Chapter 10आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन

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स्रोत: NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे — भाग 1, कक्षा 6। अध्याय 10, पृष्ठ 149–162 (विषय-सूत्र: शासन और लोकतंत्र)। PDF: fhes110.pdf — 14 पृष्ठ। वर्गीकरण: CORRUPT (टूटा हुआ ToUnicode — 0.7% खंडित संयुक्ताक्षर)। पाठ-परत निकाली नहीं गई — सभी 14 पृष्ठ चित्र रूप में पढ़े गए।

यह फ़ाइल इस अध्याय का एकमात्र स्रोत है। शेष सभी दस्तावेज़ इसी से बनते हैं। PDF अब दोबारा नहीं खोली जाएगी।

0. यह अध्याय किस बारे में है

यह अध्याय 9 के बाद आता है और उसी की सीढ़ी पर अगला पायदान है।

अध्याय 9 ने दिखाया था कि समुदायों में अलिखित नियम होते हैं, और “इन समुदायों में रहने वाले लोग इन नियमों और कानूनों के निर्माण में भागीदार होते हैं।”

अध्याय 10 वहीं से उठाता है और पूछता है — तो फिर देश के नियम कौन बनाता है, कौन लागू करता है, और कौन देखता है कि वे तोड़े तो नहीं गए?

अध्याय की पूरी रीढ़ —तीन और तीन★★

सरकार के तीन अंग (पृ. 153–154)सरकार के तीन स्तर (पृ. 155–157)
1विधायिका — कानून बनाती हैस्थानीय सरकार
2कार्यपालिका — कानून लागू करती हैराज्य सरकार
3न्यायपालिका — निर्णय करती है कि कानून टूटा या नहींकेंद्र / संघ सरकार

!! इस अध्याय का सबसे बड़ा जाल यही है — ‘अंग’ और ‘स्तर’ अलग-अलग चीज़ें हैं

दोनों तीन हैं, इसलिए बच्चे उन्हें मिला देते हैं।

अंग = काम का बँटवारा (कौन क्या करता है) — यह आड़ा (horizontal) बँटवारा है। स्तर = क्षेत्र का बँटवारा (कौन कहाँ तक) — यह खड़ा (vertical) बँटवारा है।

और तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं। (यह वाक्य कक्षा में अवश्य कहिए।)

पुस्तक ने भी दोनों के लिए अलग-अलग चित्र दिए हैं — चित्र 10.3 एक पहिया है (अंग), और चित्र 10.4 एक पिरामिड है (स्तर)। यह भेद चित्रों से ही पढ़ाइए।

और तीसरी बात — लोकतंत्र

अध्याय अंत में लोकतंत्र पर आता है, और उसे ‘पूरी रूपरेखा’ कहता है (पृ. 160) — यानी अंग और स्तर उस ढाँचे के भीतर काम करते हैं।

1. आवरण पृष्ठ (पृ. 149)

दो उद्धरण — और यह पहला अध्याय है जिसमें एक संस्कृत श्लोक है★

पहला — महाभारत से:

“राजानां धर्मगोप्तारं धर्मो रक्षति रक्षितः” “शासक धर्म की रक्षा करता है और जो धर्म की रक्षा करते हैं, धर्म उनकी रक्षा करता है।” — महाभारत

दूसरा — रिगोबर्टा मेन्चु तुम से:

“न्याय के बिना शांति नहीं; समानता के बिना न्याय नहीं; विकास के बिना समानता नहीं; संस्कृति और लोगों की पहचान और सम्मान के बिना लोकतंत्र नहीं।” — रिगोबर्टा मेन्चु तुम

★दोनों उद्धरण एक ही बात कहते हैं, दो अलग भाषाओं और दो अलग महाद्वीपों से — शासन तभी टिकता है जब वह किसी बड़े मूल्य की रक्षा करता हो।

पहला ‘धर्म’ की बात करता है, दूसरा ‘पहचान और सम्मान’ की।

! ‘धर्म’ का अर्थ यहाँ भी ‘कर्तव्य’ और ‘न्यायसंगत व्यवस्था’ है, religion नहीं — ठीक वैसे ही जैसे अध्याय 9, पृ. 140 पर था। यह जोड़ कक्षा में बनाइए।

! सत्यापन: दोनों उद्धरणों पर टिप्पणी 10-Verification-Log.md में है। रिगोबर्टा मेन्चु के मूल कथन में एक कड़ी अधिक है, जो पुस्तक के अनुवाद में नहीं आई। यह कक्षा में नहीं उठाना है।

तीन महत्वपूर्ण प्रश्न(पृ. 149)

  1. ‘शासन’ का अर्थ क्या है?
  2. हमें सरकार की आवश्यकता क्यों होती है?
  3. ‘लोकतंत्र’ का अर्थ क्या है? यह क्यों महत्वपूर्ण है?

आवरण-चित्र — शब्द-मेघ (word cloud)

पृष्ठ के निचले आधे भाग में एक शब्द-मेघ है, जिसमें अध्याय के मुख्य शब्द अलग-अलग आकार में छपे हैं:

लोकतंत्र · शासन · सभा · कानून · संसद · लोक सभा · विधायिका · कार्यपालिका · न्यायपालिका · प्रतिनिधि

★कक्षा 1 के आरंभ में यह पृष्ठ बिना कुछ बताए दिखाइए और पूछिए — “इनमें से कौन-से शब्द तुम पहले से जानते हो?” यह दो मिनट में बता देता है कि कक्षा कहाँ खड़ी है।

2. परिचय — नियम क्यों चाहिए (पृ. 150)

पुस्तक का तर्क, तीन चरणों में

“दीर्घकाल से मनुष्य समाज में रहता आ रहा है। जब बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तब असहमति और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में, समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम अनिवार्य हो जाते हैं।”

फिर पुस्तक नियमों के उदाहरण गिनाती है, और वे जान-बूझकर बच्चे के अपने जीवन से हैं —

कहाँकौन-से नियम
घरकुछ सामान्य नियम, जिनके पालन की अपेक्षा आपसे होती है
विद्यालयकुछ विद्यार्थियों के लिए, तो कुछ शिक्षकों के लिए
परीक्षाबड़ी कक्षाओं में अनिवार्य नियम
सड़कयातायात के नियम
नौकरीनियोक्ता द्वारा बनाए गए नियम — और नियोक्ता भी उन्हीं से बँधा है

