Chapter 1दो ध्रुवीयता का अंत

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 1–14.

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पाठ्यपुस्तक से आगे — संवर्धन सामग्री (T1 · T2 · T3)

यह दस्तावेज़ पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं, विस्तार है। बोर्ड परीक्षा में केवल पाठ्यपुस्तक का उत्तर लिखिए — यह दस्तावेज़ समझ, प्रतियोगी परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए है।

स्तरकिसके लिएकितना
T1बोर्ड परीक्षा भी + हर प्रतियोगी परीक्षा — यह वह है जो पाठ्यपुस्तक में होना चाहिए था (अध्याय-युक्तिकरण में हटाए गए ‘शीतयुद्ध का दौर’ अध्याय की भरपाई)सबको पढ़ना है
T2UPSC प्रारंभिक, राज्य PCS, SSC, बैंकिंग, CUET, NDA/CDS — तथ्य जो प्रश्नपत्रों में आते हैंगंभीर अभ्यर्थी
T3UPSC मुख्य परीक्षा, वैकल्पिक विषय, साक्षात्कार, शोध — विश्लेषण और विवादउन्नत

★हर गैर-स्पष्ट तथ्य वेब-सत्यापित है — तिथियाँ और आँकड़े अगस्त 2026 तक अद्यतन। स्रोत-चिह्न: 【पाठ】 = NCERT पाठ्यपुस्तक से · ◆ = प्राथमिक स्रोत (NATO/SIPRI/सरकारी पोर्टल/संधि-दस्तावेज़) · ◇ = सशक्त द्वितीयक स्रोत। पूरी स्रोत-सूची अंत में।

विषय-सूची

#खंडस्तर
1! हटाए गए अध्याय की भरपाई — वारसा समझौता (Warsaw Pact)T1
2नाटो (NATO) — कल भी, आज भीT1
3विघटन का असली कानूनी क्रम — बेलावेज़ा और अल्मा-अताT1
4पंद्रह गणराज्य — पूरी सूचीT1
5शीतयुद्ध की वे घटनाएँ जिनका नाम पाठ लेता है, पर बताता नहींT2
6बाल्टिक गणराज्य — ‘गायन क्रांति’ और ‘बाल्टिक शृंखला’T2
7शॉक थेरेपी — नाम, देश और विकल्पT2
8गोर्बाचेव के बारे में जो पाठ्यपुस्तक नहीं कहतीT2
9★★CIS 2026 में — मोल्दोवा का बाहर निकलना (नया)T1–T2
10★★भारत-रूस — 2026 के ताज़ा आँकड़े (नयी SIPRI रिपोर्ट)T1–T2
11★नगरनो-कराबाख, 2025–26 — शांति-समझौता और ज़ंगेज़ुर/TRIPP गलियारा (नया)T2
12जॉर्जिया-रूस संबंध, 2025–26 (नया)T2
13मध्य एशिया — महाशक्तियों की नयी प्रतिस्पर्धा (नया)T2–T3
14! T3 — पाठ्यपुस्तक का एक तथ्य जो बाहरी स्रोतों से मेल नहीं खाता (ताज़िकिस्तान)T3
15T3 — ‘शीतयुद्ध सचमुच खत्म हुआ?’ — पाठ का दावा और 2026 की दुनियाT3
16T3 — राष्ट्रवाद बनाम अलगाववाद — कार्टून का असली वज़नT3
17T3 — युगोस्लाविया और कोसोवो — पूरी तस्वीरT3
18T3 — ‘शॉक थेरेपी’ का बचाव भी पढ़िए (संतुलित दृष्टि)T3
19प्रतियोगी परीक्षाओं के शब्दT2–T3
20संक्षिप्ताक्षर-कोशT1–T2
21अभ्यास प्रश्न (25)सभी
22स्रोत-सूची—

1 · हटाए गए अध्याय की भरपाई — वारसा समझौता (Warsaw Pact) 【T1】ध्यान

यही प्रश्नावली के प्रश्न 5(ख) और 4(5) का उत्तर है। पाठ्यपुस्तक ‘वारसा समझौता’ का नाम घटना-चक्र की तालिका में केवल एक बार लेती है 【पाठ】, पर उसे कहीं परिभाषित नहीं करती — क्योंकि उसकी परिभाषा युक्तिकरण में हटाए गए पुराने अध्याय (‘शीतयुद्ध का दौर’) में थी।

मदतथ्य
पूरा नामवारसा संधि संगठन (Warsaw Treaty Organization)
स्थापना14 मई 1955, वारसा (पोलैंड) में
क्यों बना★नाटो (NATO) के जवाब में — विशेषकर पश्चिमी जर्मनी के नाटो में शामिल होने (1955) के बाद
मूल सदस्य — आठसोवियत संघ, अल्बानिया, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, पूर्वी जर्मनी, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया
किस प्रकार कापारस्परिक रक्षा गठबंधन (mutual-defence alliance)
★कब भंग हुआ1 जुलाई 1991, प्राग (चेकोस्लोवाकिया) में अंतिम शिखर बैठक में औपचारिक रूप से ‘अस्तित्वहीन’ घोषित ◇

★★ध्यान दीजिए: वारसा समझौता (जुलाई 1991) सोवियत संघ (दिसंबर 1991) से पहले खत्म हुआ। यह क्रम प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे पूछा जाता है — गठबंधन पहले टूटा, राज्य बाद में।

2 · नाटो (NATO) — कल भी, आज भी 【T1】

मदतथ्य
पूरा नामउत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization)
स्थापना4 अप्रैल 1949, 12 संस्थापक सदस्यों के साथ ◆
मुख्यालयब्रुसेल्स (बेल्जियम)
आज सदस्य★★32 ◆
बाल्टिक देशमार्च 2004 (यह पाठ्यपुस्तक में है) 【पाठ】
★फ़िनलैंड4 अप्रैल 2023 — 31वाँ सदस्य
★स्वीडन7 मार्च 2024 — 32वाँ सदस्य
कुल विस्तार-चक्र10 दौर — 1952, 1955, 1982, 1999, 2004, 2009, 2017, 2020, 2023, 2024 में

★★यह अध्याय का सबसे बड़ा ‘आज तक’ वाला तथ्य है: जिस नाटो से बचने के लिए सोवियत संघ ने वारसा समझौता बनाया था, वह आज रूस की सीमा तक पहुँच चुका है — और फ़िनलैंड की रूस के साथ 1,300 किमी से अधिक लंबी सीमा है। यूक्रेन की नाटो-सदस्यता की माँग ही 2014 और 2022 के संकटों का एक केंद्रीय मुद्दा रही है — यानी पाठ्यपुस्तक जिस संस्था का नाम ले चुकी है, वही आज भी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

3 · विघटन का असली कानूनी क्रम — बेलावेज़ा और अल्मा-अता 【T1】

पाठ्यपुस्तक कहती है — “दिसंबर 1991 में रूस, बेलारूस और उक्रेन ने… संधि समाप्त कर दी।” 【पाठ】 यह सही है, पर अधूरा। पूरा क्रम यह था —

तिथिदस्तावेज़क्या हुआ
★★8 दिसंबर 1991बेलावेज़ा समझौता (Belovezha Accords)रूस, बेलारूस और उक्रेन के नेताओं ने बेलारूस के विस्कुली गाँव में हस्ताक्षर किए — सोवियत संघ को भंग घोषित किया और CIS का गठन किया। हस्ताक्षरकर्ता — बोरिस येल्तसिन (रूस), स्तानिस्लाव शुशकेविच (बेलारूस), लिओनिद क्रावचुक (उक्रेन) ◆
★★21 दिसंबर 1991अल्मा-अता प्रोटोकॉल (Alma-Ata Protocol)कज़ाकिस्तान के अल्मा-अता में 11 गणराज्यों ने हस्ताक्षर किए — जार्जिया को छोड़कर बाकी सब। इसी से CIS औपचारिक रूप से स्थापित हुआ ◆
25 दिसंबर 1991—गोर्बाचेव का इस्तीफा (यह पाठ्यपुस्तक में है) 【पाठ】
26 दिसंबर 1991—सुप्रीम सोवियत ने स्वयं को भंग किया — संघ का कानूनी अंत ◇

क्यों दो दस्तावेज़? क्योंकि केवल तीन गणराज्यों के हस्ताक्षर से पूरा संघ भंग करना कानूनी रूप से संदिग्ध था। अल्मा-अता प्रोटोकॉल ने उसी कमी को भरा। पाठ्यपुस्तक केवल पहला दस्तावेज़ बताती है, और इसीलिए वह तीन नाम ही देती है।

4 · पंद्रह गणराज्य — पूरी सूची 【T1】

पाठ्यपुस्तक ‘15 गणराज्य’ कहती है पर नाम नहीं देती 【पाठ】। प्रतियोगी परीक्षाओं में सूची पूछी जाती है।

समूहगणराज्य
स्लाव (3)रूस, उक्रेन, बेलारूस
बाल्टिक (3)एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया
मध्य एशिया (5)कज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किरगिज़स्तान, ताज़िकिस्तान
काकेशस (3)जार्जिया, आर्मेनिया, अज़रबैजान
अन्य (1)मोल्दोवा

5 · शीतयुद्ध की वे घटनाएँ जिनका नाम पाठ लेता है, पर बताता नहीं 【T2】

घटनातथ्य
‘लौह-आवरण’ भाषण (Iron Curtain)विंस्टन चर्चिल, फुल्टन, मिसौरी (अमरीका), मार्च 1946 — शीतयुद्ध की वैचारिक शुरुआत
बर्लिन की नाकेबंदी (Berlin Blockade)1948–49 — सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन का रास्ता रोका; पश्चिम ने हवाई-पुल (Berlin Airlift) चलाया
क्यूबा मिसाइल संकट1962 — ख़्रुश्चेव और कैनेडी; शीतयुद्ध का सबसे खतरनाक क्षण (पाठ्यपुस्तक ख़्रुश्चेव के बॉक्स में इसका नाम लेती है) 【पाठ】
हंगरी का जन-विद्रोह1956 — ख़्रुश्चेव के काल में दमन (बॉक्स में उल्लेख) 【पाठ】
चेकोस्लोवाकिया — ‘प्राग वसंत’1968 — ब्रेझनेव के काल में दमन (बॉक्स में उल्लेख) 【पाठ】
INF संधि1987 — गोर्बाचेव और रीगन; मध्यम दूरी की परमाणु मिसाइलों पर रोक
! INF संधि का अंत★2019 में अमरीका औपचारिक रूप से बाहर निकला — यानी जिस संधि से शीतयुद्ध ठंडा हुआ था, वह 32 वर्ष बाद ही टूट गई
START I संधि1991 — सामरिक हथियारों में कटौती
बुडापेस्ट ज्ञापन1994 — उक्रेन, बेलारूस, कज़ाकिस्तान ने परमाणु हथियार रूस को सौंपे; बदले में क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी मिली — 2014 और 2022 की घटनाओं ने इस गारंटी की क़ीमत पर सवाल खड़े किए

6 · बाल्टिक गणराज्य — ‘गायन क्रांति’ और ‘बाल्टिक शृंखला’ 【T2】

पाठ्यपुस्तक कहती है “जून 1988 — लिथुआनिया में आज़ादी का आंदोलन” 【पाठ】, पर यह बताती नहीं कि आंदोलन कैसा था।

  • ★★‘बाल्टिक शृंखला’ (Baltic Way) — 23 अगस्त 1989: एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया के लगभग 20 लाख लोगों ने हाथ से हाथ जोड़कर लगभग 675 किलोमीटर लंबी मानव-शृंखला बनाई। ◇
  • तिथि संयोग नहीं थी — 23 अगस्त 1939 के मोलोतोव-रिबेनट्रॉप समझौते की 50वीं वर्षगाँठ, जिसके गुप्त प्रोटोकॉल से बाल्टिक देश सोवियत संघ में मिलाए गए थे।
  • इसे ‘गायन क्रांति’ (Singing Revolution) भी कहा जाता है — विरोध का माध्यम राष्ट्रीय गीत थे।

यह पाठ्यपुस्तक के उस वाक्य का सबसे ठोस उदाहरण है कि विघटन जनता की सामूहिक कार्रवाई से हुआ 【पाठ】।

7 · शॉक थेरेपी — नाम, देश और विकल्प 【T2】

मदतथ्य
पोलैंड — ‘बाल्सरोविच योजना’★1 जनवरी 1990 से लागू; वित्त मंत्री लेशेक बाल्सरोविच के नाम पर ◇
मुख्य सलाहकार★जेफ़री सैक्स (Jeffrey Sachs), हार्वर्ड — पोलैंड और बाद में रूस दोनों के सलाहकार
पाँच स्तंभसमष्टि-आर्थिक स्थिरीकरण · उदारीकरण · निजीकरण · सामाजिक सुरक्षा-जाल · अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहायता
रूस में1992 से, येगोर गैदार के नेतृत्व में
मंदी कितने वर्षपोलैंड 2 वर्ष (1990–91) · मध्य यूरोप 3–4 वर्ष · बाल्टिक 5 वर्ष · बुल्गारिया 8 वर्ष · रोमानिया 10 वर्ष ◇

★विकल्प जो मौजूद था — ‘क्रमिकतावाद’ (Gradualism): चीन और वियतनाम ने संक्रमण का धीमा, चरणबद्ध रास्ता चुना — और उन्हें कोई संक्रमणकालीन मंदी झेलनी ही नहीं पड़ी; सुधारों के दौरान उनकी वृद्धि-दर हमेशा धनात्मक रही।

यही प्रश्नावली के प्रश्न 9 के दूसरे भाग का सबसे मजबूत उत्तर है — “क्या यह सबसे बेहतर तरीका था?” नहीं — क्योंकि उसी दौर में एक और रास्ता मौजूद था और वह बेहतर चला। पाठ्यपुस्तक इसे ‘तीसरा रुख़’ कहती है, जिसे मंज़ूर नहीं किया गया 【पाठ】।

8 · गोर्बाचेव के बारे में जो पाठ्यपुस्तक नहीं कहती 【T2】

तथ्यविवरण
★नोबेल शांति पुरस्कार1990 — “शीतयुद्ध की शांतिपूर्ण समाप्ति की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका” के लिए ◆
★निधन30 अगस्त 2022, मास्को में, 91 वर्ष की आयु में ◆
पाठ्यपुस्तक क्या कहती है“जन्म 1931” — पुस्तक तब छपी जब वे जीवित थे 【पाठ】

! परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही रूप लिखिए। निधन की जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है।

9 · CIS 2026 में — मोल्दोवा का बाहर निकलना 【T1–T2】★★

पाठ्यपुस्तक 1991 और 1993 तक की तस्वीर देती है 【पाठ】। यह सबसे बड़ा 2026 का अद्यतन है — CIS एक और सदस्य खो चुका है।

देशस्थिति
★जार्जिया18 अगस्त 2009 को CIS से बाहर निकल गया — 2008 के रूस-जार्जिया संघर्ष के बाद (पाठ्यपुस्तक कहती है वह 1993 में शामिल हुआ — वह भी सही है, पर अब वह सदस्य नहीं है)
★उक्रेन19 मई 2018 को CIS के सभी वैधानिक निकायों में भागीदारी समाप्त — क्रीमिया के बाद। वह संस्थापक है, पर तकनीकी रूप से सदस्य-राज्य कभी नहीं रहा
★★मोल्दोवा (नया, 2026)मोल्दोवा की संसद ने 2 अप्रैल 2026 को CIS से अंतिम रूप से बाहर निकलने पर मतदान किया (101 में से 60 मत)। राष्ट्रपति मैया सांदू ने अस्वीकरण-आदेशों पर हस्ताक्षर किए, जो 8 अप्रैल 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हुए। वापसी 12 महीने बाद (अप्रैल 2027) प्रभावी होगी। कारण — “CIS के मूल सिद्धांत — क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की अनुल्लंघनीयता — अब सम्मानित नहीं हैं,” विशेषकर रूस-उक्रेन युद्ध और मोल्दोवा के अपने क्षेत्र (ट्रांसनिस्त्रिया) में रूसी सैन्य उपस्थिति के संदर्भ में 【प्रा/द्वि】
तुर्कमेनिस्तानअगस्त 2005 से सहयोगी सदस्य (associate member)
★वर्तमान पूर्ण सदस्य (अगस्त 2026)रूस, बेलारूस, कज़ाकिस्तान, किरगिज़स्तान, अज़रबैजान, आर्मेनिया, ताज़िकिस्तान, उज़्बेकिस्तान — मोल्दोवा प्रक्रियागत रूप से अभी सदस्य है पर बाहर जा रहा है

★★यह क्यों महत्वपूर्ण है: 1991 में जिस CIS का गठन 15 में से 11 गणराज्यों की सहमति से हुआ था, 2026 तक उसमें से तीन गणराज्य (जार्जिया, उक्रेन, मोल्दोवा) प्रभावी रूप से बाहर जा चुके हैं — और तीनों का बाहर निकलना रूस के साथ सैन्य या क्षेत्रीय टकराव से जुड़ा है। यह पाठ्यपुस्तक के ‘नए देशों का उदय — हरेक की अपनी स्वतंत्र पहचान और पसंद’ वाले निष्कर्ष का सबसे ताज़ा प्रमाण है 【पाठ】।

9.1 और विपरीत छोर पर — बेलारूस, जो CIS से बाहर नहीं, अंदर की ओर और गहरा गया★

अगर जार्जिया, उक्रेन और मोल्दोवा दूर जाने की मिसाल हैं, तो बेलारूस ठीक उलटी दिशा की मिसाल है — पूर्व सोवियत क्षेत्र में एकीकरण की सबसे गहरी मिसाल।

मदतथ्य
‘संघ राज्य’ (Union State)रूस और बेलारूस के बीच 1990 के दशक के अंत से चला अति-निकट एकीकरण-ढाँचा — आर्थिक और रक्षा-नीति दोनों में
★2024–26 एकीकरण कार्यक्रमजनवरी 2024 में पुतिन और लूकाशेंको द्वारा हस्ताक्षरित — आर्थिक नीति, विदेश-व्यापार और रक्षा-खरीद के 100 से अधिक कानूनों का सामंजस्य अनिवार्य
व्यापार2025 में द्विपक्षीय व्यापार 5.6% बढ़ा; 2021–25 के बीच कुल व्यापार 1.4 गुना बढ़ा
! सैन्य एकीकरणसितंबर 2025 — संयुक्त ‘ज़ापाद-2025’ सामरिक सैन्याभ्यास; दिसंबर 2025 — रूसी ‘ओरेश्निक’ मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की बेलारूस में तैनाती

★यह तुलना उत्तर में बहुत उपयोगी है: एक ही CIS ढाँचे के भीतर 2026 में एक साथ दो विपरीत दिशाएँ दिख रही हैं — मोल्दोवा/जार्जिया/उक्रेन दूर जा रहे हैं, बेलारूस और गहरा जुड़ रहा है। यही पाठ्यपुस्तक के निष्कर्ष को सिद्ध करता है कि हर उत्तराधिकारी राज्य की अपनी स्वतंत्र पहचान और चुनाव है 【पाठ】 — कुछ रूस से दूर गए, कुछ रूस के और पास।

10 · भारत-रूस — 2026 के ताज़ा आँकड़े (नयी SIPRI रिपोर्ट) 【T1–T2】★★

पाठ्यपुस्तक कहती है “भारत रूस के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार देश है।” 【पाठ】 मार्च 2026 में SIPRI ने नयी रिपोर्ट जारी की (आँकड़े 2021–25 के लिए) — यह पुरानी 2020–24 वाली रिपोर्ट से भी आगे की तस्वीर है।

10.1 रक्षा-व्यापार — SIPRI, मार्च 2026 (आँकड़े 2021–2025) ◆★★

मदतथ्य
भारत विश्व मेंदूसरा सबसे बड़ा हथियार-आयातक बना हुआ है; वैश्विक आयात में हिस्सा 8.2%
★★भारत के हथियार-आयात में रूस का हिस्सा2021–25 में 40% — 2011–15 में 70% था (यानी लगभग आधा)
★फ़्रांस का हिस्सा29% — तेज़ी से बढ़ा (114 राफ़ेल विमानों का लंबित सौदा)
★इज़राइल का हिस्सा15%
कुल आयात-मात्रा2016–20 चक्र की तुलना में 4% घटी — जबकि इसी दौर में वैश्विक हथियार-व्यापार 9.2% बढ़ा — भारत की घरेलू रक्षा-उत्पादन क्षमता का संकेत
वैश्विक संदर्भ2016–20 से 2021–25 के बीच वैश्विक हथियार-हस्तांतरण 9.2% बढ़ा — 2011–15 के बाद सबसे बड़ी वृद्धि, मुख्यतः यूरोप और उक्रेन को हथियार-आपूर्ति के कारण

★★रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा एकल आपूर्तिकर्ता है, पर उसका हिस्सा 2011–15 के 70% से घटकर 2021–25 में 40% रह गया है — यानी भारत बीते एक दशक में लगातार विविधीकरण कर रहा है, रूस से हटकर नहीं जा रहा।

10.2 पुतिन की भारत-यात्रा और व्यापार — दिसंबर 2025 ◇★★

मदतथ्य
★23वाँ भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन4–5 दिसंबर 2025, नयी दिल्ली — पुतिन की चार साल बाद पहली भारत-यात्रा
★★द्विपक्षीय व्यापारवित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 68.69 अरब डॉलर — मुख्यतः कच्चा तेल, उर्वरक और कोयला के रूसी निर्यात से
★2030 का लक्ष्यदोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का आर्थिक-सहयोग कार्यक्रम अंतिम रूप दिया
! व्यापार का असंतुलनतेल हटा दें तो कुल व्यापार लगभग 12 अरब डॉलर ही रह जाता है — भारत का निर्यात रूस को केवल लगभग 4.9 अरब डॉलर का, जबकि आयात लगभग 63.8 अरब डॉलर का
पुतिन का वक्तव्य“रूस तेल, गैस, कोयला — भारत के विकास के लिए ज़रूरी हर चीज़ का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता है”; “निर्बाध आपूर्ति” का वचन — अमरीकी प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद
निवेशरोसनेफ़्त सहित रूसी कंपनियों की भारतीय रिफाइनरी और खुदरा अवसंरचना में 25 अरब डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता

अन्य ठोस उदाहरण (पाठ्यपुस्तक के ‘सहयोग’ को मूर्त रूप देने के लिए):

  • भारत-सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि — 9 अगस्त 1971, बांग्लादेश युद्ध से ठीक पहले। (पाठ्यपुस्तक ‘1971 में मदद’ कहती है — संधि का नाम नहीं देती।)
  • क्रायोजेनिक इंजन: 1991 का सौदा; अमरीकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन बनाया — GSLV-D5, जनवरी 2014 में सफल।
  • कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (तमिलनाडु) — रूसी सहयोग से; पाठ्यपुस्तक के “परमाण्विक योजना” का सबसे बड़ा उदाहरण।

11 · नगरनो-कराबाख, 2025–26 — शांति-समझौता और ज़ंगेज़ुर/TRIPP गलियारा 【T2】★

पाठ्यपुस्तक इस विवाद का नाम एक पंक्ति में लेती है — “अज़रबैजान में यहाँ के कुछ स्थानीय अर्मेनियाई अलग होकर अर्मेनिया से मिलना चाहते हैं” 【पाठ】। वह विवाद 2023 में सैन्य रूप से समाप्त हो चुका था; 2025–26 में अब उसका राजनयिक समाधान बनता दिख रहा है।

चरणविवरण
2020 का युद्ध और सितंबर 2023अज़रबैजान का नगरनो-कराबाख पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण — लगभग सारी अर्मेनियाई आबादी क्षेत्र से पलायन कर गई
★★8 अगस्त 2025 — वाशिंगटनअर्मेनिया और अज़रबैजान के नेताओं ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रम्प की मध्यस्थता में शांति-समझौते के मसौदे पर आद्याक्षर (initial) किए
! अभी तक अहस्ताक्षरितमुख्य अड़चन — अज़रबैजान की शर्त कि अर्मेनिया अपने संविधान से नगरनो-कराबाख संबंधी क्षेत्रीय दावे का उल्लेख हटाए। अर्मेनिया में संवैधानिक जनमत-संग्रह 2026 के अंत या 2027 में संभावित
★★ज़ंगेज़ुर गलियारा / TRIPPअज़रबैजान इसे ‘ज़ंगेज़ुर गलियारा’ कहता है — अर्मेनिया के स्युनिक प्रांत से होकर अज़रबैजान को उसके विदेशी भू-भाग नख्चिवान और आगे तुर्की से जोड़ने वाला लगभग 44 किमी लंबा मार्ग। अर्मेनिया इसे संप्रभुता पर चुनौती मानकर अस्वीकार करता है और अपने प्रस्ताव को ‘शांति का चौराहा’ कहता है
★अमरीकी भूमिकाइस मार्ग के विकास और परिचालन का 99 वर्षों का पट्टा अमरीका को — ‘ट्रम्प रूट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ (TRIPP) नाम से

★★इससे T3.3 (राष्ट्रवाद बनाम अलगाववाद) और गहरा होता है: नगरनो-कराबाख का मामला बल से तय हुआ (2020, 2023), अब उसका राजनयिक समाधान भी बड़ी शक्तियों (अमरीका) की मध्यस्थता और भू-रणनीतिक हित से आ रहा है — ठीक वैसे ही जैसे पाठ्यपुस्तक कहती है कि मध्य एशिया और काकेशस “बाहरी ताकतों के अखाड़े” बन गए हैं 【पाठ】।

12 · जॉर्जिया-रूस संबंध, 2025–26 【T2】

पाठ्यपुस्तक कहती है — “जार्जिया में दो प्रांत स्वतंत्रता चाहते हैं और गृहयुद्ध लड़ रहे हैं” 【पाठ】। यह विवाद अनसुलझा है, और 2025–26 में रूस की पकड़ बढ़ी है, घटी नहीं।

पहलूविवरण
दिसंबर 2025रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जार्जिया के साथ राजनयिक संवाद फिर शुरू करने का कोई आधार नहीं
जार्जिया का रुख़प्रधानमंत्री इराकली कोबाख़िद्ज़े — जब तक मास्को अबख़ाज़िया और दक्षिण ओसेतिया की मान्यता वापस नहीं लेता, राजनयिक संबंध बहाल नहीं होंगे
★मई 2026पुतिन और दक्षिण ओसेतिया के वास्तविक (de facto) राष्ट्रपति अलान गागलोयेव ने ‘गहन मैत्रीपूर्ण सहयोग’ समझौते पर हस्ताक्षर किए — पहली बार रूसी नागरिक क्षेत्र में वैधानिक रूप से अधिकारी बन सकते हैं
! आधारभूत ढाँचे का एकीकरणअबख़ाज़िया में रूस-वित्तपोषित हवाई-अड्डे और ओचमचिरे बंदरगाह का नवीनीकरण; रूस से रेल-संपर्क की परियोजनाएँ
दिसंबर 2025जार्जिया की संसद ने ‘दक्षिण ओसेतिया की अस्थायी प्रशासन इकाई’ को समाप्त किया — रूस की पुरानी माँगों में से एक

★यह पाठ्यपुस्तक के 1990 के दशक के जॉर्जिया-वर्णन को 2026 में भी जीवित दिखाता है: वही दो प्रांत, वही गतिरोध — केवल अब रूस का नियंत्रण संस्थागत होता जा रहा है, अस्थायी संघर्ष नहीं रह गया।

13 · मध्य एशिया — महाशक्तियों की नयी प्रतिस्पर्धा 【T2–T3】

पाठ्यपुस्तक कहती है — “रूस इन राज्यों को अपना निकटवर्ती ‘विदेश’ मानता है” और “चीन के हित भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं” 【पाठ】। यह प्रतिस्पर्धा 2025-26 में तेज़ ही हुई है, और अब उसमें अमरीका और यूरोपीय संघ भी सक्रिय भागीदार हैं।

शक्ति2025–26 में गतिविधि
★★चीनजून 2025 — अस्ताना (कज़ाकिस्तान) में ‘चीन-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन’ — दीर्घकालिक सहयोग औपचारिक। ★चीन-किरगिज़स्तान-उज़्बेकिस्तान रेलवे का निर्माण 2025 में शुरू — काशगर को आंदिजान से जोड़ेगा, रूस-केंद्रित मार्गों का विकल्प
★अमरीकाC5+1 शिखर सम्मेलन — 6 नवंबर, वाशिंगटन — पाँचों मध्य-एशियाई देशों के साथ; महत्वपूर्ण खनिज, आतंकवाद-निरोध, सीमा-सुरक्षा पर सहयोग; 2026 में सभी पाँच देशों की यात्रा का वादा
यूरोपीय संघअप्रैल 2025 — समरकंद में पहला EU-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन — औपचारिक रणनीतिक साझेदारी और 13.2 अरब डॉलर के निवेश-पैकेज की घोषणा
! रूसव्यापारिक प्रभुत्व घटा (सोवियत-पश्चात व्यापार-हिस्सा 2015 तक 16% तक गिर चुका था), पर CSTO और द्विपक्षीय सुरक्षा-समझौतों के ज़रिए मुख्य बाहरी सुरक्षा-शक्ति बना हुआ है

★★निष्कर्ष: पाठ्यपुस्तक ने 2007 में रूस और चीन को इस क्षेत्र की मुख्य बाहरी शक्तियाँ बताया था 【पाठ】। 2026 में एक तीसरा और चौथा खिलाड़ी जुड़ चुका है — अमरीका (C5+1) और यूरोपीय संघ। पाँचों मध्य-एशियाई गणराज्य अब “बहु-सदिश” (multi-vector) नीति अपनाकर चारों शक्तियों से एक साथ जुड़े हुए हैं — ठीक वैसा ही जैसा पाठ्यपुस्तक ने भविष्यवाणी की थी: “इन देशों ने रूस के साथ अपने मजबूत रिश्ते को जारी रखा और पश्चिमी देशों, अमरीका, चीन तथा अन्य देशों के साथ संबंध बनाए” 【पाठ】।

14 · T3 — पाठ्यपुस्तक का एक तथ्य जो बाहरी स्रोतों से मेल नहीं खाता (ताज़िकिस्तान) 【T3】ध्यान

पाठ्यपुस्तक कहती है: “ताज़िकिस्तान में दस वर्षों यानी 2001 तक गृहयुद्ध चला।” 【पाठ】

बाहरी स्रोत कहते हैं: ताज़िक गृहयुद्ध मई 1992 में शुरू हुआ और 27 जून 1997 को मास्को में राष्ट्रपति रहमोन तथा विपक्षी नेता नूरी के बीच सामान्य शांति समझौते से समाप्त हुआ — यानी लगभग पाँच वर्ष, दस नहीं। मृतकों की संख्या 1,50,000 से अधिक आँकी जाती है। ◇

! परीक्षा में क्या लिखें? पाठ्यपुस्तक का ही उत्तर — “दस वर्ष, 2001 तक।” बोर्ड परीक्षा पाठ्यपुस्तक पर आधारित है। यह विसंगति केवल जानकारी के लिए दर्ज है — संभवतः पाठ्यपुस्तक 1997 के शांति समझौते के बाद भी जारी अस्थिरता, विसैन्यीकरण की धीमी प्रक्रिया और छिटपुट संघर्ष को गिन रही है, जो 2000 के दशक की शुरुआत तक चला।

15 · T3 — ‘शीतयुद्ध सचमुच खत्म हुआ?’ — पाठ का दावा और 2026 की दुनिया 【T3】

पाठ्यपुस्तक लिखती है — “शीतयुद्ध के समाप्त होने से हथियारों की होड़ भी समाप्त हो गई और एक नई शांति की संभावना का जन्म हुआ।” 【पाठ】

यह वाक्य 2006–07 के भारत की समझ है। 2026 में इस पर चार सवाल खड़े होते हैं —

  1. नाटो का विस्तार जारी रहा — 1999, 2004, और फिर 2023 में फ़िनलैंड, 2024 में स्वीडन। जिस गठबंधन का प्रतिद्वंद्वी भंग हो चुका था, वह बढ़ता ही गया।
  2. हथियारों की होड़ लौटी — INF संधि 2019 में समाप्त हो गई; SIPRI के अनुसार 2016–20 से 2021–25 के बीच वैश्विक हथियार-हस्तांतरण 9.2% बढ़ा — मुख्यतः यूरोप में उक्रेन-युद्ध के कारण।
  3. ★★वह शांति सशस्त्र संघर्ष में बदल गई — फरवरी 2022 से रूस-उक्रेन युद्ध जारी है। 2026 में अप्रैल और मई में अस्थायी संघर्ष-विराम (ईस्टर 32-घंटे, विजय-दिवस के आसपास) हुए, पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाया और पूर्ण युद्धविराम नहीं टिका। जनवरी 2026 में पेरिस में फ़्रांस-ब्रिटेन नेतृत्व वाले ‘इच्छुकों के गठबंधन’ (Coalition of the Willing) ने युद्धविराम के बाद सक्रिय होने वाली ‘क़ानूनी रूप से बाध्यकारी गारंटियों’ पर सहमति जताई।
  4. ‘एकध्रुवीयता’ स्थायी नहीं रही — चीन का उभार और क्षेत्रीय शक्तियों की वापसी ने वह बहुध्रुवीयता वापस ला दी है जिसकी बात पाठ्यपुस्तक भारत और रूस के ‘साझे सपने’ के रूप में करती है 【पाठ】।
  5. ★रूस का ‘पूँजीवादी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में समाहित होना’ भी स्थायी नहीं निकला — पाठ्यपुस्तक कहती है कि विघटन के बाद “पूँजीवादी अर्थव्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभुत्वशाली अर्थव्यवस्था” बनी और विश्व बैंक व IMF जैसी संस्थाएँ रूस सहित इन देशों की सलाहकार बन गईं 【पाठ】। यह प्रक्रिया पूरी भी हुई और उलटी भी —
वर्षघटना
1997रूस को G-7 में शामिल कर ‘G-8’ बनाया गया — पश्चिमी आर्थिक व्यवस्था में रूस के औपचारिक एकीकरण का शिखर
★अगस्त 2012रूस विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 156वाँ सदस्य बना — 18 वर्षों की वार्ता के बाद
!! मार्च 2014क्रीमिया के विलय के बाद रूस को G-8 से निलंबित किया गया — गठबंधन फिर ‘G-7’ बन गया, और वह निलंबन आज तक जारी है
! 2022 सेयूक्रेन-युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी देशों के व्यापक प्रतिबंध — SWIFT से कई रूसी बैंकों का बहिष्कार, संपत्तियाँ फ़्रीज़

★★यह पूरा चक्र पाठ्यपुस्तक के निष्कर्ष को उलट कर दिखाता है: 1991 में रूस पूँजीवादी विश्व-व्यवस्था में शामिल हुआ (G-8, WTO)। 2014 और 2022 में उसी व्यवस्था ने उसे बाहर कर दिया। “अकेली महाशक्ति का दबदबा” 【पाठ】 न तो स्थायी निकला, न वह एकीकरण जो उसके साथ आया था।

यही T3 का सबसे उपयोगी निबंध-बिंदु है: “1991 ने दो ध्रुवीयता समाप्त की, पर शक्ति-प्रतिस्पर्धा नहीं — और 2022 के बाद तो यूरोप में सीधा सैन्य संघर्ष तक लौट आया है।”

16 · T3 — राष्ट्रवाद बनाम अलगाववाद — कार्टून का असली वज़न 【T3】

पाठ्यपुस्तक का कार्टून-संवाद — “जो हमारे साथ है वह राष्ट्रवाद है, जो हमारे खिलाफ है वह अलगाववाद है।” 【पाठ】

इस वाक्य की परीक्षा कई जगह हुई —

क्षेत्रकैसे सुलझा
बाल्टिक (1990–91)स्वतंत्रता मिली — क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली और सोवियत केंद्र कमज़ोर था
चेचन्यादो युद्ध — 1994–96 और 1999 से — रूस के भीतर ही रहा; कोई अंतर्राष्ट्रीय मान्यता नहीं। ! 2025–26 में भी चेचन्या रूसी संघ के भीतर है, पर नेता रमज़ान कादिरोव को असाधारण आंतरिक स्वायत्तता प्राप्त है — मास्को और ग्रोज़्नी के बीच दो दशकों पुराना अलिखित समझौता, जिसका भविष्य कादिरोव के स्वास्थ्य और उत्तराधिकार को लेकर अनिश्चित माना जा रहा है
नगरनो-कराबाख1990 के दशक का युद्ध, फिर 2020 का युद्ध, सितंबर 2023 में अज़रबैजान का पूर्ण नियंत्रण, और 2025 में वाशिंगटन में शांति-समझौते का आद्याक्षर — तीन दशक बाद निर्णय पहले बल से, अब कूटनीति से

निष्कर्ष: भेद नैतिक नहीं, शक्ति-संबंधी है — कौन जीता, किसे मान्यता मिली। यही कार्टून कह रहा है, और नगरनो-कराबाख का 2025–26 का घटनाक्रम इसे फिर सिद्ध करता है — अंततः निर्णायक सैन्य बढ़त वाले पक्ष की शर्तों पर ही समझौता हो रहा है।

17 · T3 — युगोस्लाविया और कोसोवो — पूरी तस्वीर 【T3】

पाठ्यपुस्तक: “जातीय संघर्ष ने गृहयुद्ध का रूप लिया और नाटो को हस्तक्षेप करना पड़ा; बमबारी हुई।” 【पाठ】

पूरी तस्वीर —

  • 1991–95 — स्लोवेनिया, क्रोएशिया, बोस्निया-हर्जेगोविना की स्वतंत्रता; बोस्निया में सबसे भीषण युद्ध।
  • जुलाई 1995 — स्रेब्रेनित्सा नरसंहार, जिसे अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप का पहला ‘नरसंहार’ (genocide) माना।
  • दिसंबर 1995 — डेटन समझौता (Dayton Accords) से बोस्निया का युद्ध समाप्त।
  • 1999 — कोसोवो को लेकर नाटो की बमबारी (पाठ्यपुस्तक जिसका संकेत देती है); कोसोवो ने 2008 में स्वतंत्रता घोषित की।
  • ★मान्यता, 2026 तक: लगभग 100–120 देशों ने कोसोवो को मान्यता दी है — विश्वसनीय अनुमान लगभग 115 UN-सदस्य देश — पर सर्बिया इस गिनती को चुनौती देता है और कुछ देशों से मान्यता वापस लेने का अभियान चला रहा है, जिससे संख्या पर अस्पष्टता बनी रहती है। 5 यूरोपीय संघ के सदस्य देश (स्पेन, स्लोवाकिया, साइप्रस, ग्रीस, रोमानिया) आज भी मान्यता नहीं देते।

