Chapter 5समकालीन विश्व में सुरक्षा

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कक्षा 12 • राजनीति विज्ञान • समकालीन विश्व राजनीति • अध्याय 5 — समकालीन विश्व में सुरक्षा

कक्षा — 12 · विषय — राजनीति विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति) · पृष्ठ — 63 से 80

“यह सुरक्षा का मसला है” — और चर्चा वहीं रुक जाती है।

★★“बहस या चर्चा को रोकना हो तो अक्सर इस जुमले का इस्तेमाल होता है।” ★★“लेकिन लोकतंत्र में कोई भी बात इतनी ढँकी-छुपी नहीं रखी जा सकती।” इस अध्याय के दो नज़रिए • पारंपरिक • अपारंपरिक — और बीच में एक सवाल: सुरक्षा किसकी?

0 | पहले एक चेतावनी | यह अध्याय पहले ‘अध्याय 7’ था

पाठ्यक्रम-युक्तिकरण — अब पूरा नक्शा पुष्ट है

पुराना क्रमअध्यायअबQR कोड
1शीतयुद्ध का दौर❌ हटाया गया—
2दो ध्रुवीयता का अंत✓ अध्याय 112108CH02
3समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व❌ हटाया गया—
4सत्ता के समकालीन केन्द्र✓ अध्याय 212108CH04
5समकालीन दक्षिण एशिया✓ अध्याय 312108CH05
6अंतर्राष्ट्रीय संगठन✓ अध्याय 412108CH06
7समकालीन विश्व में सुरक्षा✓ अध्याय 512108CH07

और अध्याय का अंत दूसरी पुस्तक की ओर इशारा करता है

पृ. 79

  • “भारतीय लोकतंत्र की सफलता और असफलताओं के बारे में आप एक और किताब में विस्तार से पढ़ेंगे।”
  • “यह किताब स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति पर केंद्रित है।”

✓ यह संदर्भ सही है — वह पुस्तक 2 है, इसी पुस्तक का कोई अध्याय नहीं। इसे भ्रम मत मानिए।

1 | सुरक्षा क्या है? | खतरे से आजादी — पर हर खतरे से नहीं

बुनियादी परिभाषा और तुरंत उसकी समस्या

पृ. 64

  • ★★“सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है — खतरे से आजादी।”
  • ! पर हर खतरा नहीं — “आदमी जब भी अपने घर से बाहर कदम निकालता है तो उसके अस्तित्व को किसी न किसी अर्थ में खतरा ज़रूर होता है।”
  • ! “यदि हमने खतरे का इतना व्यापक अर्थ लिया तो फिर हमारी दुनिया में हर घड़ी और हर जगह सुरक्षा के ही सवाल नज़र आयेंगे।”

इसलिए दो शर्तें लगती हैं

यही परिभाषा परीक्षा में लिखनी है

  • ★पहली शर्त — ‘केंद्रीय मूल्य’ — “केवल उन चीजों को सुरक्षा से जुड़ी चीजों का विषय बनाया जाय जिनसे जीवन के ‘केंद्रीय मूल्यों’ को खतरा हो।”
  • ★★दूसरी शर्त — खतरे की गंभीरता — “सुरक्षा का रिश्ता बड़े गंभीर खतरों से है; ऐसे खतरे जिनको रोकने के उपाय न किए गए तो हमारे केंद्रीय मूल्यों को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।”

! पर पाठ खुद सवाल उठाता है — “किसके केंद्रीय मूल्य? पूरे देश के? आम स्त्री-पुरुषों के? क्या सरकार हमेशा वही अर्थ ग्रहण करती है जो कोई साधारण नागरिक?”

200 मुल्क · 7 अरब लोग

200 · 7

“यह बात भी हजम नहीं होती कि करीब 200 मुल्कों के 7 अरब लोग सुरक्षा की एक जैसी धारणा रखते हों?” — इसलिए ★★सुरक्षा एक ‘विवादग्रस्त धारणा’ है।

2 | पारंपरिक धारणा | बाहरी सुरक्षा — यानी राष्ट्रीय सुरक्षा

तीन शब्द ही पूरी परिभाषा हैं

पृ. 65

  • ★“सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा में सैन्य ख़तरे को किसी देश के लिए सबसे ज्यादा ख़तरनाक माना जाता है।”
  • ★“इस ख़तरे का स्रोत कोई दूसरा मुल्क होता है।”
  • ★★खतरे में पड़ने वाले केंद्रीय मूल्य — संप्रभुता · स्वतंत्रता · क्षेत्रीय अखंडता।