★★आख़िरी पंक्ति सबसे ज़रूरी है, और वह लगभग हमेशा छूट जाती है: ”…जबकि नियोक्ता को भी उन सभी नियमों का पालन करना पड़ता है जो उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले लोगों के लिए बनाए हैं।”

यानी नियम बनाने वाला भी नियम से बँधा होता है। यही आगे चलकर ‘शक्तियों का पृथक्करण’ और ‘कानून का शासन’ बनता है।

और फिर परिणाम:

“यदि कोई व्यक्ति नियम का पालन नहीं करता है, तो क्या होगा? इसका सीधा-सा उत्तर है कि समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हो पाएगा।”

तीन परिभाषाएँ — पुस्तक की अपनी, और तीनों याद कराने योग्य★★

पदपुस्तक की परिभाषा (पृ. 150)
शासन“निर्णयों को लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना ही शासन कहलाता है।”
सरकार“उन व्यक्तियों के समूह या तंत्र को कहते हैं जो नियम बनाते और इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।”
कानून“कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है।”

★इन तीनों का अंतर एक वाक्य में: शासन एक प्रक्रिया है। सरकार एक तंत्र है। कानून एक अधिक महत्वपूर्ण नियम है।

कक्षा में पूछिए: “क्या शासन और सरकार एक ही चीज़ हैं?” — उत्तर: नहीं। सरकार शासन करती है; शासन वह काम है जो वह करती है।

नियम बदले भी जा सकते हैं (पृ. 150–151)★

“इसका यह तात्पर्य कदापि नहीं है कि जो नियम और कानून एक बार बन गए, वे सदा के लिए बन गए।”

पुस्तक की सीढ़ी — छोटे से बड़े की ओर:

कहाँकिससे बात कर सकते हैं
घरमाता-पिता से किसी विशेष नियम पर चर्चा
विद्यालय / विश्वविद्यालयविद्यार्थी संघ या प्रबंधन से नियमों में बदलाव के लिए कह सकते हैं
समाज“कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात रख सकते हैं। हम जानेंगे कि ऐसा किस प्रकार होता है।”

★यह वादा पुस्तक अध्याय के अंत में पूरा करती है — प्रतिनिधि, चुनाव और आधारभूत लोकतंत्र के रूप में। कक्षा में यह वादा बोलकर दर्ज कीजिए और अंत में उस पर लौटिए।

आइए पता लगाएँ (पृ. 150)

  • पृष्ठ 151 पर चित्र 10.1 में दिए गए दो चित्रों के बारे में बताइए। आप उनमें क्या अंतर पाते हैं?
  • नियमों पर हमारी चर्चा से आप इसे कैसे जोड़कर देखते हैं?
  • आपके विद्यालय में कौन-कौन से नियम हैं? उन्हें किसने बनाया?

3. चित्र 10.1 — दो सड़कें (पृ. 151)★

यह अध्याय का सबसे सरल और सबसे प्रभावी चित्र है, और वह पूरा पृष्ठ घेरता है।

ऊपर वाला चित्रनीचे वाला चित्र
क्या दिखता हैएक चौराहा — यातायात संकेतक (लाल-पीली-हरी बत्तियाँ), ज़ेब्रा क्रॉसिंग, ‘रुकना मना है’ का चिह्न, चौड़े फ़ुटपाथएक खचाखच भरी सड़क — कारें, बसें, ऑटो, साइकिलें, ठेले और पैदल चलते लोग सब एक-दूसरे में उलझे हुए
वाहनअपनी-अपनी लेन में, संकेतक के अनुसार रुके हुएहर दिशा में, कोई लेन नहीं
पैदल यात्रीज़ेब्रा क्रॉसिंग परवाहनों के बीच से
भावव्यवस्थाअव्यवस्था

★इसे दिखाने का सही तरीक़ा — कैप्शन ढँककर

दोनों चित्र दिखाइए और केवल यह पूछिए: “इनमें क्या अंतर है?”

कक्षा से जो आए, वह बोर्ड पर लिखिए। फिर दूसरा प्रश्न: “दूसरे चित्र में लोग नियम तोड़ रहे हैं, या वहाँ नियम हैं ही नहीं?”

★यह दूसरा प्रश्न ही असली प्रश्न है — और उसका उत्तर पुस्तक ने पहले ही दे दिया है: “यदि कोई व्यक्ति नियम का पालन नहीं करता है, तो… समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हो पाएगा।”

4. चित्र 10.2 — सरकार क्या-क्या करती है (पृ. 152)

पूरे पृष्ठ पर दस चित्र, कोई पाठ नहीं। वे लोक सेवाओं के प्रकार दिखाते हैं:

#चित्रकौन-सा कार्य
1सड़क बनाती हुई मशीनेंअवसंरचना — सड़क निर्माण
2तेज़ गति की रेलगाड़ीपरिवहन — रेल
3सीमा पर पंक्तिबद्ध सैनिकरक्षा और सीमा सुरक्षा
4अस्पताल में जाँच करती चिकित्सक और एक परिवारजन-स्वास्थ्य
5मलबे से घायल को निकालते अग्निशमन/बचाव कर्मीआपदा प्रबंधन एवं अग्निशमन
6यातायात पुलिसकर्मी हाथ उठाकर रोकते हुएकानून-व्यवस्था और यातायात
7सर्वोच्च न्यायालय का भवनन्याय व्यवस्था
8कक्षा में पढ़ाती हुई शिक्षिकाशिक्षा
9लाल डाक-पेटी के पास डाकियाडाक सेवा
10कार्यालय में काउंटर पर काम कराते लोगसरकारी सेवाएँ / प्रशासन

आइए पता लगाएँ (पृ. 153)

  • क्या आप पृष्ठ 152 पर चित्र 10.2 में दिए गए दस चित्रों में दर्शाए लोक सेवाओं के प्रकार अथवा अन्य कार्यकलापों की पहचान कर सकते हैं?
  • आपके विचार से इन कार्यकलापों में सरकार की क्या भूमिका होती है?
  • क्या आप अपने दैनिक जीवन के ऐसे अन्य पहलुओं पर भी विचार कर सकते हैं जहाँ सरकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है?

