Chapter 2सत्ता के समकालीन केन्द्र

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 15–28 (14 पृष्ठ)।

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पाठ्यपुस्तक का पूरा पाठ, पृष्ठ-संदर्भ सहित। यह शिक्षक की फाइल है — पढ़ाने से पहले एक बार पूरी पढ़िए।

PDF वर्गीकरण: LEGACY — पाठ 8-बिट लिगेसी देवनागरी फॉन्ट में है; 14 पृष्ठ-चित्र दृष्टि से पढ़े गए।

पढ़ाने से पहले — दो संरचनात्मक बातेंध्यान

(1) यह अध्याय पहले ‘अध्याय 4’ था। हाशिये का QR कोड 12108CH04 है, पर मुद्रित शीर्षक “अध्याय 2”। यानी पाठ्यक्रम-युक्तिकरण में दो अध्याय हटाए गए —

  • पुराना अध्याय 1 — ‘शीतयुद्ध का दौर’ (अध्याय 1 के नोट्स में यह पहले ही दर्ज है)
  • पुराना अध्याय 3 — ‘समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व’

दूसरे वाले का असर इस अध्याय पर सीधा पड़ता है, क्योंकि इसकी पूरी भूमिका ही यह है कि “सत्ता के वैकल्पिक केंद्र अमरीका के प्रभुत्व को सीमित करेंगे” — और वह ‘अमरीकी वर्चस्व’ वाला अध्याय अब पाठ्यक्रम में है ही नहीं। विवरण 10-Verification-Log.md में।

(2) पाठ में एक अनाथ आंतरिक संदर्भ रह गया है। पृ. 22 पर लिखा है —

“अध्याय दो में हम सोवियत संघ की राज्य-नियंत्रित आर्थिकी के संकट की चर्चा कर चुके हैं।”

पर युक्तिकरण के बाद सोवियत संघ वाला अध्याय अध्याय 1 है, अध्याय 2 यही है। कक्षा में यह वाक्य पढ़ते ही सुधार बोल दीजिए — “अध्याय एक में।”

अध्याय की संरचना

क्रमखंडपृष्ठ
—परिचय15
1यूरोपीय संघ16–18
2दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान)19–22
3चीनी अर्थव्यवस्था का उत्थान22–24
4चीन के साथ भारत के संबंध24–26
5जापान और दक्षिण कोरिया (बॉक्स)27
—प्रश्नावली — प्रश्न 1 से 1428

परिचय (पृ. 15)

  • 1990 के दशक के शुरू में विश्व राजनीति में दो-ध्रुवीय व्यवस्था के टूटने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के वैकल्पिक केंद्र कुछ हद तक अमरीका के प्रभुत्व को सीमित करेंगे।
  • यूरोप में यूरोपीय संघ और एशिया में दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) का उदय दमदार शक्ति के रूप में हुआ।
  • ★दोनों ने अपने-अपने इलाके में चलने वाली ऐतिहासिक दुश्मनियों और कमजोरियों का क्षेत्रीय स्तर पर समाधान ढूँढ़ा।
  • साथ ही इन्होंने अधिक शांतिपूर्ण और सहकारी क्षेत्रीय व्यवस्था विकसित करने तथा इस क्षेत्र के देशों की अर्थव्यवस्थाओं का समूह बनाने की दिशा में काम किया।
  • ★चीन के आर्थिक उभार ने विश्व राजनीति पर काफी नाटकीय प्रभाव डाला।

आवरण-चित्र का शीर्षक (पृ. 15): “1978 के दिसंबर में देंग श्याओपेंग ने ‘ओपेन डोर’ (मुक्त द्वार) की नीति चलायी। इसके बाद से चीन ने अद्भुत प्रगति की…” — पहली तस्वीर क्रांति के तत्काल बाद के चीन की है, जिसमें लिखा है ‘समाजवादी रास्ता ही सबसे व्यापक रास्ता है’; दूसरी तस्वीर शंघाई की है, जो चीन की नई आर्थिक शक्ति का प्रतीक है।

कक्षा के लिए: यही दो तस्वीरें पूरे अध्याय का सार हैं — एक ही देश, चालीस साल, दो बिलकुल अलग चेहरे।

1. यूरोपीय संघ (पृ. 16–18)

1.1 पृष्ठभूमि — ‘यूरोप के सवाल’

  • दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो यूरोप के अनेक नेता ‘यूरोप के सवालों’ को लेकर परेशान रहे।
  • ★मूल प्रश्न था — “क्या यूरोप को अपनी पुरानी दुश्मनियों को फिर से शुरू करना चाहिए या अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सकारात्मक योगदान करने वाले सिद्धांतों और संस्थाओं के आधार पर उसे अपने संबंधों को नए सिरे से बनाना चाहिए?”
  • दूसरे विश्वयुद्ध ने उन अनेक मान्यताओं और व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया जिनके आधार पर यूरोपीय देशों के आपसी संबंध बने थे।
  • 1945 तक यूरोपीय देशों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं की बर्बादी तो झेली ही, उन मान्यताओं और व्यवस्थाओं को ध्वस्त होते भी देख लिया जिन पर यूरोप खड़ा हुआ था।

1.2 अमरीकी मदद और पहली संस्थाएँ

  • ★1945 के बाद यूरोप के देशों में मेल-मिलाप को शीतयुद्ध से भी मदद मिली।
  • अमरीका ने यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए जबरदस्त मदद की — इसे मार्शल योजना के नाम से जाना जाता है।
  • अमरीका ने ‘नाटो’ के तहत एक सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को जन्म दिया।
  • ★मार्शल योजना के तहत ही 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से पश्चिमी यूरोप के देशों को आर्थिक मदद दी गई। (यही प्रश्नावली के प्रश्न 4-घ का उत्तर है।)
  • यह एक ऐसा मंच बन गया जिसके माध्यम से पश्चिमी यूरोप के देशों ने व्यापार और आर्थिक मामलों में एक-दूसरे की मदद शुरू की।
  • ★1949 में गठित यूरोपीय परिषद् राजनीतिक सहयोग के मामले में एक अगला कदम साबित हुई।

1.3 एकीकरण की प्रक्रिया

  • यूरोप के पूँजीवादी देशों की अर्थव्यवस्था के आपसी एकीकरण की प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ी।
  • ★इसके परिणामस्वरूप 1957 में यूरोपीयन इकॉनामिक कम्युनिटी (EEC) का गठन हुआ।
  • यूरोपीयन पार्लियामेंट के गठन के बाद इस प्रक्रिया ने राजनीतिक स्वरूप प्राप्त कर लिया।
  • ★सोवियत गुट के पतन के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आयी और 1992 में इस प्रक्रिया की परिणति यूरोपीय संघ की स्थापना के रूप में हुई।
  • यूरोपीय संघ के रूप में समान विदेश और सुरक्षा नीति, आंतरिक मामलों तथा न्याय से जुड़े मुद्दों पर सहयोग, और एकसमान मुद्रा के चलन के लिए रास्ता तैयार हो गया।

1.4 यूरोपीय संघ आज — ‘लगभग एक राष्ट्र-राज्य’

