Chapter 5समकालीन विश्व में सुरक्षा

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पाठ्यपुस्तक से आगे — संवर्धन सामग्री (T1 · T2 · T3)

यह दस्तावेज़ पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं, विस्तार है। T1 — बोर्ड परीक्षा के लिए भी उपयोगी; कक्षा में बताई जा सकती है T2 — प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC प्रारंभिक, राज्य PCS, CUET, SSC, NDA/CDS) के लिए T3 — उन्नत स्तर (UPSC मुख्य परीक्षा, वैकल्पिक विषय, शोध-रुचि)

★हर तथ्य वेब-सत्यापित है — तिथियाँ और आँकड़े अगस्त 2026 तक अद्यतन। स्रोत-चिह्न: ◆ = प्राथमिक स्रोत (संधि-पाठ, UN/OPCW/UNHCR दस्तावेज़) · ◇ = द्वितीयक स्रोत (शोध-संस्थान, समाचार)। पूरी सूची अंत में।

विषय-सूची

#खंडस्तर
1पाठ्यपुस्तक के आँकड़े — 2026 में कहाँ खड़े हैंT1
2सुरक्षा-अध्ययन के चार सिद्धांत-सम्प्रदायT2–T3
3‘सुरक्षाकरण’ (Securitization) — कोपेनहेगन सम्प्रदायT3
4अपरोध का पूरा सिद्धांत — MAD, द्वितीय-प्रहार, त्रिकोणT1–T2
5अस्त्र-नियंत्रण की पूरी वंशावली — PTBT से New START तकT1–T2
6★New START का अंत — 5 फरवरी 2026T1
7भारत का परमाणु सिद्धांत — 2003 और आजT1–T2
8चार निर्यात-नियंत्रण व्यवस्थाएँ — भारत तीन में, एक में नहींT2
9‘मानवीय सुरक्षा’ का जन्म — UNDP HDR 1994 के सात आयामT1–T2
10‘रक्षा का उत्तरदायित्व’ (R2P) — 2005, और लीबिया 2011T2–T3
11आतंकवाद — परिभाषा की समस्या और GTI 2026T1–T2
12शरणार्थी-कानून — 1951 संधि, और भारत उसमें क्यों नहींT1–T2
13स्वास्थ्य-सुरक्षा — COVID के बाद की व्यवस्थाT1–T2
14जलवायु-सुरक्षा — क्योटो से पेरिस तकT1
15सुरक्षा के नये क्षेत्र — साइबर, ऊर्जा, खाद्य, जल, अंतरिक्षT2–T3
16भारत की आंतरिक सुरक्षा — कानूनी और संस्थागत ढाँचाT2
17तीन प्रकरण-अध्ययनT1–T2
18संक्षिप्ताक्षर-कोश (50+)T1–T2
19अभ्यास प्रश्न (25)सभी
20स्रोत-सूची—

1 · पाठ्यपुस्तक के आँकड़े — 2026 में कहाँ खड़े हैं 【T1】

! शिक्षक के लिए महत्वपूर्ण: पाठ्यपुस्तक 2006–07 में लिखी गई और उसके अधिकांश आँकड़े उसी समय के हैं। पाठ्यपुस्तक गलत नहीं है — वह अपने समय का सही चित्र देती है। परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही आँकड़ा लिखिए; नीचे दिया गया अद्यतन आँकड़ा कक्षा-चर्चा और प्रतियोगी परीक्षा के लिए है।

विषयपाठ्यपुस्तक कहती हैआज (अगस्त 2026)टिप्पणी
BWC हस्ताक्षरकर्ता“155 से ज्यादा”★189 राज्य-पक्ष (और 4 हस्ताक्षरकर्ता जिन्होंने अनुसमर्थन नहीं किया — मिस्र, हैती, सोमालिया, सीरिया) ◆संधि 1972 में हस्ताक्षर के लिए खुली, 26 मार्च 1975 को लागू हुई
CWC हस्ताक्षरकर्ता“193 देश”★193 सदस्य राज्य — यह आँकड़ा आज भी सही है ◆! CWC 1993 में हस्ताक्षरित; 29 अप्रैल 1997 को लागू। पाठ्यपुस्तक का “1997” लागू होने का वर्ष है
NPT1968; रेखा 1967★191 राज्य-पक्ष — विश्व की सबसे व्यापक निरस्त्रीकरण संधि ◆! भारत, पाकिस्तान, इज़राइल कभी शामिल नहीं हुए; उत्तर कोरिया 2003 में बाहर निकला
STARTनाम-मात्र उल्लेख★★New START 5 फरवरी 2026 को समाप्त — अब अमरीका-रूस के बीच कोई बाध्यकारी परमाणु सीमा नहीं ◇खंड 6 देखिए — यह इस अध्याय का सबसे बड़ा अद्यतन है
विश्व जनसंख्या“760 करोड़ → 1000 करोड़”★लगभग 820 करोड़ (8.2 अरब); UN का अनुमान — 2080 के दशक में लगभग 1030 करोड़ का शिखरपाठ्यपुस्तक की दिशा सही है
HIV-एड्स“2003 तक 4 करोड़ संक्रमित”★2025 में 4.10 करोड़ लोग HIV के साथ जी रहे हैं — पर ★★वार्षिक मौतें 5.70 लाख, जो 2004 के शिखर से 73% कम; 3.21 करोड़ लोग उपचार पर ◆संख्या बढ़ी, मृत्यु-दर गिरी — यही असली कहानी है
शरणार्थी1990–95: 93 युद्ध, 55.5 लाख मृतक★★2025 के अंत में 11.78 करोड़ लोग जबरन विस्थापित — 4.16 करोड़ शरणार्थी, 90 लाख शरण-प्रार्थी, 6.87 करोड़ आंतरिक विस्थापित ◆★2025 में एक दशक में पहली बार शरणार्थी-संख्या घटी (−3%)
आतंकवाद9/11, मैड्रिड, लंदन, मुंबई★GTI 2026: 2025 में 5,582 मौतें — 2007 के बाद सबसे कम (−28%); पाकिस्तान अब विश्व में प्रथम, भारत 13वें स्थान पर ◇खंड 11 देखिए
क्योटो प्रोटोकॉल“1997; 160 देश”★क्योटो 11 दिसंबर 1997 को अपनाया गया, 16 फरवरी 2005 को लागू; भारत ने अगस्त 2002 में अनुसमर्थन किया। आज मुख्य ढाँचा पेरिस समझौता (2015) हैखंड 14 देखिए
वैश्विक सैन्य-व्ययउल्लेख नहीं★★2025 में 2.89 ट्रिलियन डॉलर — अब तक का सर्वोच्च; भारत 92.1 अरब डॉलर के साथ विश्व में पाँचवाँ (अमरीका, चीन, रूस, जर्मनी के बाद), वैश्विक व्यय का ~3.2% ◇कार्टून (पृ. 70) के आँकड़ों से तुलना कीजिए

2 · सुरक्षा-अध्ययन के चार सिद्धांत-सम्प्रदाय 【T2–T3】

पाठ्यपुस्तक ‘पारंपरिक’ और ‘अपारंपरिक’ — दो नाम देती है। शोध-जगत में इनके पीछे चार सुस्पष्ट सम्प्रदाय हैं। यह जानना UPSC मुख्य परीक्षा और वैकल्पिक विषय के लिए बहुत उपयोगी है।