★यह गतिविधि पूरी कक्षा में सबसे तेज़ चलती है, और उसका कारण यह है कि हर बच्चा कम से कम पाँच चित्र पहचान लेता है। दस मिनट में यह अध्याय का दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न — “हमें सरकार की आवश्यकता क्यों होती है?” — अपने आप उत्तर पा लेता है।

5. सरकार के तीन अंग (पृ. 153–154)★★

पुस्तक इसे एक आधुनिक उदाहरण से खोलती है — और यह चुनाव बहुत अच्छा है

पहले वह दिखाती है कि तकनीक ने जीवन बदला —

“भारत में 30 वर्ष पहले तक” लोग डाकघर की पंक्ति में लगकर फॉर्म भरकर मनी ऑर्डर भिजवाते थे; या बैंक की पंक्ति में लगकर डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर डाक से भेजते थे। “आपने शायद इन शब्दों (‘मनी ऑर्डर’ या ‘डिमांड ड्राफ्ट’) को कभी न भी सुना हो क्योंकि आज हमारे पास तुरंत पैसे भेजने के लिए डिजिटल संसाधन भी उपलब्ध हैं।”

फिर वह दिखाती है कि उसी तकनीक ने एक नई समस्या भी बनाई —

“डिजिटल तकनीक ने विशेष प्रकार के अपराधियों को भी जन्म दिया है जो अपने स्थान पर बैठे-बैठे डिजिटल माध्यमों से लोगों की धनराशि चुराने के तरीके ढूँढ़ते हैं।”

और अब तीनों अंग एक साथ काम करते दिखते हैं —

क्रमक्या हुआकौन-सा अंग
1“अनेक सरकारों ने नए कानून बनाए हैं”विधायिका
2साइबर अपराधियों को “गिरफ्तार भी किया गया है” (साइबर पुलिस)कार्यपालिका
3“न्यायालय द्वारा उन्हें दोषी ठहराया गया है”; “आर्थिक दंड के साथ-साथ जेल की सजा”न्यायपालिका

★★यह उदाहरण अध्याय का सबसे अच्छा शिक्षण-उपकरण है, और उसका कारण यह है कि उसमें तीनों अंग एक ही कहानी में दिखते हैं — अलग-अलग परिभाषाओं में नहीं। परिभाषाएँ बाद में दीजिए; कहानी पहले।

तीनों परिभाषाएँ — पुस्तक के शब्दों में

अंगपरिभाषा
विधायिका (पृ. 153)“वह अंग है जो नए कानून बनाती है और कभी-कभी पुराने कानूनों में संशोधन तथा वर्तमान कानून को निरस्त भी करती है। यह कार्य जनता के प्रतिनिधियों की सभा द्वारा किया जाता है।”
कार्यपालिका (पृ. 153–154)“वह अंग है जो कानूनों को लागू करती है। इसके अंतर्गत राष्ट्र-राज्य के प्रमुख (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री), मंत्रीगण और ऐसे अभिकरण (एजेंसी) आते हैं जिनका दायित्व कानून को लागू करवाना होता है। (यहाँ दिए गए उदाहरण में साइबर पुलिस ऐसी ही एजेंसी है।)”
न्यायपालिका (पृ. 154)“न्यायालयों की प्रणाली है जो इस बात का निर्णय करती है कि क्या किसी ने कानून तोड़ा है और यदि तोड़ा है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाए? या फिर, यदि आवश्यक हो, तो उसे क्या दंड दिया जाए?”

★विधायिका की परिभाषा में तीन क्रियाएँ हैं, और बच्चे प्राय: केवल पहली याद रखते हैं: बनाना · संशोधन करना · निरस्त करना। तीनों बोर्ड पर लिखवाइए।

और न्यायपालिका की परिभाषा का दूसरा हिस्सा — यह सबसे महत्वपूर्ण है★★

“कभी-कभी यह इस बात की भी जाँच करती है कि क्या कार्यपालिका द्वारा लिया गया कोई निर्णय ठीक है या नहीं; अथवा विधायिका द्वारा पारित किया गया कोई कानून भली-भाँति परखा गया है और सभी के हित में है या नहीं।” (पृ. 154)

★यानी न्यायपालिका केवल नागरिकों को नहीं परखती — वह बाक़ी दो अंगों को भी परखती है। यही ‘नियंत्रण और संतुलन’ का असली अर्थ है, और यह वाक्य लगभग हमेशा जल्दी में पढ़ लिया जाता है।

आइए पता लगाएँ (पृ. 154)

“ऊपर दिए गए साइबर अपराधियों के मामले में सरकार के तीनों अंग किस प्रकार कार्य करते हैं, वर्णन कीजिए। वे हस्तक्षेप कैसे करते हैं?”

6. शक्तियों का पृथक्करण (पृ. 154)★★

“सुशासन के किसी भी तंत्र में इन तीनों अंगों को निश्चित रूप से पृथक रखा जाता है, जबकि ये तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं। यह विभाजन ‘शक्तियों का पृथक्करण’ कहलाता है (चित्र 10.3)।”

और उद्देश्य — शब्दश::

“इसका उद्देश्य पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना है, अर्थात सरकार का प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है तथा यदि कोई अंग अपनी अपेक्षित भूमिका से परे जाकर कार्य कर रहा है, तो उसे नियंत्रित कर पुन: संतुलन स्थापित कर सकता है।”

यहाँ एक बारीकी है जो कक्षा में अवश्य खोलनी चाहिएध्यान

पुस्तक एक ही वाक्य में दो विपरीत दिखने वाली बातें कहती है —

पहली बातदूसरी बात
तीनों अंग “निश्चित रूप से पृथक रखे जाते हैं”“ये तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं”

★ये विरोधी नहीं हैं, और यही पूरी बात है। ‘पृथक’ का अर्थ ‘अलग-अलग काम’ है, ‘एक-दूसरे से कटे हुए’ नहीं।

कक्षा में यह उपमा काम आती है (पुस्तक की नहीं, पर सुरक्षित है): एक ही टीम में गेंदबाज़, बल्लेबाज़ और विकेटकीपर — काम अलग-अलग, पर टीम एक ही।

चित्र 10.3 — पहिया (पृ. 154)

बीच में एक गोले में लिखा है — शासन। उसके चारों ओर तीन रंगीन खंड हैं: विधायिका (लाल), कार्यपालिका (नीला), न्यायपालिका (नारंगी)। और तीनों के बीच में दोनों दिशाओं वाले पीले तीर हैं।

★★तीर दोनों दिशाओं में हैं — यही चित्र का पूरा संदेश है। कक्षा में पूछिए: “तीर एक तरफ़ क्यों नहीं हैं?” उत्तर: क्योंकि हर अंग दूसरे की निगरानी करता है — कोई ऊपर नहीं है।

आइए पता लगाएँ (पृ. 155)

“कक्षा की एक गतिविधि के रूप में क्या आप किसी ऐसी स्थिति की कल्पना कर सकते हैं जहाँ शासन के तीनों अंगों की शक्तियाँ किसी एक ही समूह के नियंत्रण में आ जाएँ, ऐसे में किस प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न होगी? क्या आप वास्तविक जीवन में सुनी हुई किसी ऐसी परिस्थिति का वर्णन कर सकते हैं?”

