Chapter 5समकालीन विश्व में सुरक्षा

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यह दस्तावेज़ केवल शिक्षक के लिए है। इसमें पढ़ाने का क्रम, कठिन बिंदु, अपेक्षित भ्रांतियाँ, बोर्ड-कार्य और संवेदनशील विषयों को सँभालने के सुझाव हैं।

1 · इस अध्याय की एक-पंक्ति कुंजी

★★पूरा अध्याय एक ही सवाल के दो जवाबों पर खड़ा है — “सुरक्षा किसकी?” पारंपरिक धारणा कहती है — राज्य की। अपारंपरिक धारणा कहती है — जनता की। बाकी सब — तीन विकल्प, संधियाँ, आतंकवाद, शरणार्थी, महामारी, भारत के चार घटक — इसी एक सवाल का विस्तार है।

कक्षा में पहले दिन ही यह वाक्य बोर्ड के एक कोने में लिख दीजिए और पूरे अध्याय तक मत मिटाइए।

2 · अध्याय का तर्क-प्रवाह — छह पड़ावों में

परिभाषा की समस्या → पारंपरिक धारणा (बाहरी + आंतरिक) → पारंपरिक तरीके → अपारंपरिक धारणा → नये खतरे → सहयोग और भारत

पड़ावक्या स्थापित होता हैपृष्ठ
1. परिभाषा‘सुरक्षा’ आसान शब्द नहीं — दो शर्तें लगती हैं और फिर भी वह विवादग्रस्त रहती है63–65
2. पारंपरिक — बाहरीखतरा सैन्य, स्रोत दूसरा मुल्क; उपाय अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन65–67
3. पारंपरिक — आंतरिकपर 95% संघर्ष अब भीतर हैं — पहला बड़ा झटका67–68
4. पारंपरिक तरीकेन्याय-युद्ध, और तीन तरह के समझौते; “सैन्य बल से खतरा, सैन्य बल से ही सुरक्षा”68–70
5. अपारंपरिकसंदर्भी बदल जाता है — दूसरा और बड़ा झटका70–76
6. सहयोग और भारत“सैन्य-बल से मामला और बिगड़ेगा” → लोकतंत्र स्वयं सुरक्षा का साधन76–79

★ध्यान दीजिए — अध्याय अपनी ही पहली धारणा को दो बार तोड़ता है। पहली बार आँकड़े से (95%), दूसरी बार संदर्भी बदलकर। यही इस अध्याय की खूबसूरती है और कक्षा में इसे रेखांकित कीजिए।

3 · बोर्ड-कार्य — तीन ढाँचे जो पूरे अध्याय को सँभालते हैं

ढाँचा 1 — मुख्य तुलना-सारणी(पहले दिन बनाइए, हर कालांश में एक पंक्ति भरिए)

कसौटीपारंपरिकअपारंपरिक
संदर्भी कौन
खतरा क्या
स्रोत कहाँ
उपाय क्या
मूल मान्यता

ढाँचा 2 — तीन विकल्प(कालांश 2)

आत्मसमर्पण → अपरोध → रक्षा और नीचे लिख दीजिए: “नीति सिर्फ बाद के दो पर बनती है — क्योंकि कोई सरकार आत्मसमर्पण को नीति नहीं कहेगी।”

ढाँचा 3 — संधि-मैट्रिक्स(कालांश 3–4)

निरस्त्रीकरणअस्त्र-नियंत्रण
कौन-सी संधियाँBWC (1972, 155+) · CWC (1997, 193)ABM (1972) · NPT (1968) · SALT II · START
क्या करती हैंहथियार त्यागनाहथियार नियम के तहत रखना
महाशक्तियाँ क्यों?जैविक-रासायनिक छोड़ दिएपरमाणु नहीं छोड़ा

★★यह तीसरा ढाँचा ही पूरे खंड 4 का उत्तर है — और यही प्रश्न 1 का सुमेल भी।

4 · कठिन बिंदु और उन्हें कैसे सँभालें

4.1 “केंद्रीय मूल्य किसके?” — यह उलझन जान-बूझकर है★★

विद्यार्थी पूछेंगे: “सर, अगर पाठ्यपुस्तक खुद कह रही है कि पता नहीं किसके केंद्रीय मूल्य, तो परिभाषा का फायदा क्या?”