यह भारत के लिए क्यों मायने रखता है: भारत ने एकतरफ़ा स्वतंत्रता-घोषणा को मान्यता देने का विरोध किया है — क्योंकि उसका सीधा संबंध कश्मीर पर उसके अपने रुख़ से है। भारत ने कोसोवो को आज तक मान्यता नहीं दी है, और यह रुख़ 2026 में भी अपरिवर्तित है।

18 · T3 — ‘शॉक थेरेपी’ का बचाव भी पढ़िए (संतुलित दृष्टि) 【T3】

पाठ्यपुस्तक का निष्कर्ष पूरी तरह आलोचनात्मक है 【पाठ】। मुख्य समर्थक तर्क भी जान लीजिए, क्योंकि मत-आधारित प्रश्न में दोनों पक्ष अंक दिलाते हैं —

समर्थन मेंविरोध में
पोलैंड की मंदी केवल 2 वर्ष चली और वह मध्य यूरोप की सबसे सफल संक्रमण-कथा बनारूस में मंदी लंबी और गहरी — 1999 का GDP 1989 से नीचे
500% से ऊपर की मुद्रास्फीति रोकने के लिए तेज़ कदम अनिवार्य थेतेज़ी ने ही ‘गराज-सेल’ और माफिया वर्ग को जन्म दिया
सामाजिक सुरक्षा-जाल मूल योजना का पाँचवाँ स्तंभ थारूस में यही स्तंभ लागू ही नहीं हुआ
आधे-अधूरे सुधार भ्रष्टाचार को और बढ़ातेचीन ने आधे-अधूरे सुधार से ही बिना मंदी के वृद्धि पाई

अंतर कहाँ पड़ा? समर्थक कहते हैं ‘शॉक थेरेपी लागू करने के तरीके’ में; आलोचक कहते हैं ‘मॉडल में ही’। यही आज भी बहस का केंद्र है।

19 · प्रतियोगी परीक्षाओं के शब्द 【T2–T3】

पदअर्थ
डिटांत (Détente)1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य का दौर — पाठ्यपुस्तक ब्रेझनेव के बॉक्स में ‘तनाव की कमी का दौर’ कहती है 【पाठ】
मख़मली क्रांति (Velvet Revolution)चेकोस्लोवाकिया, नवंबर–दिसंबर 1989 — बिना हिंसा के साम्यवादी शासन का अंत
मख़मली तलाक़ (Velvet Divorce)1 जनवरी 1993 — चेकोस्लोवाकिया का शांतिपूर्ण विभाजन (पाठ्यपुस्तक जिसे ‘शांतिपूर्वक बँटा’ कहती है) 【पाठ】
नोमेनक्लातुरा (Nomenklatura)सोवियत विशेषाधिकार-प्राप्त पार्टी अधिकारी वर्ग — पाठ्यपुस्तक के “‘पार्टी’ अधिकारियों को विशेषाधिकार” वाले वाक्य का नाम 【पाठ】
ओलिगार्क (Oligarch)निजीकरण से रातोंरात बने अति-धनी उद्योगपति — पाठ्यपुस्तक के ‘माफिया वर्ग’ का आर्थिक चेहरा 【पाठ】
निकट विदेश (Near Abroad)पाठ्यपुस्तक में है — रूस का पूर्व-सोवियत क्षेत्र के लिए पद 【पाठ】
रंगीन क्रांतियाँ (Colour Revolutions)जार्जिया 2003 (‘गुलाब’), यूक्रेन 2004 (‘नारंगी’), किरगिज़स्तान 2005 (‘ट्यूलिप’) — पाठ्यपुस्तक इन्हें बिना नाम दिए “मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने के आंदोलन” कहती है 【पाठ】
★ज़ंगेज़ुर गलियारा / TRIPPअज़रबैजान-नख्चिवान-तुर्की संपर्क-मार्ग, अर्मेनिया की ज़मीन से होकर — 2025 शांति-समझौते का केंद्रीय मुद्दा
बुडापेस्ट ज्ञापन (Budapest Memorandum)1994 — परमाणु हथियार त्याग के बदले क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी
बहु-सदिश नीति (Multi-vector policy)मध्य-एशियाई गणराज्यों की एक साथ कई शक्तियों से जुड़ने की रणनीति

20 · संक्षिप्ताक्षर-कोश 【T1–T2】

संस्थाएँ और गठबंधन

संक्षेपपूरा नामहिंदी / टिप्पणी
★★USSRUnion of Soviet Socialist Republicsसोवियत समाजवादी गणराज्य संघ, 1922–1991
★★CISCommonwealth of Independent Statesस्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल, दिसंबर 1991
★NATONorth Atlantic Treaty Organizationउत्तर अटलांटिक संधि संगठन, 1949; 32 सदस्य
★Warsaw PactWarsaw Treaty Organizationवारसा संधि संगठन, 1955–1991
CSTOCollective Security Treaty Organizationसामूहिक सुरक्षा संधि संगठन — रूस-नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन
★C5+1Central Asia 5 + United Statesपाँच मध्य-एशियाई देश + अमरीका का सहयोग-मंच
CPSUCommunist Party of the Soviet Unionसोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी
KGBKomitet Gosudarstvennoy Bezopasnostiसोवियत सुरक्षा और गुप्तचर एजेंसी

संधियाँ और समझौते

संक्षेपपूरा नामटिप्पणी
★INF TreatyIntermediate-Range Nuclear Forces Treaty1987, समाप्त 2019
START IStrategic Arms Reduction Treaty1991
★Budapest Memorandum—1994 — परमाणु त्याग बदले सुरक्षा-गारंटी
★TRIPPTrump Route for International Peace and Prosperityज़ंगेज़ुर गलियारे का अमरीकी नाम, 2025

आर्थिक और सामाजिक अवधारणाएँ

संक्षेप / पदअर्थ
★★Shock Therapyशॉक थेरेपी — विश्व बैंक और IMF-निर्देशित पूँजीवाद-संक्रमण मॉडल
Gradualismक्रमिकतावाद — चीन-वियतनाम मॉडल, कोई मंदी नहीं
★Perestroikaपेरेस्त्रोइका — पुनर्रचना
★Glasnostग्लासनोस्त — खुलापन
Nomenklaturaनोमेनक्लातुरा — विशेषाधिकार-प्राप्त वर्ग
Oligarchओलिगार्क — निजीकरण से बने अति-धनी
IMF / WBअंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष / विश्व बैंक
★SIPRIStockholm International Peace Research Institute — स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान, हथियार-व्यापार आँकड़ों का प्रमुख स्रोत