! शिक्षक के लिए: यह प्रश्न कल्पना का है, और उसे कल्पना ही रहने दीजिए। विद्यालय, खेल-मैदान या मोहल्ले जैसे उदाहरण सबसे अच्छे रहते हैं — जैसे “अगर एक ही खिलाड़ी नियम बनाए, स्वयं खेले और स्वयं ही अंपायर हो जाए, तो क्या होगा?” यह उपमा पूरे विचार को तीस सेकंड में बैठा देती है।

7. सरकार के तीन स्तर (पृ. 155–156)★★

“अनेक देशों में कोई भी सरकार कई स्तरों पर कार्य करती है। भारत सहित अनेक देशों में यह तीन स्तरों पर कार्य करती है — स्थानीय स्तर, राज्य या प्रादेशिक स्तर और राष्ट्रीय स्तर। प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है।”

पुस्तक की पहली उपमा — बल्ब वाली (पृ. 155)

यदि घर का बल्ब न जलेतो
पहलेबल्ब, स्विच, फ्यूज़ स्वयं जाँचेंगे
फिरबिजली मिस्त्री को बुलाएँगे
और यदि समस्या घर पर नहीं हैबिजली विभाग जाकर शिकायत दर्ज कराएँगे

“यहाँ भी समस्या के समाधान के तीन स्तर हैं।”

★यह उपमा छोटी है और बहुत अच्छी है — क्योंकि यह दिखाती है कि ऊपर वाला स्तर तभी आता है जब नीचे वाला सँभाल न सके। यही असली सिद्धांत है।

पुस्तक की दूसरी उपमा — बाढ़ वाली (पृ. 155–156)★★

यह अध्याय का सबसे परीक्षा-योग्य उदाहरण है, और उसे तालिका में याद कराना चाहिए —

बाढ़ कितनी बड़ीकौन-सा स्तरक्या करता है
“ज्यादा भीषण नहीं”स्थानीय प्राधिकारीस्थिति स्वयं सँभाल लेते हैं
“अनेक नगरों और बहुत से गाँवों को प्रभावित करती है”राज्य सरकारजिम्मेदारी उठाती है, प्रभावित लोगों को बचाने के लिए बचाव दल भेजती है
“भयानक रूप ले लेती है और विशाल क्षेत्र को प्रभावित करती है”केंद्र सरकारमदद के लिए आगे आती है और राहत सामग्री और सेना इत्यादि भेजती है

“इस उदाहरण में आप सरकार के तीनों स्तर के काम देख सकते हैं।”

★कक्षा में यह तालिका बोर्ड पर बनवाइए, और फिर एक और स्थिति देकर वही तालिका भरवाइए — जैसे “मोहल्ले की सड़क टूटी है”, “पूरे राज्य में सूखा है”, “देश की सीमा पर संकट है”। यही PARAKH-शैली का प्रश्न है।

चित्र 10.4 — पिरामिड (पृ. 155)

तीन परतों का पिरामिड, नीचे से ऊपर —

परतबाईं ओर लिखादाईं ओर लिखारंग
नीचेस्थानीय सरकारनगर अथवा ग्राम स्तर परहरा
बीचराज्य सरकारराज्य स्तर परनीला
ऊपरकेंद्र सरकारराष्ट्रीय स्तर परलाल-नारंगी

★★ध्यान दीजिए — स्थानीय सरकार नीचे है, और वह पिरामिड का आधार है। यह केवल चित्र की सजावट नहीं है। पृष्ठ 160 पर पुस्तक स्वयं कहती है कि ‘आधारभूत लोकतंत्र’ “पृष्ठ 155 पर चित्र 10.4 में दिखाए गए पिरामिड का आधार है।”

यानी चित्र 10.4 और ‘आधारभूत लोकतंत्र’ की परिभाषा एक-दूसरे से बँधी हैं। यह जोड़ अवश्य बनाइए — अकेला-अकेला पढ़ाने पर दोनों अधूरे रह जाते हैं।

8. ध्यान रखें — दो आदर्श वाक्य (पृ. 156)

“हमारे अनेक संस्थानों के आदर्श वाक्य हमारे प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान से प्रेरित हैं।”

संस्थाआदर्श वाक्यअर्थ
भारत सरकार‘सत्यमेव जयते’“सत्य की ही विजय होती है”
सर्वोच्च न्यायालय‘यतो धर्मस्ततो जय:’“जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है”

★यह बॉक्स अध्याय 7 और अध्याय 9 दोनों से जुड़ता है — अध्याय 7: प्राचीन ग्रंथ और परंपराएँ। अध्याय 9 और यहाँ: ‘धर्म’ का अर्थ कर्तव्य और न्यायसंगत व्यवस्था।

और यह अध्याय के पहले उद्धरण (महाभारत) से भी जुड़ता है। यह वृत्त कक्षा में पूरा कीजिए।

और एक बहुत काम की सूचना, जो पुस्तक ने स्वयं दी है (पृ. 156)

“सामने के पृष्ठ पर दी गई तालिका में सरकार के तीनों अंगों के राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर किए जाने वाले मुख्य कार्यों की रूपरेखा दी गई है। इनके बारे में विस्तार से (विधान सभाओं की निश्चित भूमिका) कक्षा 7 में पढ़ाया जाएगा। (स्थानीय सरकारों का यहाँ उल्लेख नहीं किया गया है क्योंकि हम आगे के दो अध्यायों में इसे विस्तार से समझेंगे।)”

!! यह पंक्ति शिक्षक के लिए बहुत महत्वपूर्ण है — और वह अक्सर छूट जाती है।

चित्र 10.5 की तालिका में स्थानीय सरकार जान-बूझकर नहीं है। यदि कोई विद्यार्थी पूछे कि “स्थानीय स्तर का कॉलम कहाँ है?” — तो उत्तर है: वह अध्याय 11 और 12 में आएगा।

★इसे ‘तालिका अधूरी है’ मत कहिए। कहिए कि अभी नहीं आया है।

आइए पता लगाएँ (पृ. 156)

  • चित्र 10.5 में दी गई सारणी को देखिए। उन कार्यों और दायित्वों पर प्रकाश डालिए जो आपके जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।
  • दो अथवा तीन वयस्क लोगों से सरकार के साथ उनके कार्य संबंधित संपर्कों अथवा अनुभवों के बारे में पूछिए — यह संपर्क किन स्तरों पर और किन उद्देश्यों से हुए?