! “शायद ही कभी ऐसा होता हो कि किसी युद्ध में सिर्फ सैनिक घायल हों अथवा मारे जायें। अक्सर निहत्थे और आम औरत-मर्द को जंग का निशाना बनाया जाता है।”

युद्ध की स्थिति में तीन विकल्प

#विकल्पपाठ्यपुस्तक के शब्दों में
1आत्मसमर्पण“दूसरे पक्ष की बात को बिना युद्ध किए मान लेना”
2अपरोध“युद्ध से होने वाले नाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहमकर हमला करने से बाज आये”
3रक्षा“युद्ध ठन जाय तो अपनी रक्षा करना… अथवा हमलावर को पराजित कर देना”

और फिर वह पंक्ति जो सारा खेल समझा देती है

प्रश्न 6 का उत्तर यहीं है

  • ★★“युद्ध में कोई सरकार भले ही आत्मसमर्पण कर दे लेकिन वह इसे अपने देश की नीति के रूप में कभी नहीं प्रचारित करना चाहेगी।”
  • इसलिए सुरक्षा-नीति के दो ही हिस्से बचते हैं —
    • ★अपरोध = “युद्ध की आशंका को रोकना”
    • ★रक्षा = “युद्ध को सीमित रखना अथवा उसको समाप्त करना”

तीन विकल्प होते हैं, पर नीति सिर्फ दो पर बनती है।

शक्ति-संतुलन — इरादा नहीं, क्षमता देखी जाती है

प्रश्न 7 का उत्तर

  • ★“कोई देश अपने अड़ोस-पड़ोस में देखने पर पाता है कि कुछ मुल्क छोटे हैं तो कुछ बड़े। इससे इशारा मिल जाता है कि भविष्य में किस देश से उसे खतरा हो सकता है।”
  • ★★“हमले का कोई प्रकट कारण भी नहीं जान पड़ता। फिर भी यह देखकर कि कोई देश बहुत ताकतवर है यह भांपा जा सकता है कि भविष्य में वह हमलावर हो सकता है।”
  • किन पर विशेष ज़ोर — “जो देश नजदीक हों, जिनके साथ अनबन हो या जिनके साथ अतीत में लड़ाई हो चुकी हो।”
  • ★सिर्फ सेना नहीं — “आर्थिक और प्रौद्योगिकी की ताकत भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सैन्य-शक्ति का यही आधार है।”

गठबंधन — और वह चेतावनी जो साथ आती है

प्रश्न 8 का उत्तर

  • ★“गठबंधन में कई देश शामिल होते हैं और सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम उठाते हैं।”
  • “अधिकांश गठबंधनों को लिखित संधि से एक औपचारिक रूप मिलता है” — और “यह बात बिलकुल स्पष्ट रहती है कि खतरा किससे है।”
  • ★★“गठबंधन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं और राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं।”

वही उदाहरण जो पाठ्यपुस्तक देती है

  1. 1980का दशक — अमरीका ने सोवियत संघ के खिलाफ इस्लामी उग्रवादियों को समर्थन दिया
  2. 200111 सितंबर — ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व में अल-कायदा ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया
  3. बादअमरीका ने“इस्लामी उग्रवादियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया”

खतरा ‘बाहर’ से क्यों? — अराजकता का तर्क

पूरे पारंपरिक नज़रिए की जड़

  • देश के भीतर हिंसा से निपटने की एक जानी-पहचानी व्यवस्था है — ★“इसे सरकार कहते हैं।”
  • ★★“लेकिन विश्व-राजनीति में ऐसी कोई केंद्रीय सत्ता नहीं जो सबके ऊपर हो।”
  • ! “फिलहाल अपनी बनावट के अनुरूप संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने सदस्य देशों का दास है।”

★★“अत: विश्व-राजनीति में हर देश को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है।”

3 | पारंपरिक धारणा | आंतरिक सुरक्षा — जो 1945 के बाद भुला दी गई

ताकतवर देशों को भीतर से डर नहीं था

पृ. 67

  • ★“सन् 1945 के बाद ऐसा जान पड़ा कि अमरीका और सोवियत संघ अपनी सीमा के अंदर एकीकृत और शांति संपन्न हैं।”
  • पश्चिमी यूरोप के सामने भी “अपनी सीमा के भीतर बसे समुदायों अथवा वर्गों से कोई गंभीर खतरा नहीं” था।
  • इसलिए — “इन देशों ने अपना ध्यान सीमापार के खतरों पर केंद्रित किया।”
  • ! पर उपनिवेशों में डर था — फ्रांस को वियतनाम में (1950 का दशक) और ब्रिटेन को केन्या में (1950 व 1960 का दशक)।

