Chapter 5समकालीन विश्व में सुरक्षा

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 63–80 (18 पृष्ठ)।

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पढ़ाने से पहलेध्यान

यह अध्याय पहले ‘अध्याय 7’ था — QR कोड 12108CH07। पैटर्न अब पाँचों अध्यायों में पुष्ट: पुराने अध्याय 1 और 3 हटाए गए; 2→1, 4→2, 5→3, 6→4, 7→5.

! और यह अध्याय दो बार दूसरी पुस्तक का संदर्भ देता है — “इस संदर्भ में भारतीय लोकतंत्र की सफलता और असफलताओं के बारे में आप एक और किताब में विस्तार से पढ़ेंगे। यह किताब स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति पर केंद्रित है।” (पृ. 79) — वह पुस्तक 2 है, इसी का कोई अध्याय नहीं।

अध्याय की संरचना

क्रमखंडपृष्ठ
—परिचय63
1सुरक्षा क्या है?64–65
2पारंपरिक धारणा — बाहरी सुरक्षा65–67
3पारंपरिक धारणा — आंतरिक सुरक्षा67–68
4सुरक्षा के पारंपरिक तरीके68–70
5सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा70–72
6खतरे के नये स्रोत72–76
7सहयोगमूलक सुरक्षा76–77
8भारत — सुरक्षा की रणनीतियाँ77–79
—प्रश्नावली — प्रश्न 1 से 1279–80

परिचय (पृ. 63)

  • “विश्व-राजनीति के बारे में पढ़ते हुए अक्सर हमारा सामना ‘सुरक्षा’ अथवा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ जैसे शब्द से होता है। हम सोचते हैं कि इन शब्दों के अर्थ हमें मालूम है। लेकिन, क्या सचमुच हमें इन शब्दों के अर्थ मालूम हैं?”
  • ★“बहस या चर्चा को रोकना हो तो अक्सर इस जुमले का इस्तेमाल होता है। कहा जाता है कि यह सुरक्षा का मसला है और देश की भलाई के लिए बड़ा जरूरी है। ऐसा कहने का मकसद यह जताना होता है कि मसला बड़ा महत्त्वपूर्ण अथवा गुप्त है और इस कारण उस पर खुली चर्चा नहीं हो सकती।”
  • ★★“लेकिन लोकतंत्र में कोई भी बात इतनी ढँकी-छुपी नहीं रखी जा सकती। सुरक्षा के बारे में हमें और ज्यादा जानने की ज़रूरत है।”
  • अध्याय की योजना: “इसमें सुरक्षा को समझने के दो नज़रियों की चर्चा की गई है। अध्याय में इस बात पर जोर दिया गया है कि विभिन्न संदर्भ और स्थितियों को ध्यान में रखना ज़रूरी है क्योंकि इसी से सुरक्षा के बारे में हमारा नज़रिया बनता है।”

आवरण-चित्र (पृ. 63): “ये चित्र सुरक्षा के दो भिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं। कुछ चित्र ग्वेटामाला में चल रहे गृह-युद्ध के हैं… माताएँ युद्ध में खोए अपने बच्चों का इंतजार कर रही हैं… कुछ चित्र बांग्लादेश के हैं। इनमें बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से पैदा हुई असुरक्षा को दिखाया गया है।”

कक्षा के लिए: यही दो पहलू पूरे अध्याय का ढाँचा हैं — युद्ध और आपदा; पारंपरिक और अपारंपरिक।

1. सुरक्षा क्या है? (पृ. 64–65)

1.1 मूल परिभाषा और उसकी समस्या★★

  • ★“सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है खतरे से आजादी।”
  • समस्या: “मानव का अस्तित्व और किसी देश का जीवन खतरों से भरा होता है। तब क्या इसका मतलब यह है कि हर तरह के ख़तरे को सुरक्षा पर खतरा माना जाय?”
  • “आदमी जब भी अपने घर से बाहर कदम निकालता है तो उसके अस्तित्व अथवा जीवन-यापन के तरीकों को किसी न किसी अर्थ में खतरा ज़रूर होता है। यदि हमने खतरे का इतना व्यापक अर्थ लिया तो फिर हमारी दुनिया में हर घड़ी और हर जगह सुरक्षा के ही सवाल नज़र आयेंगे।”

1.2 ‘केंद्रीय मूल्य’ की कसौटी★★

  • ★“इसी कारण जो लोग सुरक्षा विषयक अध्ययन करते हैं उनका कहना है कि केवल उन चीजों को ‘सुरक्षा’ से जुड़ी चीजों का विषय बनाया जाय जिनसे जीवन के ‘केंद्रीय मूल्यों’ को खतरा हो।”
  • ! पर पाठ स्वयं इस कसौटी पर सवाल उठाता है: “तो फिर सवाल बनता है कि किसके केंद्रीय मूल्य? क्या पूरे देश के ‘केंद्रीय मूल्य’? आम स्त्री-पुरुषों के केंद्रीय मूल्य? क्या नागरिकों की नुमाइंदगी करने वाली सरकार हमेशा ‘केंद्रीय मूल्यों’ का वही अर्थ ग्रहण करती है जो कोई साधारण नागरिक?”
  • और दूसरा सवाल: “ये ख़तरे कितने गहरे होने चाहिए?”

1.3 निष्कर्ष★

★★“सुरक्षा का रिश्ता फिर बड़े गंभीर खतरों से है; ऐसे खतरे जिनको रोकने के उपाय न किए गए तो हमारे केंद्रीय मूल्यों को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।”

  • ! और फिर भी: “‘सुरक्षा’ अपने आप में भुलैयादार धारणा है।” — क्योंकि न सदियों-दशकों में विभिन्न समाजों में एक-सी धारणा रही, न किसी एक समय में सभी समाजों में।
  • ★“यह बात भी हजम नहीं होती और आश्चर्यजनक लगती है कि करीब 200 मुल्कों के 7 अरब लोग सुरक्षा की एक जैसी धारणा रखते हों?”
  • ★“ऐसे में आपको यह जानकार कोई धक्का नहीं लगेगा कि सुरक्षा एक विवादग्रस्त धारणा है।”
  • दो कोटियाँ: ★“सुरक्षा की पारंपरिक और अपारंपरिक धारणा।”

साइड-टिप्पणी (पृ. 64): “मेरी सुरक्षा के बारे में किसने फैसला किया? कुछ नेताओं और विशेषज्ञों ने? क्या मैं अपनी सुरक्षा का फैसला नहीं कर सकती?” कार्टून (पृ. 64): कबूतर पर सवार सैनिक — “आपने ‘शांति-सेना’ के बारे में सुना होगा। क्या आपको लगता है कि ‘शांति-सेना’ का होना स्वयं में एक विरोधाभासी बात है?”