  • ★“एक लम्बे समय में बना यूरोपीय संघ आर्थिक सहयोग वाली व्यवस्था से बदलकर ज्यादा से ज्यादा राजनैतिक रूप लेता गया है।”
  • ★“अब यूरोपीय संघ स्वयं काफी हद तक एक विशाल राष्ट्र-राज्य की तरह ही काम करने लगा है।”
  • हालाँकि यूरोपीय संघ का एक संविधान बनाने की कोशिश तो असफल हो गई, लेकिन इसका अपना झंडा, गान, स्थापना-दिवस और अपनी मुद्रा है।
  • अन्य देशों से संबंधों के मामले में इसने काफी हद तक साझी विदेश और सुरक्षा नीति भी बना ली है।
  • नये सदस्यों को शामिल करते हुए यूरोपीय संघ ने सहयोग के दायरे में विस्तार की कोशिश की। नये सदस्य मुख्यत: भूतपूर्व सोवियत खेमे के थे।

1.5 विरोध और असहमतिध्यान

  • यह प्रक्रिया आसान नहीं रही।
  • ★“अनेक देशों के लोग इस बात को लेकर कुछ ख़ास उत्साहित नहीं थे कि जो ताकत उनके देश की सरकार को हासिल थी वह अब यूरोपीय संघ को दे दी जाए।”
  • यूरोपीय संघ में कुछ देशों को शामिल करने के सवाल पर भी असहमति है।

1.6 झंडा (पृ. 16 का बॉक्स)

  • सोने के रंग के सितारों का घेरा यूरोप के लोगों की एकता और मेलमिलाप का प्रतीक है।
  • ★इसमें 12 सितारे हैं क्योंकि बारह की संख्या को वहाँ पारंपरिक रूप से पूर्णता, समग्रता और एकता का प्रतीक माना जाता है।
  • (स्रोत पाठ्यपुस्तक में: europa.eu)

! आम भ्रांति: 12 सितारे सदस्य-संख्या नहीं दर्शाते। कक्षा में यह स्पष्ट कीजिए।

1.7 यूरोपीय संघ का प्रभाव — आर्थिक★★

आयामतथ्य
सकल घरेलू उत्पाद★वर्ष 2024 में लगभग 19.35 खरब डॉलर होने का अनुमान
मुद्रायूरो अमरीकी डालर के प्रभुत्व के लिए खतरा बन सकती है
विश्व व्यापार★इसकी हिस्सेदारी अमरीका से तीन गुनी ज्यादा है
व्यापारिक विवादइसी के चलते यह अमरीका और चीन से व्यापारिक विवादों में पूरी धौंस के साथ बात करता है
पहुँचआर्थिक शक्ति का प्रभाव नज़दीकी देशों पर ही नहीं, बल्कि एशिया और अफ्रीका के दूर-दराज के मुल्कों पर भी
WTOविश्व व्यापार संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठनों के अंदर एक महत्त्वपूर्ण समूह के रूप में काम करता है

1.8 राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव

  • ★यूरोपीय संघ का एक सदस्य फ्रांस सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य है। यूरोपीय संघ के कई और देश सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों में शामिल हैं।
  • इसके चलते यूरोपीय संघ अमरीका समेत सभी मुल्कों की नीतियों को प्रभावित करता है।
  • उदाहरण: ★ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अमरीकी नीतियों को हाल के दिनों में प्रभावित करना।
  • ★चीन के साथ मानवाधिकारों के उल्लंघन और पर्यावरण विनाश के मामलों पर धमकी या सैनिक शक्ति का उपयोग करने की जगह कूटनीति, आर्थिक निवेश और बातचीत की इसकी नीति ज्यादा प्रभावी साबित हुई है।

1.9 सैनिक और तकनीकी प्रभाव★

आयामतथ्य
सेना★यूरोपीय संघ के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है
रक्षा बजटकुल रक्षा बजट अमरीका के बाद सबसे अधिक
परमाणु हथियार★फ्रांस के पास परमाणु हथियार हैं — अनुमान है कि करीब 335
अंतरिक्ष और संचार★अंतरिक्ष विज्ञान और संचार प्रौद्योगिकी के मामले में भी दुनिया में दूसरा स्थान

1.10 सीमाएँ — ‘अधिराष्ट्रीय’ होने की कीमतध्यान★

  • ★“अधिराष्ट्रीय संगठन के तौर पर यूरोपीय संघ आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक मामलों में दखल देने में सक्षम है। लेकिन अनेक मामलों में इसके सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीति है जो कई बार एक-दूसरे के खिलाफ भी होती है।”
उदाहरणविवरण
इराक युद्ध★अमरीकी हमले में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर साथ थे, लेकिन जर्मनी और फ्रांस इस हमले के खिलाफ थे। यूरोपीय संघ के कई नए सदस्य देश भी अमरीकी गठबंधन में थे।
यूरो का विरोधयूरोप के कुछ हिस्सों में यूरो लागू करने के कार्यक्रम को लेकर काफी नाराजगी है।
ब्रिटेन★पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने ब्रिटेन को यूरोपीय बाज़ार से अलग रखा।
डेनमार्क और स्वीडन★मास्ट्रिस्ट संधि और साझी यूरोपीय मुद्रा यूरो को मानने का प्रतिरोध किया।

★निष्कर्ष-वाक्य: “इससे विदेशी और रक्षा मामलों में काम करने की यूरोपीय संघ की क्षमता सीमित होती है।”

1.11 शांगेन वीजा (पृ. 17 का बॉक्स)

“जिस समझौते पर शांगेन में दस्तख़त हुए उसके अनुसार आपको सिर्फ एक देश का वीजा लेना होगा और इस वीजा के बूते आप यूरोपीय संघ में शामिल अधिकांश देशों में जा सकेंगे।”

1.12 यूरोपीय एकता के महत्त्वपूर्ण पड़ाव (पृ. 18 का बॉक्स) —परीक्षा का सबसे बड़ा स्रोत★★

तिथिघटना
अप्रैल 1951★पश्चिमी यूरोप के छह देशों — फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग — ने पेरिस संधि पर दस्तखत करके यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय का गठन किया।
मार्च 1957★इन्हीं छह देशों ने रोम की संधि के माध्यम से यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) और यूरोपीय एटमी ऊर्जा समुदाय (Euratom) का गठन किया।
जनवरी 1973डेनमार्क, आयरलैंड और ब्रिटेन ने भी यूरोपीय समुदाय की सदस्यता ली।
जून 1979★यूरोपीय संसद के लिए पहला प्रत्यक्ष चुनाव।
जनवरी 1981यूनान (ग्रीस) ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय की सदस्यता ली।
जून 1985★शांगेन संधि ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय के देशों के बीच सीमा नियंत्रण समाप्त किया।
जनवरी 1986स्पेन और पुर्तगाल भी यूरोपीय आर्थिक समुदाय में शामिल हुए।
अक्टूबर 1990जर्मनी का एकीकरण।
फरवरी 1992★यूरोपीय संघ के गठन के लिए मास्ट्रिस्ट संधि पर दस्तखत।
जनवरी 1993यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) का नाम बदलकर यूरोपीय समुदाय (EC) कर दिया गया।
जनवरी 2002★नई मुद्रा यूरो को 12 सदस्य देशों ने अपनाया।
मई 2004★साइप्रस, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, हंगरी, लताविया, लिथुआनिया, माल्टा, पोलैंड, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया भी यूरोपीय संघ में शामिल। (दस देश)
जनवरी 2007बुल्गारिया और रोमानिया यूरोपीय संघ में शामिल। स्लोवेनिया ने यूरो को अपनाया।
दिसम्बर 2009लिस्बन संधि लागू हुई।
2012★यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार।
2013★क्रोएशिया यूरोपीय संघ का 28वाँ सदस्य बना।
2016★ब्रिटेन में जनमत संग्रह; 51.9 प्रतिशत मतदाताओं ने फैसला किया कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर (Brexit) हो जाए।

1.13 कार्टून (पृ. 19)

“2003 में यूरोपीय संघ ने एक साझा संविधान बनाने की कोशिश की थी। यह कोशिश नाकामयाब रही। इसी को लक्ष्य करके यह कार्टून बना है। कार्टूनिस्ट ने यूरोपीय संघ को टाइटैनिक जहाज के रूप में क्यों दिखाया है?”

कक्षा के लिए उत्तर: टाइटैनिक विशाल था, अजेय माना गया था, और पहली ही यात्रा में हिमशैल से टकराकर डूब गया। कार्टूनिस्ट का संकेत यह है कि यूरोपीय संघ भी विशाल और महत्वाकांक्षी है, पर सदस्य-देशों की संप्रभुता रूपी हिमशैलों से टकरा सकता है — संविधान की असफलता इसी का प्रमाण थी।

2. दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन — आसियान (पृ. 19–22)

2.1 पृष्ठभूमि — तीन दबाव

  • ★दूसरे विश्व युद्ध से पहले और उसके दौरान, एशिया का यह हिस्सा बार-बार यूरोपीय और जापानी उपनिवेशवाद का शिकार हुआ तथा भारी राजनैतिक और आर्थिक कीमत चुकाई।
  • युद्ध समाप्त होने पर इसे राष्ट्र-निर्माण, आर्थिक पिछड़ेपन और गरीबी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
  • ★इसे शीतयुद्ध के दौर में किसी एक महाशक्ति के साथ जाने के दबावों को भी झेलना पड़ा।
  • “टकरावों और भागमभाग की ऐसी स्थिति को दक्षिण-पूर्व एशिया सँभालने की स्थिति में नहीं था।”
  • ★बांडुंग सम्मेलन और गुटनिरपेक्ष आंदोलन वगैरह के माध्यम से एशिया और तीसरी दुनिया के देशों में एकता कायम करने के प्रयास अनौपचारिक स्तर पर सहयोग और मेलजोल कराने के मामले में कारगर नहीं हो रहे थे।
  • इसी के चलते दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों ने आसियान बनाकर एक वैकल्पिक पहल की।

2.2 स्थापना★

  • ★1967 में इस क्षेत्र के पाँच देशों ने बैंकॉक घोषणा पर हस्ताक्षर करके ‘आसियान’ की स्थापना की।
  • ★ये देश थे — इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड।
  • बाद के वर्षों में ब्रुनेई दारुस्सलाम, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया भी आसियान में शामिल हो गए तथा इसकी सदस्य संख्या दस हो गई।

2.3 उद्देश्य

  1. ★मुख्य रूप से आर्थिक विकास को तेज करना और उसके माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक विकास हासिल करना।
  2. ★कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र के कायदों पर आधारित क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देना।

2.4 झंडा (पृ. 19 का बॉक्स)

  • आसियान के प्रतीक-चिह्न में धान की दस बालियाँ दक्षिण-पूर्व एशिया के दस देशों को इंगित करती हैं जो आपस में मित्रता और एकता के धागे से बंधे हैं। वृत्त आसियान की एकता का प्रतीक है।
  • (स्रोत पाठ्यपुस्तक में: aseansec.org)

2.5 ‘आसियान शैली’ (ASEAN way) — अध्याय का सबसे विशिष्ट पद★★

  • ★“यूरोपीय संघ की तरह इसने खुद को अधिराष्ट्रीय संगठन बनाने या उसकी तरह अन्य व्यवस्थाओं को अपने हाथ में लेने का लक्ष्य नहीं रखा।”
  • ★“अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप का नया उदाहरण पेश करके आसियान ने काफी यश कमाया है और इसको ‘आसियान शैली’ (ASEAN way) ही कहा जाने लगा है।”
  • ★“आसियान के कामकाज में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान करना बहुत ही महत्त्वपूर्ण रहा है।”

यही प्रश्नावली के प्रश्न 2 का उत्तर है — विकल्प (ख)।

2.6 आसियान समुदाय के तीन स्तंभ (2003)★

“दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से आर्थिक तरक्की करने वाले सदस्य देशों के समूह आसियान ने अब अपने उद्देश्यों को आर्थिक और सामाजिक दायरे से ज्यादा व्यापक बनाया है।”

2003 में आसियान ने तीन स्तंभों के आधार पर ‘आसियान समुदाय’ बनाने की दिशा में कदम उठाए, जो कुछ हद तक यूरोपीय संघ से मिलता-जुलता है —

स्तंभक्या करता है
1. आसियान सुरक्षा समुदाय★क्षेत्रीय विवादों को सैनिक टकराव तक न ले जाने की सहमति पर आधारित (प्रश्न 4-ङ का उत्तर)
2. आसियान आर्थिक समुदाय★आसियान देशों का साझा बाज़ार और उत्पादन आधार तैयार करना; इस इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद करना; आर्थिक विवादों को निपटाने की मौजूदा व्यवस्था को सुधारना
3. आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय—

2003 तक के समझौते: आसियान के सदस्य देशों ने कई समझौते किए जिनके द्वारा हर सदस्य देश ने ★शांति, निष्पक्षता, सहयोग, अहस्तक्षेप को बढ़ावा देने और राष्ट्रों के आपसी अंतर तथा संप्रभुता के अधिकारों का सम्मान करने पर अपनी वचनबद्धता जाहिर की।

2.7 आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF)★

  • ★“आसियान के देशों की सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल बनाने के लिए 1994 में आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की स्थापना की गई।”

2.8 आर्थिक चरित्र

  • ★“बुनियादी रूप से आसियान एक आर्थिक संगठन था और वह ऐसा ही बना रहा।”
  • आसियान क्षेत्र की कुल अर्थव्यवस्था अमरीका, यूरोपीय संघ और जापान की तुलना में काफी छोटी है — पर इसका विकास इन सबसे अधिक तेजी से हो रहा है।
  • इसके चलते इस क्षेत्र में और इससे बाहर इसके प्रभाव में तेजी से वृद्धि हो रही है।
  • ★आसियान ने निवेश, श्रम और सेवाओं के मामले में मुक्त व्यापार क्षेत्र (FTA) बनाने पर भी ध्यान दिया है। इस प्रस्ताव पर आसियान के साथ बातचीत करने की पहल अमरीका और चीन ने कर भी दी है।

2.9 विजन दस्तावेज़ 2020 और बातचीत की नीति

  • ★“इसके विजन दस्तावेज़ 2020 में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आसियान की एक बहिर्मुखी भूमिका को प्रमुखता दी गई है।”
  • ★“आसियान द्वारा अभी टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा देने की नीति से ही यह बात निकली है।”
  • इसी तरकीब से आसियान ने —
    • कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया,
    • पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला,
    • और पूर्व-एशियाई सहयोग पर बातचीत के लिए 1999 से नियमित रूप से वार्षिक बैठक आयोजित की है।

2.10 भारत और आसियान★

तथ्यविवरण
आरंभिक उपेक्षा“शुरुआती वर्षों में भारतीय विदेश नीति ने आसियान पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।”
नीति-परिवर्तन★भारत ने 1991 से ‘लुक ईस्ट’ (Look East) और 2014 से ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीति अपनायी — इससे पूर्वी एशिया के देशों (आसियान, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया) से उसके आर्थिक संबंधों में बढ़ोत्तरी हुई है।
मुक्त व्यापार समझौतेभारत ने दो आसियान सदस्यों — मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड — के साथ मुक्त व्यापार का समझौता किया है। ! (पाठ ‘दो’ कहकर तीन नाम गिनाता है — देखिए 10-Verification-Log.md)
FTA★2010 में आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र व्यवस्था लागू हुई।
रजत जयंती★25 जनवरी 2018 को नई दिल्ली में भारत और आसियान साझेदारी की रजत जयंती मनाने के लिए डाक टिकट जारी — आसियान नेताओं के साथ भारत के प्रधानमंत्री।

2.11 आसियान की असली ताकत — निष्कर्ष-वाक्य★

  • ★“आसियान की असली ताकत अपने सदस्य देशों, सहभागी सदस्यों और बाकी गैर-क्षेत्रीय संगठनों के बीच निरंतर संवाद और परामर्श करने की नीति में है।”
  • ★“यह एशिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्रीय संगठन है जो एशियाई देशों और विश्व शक्तियों को राजनैतिक और सुरक्षा मामलों पर चर्चा के लिए राजनैतिक मंच उपलब्ध कराता है।”

पाठ का प्रश्न (पृ. 22 का बॉक्स): “आसियान सफल क्यों हुआ जबकि दक्षेस (सार्क) नहीं?”

कक्षा के लिए संकेत: आसियान ने आर्थिक सहयोग को पहले रखा और राजनीतिक विवादों को अलग रखा; अहस्तक्षेप और संप्रभुता के सम्मान को नियम बनाया; और अधिराष्ट्रीय बनने की कोशिश नहीं की। दक्षेस में दो बड़े सदस्यों का द्विपक्षीय विवाद पूरे संगठन को जकड़ लेता है।

3. चीनी अर्थव्यवस्था का उत्थान (पृ. 22–24)

3.1 चीन आज★

  • “आर्थिक शक्ति के रूप में चीन के उदय को पूरे विश्व में जिस तरह देखा जा रहा है उसे अगले पन्ने पर अंकित कार्टून एकदम ठीक-ठीक बता रहा है।”
  • ★“1978 के बाद से जारी चीन की आर्थिक सफलता को एक महाशक्ति के रूप में इसके उभरने के साथ जोड़कर देखा जाता है।”
  • ★“आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने के बाद से चीन सबसे ज्यादा तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रहा है और माना जाता है कि इस रफ्तार से चलते हुए 2040 तक वह दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति, अमरीका से भी आगे निकल जाएगा।”
  • ★“आर्थिक स्तर पर अपने पड़ोसी मुल्कों से जुड़ाव के चलते चीन पूर्व एशिया के विकास का इंजन-जैसा बना हुआ है” — और इस कारण क्षेत्रीय मामलों में उसका प्रभाव बहुत बढ़ गया है।
  • इसकी विशाल आबादी, बड़ा भू-भाग, संसाधन, क्षेत्रीय अवस्थिति और राजनैतिक प्रभाव इस तेज आर्थिक वृद्धि के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।

3.2 पहला मॉडल — सोवियत तर्ज़ पर (1949 से)

  • ★1949 में माओ के नेतृत्व में हुई साम्यवादी क्रांति के बाद चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना के समय यहाँ की आर्थिकी सोवियत मॉडल पर आधारित थी।
  • आर्थिक रूप से पिछड़े साम्यवादी चीन ने पूँजीवादी दुनिया से अपने रिश्ते तोड़ लिए। ऐसे में इसके पास अपने ही संसाधनों से गुजारा करने के अलावा कोई चारा न था। (थोड़े समय तक इसे सोवियत मदद और सलाह भी मिली थी।)
  • ★मॉडल का सार — “खेती से पूँजी निकाल कर सरकारी नियंत्रण में बड़े उद्योग खड़े करने पर जोर था।”
  • विदेशी बाज़ारों से तकनीक और सामानों की खरीद के लिए विदेशी मुद्रा की कमी थी, इसलिए चीन ने आयातित सामानों को धीरे-धीरे घरेलू स्तर पर ही तैयार करवाना शुरू किया।

3.3 इस मॉडल की उपलब्धियाँ★

  • इस मॉडल में चीन ने अभूतपूर्व स्तर पर औद्योगिक अर्थव्यवस्था खड़ा करने का आधार बनाने के लिए सारे संसाधनों का इस्तेमाल किया।
  • सभी नागरिकों को रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ देने के दायरे में लाया गया।
  • ★“अपने नागरिकों को शिक्षित करने और उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के मामले में चीन सबसे विकसित देशों से भी आगे निकल गया।”
  • अर्थव्यवस्था का विकास भी 5 से 6 फीसदी की दर से हुआ।

3.4 इस मॉडल का संकटध्यान

समस्याविवरण
जनसंख्या★“जनसंख्या में 2–3 फीसदी की वार्षिक वृद्धि इस विकास दर पर पानी फेर रही थी”; बढ़ती आबादी विकास के लाभ से वंचित रह जा रही थी
कृषि अधिशेषखेती की पैदावार उद्योगों की पूरी ज़रूरत लायक अधिशेष नहीं दे पाती थी
औद्योगिक उत्पादनपर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ रहा था
विदेशी व्यापारन के बराबर था
प्रति व्यक्ति आयबहुत कम थी

! यहीं वह अनाथ संदर्भ है: “अध्याय दो में हम सोवियत संघ की राज्य-नियंत्रित आर्थिकी के संकट की चर्चा कर चुके हैं। ऐसे ही संकट का सामना चीन को भी करना पड़ा।” — अब वह अध्याय 1 है।

3.5 1970 के दशक के बड़े नीतिगत निर्णय★★

वर्षनिर्णय
1972★चीन ने अमरीका से संबंध बनाकर अपने राजनीतिक और आर्थिक एकांतवास को खत्म किया। (प्रश्न 4-ग का उत्तर)
1973★प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई ने कृषि, उद्योग, सेना और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आधुनिकीकरण के चार प्रस्ताव रखे।
1978★★तत्कालीन नेता देंग श्याओपेंग ने चीन में आर्थिक सुधारों और ‘खुले द्वार की नीति’ की घोषणा की। नीति यह हो गयी कि विदेश पूंजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता प्राप्त की जाए।

3.6 चीन का अपना तरीका — ‘शॉक थेरेपी’ नहीं★★

★★“चीन ने ‘शॉक थेरेपी’ पर अमल करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला।”

यह अध्याय 1 से सीधा जुड़ता है — और परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला तुलनात्मक बिंदु है।

चरणवर्ष
★खेती का निजीकरण1982
★उद्योगों का निजीकरण1998
व्यापार संबंधी अवरोध हटानासिर्फ ‘विशेष आर्थिक क्षेत्रों’ (SEZ) के लिए, जहाँ विदेशी निवेशक अपने उद्यम लगा सकते हैं

3.7 परिणाम★

  • नयी आर्थिक नीतियों के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को अपनी जड़ता से उबरने में मदद मिली।
  • ★कृषि के निजीकरण के कारण कृषि-उत्पादों तथा ग्रामीण आय में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निजी बचत का परिमाण बढ़ा और इससे ग्रामीण उद्योगों की तादाद बड़ी तेजी से बढ़ी।
  • उद्योग और कृषि दोनों ही क्षेत्रों में चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि-दर तेज रही।
  • ★व्यापार के नये कानून तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) के निर्माण से विदेश-व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
  • ★“चीन पूरे विश्व में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश बनकर उभरा।”
  • चीन के पास विदेशी मुद्रा का अब विशाल भंडार है और इसके दम पर चीन दूसरे देशों में निवेश कर रहा है।
  • ★चीन 2001 में विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया — “इस तरह दूसरे देशों के लिए अपनी अर्थव्यवस्था खोलने की दिशा में चीन ने एक कदम और बढ़ाया।”
  • ★“अब चीन की योजना विश्व आर्थिकी से अपने जुड़ाव को और गहरा करके भविष्य की विश्व व्यवस्था को एक मनचाहा रूप देने की है।”

3.8 लागत — ‘हर किसी को सुधारों का लाभ नहीं मिला’ध्यान

★“चीन की आर्थिकी में तो नाटकीय सुधार हुआ है लेकिन वहाँ हर किसी को सुधारों का लाभ नहीं मिला है।”

समस्यातथ्य
बेरोजगारी★“चीन में बेरोजगारी बढ़ी है और 10 करोड़ लोग रोजगार की तलाश में हैं।”
महिलाएँ★“वहाँ महिलाओं के रोजगार और काम करने के हालात उतने ही खराब हैं जितने यूरोप में 18वीं और 19वीं सदी में थे।”
पर्यावरणपर्यावरण के नुकसान के परिणाम सामने आए
भ्रष्टाचारभ्रष्टाचार के बढ़ने जैसे परिणाम भी
असमानता★“गाँव और शहर के तथा तटीय और मुख्यभूमि पर रहने वाले लोगों के बीच आर्थिक फासला बढ़ता जा रहा है।”

पाठ का प्रश्न-बॉक्स (पृ. 23): “चीन में सिर्फ छह ही विशेष आर्थिक क्षेत्र हैं और भारत में ऐसे 200 से ज्यादा क्षेत्रों को मंजूरी! क्या यह भारत के लिए अच्छा है?”

3.9 वैश्विक प्रभाव★

  • “हालाँकि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चीन एक ऐसी जबरदस्त आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है कि सभी उसका लोहा मानने लगे हैं।”
  • ★“चीन की अर्थव्यवस्था का बाहरी दुनिया से जुड़ाव और पारस्परिक निर्भरता ने अब यह स्थिति बना दी है कि अपने व्यावसायिक साझीदारों पर चीन का जबरदस्त प्रभाव बन चुका है” — यही कारण है कि जापान, अमरीका, आसियान और रूस — सभी व्यापार के आगे चीन से बाकी विवादों को भुला चुके हैं।
  • उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही चीन और ताइवान के मतभेद भी खत्म हो जाएँगे और ताइवान इसकी अर्थव्यवस्था के साथ ज्यादा घनिष्ठ रूप से जुड़ जायेगा।
  • ★“1997 के वित्तीय संकट के बाद आसियान देशों की अर्थव्यवस्था को टिकाए रखने में चीन के आर्थिक उभार ने काफी मदद की है।”
  • ★“लातिनी अमरीका और अफ्रीका में निवेश और मदद की इसकी नीतियाँ बताती हैं कि विकासशील देशों के मामले में चीन एक नई विश्व शक्ति के रूप में उभरता जा रहा है।”

3.10 कार्टून (पृ. 24)

  • ‘चीन: तब और अब’ — ‘तब’ में माओ की लाल किताब, ‘अब’ में हू की पूँजीपरस्त लाल ‘टाई’।
  • ‘चीनी साइकिल’ — “विश्व में सबसे ज्यादा साइकिलें चीन में इस्तेमाल की जाती हैं। कार्टून में साइकिल का इस्तेमाल आज के चीन के दोहरेपन को इंगित करने के लिए किया गया है। यह दोहरापन क्या है? क्या हम इसे अंतर्विरोध कह सकते हैं?”

कक्षा के लिए उत्तर: दोहरापन यह है कि चीन राजनीतिक रूप से साम्यवादी है पर आर्थिक रूप से पूँजीवादी — साइकिल के दो पहिये हँसिया-हथौड़ा और डॉलर हैं। दोनों एक ही गाड़ी को चला रहे हैं।

4. चीन के साथ भारत के संबंध (पृ. 24–26)

4.1 इतिहास — ‘कभी नहीं टकराए’

  • ★“पश्चिमी साम्राज्यवाद के उदय से पहले भारत और चीन एशिया की महाशक्ति थे।”
  • चीन का अपने आसपास के इलाकों पर भी काफी प्रभाव था और आसपास के छोटे देश इसके प्रभुत्व को मानकर और कुछ नज़राना देकर चैन से रहा करते थे।
  • चीनी राजवंशों के लम्बे शासन में मंगोलिया, कोरिया, हिन्द-चीन के कुछ इलाके और तिब्बत इसकी अधीनता मानते रहे थे।
  • भारत के भी अनेक राजवंशों और साम्राज्यों का प्रभाव उनके अपने राज्य से बाहर भी रहा था।
  • “भारत हो या चीन, इनका प्रभाव सिर्फ राजनैतिक नहीं था — यह आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक भी था।”
  • ★“पर चीन और भारत अपने प्रभाव क्षेत्रों के मामले में कभी नहीं टकराए थे।”
  • ★परिणाम — “दोनों देश एक दूसरे को ज्यादा अच्छी तरह से नहीं जान सके और जब बीसवीं सदी में दोनों देश एक दूसरे से टकराए तो दोनों को ही एक-दूसरे के प्रति विदेश नीति विकसित करने में मुश्किलें आईं।”

4.2 आशा और उसका टूटना★

  • अंग्रेजी राज से भारत के आज़ाद होने और चीन द्वारा विदेशी शक्तियों को निकाल बाहर करने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि ये दोनों मुल्क साथ आकर विकासशील दुनिया और खास तौर से एशिया के भविष्य को तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
  • ★“कुछ समय के लिए ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा भी लोकप्रिय हुआ।”
  • “हालाँकि, भारतीय सीमा पर चीनी अतिक्रमण ने इस आशा को धूमिल कर दिया।”
  • ★आज़ादी के तत्काल बाद 1950 में चीन द्वारा तिब्बत को हड़पने तथा भारत-चीन सीमा पर बस्तियाँ बनाने के फैसले से दोनों देशों के बीच संबंध एकदम गड़बड़ हो गए।

4.3 1962 का युद्ध★

  • ★“भारत और चीन दोनों देश अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों और लद्दाख के अक्साई-चिन क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धी दावों के चलते 1962 में लड़ पड़े।” (प्रश्न 4-क का उत्तर)
  • ★“1962 के युद्ध में भारत को सैनिक पराजय झेलनी पड़ी और भारत-चीन सम्बन्धों पर इसका दीर्घकालिक असर हुआ।”
  • ★“1976 तक दोनों देशों के बीच कूटनैतिक संबंध समाप्त ही रहे।”

4.4 सुधार की प्रक्रिया★

वर्षघटना
1970 का उत्तरार्द्धचीन का राजनीतिक नेतृत्व बदला; चीन की नीति में वैचारिक मुद्दों की जगह व्यावहारिक मुद्दे प्रमुख होते गए — इसलिए चीन भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए विवादास्पद मामलों को छोड़ने को तैयार हो गया
1981★सीमा विवादों को दूर करने के लिए वार्ताओं की शृंखला शुरू
दिसम्बर 1988★★राजीव गांधी का चीन दौरा — इससे भारत-चीन सम्बन्धों को सुधारने के प्रयासों को बढ़ावा मिला

1988 के बाद के कदम:

  • दोनों देशों ने टकराव टालने और सीमा पर शांति तथा यथास्थिति बनाए रखने के उपायों की शुरुआत की।
  • ★सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में परस्पर सहयोग, और व्यापार के लिए सीमा पर चार पोस्ट खोलने के समझौते भी किए।

4.5 शीतयुद्ध के बाद — व्यापार का उभार★

  • ★“शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद से भारत-चीन संबंधों में महत्त्वपूर्ण बदलाव आया है। अब इनके संबंधों का रणनीतिक ही नहीं, आर्थिक पहलू भी है।”
  • ★“दोनों ही खुद को विश्व-राजनीति की उभरती शक्ति मानते हैं और दोनों ही एशिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहेंगे।”
तथ्यआँकड़ा
व्यापार-वृद्धि की दर★1999 से 30 फीसदी सालाना
द्विपक्षीय व्यापार 1992★33 करोड़ 80 लाख डॉलर
द्विपक्षीय व्यापार 2017★84 अरब डॉलर
  • “इससे चीन के साथ संबंधों में नयी गर्मजोशी आयी है।”
  • हाल में, दोनों देश ऐसे मसलों पर भी सहयोग करने के लिए राजी हुए हैं जिनसे दोनों के बीच विभेद पैदा हो सकते थे — जैसे विदेशों में ऊर्जा सौदा हासिल करने का मसला।
  • ★वैश्विक धरातल पर भारत और चीन ने विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठनों के संबंध में एक जैसी नीतियाँ अपनायी हैं।
  • बॉक्स (पृ. 25): चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2019 में भारत का दौरा किया। 2018 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन गए थे।

4.6 मतभेद के मुद्देध्यान

मुद्दाविवरण
1998 का परमाणु परीक्षण★“1998 में भारत के परमाणु हथियार परीक्षण को कुछ लोगों ने चीन से खतरे के मद्देनज़र उचित ठहराया था। लेकिन इससे भी दोनों के बीच संपर्क कम नहीं हुआ।”
पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम★“यह सच है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम में भी चीन को मददगार माना जाता है।”
बांग्लादेश और म्यांमार★“चीन के सैनिक संबंधों को भी दक्षिण एशिया में भारतीय हितों के खिलाफ माना जाता है।”
फिर भी★“पर इसमें से कोई भी मुद्दा दोनों मुल्कों में टकराव करवा देने लायक नहीं माना जाता।” प्रमाण — “इन चीजों के बने रहने के बावजूद सीमा विवाद सुलझाने की बातचीत और सैन्य स्तर पर सहयोग का कार्यक्रम जारी है।”

4.7 आज का तनाव — पाठ का अंतिम अनुच्छेद★

  • “चीन और भारत के नेता तथा अधिकारी अब अक्सर नयी दिल्ली और बीजिंग का दौरा करते हैं। इससे दोनों देश एक-दूसरे को ज्यादा करीब से समझने लगे हैं।”
  • “परिवहन और संचार मार्गों की बढ़ोत्तरी, समान आर्थिक हित तथा एक जैसे वैश्विक सरोकारों के कारण भारत और चीन के बीच संबंधों को ज्यादा सकारात्मक तथा मजबूत बनाने में मदद मिली है।”
  • !★“हालाँकि हाल के समय में दोनों देशों के बीच संबंधों में गिरावट आई है। इसके कारण —
    • ★सीमा-विवाद,
    • ★चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा,
    • ★और संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद विरोधी भारतीय प्रस्ताव के विरुद्ध चीन द्वारा पाकिस्तान को समर्थन देना आदि हैं।”

यह अनुच्छेद अध्याय का सबसे नया हिस्सा है — और प्रश्न 14 सीधे इसी से बनता है।

5. जापान (पृ. 27 का बॉक्स)★

मदतथ्य
ब्रांडसोनी, पैनासोनिक, कैनन, सुजुकी, होंडा, ट्योटा और माज्दा — उच्च प्रौद्योगिकी के उत्पाद
संसाधन★“जापान के पास प्राकृतिक संसाधन कम हैं और वह ज्यादातर कच्चे माल का आयात करता है।” इसके बावजूद दूसरे विश्वयुद्ध के बाद बड़ी तेजी से प्रगति
OECD★1964 में आर्थिक सहयोग तथा विकास संगठन (OECD) का सदस्य बना
अर्थव्यवस्था★2017 में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
समूह-7★“एशिया के देशों में अकेला जापान ही समूह-7 के देशों में शामिल है।”
आबादी★आबादी के लिहाज से विश्व में ग्यारहवाँ स्थान
परमाणु बम★“परमाणु बम की विभीषिका झेलने वाला एकमात्र देश जापान है।”
संयुक्त राष्ट्र★“जापान संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में 10 प्रतिशत का योगदान करता है” — बजट में अंशदान के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा देश
सुरक्षा-गठबंधन★1951 से जापान का अमरीका के साथ सुरक्षा-गठबंधन है
संविधान का अनुच्छेद 9★★“राष्ट्र के संप्रभु अधिकार के रूप में युद्ध को तथा अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में बल-प्रयोग अथवा धमकी से काम लेने के तरीके को जापान के लोग हमेशा के लिए त्याग करते हैं।”
सैन्य व्यय★सकल घरेलू उत्पाद का केवल 1 प्रतिशत — फिर भी सैन्य व्यय के लिहाज से विश्व में सातवाँ स्थान
तकनीकआसीमो — विश्व का सबसे अत्याधुनिक मानवरूपी रोबोट (स्रोत: asimo.honda.com)

पाठ का प्रश्न: “इन तथ्यों को ध्यान में रखकर अनुमान लगाइए कि वैकल्पिक शक्ति-केंद्र के रूप में जापान कितना प्रभावकारी होगा?”

कक्षा के लिए संकेत: आर्थिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली (तीसरी अर्थव्यवस्था, समूह-7 का एकमात्र एशियाई सदस्य, UN बजट में दूसरा सबसे बड़ा दाता) — पर सैनिक रूप से सीमित, क्योंकि अनुच्छेद 9 ने युद्ध का अधिकार ही त्याग दिया है और सुरक्षा के लिए वह 1951 से अमरीका पर निर्भर है। यही वह विरोधाभास है जिस पर प्रश्न टिका है।

6. दक्षिण कोरिया (पृ. 27 का बॉक्स)★

मदतथ्य
विभाजन★“कोरियाई प्रायद्वीप को द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में दक्षिण कोरिया (रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया) और उत्तरी कोरिया (डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया) में 38वें समानांतर के साथ-साथ विभाजित किया गया था।”
कोरियाई युद्ध★1950–53 — इसने और शीत युद्ध काल की गतिशीलता ने दोनों पक्षों के बीच प्रतिद्वंद्विता को तेज़ कर दिया
संयुक्त राष्ट्र★“अंततः 17 सितंबर 1991 को दोनों कोरिया संयुक्त राष्ट्र के सदस्य बने।”
‘हान नदी पर चमत्कार’★★1960 के दशक से 1980 के दशक के बीच आर्थिक शक्ति के रूप में तेज़ी से विकास
OECD★1996 में सदस्य बना
अर्थव्यवस्था★2017 में दुनिया की ग्यारहवीं सबसे बड़ी; सैन्य खर्च में दसवाँ स्थान
HDI★मानव विकास रिपोर्ट 2016 के अनुसार रैंक 18
उच्च मानव विकास के कारण★“सफल भूमि सुधार, ग्रामीण विकास, व्यापक मानव संसाधन विकास, तीव्र न्यायसंगत आर्थिक वृद्धि”
अन्य कारकनिर्यात उन्मुखीकरण, मजबूत पुनर्वितरण नीतियाँ, सार्वजनिक अवसंरचना विकास, प्रभावी संस्थाएँ और शासन
भारत से संबंधसैमसंग, एलजी और हुंडई जैसे ब्रांड भारत में प्रसिद्ध; कई समझौते बढ़ते वाणिज्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाते हैं

1. तिथि के हिसाब से इन सबको क्रम दें — (क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश (ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना (ग) यूरोपीय संघ की स्थापना (घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना

2. ‘ASEAN way’ या आसियान शैली क्या है? (क) आसियान के सदस्य देशों की जीवन शैली है (ख) आसियान सदस्यों के अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज की शैली को कहा जाता है। (ग) आसियान सदस्यों की रक्षानीति है। (घ) सभी आसियान सदस्य देशों को जोड़ने वाली सड़क है।

3. इनमें से किसने ‘खुले द्वार’ की नीति अपनाई? (क) चीन (ख) दक्षिण कोरिया (ग) जापान (घ) अमरीका

4. खाली स्थान भरें — (क) 1962 में भारत और चीन के बीच ________ और ________ को लेकर सीमावर्ती लड़ाई हुई थी। (ख) आसियान क्षेत्रीय मंच के कामों में ________ और ________ करना शामिल है। (ग) चीन ने 1972 में ________ के साथ दोतरफा संबंध शुरू करके अपना एकांतवास समाप्त किया। (घ) ________ योजना के प्रभाव से 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना हुई। (ङ) ________ आसियान का एक स्तम्भ है जो इसके सदस्य देशों की सुरक्षा के मामले देखता है।

5. क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य क्या हैं?

6. भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर क्या असर होता है?

7. ‘आसियान विज़न-2020’ की मुख्य-मुख्य बातें क्या हैं?

8. आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभों और उनके उद्देश्यों के बारे में बताएँ।

9. आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से किस तरह अलग है?

10. किस तरह यूरोपीय देशों ने युद्ध के बाद की अपनी परेशानियाँ सुलझाईं? संक्षेप में उन कदमों की चर्चा करें जिनसे होते हुए यूरोपीय संघ की स्थापना हुई।

11. यूरोपीय संघ को क्या चीजें एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन बनाती हैं?

12. चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूदा एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्कों से अपने विचारों को पुष्ट करें।

13. मुल्कों की शांति और समृद्धि क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों को बनाने और मजबूत करने पर टिकी है। इस कथन की पुष्टि करें।

14. भारत और चीन के बीच विवाद के मामलों की पहचान करें और बताएँ कि वृहत्तर सहयोग के लिए इन्हें कैसे निपटाया जा सकता है। अपने सुझाव भी दीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर-कुंजी: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्रित नहीं है और कोई सारांश खंड भी नहीं है। उत्तर 05-Question-Bank.md में शिक्षक द्वारा तैयार हैं।

शब्दावली

पदअंग्रेज़ीअध्याय में प्रयुक्त अर्थ
सत्ता के वैकल्पिक केंद्रAlternative centres of powerवे शक्तियाँ जो अमरीका के प्रभुत्व को कुछ हद तक सीमित करती हैं
मार्शल योजनाMarshall Planयूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए अमरीकी मदद; इसी के तहत 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन बना
अधिराष्ट्रीय संगठनSupranational organisationवह संगठन जो आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक मामलों में सदस्य देशों के ऊपर जाकर दखल देने में सक्षम हो — यूरोपीय संघ ऐसा है, आसियान नहीं
शांगेन संधिSchengen Agreementजून 1985 — सीमा नियंत्रण समाप्त; एक वीजा से अधिकांश EU देशों में यात्रा
मास्ट्रिस्ट संधिMaastricht Treatyफरवरी 1992 — यूरोपीय संघ के गठन के लिए
लिस्बन संधिLisbon Treatyदिसम्बर 2009 में लागू
BrexitBrexit2016 का ब्रिटिश जनमत संग्रह — 51.9% ने EU से बाहर जाने का फैसला किया
बैंकॉक घोषणाBangkok Declaration1967 — आसियान की स्थापना का दस्तावेज़
‘आसियान शैली’ASEAN way★अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप की शैली; राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान
आसियान क्षेत्रीय मंचASEAN Regional Forum (ARF)1994 — सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल के लिए
विजन दस्तावेज़ 2020ASEAN Vision 2020आसियान की बहिर्मुखी भूमिका को प्रमुखता
मुक्त व्यापार क्षेत्रFree Trade Area (FTA)निवेश, श्रम और सेवाओं के मामले में
‘खुले द्वार की नीति’Open Door Policy★1978, देंग श्याओपेंग — विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता
विशेष आर्थिक क्षेत्रSpecial Economic Zone (SEZ)वे क्षेत्र जहाँ व्यापार-अवरोध हटाए गए और विदेशी निवेशक उद्यम लगा सकते हैं
‘हान नदी पर चमत्कार’Miracle on the Han Riverदक्षिण कोरिया का 1960–80 के दशकों का तेज़ आर्थिक विकास
38वाँ समानांतर38th parallelवह रेखा जिसके साथ कोरियाई प्रायद्वीप विभाजित हुआ
समूह-7G-7एशिया से केवल जापान इसमें है
लुक ईस्ट / एक्ट ईस्टLook East / Act Eastभारत की नीतियाँ — 1991 से और 2014 से
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियाराCPECभारत-चीन संबंधों में हाल की गिरावट के कारणों में से एक

मुख्य आँकड़े और तिथियाँ

मानसंदर्भ
1948मार्शल योजना के तहत यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना
1949यूरोपीय परिषद् का गठन
अप्रैल 1951 / छह देशपेरिस संधि — यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय; फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड, लक्जमबर्ग
मार्च 1957रोम की संधि — EEC और Euratom
जून 1979यूरोपीय संसद का पहला प्रत्यक्ष चुनाव
जून 1985शांगेन संधि
अक्टूबर 1990जर्मनी का एकीकरण
फरवरी 1992मास्ट्रिस्ट संधि; 1992 में यूरोपीय संघ की स्थापना
जनवरी 2002 / 12यूरो को 12 सदस्य देशों ने अपनाया
मई 2004 / दस देशबड़ा विस्तार
दिसम्बर 2009लिस्बन संधि लागू
2012EU को नोबेल शांति पुरस्कार
2013 / 28वाँक्रोएशिया
2016 / 51.9%Brexit जनमत संग्रह
2024 / 19.35 खरब डॉलरEU का अनुमानित GDP
तीन गुनीविश्व व्यापार में EU की हिस्सेदारी — अमरीका से
दूसरी सबसे बड़ीEU की सेना; रक्षा बजट अमरीका के बाद; अंतरिक्ष और संचार में दूसरा स्थान
335फ्रांस के परमाणु हथियार (अनुमान)
12EU के झंडे के सितारे — पूर्णता, समग्रता, एकता
1967 / पाँच देशबैंकॉक घोषणा — आसियान की स्थापना; इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर, थाईलैंड
दसआसियान की वर्तमान सदस्य-संख्या; झंडे में धान की दस बालियाँ
1994आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF)
1999पूर्व-एशियाई सहयोग पर नियमित वार्षिक बैठक
2003तीन स्तंभों के आधार पर आसियान समुदाय; EU के साझा संविधान की असफल कोशिश
2010आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र लागू
25 जनवरी 2018भारत-आसियान रजत जयंती, नई दिल्ली
1991 / 2014भारत की लुक ईस्ट / एक्ट ईस्ट नीति
1949माओ के नेतृत्व में साम्यवादी क्रांति; चीनी जनवादी गणराज्य
5–6 फीसदी / 2–3 फीसदीचीन की विकास दर / जनसंख्या-वृद्धि (पुराने मॉडल में)
1972चीन ने अमरीका से संबंध बनाकर एकांतवास तोड़ा
1973चाऊ एनलाई के चार आधुनिकीकरण प्रस्ताव
1978देंग श्याओपेंग — ‘खुले द्वार की नीति’
1982 / 1998चीन में खेती / उद्योगों का निजीकरण
2001चीन विश्व व्यापार संगठन में शामिल
2040अनुमान — चीन दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा
10 करोड़चीन में रोजगार की तलाश में लोग
छह / 200 से ज्यादाचीन / भारत में विशेष आर्थिक क्षेत्र
1997वित्तीय संकट — जिसके बाद चीन के उभार ने आसियान अर्थव्यवस्थाओं को टिकाए रखने में मदद की
1950चीन द्वारा तिब्बत को हड़पना
1962भारत-चीन युद्ध — अरुणाचल प्रदेश और अक्साई-चिन
1976कूटनैतिक संबंध समाप्त रहने की अवधि का अंत
1981सीमा-वार्ताओं की शृंखला शुरू
दिसम्बर 1988राजीव गांधी का चीन दौरा
1999 / 30 फीसदीभारत-चीन व्यापार की वार्षिक वृद्धि-दर
1992 / 33 करोड़ 80 लाख डॉलरभारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार
2017 / 84 अरब डॉलरभारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार
1998भारत का परमाणु हथियार परीक्षण
2018 / 2019मोदी चीन गए / शी जिनपिंग भारत आए
1964 / 1996जापान / दक्षिण कोरिया OECD के सदस्य बने
2017 — तीसरी / ग्यारहवींजापान / दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था का स्थान
10 प्रतिशत / दूसराUN बजट में जापान का योगदान / स्थान
1951जापान-अमरीका सुरक्षा गठबंधन
अनुच्छेद 9जापान के संविधान का युद्ध-त्याग प्रावधान
1 प्रतिशत / सातवाँजापान का सैन्य व्यय (GDP का) / विश्व में स्थान
ग्यारहवाँआबादी के लिहाज से जापान का स्थान
38वाँ समानांतर / 1950–53कोरिया का विभाजन / कोरियाई युद्ध
17 सितंबर 1991दोनों कोरिया संयुक्त राष्ट्र के सदस्य बने
दसवाँ / 18दक्षिण कोरिया — सैन्य खर्च में स्थान / HDI रैंक (2016)

भ्रमित करने वाले युग्मध्यान

युग्मभेद
यूरोपीय संघ बनाम आसियान★EU अधिराष्ट्रीय है; आसियान ने जानबूझकर ऐसा बनने से इनकार किया
1948 बनाम 19491948 — यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन (मार्शल योजना के तहत, आर्थिक); 1949 — यूरोपीय परिषद् (राजनीतिक)
1951 बनाम 19571951 पेरिस संधि — कोयला और इस्पात समुदाय; 1957 रोम की संधि — EEC और Euratom
1992 बनाम 1993फरवरी 1992 — मास्ट्रिस्ट संधि पर दस्तखत और EU की स्थापना; जनवरी 1993 — EEC का नाम बदलकर EC
शांगेन बनाम मास्ट्रिस्टशांगेन (1985) — सीमा नियंत्रण समाप्त; मास्ट्रिस्ट (1992) — यूरोपीय संघ का गठन
12 सितारे★सदस्य-संख्या नहीं — पूर्णता, समग्रता और एकता का प्रतीक
धान की दस बालियाँ★यह सचमुच दस सदस्य देशों को इंगित करती हैं — EU के सितारों के उलट
आसियान 1967 बनाम ARF 1994संगठन की स्थापना बनाम सुरक्षा-मंच की स्थापना
आसियान के तीन स्तंभसुरक्षा · आर्थिक · सामाजिक-सांस्कृतिक — 2003 में
1972 बनाम 19781972 — अमरीका से संबंध (एकांतवास का अंत); 1978 — खुले द्वार की नीति (देंग श्याओपेंग)
1982 बनाम 1998चीन में खेती का निजीकरण बनाम उद्योगों का
चीन बनाम रूस★चीन ने ‘शॉक थेरेपी’ नहीं अपनायी — चरणबद्ध ढंग से खोला। यही अध्याय 1 से सबसे बड़ा जुड़ाव है
1962 बनाम 1976युद्ध बनाम कूटनैतिक संबंध बहाल होने का वर्ष
1992 बनाम 2017 का व्यापार33 करोड़ 80 लाख डॉलर बनाम 84 अरब डॉलर
जापान बनाम दक्षिण कोरिया (2017)तीसरी बनाम ग्यारहवीं अर्थव्यवस्था
जापान — 1 प्रतिशत बनाम सातवाँGDP का हिस्सा कम, पर निरपेक्ष व्यय विश्व में सातवाँ