9. चित्र 10.5 — पूरी तालिका (पृ. 157)★★

यह अध्याय का सबसे सघन पृष्ठ है। नीचे वह पूरी तालिका है, जैसी पुस्तक में है।

न्यायपालिका

अखिल भारतराज्य स्तर
न्यायपालिकाभारत का सर्वोच्च न्यायालयउच्च न्यायालय

विधायिका

राष्ट्रीय स्तरराज्य स्तर
विधायिकादो सदन — लोकसभा और राज्य सभा, जो राष्ट्रीय स्तर पर कानूनों का निर्माण करते हैंराज्य का एक विधानमंडल अथवा विधान सभा (ध्यान रहे कि अधिकांशत: राज्यों में विधान सभा होती, जबकि कुछ राज्यों में विधान सभा के साथ-साथ एक विधान परिषद भी होती है)

कार्यपालिका

संघ सरकारराज्य सरकार
कार्यपालिकाभारत के राष्ट्रपति (औपचारिक प्रमुख और तीनों सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर) द्वारा संचालित; प्रधानमंत्री — कार्यपालिका के प्रमुखराज्यपाल (औपचारिक प्रधान) द्वारा संचालित; मुख्यमंत्री — कार्यपालिका के प्रमुख

कार्यपालिका के कार्य और दायित्व(पुस्तक स्वयं कहती है — “यह विस्तृत सूची नहीं है”)

संघ सरकारराज्य सरकार
रक्षापुलिस, कानून व्यवस्था
विदेशी मामलेराज्य स्तर पर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को अपनाना और उनका कार्यान्वयन करना
परमाणु ऊर्जाजन-स्वास्थ्य
संचारशिक्षा
मुद्राकृषि
अंतर्राज्यीय वाणिज्यसिंचाई
शिक्षास्थानीय सरकार
राष्ट्रीय नीतियों का प्रतिपादन

★★इस तालिका में एक बात ध्यान से देखिए — ‘शिक्षा’ दोनों तरफ़ है

यह छपाई की भूल नहीं है, और यह इस तालिका का सबसे शिक्षाप्रद बिंदु है।

कुछ विषयों पर केंद्र और राज्य, दोनों काम करते हैं। कक्षा में यह प्रश्न पूछिए: “तालिका में कोई एक शब्द दोनों तरफ़ है — कौन-सा?” जो बच्चा ‘शिक्षा’ खोज ले, उसे अतिरिक्त मान्यता दीजिए।

! पर आगे मत बढ़िए। पुस्तक ने समवर्ती सूची शब्द नहीं दिया है, और कक्षा 6 में उसकी आवश्यकता भी नहीं है। इतना कहना पर्याप्त है कि कुछ विषय दोनों के साझा हैं।

हाशिये की दो परिभाषाएँ(पृ. 157)

पदपुस्तक की परिभाषा
सदन“ऐसी सभा जहाँ कानूनों पर चर्चा की जाती है अथवा उन्हें पारित किया जाता है।”
औपचारिक“हमारे यहाँ राष्ट्रपति और राज्यपाल वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख नहीं होते हैं। विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, पर वे सामान्यत: केंद्र या राज्य सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं।”

★★‘औपचारिक’ वाली परिभाषा सबसे अधिक परीक्षा-योग्य है, और सबसे अधिक ग़लत भी होती है।

राष्ट्रपति = औपचारिक प्रमुख। प्रधानमंत्री = कार्यपालिका के प्रमुख। राज्यपाल = औपचारिक प्रधान। मुख्यमंत्री = कार्यपालिका के प्रमुख।

! पर पुस्तक का हेज मत गिराइए — “विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं” और “सामान्यत:”। पुस्तक यह नहीं कह रही कि राष्ट्रपति के पास कोई शक्ति नहीं है।

10. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पृ. 158)★

तथ्य-सूची

क्याविवरण
जन्म1931, तमिलनाडु के रामेश्वरम में, एक सामान्य परिवार में
पहचानसुप्रसिद्ध वैज्ञानिक; ‘मिसाइल मैन’
किसलिएभारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका
पदभारत के 11वें राष्ट्रपति
कब2002 से 2007 तक

और पुस्तक जो बात इस बॉक्स के लिए चुनती है, वह बहुत सोची-समझी है —

“डॉ. कलाम ने यह दिखाया कि भले ही राष्ट्रपति के रूप में उनकी स्थिति सांकेतिक है, फिर भी वे असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”

★★यह बॉक्स यहाँ क्यों है — यह कक्षा में अवश्य बताइए

ठीक एक पृष्ठ पहले (पृ. 157) पुस्तक ने कहा था कि राष्ट्रपति ‘औपचारिक’ प्रमुख होते हैं।

और अगले ही पृष्ठ पर वह डॉ. कलाम का उदाहरण देती है — यह दिखाने के लिए कि ‘औपचारिक’ का अर्थ ‘प्रभावहीन’ नहीं होता।

यह जोड़ अध्याय की सबसे सुंदर रचना है, और वह पूरी तरह चुप है — पुस्तक इसे कहीं समझाती नहीं। शिक्षक का काम यही जोड़ बनाना है।

छह प्रेरणादायक विचार(पृ. 158 — रंगीन बॉक्सों में)