नव-स्वतंत्र देशों की कहानी दूसरी थी

प्रश्न 4 का उत्तर — दो मायनों में विशिष्ट

  • ★“एक तो इन देशों को अपने पड़ोसी देश से सैन्य हमले की आशंका थी।”
  • ★“दूसरे, इन्हें अंदरूनी सैन्य-संघर्ष की भी चिंता करनी थी।”
  • ★★“अनेक नव स्वतंत्र देश अमरीका या सोवियत संघ अथवा औपनिवेशिक ताकतों से कहीं ज्यादा अपने पड़ोसी देशों से आशंकित थे।” — सीमा रेखा, भूक्षेत्र और आबादी पर नियंत्रण को लेकर।
  • और दोनों जुड़ भी जाते थे — “अगर कोई पड़ोसी मुल्क ऐसे आंदोलन को हवा दे तो दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव बनता था।”

95% · बारहगुना

95%

“विश्व के सशस्त्र संघर्षों में 95 प्रतिशत अब आंतरिक युद्ध के अंतर्गत हैं। सन् 1946 से 1991 के बीच गृह युद्धों की संख्या में बारहगुनी वृद्धि हुई है — जो पिछले 200 वर्षों में सबसे लंबी छलांग है।”

और एक आँकड़ा शीतयुद्ध के हिसाब में

  • ★“दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जितने युद्ध हुए उसमें एक तिहाई युद्धों के लिए शीतयुद्ध जिम्मेदार रहा।”
  • ★“इनमें से अधिकांश युद्ध तीसरी दुनिया में हुए।”

साइड-टिप्पणी (पृ. 68): “जो अपने ही देश के खिलाफ लड़ते हैं निश्चित ही वे किन्हीं बातों से नाखुश होते हैं। शायद यह उनकी असुरक्षा ही है जो देश के लिए असुरक्षा पैदा करती है।”

4 | सुरक्षा के पारंपरिक तरीके | न्याय-युद्ध, और तीन तरह के समझौते

‘न्याय-युद्ध’ — लक्ष्य पर भी सीमा, साधन पर भी

पृ. 68–69

  • ★“हिंसा का इस्तेमाल यथासंभव सीमित होना चाहिए। युद्ध के लक्ष्य और साधन दोनों से इसका संबंध है।”
  • ★लक्ष्य — “युद्ध उचित कारणों यानी आत्म-रक्षा अथवा दूसरों को जनसंहार से बचाने के लिए ही करना चाहिए।”
  • ★साधन — “संघर्षविमुख शत्रु, निहत्थे व्यक्ति अथवा आत्मसमर्पण करने वाले शत्रु को न मारे”; “उतने ही बल का प्रयोग जितना आत्मरक्षा के लिए ज़रूरी हो”; “बल प्रयोग तभी जब बाकी उपाय असफल हो गए हों।”

तीन तरीके — प्रश्न 1 का सुमेल यहीं से बनता है

तरीकापरिभाषा (शब्दश:)
निरस्त्रीकरण“सभी राज्य… कुछ खास किस्म के हथियारों से बाज आयें”
अस्त्र-नियंत्रण“हथियारों को विकसित करने अथवा हासिल करने के संबंध में कुछ कायदे-कानूनों का पालन”
विश्वास बहाली (CBMs)“सूचनाओं तथा विचारों के नियमित आदान-प्रदान का फैसला”

चार संधियाँ — किस खाने में कौन

संधिवर्षकोटियाद रखने की बात
BWC — जैविक हथियार1972निरस्त्रीकरण155 से ज्यादा हस्ताक्षरकर्ता
CWC — रासायनिक हथियार1997निरस्त्रीकरण193 हस्ताक्षरकर्ता
ABM — एंटी बैलेस्टिक मिसाइल1972अस्त्र-नियंत्रणमिसाइल-रक्षा कवच पर रोक
NPT — परमाणु अप्रसार1968अस्त्र-नियंत्रण1967 की रेखा