उत्तर दीजिए: यह कमज़ोरी नहीं, ईमानदारी है। परिभाषा तीन काम करती है —

  1. यह ‘हर खतरा’ को बाहर करती है (नहीं तो हर चीज सुरक्षा हो जाती);
  2. यह यह पूछना सिखाती है कि ‘किसकी सुरक्षा’ — जो पूरे अध्याय का असली सवाल है;
  3. और यह आगे आने वाली ‘अपारंपरिक’ धारणा की भूमिका है — क्योंकि वह ठीक यही सवाल दोबारा उठाती है।

4.2 अपरोध बनाम रक्षा — हर साल यहीं गलती होती है★★

सबसे आसान तरीका — दो क्रियाएँ बोर्ड पर:

अपरोध = “युद्ध होने ही न दो” · रक्षा = “युद्ध हो जाए तो जीतो या रोको”

और एक उदाहरण दीजिए: ताला लगाना = अपरोध; चोर घुस आए तो लाठी उठाना = रक्षा।

4.3 1967 बनाम 1968 — पूरे अध्याय की सबसे आम भूल★★

बोर्ड पर एक रेखा खींचिए और उस पर ‘1967’ लिख दीजिए।

  • बायाँ हिस्सा: “जिन्होंने बना/परीक्षण कर लिया → रखने की अनुमति”
  • दायाँ हिस्सा: “जो नहीं कर पाए → वंचित”
  • और ऊपर लिख दीजिए: “संधि का वर्ष: 1968”

यह चित्र एक बार बना देने पर बच्चे नहीं भूलते।

4.4 शरणार्थी बनाम आप्रवासी बनाम आंतरिक विस्थापित★

तीन प्रश्न पूछते हुए तीन खाने भरवाइए —

  1. मर्जी से गया या मज़बूरी से? → आप्रवासी / बाकी दो
  2. सीमा पार की या नहीं? → शरणार्थी / आंतरिक विस्थापित
  3. राज्य को स्वीकारना पड़ेगा? → शरणार्थी के लिए ‘उम्मीद’, आप्रवासी के लिए ‘बाध्यता नहीं’

! कश्मीरी पंडितों का उदाहरण ज़रूर ठीक कीजिए — वे शरणार्थी नहीं, आंतरिक विस्थापित हैं। यह बच्चों की सबसे आम गलती है, और पाठ्यपुस्तक ने यह उदाहरण ठीक इसी भेद को सिखाने के लिए चुना है।

4.5 95% और बारहगुना — दो अलग आँकड़े हैं★

  • 95% = आज के सशस्त्र संघर्षों में आंतरिक युद्धों का हिस्सा।
  • बारहगुना = 1946 से 1991 के बीच गृहयुद्धों की संख्या में वृद्धि। दोनों को एक-दूसरे में मिलाना नहीं है। बोर्ड पर अलग-अलग लिखिए।

4.6 ‘न्यूनतम मानक’ वाला खंड छोड़िए मत★★

यह खंड (पृ. 75–76) अक्सर जल्दबाज़ी में छूट जाता है — और यही वह जगह है जहाँ पाठ्यपुस्तक अपनी ही अपारंपरिक धारणा पर लगाम लगाती है। यदि यह न पढ़ाया जाए, तो बच्चे यह मान बैठते हैं कि ‘कुछ भी सुरक्षा का मसला हो सकता है’ — जो पाठ्यपुस्तक स्पष्टत: अस्वीकार करती है।

