Chapter 1पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

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NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6), अध्याय 1

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कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान · पृष्ठ — 7 से 26

यह पन्ना किसलिए — बच्चों की कॉपी में लिखवाने के लिए। हर हिस्सा पाठ योजना के एक कालांश के साथ चलता है, और उसमें किताब की बातें छोटे, सीधे वाक्यों में दी गई हैं। ज़रूरी वाले वाक्य हर हाल में लिखवाइए; समय बचे तो वाले तभी, जब कालांश में समय बचे। हर वाक्य के बाद रुकिए, ताकि पीछे बैठे बच्चे भी लिख लें। जिस वाक्य के आगे (दोहराइए) लिखा है, उसे दो बार बोलिए; यह शब्द बच्चों को नहीं लिखना है। अंश का चिह्न बोलकर पढ़िए, जैसे 90° उ. को नब्बे अंश उत्तर, पर बच्चे अंक और चिह्न ही लिखें, जैसा किताब में छपा है।

हर हिस्से के ऊपर किताब के वे पृष्ठ लिखे हैं, जहाँ से उसकी बातें ली गई हैं; पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं। लिखवाने वाले वाक्य किताब की ही बातें हैं, बच्चों के लिखने लायक़ छोटे करके। बोलकर समझाइए वाले हिस्से आपके लिए हैं, लिखवाने के लिए नहीं।

कालांश 1 — मानचित्र और उसके तीन घटक

(पृष्ठ 8–11)

बोर्ड पर पहले लिखिए: मानचित्र · एटलस (मानचित्रावली) · स्केल · प्रतीक चिह्न · चतुर्दिश · मध्यवर्ती दिशाएँ · ‘उ.’

बोलकर समझाइए: किताब के चित्र 1.1 का छोटा नगर दिखाइए और किताब का ही सवाल पूछिए: रेलवे स्टेशन पर उतरकर बैंक तक किस मार्ग से जाएँगे? फिर बताइए कि मानचित्र ठीक यही काम करता है।

लिखवाइए — ज़रूरी:

  1. मानचित्र किसी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है। (दोहराइए)
  2. मानचित्र में हम सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे ऊपर से देख रहे हों।
  3. एटलस (मानचित्रावली) मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।
  4. मानचित्र के तीन मुख्य घटक हैं: दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न। (दोहराइए)
  5. स्केल बताता है कि मानचित्र का हर सेंटीमीटर धरातल पर कितनी दूरी दिखाता है।
  6. उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम को चतुर्दिश या प्रधान बिंदु कहते हैं।
  7. मानचित्र पर ‘उ.’ लिखा तीर उत्तर दिशा बताता है।
  8. प्रतीक चिह्नों से मानचित्र की थोड़ी-सी जगह में बहुत सारी बातें दिखाई जा सकती हैं।

लिखवाइए — समय बचे तो:

  1. उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम मध्यवर्ती दिशाएँ हैं।
  2. अलग-अलग देश अलग-अलग प्रतीक चिह्न इस्तेमाल करते हैं।
  3. भारत के मानचित्रों के प्रतीक चिह्न भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तय किए हैं।

बोर्ड से उतरवाइए:

मानचित्रक्या दिखाता है
भौतिकपर्वत, महासागर, नदियाँ जैसी प्राकृतिक आकृतियाँ
राजनैतिकदेश, राज्य, सीमाएँ, नगर
थिमैटिककिसी विशेष प्रकार की सूचना

कालांश 2 — पृथ्वी गोल है, कागज़ चपटा

(पृष्ठ 12)

बोर्ड पर पहले लिखिए: लगभग गोलाकार · ध्रुव · समतल · ग्लोब

बोलकर समझाइए: किताब का संतरे वाला प्रयोग कीजिए। छिलका केवल तीन या चार टुकड़ों में उतारिए और मेज़ पर सपाट बिछाने को कहिए। किनारे टूटे बिना यह नहीं होगा।

लिखवाइए — ज़रूरी:

  1. पृथ्वी की आकृति लगभग गोलाकार है। (दोहराइए)
  2. पृथ्वी पूरी गोल नहीं है; वह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है।
  3. समतल कागज़ पर किसी गोल वस्तु को ठीक उसी रूप में बनाना संभव नहीं है।
  4. संतरे के छिलके को मेज़ पर सपाट बिछाएँ, तो उसके किनारे टूट जाते हैं।
  5. ग्लोब एक गोल आकृति है, जिस पर मानचित्र बना होता है।
  6. ग्लोब और पृथ्वी दोनों गोल हैं, इसलिए ग्लोब पृथ्वी को समतल मानचित्र से बेहतर दिखाता है। (दोहराइए)

लिखवाइए — समय बचे तो:

  1. ग्लोब आम तौर पर धातु, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड का बना होता है।
  2. चंद्रमा, मंगल ग्रह, तारों और तारा-मंडल का भी ग्लोब बन सकता है।

कालांश 3 — निर्देशांक का विचार, और अक्षांश

(पृष्ठ 12–14)

बोर्ड पर पहले लिखिए: निर्देशांक · भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) · अक्षांश · समानांतर · अंश (डिग्री) · 0° · 90° उ. · 90° द.

बोलकर समझाइए: किताब के दो उदाहरण सुनाइए: बाज़ार में 5वीं पंक्ति की 7वीं दुकान, और शतरंज में ‘घ’ 2 से ‘घ’ 4 पर बढ़ा प्यादा। दोनों में दो बातें मिलकर एक जगह बताती हैं।

लिखवाइए — ज़रूरी:

  1. दो बातों से किसी जगह को ठीक-ठीक बताने के तरीके को निर्देशांक प्रणाली कहते हैं।
  2. मानचित्र पर किसी स्थान की स्थिति निर्देशांकों से तय की जाती है।
  3. ग्लोब के ऊपरी और निचले बिंदु दो ध्रुव हैं। इनके बीच में भूमध्य रेखा है।
  4. अक्षांश किसी जगह की भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी मापता है। (दोहराइए)
  5. अक्षांश की रेखा को समानांतर भी कहते हैं। यह पृथ्वी के चारों ओर एक वृत्त बनाती है।
  6. सबसे बड़ा वृत्त भूमध्य रेखा है। ध्रुवों की ओर बढ़ने पर वृत्त छोटे होते जाते हैं।
  7. अक्षांश अंशों (डिग्री) में लिखे जाते हैं।
  8. भूमध्य रेखा का अक्षांश 0° है। उत्तर ध्रुव 90° उ. पर और दक्षिण ध्रुव 90° द. पर है। (दोहराइए)

लिखवाइए — समय बचे तो:

  1. अक्षांश और जलवायु के बीच एक संबंध है।

बोर्ड से उतरवाइए:

कहाँजलवायु
भूमध्य रेखा के चारों ओरसामान्यतः उष्ण (गरम)
ध्रुवों की ओर बढ़ते हुएशीतोष्ण
ध्रुवों के निकटशीत (ठंडी)

कालांश 4 — देशांतर, और उज्जयिनी

(पृष्ठ 14–18)

बोर्ड पर पहले लिखिए: याम्योत्तर · देशांतर · प्रमुख याम्योत्तर · ग्रिनिच · प. · पू. · 180° · मध्य रेखा · उज्जयिनी

बोलकर समझाइए: किताब का उदाहरण: एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक यूरोप और अफ्रीका से होकर जाइए या एशिया से होकर, दूरी एक समान होगी। यही रेखाएँ याम्योत्तर हैं।

लिखवाइए — ज़रूरी:

  1. देशांतर की रेखाओं को याम्योत्तर कहते हैं। ये एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाने वाले अर्धवृत्त हैं।
  2. देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का माप है। (दोहराइए)
  3. ग्रिनिच से गुजरने वाली याम्योत्तर प्रमुख याम्योत्तर है। इसका देशांतर 0° है।
  4. देशांतर 0° से 180° तक होता है। पश्चिम के लिए प. और पूर्व के लिए पू. लिखते हैं।
  5. 180° प. और 180° पू. एक ही देशांतर है, इसलिए उसे केवल 180° लिखते हैं। (दोहराइए)
  6. अक्षांश और देशांतर मिलकर किसी स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।
  7. ग्रिनिच याम्योत्तर पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर नहीं है।
  8. भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर मध्य रेखा थी। यह उज्जयिनी (आज का उज्जैन) से गुजरती थी।