जैविक-रासायनिक छोड़ दिए, परमाणु नहीं

यही ‘निरस्त्रीकरण से अस्त्र-नियंत्रण’ का मोड़ है

  • BWC और CWC — “इन दोनों संधियों पर दस्तख़त करने वालों में सभी महाशक्तियाँ शामिल हैं।”
  • !★“लेकिन महाशक्तियाँ — अमरीका तथा सोवियत संघ — सामूहिक संहार के अस्त्र यानी परमाण्विक हथियार का विकल्प नहीं छोड़ना चाहती थीं इसलिए दोनों ने अस्त्र-नियंत्रण का सहारा लिया।”
  • ABM (1972) — दोनों को सीमित संख्या में रक्षा-प्रणाली की अनुमति, पर व्यापक उत्पादन पर रोक।
  • इसी क्रम में — SALT II (सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि-2) और START (सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि)।

1967 — वह रेखा, जो हर साल गलत लिखी जाती है

1967

NPT का वर्ष 1968 है; रेखा 1967 की है। “जिन देशों ने 1967 से पहले परमाणु हथियार बना लिये थे या उनका परीक्षण कर लिया था उन्हें रखने की अनुमति दी गई। जो देश 1967 तक ऐसा नहीं कर पाये थे उन्हें हासिल करने के अधिकार से वंचित किया गया।”

NPT ने क्या किया, क्या नहीं

  • ★“परमाणु अप्रसार संधि ने परमाण्विक आयुधों को समाप्त तो नहीं किया लेकिन इन्हें हासिल कर सकने वाले देशों की संख्या ज़रूर कम की।”
  • CBMs का मकसद — “प्रतिद्वन्द्वी को इस बात का आश्वासन देना कि उनकी तरफ से औचक हमले की योजना नहीं बनायी जा रही”; देश बताते हैं कि किस तरह के सैन्य-बल हैं और कहाँ तैनात किए जा रहे हैं।
  • ★“यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि प्रतिद्वन्द्वी देश किसी ग़लतफहमी या गफलत में पड़कर जंग के लिए आमादा न हो जाएँ।”

पारंपरिक धारणा का पूरा सार — एक वाक्य में

सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में माना जाता है कि सैन्य बल से सुरक्षा को खतरा पहुँचता है और सैन्य बल से ही सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है।

NCERT, अध्याय 5, पृ. 70

5 | अपारंपरिक धारणा | अब सवाल बदल जाता है — ‘सुरक्षा किसकी?’

चार सवाल, और एक बदला हुआ जवाब

पृ. 70–71

  • ★“सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा सिर्फ सैन्य खतरों से संबद्ध नहीं। इसमें मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले व्यापक खतरों को शामिल किया जाता है।”
  • चार सवाल — सुरक्षा किसकी? · किन चीजों की? · किन खतरों से? · किन तरीकों से?
  • ★★संदर्भी बदल जाता है — पारंपरिक में “भूक्षेत्र और संस्थाओं सहित राज्य”; अपारंपरिक में “सिर्फ राज्य ही नहीं — व्यक्तियों और समुदायों या कहें कि समूची मानवता।”
  • इसीलिए नाम — ★‘मानवता की सुरक्षा’ अथवा ‘विश्व-रक्षा’।

अध्याय की सबसे तीखी पंक्ति

पिछले 100 वर्षों में जितने लोग विदेशी सेना के हाथों मारे गए उससे कहीं ज्यादा लोग खुद अपनी ही सरकारों के हाथों खेत रहे।

NCERT, अध्याय 5, पृ. 71

इसका सीधा निहितार्थ

  • ★“मानवता की रक्षा का विचार जनता-जनार्दन की सुरक्षा को राज्यों की सुरक्षा से बढ़कर मानता है।”
  • ★★“मानवता की सुरक्षा और राज्य की सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए और अक्सर होते भी हैं। लेकिन सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।”

मानवता की सुरक्षा के तीन अर्थ — मतभेद यहीं है

अर्थकिन खतरों से बचाना है
संकीर्णहिंसक खतरे यानी खून-खराबा — कोफ़ी अन्नान: “व्यक्तियों और समुदायों को अंदरूनी खून-खराबा से बचाना”
व्यापक+ अकाल, महामारी और आपदाएँ — क्योंकि “युद्ध, जन-संहार और आतंकवाद साथ मिलकर जितने लोगों को मारते हैं उससे कहीं ज्यादा लोग अकाल, महामारी और प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ जाते हैं”
व्यापकतम+ आर्थिक सुरक्षा और मानवीय गरिमा — यानी ★“‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’”