सम्प्रदायसंदर्भी कौनमूल मान्यताप्रमुख नाम
★यथार्थवाद (Realism)राज्यअराजकता (कोई विश्व-सरकार नहीं) → आत्म-सहायता → शक्ति ही सुरक्षा हैहैंस मॉर्गेन्थाऊ, केनेथ वॉल्ट्ज़, जॉन मियरशाइमर
★उदारवाद (Liberalism)राज्य + संस्थाएँसंस्थाएँ, व्यापार और लोकतंत्र युद्ध की संभावना घटाते हैं; ‘लोकतांत्रिक शांति’ सिद्धांतइमानुएल कांट (परंपरा), रॉबर्ट कियोहेन, जोसेफ नाय
★★मानवीय सुरक्षा (Human Security)व्यक्ति“सुरक्षित राज्य ≠ सुरक्षित जनता”; ‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’महबूब उल हक़ (UNDP HDR 1994), अमर्त्य सेन, सादाको ओगाटा
★कोपेनहेगन सम्प्रदायजो भी ‘सुरक्षाकृत’ हो जाएसुरक्षा वस्तुनिष्ठ तथ्य नहीं, एक ‘वाक्-कर्म’ (speech act) हैबैरी बुज़ान, ओले वेवर, याप द वाइल्ड

★★पाठ्यपुस्तक से जोड़िए: अध्याय की यह पंक्ति — “यह देश की भलाई के लिए बड़ा जरूरी है… इस कारण उस पर खुली चर्चा नहीं हो सकती” — बिल्कुल कोपेनहेगन सम्प्रदाय का ‘सुरक्षाकरण’ है। पाठ्यपुस्तक इसका नाम नहीं लेती, पर उसका उदाहरण देती है।

3 · ‘सुरक्षाकरण’ (Securitization) — कोपेनहेगन सम्प्रदाय 【T3】

मूल विचार (बैरी बुज़ान और ओले वेवर, 1990 का दशक): कोई मुद्दा ‘सुरक्षा का मुद्दा’ अपने-आप नहीं होता — कोई उसे बना देता है। जब कोई सत्ताधारी कर्ता (सरकार, नेता, मीडिया) किसी मुद्दे को “अस्तित्व का खतरा” घोषित करता है और श्रोता (जनता) उसे स्वीकार कर लेता है, तब वह मुद्दा सामान्य राजनीति से बाहर निकलकर ‘आपात’ क्षेत्र में चला जाता है — जहाँ असाधारण उपाय जायज़ माने जाने लगते हैं।

प्रक्रिया के तीन चरण:

  1. सुरक्षाकरण-कर्ता दावा करता है — “यह हमारे अस्तित्व का प्रश्न है।”
  2. श्रोता दावे को स्वीकार करता है।
  3. असाधारण उपाय (गोपनीयता, आपातकालीन शक्तियाँ, बजट, बल-प्रयोग) — सामान्य लोकतांत्रिक जाँच से बाहर।

बुज़ान के पाँच क्षेत्र: ★सैन्य · राजनीतिक · आर्थिक · सामाजिक · पर्यावरणीय।

★★और इसका उल्टा भी है — ‘असुरक्षाकरण’ (Desecuritization)। कोपेनहेगन सम्प्रदाय का तर्क है कि सुरक्षाकरण कोई उपलब्धि नहीं, विफलता है — क्योंकि यह मुद्दे को लोकतांत्रिक बहस से बाहर कर देता है। आदर्श यह है कि मुद्दे को वापस सामान्य राजनीति में लाया जाए।

यही पाठ्यपुस्तक की भावना है — “लोकतंत्र में कोई भी बात इतनी ढँकी-छुपी नहीं रखी जा सकती। सुरक्षा के बारे में हमें और ज्यादा जानने की ज़रूरत है।”

4 · अपरोध का पूरा सिद्धांत 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक ‘अपरोध’ की एक-पंक्ति परिभाषा देती है। उसका पूरा ढाँचा यह है —

4.1 अपरोध के दो प्रकार

प्रकारअर्थ
★दंड द्वारा अपरोध (by punishment)“हमला करोगे तो तुम्हें असहनीय नुकसान होगा” — परमाणु अपरोध इसी का रूप है
★वंचन द्वारा अपरोध (by denial)“हमला करोगे तो सफल नहीं हो पाओगे” — मजबूत रक्षा-पंक्ति, वायु-रक्षा, किलेबंदी

4.2 अपरोध के चार आवश्यक तत्व★★

  1. क्षमता (Capability) — नुकसान पहुँचाने की वास्तविक शक्ति।
  2. विश्वसनीयता (Credibility) — शत्रु को यकीन हो कि आप सचमुच प्रयोग करेंगे।
  3. संप्रेषण (Communication) — धमकी शत्रु तक स्पष्ट पहुँचनी चाहिए।
  4. तर्कसंगतता (Rationality) — दोनों पक्ष लागत-लाभ का हिसाब लगाने वाले हों।

! यही अंतिम शर्त बताती है कि आतंकवादी समूहों के विरुद्ध अपरोध क्यों काम नहीं करता — आत्मघाती हमलावर के पास खोने के लिए भूक्षेत्र नहीं, और वह इसी तर्क-पद्धति पर नहीं चलता। (प्रश्न 10 का उत्तर लिखते समय यह तर्क बहुत काम आता है।)

4.3 MAD — पारस्परिक सुनिश्चित विनाश★

Mutual Assured Destruction — शीतयुद्ध की केंद्रीय अवधारणा। यदि दोनों पक्षों के पास द्वितीय-प्रहार क्षमता है — यानी पहला हमला झेलने के बाद भी जवाबी हमला कर सकने की क्षमता — तो कोई भी पहले हमला नहीं करेगा, क्योंकि दोनों नष्ट हो जाएँगे।

★★यहीं ABM संधि (1972) का तर्क समझ में आता है। यदि कोई पक्ष कारगर मिसाइल-रक्षा कवच बना ले, तो वह पहला हमला करके भी सुरक्षित रह सकता है — और MAD टूट जाता है। इसीलिए ABM संधि ने रक्षा-कवच पर रोक लगाई। यानी संधि ने ‘रक्षा’ को सीमित करके ‘शांति’ बढ़ाई — यह विरोधाभास परीक्षा में बहुत अच्छा तर्क बनता है।

4.4 परमाणु त्रिकोण (Nuclear Triad)★

द्वितीय-प्रहार क्षमता के लिए हथियार तीन माध्यमों में फैलाए जाते हैं, ताकि सब एक साथ नष्ट न हो सकें —

माध्यमविशेषताभारत का उदाहरण
थल — भूमि-आधारित मिसाइलसटीक, पर स्थिर लक्ष्यअग्नि शृंखला
वायु — बमवर्षक विमानलचीला, वापस बुलाया जा सकता हैमिराज-2000, राफेल, सुखोई-30MKI
★जल — पनडुब्बी-प्रक्षेपित मिसाइलसबसे बचने योग्य — यही असली द्वितीय-प्रहार गारंटी हैINS अरिहंत (K-15/K-4 मिसाइल)

★★भारत का परमाणु त्रिकोण 5 नवंबर 2018 को पूरा घोषित हुआ, जब INS अरिहंत ने अपनी पहली अपरोध गश्त (deterrence patrol) पूरी की। ◇

5 · अस्त्र-नियंत्रण की पूरी वंशावली 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक चार संधियों का नाम लेती है। पूरी शृंखला यह है — इसे एक बार पढ़ लेने से प्रतियोगी परीक्षा के अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।

