पृष्ठ 22) यानी रेखा इस तरह मुड़ती है कि एक देश के दो हिस्सों में दो अलग तारीख़ें न चलें।
भूमध्य रेखा के पास गर्मी और ध्रुवों के पास ठंड क्यों? किताब बताती है कि भूमध्य रेखा के पास उष्ण और ध्रुवों के पास शीत जलवायु है, पर कारण के लिए कहती है कि यह बच्चे विज्ञान में पढ़ेंगे। अभी इतना ही कहिए।
पृथ्वी गोल है तो मानचित्र चपटा कैसे बनता है? संतरे वाली गतिविधि यही दिखाती है। छिलका तीन-चार टुकड़ों में उतारकर समतल बिछाने को कहिए; किताब के शब्दों में, “किनारों को तोड़े बिना आप यह नहीं कर सकते।” (पृष्ठ 12) इसीलिए किताब कहती है कि ग्लोब समतल मानचित्र से बेहतर है।
कक्षा में करवाइए — ग्लोब और 15° का हिसाब
ग्लोब घुमाइए। किताब कहती है, “ग्लोब को पुनः पश्चिम से पूर्व की ओर घुमाइए।” (पृष्ठ 19) ग्रिनिच पर उँगली रखकर ग्लोब घुमाइए और पूछिए कि भारत ग्रिनिच से पहले रोशनी की ओर आता है या बाद में।
15° का हिसाब बोर्ड पर। किताब 15 × 24 = 360 लिखती है। हमारी ओर से: उलटी दिशा से भी करवाइए, 360 ÷ 24 = 15। फिर किताब के चित्र 1.7 वाली पंक्तियाँ बोर्ड पर बनाइए:
| देशांतर | 45° प. | 30° प. | 15° प. | 0° | 15° पू. | 30° पू. | 45° पू. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्थानीय समय | 9 पूर्वाह्न | 10 पूर्वाह्न | 11 पूर्वाह्न | 12 मध्याह्न | 1 अपराह्न | 2 अपराह्न | 3 अपराह्न |
हमारी ओर से अभ्यास: यही पंक्ति आगे बढ़वाइए। 60° पू. पर कितने बजे? (12 + 60 ÷ 15 = 4 अपराह्न) 90° प. पर? (12 − 90 ÷ 15 = 6 पूर्वाह्न)
सावधानी
उज्जयिनी की मध्य रेखा पर किताब जितना कहती है, उतना ही कहिए। किताब कहती है कि यूरोप से अनेक शताब्दियों पहले भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर थी, जिसे मध्य रेखा कहा जाता था और जो उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) के मध्य से गुजरती थी; कि लगभग 1500 वर्ष पहले वराहमिहिर यहाँ रहे; और कि “उज्जयिनी याम्योत्तर सभी भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं के लिए एक प्रमुख संदर्भ बन गया था।” (पृष्ठ 16) किताब यह नहीं बताती कि मध्य रेखा किस वर्ष से चली, और न यह कि आज का भारतीय मानक समय इसी रेखा पर है। चित्र 1.5 का 75.8° पू. इसी पुरानी रेखा पर लिखा मान है, आई.एस.टी. का नहीं; भारतीय मानक समय किस याम्योत्तर पर आधारित है, यह संख्या इस अध्याय में है ही नहीं।
बिना पैमाने वाले चित्रों पर दूरी मत नपवाइए। चित्र 1.8 के नीचे लिखा है: “मानचित्र पैमाने पर आधारित नहीं है।” उसकी अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ भी किताब के शब्दों में “अनुमानित हैं, सटीक नहीं”। चित्र 1.5 पर भी पैमाने वाली यही चेतावनी छपी है। दूरी का हिसाब सिर्फ़ उसी मानचित्र पर करवाइए जिस पर स्केल दिया हो, जैसे प्रश्न 1 में चित्र 5.2।
समय कम हो तो — छह बातें जो हर बच्चे तक पहुँचें
- मानचित्र के तीन मुख्य घटक: दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।
- पृथ्वी लगभग गोलाकार है, इसलिए ग्लोब समतल मानचित्र से बेहतर है।
- अक्षांश: भूमध्य रेखा से दूरी, 0° से 90° उ. या द. तक।
- देशांतर: प्रमुख याम्योत्तर (ग्रिनिच, 1884) से दूरी, 0° से 180° पू. या प. तक। अक्षांश और देशांतर मिलकर किसी जगह के दो निर्देशांक हैं।
- हर 15° देशांतर पर एक घंटा: पूर्व में जोड़िए, पश्चिम में घटाइए। भारतीय मानक समय जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° पर है; उसे पार करने पर तिथि में एक दिन बदल जाता है।
अभ्यास के लिए: प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड।