Chapter 7क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

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★यह दस्तावेज़ शब्दशः बोलने के लिए है। जो लिखा है, वही बोलिए। जहाँ (कोष्ठक में तिरछा) लिखा है, वह आपके लिए निर्देश है — बोलना नहीं है।

कुल समय: लगभग 6 कालांश × 12–15 मिनट श्रुतलेख = विद्यार्थी की कॉपी में पूरा अध्याय। गति: एक वाक्य बोलिए → तीन सेकंड रुकिए → अगला वाक्य। हर बिंदु के बाद पाँच सेकंड।

🎙 कालांश 1 · क्षेत्र और राष्ट्रध्यान

(शुरू करने से पहले बोर्ड पर शीर्षक लिखिए: अध्याय 7 — क्षेत्रीय आकांक्षाएँ)

बोलिए:

“कॉपी खोलिए। शीर्षक लिखिए — अध्याय सात। क्षेत्रीय आकांक्षाएँ।

नीचे उपशीर्षक लिखिए — एक। क्षेत्र और राष्ट्र।

लिखिए, बिंदु एक।

इस अध्याय के पहले पन्ने पर उत्तराखंड आंदोलन का एक पोस्टर है, जिस पर एक ही माँग सात भाषाओं में लिखी है।

(तीन सेकंड रुकिए)

बिंदु दो।

इससे पता चलता है कि आंदोलन पूरे देश से बात कर रहा था, देश के खिलाफ़ नहीं।

(रुकिए)

अब एक वाक्य आ रहा है जो पूरे अध्याय की नींव है। इसे उद्धरण-चिह्न में लिखिए और रेखांकित कीजिए।

उद्धरण खुलता है — क्षेत्रीय आकांक्षाओं का राष्ट्रीय भावनाओं से कोई बुनियादी टकराव नहीं है — उद्धरण बंद।

(इसे दो बार बोलिए। फिर पाँच सेकंड रुकिए।)

अब लिखिए — भारत सरकार का नज़रिया — चार बातें। और नीचे एक से चार तक क्रम में लिखिए।

एक। राष्ट्र का मतलब यह नहीं है कि क्षेत्र को नकार दिया जाए।

(रुकिए)

दो। क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतांत्रिक राजनीति का अभिन्न अंग हैं।

(रुकिए)

तीन। क्षेत्रीय मुद्दों और माँगों का उठना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्वाभाविक परिणति है।

(रुकिए)

चार। इन्हें दबाने के बजाय लोकतांत्रिक बातचीत से सुलझाना बेहतर है।

(पाँच सेकंड रुकिए)

अब एक और उद्धरण लिखिए।

उद्धरण खुलता है — भारत का नज़रिया यूरोप के कई देशों से अलग रहा, जहाँ सांस्कृतिक विभिन्नता को राष्ट्र की एकता के लिए खतरे के रूप में देखा गया — उद्धरण बंद।

(रुकिए)

अब आख़िरी बात इस कालांश की। लिखिए — अस्सी के दशक का चक्र। और तीर के निशान के साथ लिखिए —

माँग — तीर — हथियार — तीर — सरकारी जवाबी कार्रवाई — तीर — राजनीतिक प्रक्रिया अवरुद्ध — तीर — बातचीत — तीर — समझौता।

(रुकिए)

और नीचे लिखिए —

यह चक्र चार जगह दोहराया गया — असम, पंजाब, मिज़ोरम और जम्मू-कश्मीर।”

🎙 कालांश 2 · तमिलनाडुध्यान

बोलिए:

“उपशीर्षक लिखिए — दो। तमिलनाडु और द्रविड़ आंदोलन।

बिंदु एक।

द्रविड़ आंदोलन भारत के क्षेत्रीय आंदोलनों में सबसे ताकतवर आंदोलन था। यह क्षेत्रीयतावादी भावनाओं की सर्वप्रथम और सबसे प्रबल अभिव्यक्ति थी।

(रुकिए)

बिंदु दो। इसका नारा लिखिए, उद्धरण-चिह्न में —

उत्तर हर दिन बढ़ता जाए, दक्षिण दिन-दिन घटता जाए।

(रुकिए)