एक वाक्य में सिखाइए: “सुरक्षा का मसला वही है जिससे किसी के अस्तित्व को खतरा हो — चाहे खतरा किसी भी प्रकार का हो।”

5 · संवेदनशील विषय — कैसे सँभालेंध्यान

इस अध्याय में चार विषय ऐसे हैं जिन पर कक्षा गरम हो सकती है। पाठ्यपुस्तक स्वयं इन सब पर दोनों पक्ष रखती है — शिक्षक को भी वही करना चाहिए।

विषयपाठ्यपुस्तक का रुखशिक्षक के लिए सुझाव
! आतंकवादपरिभाषा देती है, 9/11 और मुंबई का उल्लेख करती है — पर किसी समुदाय या देश का नाम नहीं लेती; और स्पष्ट कहती है “आतंकवाद कोई नयी परिघटना नहीं है”पाठ्यपुस्तक की भाषा से आगे मत जाइए। चर्चा को परिघटना पर रखिए, समुदाय पर नहीं। यह अनिवार्य है।
! मानवाधिकार और हस्तक्षेपदोनों पक्ष देती है — UN घोषणापत्र का अधिकार बनाम “ताकतवर देशों के हितों से यह निर्धारित होता हो”दोनों पक्ष बोर्ड पर लिखिए और कक्षा से तर्क माँगिए। अपनी राय मत थोपिए। प्रश्न-पत्र में भी संतुलित उत्तर को ही ऊँचे अंक मिलते हैं।
! परमाणु हथियारभारत के फ़ैसलों को तथ्य के रूप में दर्ज़ करती है; और साथ में साइड-टिप्पणी देती है — “क्या मेरा परिवार ज्यादा सुरक्षित हो गया है?”दोनों दीजिए — सरकार का तर्क और वह साइड-टिप्पणी। यह विरोधाभास पाठ्यपुस्तक ने जान-बूझकर रखा है।
! अलगाववाद (नगालैंड, मिजोरम, पंजाब, कश्मीर)तथ्य दर्ज़ करती है और उत्तर लोकतंत्र में खोजती हैउसी ढाँचे में रहिए — समस्या का उल्लेख + लोकतांत्रिक समाधान। वर्तमान राजनीति में मत उतरिए।

★★एक सामान्य नियम: जब कक्षा में कोई बच्चा राजनीतिक राय दे, तो उसे खंडित मत कीजिए — पूछिए, “पाठ्यपुस्तक इस पर क्या कहती है?” यह प्रश्न कक्षा को हमेशा वापस पाठ पर ले आता है।

6 · पाठ्यक्रम-युक्तिकरण — इस अध्याय पर असर

पहलेअबप्रमाण
अध्याय 7 — समकालीन विश्व में सुरक्षाअध्याय 5QR कोड 12108CH07

पैटर्न अब पाँचों अध्यायों में पुष्ट है: पुराने अध्याय 1 (शीतयुद्ध का दौर) और अध्याय 3 (समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व) हटा दिए गए; बाकी दो-दो स्थान आगे खिसक गए।

✓ इस अध्याय में कोई अनाथ-संदर्भ नहीं मिला

पिछले तीन अध्यायों (1, 2, 3) में हटाए गए अध्यायों के संदर्भ रह गए थे। इस अध्याय में ऐसा एक भी संदर्भ नहीं है — यह एक स्वच्छ अध्याय है।

! एक संदर्भ है जो भ्रम पैदा कर सकता है, पर वह सही है:

“इस संदर्भ में भारतीय लोकतंत्र की सफलता और असफलताओं के बारे में आप एक और किताब में विस्तार से पढ़ेंगे। यह किताब स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति पर केंद्रित है।” (पृ. 79)

यह पुस्तक 2 है — कक्षा 12 की दूसरी पाठ्यपुस्तक, जो विद्यार्थी इसी वर्ष पढ़ेंगे। यह अनाथ-संदर्भ नहीं है। कक्षा में इसे बताइए — बच्चे भ्रमित होते हैं।