लिखवाइए — समय बचे तो:

  1. वर्ष 1884 में कुछ देशों ने ग्रिनिच याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर का अंतर्राष्ट्रीय मानक मानना तय किया।
  2. लगभग 1500 वर्ष पूर्व प्रसिद्ध खगोलविद वराहमिहिर उज्जैन में रहे और वहीं काम किया।
  3. चित्र 1.5 में मध्य रेखा 75.8° पू. पर दिखाई गई है।
  4. भारत लगभग 8° उ. से 37° उ. अक्षांश तक और 68° पू. से 97° पू. देशांतर तक फैला है।

कालांश 5 — समय क्षेत्र

(पृष्ठ 15, 19–21)

बोर्ड पर पहले लिखिए: स्थानीय समय · मानक समय · आई.एस.टी. · जी.एम.टी. · समय क्षेत्र · 24 घंटे · 360° · 15°

बोलकर समझाइए: किताब की कहानी सुनाइए: ढलती दोपहर में तिनसुकिया (असम) में अँधेरा हो गया है, जबकि पोरबंदर (गुजरात) में अभी दिन का प्रकाश है। दोनों के देशांतर में 30° का अंतर है।

लिखवाइए — ज़रूरी:

  1. किसी स्थान के देशांतर से उस स्थान का समय मापा जाता है।
  2. पृथ्वी 24 घंटे में एक चक्कर, यानी 360° घूमती है। इसलिए हर घंटे में 15°। (दोहराइए)
  3. ग्रिनिच से पूर्व की ओर हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा बढ़ता जाता है।
  4. पश्चिम की ओर हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा घटता जाता है।
  5. एक देश में अनेक स्थानीय समय चलाना ठीक नहीं, इसलिए अधिकतर देश एक मानक समय अपनाते हैं।
  6. यह मानक समय देश के बीच से गुजरने वाली याम्योत्तर पर आधारित होता है।
  7. भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.) ग्रिनिच के समय (जी.एम.टी.) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। (दोहराइए)

लिखवाइए — समय बचे तो:

  1. दुनिया के मानक समय समय क्षेत्रों में बँटे हैं।
  2. समय क्षेत्रों की रेखाएँ पूरी सीधी नहीं होतीं, क्योंकि उन्हें देशों की सीमाओं का ध्यान रखना पड़ता है।
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं।

कालांश 6 — अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और सारांश

(पृष्ठ 21–23)

बोर्ड पर पहले लिखिए: अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा · 180° · +12 · −12 · पूर्व की ओर जाते हुए: एक दिन घटाइए · पश्चिम की ओर जाते हुए: एक दिन जोड़िए

बोलकर समझाइए: किताब का चित्र 1.8 दिखाइए: +12 और −12 वाले समय क्षेत्र एक ही रेखा पर आकर मिलते हैं। वही अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा है।

लिखवाइए — ज़रूरी:

  1. प्रमुख याम्योत्तर के विपरीत, लगभग 180° देशांतर वाली रेखा अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा है। (दोहराइए)
  2. +12 और −12 वाले समय क्षेत्र इस रेखा पर एक-दूसरे को छूते हैं।
  3. इस रेखा को पार करने पर तिथि में एक दिन का बदलाव होता है।
  4. पूर्व की ओर यात्रा करते हुए यह रेखा पार करें, तो एक दिन घटाते हैं, जैसे सोमवार से रविवार। (दोहराइए)
  5. पश्चिम की ओर यात्रा करते हुए पार करें, तो एक दिन जोड़ते हैं, जैसे रविवार से सोमवार।
  6. मानचित्र के मुख्य घटक दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न हैं।
  7. पृथ्वी पर हर स्थान की स्थिति अक्षांश और देशांतर के ग्रिड से ठीक-ठीक बताई जा सकती है।
  8. देशांतर से समय तय होता है, और समय क्षेत्र भी।

लिखवाइए — समय बचे तो:

  1. कुछ देशों में एक ही दिन बँट न जाए, इसलिए तिथि रेखा टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है।