अब ध्यान दीजिए। जो वाक्य अब आ रहा है, वह इस पूरे अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण वाक्य है। इसे उद्धरण-चिह्न में लिखिए, रेखांकित कीजिए, और हाशिये पर दो तारे बनाइए।

(अब धीरे बोलिए)

उद्धरण खुलता है — हालाँकि आंदोलन के नेतृवर्ग के एक हिस्से की आकांक्षा एक स्वतंत्र द्रविड़ राष्ट्र बनाने की थी…

(रुकिए)

…पर आंदोलन ने कभी सशस्त्र संघर्ष की राह नहीं अपनायी।

(रुकिए)

नेतृत्व ने सार्वजनिक बहसों और चुनावी मंच का ही इस्तेमाल किया — उद्धरण बंद।

(दस सेकंड रुकिए। फिर कहिए:)

यह वाक्य दोबारा पढ़िए। इसमें दो बातें हैं — आकांक्षा अलगाव की थी, पर तरीक़ा लोकतांत्रिक रहा। आकांक्षा और तरीक़ा — दो अलग चीज़ें हैं। यह हाशिये पर लिख लीजिए।

(रुकिए)

अब लिखिए — पेरियार।

पेरियार ई.वी. रामास्वामी नायकर ने उन्नीस सौ पच्चीस में आत्मसम्मान आंदोलन शुरू किया। वे जस्टिस पार्टी से जुड़े और बाद में द्रविड़ कड़गम बनाया। उन्होंने ब्राह्मणवाद, हिंदी थोपे जाने और उत्तर भारतीय वर्चस्व — तीनों का विरोध किया।

(रुकिए)

अब लिखिए — डीएमके की तीन-सूत्री माँगें। एक से तीन क्रम में —

एक। कल्लाकुडी का नाम बदलकर डालमियापुरम रखने का विरोध।

दो। तमिल संस्कृति के इतिहास को पाठ्यक्रम में जगह।

तीन। शिल्पकर्म शिक्षा कार्यक्रम हटाने की माँग।

(रुकिए)

अब तीन तारीख़ें लिखिए —

उन्नीस सौ पैंसठ — हिंदी-विरोधी आंदोलन। उन्नीस सौ सड़सठ — डीएमके सत्ता में आई। उन्नीस सौ छियानबे से — केंद्र की हर सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में कोई एक द्रविड़ दल शामिल रहा है।

(रुकिए)

और अंत में निष्कर्ष, उद्धरण-चिह्न में —

उद्धरण खुलता है — तमिलनाडु की राजनीति क्षेत्रवाद और राष्ट्रवाद के बीच सहकारिता की भावना का अच्छा उदाहरण पेश करती है — उद्धरण बंद।”

🎙 कालांश 3 · जम्मू और कश्मीरध्यान

(शुरू करने से पहले बोलिए — बिना नोट कराए:)

“एक ज़रूरी बात पहले। यह अध्याय पाँच अगस्त दो हज़ार उन्नीस तक अद्यतन है। जम्मू-कश्मीर अब राज्य नहीं है, केंद्र शासित प्रदेश है। आपके पास अगर कोई पुरानी गाइड है, तो वह इस अध्याय के लिए ग़लत होगी। सावधान रहिए।”

बोलिए:

“उपशीर्षक लिखिए — तीन। जम्मू और कश्मीर।

सबसे पहले एक सारणी बनाइए। दो स्तंभ — क्षेत्र और सामाजिक बुनावट। तीन पंक्तियाँ।

पहली पंक्ति। जम्मू। बुनावट — हिंदू, मुसलमान और सिख। मिली-जुली आबादी। अलग-अलग भाषाएँ।

(रुकिए)

दूसरी पंक्ति। कश्मीर। बुनावट — कश्मीरी बोलने वाले मुसलमानों का बहुमत, और एक छोटी हिंदू आबादी।

(रुकिए)

तीसरी पंक्ति। लद्दाख। बुनावट — पहाड़ी इलाक़ा, बहुत कम आबादी। बौद्ध और मुसलमान लगभग बराबर-बराबर।

(पाँच सेकंड रुकिए)

अब लिखिए — सत्रह सौ नहीं, उन्नीस सौ सैंतालीस। (हँसकर सुधारिए, बच्चे ध्यान से लिखेंगे)

महाराजा हरि सिंह न भारत में मिलना चाहते थे, न पाकिस्तान में। वे स्वतंत्र दर्जा चाहते थे।

(रुकिए)

पाकिस्तान का दावा था कि मुस्लिम-बहुल होने के नाते कश्मीर उसका है।

(रुकिए)

पर कश्मीर के लोगों का नज़रिया दोनों से अलग था। और अब उद्धरण लिखिए —

उद्धरण खुलता है — उन्होंने सोचा कि सबसे पहले वे कश्मीरी हैं। क्षेत्रीय अभिलाषा का यह मुद्दा कश्मीरियत कहलाता है — उद्धरण बंद।

(रुकिए। ‘कश्मीरियत’ शब्द बोर्ड पर लिखिए।)

अब लिखिए — अक्तूबर उन्नीस सौ सैंतालीस।

पाकिस्तान की शह पर कबायली घुसपैठ हुई। महाराजा ने भारत से सैनिक सहायता माँगी। भारत ने मदद दी और साथ ही विलय प्रपत्र पर हस्ताक्षर हुए।

(रुकिए)

अब लिखिए — इक्कीस अप्रैल उन्नीस सौ अड़तालीस। संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव — तीन चरण।

एक। पाकिस्तान अपने नागरिकों को वापस बुलाए। दो। भारत अपनी फ़ौज न्यूनतम स्तर तक घटाए। तीन। जनमत संग्रह कराया जाए।

(रुकिए)

और नीचे लिखिए — पर इस प्रस्ताव के अंतर्गत कोई प्रगति न हो सकी।

(रुकिए)

अब एक और सारणी। दो स्तंभ। शीर्षक — अनुच्छेद तीन सौ सत्तर पर दो विपरीत प्रतिक्रियाएँ।

पहला स्तंभ — भारत के बाक़ी हिस्सों का एक वर्ग। उसने कहा — विशेष दर्जा पूर्ण एकीकरण में बाधा है, इसे हटाया जाए।

(रुकिए)

दूसरा स्तंभ — अधिकांश कश्मीरी। उन्होंने कहा — तीन सौ सत्तर पर्याप्त नहीं है; इसने वह स्वायत्तता नहीं दी जिसका वादा था।

(रुकिए)

ध्यान दीजिए — एक ही प्रावधान, और दोनों पक्ष उससे नाख़ुश थे, पर बिल्कुल उलटे कारणों से। यह हाशिये पर लिख लीजिए।

(रुकिए)

अब लिखिए — कश्मीरियों की तीन शिकायतें।

एक। जनमत संग्रह का वादा कभी पूरा नहीं हुआ। दो। अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के तहत मिली स्वायत्तता व्यवहार में घटती चली गई। तीन। लोकतंत्र वैसा नहीं फल-फूल सका जैसा देश के बाक़ी हिस्सों में।

(पाँच सेकंड रुकिए)

अब समय-रेखा लिखिए। साल और घटना, आमने-सामने।

उन्नीस सौ तिरपन — शेख अब्दुल्ला पद से हटाए गए और गिरफ़्तार। उन्नीस सौ पैंसठ — पदनाम बदले; गुलाम मोहम्मद सादिक पहले मुख्यमंत्री बने। उन्नीस सौ चौहत्तर — इंदिरा गाँधी और शेख अब्दुल्ला के बीच समझौता। उन्नीस सौ बयासी — शेख का निधन; फ़ारूक़ अब्दुल्ला उत्तराधिकारी। उन्नीस सौ सतासी — धाँधली के आरोपों वाला चुनाव। उन्नीस सौ नवासी — उग्रवाद की शुरुआत। दो हज़ार दो — निष्पक्ष चुनाव; पीडीपी-कांग्रेस सरकार। अप्रैल दो हज़ार सोलह — महबूबा मुफ़्ती, राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री। जून दो हज़ार अठारह — राष्ट्रपति शासन।

(रुकिए)

और अब सबसे महत्वपूर्ण तारीख़। इसे बड़े अक्षरों में लिखिए।

पाँच अगस्त दो हज़ार उन्नीस — जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम दो हज़ार उन्नीस। अनुच्छेद तीन सौ सत्तर समाप्त। राज्य दो केंद्र शासित प्रदेशों में बँटा — जम्मू एवं कश्मीर, तथा लद्दाख।