7 · पाठ में मौजूद छोटी विसंगतियाँ

#कहाँक्या
1पृ. 64“करीब 200 मुल्कों के 7 अरब लोग” — यह लेखन-काल का आँकड़ा है; आज लगभग 8.2 अरब है और संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य हैं। कोई त्रुटि नहीं — बस समय का अंतर।
2पृ. 68 बनाम पृ. 73पृ. 68 पर “760 करोड़” आबादी दी गई है और पृ. 64 पर “7 अरब” — दोनों एक ही बात हैं (760 करोड़ = 7.6 अरब)। यह विसंगति नहीं, अलग-अलग स्थान पर अलग गोलाई है। कक्षा में इसे स्पष्ट कर दीजिए।
3पृ. 76शरणार्थी-आरेख 2017 का है, जबकि शेष पाठ 2000 के दशक का। यह संशोधित संस्करण में अद्यतन किया गया आँकड़ा है — इसे ‘नया’ बताइए।
4पृ. 74“1990 से 1995 के बीच सत्तर देशों के मध्य कुल 93 युद्ध” — यानी कई देशों में एक से अधिक संघर्ष। बच्चे अक्सर ‘70 युद्ध’ पढ़ लेते हैं। संख्या सावधानी से बोलिए।
5पृ. 73HIV-एड्स का आँकड़ा “2003 तक” का है — यह अब बहुत पुराना है। (अद्यतन के लिए 07-Enrichment देखिए। परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही आँकड़ा लिखवाइए।)

8 · मूल्यांकन-सुझाव

8.1 कक्षा में मौखिक जाँच(हर कालांश के अंत में 2 मिनट)

कालांशपूछिए
1सुरक्षा की दो शर्तें कौन-सी हैं?
2तीन विकल्प, और नीति सिर्फ दो पर क्यों?
3नव-स्वतंत्र देशों की दो विशिष्ट चुनौतियाँ?
4NPT का वर्ष और NPT की रेखा?
5शरणार्थी, आप्रवासी और आंतरिक विस्थापित में भेद?
6भारत के चार घटक, और अंतिम वाक्य?

8.2 लिखित मूल्यांकन का ढाँचा

प्रकारअंकअनुशंसित प्रश्न
वस्तुनिष्ठ1×6संधियों के वर्ष, तीन विकल्प, 95%, छह देश, कश्मीरी पंडित, अंतिम वाक्य
लघु2×4अपरोध बनाम रक्षा; निरस्त्रीकरण बनाम अस्त्र-नियंत्रण; ‘न्यूनतम मानक’; CBMs का उद्देश्य
दीर्घ4×3NCERT प्रश्न 4, 6, 8
निबंधात्मक6×2NCERT प्रश्न 3 और 11
स्रोत-आधारित5×105-Question-Bank के खंड छ से

8.3 परियोजना-कार्य के तीन सुझाव★

  1. ‘मेरे लिए सुरक्षा क्या है’ — एक सर्वेक्षण। विद्यार्थी 10 लोगों (परिवार, दुकानदार, किसान, ऑटो-चालक, शिक्षक) से पूछें कि उनके लिए ‘सुरक्षा’ का क्या अर्थ है, और उत्तरों को पारंपरिक/अपारंपरिक में वर्गीकृत करें। यह पाठ्यपुस्तक के “किसके केंद्रीय मूल्य?” सवाल का जीवंत उत्तर बन जाता है।
  2. समाचार-पत्र से एक सप्ताह की ‘सुरक्षा’ की खबरें काटकर दो स्तंभों में चिपकाएँ — पारंपरिक और अपारंपरिक। अनुपात देखकर बच्चे खुद निष्कर्ष निकाल लेते हैं।
  3. कार्टून-विश्लेषण। अध्याय के पाँच कार्टूनों (शांति-सेना, परमाणु बिरादरी, आतंकमापी, अंधा विश्व, WAR-TERRORISM) में से किसी एक पर 150 शब्द की टिप्पणी। यह प्रश्न 12 की सीधी तैयारी है।