21 · अभ्यास प्रश्न 【सभी स्तर】

1 अंक

  1. वारसा समझौता कब और कहाँ बना, और कब भंग हुआ? — 14 मई 1955, वारसा (पोलैंड) — भंग 1 जुलाई 1991, प्राग में
  2. वारसा समझौता किसके जवाब में बना था? — नाटो के, विशेषकर पश्चिमी जर्मनी के नाटो में शामिल होने के बाद
  3. नाटो के आज कितने सदस्य हैं? — 32
  4. नाटो का 31वाँ और 32वाँ सदस्य कौन, कब? — फ़िनलैंड — 4 अप्रैल 2023; स्वीडन — 7 मार्च 2024
  5. बेलावेज़ा समझौते पर किन तीन नेताओं ने हस्ताक्षर किए? — बोरिस येल्तसिन (रूस), स्तानिस्लाव शुशकेविच (बेलारूस), लिओनिद क्रावचुक (उक्रेन) — 8 दिसंबर 1991
  6. अल्मा-अता प्रोटोकॉल पर कितने गणराज्यों ने हस्ताक्षर किए और कौन नहीं था? — 11 — जार्जिया को छोड़कर। 21 दिसंबर 1991
  7. सोवियत संघ के पंद्रह गणराज्यों में से तीन ‘स्लाव’ गणराज्य कौन-से हैं? — रूस, उक्रेन, बेलारूस
  8. ‘बाल्टिक शृंखला’ क्या थी? — 23 अगस्त 1989 — तीन बाल्टिक देशों के लगभग 20 लाख लोगों की, लगभग 675 किमी लंबी मानव-शृंखला
  9. पोलैंड की शॉक थेरेपी योजना का नाम और तिथि? — बाल्सरोविच योजना — 1 जनवरी 1990; मुख्य सलाहकार जेफ़री सैक्स
  10. गोर्बाचेव को नोबेल शांति पुरस्कार कब मिला? — 1990
  11. ★SIPRI (मार्च 2026, आँकड़े 2021–25) के अनुसार भारत के हथियार-आयात में रूस का हिस्सा कितना है? — 40% — 2011–15 के 70% से घटकर
  12. भारत वैश्विक हथियार-आयात में किस स्थान पर है? — दूसरे — वैश्विक हिस्सा 8.2%
  13. भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में कितना रहा? — रिकॉर्ड 68.69 अरब डॉलर
  14. 2030 तक भारत-रूस व्यापार का लक्ष्य क्या है? — 100 अरब डॉलर
  15. जार्जिया CIS से कब बाहर हुआ? — 18 अगस्त 2009
  16. ★मोल्दोवा ने CIS से बाहर निकलने का निर्णायक मतदान कब किया? — 2 अप्रैल 2026
  17. ‘मख़मली तलाक़’ किसे कहते हैं? — 1 जनवरी 1993 को चेकोस्लोवाकिया के शांतिपूर्ण विभाजन को
  18. अर्मेनिया-अज़रबैजान शांति-समझौते पर आद्याक्षर कहाँ और कब हुए? — वाशिंगटन, 8 अगस्त 2025
  19. ज़ंगेज़ुर गलियारे को अमरीका किस नाम से पुकारता है? — TRIPP (Trump Route for International Peace and Prosperity)
  20. INF संधि कब समाप्त हुई? — 2019 में अमरीका के बाहर निकलने से
  21. रूस को G-7 में शामिल करके G-8 कब बनाया गया, और उसे कब निलंबित किया गया? — 1997 में शामिल; मार्च 2014 में क्रीमिया-विलय के बाद निलंबित
  22. रूस WTO का सदस्य कब बना? — अगस्त 2012, 156वाँ सदस्य
  23. बेलारूस-रूस ‘संघ राज्य’ का 2024-26 एकीकरण कार्यक्रम कब हस्ताक्षरित हुआ? — जनवरी 2024
  24. कोसोवो को आज लगभग कितने देशों की मान्यता प्राप्त है, और भारत का रुख़ क्या है? — लगभग 100-120 (अनुमानित ~115); भारत मान्यता नहीं देता

2–4 अंक

  1. बेलावेज़ा समझौता और अल्मा-अता प्रोटोकॉल में अंतर स्पष्ट कीजिए। दो अलग दस्तावेज़ों की ज़रूरत क्यों पड़ी?
  2. शॉक थेरेपी और क्रमिकतावाद (गैज्युअलिज़्म) की तुलना कीजिए। किसका प्रदर्शन बेहतर रहा और क्यों?
  3. 2026 तक CIS की सदस्यता में क्या बदलाव आए हैं? तीनों बाहर निकलने वाले देशों में क्या समानता है?
  4. SIPRI के 2026 के आँकड़ों के आधार पर भारत के रक्षा-आयात में हो रहे विविधीकरण को समझाइए।
  5. नगरनो-कराबाख विवाद का घटनाक्रम 1990 के दशक से 2025-26 तक बताइए।

6 अंक

  1. “1991 ने दो ध्रुवीयता समाप्त की, पर शक्ति-प्रतिस्पर्धा नहीं” — इस कथन की 2026 के भू-राजनीतिक घटनाक्रम (रूस-यूक्रेन युद्ध, नाटो-विस्तार, नगरनो-कराबाख) के आलोक में समीक्षा कीजिए।
  2. राष्ट्रवाद और अलगाववाद के बीच भेद पर पाठ्यपुस्तक के कार्टून का विश्लेषण कीजिए और बाल्टिक, चेचन्या तथा नगरनो-कराबाख के उदाहरणों से इसे सिद्ध कीजिए।

22 · स्रोत-सूची

प्राथमिक स्रोत ◆

द्वितीयक स्रोत ◇


अंतिम अनुस्मारक: ! बोर्ड परीक्षा में केवल पाठ्यपुस्तक का उत्तर लिखिए। जहाँ यह दस्तावेज़ पाठ्यपुस्तक से भिन्न है (जैसे खंड 14 — ताज़िकिस्तान), वहाँ पाठ्यपुस्तक ही मान्य है। यह दस्तावेज़ समझ बढ़ाने, प्रतियोगी परीक्षाओं और चर्चा के लिए है। इसे “100% सटीक” न मानें — जहाँ स्रोत परस्पर-विरोधी थे (जैसे कोसोवो-मान्यता की ठीक संख्या), वहाँ सीमा स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है।