(दस सेकंड रुकिए)

हाशिये पर एक बात और लिख लीजिए — उन्नीस सौ सतासी का चुनाव निर्णायक मोड़ इसलिए है, क्योंकि उसके बाद यह भरोसा टूटा कि मतपत्र से बदलाव संभव है। और जब चुनाव पर भरोसा टूटता है, तो जो विकल्प बचते हैं वे संवैधानिक नहीं रह जाते।”

🎙 कालांश 4 · पंजाबध्यान

(शुरू करने से पहले बोलिए:)

“आज का विषय भारी है। मैं जो बोलूँगा, वही लिखिए — न कम, न ज़्यादा। और बीच में कोई टिप्पणी नहीं।”

बोलिए:

“उपशीर्षक लिखिए — चार। पंजाब।

बिंदु एक।

उन्नीस सौ छियासठ में पंजाब से हरियाणा अलग हुआ, पहाड़ी इलाक़े हिमाचल को गए, और शेष पंजाब पंजाबी-भाषी प्रांत बना।

(रुकिए)

बिंदु दो।

अकाली दल उन्नीस सौ बीस के दशक में बना और उसने पंजाबी सूबा आंदोलन का नेतृत्व किया।

(रुकिए)

अब लिखिए — अकालियों की तीन कठिनाइयाँ।

एक। सरकार बनने पर भी वह समय से पहले बर्ख़ास्त कर दी जाती थी। दो। राज्य के हिंदुओं में समर्थन नहीं जुटा पाए। तीन। सिख समुदाय भी जाति और वर्ग के धरातल पर बँटा हुआ था। दलितों में कांग्रेस को अधिक समर्थन था।

(रुकिए)

तीसरे बिंदु के आगे एक तारा बनाइए। यह सबसे कम याद रखा जाता है, और परीक्षा में सबसे ज़्यादा काम आता है।

(रुकिए)

अब लिखिए — आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, उन्नीस सौ तिहत्तर। चार बातें।

एक। क्षेत्रीय स्वायत्तता की माँग। दो। केंद्र-राज्य संबंधों की पुनर्परिभाषा। तीन। सिख कौम की आकांक्षाएँ और बोलबाला। चार। यह प्रस्ताव भारत में संघवाद को मजबूत करने की अपील करता है।

(रुकिए)

चौथी बात को रेखांकित कीजिए। यह पाठ्यपुस्तक का अपना वाक्य है।

(रुकिए)

अब नीचे लिखिए — विवाद क्यों?

सरकार ने इसे अलगाववादी दस्तावेज़ के रूप में पढ़ा, और कुछ लोगों ने इसमें पृथक सिख राष्ट्र की माँग देखी। पाठ्यपुस्तक कहती है कि इसकी सीमित लोकप्रियता ही एक कारण थी कि इसे अलग-अलग तरीक़ों से पढ़ा गया।

(पाँच सेकंड रुकिए)

अब लिखिए — हिंसा का दौर।

नेतृत्व नरमपंथियों के हाथ से निकलकर चरमपंथियों के हाथ में चला गया। स्वर्णमंदिर को हथियारबंद लोगों ने अपना मुख्यालय बना लिया।

(रुकिए)

जून उन्नीस सौ चौरासी — ऑपरेशन ब्लू स्टार।

(रुकिए)

इकतीस अक्तूबर उन्नीस सौ चौरासी — इंदिरा गाँधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या। इसके बाद उत्तर भारत के कई हिस्सों में सिख-विरोधी हिंसा हुई। दिल्ली में दो हज़ार से ज़्यादा सिख मारे गए।

(यहाँ रुकिए। दस सेकंड। फिर धीमी आवाज़ में:)

अब दो अवतरण लिखिए। दोनों उद्धरण-चिह्न में।

पहला — नानावती आयोग, दो हज़ार पाँच। उद्धरण खुलता है — भले ही अपराधियों को सज़ा दिलाने में देरी हुई हो, अब समय आ गया है कि हम इन दुखद घटनाओं के अध्याय को बंद करें — उद्धरण बंद।

(रुकिए)

दूसरा — प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा, ग्यारह अगस्त दो हज़ार पाँच। उद्धरण खुलता है — मैं सिख समुदाय से ही नहीं, पूरे भारतीय राष्ट्र से माफ़ी माँगता हूँ, क्योंकि उन्नीस सौ चौरासी में जो कुछ हुआ वह राष्ट्रीयता की उस अवधारणा का निषेध था जो हमारे संविधान में दर्ज है — उद्धरण बंद।

(अब कुछ मत बोलिए। दस सेकंड मौन रहिए।)

अब आख़िरी हिस्सा। लिखिए — राजीव गाँधी–लोंगोवाल समझौता, जुलाई उन्नीस सौ पचासी। पाँच प्रावधान।

एक। चंडीगढ़ पंजाब को सौंपा जाएगा। दो। हिंदी-भाषी क्षेत्रों के निर्धारण के लिए अलग आयोग। तीन। नदी-जल विवाद के लिए न्यायाधिकरण। चार। हिंसा-पीड़ितों को मुआवज़ा और पुनर्वास। पाँच। अलगाववादियों से निपटने के विशेष प्रावधान।

(रुकिए)

और नीचे लिखिए —

पर पंजाब में न तो अमन आसानी से कायम हुआ, न ही समझौते के तत्काल बाद। उन्नीस सौ बानबे के चुनाव में मात्र चौबीस फ़ीसदी मतदान हुआ। उन्नीस सौ सत्तानबे में अकाली दल बादल और भाजपा के गठबंधन की जीत के बाद सामान्य राजनीति लौटी।”

🎙 कालांश 5 · पूर्वोत्तरध्यान

बोलिए:

“उपशीर्षक लिखिए — पाँच। पूर्वोत्तर।

बिंदु एक।

पूर्वोत्तर में आठ राज्य हैं — असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम। पहले सात को सात बहनें कहा जाता है, और सिक्किम को भाई।

(रुकिए)

बिंदु दो।

यहाँ देश की मात्र चार फ़ीसदी आबादी रहती है, और शेष भारत से जुड़ाव केवल बाईस किलोमीटर की एक राहदारी से है।

(रुकिए। नक्शे पर उँगली रखकर दिखाइए।)

बिंदु तीन, उद्धरण-चिह्न में —

यह भारत के लिए एक तरह से दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश-द्वार है।

(रुकिए)

अब लिखिए — राज्यों का पुनर्गठन।

उन्नीस सौ तिरसठ — नगालैंड। उन्नीस सौ बहत्तर — मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय। उन्नीस सौ सत्तासी — मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश।

(रुकिए)

अब सबसे ज़रूरी बात। लिखिए, और बॉक्स बनाकर घेर दीजिए — पूर्वोत्तर के तीन मुद्दे।

एक। स्वायत्तता की माँग। दो। अलगाव के आंदोलन। तीन। बाहरी लोगों का विरोध।

(पाँच सेकंड रुकिए)

अब पहला मुद्दा। लिखिए —

आज़ादी के बाद पूरा क्षेत्र असम के अधीन था। ईस्टर्न इंडिया ट्राइबल यूनियन से शुरुआत हुई, फिर उन्नीस सौ साठ में ऑल पार्टी हिल्स लीडर्स कांफ्रेंस बनी, और अंततः कई जनजातीय राज्य बने।

(रुकिए)

असम में करबी और दिमसा को स्वायत्त जिला परिषदें मिलीं, और बोडो को अलग स्वायत्त परिषद्।

(रुकिए)

क्यों? उद्धरण-चिह्न में लिखिए —

क्योंकि छोटे-छोटे और निरंतर लघुतर होते राज्य बनाते चले जाना संभव नहीं था।

(रुकिए)

अब दूसरा मुद्दा। एक तुलना-सारणी बनाइए। तीन स्तंभ — कसौटी, मिज़ोरम, नगालैंड।

पहली पंक्ति। कसौटी — शुरुआत। मिज़ोरम — उन्नीस सौ उनसठ का अकाल और असम सरकार की उदासीनता। नगालैंड — उन्नीस सौ इक्यावन में फ़िजो के नेतृत्व में स्वतंत्रता की घोषणा।

(रुकिए)

दूसरी पंक्ति। कसौटी — रास्ता। मिज़ोरम — उन्नीस सौ छियासठ से दो दशक का सशस्त्र संघर्ष, फिर बातचीत। नगालैंड — सशस्त्र संघर्ष; फ़िजो ने बातचीत के कई प्रस्ताव ठुकराए।

(रुकिए)

तीसरी पंक्ति। कसौटी — नतीजा। मिज़ोरम — उन्नीस सौ छियासी में राजीव गाँधी और लालडेंगा के बीच समझौता; पूर्ण राज्य का दर्जा; आज पूर्वोत्तर का सबसे शांतिपूर्ण राज्य। नगालैंड — समाधान होना अब भी बाकी है।

(पाँच सेकंड रुकिए)

इस सारणी के नीचे एक वाक्य लिखिए, और उसे रेखांकित कीजिए —

फ़र्क़ ताक़त का नहीं, बातचीत का है।

(रुकिए)

अब तीसरा मुद्दा। लिखिए — असम आंदोलन, उन्नीस सौ उन्यासी से उन्नीस सौ पचासी।

नेतृत्व आसू के हाथ में था, जो एक छात्र संगठन है। माँग थी कि उन्नीस सौ इक्यावन के बाद आए विदेशी नागरिकों की पहचान की जाए और उन्हें वापस भेजा जाए।

(रुकिए)

अब दो स्तंभ बनाइए — सांस्कृतिक चिंता और आर्थिक शिकायत।

सांस्कृतिक — असमिया पहचान और भाषा पर संकट का भय। जनसंख्या-संतुलन बदलने का डर।

आर्थिक — तेल, चाय और कोयला होते हुए भी राज्य ग़रीब। संसाधन बाहर जाते हैं, लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिलता।

(रुकिए)

हाशिये पर लिखिए — यह दो-स्तंभीय उत्तर परीक्षा में छह अंक का प्रश्न है।

(रुकिए)

अब लिखिए — असम समझौता, उन्नीस सौ पचासी। तीन श्रेणियाँ।

एक। उन्नीस सौ इक्यावन से इकसठ के बीच आए लोगों को पूर्ण नागरिकता और मताधिकार। दो। उन्नीस सौ इकसठ से इकहत्तर के बीच आए लोगों को नागरिकता, पर मताधिकार नहीं। तीन। उन्नीस सौ इकहत्तर के बाद आए लोगों को वापस भेजा जाएगा।

(रुकिए)

और अंत में लिखिए —

आसू ने असम गण परिषद् बनाई और उन्नीस सौ पचासी में सत्ता में आई। नारा था — स्वर्णिम असम। पर आप्रवास की समस्या का समाधान नहीं हो पाया।”

🎙 कालांश 6 · सिक्किम, गोवा और पाँच सबकध्यान

बोलिए:

“उपशीर्षक लिखिए — छह। सिक्किम और गोवा।

सिक्किम भारत का शरणागत यानी प्रोटेक्टोरेट था। रक्षा और विदेश-नीति भारत के पास थी, और आंतरिक शासन चोग्याल के हाथ में। आबादी में नेपाली मूल के लोग बहुसंख्यक थे, पर सत्ता में उनकी हिस्सेदारी नहीं थी।

(रुकिए)

उन्नीस सौ चौहत्तर के पहले चुनाव में सिक्किम कांग्रेस को भारी जीत मिली। अप्रैल उन्नीस सौ पचहत्तर में विधानसभा ने विलय का प्रस्ताव पारित किया, जनमत-संग्रह में लोगों ने समर्थन दिया, और सिक्किम भारत का बाईसवाँ राज्य बना।

(रुकिए)

निष्कर्ष, उद्धरण-चिह्न में —

विलय को स्थानीय जनता का समर्थन हासिल था। इस कारण यह मामला सिक्किम की राजनीति में कोई विभेदकारी मुद्दा न बन सका।

(रुकिए)

अब गोवा। लिखिए —

पुर्तगाली शासन आज़ादी के बाद भी जारी रहा। दिसंबर उन्नीस सौ इकसठ में भारतीय सेना की दो दिन की कार्रवाई से गोवा, दमन और दीव भारत में शामिल हुए।