संधिपूरा नामवर्षक्या करती हैभारत की स्थिति
PTBTआंशिक परीक्षण प्रतिबंध संधि1963वायुमंडल, अंतरिक्ष और जल के भीतर परमाणु परीक्षण पर रोक (भूमिगत की अनुमति)★भारत पक्षकार है
★★NPTपरमाणु अप्रसार संधि1968 (लागू 1970)1967 की रेखा; 5 परमाणु-शक्तियों को मान्यता, बाकी को वंचित! भारत ने कभी हस्ताक्षर नहीं किए — “भेदभावपूर्ण” बताकर
★ABMएंटी-बैलेस्टिक मिसाइल संधि1972मिसाइल-रक्षा कवच पर रोक — MAD की रक्षाअमरीका–सोवियत द्विपक्षीय; ! अमरीका 2002 में बाहर निकल गया
SALT Iसामरिक अस्त्र परिसीमन वार्ता-11972प्रक्षेपास्त्रों की संख्या पर सीमा (परिसीमन = सीमा, कटौती नहीं)द्विपक्षीय
SALT IIसामरिक अस्त्र परिसीमन वार्ता-21979और कड़ी सीमा; ! अमरीकी सीनेट ने कभी अनुसमर्थन नहीं किया (अफ़गानिस्तान पर सोवियत हमले के बाद)द्विपक्षीय
★INFमध्यम दूरी परमाणु बल संधि1987★पहली संधि जिसने हथियारों की एक पूरी श्रेणी समाप्त की (500–5,500 किमी)! अमरीका अगस्त 2019 में बाहर निकला
START Iसामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि-11991★पहली बार वास्तविक कटौती (परिसीमन नहीं)द्विपक्षीय
START II—1993और कटौती; ! कभी प्रभावी नहीं हुई—
SORTसामरिक आक्रामक न्यूनीकरण संधि (‘मॉस्को संधि’)20021,700–2,200 तैनात हथियार—
★★New STARTनयी सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि20101,550 तैनात हथियार; 700 प्रक्षेपण-यान; निरीक्षण-व्यवस्था! 5 फरवरी 2026 को समाप्त — खंड 6 देखिए
★CTBTव्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि1996हर तरह के परमाणु परीक्षण पर रोक! अभी तक लागू नहीं हुई; भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए
★TPNWपरमाणु हथियार निषेध संधिअपनाई 2017, लागू 22 जनवरी 2021परमाणु हथियारों को पूर्णत: अवैध घोषित करती है! कोई भी परमाणु-शक्ति पक्षकार नहीं; भारत भी नहीं
FMCTविखंडनीय पदार्थ कटौती संधिप्रस्तावितहथियार-योग्य सामग्री के उत्पादन पर रोकप्रस्ताव अटका हुआ है (निरस्त्रीकरण सम्मेलन में)

★★याद रखने का सूत्र — ‘S’ का अर्थ: SALT का L = Limitation (परिसीमन — सीमा बाँधना) START का R = Reduction (न्यूनीकरण — घटाना) यही दोनों में मूल अंतर है — और यह अक्सर पूछा जाता है।

6 · New START का अंत — 5 फरवरी 2026 【T1】★★

यह इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण समकालीन अद्यतन है और 2026–27 की हर परीक्षा में प्रासंगिक है।

क्याविवरण
कब समाप्त हुई★★5 फरवरी 2026 ◇
क्यों समाप्त हुईसंधि की शर्त के अनुसार इसे केवल एक बार बढ़ाया जा सकता था (2021 में बढ़ाया गया था), इसलिए 2026 में समाप्ति अवश्यंभावी थी
★★इसका अर्थआधी सदी से अधिक में पहली बार अमरीका और रूस के सामरिक परमाणु शस्त्रागारों पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं है — और निरीक्षण तथा पारदर्शिता की व्यवस्था भी समाप्त
रूस का रुखविदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (11 फरवरी 2026) — रूस “फ़िलहाल केंद्रीय मात्रात्मक सीमाओं का स्वैच्छिक पालन” करता रहेगा, पर केवल तब तक जब तक अमरीका उन सीमाओं से आगे न जाए
अमरीका का रुखराष्ट्रपति का कथन — एक “नयी, उन्नत और आधुनिक संधि” की तलाश
संयुक्त राष्ट्रमहासचिव ने इसे “गंभीर क्षण” (grave moment) कहा ◆

★★पाठ्यपुस्तक से जोड़िए: पाठ कहता है कि “NPT ने परमाण्विक आयुधों को समाप्त तो नहीं किया” — New START का अंत इस वाक्य का सबसे ताज़ा प्रमाण है। अस्त्र-नियंत्रण की पूरी इमारत अब औपचारिक संधि पर नहीं, स्वैच्छिक संयम पर टिकी है।

उत्तर-लेखन में उपयोग: “अस्त्र-नियंत्रण की उपलब्धियाँ स्थायी नहीं होतीं — ABM (2002), INF (2019) और New START (2026) — तीनों का अंत यही दिखाता है। संधियाँ राष्ट्रीय हितों पर टिकी होती हैं, ठीक वैसे ही जैसे पाठ्यपुस्तक गठबंधनों के बारे में कहती है।”

और यह भी जोड़िए: NPT की 11वीं समीक्षा सम्मेलन (Review Conference) 27 अप्रैल – 22 मई 2026 को न्यूयॉर्क में हुआ। 191 राज्य-पक्ष; तैयारी-बैठकों में ही मतभेद स्पष्ट थे। ◆

7 · भारत का परमाणु सिद्धांत 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक कहती है — “भारत के परमाणु परीक्षण करने के फ़ैसलों (1998) को उचित ठहराते हुए भारतीय सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया था।” आगे क्या हुआ, यह पाठ्यपुस्तक नहीं बताती।

7.1 समयरेखा

वर्षघटना
1974★पोखरण-I — ‘शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट’ (स्माइलिंग बुद्धा)
1998★पोखरण-II — मई 1998, ‘ऑपरेशन शक्ति’; भारत ने स्वयं को परमाणु-शक्ति घोषित किया
अगस्त 1999राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) ने परमाणु सिद्धांत का प्रारूप प्रस्तुत किया
★4 जनवरी 2003मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (CCS) ने आधिकारिक परमाणु सिद्धांत को स्वीकृति दी; साथ ही परमाणु कमान प्राधिकरण (NCA) की स्थापना
2018INS अरिहंत की पहली अपरोध गश्त — त्रिकोण पूर्ण

7.2 2003 के सिद्धांत के मुख्य तत्व★★

  1. ★विश्वसनीय न्यूनतम अपरोध (Credible Minimum Deterrence) — हथियारों की होड़ नहीं, पर्याप्तता।
  2. ★★पहले प्रयोग नहीं (No First Use — NFU) — भारत परमाणु हथियार का प्रयोग केवल जवाब में करेगा।
  3. ★भारी जवाबी कार्रवाई (Massive Retaliation) — यदि प्रयोग हुआ तो जवाब “असहनीय क्षति” पहुँचाने वाला होगा।
  4. ! एक अपवाद — यदि भारत या भारतीय सेना पर जैविक अथवा रासायनिक हथियारों से बड़ा हमला हुआ, तो भारत परमाणु जवाब का विकल्प खुला रखता है।
  5. ★गैर-परमाणु राज्यों के विरुद्ध प्रयोग नहीं।
  6. नागरिक नियंत्रण — निर्णय राजनीतिक नेतृत्व का; NCA की राजनीतिक परिषद् की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
  7. परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक जारी; FMCT वार्ता का समर्थन।

★★पाठ्यपुस्तक से सीधा जोड़: भारत की “सार्वभौम और बिना भेदभाव वाली” अप्रसार-नीति की माँग (पृ. 77) का व्यावहारिक अर्थ यही है — भारत NPT को इसलिए अस्वीकार करता है क्योंकि वह देशों को दो श्रेणियों में बाँटती है, न कि इसलिए कि वह अप्रसार का विरोधी है। NFU इसी नैतिक स्थिति का विस्तार है।

8 · चार निर्यात-नियंत्रण व्यवस्थाएँ 【T2】

यह प्रतियोगी परीक्षाओं का पसंदीदा प्रश्न है और पाठ्यपुस्तक में बिलकुल नहीं है।

व्यवस्थाकिस पर नियंत्रणस्थापना★भारत की सदस्यता
★MTCR — मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्थामिसाइल और मानवरहित यान1987✓ 27 जून 2016
★वासेनार व्यवस्थापारंपरिक हथियार तथा दोहरे-उपयोग की वस्तुएँ और प्रौद्योगिकी1996✓ 7 दिसंबर 2017
★ऑस्ट्रेलिया समूहरासायनिक और जैविक हथियारों से जुड़ी सामग्री1985✓ 19 जनवरी 2018
!! NSG — परमाणु आपूर्तिकर्ता समूहपरमाणु सामग्री और प्रौद्योगिकी1974 — भारत के पोखरण-I के बाद ही बना❌ भारत अभी सदस्य नहीं (चीन का विरोध; NPT-हस्ताक्षर की शर्त पर विवाद)

★★विडंबना ज़रूर बताइए: NSG की स्थापना ही 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण की प्रतिक्रिया में हुई थी — और आज भारत उसी समूह का सदस्य बनना चाहता है। 2008 में NSG ने भारत को एकबारगी छूट (waiver) दी, जिससे भारत NPT का सदस्य हुए बिना नागरिक परमाणु व्यापार कर सकता है — यह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में भारत के लिए एक अनूठा अपवाद है।

9 · ‘मानवीय सुरक्षा’ का जन्म — UNDP HDR 1994 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक ‘मानवता की सुरक्षा’ शब्द तो देती है, पर उसका स्रोत नहीं बताती।

9.1 स्रोत★★

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की ‘मानव विकास रिपोर्ट 1994’ — इसी रिपोर्ट ने ‘मानवीय सुरक्षा’ (Human Security) शब्द को अंतर्राष्ट्रीय शब्दावली में स्थापित किया। इसके पीछे मुख्य बुद्धि थी पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक़ की, जिन्होंने अमर्त्य सेन के साथ मिलकर मानव विकास सूचकांक (HDI) भी विकसित किया था।

9.2 मानवीय सुरक्षा के सात आयाम(HDR 1994)★★

#आयामक्या शामिल
1आर्थिक सुरक्षासुनिश्चित न्यूनतम आय, रोज़गार
2खाद्य सुरक्षाभोजन तक भौतिक और आर्थिक पहुँच
3स्वास्थ्य सुरक्षारोगों और अस्वस्थ जीवन-शैली से रक्षा
4पर्यावरणीय सुरक्षास्वच्छ जल-वायु, आपदा से बचाव
5व्यक्तिगत सुरक्षाहिंसा — युद्ध, अपराध, घरेलू हिंसा, आत्म-हानि से रक्षा
6सामुदायिक सुरक्षापहचान, परंपरा और समूह की रक्षा
7राजनीतिक सुरक्षामौलिक मानवाधिकार और दमन से मुक्ति

9.3 तीन ‘मुक्तियाँ’★

पाठ्यपुस्तक दो देती है; आधिकारिक ढाँचे में तीन हैं —

  1. ★‘अभाव से मुक्ति’ (Freedom from want) — आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा
  2. ★‘भय से मुक्ति’ (Freedom from fear) — हिंसा से सुरक्षा
  3. ★‘गरिमा के साथ जीने की स्वतंत्रता’ (Freedom to live in dignity) — बाद में जोड़ा गया, संयुक्त राष्ट्र महासभा संकल्प A/RES/66/290 (2012) में औपचारिक रूप से मान्य

★★महत्वपूर्ण बारीकी: संकल्प 66/290 यह भी स्पष्ट करता है कि मानवीय सुरक्षा ‘रक्षा का उत्तरदायित्व’ (R2P) नहीं है और इसमें बल-प्रयोग की धमकी शामिल नहीं — यह राज्य की संप्रभुता का सम्मान करती है। (यह भेद UPSC मुख्य परीक्षा में बहुत काम आता है।)

10 · ‘रक्षा का उत्तरदायित्व’ (R2P) 【T2–T3】

पाठ्यपुस्तक की यह बहस — “संयुक्त राष्ट्रसंघ को मानवाधिकारों के हनन की स्थिति में हस्तक्षेप करना चाहिए या नहीं” — अंतर्राष्ट्रीय कानून में एक औपचारिक सिद्धांत बन चुकी है।

10.1 उत्पत्ति

  • 2001 — हस्तक्षेप और राज्य-संप्रभुता पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICISS) की रिपोर्ट, जिसने पहली बार शब्द गढ़ा।
  • ★★2005 — विश्व शिखर सम्मेलन का परिणाम-दस्तावेज़, अनुच्छेद 138 और 139 — सर्वसम्मति से स्वीकार। ◆

10.2 तीन स्तंभ★★

स्तंभकौन उत्तरदायीक्या
पहलास्वयं राज्यअपनी जनता को जनसंहार, युद्ध-अपराध, जातीय सफ़ाया और मानवता के विरुद्ध अपराध से बचाना
दूसराअंतर्राष्ट्रीय समुदायराज्य की सहायता और क्षमता-निर्माण
तीसराअंतर्राष्ट्रीय समुदायजब शांतिपूर्ण उपाय अपर्याप्त हों और राष्ट्रीय अधिकारी स्पष्ट रूप से विफल हों, तब सुरक्षा परिषद् के माध्यम से सामूहिक कार्रवाई

★★ध्यान दीजिए — केवल चार अपराध। R2P हर मानवाधिकार-उल्लंघन पर लागू नहीं होता; केवल जनसंहार, युद्ध-अपराध, जातीय सफ़ाया और मानवता के विरुद्ध अपराध पर।

10.3 आलोचना — और यह वही आलोचना है जो पाठ्यपुस्तक करती हैध्यान

  • लीबिया 2011 — सुरक्षा परिषद् संकल्प 1973 ने नागरिकों की रक्षा के लिए बल-प्रयोग की अनुमति दी; पर अभियान शासन-परिवर्तन तक पहुँच गया। रूस, चीन, भारत और ब्राज़ील ने इसे ‘जनादेश से आगे जाना’ बताया — और उसके बाद से सुरक्षा परिषद् में R2P पर सहमति बनना बहुत कठिन हो गया।
  • सीरिया, म्यांमार, यमन, सूडान — R2P लागू नहीं हो सका।
  • ★★पाठ्यपुस्तक की पंक्ति यहीं फिट बैठती है: “संभव है, ताकतवर देशों के हितों से यह निर्धारित होता हो कि संयुक्त राष्ट्रसंघ मानवाधिकार-उल्लंघन के किस मामले में कार्रवाई करेगा और किसमें नहीं।”

11 · आतंकवाद — परिभाषा की समस्या और GTI 2026 【T1–T2】

11.1 परिभाषा की समस्या★★

संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद की कोई सर्वमान्य परिभाषा आज तक नहीं बन पाई — क्योंकि दो प्रश्नों पर सहमति नहीं बनती:

  1. क्या ‘स्वतंत्रता संग्राम’ (आत्म-निर्णय के लिए संघर्ष) को इसमें शामिल किया जाए?
  2. क्या ‘राज्य-आतंकवाद’ (राज्य की सेना द्वारा नागरिकों पर हिंसा) को शामिल किया जाए?

★भारत की भूमिका: भारत ने 1996 में संयुक्त राष्ट्र में ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय’ (CCIT) का प्रस्ताव रखा था। तीस साल बाद भी वह प्रस्ताव अटका हुआ है — ठीक इन्हीं दो प्रश्नों पर। यह भारत की एक स्थायी कूटनीतिक माँग है और परीक्षा में बार-बार पूछी जाती है।

11.2 वैश्विक आतंकवाद सूचकांक (GTI) 2026 — मुख्य निष्कर्ष ◇★★

निष्कर्षआँकड़ा
2025 में आतंकवाद से मौतें★5,582 — 2007 के बाद सबसे कम (28% की गिरावट)
हमलों की संख्यालगभग 2,944 (22% की गिरावट)
★★सर्वाधिक प्रभावित देशपाकिस्तान — बुर्किना फ़ासो को पीछे छोड़कर प्रथम स्थान; 1,139 मौतें, 1,045 घटनाएँ — 2013 के बाद सर्वाधिक, और लगातार छठा वर्ष जब वहाँ मौतें बढ़ीं
अन्य सर्वाधिक प्रभावितबुर्किना फ़ासो, नाइजर, नाइजीरिया, माली
★साहेल क्षेत्र2025 में विश्व की आधी से अधिक आतंकवाद-मौतें — जबकि 2007 में यह 1% से भी कम था
★★भारत13वाँ स्थान (स्कोर 6.428) — दो स्थान का सुधार; आतंकी घटनाओं में लगभग 43% की कमी

★कक्षा-चर्चा के लिए: पाठ्यपुस्तक 9/11, मैड्रिड, लंदन और मुंबई का उल्लेख करती है — यानी 2000 के दशक का चित्र, जिसमें आतंकवाद का केंद्र पश्चिम और दक्षिण एशिया था। 2026 का चित्र अलग है — केंद्र अब साहेल (पश्चिमी अफ्रीका) है। यह पाठ्यपुस्तक की ही बात सिद्ध करता है — “वैश्विक निर्धनता और सशस्त्र संघर्ष एक ही मानचित्र पर होते हैं।”

11.3 भारत — हालिया घटनाक्रम ◇★

  • 22 अप्रैल 2025 — पहलगाम आतंकी हमला, जिसमें 26 लोग मारे गए।
  • 7 मई 2025 — ‘ऑपरेशन सिंदूर’ — भारत ने पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढाँचे को निशाना बनाया; रक्षा मंत्री ने इसे “आतंकवाद के विरुद्ध भारत के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई” कहा।
  • ★विदेश मंत्री का पाँच-सूत्रीय ‘नया सामान्य’ (new normal) — जिसमें प्रमुख बिंदु: आतंकवादियों को ‘छद्म’ (proxies) नहीं माना जाएगा, और “आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।”

! कक्षा में संतुलन बनाए रखिए। पाठ्यपुस्तक का दृष्टिकोण विश्लेषणात्मक है, प्रचारात्मक नहीं। इन घटनाओं को ‘भारत की सुरक्षा-नीति के पहले घटक (सैन्य-क्षमता) का समकालीन उदाहरण’ के रूप में प्रस्तुत कीजिए — और साथ ही यह भी कि तीसरे और चौथे घटक (लोकतंत्र और आर्थिक विकास) पाठ्यपुस्तक के अनुसार उतने ही आवश्यक हैं।

12 · शरणार्थी-कानून — 1951 संधि, और भारत उसमें क्यों नहीं 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक ‘शरणार्थी’ और ‘आप्रवासी’ की परिभाषा देती है, पर उसके पीछे का कानून नहीं बताती।

12.1 अंतर्राष्ट्रीय ढाँचा★★

दस्तावेज़वर्षक्या
★शरणार्थी की स्थिति संबंधी अभिसमय1951शरणार्थी की कानूनी परिभाषा और अधिकार; ! मूलत: केवल यूरोप और केवल 1951 से पहले की घटनाओं तक सीमित
★1967 का प्रोटोकॉल1967★समय और भूगोल की सीमा हटा दी — अब विश्वव्यापी
★★आंतरिक विस्थापन पर मार्गदर्शक सिद्धांत1998‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ (IDPs) के लिए — फ्रांसिस डेंग द्वारा प्रस्तुत; ! यह संधि नहीं, ‘सॉफ्ट लॉ’ है

12.2 ‘गैर-प्रत्यावर्तन’ का सिद्धांत (Non-refoulement)★★

1951 अभिसमय का अनुच्छेद 33 — किसी शरणार्थी को वहाँ वापस नहीं भेजा जा सकता जहाँ उसके जीवन या स्वतंत्रता को खतरा हो। यह शरणार्थी-कानून का सबसे मूलभूत सिद्धांत है और इसे प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय कानून (customary international law) माना जाता है — यानी यह उन देशों पर भी लागू माना जाता है जो अभिसमय के पक्षकार नहीं हैं।

12.3 भारत की स्थिति — और वह विरोधाभास जो चर्चा-योग्य हैध्यान

  • भारत न 1951 अभिसमय का पक्षकार है, न 1967 प्रोटोकॉल का। भारत के पास कोई राष्ट्रीय शरणार्थी कानून भी नहीं है — मामले विदेशी अधिनियम, 1946 और कार्यपालिका के विवेक से चलते हैं।
  • ★और फिर भी भारत ने दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी शरणार्थी-आबादियों को शरण दी है — तिब्बती (1959 से), बांग्लादेशी (1971), श्रीलंकाई तमिल (1980 के दशक से), अफ़ग़ान, चकमा, रोहिंग्या।
  • भारत का तर्क: 1951 अभिसमय यूरोप-केंद्रित है और विकासशील देशों पर असमान बोझ डालता है; भारत अपनी शर्तों पर, मानवीय आधार पर शरण देता रहा है।

★★यह पाठ्यपुस्तक की उस पंक्ति की सबसे अच्छी व्याख्या है — “सामान्यतया उम्मीद की जाती है कि कोई राज्य शरणार्थियों को स्वीकार करेगा लेकिन उन्हें आप्रवासियों को स्वीकारने की बाध्यता नहीं होती।” ‘उम्मीद’ शब्द जान-बूझकर चुना गया है — ‘बाध्यता’ नहीं, क्योंकि हर देश उस संधि का पक्षकार नहीं है।

12.4 आज के आँकड़े (UNHCR, ग्लोबल ट्रेंड्स रिपोर्ट, जून 2026) ◆★

श्रेणी2025 के अंत में
★★कुल जबरन विस्थापित11.78 करोड़
शरणार्थी4.16 करोड़ (इनमें 2.85 करोड़ UNHCR के अधिदेश में, 60 लाख UNRWA के अधिदेश में फ़िलिस्तीनी शरणार्थी)
शरण-प्रार्थी90 लाख
★आंतरिक विस्थापित (IDPs)6.87 करोड़ — यानी शरणार्थियों से कहीं ज़्यादा
बच्चेलगभग 4.5 करोड़ (38%)
★★2025 की नयी बातएक दशक में पहली बार शरणार्थी-संख्या घटी — 3% की कमी; 1.47 करोड़ लोग घर लौटे (44 लाख शरणार्थी + 1.03 करोड़ IDPs), विशेषकर अफ़ग़ानिस्तान, सूडान और सीरिया में

★★कक्षा में यह ज़रूर कहिए: आंतरिक विस्थापित (6.87 करोड़) शरणार्थियों (4.16 करोड़) से बहुत अधिक हैं — यानी पाठ्यपुस्तक जिस श्रेणी को एक वाक्य में निपटाती है (कश्मीरी पंडित), आज वह विश्व की सबसे बड़ी विस्थापन-श्रेणी है। और उनके लिए कोई बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि नहीं है — क्योंकि वे अपने ही देश की सीमा के भीतर हैं, और वहाँ संप्रभुता आड़े आती है।

13 · स्वास्थ्य-सुरक्षा — COVID के बाद की व्यवस्था 【T1–T2】

13.1 पाठ्यपुस्तक और आज★

पाठ्यपुस्तक HIV-एड्स, बर्ड फ्लू, SARS, एबोला, मैड-काऊ का उल्लेख करती है — पर COVID-19 उसके बाद आया। (ध्यान दीजिए: पाठ्यपुस्तक के संशोधित संस्करण में सूची में ‘कोरोना’ शब्द जोड़ा गया है।)

13.2 UNAIDS 2025 — HIV-एड्स की वास्तविक तस्वीर ◆★★

मानआँकड़ा
HIV के साथ जी रहे लोग4.10 करोड़ (3.97 करोड़ वयस्क, 13 लाख बच्चे)
★वार्षिक नये संक्रमण12 लाख — 1994 के शिखर (35 लाख) से 65% कम
★★वार्षिक मौतें5.70 लाख — 2004 के शिखर (21 लाख) से 73% कम
उपचार पर3.21 करोड़ लोग
नये संक्रमणों में महिलाओं-लड़कियों का हिस्सा44%

★★यही वह सुधार है जिसे पाठ्यपुस्तक ‘आकाश-कुसुम’ कहती थी। पाठ्यपुस्तक लिखी गई तब अफ्रीका में उपचार कीमत के कारण असंभव था; आज 3.21 करोड़ लोग उपचार पर हैं — वैश्विक सहयोग, सस्ती जेनेरिक दवाइयों (जिनमें भारतीय दवा-उद्योग की बड़ी भूमिका रही) और वैश्विक कोष के कारण। यह ‘सहयोगमूलक सुरक्षा’ का सबसे ठोस सफल उदाहरण है — इसे कक्षा में ज़रूर बताइए।

13.3 संस्थागत ढाँचा★

व्यवस्थाक्या
★अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR), 2005196 देशों पर बाध्यकारी; इसी के अंतर्गत WHO ‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का लोक-स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित करता है
★PHEIC की घोषणाएँH1N1 (2009), पोलियो (2014), एबोला (2014, 2019), ज़ीका (2016), COVID-19 (30 जनवरी 2020), एमपॉक्स (2022, 2024)
★★WHO महामारी समझौतामई 2025 में विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अपनाया गया — COVID के अनुभव से जन्मा, रोगजनक-सूचना साझा करने और टीकों की न्यायसंगत पहुँच पर केंद्रित
GAVI और वैश्विक कोषटीकाकरण तथा एड्स-टीबी-मलेरिया के लिए वित्त-पोषण

14 · जलवायु-सुरक्षा — क्योटो से पेरिस तक 【T1】

पड़ाववर्षमुख्य बातभारत
UNFCCC1992 (रियो पृथ्वी शिखर)मूल ढाँचा-संधि; ★‘साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व’ (CBDR) का सिद्धांतभारत पक्षकार
★क्योटो प्रोटोकॉलअपनाया 11 दिसंबर 1997, लागू 16 फरवरी 2005★केवल विकसित देशों (परिशिष्ट-I) पर बाध्यकारी लक्ष्य★भारत ने अगस्त 2002 में अनुसमर्थन किया — विकासशील देश होने के नाते कोई बाध्यकारी लक्ष्य नहीं
! क्योटो की कमज़ोरी—अमरीका ने कभी अनुसमर्थन नहीं किया; कनाडा 2011 में बाहर निकला—
★★पेरिस समझौता12 दिसंबर 2015, लागू 4 नवंबर 2016★सभी देशों पर लागू, पर लक्ष्य स्वैच्छिक और स्व-निर्धारित (NDCs); तापवृद्धि 2°C से नीचे, यथासंभव 1.5°C तकभारत पक्षकार; 2070 तक शुद्ध-शून्य (net zero) का लक्ष्य घोषित
! अमरीका—2017 और पुन: जनवरी 2025 में पेरिस समझौते से बाहर निकलने की घोषणा—

! पाठ्यपुस्तक का “160 देश” वाला आँकड़ा उसके लेखन-काल का है। आज पेरिस समझौते के लगभग 195 पक्षकार हैं। परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का आँकड़ा लिखिए, पर कक्षा में यह अद्यतन ज़रूर बताइए।

★★और यह तर्क सबसे मूल्यवान है: पाठ्यपुस्तक कहती है कि तापवृद्धि से बांग्लादेश, मालदीव और थाईलैंड को खतरा है — यानी वे देश जिन्होंने समस्या पैदा करने में सबसे कम योगदान दिया। यही ‘साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व’ (CBDR) का नैतिक आधार है और भारत की जलवायु-कूटनीति की रीढ़ है।

15 · सुरक्षा के नये क्षेत्र 【T2–T3】

पाठ्यपुस्तक पाँच अपारंपरिक खतरे गिनाती है। 2026 में इनमें कम-से-कम पाँच और जुड़ चुके हैं।

क्षेत्रक्या★मुख्य तथ्य
★★साइबर सुरक्षामहत्वपूर्ण अवसंरचना (बिजली, बैंकिंग, रेल, अस्पताल) पर डिजिटल हमलेभारत: CERT-In (2004), राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति 2013, NCIIPC; सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000। ! नाटो ने 2016 में साइबरस्पेस को औपचारिक रूप से ‘युद्ध का क्षेत्र’ घोषित किया
★ऊर्जा सुरक्षातेल-गैस की सुनिश्चित और वहनीय आपूर्तिभारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का ~85% आयात करता है — यह एक स्थायी रणनीतिक भेद्यता है
★खाद्य सुरक्षापर्याप्त, पोषक भोजन तक पहुँचराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 — लगभग 80 करोड़ लोगों को कवर करता है
★जल सुरक्षासाझा नदियों पर विवाद और घटता भूजलसिंधु जल संधि (1960); ब्रह्मपुत्र पर चीन की परियोजनाएँ; ! भारत विश्व का सबसे बड़ा भूजल-उपभोक्ता है
★अंतरिक्ष सुरक्षाउपग्रह-निर्भरता और उपग्रह-रोधी हथियारभारत का ‘मिशन शक्ति’ — 27 मार्च 2019 में ASAT परीक्षण; रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की स्थापना
समुद्री सुरक्षासमुद्री लुटेरे, समुद्री लेन, हिंद-प्रशांतभारत का ‘सागर’ (SAGAR) दृष्टिकोण — Security and Growth for All in the Region

16 · भारत की आंतरिक सुरक्षा — कानूनी और संस्थागत ढाँचा 【T2】

पाठ्यपुस्तक कहती है — “नगालैंड, मिजोरम, पंजाब और कश्मीर जैसे क्षेत्रों से कई उग्रवादी समूहों ने… अलगाने की कोशिश की। भारत ने… लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था का पालन किया है।” इसके पीछे का ढाँचा यह है —

उपकरणक्या! विवाद-बिंदु
★सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम, 1958 — AFSPA‘अशांत क्षेत्रों’ में सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियाँमानवाधिकार संगठनों की लगातार आलोचना; हाल के वर्षों में पूर्वोत्तर के कई ज़िलों से क्रमश: हटाया गया है
★गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 — UAPAआतंकवाद-विरोधी मुख्य कानून; 2019 के संशोधन से व्यक्तियों को भी ‘आतंकवादी’ घोषित किया जा सकता हैजमानत की कठोर शर्तों पर बहस
★राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA), 200826/11 मुंबई हमलों के बाद गठित संघीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी—
बहु-एजेंसी केंद्र (MAC)खुफ़िया-समन्वय—
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF)CRPF, BSF, ITBP, SSB, CISF, असम राइफल्स—
★राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् (NSC), 1998राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के नेतृत्व में शीर्ष सलाहकार-निकाय; NSAB इसी का अंग—
★★प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS), 2019तीनों सेनाओं में एकीकरण; सैन्य मामलों का विभागथिएटर कमान की दिशा में काम जारी

★★और यह जोड़िए — जो पाठ्यपुस्तक की सबसे बड़ी बात सिद्ध करता है: मिज़ोरम का उदाहरण। 1986 का मिज़ो समझौता — दो दशक के सशस्त्र विद्रोह का अंत बातचीत और चुनाव से हुआ, और विद्रोही नेता लालडेंगा राज्य के मुख्यमंत्री बने। यह भारत की आंतरिक सुरक्षा-नीति की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है — और पाठ्यपुस्तक के तीसरे घटक का जीता-जागता प्रमाण है कि “लोकतांत्रिक व्यवस्था विभिन्न समुदायों को सत्ता में भागीदारी करने का मौका देती है।”

17 · तीन प्रकरण-अध्ययन 【T1–T2】

प्रकरण 1 — रवांडा 1994 : जब सब कुछ विफल हुआ★★

पहलूविवरण
क्या हुआअप्रैल–जुलाई 1994 — लगभग 100 दिनों में हुतु चरमपंथियों ने लगभग 8 लाख तुत्सी और उदारवादी हुतु लोगों की हत्या की (पाठ्यपुस्तक “लगभग 5 लाख तुत्सी” कहती है — यह भी अनुमानों की श्रेणी में है; अनुमान 5 लाख से 10 लाख तक हैं)
! UN क्यों नहीं रोक पायाUN का UNAMIR मिशन वहाँ मौजूद था, पर उसका जनादेश केवल शांति-निगरानी का था; सैनिक-संख्या बढ़ाने के बजाय घटा दी गई
★★पाठ्यपुस्तक से जोड़यही उस पंक्ति का प्रमाण है — “संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने सदस्य देशों का दास है।” इच्छाशक्ति सदस्यों की थी, संस्था की नहीं।
परिणाम★इसी विफलता से R2P का सिद्धांत जन्मा (2001 ICISS → 2005 विश्व शिखर सम्मेलन)

प्रकरण 2 — क्यूबा मिसाइल संकट 1962 : अपरोध और CBM एक साथ★

पहलूविवरण
क्या हुआअक्तूबर 1962 — सोवियत संघ द्वारा क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात करने पर 13 दिन का गतिरोध; शीतयुद्ध का सर्वाधिक निकट परमाणु-युद्ध का क्षण
★कैसे टलानौसैनिक ‘संगरोध’ (quarantine), गुप्त वार्ता और आपसी रियायत — सोवियत संघ ने क्यूबा से, अमरीका ने तुर्की से मिसाइलें हटाईं
★★CBM से सीधा जोड़इसी संकट के बाद 1963 में ‘हॉटलाइन’ (सीधी दूरभाष लाइन) स्थापित हुई — ★यह विश्व का सबसे प्रसिद्ध ‘विश्वास बहाली का उपाय’ है। इसी वर्ष PTBT भी हुई।
पाठ्यपुस्तक की पंक्ति“यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि प्रतिद्वन्द्वी देश किसी ग़लतफहमी या गफलत में पड़कर जंग के लिए आमादा न हो जाएँ।”

प्रकरण 3 — भारत–पाकिस्तान : CBM का व्यावहारिक पाठ★★

उपायवर्षक्या
★परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदानसमझौता 1988; लागू 1992 से★★हर वर्ष 1 जनवरी को दोनों देश अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची एक-दूसरे को सौंपते हैं — और यह युद्धों तथा तनावों के बावजूद तीन दशक से अटूट चला आ रहा है
लाहौर घोषणा और MoU1999मिसाइल-परीक्षण की पूर्व-सूचना; आकस्मिक परमाणु प्रयोग रोकने के उपाय
मिसाइल-परीक्षण की पूर्व-सूचना संधि2005बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण की पूर्व-सूचना अनिवार्य
सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) हॉटलाइनदशकों से★नियमित साप्ताहिक संपर्क

★★यह सबसे मूल्यवान उदाहरण है, क्योंकि यह दोनों बातें एक साथ सिद्ध करता है — CBMs युद्ध को रोक नहीं पाते (1999 कारगिल, 2016, 2019, 2025), पर वे ‘ग़लतफहमी से युद्ध’ को रोकने में सचमुच काम करते हैं। परमाणु-सूची का आदान-प्रदान हर एक जनवरी को होता रहा है — यह अपने आप में उल्लेखनीय है।

18 · संक्षिप्ताक्षर-कोश 【T1–T2】

निरस्त्रीकरण और अस्त्र-नियंत्रण

संक्षेपपूरा नामहिंदी
NPTTreaty on the Non-Proliferation of Nuclear Weaponsपरमाणु अप्रसार संधि, 1968
PTBTPartial Test Ban Treatyआंशिक परीक्षण प्रतिबंध संधि, 1963
CTBTComprehensive Nuclear-Test-Ban Treatyव्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि, 1996 (लागू नहीं)
ABMAnti-Ballistic Missile Treatyएंटी-बैलेस्टिक मिसाइल संधि, 1972
SALTStrategic Arms Limitation Talksसामरिक अस्त्र परिसीमन वार्ता
STARTStrategic Arms Reduction Treatyसामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि
INFIntermediate-Range Nuclear Forces Treatyमध्यम दूरी परमाणु बल संधि, 1987
SORTStrategic Offensive Reductions Treatyसामरिक आक्रामक न्यूनीकरण संधि, 2002
TPNWTreaty on the Prohibition of Nuclear Weaponsपरमाणु हथियार निषेध संधि, 2021 से लागू
FMCTFissile Material Cut-off Treatyविखंडनीय पदार्थ कटौती संधि (प्रस्तावित)
BWC / BTWCBiological (and Toxin) Weapons Conventionजैविक हथियार संधि, 1972
CWCChemical Weapons Conventionरासायनिक हथियार संधि, 1993/1997
OPCWOrganisation for the Prohibition of Chemical Weaponsरासायनिक हथियार निषेध संगठन
IAEAInternational Atomic Energy Agencyअंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी
CBMConfidence Building Measureविश्वास बहाली का उपाय
MADMutual Assured Destructionपारस्परिक सुनिश्चित विनाश
NFUNo First Useपहले प्रयोग नहीं
WMDWeapons of Mass Destructionसामूहिक संहार के हथियार

निर्यात-नियंत्रण

संक्षेपपूरा नामभारत
NSGNuclear Suppliers Group❌ सदस्य नहीं (2008 में छूट मिली)
MTCRMissile Technology Control Regime✓ 2016
WAWassenaar Arrangement✓ 2017
AGAustralia Group✓ 2018

मानवीय सुरक्षा और मानवाधिकार

संक्षेपपूरा नाम
R2PResponsibility to Protect — रक्षा का उत्तरदायित्व
ICISSInternational Commission on Intervention and State Sovereignty
UNHCRUN High Commissioner for Refugees — संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त
IDPInternally Displaced Person — आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति
UNRWAUN Relief and Works Agency (फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए)
UNDP / HDRUN Development Programme / Human Development Report
HDIHuman Development Index — मानव विकास सूचकांक
ICCInternational Criminal Court — अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय
UDHRUniversal Declaration of Human Rights, 1948
ICCPR / ICESCRनागरिक-राजनीतिक / आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों की अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाएँ, 1966