विश्व सुरक्षा — क्योंकि अकेले कोई नहीं कर सकता

1990 के दशक में उभरी धारणा

  • कौन-से खतरे — वैश्विक तापवृद्धि · अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद · एड्स और बर्ड फ्लू जैसी महामारियाँ।
  • ★★“कोई भी देश इन समस्याओं का समाधान अकेले नहीं कर सकता।”
  • ★असर सब पर बराबर नहीं — “अगर समुद्रतल दो मीटर ऊँचा उठता है तो बांग्लादेश का 20 प्रतिशत हिस्सा डूब जाएगा; कमोबेश पूरा मालदीव सागर में समा जाएगा और थाईलैंड की 50 फीसदी आबादी को खतरा पहुँचेगा।”
  • “चूँकि इन समस्याओं की प्रकृति वैश्विक है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है — भले ही इसे हासिल करना मुश्किल हो।”

6 | खतरे के नये स्रोत | पाँच, और हर एक सीमा नहीं मानता

आतंकवाद

प्रश्न 5 का उत्तर — यह अपारंपरिक श्रेणी में आता है

  • ★★“आतंकवाद का आशय राजनीतिक खून-खराबे से है जो जान-बूझकर और बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है।”
  • ★अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद — “एक से ज्यादा देशों में व्याप्त है और उसके निशाने पर कई देशों के नागरिक हैं।”
  • तरीका — “राजनीतिक स्थिति नापसंद हो तो उसे बल-प्रयोग अथवा बल-प्रयोग की धमकी देकर बदलना चाहते हैं”; विमान-अपहरण; रेलगाड़ी, होटल, बाज़ार में बम।
  • ! और यह ईमानदारी भी लिखिए — “आतंकवाद कोई नयी परिघटना नहीं है।” पहले भी मध्यपूर्व, यूरोप, लातिनी अमरीका और दक्षिण एशिया में होता रहा।

कार्टून (पृ. 72): ट्रेन सूचना-पट्ट — मैड्रिड 3.11 · लंदन 7.7 · मुंबई 7.11 — तीनों “Arrived”; अगला ट्रैक ”?”

मानवाधिकार — सहमति वर्गीकरण पर, असहमति कार्रवाई पर

  • तीन कोटियाँ — ★राजनीतिक अधिकार (अभिव्यक्ति, सभा) · आर्थिक और सामाजिक अधिकार · उपनिवेशीकृत जनता तथा जातीय और मूलवासी अल्पसंख्यकों के अधिकार।
  • ! “इस वर्गीकरण को लेकर व्यापक सहमति है लेकिन इस बात पर सहमति नहीं बन पायी है कि किस कोटि को सार्वभौम माना जाए या उल्लंघन की स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को क्या करना चाहिए।”
  • तीन घटनाएँ जिनसे बहस चली — ★रवांडा में जनसंहार · कुवैत पर इराक का हमला · पूर्वी तिमूर में इंडोनेशियाई सेना का रक्तपात।
  • पक्ष: “UN का घोषणापत्र अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को अधिकार देता है कि वह मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हथियार उठाये।”
  • ! विपक्ष: “संभव है, ताकतवर देशों के हितों से यह निर्धारित होता हो कि UN किस मामले में कार्रवाई करेगा और किसमें नहीं।”

वैश्विक निर्धनता — और उसका स्वचालित चक्र

  • जनसंख्या — ★760 करोड़ अब; 21वीं सदी के मध्य तक 1000 करोड़।
  • ★★“जनसंख्या-वृद्धि का 50 फीसदी सिर्फ छह देशों में — भारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश और इंडोनेशिया।”
  • “अगले 50 साल में सबसे गरीब देशों में जनसंख्या तीन गुनी बढ़ेगी जबकि अनेक धनी देशों की जनसंख्या घटेगी।”
  • ★चक्र — उच्च आय + कम वृद्धि → और धनी; निम्न आय + तीव्र वृद्धि → और गरीब।
  • ★★“दुनिया में सबसे ज्यादा सशस्त्र संघर्ष अफ्रीका के सहारा मरुस्थल के दक्षिणवर्ती देशों में होते हैं। यह इलाका दुनिया का सबसे गरीब इलाका है।”

तीन शब्द जो अलग-अलग हैं — और अक्सर मिला दिए जाते हैं

पदपाठ्यपुस्तक की परिभाषाराज्य का दायित्व
आप्रवासी“जो अपनी मर्जी से स्वदेश छोड़ते हैं”स्वीकारने की बाध्यता नहीं
शरणार्थी“जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा अथवा राजनीतिक उत्पीड़न के कारण स्वदेश छोड़ने पर मज़बूर होते हैं”स्वीकार करने की अपेक्षा
आंतरिक विस्थापित“जो अपना घर-बार छोड़ चुके हैं परंतु राष्ट्रीय सीमा के भीतर ही हैं”— उदाहरण: कश्मीरी पंडित (1990 का दशक)

शरणार्थी-मानचित्र = संघर्ष-मानचित्र

पृ. 74–75

  • ★★“विश्व का शरणार्थी-मानचित्र विश्व के संघर्ष-मानचित्र से लगभग हू-ब-हू मेल खाता है।”
  • ★“1990 से 1995 के बीच सत्तर देशों के मध्य कुल 93 युद्ध हुए और इसमें लगभग साढ़े 55 लाख लोग मारे गये।”
  • ★“1990 के दशक में कुल 60 जगहों से शरणार्थी प्रवास करने को मजबूर हुए और इसमें तीन को छोड़कर शेष सभी के मूल में सशस्त्र संघर्ष था।”

विश्व में शरणार्थी (2017) — किसने शरण दी

क्षेत्रहिस्सा
अफ्रीका30%
मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका26%
यूरोप17%
अमेरिका16%
एशिया और पैसिफिक11%

महामारी — और सीमाओं का घटता अर्थ

  • कैसे फैलती हैं — “आप्रवास, व्यवसाय, पर्यटन और सैन्य-अभियानों के जरिए।”
  • ★“अनुमान है कि 2003 तक पूरी दुनिया में 4 करोड़ लोग एचआईवी-एड्स से संक्रमित हो चुके थे — दो-तिहाई अफ्रीका में, शेष के 50 फीसदी दक्षिण एशिया में।”
  • ! असमानता — उत्तरी अमरीका में नयी विधियों से मृत्यु-दर घटी, पर अफ्रीका के लिए ये उपचार “कीमत को देखते हुए आकाश-कुसुम”।
  • नयी — एबोला, हैन्टावायरस, हेपेटाइटिस-सी। पुरानी — कोरोना, टीबी, मलेरिया, डेंगी, हैजा — “औषधि-प्रतिरोधक रूप धारण कर लिया है।”
  • आर्थिक चोट — ब्रिटेन को ‘मैड-काऊ’ से अरबों डॉलर; बर्ड फ्लू से दक्षिण एशियाई देशों को मुर्ग-निर्यात बंद करना पड़ा।

★★“देशों के बीच पारस्परिक निर्भरता बढ़ रही है और राष्ट्रीय सीमाएँ अब पहले की तुलना में कम सार्थक रह गई हैं।”

लेकिन सीमा कहाँ खींचें?

यह खंड छूट जाता है — छोड़िए मत

  • ! “अगर हम हर तरह के कष्ट या बीमारी को शामिल कर लें तो सुरक्षा की धारणा में संगति नहीं रह जाती। ऐसे में हर चीज सुरक्षा का मसला हो सकती है।”
  • ★★कसौटी — “किसी मसले को सुरक्षा का मसला कहलाने के लिए एक सर्व स्वीकृत न्यूनतम मानक पर खरा उतरना जरूरी है। अगर किसी मसले से संदर्भी (राज्य अथवा जनसमूह) के अस्तित्व को खतरा हो रहा हो तो उसे सुरक्षा का मसला कहा जा सकता है — चाहे इस खतरे की प्रकृति कुछ भी हो।”
  • तीन उदाहरण — मालदीव (समुद्रतल), दक्षिणी अफ्रीका (हर 6 वयस्क में 1; बोस्तवाना में 3 में 1), रवांडा 1994 (हुतु ने कुछ ही हफ्तों में लगभग 5 लाख तुत्सी मार डाले)।

निष्कर्ष: “सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा भी पारंपरिक धारणा के समान स्थानीय संदर्भों के अनुकूल परिवर्तनशील है।”

7 | सहयोगमूलक सुरक्षा | जहाँ सेना काम नहीं आती

वह तर्क जो सीधा प्रश्न-पत्र में लिखा जा सकता है

पृ. 76

  • “आतंकवाद से लड़ने अथवा मानवाधिकारों को बहाल करने में भले ही सैन्य-बल की कोई भूमिका हो — और यहाँ भी वह एक सीमा तक ही कारगर है।”
  • ★★“लेकिन गरीबी मिटाने, तेल तथा बहुमूल्य धातुओं की आपूर्ति बढ़ाने, आप्रवासियों और शरणार्थियों की आवाजाही के प्रबंधन तथा महामारी के नियंत्रण में सैन्य-बल से क्या मदद मिलेगी — यह कहना मुश्किल है।”
  • ★★“वस्तुत: ऐसे अधिकांश मसलों में सैन्य-बल के प्रयोग से मामला और बिगड़ेगा।”
  • सहयोग के स्तर — द्विपक्षीय · क्षेत्रीय · महादेशीय · वैश्विक — “यह इस बात पर निर्भर करेगा कि खतरे की प्रकृति क्या है और विभिन्न देश इससे निबटने के लिए कितने इच्छुक तथा सक्षम हैं।”

सहयोगमूलक सुरक्षा में कौन-कौन

श्रेणीउदाहरण
अंतर्राष्ट्रीय संगठनसंयुक्त राष्ट्रसंघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
स्वयंसेवी संगठनएमनेस्टी इंटरनेशनल, रेड क्रॉस, निजी संगठन, दानदाता संस्थाएँ
अन्य समूहधार्मिक संगठन, मज़दूर संगठन, सामाजिक और विकास संगठन, व्यवसायिक संगठन और निगम
जानी-मानी हस्तियाँनेल्सन मंडेला, मदर टेरेसा

और फिर भी — बल का दरवाज़ा बंद नहीं होता

  • ★“सहयोग मूलक सुरक्षा में भी अंतिम उपाय के रूप में बल-प्रयोग किया जा सकता है।”
  • किनके खिलाफ — “उन सरकारों से निबटने के लिए जो अपनी ही जनता को मार रही हों अथवा गरीबी, महामारी और प्रलयंकारी घटनाओं की मार झेल रही जनता के दुख-दर्द की उपेक्षा कर रही हों।”
  • ★★पर शर्त के साथ — “बल-प्रयोग सामूहिक स्वीकृति से और सामूहिक रूप में किया जाए — न कि कोई एक देश अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी और स्वयंसेवी संगठनों की मर्जी पर कान दिए बगैर बल प्रयोग का रास्ता अख्तियार करे।”

8 | भारत | सुरक्षा की रणनीति के चार घटक

घटक 1 — सैन्य-क्षमता को मज़बूत करना

“क्योंकि भारत पर पड़ोसी देशों से हमले होते रहे हैं”

  • ★पाकिस्तान — 1947-48 · 1965 · 1971 · 1999; ★चीन — 1962।
  • ★“दक्षिण एशियाई इलाके में भारत के चारों तरफ परमाणु हथियारों से लैस देश हैं।”
  • ★“भारत ने सन् 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया था।”
  • ★★“भारत के परमाणु परीक्षण करने के फ़ैसलों (1998) को उचित ठहराते हुए भारतीय सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया था।”

घटक 2 — अंतर्राष्ट्रीय कायदों और संस्थाओं को मज़बूत करना

  • ★नेहरू — “एशियाई एकता, विउपनिवेशीकरण और निरस्त्रीकरण” की हिमायत; “अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों में संयुक्त राष्ट्रसंघ को अंतिम पंच मानने” पर ज़ोर।
  • ★★अप्रसार पर भारत की माँग — “एक सार्वभौम और बिना भेदभाव वाली नीति… जिसमें हर देश को सामूहिक संहार के हथियारों (परमाणु, जैविक, रासायनिक) से संबद्ध बराबर के अधिकार और दायित्व हों।”
  • ★नव-अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की माँग; और “दो महाशक्तियों की खेमेबाजी से अलग गुटनिरपेक्षता के रूप में विश्व-शांति का तीसरा विकल्प।”
  • ★क्योटो प्रोटोकॉल 1997 — “भारत उन 160 देशों में शामिल है जिन्होंने हस्ताक्षर किए हैं।”
  • ★“भारत ने अपनी सेना संयुक्त राष्ट्रसंघ के शांतिबहाली के मिशनों में भेजी है।”

घटक 3 — अंदरूनी सुरक्षा और उसका लोकतांत्रिक उत्तर

  • ★“नगालैंड, मिजोरम, पंजाब और कश्मीर जैसे क्षेत्रों से कई उग्रवादी समूहों ने समय-समय पर इन प्रांतों को भारत से अलगाने की कोशिश की।”
  • ★★“भारत ने राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था का पालन किया है।”
  • ★“यह व्यवस्था विभिन्न समुदाय और जन-समूहों को अपनी शिकायतों को खुलकर रखने और सत्ता में भागीदारी करने का मौका देती है।”