9 · ‘आओ मिलजुल कर करें’ — चार गाँव(पृ. 78)

यह गतिविधि पाठ्यपुस्तक में मुद्रित है और वैकल्पिक नहीं समझी जानी चाहिए — यह अध्याय की सबसे अच्छी शिक्षण-सामग्री है।

कहानी का ढाँचा: नदी किनारे चार गाँव — कोटाबाग, गेवली, कंडली और गोप्पा। संसाधन सीमित, आबादी बढ़ती हुई, और हर गाँव का दावा अलग तर्क पर —

गाँवदावाराष्ट्रों की भाषा में
कोटाबाग“हम सबसे पहले आकर बसे”ऐतिहासिक/पूर्वता का दावा
कंडली और गेवली“हमारी आबादी ज्यादा है”जनसंख्या-आधारित दावा
गोप्पा“हम रईसी की जिंदगी जीते हैं”आर्थिक/जीवन-स्तर का दावा

समापन में यह ज़रूर कहिए:

  • गाँव = राष्ट्र; नदी और संसाधन = साझा वैश्विक संसाधन; सीमा-रेखा का दावा = क्षेत्रीय अखंडता।
  • ★★और पाठ्यपुस्तक का अपना निष्कर्ष मत छिपाइए — “ऐसा शायद ही कभी होता है। या, पूरी बहस बगैर किसी मकसद को साधे खत्म हो जाएगी।” यह विफलता भी एक वास्तविक परिणाम है — और अंतर्राष्ट्रीय वार्ताओं में अक्सर यही होता है।

10 · समय की तंगी हो तो — क्या छोड़ें, क्या नहीं

✓ कभी मत छोड़िए! संक्षेप में कर सकते हैं
सुरक्षा की दो शर्तेंपृ. 63 का आवरण-चित्र विवरण
तीन विकल्प और वह ‘आत्मसमर्पण नीति नहीं’ वाली पंक्तिकार्टूनों का विस्तृत विश्लेषण (पर प्रश्न 12 का कार्टून नहीं छोड़ना)
शक्ति-संतुलन और गठबंधन (प्रश्न 7, 8)‘आयु-प्रत्याशा / शिशु मृत्यु दर’ का पोस्टर (पृ. 74)
95% और बारहगुनाविश्व शरणार्थी आरेख के सटीक प्रतिशत
तीन तरीके + चार संधियाँ + 1967 की रेखाSALT II और START का विस्तार
संदर्भी का बदलाव और “सुरक्षित राज्य ≠ सुरक्षित जनता”HIV-एड्स के उपचार-संबंधी विवरण
तीन प्रवासन-शब्द और कश्मीरी पंडित‘मैड-काऊ’ और बर्ड फ्लू के आर्थिक आँकड़े
‘न्यूनतम मानक’ की कसौटी—
सहयोगमूलक सुरक्षा का मूल तर्कसंस्थाओं की पूरी सूची (चार-पाँच नाम पर्याप्त)
भारत के चार घटक और अंतिम वाक्य—

11 · एक पंक्ति में — यदि केवल पाँच मिनट हों

सुरक्षा = खतरे से आजादी, पर सिर्फ केंद्रीय मूल्यों पर पड़ने वाले गंभीर खतरों से। पारंपरिक धारणा राज्य को बचाती है — अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन, और तीन तरह की संधियों से। पर 95% संघर्ष अब भीतर हैं और खतरे सीमा नहीं मानते — इसलिए अपारंपरिक धारणा जनता को संदर्भी बनाती है। आतंकवाद, मानवाधिकार, निर्धनता, प्रवासन और महामारी — इनका उत्तर सेना नहीं, सहयोग है। और भारत के चार घटकों का निचोड़ यह है कि लोकतंत्र स्वयं सुरक्षा का साधन है।