स्वास्थ्य, जलवायु और अन्य

संक्षेपपूरा नाम
WHO / IHR / PHEICविश्व स्वास्थ्य संगठन / अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम / अंतर्राष्ट्रीय चिंता का लोक-स्वास्थ्य आपातकाल
UNAIDSसंयुक्त राष्ट्र एड्स कार्यक्रम
UNFCCC / COP / NDCजलवायु परिवर्तन ढाँचा-अभिसमय / पक्षकारों का सम्मेलन / राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान
IPCCजलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल
CBDRCommon But Differentiated Responsibilities
SIPRIस्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान
GTIGlobal Terrorism Index — वैश्विक आतंकवाद सूचकांक
CCITComprehensive Convention on International Terrorism (भारत का 1996 का प्रस्ताव)

भारत-विशिष्ट

संक्षेपपूरा नाम
NSC / NSA / NSABराष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् / सलाहकार / सलाहकार बोर्ड
CCSमंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति
NCANuclear Command Authority — परमाणु कमान प्राधिकरण
CDSChief of Defence Staff — प्रमुख रक्षा अध्यक्ष
AFSPA / UAPAसशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम / गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम
NIA / CERT-Inराष्ट्रीय जाँच एजेंसी / भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल
CAPFकेंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल
SAGARSecurity and Growth for All in the Region

19 · अभ्यास प्रश्न 【सभी स्तर】

1 अंक

  1. ‘सुरक्षाकरण’ (securitization) की अवधारणा किस सम्प्रदाय ने दी? — कोपेनहेगन सम्प्रदाय (बुज़ान, वेवर)
  2. ‘मानवीय सुरक्षा’ शब्द किस रिपोर्ट से प्रचलित हुआ? — UNDP मानव विकास रिपोर्ट 1994
  3. मानवीय सुरक्षा के सात आयाम किस रिपोर्ट में गिनाए गए? — वही, HDR 1994
  4. R2P किस वर्ष सर्वसम्मति से स्वीकार हुआ? — 2005 विश्व शिखर सम्मेलन (अनुच्छेद 138–139)
  5. R2P किन चार अपराधों पर लागू होता है? — जनसंहार, युद्ध-अपराध, जातीय सफ़ाया, मानवता के विरुद्ध अपराध
  6. New START कब समाप्त हुई? — ★5 फरवरी 2026
  7. SALT और START में मूल अंतर? — SALT = परिसीमन (सीमा); START = न्यूनीकरण (कटौती)
  8. भारत का परमाणु सिद्धांत कब आधिकारिक रूप से स्वीकृत हुआ? — 4 जनवरी 2003 (CCS)
  9. भारत किन तीन निर्यात-नियंत्रण व्यवस्थाओं का सदस्य है? — MTCR (2016), वासेनार (2017), ऑस्ट्रेलिया समूह (2018)
  10. भारत किसका सदस्य नहीं है? — NSG
  11. ‘गैर-प्रत्यावर्तन’ का सिद्धांत किस संधि के किस अनुच्छेद में है? — 1951 शरणार्थी अभिसमय, अनुच्छेद 33
  12. क्या भारत 1951 शरणार्थी अभिसमय का पक्षकार है? — ! नहीं
  13. GTI 2026 के अनुसार सर्वाधिक आतंकवाद-प्रभावित देश? — पाकिस्तान; भारत — 13वाँ
  14. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में किस अभिसमय का प्रस्ताव 1996 में रखा? — CCIT
  15. भारत का परमाणु त्रिकोण कब पूर्ण हुआ? — नवंबर 2018 (INS अरिहंत की पहली अपरोध गश्त)

2–4 अंक

  1. ‘सुरक्षाकरण’ की अवधारणा समझाइए और बताइए कि पाठ्यपुस्तक का पहला अनुच्छेद इसका उदाहरण कैसे है।
  2. अपरोध के चार आवश्यक तत्व बताइए और समझाइए कि आतंकवादी समूहों के विरुद्ध अपरोध क्यों विफल होता है।
  3. MAD और ABM संधि (1972) के संबंध को स्पष्ट कीजिए — रक्षा-कवच पर रोक से शांति कैसे बढ़ती है?
  4. मानवीय सुरक्षा के सात आयाम गिनाइए और तीन ‘मुक्तियों’ से उनका संबंध बताइए।
  5. R2P के तीन स्तंभ समझाइए और लीबिया 2011 के अनुभव के आधार पर उसकी आलोचना कीजिए।
  6. भारत NPT का पक्षकार क्यों नहीं है? इसका संबंध भारत की “सार्वभौम और बिना भेदभाव वाली” नीति की माँग से कैसे है?
  7. शरणार्थी और आंतरिक विस्थापित जन के कानूनी संरक्षण में क्या अंतर है? आज के आँकड़ों से उत्तर की पुष्टि कीजिए।

6 अंक

  1. “अस्त्र-नियंत्रण की उपलब्धियाँ स्थायी नहीं होतीं।” — ABM (2002), INF (2019) और New START (2026) के अंत के आलोक में इस कथन का परीक्षण कीजिए। इसका संबंध पाठ्यपुस्तक के इस कथन से जोड़िए कि “राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं।”
  2. “सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।” — रवांडा 1994 और R2P के विकास के माध्यम से इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  3. भारत–पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली के उपायों (CBMs) का मूल्यांकन कीजिए। क्या वे विफल रहे हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

20 · स्रोत-सूची

प्राथमिक स्रोत ◆

  1. NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), अध्याय 5, पृ. 63–80 (मूल पाठ्यपुस्तक)
  2. OPCW — Chemical Weapons Convention / Member States — opcw.org
  3. UNODA — Biological Weapons Convention — disarmament.unoda.org
  4. UN — NPT Review Conference 2026 — un.org
  5. UNHCR — Global Trends: Forced Displacement in 2025 (जून 2026) — unhcr.org
  6. UNAIDS — Global HIV & AIDS Statistics Fact Sheet 2025 — unaids.org
  7. UN — About the Responsibility to Protect (2005 World Summit, paras 138–139) — un.org
  8. UN News — “UN chief warns of ‘grave moment’ as final US-Russia nuclear arms treaty expires” (फरवरी 2026) — news.un.org

द्वितीयक स्रोत ◇ 9. Arms Control Association — “New START Expires As U.S. Urges ‘Modernized’ Treaty” (मार्च 2026) — armscontrol.org 10. Arms Control Association — CWC / BWC at a Glance — armscontrol.org 11. Council on Foreign Relations — “Nukes Without Limits? A New Era After the End of New START” — cfr.org 12. SIPRI — Military Expenditure Fact Sheet, अप्रैल 2026 — sipri.org 13. Institute for Economics & Peace — Global Terrorism Index 2026 — visionofhumanity.org 14. Global Centre for the Responsibility to Protect — What is R2P? — globalr2p.org 15. Carnegie Endowment — “Military Lessons from Operation Sindoor” — carnegieendowment.org

! शिक्षक के लिए अंतिम नोट: बोर्ड परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का आँकड़ा ही लिखना चाहिए। यह संवर्धन सामग्री कक्षा-चर्चा, परियोजना-कार्य और प्रतियोगी परीक्षा के लिए है। जहाँ पाठ्यपुस्तक और वर्तमान आँकड़े में अंतर है, खंड 1 की तालिका दोनों साथ-साथ दिखाती है — कक्षा में यही तालिका दिखाना सबसे उपयोगी रहता है।