यही घटक 4 का पुल भी है — असंतोष का रास्ता बंदूक नहीं, मतपेटी।

घटक 4 — आर्थिक विकास, और एक ईमानदार स्वीकृति

  • लक्ष्य — “बहुसंख्यक नागरिकों को गरीबी और अभाव से निज़ात मिले तथा नागरिकों के बीच आर्थिक असमानता ज्यादा न हो।”
  • ! “प्रयास आंशिक रूप से सफल हुए हैं; हम गरीबी और असमानता पर काबू पाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
  • ★★“फिर भी, लोकतांत्रिक राजनीति से ऐसे अवसर उपलब्ध हैं कि गरीब और वंचित नागरिक अपनी आवाज़ उठा सकें। लोकतांत्रिक रीति से निर्वाचित सरकार के ऊपर दबाव होता है कि वह आर्थिक संवृद्धि को मानवीय विकास का सहगामी बनाए।”

और यही अध्याय का अंतिम निष्कर्ष है

लोकतंत्र सिर्फ राजनीतिक आदर्श नहीं है; लोकतांत्रिक शासन जनता को ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने का साधन भी है।

NCERT, अध्याय 5, पृ. 79

9 | समेटते हुए | एक सारणी में पूरा अध्याय

पारंपरिक बनाम अपारंपरिक — तीन पंक्तियाँ, पूरा अध्याय

कसौटीपारंपरिक सुरक्षाअपारंपरिक सुरक्षा
संदर्भी कौनराज्य — भूक्षेत्र और संस्थाओं सहितव्यक्ति, समुदाय, समूची मानवता
खतरा क्यासैन्य खतरा, स्रोत — दूसरा मुल्कआतंकवाद, मानवाधिकार-हनन, निर्धनता, प्रवासन, महामारी, तापवृद्धि
तरीका क्याअपरोध · रक्षा · शक्ति-संतुलन · गठबंधन; और निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रण, CBMsसहयोग — द्विपक्षीय से वैश्विक तक; बल केवल अंतिम उपाय, सामूहिक स्वीकृति से
कहाँ से खतराज्यादातर सीमा के बाहर सेसीमा नहीं मानता — भीतर, बाहर, और वैश्विक
मूल मान्यता“सैन्य बल से खतरा, सैन्य बल से ही सुरक्षा”“सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं”

संख्याएँ जो पूछी जाती हैं

मानकिसका
95% · बारहगुना (1946–91)आंतरिक युद्धों का हिस्सा · गृहयुद्धों की वृद्धि
1972 / 155+ · 1997 / 193BWC · CWC
1972 · 1968 · 1967ABM · NPT का वर्ष · NPT की रेखा
760 करोड़ → 1000 करोड़विश्व जनसंख्या, 21वीं सदी के मध्य तक
1990–95 · 70 देश · 93 युद्ध · 55.5 लाखशरणार्थी-संकट की पृष्ठभूमि
4 करोड़ (2003) · 6 में 1 · 3 में 1HIV-एड्स · दक्षिणी अफ्रीका · बोस्तवाना
2 मीटर → 20% · 50%समुद्रतल → बांग्लादेश · थाईलैंड की आबादी
1974 · 1998 · 1997/160पहला परमाणु परीक्षण · परीक्षण के फ़ैसले · क्योटो

एक वाक्य जो पूरा अध्याय है

किसकी?

पारंपरिक धारणा पूछती है — “राज्य सुरक्षित है?” अपारंपरिक धारणा पूछती है — “और जनता?” बाकी सब इसी एक सवाल का विस्तार है।

आख़िरी बात — कक्षा के लिए

प्रश्न 12 का कार्टून

  • कार्टून: विशाल ‘WAR’ का शरीर, और उसके पीछे लगे ‘TERRORISM’ के छोटे-छोटे पिल्ले।
  • सवाल: “कार्टून में युद्ध और आतंकवाद का जो संबंध दिखाया गया है उसके पक्ष या विपक्ष में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।”
  • दोनों तरफ तर्क बनते हैं — युद्ध आतंकवाद को जन्म देता है, या युद्ध और आतंकवाद अलग परिघटनाएँ हैं और यह चित्रण आतंकवाद की जिम्मेदारी हटा देता है।

यही इस अध्याय का असली अभ्यास है — तथ्य याद रखना नहीं, दोनों पक्ष रख पाना।