  1. “आकाश की ओर देखिए। हम अकेले नहीं हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड हमारा मित्र है और जो लोग (ऊँचे) सपने देखते और उसके लिए काम करते हैं, वह उन्हें सर्वोत्तम सहायता देने के लिए तत्पर है।”
  2. “अपने लक्ष्य में सफल होने के लिए अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त निष्ठा रखिए।”
  3. “स्वप्न का अर्थ सोते समय स्वप्न देखना नहीं है, बल्कि स्वप्न वे हैं जो आपको सोने न दें।”
  4. ★“यदि आप असफल होते हैं, तो भी हार नहीं मानिए। एफ.ए.आई.एल. का अर्थ है — ‘फर्स्ट एटेम्प्ट इन लर्निंग’, यानी सीखने की दिशा में पहला प्रयास। अंत, अंत (द एंड) नहीं है। वास्तव में ई.एन.डी. का अर्थ है — ‘एफर्ट नेवर डाइज़’ अर्थात प्रयास कभी निरर्थक नहीं होते हैं। यदि आपको उत्तर में ‘ना’ (एन.ओ.) मिलता है, तो इसका अर्थ है — ‘नेक्स्ट अपॉरचुनिटी’, अर्थात अगले अवसर के लिए तैयार रहें। अत: सकारात्मक रहें।”
  5. “यदि चार बातों का ध्यान रखें — बड़ा लक्ष्य रखना, ज्ञान हासिल करना, कठिन परिश्रम करना और सतत प्रयास करना, तो कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है।”

★चौथा उद्धरण सबसे लोकप्रिय है और उसमें तीन संक्षेप हैं — FAIL · END · NO। इन्हें बोर्ड पर लिखवाइए। बच्चे इन्हें सालों याद रखते हैं।

11. लोकतंत्र (पृ. 159–160)★★

शब्द की जड़ — शब्दश:

“इसका अंग्रेजी शब्द ‘डेमोक्रेसी’ है जो ग्रीक भाषा के दो शब्दों ‘डेमोस’ अर्थात ‘लोग’ और ‘क्रेटोस’ अर्थात ‘शासन प्रणाली या तंत्र या शक्ति’ से बना है, अत: डेमोक्रेसी का शाब्दिक अर्थ हुआ लोक-शासन या गणतंत्र (लोगों का शासन)।”

ग्रीक शब्दअर्थ
डेमोसलोग
क्रेटोसशासन प्रणाली या तंत्र या शक्ति

और फिर पुस्तक असली प्रश्न पूछती है★

“परंतु क्या सभी लोग एक साथ शासन कर सकते हैं? स्पष्ट है कि यह संभव नहीं है।”

और उसका उत्तर वह कक्षा के अपने उदाहरण से देती है —

स्थितिसमाधान
कक्षा की कोई समस्या प्रधानाचार्य तक ले जानी हैपूरी कक्षा नहीं जा सकती — “स्पष्ट है कि यह व्यावहारिक नहीं होगा”
तो?कक्षा मॉनीटर या कक्षा-प्रतिनिधि का चयन करती है
यदि मॉनीटर न हो?किसी विशेष कार्य के लिए एक प्रतिनिधि चुना जा सकता है

“यही सिद्धांत राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू होता है।”

प्रतिनिधि — और उनके दो नाम★★

“चुनावों के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों को वोट देकर चयन करती है जो संबंधित सभा के चयनित सदस्य होते हैं।”

स्तरप्रतिनिधि को क्या कहते हैंकहाँ बैठते हैं
राज्यविधायकविधान सभा
राष्ट्रसांसदलोक सभा

और वे वहाँ क्या करते हैं —

“ये सभी चयनित सदस्य विधान सभा/लोक सभा में कानूनों पर चर्चा करते हैं। समस्याओं और समाधानों पर विचार-विमर्श करते हैं। मतभेद की स्थिति में एक-दूसरे से संवाद और तर्क-वितर्क द्वारा समस्या का हल करने का प्रयास करते हैं।”

★आख़िरी वाक्य पर रुकिए — “मतभेद की स्थिति में… संवाद और तर्क-वितर्क द्वारा”। यह लोकतंत्र की सबसे कम पढ़ाई जाने वाली बात है: लोकतंत्र मतभेद को मिटाता नहीं, उसे बातचीत में बदल देता है।

चित्र (पृ. 159)

मतदान का दृश्य — एक मेज़ के पीछे बैठे मतदान-कर्मी, और एक मतदाता जिसकी उँगली पर स्याही लगाई जा रही है; पीछे और लोग खड़े हैं।

भारत के आँकड़े (पृ. 160)

क्याविवरण
किस प्रकार का लोकतंत्र‘जन प्रतिनिधि’ आधारित
कब के परिप्रेक्ष्य में2024
मतदातालगभग 97 करोड़
विश्व में स्थान“भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है”
मतदान की आयु18 वर्ष से ऊपर के सभी भारतीय नागरिक

12. प्रत्यक्ष लोकतंत्र और आधारभूत लोकतंत्र (पृ. 160)★★

पिकनिक वाला उदाहरण

कक्षा को पिकनिक पर जाना है। दो संभावित स्थान हैं — ‘क’ और ‘ख’।

कक्षा लाभ-हानि पर विचार-विमर्श करती है — उनकी दूरी, पहुँचने में लगने वाला समय, खर्च, मूलभूत आवश्यकताओं की उपलब्धता आदि।

पर सबकी सहमति नहीं बनती।

तब शिक्षक निर्णय लेते हैं कि मतदान से हल निकल सकता है — ‘क’ चाहने वाले हाथ उठाएँ, फिर ‘ख’ चाहने वाले। जिस विकल्प के लिए सबसे ज़्यादा हाथ उठे, वही चुन लिया जाता है।

“यह प्रक्रिया मतदान (वोटिंग) कहलाती है। यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण है, जहाँ स्थान निश्चित करने में प्रत्येक विद्यार्थी की राय ली गई।”

★★दोनों को साथ रखिए — यही परीक्षा का प्रश्न है

प्रत्यक्ष लोकतंत्रप्रतिनिधि लोकतंत्र
कौन निर्णय लेता हैहर व्यक्ति स्वयंचुने हुए प्रतिनिधि
पुस्तक का उदाहरणपिकनिक का मतदानकक्षा-मॉनीटर; विधायक और सांसद
कब चलता हैजब समूह छोटा होजब समूह बड़ा हो — “क्या पूरी कक्षा प्रधानाचार्य के पास जाएगी?”