2. पारंपरिक धारणा — बाहरी सुरक्षा (पृ. 65–67)

2.1 परिभाषा★★

  • ★“अधिकांशतया जब हम सुरक्षा के बारे में कुछ पढ़ या सुन रहे होते हैं तो हमारा सामना सुरक्षा की पारंपरिक अर्थात् राष्ट्रीय सुरक्षा की धारणा से होता है।”
  • ★“सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा में सैन्य ख़तरे को किसी देश के लिए सबसे ज्यादा ख़तरनाक माना जाता है।”
  • ★“इस ख़तरे का स्रोत कोई दूसरा मुल्क होता है जो सैन्य हमले की धमकी देकर संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता जैसे किसी देश के केंद्रीय मूल्यों के लिए ख़तरा पैदा करता है।”
  • “शायद ही कभी ऐसा होता हो कि किसी युद्ध में सिर्फ सैनिक घायल हों अथवा मारे जायें।” ★“अक्सर निहत्थे और आम औरत-मर्द को जंग का निशाना बनाया जाता है; उनका और उनकी सरकार का हौसला तोड़ने की कोशिश होती है।”

2.2 युद्ध की स्थिति में तीन विकल्प(प्रश्न 6 का उत्तर)★★

“बुनियादी तौर पर किसी सरकार के पास युद्ध की स्थिति में तीन विकल्प होते हैं —”

#विकल्पविवरण
1★आत्मसमर्पण करना“दूसरे पक्ष की बात को बिना युद्ध किए मान लेना”
2★★अपरोध (Deterrence)“युद्ध से होने वाले नाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहमकर हमला करने से बाज आये”
3★★रक्षा (Defence)“युद्ध ठन जाय तो अपनी रक्षा करना ताकि हमलावर देश अपने मकसद में कामयाब न हो सके और पीछे हट जाए अथवा हमलावार को पराजित कर देना”

★★महत्वपूर्ण टिप्पणी: “युद्ध में कोई सरकार भले ही आत्मसमर्पण कर दे लेकिन वह इसे अपने देश की नीति के रूप में कभी नहीं प्रचारित करना चाहेगी। इस कारण, सुरक्षा-नीति का संबंध युद्ध की आशंका को रोकने में होता है जिसे ‘अपरोध’ कहा जाता है और युद्ध को सीमित रखने अथवा उसको समाप्त करने से होता है जिसे रक्षा कहा जाता है।”

2.3 तीसरा तत्व — शक्ति-संतुलन(प्रश्न 7 का उत्तर)★

  • “परंपरागत सुरक्षा-नीति का एक तत्व और है। इसे शक्ति-संतुलन कहते हैं।”
  • ★“कोई देश अपने अड़ोस-पड़ोस में देखने पर पाता है कि कुछ मुल्क छोटे हैं तो कुछ बड़े। इससे इशारा मिल जाता है कि भविष्य में किस देश से उसे खतरा हो सकता है।”
  • “मिसाल के लिए कोई पड़ोसी देश संभव है यह न कहे कि वह हमले की तैयारी में जुटा है। हमले का कोई प्रकट कारण भी नहीं जान पड़ता। फिर भी यह देखकर कि कोई देश बहुत ताकतवर है यह भांपा जा सकता है कि भविष्य में वह हमलावर हो सकता है।”
  • ★“जो देश नजदीक हों, जिनके साथ अनबन हो या जिन देशों के साथ अतीत में लड़ाई हो चुकी हो उनके साथ शक्ति-संतुलन को अपने पक्ष में करने पर ख़ास तौर पर जोर दिया जाता है।”
  • ★“शक्ति-संतुलन बनाये रखने की यह कवायद ज्यादातर अपनी सैन्य-शक्ति बढ़ाने की होती है लेकिन आर्थिक और प्रौद्योगिकी की ताकत भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सैन्य-शक्ति का यही आधार है।”

2.4 चौथा तत्व — गठबंधन(प्रश्न 8 का उत्तर)★

  • ★“पारंपरिक सुरक्षा-नीति का चौथा तत्व है गठबंधन बनाना। गठबंधन में कई देश शामिल होते हैं और सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम उठाते हैं।”
  • “अधिकांश गठबंधनों को लिखित संधि से एक औपचारिक रूप मिलता है और ऐसे गठबंधनों को यह बात बिलकुल स्पष्ट रहती है कि खतरा किससे है।”
  • ★★“गठबंधन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं और राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं।”
  • ★उदाहरण: “संयुक्त राज्य अमरीका ने सन् 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ इस्लामी उग्रवादियों को समर्थन दिया लेकिन ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व में अल-कायदा नामक समूह के आतंकवादियों ने जब 11 सितंबर 2001 के दिन उस पर हमला किया तो उसने इस्लामी उग्रवादियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।”

2.5 खतरा बाहर से क्यों — ‘अराजकता’ का तर्क★★

  • “सुरक्षा की परंपरागत धारणा में माना जाता है कि किसी देश की सुरक्षा को ज्यादातर ख़तरा उसकी सीमा के बाहर से होता है। इसकी वज़ह है अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था।”
  • ★★“इस निर्मम मैदान में ऐसी कोई केंद्रीय ताकत नहीं जो देशों के व्यवहार-बरताव पर अंकुश रखने में सक्षम हो। किसी देश के भीतर हिंसा के ख़तरों से निपटने के लिए एक जानी-पहचानी व्यवस्था होती है — इसे सरकार कहते हैं। लेकिन, विश्व-राजनीति में ऐसी कोई केंद्रीय सत्ता नहीं जो सबके ऊपर हो।”
  • ★“बहरहाल, फिलहाल अपनी बनावट के अनुरूप संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने सदस्य देशों का दास है और इसके सदस्य देश जितनी सत्ता इसको सौंपते और स्वीकारते हैं उतनी ही सत्ता इसे हासिल होती है।”
  • ★★“अत: विश्व-राजनीति में हर देश को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है।”

कार्टून (पृ. 66): ‘परमाणु शक्ति-संपन्न बिरादरी’ — बड़े नेता कुर्सियों पर, उत्तर कोरिया और ईरान बाहर खड़े। “जब कोई नया देश परमाणु शक्ति-संपन्न होने की दावेदारी करता है तो बड़ी ताकतें क्या रवैया अख्तियार करती हैं? हमारे पास यह कहने के क्या आधार हैं कि परमाण्विक हथियारों से लैस कुछ देशों पर तो विश्वास किया जा सकता है परंतु कुछ पर नहीं?”

3. पारंपरिक धारणा — आंतरिक सुरक्षा (पृ. 67–68)

3.1 यह पहलू उपेक्षित क्यों रहा

  • “क्या सुरक्षा आंतरिक शांति और कानून-व्यवस्था पर निर्भर नहीं करती? अगर किसी देश के भीतर रक्तपात हो रहा हो अथवा होने की आशंका हो तो वह देश सुरक्षित कैसे हो सकता है?”
  • ★“दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से इस पहलू पर ज्यादा जोर नहीं दिया गया तो इसका कारण यही था कि दुनिया के अधिकांश ताकतवर देश अपनी अंदरूनी सुरक्षा के प्रति कमोबेश आश्वस्त थे।”
  • ★“सन् 1945 के बाद ऐसा जान पड़ा कि संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत संघ अपनी सीमा के अंदर एकीकृत और शांति संपन्न हैं। अधिकांश यूरोपीय देशों, खासकर ताकतवर पश्चिमी मुल्कों के सामने अपनी सीमा के भीतर बसे समुदायों अथवा वर्गों से कोई गंभीर खतरा नहीं था। इस कारण इन देशों ने अपना ध्यान सीमापार के खतरों पर केंद्रित किया।”

3.2 पश्चिमी देशों के बाहरी खतरे★

  • शीतयुद्ध — “संयुक्त राष्ट्र अमरीका के नेतृत्व वाला पश्चिमी गुट तथा सोवियत संघ की अगुआई वाला साम्यवादी गुट एक-दूसरे के आमने-सामने थे।” दोनों को एक-दूसरे से सैन्य हमले का भय था।
  • ★उपनिवेशों की चिंता — “कुछ यूरोपीय देशों को अपने उपनिवेशों में उपनिवेशीकृत जनता से खून-खराबे की चिंता सता रही थी। अब ये लोग आज़ादी चाहते थे।” उदाहरण — 1950 के दशक में फ्रांस को वियतनाम, और 1950 तथा 1960 के दशक में ब्रिटेन को केन्या में जूझना पड़ा।

3.3 नव-स्वतंत्र देशों की दो विशिष्ट चुनौतियाँ(प्रश्न 4 का उत्तर)★★

  • “उपनिवेशों ने 1940 के दशक के उत्तरार्द्ध से आजाद होना शुरू किया और उनके सुरक्षा-सरोकार अक्सर यूरोपीय ताकतों के समान ही थे।”
  • ★“एशिया और अफ्रीका के नव स्वतंत्र देशों के सामने खड़ी सुरक्षा की चुनौतियाँ यूरोपीय देशों के मुकाबले दो मायनों में विशिष्ट थीं —”
    1. ★“एक तो इन देशों को अपने पड़ोसी देश से सैन्य हमले की आशंका थी।”
    2. ★“दूसरे, इन्हें अंदरूनी सैन्य-संघर्ष की भी चिंता करनी थी।”
  • ★“अनेक नव स्वतंत्र देश संयुक्त राज्य अमरीका या सोवियत संघ अथवा औपनिवेशिक ताकतों से कहीं ज्यादा अपने पड़ोसी देशों से आशंकित थे।” — सीमा रेखा, भूक्षेत्र अथवा आबादी पर नियंत्रण को लेकर।
  • ★“अलग राष्ट्र बनाने पर तुले अंदर के अलगाववादी आंदोलनों से भी इन देशों को खतरा था।” — और यदि कोई पड़ोसी मुल्क ऐसे आंदोलन को हवा दे, तो दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव बनता था।

3.4 दो चौंकाने वाले आँकड़े(पृ. 68 का कोष्ठक)★★

★★“विश्व के सशस्त्र संघर्षों में 95 प्रतिशत अब आंतरिक युद्ध के अंतर्गत हैं। सन् 1946 से 1991 के बीच गृह युद्धों की संख्या में बारहगुनी वृद्धि हुई है जो पिछले 200 वर्षों में सबसे लंबी छलांग है।”

  • ★निष्कर्ष: “इस तरह, पड़ोसी देशों से युद्ध और आंतरिक संघर्ष नव-स्वतंत्र देशों के सामने सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती थे।”
  • “दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जितने युद्ध हुए उसमें एक तिहाई युद्धों के लिए शीतयुद्ध जिम्मेदार रहा। इनमें से अधिकांश युद्ध तीसरी दुनिया में हुए।”

साइड-टिप्पणी (पृ. 68): “जो अपने ही देश के खिलाफ लड़ते हैं निश्चित ही वे किन्हीं बातों से नाखुश होते हैं। शायद यह उनकी असुरक्षा ही है जो देश के लिए असुरक्षा पैदा करती है।”

4. सुरक्षा के पारंपरिक तरीके (पृ. 68–70)

4.1 ‘न्याय-युद्ध’ की परंपरा★★

  • ★“सुरक्षा की परंपरागत धारणा में स्वीकार किया जाता है कि हिंसा का इस्तेमाल यथासंभव सीमित होना चाहिए। युद्ध के लक्ष्य और साधन दोनों से इसका संबंध है।”
  • ★“‘न्याय-युद्ध’ की यूरोपीय परंपरा का ही यह परवर्ती विस्तार है कि आज लगभग पूरा विश्व मानता है कि किसी देश को युद्ध उचित कारणों यानी आत्म-रक्षा अथवा दूसरों को जनसंहार से बचाने के लिए ही करना चाहिए।”
  • ★साधनों की सीमा: “युद्धरत् सेना को चाहिए कि वह संघर्षविमुख शत्रु, निहत्थे व्यक्ति अथवा आत्मसमर्पण करने वाले शत्रु को न मारे। सेना को उतने ही बल का प्रयोग करना चाहिए जितना आत्मरक्षा के लिए ज़रूरी हो और उसे एक सीमा तक ही हिंसा का सहारा लेना चाहिए। बल प्रयोग तभी किया जाय जब बाकी उपाय असफल हो गए हों।”

4.2 तीन सहयोग-तरीके(प्रश्न 1 का सुमेल यहीं से)★★

तरीकापरिभाषा
★निरस्त्रीकरण“सभी राज्य चाहे उनका आकार, ताकत और प्रभाव कुछ भी हो, कुछ खास किस्म के हथियारों से बाज आयें।”
★अस्त्र-नियंत्रण“हथियारों को विकसित करने अथवा उनको हासिल करने के संबंध में कुछ कायदे-कानूनों का पालन करना पड़ता है।”
★विश्वास बहाली के उपाय (CBMs)“सैन्य टकराव और प्रतिद्वन्द्विता वाले देश सूचनाओं तथा विचारों के नियमित आदान-प्रदान का फैसला करते हैं।”

4.3 निरस्त्रीकरण की दो संधियाँ★★

संधिवर्षहस्ताक्षरकर्ता
★जैविक हथियार संधि (BWC)1972★155 से ज्यादा देश
★रासायनिक हथियार संधि (CWC)1997★193 देश
  • “इन दोनों संधियों पर दस्तख़त करने वालों में सभी महाशक्तियाँ शामिल हैं।”
  • ! “लेकिन महाशक्तियाँ — अमरीका तथा सोवियत संघ — सामूहिक संहार के अस्त्र यानी परमाण्विक हथियार का विकल्प नहीं छोड़ना चाहती थीं इसलिए दोनों ने अस्त्र-नियंत्रण का सहारा लिया।”

4.4 अस्त्र-नियंत्रण की संधियाँ★★

संधिवर्षक्या किया
★एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि (ABM)1972“अमरीका और सोवियत संघ को बैलेस्टिक मिसाइलों को रक्षा-कवच के रूप में इस्तेमाल करने से रोका।” दोनों को सीमित संख्या में ऐसी रक्षा-प्रणाली तैनात करने की अनुमति थी, पर व्यापक उत्पादन से रोक दिया।
SALT II—सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि-2
START—सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि
★★परमाणु अप्रसार संधि (NPT)1968नीचे देखिए

4.5 NPT — 1967 की रेखा★★

  • ★“परमाणु अप्रसार संधि (NPT) 1968 भी एक अर्थ में अस्त्र नियंत्रण संधि ही थी क्योंकि इसने परमाण्विक हथियारों के उपार्जन को कायदे-कानून के दायरे में ला खड़ा किया।”
  • ★★“जिन देशों ने सन् 1967 से पहले परमाणु हथियार बना लिये थे या उनका परीक्षण कर लिया था उन्हें इस संधि के अंतर्गत इन हथियारों को रखने की अनुमति दी गई। जो देश सन् 1967 तक ऐसा नहीं कर पाये थे उन्हें ऐसे हथियारों को हासिल करने के अधिकार से वंचित किया गया।”
  • ★“परमाणु अप्रसार संधि ने परमाण्विक आयुधों को समाप्त तो नहीं किया लेकिन इन्हें हासिल कर सकने वाले देशों की संख्या ज़रूर कम की।”

4.6 विश्वास बहाली के उपाय (CBMs)★

  • “दो देश एक-दूसरे को अपने फौजी मकसद तथा एक हद तक अपनी सैन्य योजनाओं के बारे में बताते हैं।”
  • “ऐसा करके ये देश अपने प्रतिद्वन्द्वी को इस बात का आश्वासन देते हैं कि उनकी तरफ से औचक हमले की योजना नहीं बनायी जा रही।”
  • “देश एक-दूसरे को यह भी बताते हैं कि उनके पास किस तरह के सैन्य-बल हैं। वे यह भी बता सकते हैं कि इन बलों को कहाँ तैनात किया जा रहा है।”
  • ★“संक्षेप में कहें तो विश्वासी बहाली की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि प्रतिद्वन्द्वी देश किसी ग़लतफहमी या गफलत में पड़कर जंग के लिए आमादा न हो जाएँ।”

4.7 खंड का निष्कर्ष★★

★★“कुल मिलाकर देखें तो सुरक्षा की परंपरागत धारणा मुख्य रूप से सैन्य बल के प्रयोग अथवा सैन्य बल के प्रयोग की आशंका से संबद्ध है। सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में माना जाता है कि सैन्य बल से सुरक्षा को खतरा पहुँचता है और सैन्य बल से ही सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है।”

कार्टून (पृ. 69): ‘TERROR METER’ — अमरीकी गृह रक्षा-विभाग का ‘आतंकमापी’; “इससे पता चलेगा कि अमरीकी जनता आतंकी हमले को लेकर कितनी आशंकित है।” कार्टून (पृ. 70): ‘जाएँ तो जाएँ कहाँ’ — एंडी सिंगर; अमरीकी व्यय के आँकड़े — 425 अरब सालाना रक्षा विभाग · 300 अरब इराक युद्ध · 100 अरब अफगान युद्ध · 40 अरब आंतरिक सुरक्षा बनाम शांति विभाग के लिए ‘कुछ लाख डॉलर’।

5. सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा (पृ. 70–72)

5.1 परिभाषा और चार सवाल★★

  • ★“सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा सिर्फ सैन्य खतरों से संबद्ध नहीं। इसमें मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले व्यापक खतरों और आशंकाओं को शामिल किया जाता है।”
  • ★यह चार सवाल उठाती है — “सुरक्षा किसकी?” (संदर्भी), “किन चीजों की सुरक्षा?”, “किन खतरों से सुरक्षा?” और “सुरक्षा के तरीके?”
  • ★★संदर्भी का भेद: “सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में भूक्षेत्र और संस्थाओं सहित राज्य को संदर्भी माना जाता है। सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा में संदर्भी का दायरा बड़ा होता है।”
  • ★★उत्तर: *""सिर्फ राज्य ही नहीं व्यक्तियों और समुदायों या कहें कि समूची मानवता को सुरक्षा की ज़रूरत है।”* इसी कारण सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा को ‘मानवता की सुरक्षा’ अथवा ‘विश्व-रक्षा’ कहा जाता है।”

5.2 मानवता की सुरक्षा★★

  • ★“मानवता की रक्षा का विचार जनता-जनार्दन की सुरक्षा को राज्यों की सुरक्षा से बढ़कर मानता है।”
  • ★★“मानवता की सुरक्षा और राज्य की सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए और अक्सर होते भी हैं। लेकिन सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।”
  • ★★सबसे तीखा वाक्य: “सच्चाई यह है कि पिछले 100 वर्षों में जितने लोग विदेशी सेना के हाथों मारे गए उससे कहीं ज्यादा लोग खुद अपनी ही सरकारों के हाथों खेत रहे।”

5.3 संकीर्ण बनाम व्यापक अर्थ — मतभेद का बिंदु★★

“मानवता की सुरक्षा के सभी पैरोकार मानते हैं कि इसका प्राथमिक लक्ष्य व्यक्तियों की संरक्षा है। बहरहाल, इस बात पर मतभेद है कि ठीक-ठीक ऐसे कौन-से खतरे हैं जिनसे व्यक्तियों को बचाया जाना चाहिए।”

अर्थकिन खतरों से बचाना
★संकीर्ण अर्थ“व्यक्तियों को हिंसक खतरों यानी खून-खराबे से बचाने पर” — या कोफ़ी अन्नान के शब्दों में, “व्यक्तियों और समुदायों को अंदरूनी खून-खराबा से बचाना।”
★व्यापक अर्थ“खतरों की सूची में अकाल, महामारी और आपदाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि युद्ध, जन-संहार और आतंकवाद साथ मिलकर जितने लोगों को मारते हैं उससे कहीं ज्यादा लोग अकाल, महामारी और प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ जाते हैं।”
★★व्यापकतम अर्थ“आर्थिक सुरक्षा और मानवीय गरिमा की सुरक्षा को भी शामिल किया जाता है” — यानी ★“‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’।”

5.4 विश्व सुरक्षा★

  • “विश्वव्यापी खतरे जैसे वैश्विक तापवृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग), अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद तथा एड्स और बर्ड फ्लू जैसी महामारियों के मद्देनज़र 1990 के दशक में विश्व-सुरक्षा की धारणा उभरी।”
  • ★“कोई भी देश इन समस्याओं का समाधान अकेले नहीं कर सकता।”
  • ★★असमान असर का उदाहरण: “वैश्विक तापवृद्धि से अगर समुद्रतल दो मीटर ऊँचा उठता है तो बांग्लादेश का 20 प्रतिशत हिस्सा डूब जाएगा; कमोबेश पूरा मालदीव सागर में समा जाएगा और थाईलैंड की 50 फीसदी आबादी को खतरा पहुँचेगा।”
  • ★“चूँकि इन समस्याओं की प्रकृति वैश्विक है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है, भले ही इसे हासिल करना मुश्किल हो।”

6. खतरे के नये स्रोत (पृ. 72–76)★★

“सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा के दो पक्ष हैं — मानवता की सुरक्षा और विश्व सुरक्षा। ये दोनों सुरक्षा के संदर्भ में खतरों की बदलती प्रकृति पर जोर देते हैं।”

6.1 आतंकवाद(प्रश्न 5 का उत्तर)★★

  • ★“आतंकवाद का आशय राजनीतिक खून-खराबे से है जो जान-बूझकर और बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है।”
  • ★“अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद एक से ज्यादा देशों में व्याप्त है और उसके निशाने पर कई देशों के नागरिक हैं।”
  • ★“कोई राजनीतिक संदर्भ या स्थिति नापसंद हो तो आतंकवादी समूह उसे बल-प्रयोग अथवा बल-प्रयोग की धमकी देकर बदलना चाहते हैं।”
  • ★“जनमानस को आतंकित करने के लिए नागरिकों को निशाना बनाया जाता है और आतंकवाद नागरिकों के असंतोष का इस्तेमाल राष्ट्रीय सरकारों अथवा संघर्षों में शामिल अन्य पक्ष के ख़िलाफ करता है।”
  • उदाहरण: विमान-अपहरण; रेलगाड़ी, होटल, बाज़ार जैसी भीड़ भरी जगहों पर बम लगाना।
  • ★“सन् 2001 के 11 सितंबर को आतंकवादियों ने अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला बोला। इस घटना के बाद से दूसरे मुल्क और वहाँ की सरकारें आतंकवाद पर ज्यादा ध्यान देने लगी हैं।”
  • ★“बहरहाल, आतंकवाद कोई नयी परिघटना नहीं है। गुजरे वक्त में आतंकवाद की अधिकांश घटनाएँ मध्यपूर्व, यूरोप, लातिनी अमरीका और दक्षिण एशिया में हुईं।”

कार्टून (पृ. 72): ‘TRAIN INFORMATION’ — मैड्रिड 3.11 · लंदन 7.7 · मुंबई 7.11 — तीनों ‘Arrived’; और अगला ट्रैक ’?’ — नीचे मौत का दराँती लिए आकृति, बैग पर ‘TERROR’।

6.2 मानवाधिकार — तीन कोटियाँ★★

कोटिक्या
पहली★राजनीतिक अधिकार — जैसे अभिव्यक्ति और सभा करने की आज़ादी
दूसरी★आर्थिक और सामाजिक अधिकार
तीसरी★उपनिवेशीकृत जनता अथवा जातीय और मूलवासी अल्पसंख्यकों के अधिकार
  • ! “इस वर्गीकरण को लेकर व्यापक सहमति है लेकिन इस बात पर सहमति नहीं बन पायी है कि इनमें से किस कोटि के अधिकारों को सार्वभौम मानवाधिकारों की संज्ञा दी जाए या इन अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को क्या करना चाहिए?”
  • ★तीन घटनाएँ जिनसे बहस चली: “1990 के दशक से कुछ घटनाओं मसलन रवांडा में जनसंहार, कुवैत पर इराक का हमला और पूर्वी तिमूर में इंडोनेशियाई सेना के रक्तपात के कारण बहस चल पड़ी है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ को मानवाधिकारों के हनन की स्थिति में हस्तक्षेप करना चाहिए या नहीं।”
  • ★दो पक्ष: “कुछ का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ का घोषणापत्र अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को अधिकार देता है कि वह मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हथियार उठाये।” ! “दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी हैं जिनका तर्क है कि संभव है, ताकतवर देशों के हितों से यह निर्धारित होता हो कि संयुक्त राष्ट्रसंघ मानवाधिकार-उल्लंघन के किस मामले में कार्रवाई करेगा और किसमें नहीं।”

6.3 वैश्विक निर्धनता★★

तथ्यआँकड़ा
विश्व की जनसंख्या★760 करोड़ — 21वीं सदी के मध्य तक 1000 करोड़
★जनसंख्या-वृद्धि का 50% केवल छह देशों मेंभारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश और इंडोनेशिया
★अगले 50 साल“दुनिया के सबसे गरीब देशों में जनसंख्या तीन गुनी बढ़ेगी जबकि इसी अवधि में अनेक धनी देशों की जनसंख्या घटेगी।”
  • ★★तंत्र: “प्रति व्यक्ति उच्च आय और जनसंख्या की कम वृद्धि के कारण धनी देश अथवा सामाजिक समूहों को और धनी बनने में मदद मिलती है जबकि प्रति व्यक्ति निम्न आय और जनसंख्या की तीव्र वृद्धि एक साथ मिलकर गरीब देशों और सामाजिक समूहों को और ग़रीब बनाते हैं।”
  • ★“विश्वस्तर पर यह असमानता उत्तरी गोलार्द्ध के देशों को दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों से अलग करती है।” — और दक्षिण गोलार्द्ध के भीतर भी असमानता बढ़ी है।
  • ★★“उदाहरण के लिए दुनिया में सबसे ज्यादा सशस्त्र संघर्ष अफ्रीका के सहारा मरुस्थल के दक्षिणवर्ती देशों में होते हैं। यह इलाका दुनिया का सबसे गरीब इलाका है। 21वीं सदी के शुरुआती समय में इस इलाके के युद्धों में शेष दुनिया की तुलना में कहीं ज्यादा लोग मारे गए।”

6.4 आप्रवासी और शरणार्थी — भेद★★

★★“अंतर्राष्ट्रीय कायदे कानून आप्रवासी (जो अपनी मर्जी से स्वदेश छोड़ते हैं) और शरणार्थी (जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा अथवा राजनीतिक उत्पीड़न के कारण स्वदेश छोड़ने पर मज़बूर होते हैं) में भेद करते हैं।”

  • ★“सामान्यतया उम्मीद की जाती है कि कोई राज्य शरणार्थियों को स्वीकार करेगा लेकिन उन्हें आप्रवासियों को स्वीकारने की बाध्यता नहीं होती।”
  • ★★तीसरी श्रेणी: “शरणार्थी अपनी जन्मभूमि को छोड़ते हैं जबकि जो लोग अपना घर-बार छोड़ चुके हैं परंतु राष्ट्रीय सीमा के भीतर ही हैं उन्हें “आंतरिक रूप से विस्थापित जन” कहा जाता है।”
  • ★उदाहरण: “1990 के दशक के शुरुआती सालों में हिंसा से बचने के लिए कश्मीर घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित ‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ के उदाहरण हैं।”
  • ★★“विश्व का शरणार्थी-मानचित्र विश्व के संघर्ष-मानचित्र से लगभग हू-ब-हू मेल खाता है।”
  • ★आँकड़े: “1990 से 1995 के बीच सत्तर देशों के मध्य कुल 93 युद्ध हुए और इसमें लगभग साढ़े 55 लाख लोग मारे गये।” और “1990 के दशक में कुल 60 जगहों से शरणार्थी प्रवास करने को मजबूर हुए और इसमें तीन को छोड़कर शेष सभी के मूल में सशस्त्र संघर्ष था।”

आरेख (पृ. 76) — विश्व में शरणार्थी (2017): विस्थापित लोगों को कहाँ शरण दी गई

क्षेत्रप्रतिशत
★अफ्रीका30%
मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका26%
यूरोप17%
अमेरिका16%
एशिया और पैसिफिक11%
(स्रोत: unhcr.org)

6.5 स्वास्थ्य-महामारी★★

  • “एचआईवी-एड्स, बर्ड फ्लू और सार्स (SARS) जैसी महामारियाँ आप्रवास, व्यवसाय, पर्यटन और सैन्य-अभियानों के जरिए बड़ी तेजी से विभिन्न देशों में फैली हैं।”
  • ★“इन बीमारियों के फैलाव को रोकने में किसी एक देश की सफलता अथवा असफलता का प्रभाव दूसरे देशों में होने वाले संक्रमण पर पड़ता है।”
  • आँकड़े: ★“अनुमान है कि 2003 तक पूरी दुनिया में 4 करोड़ लोग एचआईवी-एड्स से संक्रमित हो चुके थे। इसमें दो-तिहाई लोग अफ्रीका में रहते हैं जबकि शेष के 50 फीसदी दक्षिण एशिया में।”
  • “उत्तरी अमरीका तथा दूसरे औद्योगिक देशों में उपचार की नयी विधियों के कारण 1990 के दशक के उत्तरार्द्ध के वर्षों में एचआईवी एड्स से होने वाली मृत्यु की दर में तेजी से कमी आयी है। लेकिन अफ्रीका जैसे ग़रीब इलाके के लिए ये उपचार कीमत को देखते हुए आकाश-कुसुम कहे जाएँगे।”
  • नयी और पुरानी महामारियाँ: “एबोला वायरस, हैन्टावायरस और हेपेटाइटिस-सी जैसी कुछ नयी महामारियाँ उभरी हैं”; और “कोरोना, टीबी, मलेरिया, डेंगी बुखार और हैजा जैसी पुरानी महामारियों ने औषधि-प्रतिरोधक रूप धारण कर लिया है।”
  • ★आर्थिक असर: “1990 के दशक के उत्तरार्द्ध के सालों से ब्रिटेन ने ‘मैड-काऊ’ महामारी के भड़क उठने के कारण अरबों डॉलर का नुकसान उठाया है और बर्ड फ्लू के कारण कई दक्षिण एशियाई देशों को मुर्ग-निर्यात बंद करना पड़ा।”
  • ★★“ऐसी महामारियाँ बताती हैं कि देशों के बीच पारस्परिक निर्भरता बढ़ रही है और राष्ट्रीय सीमाएँ अब पहले की तुलना में कम सार्थक रह गई हैं।”

6.6 सीमा कहाँ खींचें — ‘न्यूनतम मानक’★★

★★“सुरक्षा की धारणा में विस्तार करने का यह मतलब नहीं है कि हम हर तरह के कष्ट या बीमारी को सुरक्षा विषयक चर्चा के दायरे में शामिल कर सकते हैं। अगर हम ऐसा करते हैं तो सुरक्षा की धारणा में संगति नहीं रह जाती। ऐसे में हर चीज सुरक्षा का मसला हो सकती है।”

  • ★★कसौटी: “इसी कारण किसी मसले को सुरक्षा का मसला कहलाने के लिए एक सर्व स्वीकृत न्यूनतम मानक पर खरा उतरना जरूरी है। मिसाल के लिए, अगर किसी मसले से संदर्भी (राज्य अथवा जनसमूह) के अस्तित्व को खतरा हो रहा हो तो उसे सुरक्षा का मसला कहा जा सकता है — चाहे इस खतरे की प्रकृति कुछ भी हो।”
  • उदाहरण: “मालदीव को वैश्विक तापवृद्धि से खतरा हो सकता है क्योंकि समुद्र तल के ऊँचा उठने से इसका ज्यादातर हिस्सा डूब जाएगा”; “दक्षिणी अफ्रीकी देशों में एचआईवी-एड्स से गंभीर खतरा है क्योंकि यहाँ हर 6 वयस्क व्यक्ति में एक इस रोग से पीड़ित है (बोस्तवाना की हालत सबसे बदतर है। वहाँ 3 में से एक व्यक्ति एचआई-एड्स पीड़ित है)”; और ★“1994 में रवांडा की तुत्सी जनजाति के अस्तित्व पर खतरा मंडराया क्योंकि प्रतिद्वन्द्वी हुतु जनजाति ने कुछ ही हफ्तों में लगभग 5 लाख तुत्सी लोगों को मार डाला।”
  • ★निष्कर्ष: “इससे पता चलता है कि सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा भी सुरक्षा की पारंपरिक धारणा के समान स्थानीय संदर्भों के अनुकूल परिवर्तनशील है।”

7. सहयोगमूलक सुरक्षा (पृ. 76–77)

  • ★★“हमने देखा कि सुरक्षा पर मंडराते इन अनेक अपारंपरिक ख़तरों से निपटने के लिए सैन्य-संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी सहयोग की ज़रूरत है।”
  • ★“आतंकवाद से लड़ने अथवा मानवाधिकारों को बहाल करने में भले ही सैन्य-बल की कोई भूमिका हो (और यहाँ भी सैन्य-बल एक सीमा तक ही कारगर हो सकता है) लेकिन गरीबी मिटाने, तेल तथा बहुमूल्य धातुओं की आपूर्ति बढ़ाने, आप्रवासियों और शरणार्थियों की आवाजाही के प्रबंधन तथा महामारी के नियंत्रण में सैन्य-बल से क्या मदद मिलेगी यह कहना मुश्किल है।”
  • ★★“वस्तुत: ऐसे अधिकांश मसलों में सैन्य-बल के प्रयोग से मामला और बिगड़ेगा।”
  • ★“ज्यादा प्रभावी यही होगा कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से रणनीतियाँ तैयार की जायँ।”
  • ★सहयोग के स्तर: “द्विपक्षीय (दो देशों के बीच), क्षेत्रीय, महादेशीय अथवा वैश्विक” — “यह इस बात पर निर्भर करेगा कि खतरे की प्रकृति क्या है और विभिन्न देश इससे निबटने के लिए कितने इच्छुक तथा सक्षम हैं।”

7.1 सहयोगमूलक सुरक्षा में कौन-कौन शामिल★

श्रेणीउदाहरण
अंतर्राष्ट्रीय संगठनसंयुक्त राष्ट्रसंघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आदि
स्वयंसेवी संगठन★एमनेस्टी इंटरनेशनल, रेड क्रॉस, निजी संगठन तथा दानदाता संस्थाएँ
अन्यधार्मिक संगठन, मज़दूर संगठन, सामाजिक और विकास संगठन, व्यवसायिक संगठन और निगम
★जानी-मानी हस्तियाँनेल्सन मंडेला, मदर टेरेसा

7.2 और फिर भी — अंतिम उपाय के रूप में बल★★

★“सहयोग मूलक सुरक्षा में भी अंतिम उपाय के रूप में बल-प्रयोग किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी उन सरकारों से निबटने के लिए बल-प्रयोग की अनुमति दे सकती है जो अपनी ही जनता को मार रही हों अथवा गरीबी, महामारी और प्रलयंकारी घटनाओं की मार झेल रही जनता के दुख-दर्द की उपेक्षा कर रही हो।” ★★“ऐसी स्थिति में सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा का जोर होगा कि बल-प्रयोग सामूहिक स्वीकृति से और सामूहिक रूप में किया जाए न कि कोई एक देश अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी और स्वयंसेवी संगठनों समेत अन्यों की मर्जी पर कान दिए बगैर बल प्रयोग का रास्ता अख्तियार करे।”

8. भारत — सुरक्षा की रणनीतियाँ (पृ. 77–79)★★

“भारत को पारंपरिक (सैन्य) और अपारंपरिक खतरों का सामना करना पड़ा है। ये खतरे सीमा के अंदर से भी उभरे और बाहर से भी। भारत की सुरक्षा-नीति के चार बड़े घटक हैं और अलग-अलग वक्त में इन्हीं घटकों के हेर-फेर से सुरक्षा की रणनीति बनायी गई है।”

8.1 पहला घटक — सैन्य-क्षमता को मज़बूत करना★

  • “क्योंकि भारत पर पड़ोसी देशों से हमले होते रहे हैं।”
  • ★“पाकिस्तान ने 1947-48, 1965, 1971 तथा 1999 में और चीन ने सन् 1962 में भारत पर हमला किया।”
  • ★“दक्षिण एशियाई इलाके में भारत के चारों तरफ परमाणु हथियारों से लैस देश हैं।”
  • ★“ऐसे में भारत के परमाणु परीक्षण करने के फ़ैसलों (1998) को उचित ठहराते हुए भारतीय सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया था।”
  • ★“भारत ने सन् 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया था।”

8.2 दूसरा घटक — अंतर्राष्ट्रीय कायदों और संस्थाओं को मज़बूत करना★★

  • नेहरू की भूमिका: ★“भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एशियाई एकता, विउपनिवेशीकरण (Decolonisation) और निरस्त्रीकरण के प्रयासों की हिमायत की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों में संयुक्त राष्ट्रसंघ को अंतिम पंच मानने पर जोर दिया।”
  • ★“भारत ने हथियारों के अप्रसार के संबंध में एक सार्वभौम और बिना भेदभाव वाली नीति चलाने की पहलकदमी की जिसमें हर देश को सामूहिक संहार के हथियारों (परमाणु, जैविक, रासायनिक) से संबद्ध बराबर के अधिकार और दायित्व हों।”
  • ★“भारत ने नव-अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की माँग उठायी और सबसे बड़ी बात यह कि दो महाशक्तियों की खेमेबाजी से अलग उसने गुटनिरपेक्षता के रूप में विश्व-शांति का तीसरा विकल्प सामने रखा।”
  • ★“भारत उन 160 देशों में शामिल है जिन्होंने 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं। क्योटो प्रोटोकॉल में वैश्विक तापवृद्धि पर काबू रखने के लिए ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के संबंध में दिशा निर्देश बताए गए हैं।”
  • ★“सहयोगमूलक सुरक्षा की पहलकदमियों के समर्थन में भारत ने अपनी सेना संयुक्त राष्ट्रसंघ के शांतिबहाली के मिशनों में भेजी है।”

8.3 तीसरा घटक — अंदरूनी सुरक्षा-समस्याओं से निबटने की तैयारी★

  • ★“नगालैंड, मिजोरम, पंजाब और कश्मीर जैसे क्षेत्रों से कई उग्रवादी समूहों ने समय-समय पर इन प्रांतों को भारत से अलगाने की कोशिश की।”
  • ★★“भारत ने राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था का पालन किया है। यह व्यवस्था विभिन्न समुदाय और जन-समूहों को अपनी शिकायतों को खुलकर रखने और सत्ता में भागीदारी करने का मौका देती है।”

8.4 चौथा घटक — आर्थिक विकास और लोकतंत्र★★

  • “भारत में अर्थव्यवस्था को इस तरह विकसित करने के प्रयास किए गए हैं कि बहुसंख्यक नागरिकों को गरीबी और अभाव से निज़ात मिले तथा नागरिकों के बीच आर्थिक असमानता ज्यादा न हो।”
  • ! ईमानदार स्वीकृति: “प्रयास आंशिक रूप से सफल हुए हैं; हम गरीबी और असमानता पर काबू पाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
  • ★★“फिर भी, लोकतांत्रिक राजनीति से ऐसे अवसर उपलब्ध हैं कि गरीब और वंचित नागरिक अपनी आवाज़ उठा सकें। लोकतांत्रिक रीति से निर्वाचित सरकार के ऊपर दबाव होता है कि वह आर्थिक संवृद्धि को मानवीय विकास का सहगामी बनाए।”
  • ★★अध्याय का सबसे बड़ा निष्कर्ष: “इस प्रकार, लोकतंत्र सिर्फ राजनीतिक आदर्श नहीं है; लोकतांत्रिक शासन जनता को ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने का साधन भी है।”
  • “इस संदर्भ में भारतीय लोकतंत्र की सफलता और असफलताओं के बारे में आप एक और किताब में विस्तार से पढ़ेंगे। यह किताब स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति पर केंद्रित है।”

1. निम्नलिखित पदों को उनके अर्थ से मिलाएँ

  1. 1विश्वास बहाली के उपाय (CBMs)
  2. 2अस्त्र-नियंत्रण
  3. 3गठबंधन
  4. 4निरस्त्रीकरण (क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज (ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा-मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया (ग) सैन्य हमले की स्थिति से निबटने अथवा उसके अपरोध के लिए कुछ राष्ट्रों का आपस में मेल करना। (घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश

2. निम्नलिखित में से किसको आप सुरक्षा का परंपरागत सरोकार/सुरक्षा का अपारंपरिक सरोकार/‘खतरे की स्थिति नहीं’ का दर्ज़ा देंगे — (क) चिकेनगुनिया/डेंगू बुखार का प्रसार (ख) पड़ोसी देश से कामगारों की आमद (ग) पड़ोसी राज्य से कामगारों की आमद (घ) अपने इलाके को राष्ट्र बनाने की माँग करने वाले समूह का उदय (ङ) अपने इलाके को अधिक स्वायत्तता दिए जाने की माँग करने वाले समूह का उदय। (च) देश की सशस्त्र सेना को आलोचनात्मक नज़र से देखने वाला अखबार।

3. परंपरागत और अपारंपरिक सुरक्षा में क्या अंतर है? गठबंधनों का निर्माण करना और उनको बनाये रखना इनमें से किस कोटि में आता है?

4. तीसरी दुनिया के देशों और विकसित देशों की जनता के सामने मौजूद खतरों में क्या अंतर है?

5. आतंकवाद सुरक्षा के लिए परंपरागत खतरे की श्रेणी में आता है या अपरंपरागत?

6. सुरक्षा के परंपरागत दृष्टिकोण के हिसाब से बताएँ कि अगर किसी राष्ट्र पर खतरा मंडरा रहा हो तो उसके सामने क्या विकल्प होते हैं?

7. ‘शक्ति-संतुलन’ क्या है? कोई देश इसे कैसे कायम करता है?

8. सैन्य गठबंधन के क्या उद्देश्य होते हैं? किसी ऐसे सैन्य गठबंधन का नाम बताएँ जो अभी मौजूद है। इस गठबंधन के उद्देश्य भी बताएँ?

9. पर्यावरण के तेजी से हो रहे नुकसान से देशों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? उदाहरण देते हुए अपने तर्कों की पुष्टि करें।

10. देशों के सामने फिलहाल जो खतरे मौजूद हैं उनमें परमाण्विक हथियार का सुरक्षा अथवा अपरोध के लिए बड़ा सीमित उपयोग रह गया है। इस कथन का विस्तार करें।

11. भारतीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए किस किस्म की सुरक्षा को वरीयता दी जानी चाहिए — पारंपरिक या अपारंपरिक? अपने तर्क की पुष्टि में आप कौन-से उदाहरण देंगे?

12. नीचे दिए गए कार्टून को समझें। कार्टून में युद्ध और आतंकवाद का जो संबंध दिखाया गया है उसके पक्ष या विपक्ष में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (कार्टून: विशाल ‘WAR’ का शरीर, और उसके पीछे छोटे-छोटे ‘TERRORISM’ के पिल्ले दूध पीते हुए।)

उत्तर देखिए

उत्तर-कुंजी: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्रित नहीं है और कोई सारांश खंड भी नहीं है। उत्तर 05-Question-Bank.md में शिक्षक द्वारा तैयार हैं।

शब्दावली

पदअंग्रेज़ीअध्याय में प्रयुक्त अर्थ
सुरक्षाSecurity★“खतरे से आजादी”; पर केवल “बड़े गंभीर खतरों” से — जिनसे केंद्रीय मूल्यों को अपूरणीय क्षति पहुँचे
केंद्रीय मूल्यCore valuesसंप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता (पारंपरिक धारणा में)
पारंपरिक सुरक्षाTraditional security★राष्ट्रीय सुरक्षा; सैन्य ख़तरा सबसे ख़तरनाक; ख़तरे का स्रोत कोई दूसरा मुल्क
अपरोधDeterrence★“युद्ध से होने वाले नाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहमकर हमला करने से बाज आये”
रक्षाDefence★“युद्ध को सीमित रखने अथवा उसको समाप्त करने” से संबंधित
शक्ति-संतुलनBalance of powerपड़ोसियों की सापेक्ष ताकत को अपने पक्ष में करना; मुख्यतः सैन्य, पर आर्थिक और प्रौद्योगिकीय भी
गठबंधनAlliance★“सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम”; लिखित संधि से औपचारिक; ★“राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं”
न्याय-युद्धJust warयूरोपीय परंपरा — युद्ध केवल आत्म-रक्षा अथवा जनसंहार से बचाने के लिए; साधनों का भी सीमित प्रयोग
निरस्त्रीकरणDisarmament★“कुछ खास किस्म के हथियारों से बाज आना”
अस्त्र-नियंत्रणArms control★“हथियारों को विकसित करने अथवा हासिल करने के संबंध में कायदे-कानूनों का पालन”
विश्वास बहाली के उपायCBMs★“सूचनाओं तथा विचारों के नियमित आदान-प्रदान” — ताकि “ग़लतफहमी या गफलत में पड़कर जंग के लिए आमादा न हो जाएँ”
BWCजैविक हथियार संधि1972; 155 से ज्यादा देश
CWCरासायनिक हथियार संधि1997; 193 देश
ABM संधिएंटी बैलेस्टिक मिसाइल1972 — बैलेस्टिक मिसाइलों को रक्षा-कवच के रूप में इस्तेमाल करने से रोका
NPTपरमाणु अप्रसार संधि★1968 — 1967 से पहले हथियार बनाने/परीक्षण करने वालों को रखने की अनुमति; बाकी को वंचित
SALT II / START—सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि-2 / सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि
अपारंपरिक सुरक्षाNon-traditional security★“मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले व्यापक खतरे”
मानवता की सुरक्षाHuman security★“जनता-जनार्दन की सुरक्षा को राज्यों की सुरक्षा से बढ़कर”
विश्व-रक्षा / विश्व सुरक्षाGlobal security★1990 के दशक में उभरी; “कोई भी देश इन समस्याओं का समाधान अकेले नहीं कर सकता”
‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’Freedom from want / from fear★मानवता की सुरक्षा का व्यापकतम नज़रिया
आतंकवादTerrorism★“राजनीतिक खून-खराबा जो जान-बूझकर और बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है”
आप्रवासीMigrant★“जो अपनी मर्जी से स्वदेश छोड़ते हैं” — राज्य को स्वीकारने की बाध्यता नहीं
शरणार्थीRefugee★“जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा अथवा राजनीतिक उत्पीड़न के कारण स्वदेश छोड़ने पर मज़बूर होते हैं” — स्वीकार करने की अपेक्षा
आंतरिक रूप से विस्थापित जनIDPs★“जो अपना घर-बार छोड़ चुके हैं परंतु राष्ट्रीय सीमा के भीतर ही हैं” — उदाहरण कश्मीरी पंडित
सहयोगमूलक सुरक्षाCooperative security★“सैन्य-संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी सहयोग की ज़रूरत”; बल अंतिम उपाय और सामूहिक स्वीकृति से
क्योटो प्रोटोकॉलKyoto Protocol★1997; भारत उन 160 देशों में जिन्होंने हस्ताक्षर किए

मुख्य आँकड़े और तिथियाँ

मानसंदर्भ
200 मुल्क / 7 अरब लोगसुरक्षा की एक-सी धारणा असंभव क्यों है
★तीन विकल्पआत्मसमर्पण · अपरोध · रक्षा
★1980 का दशक / 11 सितंबर 2001अमरीका ने इस्लामी उग्रवादियों को समर्थन दिया / अल-कायदा के हमले के बाद उनके ख़िलाफ़ मोर्चा
1950 का दशक / 1950–60 का दशकफ्रांस को वियतनाम में / ब्रिटेन को केन्या में जूझना पड़ा
1940 के दशक का उत्तरार्द्धउपनिवेशों का आज़ाद होना शुरू
★★95 प्रतिशतविश्व के सशस्त्र संघर्षों में आंतरिक युद्धों का हिस्सा
★★1946–1991 / बारहगुनीगृह युद्धों की संख्या में वृद्धि — “पिछले 200 वर्षों में सबसे लंबी छलांग”
एक तिहाईदूसरे विश्वयुद्ध के बाद के युद्ध जिनके लिए शीतयुद्ध जिम्मेदार
★1972 / 155 से ज्यादाजैविक हथियार संधि (BWC) / हस्ताक्षरकर्ता
★1997 / 193रासायनिक हथियार संधि (CWC) / हस्ताक्षरकर्ता
★1972ABM संधि
★★1968 / 1967NPT / वह रेखा जिससे पहले हथियार बनाने वालों को अनुमति मिली
★760 करोड़ / 1000 करोड़विश्व की वर्तमान जनसंख्या / 21वीं सदी के मध्य तक
★50 फीसदी / छह देशजनसंख्या-वृद्धि — भारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया
तीन गुनीअगले 50 सालों में सबसे गरीब देशों की जनसंख्या-वृद्धि
★1990–1995 / 70 देश / 93 युद्ध / साढ़े 55 लाखयुद्धों की संख्या और मृतक
★60 जगहें / तीन को छोड़कर1990 के दशक में शरणार्थी-प्रवास के स्थान / सशस्त्र संघर्ष मूल कारण
★30 · 26 · 17 · 16 · 11 (%)शरणार्थियों की शरण (2017) — अफ्रीका · मिडिल ईस्ट-उत्तरी अफ्रीका · यूरोप · अमेरिका · एशिया-पैसिफिक
★4 करोड़ / दो-तिहाई / 50 फीसदी2003 तक HIV-एड्स संक्रमित / अफ्रीका में / शेष में दक्षिण एशिया
★हर 6 में 1 / 3 में 1दक्षिणी अफ्रीकी देशों में HIV-एड्स / बोस्तवाना में
★1994 / 5 लाखरवांडा — हुतु द्वारा मारे गए तुत्सी, “कुछ ही हफ्तों में”
★दो मीटर / 20% / 50 फीसदीसमुद्रतल की वृद्धि → बांग्लादेश का हिस्सा डूबेगा / थाईलैंड की आबादी को खतरा; “कमोबेश पूरा मालदीव”
★1947-48, 1965, 1971, 1999 / 1962पाकिस्तान के हमले / चीन का हमला
★1974 / 1998भारत का पहला परमाणु परीक्षण / परमाणु परीक्षण के फ़ैसले
★1997 / 160 देशक्योटो प्रोटोकॉल / हस्ताक्षरकर्ता, जिनमें भारत
नगालैंड, मिजोरम, पंजाब, कश्मीरअलगाववादी प्रयासों वाले क्षेत्र
425 / 300 / 100 / 40 अरबकार्टून — अमरीकी रक्षा बजट / इराक युद्ध / अफगान युद्ध / आंतरिक सुरक्षा

भ्रमित करने वाले युग्मध्यान

युग्मभेद
★★पारंपरिक बनाम अपारंपरिकसैन्य ख़तरा, राज्य संदर्भी बनाम व्यापक ख़तरे, व्यक्ति और मानवता संदर्भी
★अपरोध बनाम रक्षायुद्ध रोकना बनाम युद्ध सीमित करना या समाप्त करना
★निरस्त्रीकरण बनाम अस्त्र-नियंत्रणहथियार त्यागना बनाम हथियार रखने पर नियम
★BWC बनाम CWC1972 जैविक (155+) बनाम 1997 रासायनिक (193)
★ABM (1972) बनाम NPT (1968)मिसाइल-रक्षा पर रोक बनाम परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक
★★1967 बनाम 19681967 = वह रेखा जिससे पहले हथियार बनाने वालों को अनुमति; 1968 = संधि का वर्ष
★आप्रवासी बनाम शरणार्थीअपनी मर्जी से बनाम मज़बूरी से; स्वीकारने की बाध्यता नहीं बनाम अपेक्षा
★शरणार्थी बनाम आंतरिक विस्थापितजन्मभूमि छोड़ी बनाम राष्ट्रीय सीमा के भीतर ही
★मानवता की सुरक्षा बनाम विश्व सुरक्षाव्यक्ति संदर्भी बनाम वैश्विक खतरे जिनका समाधान कोई देश अकेले नहीं कर सकता
★‘अभाव से मुक्ति’ बनाम ‘भय से मुक्ति’आर्थिक सुरक्षा बनाम हिंसा से सुरक्षा
1974 बनाम 1998पहला परमाणु परीक्षण बनाम परीक्षण के फ़ैसले जिन्हें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से उचित ठहराया गया
1962 बनाम 1965/1971/1999चीन का हमला बनाम पाकिस्तान के हमले
! 95% और बारहगुनी95% = आज के सशस्त्र संघर्षों में आंतरिक युद्धों का हिस्सा; बारहगुनी = 1946–1991 में गृहयुद्धों की वृद्धि