(रुकिए)

इसके बाद सवाल उठा कि गोवा महाराष्ट्र में मिले या नहीं। महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी विलय चाहती थी, यूनाइटेड गोवन्स पार्टी अलग पहचान।

(रुकिए)

जनवरी उन्नीस सौ सड़सठ में जनमत सर्वेक्षण हुआ और लोगों ने अलग बने रहने का फ़ैसला दिया। उन्नीस सौ सत्तासी में गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।

(रुकिए)

हाशिये पर लिखिए — सिक्किम और गोवा — दोनों जगह जनमत ने फ़ैसला किया, हथियार ने नहीं।

(पाँच सेकंड रुकिए)

अब आख़िरी और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा। नया उपशीर्षक — सात। पाँच सबक।

सबक एक। क्षेत्रीय आकांक्षाएँ केवल भारत की समस्या नहीं हैं। ब्रिटेन में स्कॉटलैंड और वेल्स, स्पेन में बास्क क्षेत्र, श्रीलंका में तमिल प्रश्न।

(रुकिए)

सबक दो। क्षेत्रीय आकांक्षाओं को बलपूर्वक दबाना समाधान नहीं है। मिज़ोरम इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

(रुकिए)

सबक तीन। क्षेत्रों को सत्ता में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए, क्योंकि क्षेत्रों को मिलाकर ही पूरा देश बनता है।

(रुकिए)

सबक चार। क्षेत्रीय असंतुलन क्षेत्रीय असंतोष को जन्म देता है। असम इसका उदाहरण है।

(रुकिए)

सबक पाँच। संविधान ने विशेष प्रावधानों की गुंजाइश रखी — छठी अनुसूची और अनुच्छेद तीन सौ इकहत्तर। और अनुच्छेद तीन सौ सत्तर अगस्त दो हज़ार उन्नीस में निरस्त कर दिया गया।

(पाँच सेकंड रुकिए)

अब सबसे आख़िरी वाक्य। इसे उद्धरण-चिह्न में लिखिए, रेखांकित कीजिए, और हाशिये पर दो तारे बनाइए।

(धीरे बोलिए)

उद्धरण खुलता है — क्षेत्रीय आकांक्षाओं को यहाँ अलगाववाद की राह पर जाने का मौका नहीं मिला।

(रुकिए)

भारत की राजनीति ने यह स्वीकार किया है कि क्षेत्रीयता, लोकतांत्रिक राजनीति का अभिन्न अंग है — उद्धरण बंद।

(दस सेकंड रुकिए। फिर बोर्ड पर वह पहला पोस्टर दिखाइए और कहिए:)

“याद है, हमने इस अध्याय की शुरुआत सात भाषाओं वाले एक पोस्टर से की थी? अब समझ आया कि वह माँग तमिल और बांग्ला में भी क्यों लिखी गई थी। वृत्त पूरा हो गया।”

(रुकिए)

और आख़िर में एक छोटी सी बात लिख लीजिए, अगले अध्याय के लिए —

राजीव गाँधी के तीन समझौते — पंजाब जुलाई उन्नीस सौ पचासी, असम उन्नीस सौ पचासी, मिज़ोरम उन्नीस सौ छियासी।”

📋 शिक्षक के लिए — श्रुतलेख की जाँच-सूची

  • हर वाक्य के बाद तीन सेकंड, हर बिंदु के बाद पाँच सेकंड रुके
  • द्रविड़ आंदोलन वाला वाक्य दो बार बोला और दस सेकंड रुके
  • कालांश 3 की शुरुआत में पुरानी गाइड वाली चेतावनी दी
  • 1984 के दोनों अवतरणों के बाद दस सेकंड मौन रखा
  • तीन बड़ी सारणियाँ बनवाईं — तीन क्षेत्र · 370 पर दो प्रतिक्रियाएँ · मिज़ोरम बनाम नगालैंड
  • तीन बॉक्स बनवाए — पूर्वोत्तर के तीन मुद्दे · कश्मीरियों की तीन शिकायतें · पाँच सबक
  • अंतिम वाक्य पर दो तारे बनवाए
  • पोस्टर पर लौटकर वृत्त पूरा किया