पुस्तक का अभ्यास-प्रश्न 1 ठीक यही अंतर पूछता है।

‘आधारभूत / धरातलीय लोकतंत्र’ — अध्याय का शीर्षक-शब्द★★

“आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र उस तंत्र की ओर इशारा करता है, जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है, जैसे कि पृष्ठ 155 पर चित्र 10.4 में दिखाए गए पिरामिड का आधार है। इस प्रकार के तंत्र में नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।”

★★यह परिभाषा अध्याय के शीर्षक की व्याख्या है — और वह अंतिम पृष्ठों में, बहुत शांति से आ जाती है।

तीन बातें इसमें हैं: (1) सामान्य नागरिकों की भागीदारी — प्रोत्साहित और सुनिश्चित। (2) पिरामिड का आधार — यानी स्थानीय स्तर। (3) “नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।”

★और तीसरी बात ठीक वही वादा है जो पुस्तक ने पृष्ठ 151 पर किया था — “कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात रख सकते हैं। हम जानेंगे कि ऐसा किस प्रकार होता है।”

अध्याय जहाँ से शुरू हुआ था, वहीं आकर पूरा होता है। यह वृत्त कक्षा में दिखाइए।

और अंत में पुस्तक आगे का रास्ता बताती है:

“भारतीय लोकतंत्र की अन्य विशेषताओं का अध्ययन हम आगे के दो अध्यायों और अगली कक्षाओं में भी करेंगे।”

13. आगे बढ़ने से पहले… (पृ. 160)

पुस्तक के चार अंतिम बिंदु — शब्दश::

  1. “सरकार और शासन के बिना कोई भी देश नहीं चल सकता।”
  2. “आधुनिक सरकार के तीन अंग हैं — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — जिन्हें एक साथ कार्य करने की आवश्यकता होती है।”
  3. “भारत सरकार तीन स्तरों पर कार्य करती है — संघीय अथवा राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर और स्थानीय स्तर।”
  4. “लोकतंत्र इस प्रणाली की पूरी रूपरेखा है। यह राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर चयनित प्रतिनिधियों के माध्यम से कार्य करती है।”

★बिंदु 2 और 3 साथ-साथ हैं, और वही ‘अंग बनाम स्तर’ का पूरा भेद है। इन्हें एक ही साँस में पढ़ाइए, ताकि अंतर स्वयं दिख जाए।

अभ्यास — प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ (पृ. 161)

  1. स्वयं परखिए — लोकतंत्र का क्या अर्थ है? प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्रतिनिधि लोकतंत्र के बीच क्या अंतर है?
  2. सरकार के तीन अंग कौन-से हैं? उनकी क्या अलग-अलग भूमिकाएँ हैं?
  3. भारत के परिप्रेक्ष्य में हमें त्रिस्तरीय सरकार की आवश्यकता क्यों है?
  4. परियोजना — 2019 की कोविड महामारी के दौरान लगा लॉकडाउन आपको याद होगा। उस समय उठाए गए सभी कदमों की सूची बनाइए। उस स्थिति को संभालने में सरकार के कौन-कौन से स्तर सम्मिलित थे? उसमें सरकार के प्रत्येक अंग की क्या भूमिका थी?

!! प्रश्न 4 में एक तिथि-संबंधी बात है। भारत में देशव्यापी लॉकडाउन 2020 में लगा था, 2019 में नहीं (विवरण 10-Verification-Log.md में)। कक्षा में इसे ‘ग़लती’ कहकर मत उछालिए। प्रश्न का उद्देश्य वर्ष नहीं, बल्कि स्तर और अंग की पहचान है — और वह उद्देश्य पूरी तरह ठीक है। ★सुरक्षित रूप: “कोविड महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में…” — वर्ष कहे बिना पूछिए।


उत्तर-कुंजी — पुस्तक मेंनहीं छपी हैध्यान

(नीचे के उत्तर अध्याय के भीतर से बने हैं। ये शिक्षक के लिए हैं।)

1. लोकतंत्र का अर्थ, और दोनों प्रकारों का अंतर — लोकतंत्र — ग्रीक ‘डेमोस’ (लोग) और ‘क्रेटोस’ (शासन प्रणाली, तंत्र या शक्ति) से बना; शाब्दिक अर्थ लोक-शासन या गणतंत्र (लोगों का शासन)। प्रत्यक्ष लोकतंत्र — जहाँ प्रत्येक व्यक्ति स्वयं निर्णय में भाग लेता है; पुस्तक का उदाहरण पिकनिक के स्थान का मतदान। प्रतिनिधि लोकतंत्र — जहाँ लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, क्योंकि “क्या सभी लोग एक साथ शासन कर सकते हैं? स्पष्ट है कि यह संभव नहीं है।” उदाहरण — कक्षा-मॉनीटर, और बड़े स्तर पर विधायक तथा सांसद।

2. तीन अंग और उनकी भूमिकाएँ — विधायिका — नए कानून बनाती, पुराने में संशोधन करती और वर्तमान कानून निरस्त भी करती है; यह कार्य जनता के प्रतिनिधियों की सभा द्वारा होता है। कार्यपालिका — कानूनों को लागू करती है; इसमें राष्ट्र-राज्य के प्रमुख (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री), मंत्रीगण और अभिकरण (एजेंसियाँ) आते हैं। न्यायपालिका — न्यायालयों की प्रणाली, जो तय करती है कि कानून टूटा या नहीं, क्या कार्रवाई हो और क्या दंड हो; और कभी-कभी यह भी जाँचती है कि कार्यपालिका का निर्णय ठीक है या नहीं, अथवा विधायिका का कानून सभी के हित में है या नहीं। ★पूरे अंक के उत्तर में ‘शक्तियों का पृथक्करण’ और उसका उद्देश्य — ‘नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना’ — अवश्य आना चाहिए।

3. त्रिस्तरीय सरकार क्यों — क्योंकि प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है, और समस्या के आकार के अनुसार उपयुक्त स्तर उसे सँभालता है। पुस्तक के दो उदाहरण: बल्ब (पहले घर, फिर मिस्त्री, फिर बिजली विभाग) और बाढ़ (स्थानीय प्राधिकारी → राज्य सरकार का बचाव दल → केंद्र सरकार की राहत सामग्री और सेना)। ★सर्वोत्तम उत्तर वह है जो कहे कि ऊपर का स्तर तभी आता है जब नीचे का स्तर सँभाल न सके।

4. कोविड परियोजना — यह खुली परियोजना है और हर कक्षा में अलग होगी। ★अपेक्षित ढाँचा — उत्तर को दो तालिकाओं में बाँटना चाहिए:

स्तरक्या किया (उदाहरण)
स्थानीयनगरपालिका/पंचायत की सफ़ाई और छिड़काव; कंटेनमेंट क्षेत्र; राशन वितरण
राज्यअस्पताल और जाँच केंद्र; राज्य के भीतर आवागमन के नियम; स्कूल बंद करना
केंद्रदेशव्यापी घोषणा; अंतर्राज्यीय आवागमन; टीका कार्यक्रम; राहत पैकेज
अंगभूमिका (उदाहरण)
विधायिकाबजट और राहत से जुड़े प्रावधान पारित करना
कार्यपालिकाआदेश जारी करना और उन्हें लागू कराना — पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन
न्यायपालिकायाचिकाओं पर सुनवाई और निर्देश

! इस प्रश्न में तथ्यों की शुद्धता से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि विद्यार्थी ‘स्तर’ और ‘अंग’ को अलग-अलग पहचान सके। मूल्यांकन उसी पर कीजिए।

पृष्ठ 162 — ‘नूडल्स’

अध्याय का अंतिम पृष्ठ खाली है। ऊपर शीर्षक है ‘नूडल्स’, और नीचे तारांकित टिप्पणी:

“नोट्स (Notes) और डूडल्स (Doodles) को मिलाकर बना शब्द-संक्षेप। इस स्थान का उपयोग टिप्पणी और चित्रांकन हेतु कीजिए।”

★यह पृष्ठ छोड़िए मत। कक्षा 4 के अंत में विद्यार्थियों से कहिए कि वे इस पृष्ठ पर ‘शासन’ का अपना चित्र बनाएँ — तीन अंग, या तीन स्तर, या दोनों। जो बच्चा पहिया और पिरामिड दोनों बना ले, उसने अध्याय पकड़ लिया है।

पूरे अध्याय की एक-पृष्ठीय रूपरेखा★

पृष्ठखंडमुख्य बात
149आवरणमहाभारत और रिगोबर्टा मेन्चु तुम के उद्धरण · तीन महत्वपूर्ण प्रश्न · शब्द-मेघ
150परिचयनियम क्यों · शासन · सरकार · कानून की तीन परिभाषाएँ · नियम बदले जा सकते हैं
151चित्र 10.1व्यवस्थित सड़क ↔ अव्यवस्थित सड़क
152चित्र 10.2दस लोक सेवाएँ
153–154तीन अंगसाइबर अपराध का उदाहरण · विधायिका · कार्यपालिका · न्यायपालिका
154शक्तियों का पृथक्करणउद्देश्य — नियंत्रण और संतुलन · चित्र 10.3 (पहिया)
155–156तीन स्तरबल्ब और बाढ़ के उदाहरण · चित्र 10.4 (पिरामिड)
156ध्यान रखेंसत्यमेव जयते · यतो धर्मस्ततो जय:
157चित्र 10.5पूरी तालिका · सदन और औपचारिक की परिभाषाएँ
158डॉ. कलाम1931 · रामेश्वरम · 11वें राष्ट्रपति, 2002–2007 · छह विचार
159–160लोकतंत्रडेमोस + क्रेटोस · विधायक और सांसद · 2024 · ~97 करोड़ · 18 वर्ष
160दो प्रकारप्रत्यक्ष (पिकनिक) ↔ प्रतिनिधि · आधारभूत लोकतंत्र की परिभाषा
160आगे बढ़ने से पहलेचार बिंदु
161–162अभ्यास और नूडल्सचार प्रश्न · खाली पृष्ठ

इस अध्याय के जाल — शिक्षक की सूचीध्यान

#जालसही बात
1★★‘तीन अंग’ और ‘तीन स्तर’ मिला देनाअंग = काम का बँटवारा (चित्र 10.3, पहिया) · स्तर = क्षेत्र का बँटवारा (चित्र 10.4, पिरामिड) · और तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं
2विधायिका और कार्यपालिका उलट देनाविधायिका बनाती है · कार्यपालिका लागू करती है
3विधायिका की केवल एक क्रिया याद रखनाबनाना · संशोधन करना · निरस्त करना — तीनों
4न्यायपालिका की दूसरी भूमिका भूल जानावह कार्यपालिका के निर्णय और विधायिका के कानून की भी जाँच करती है
5राष्ट्रपति को कार्यपालिका का प्रमुख कहनाराष्ट्रपति = औपचारिक प्रमुख · प्रधानमंत्री = कार्यपालिका के प्रमुख (राज्य में: राज्यपाल ↔ मुख्यमंत्री)
6‘औपचारिक’ = ‘प्रभावहीन’ समझनापुस्तक कहती है “विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं” — और डॉ. कलाम का बॉक्स ठीक इसीलिए है
7विधायक और सांसद उलट देनाविधायक = राज्य स्तर · सांसद = राष्ट्रीय स्तर
8प्रत्यक्ष और प्रतिनिधि लोकतंत्र मिला देनाप्रत्यक्ष = पिकनिक का मतदान · प्रतिनिधि = मॉनीटर, विधायक, सांसद
9‘डेमोस’ और ‘क्रेटोस’ उलट देनाडेमोस = लोग · क्रेटोस = शासन प्रणाली/तंत्र/शक्ति
102024 और 18 मिला देना2024 = परिप्रेक्ष्य वर्ष, ~97 करोड़ मतदाता · 18 = मतदान की न्यूनतम आयु
11चित्र 10.5 में स्थानीय स्तर ढूँढ़नावह जान-बूझकर नहीं है — पुस्तक कहती है कि वह अगले दो अध्यायों में आएगा
12‘शिक्षा’ को केवल एक तरफ़ देखनावह तालिका में दोनों तरफ़ है — कुछ विषय साझा हैं

पिछले अध्यायों से जोड़★

जोड़कहाँ
‘अलिखित नियम’ → लिखे हुए कानूनअध्याय 9, पृ. 143 → अध्याय 10, पृ. 150
“नियमों के निर्माण में भागीदार”अध्याय 9, पृ. 146 → अध्याय 10 का ‘आधारभूत लोकतंत्र’ (पृ. 160)
‘धर्म’ = कर्तव्यअध्याय 9, पृ. 140 ↔ अध्याय 10 का महाभारत उद्धरण और सर्वोच्च न्यायालय का आदर्श वाक्य
प्राचीन ग्रंथों से आदर्श वाक्यअध्याय 7 ↔ अध्याय 10, पृ. 156
आगे का रास्तास्थानीय सरकार — अध्याय 11 और 12