Chapter 7क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

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कक्षा: 12 · विषय: राजनीति विज्ञान — स्वतंत्र भारत में राजनीति · पृष्ठ: 112–135 कुल कालांश: 6 (प्रत्येक 40 मिनट) — ★यह पुस्तक का सबसे लंबा अध्याय है (24 पृष्ठ) और इसमें चार अलग-अलग क्षेत्रों की कहानियाँ हैं।

🎯 अधिगम-प्रतिफल

पाठ पूरा होने पर विद्यार्थी —

  1. ★यह सिद्ध कर सकेगा कि क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतांत्रिक राजनीति का अभिन्न अंग हैं, राष्ट्र-विरोधी नहीं;
  2. जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पूर्वोत्तर और तमिलनाडु — चारों की कहानियाँ अलग-अलग बता सकेगा;
  3. ★★यह समझा सकेगा कि हर क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववाद तक नहीं जाता (द्रविड़ आंदोलन), और जो जाता है उसका हल भी बातचीत से निकलता है (मिजोरम);
  4. तीन बड़े समझौतों — पंजाब (1985), असम (1985), मिजोरम (1986) — के प्रावधान बता सकेगा;
  5. ★अध्याय के पाँच सबक और संविधान के लचीलेपन का तर्क प्रस्तुत कर सकेगा।

कालांश 1 से पहले — एक ज़रूरी सूचनाध्यान

★★यह पुस्तक-2 का सबसे अधिक अद्यतन अध्याय है। जम्मू-कश्मीर वाला पूरा खंड 5 अगस्त 2019 तक लाया गया है — अनुच्छेद 370 की चर्चा भूतकाल में है, और मानचित्र का शीर्षक है “केंद्र शासित प्रदेश — जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख”। ! पहले ही कक्षा को बता दीजिए कि पुरानी गाइड और पुराने नोट्स इस अध्याय के लिए विशेष रूप से भ्रामक होंगे।

कालांश 1 · क्षेत्र और राष्ट्र — सैद्धांतिक आधार

पृष्ठ 112–114

समयगतिविधि
8 मिनट★★पहले पन्ने के पोस्टर से शुरू कीजिए। उत्तराखंड आंदोलन का पोस्टर दिखाइए और पूछिए: “इसमें कितनी भाषाएँ हैं?” → सात। फिर: “अगर माँग सिर्फ़ उत्तराखंड की थी, तो तमिल और बांग्ला में क्यों?” अंत में काला बॉक्स पढ़िए — ★“क्षेत्रीय आकांक्षाओं का राष्ट्रीय भावनाओं से कोई बुनियादी टकराव नहीं है।”
5 मिनट‘इस अध्याय में…’ के चार प्रश्न बोर्ड पर लिखवाइए। और वह वाक्य: “1980 के दशक… असम, पंजाब, मिजोरम और जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने सर उठाया।” ★यही अध्याय के चार खंड हैं।
8 मिनट★1980 का दशक — चक्र बोर्ड पर बनाइए: माँग → हथियार → जवाबी कार्रवाई → राजनीतिक प्रक्रिया अवरुद्ध → बातचीत → समझौता। और वह लक्ष्य: “विवाद के मुद्दों को संविधान के दायरे में रहकर निपटा लिया जाए।”
10 मिनट★★भारत सरकार का नज़रिया — चार बिंदु; विशेष रूप से “राष्ट्र का मतलब यह नहीं है कि क्षेत्र को नकार दिया जाए” और “भारत का नज़रिया यूरोप के कई देशों से अलग रहा, जहाँ सांस्कृतिक विभिन्नता को राष्ट्र की एकता के लिए खतरे के रूप में देखा गया।”
5 मिनट★हाशिये का प्रश्न और कार्टून: “Down with Communalism / Casteism / Regionalism” — पूछिए: “तीनों तख्तियाँ एक जैसी दिखती हैं। पर क्या तीनों एक जैसी हैं?”
4 मिनटतनाव के दायरे: कश्मीर, नगालैंड, मिजोरम, द्रविड़ आंदोलन; और भाषा के आधार पर राज्य — 1966 में पंजाब और हरियाणा; बाद में छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड। ★“विविधता की चुनौती से निपटने के लिए देश की अंदरूनी सीमा रेखाओं का पुनर्निर्धारण किया गया।”

गृहकार्य: पृ. 114 का हाशिया-प्रश्न — “खतरे की बात हमेशा सीमांत के राज्यों के संदर्भ में ही क्यों उठाई जाती है?” — पर पाँच पंक्तियाँ लिखिए।

कालांश 2 · तमिलनाडु — वह आंदोलन जो अलगाववाद तक नहीं गया

पृष्ठ 116–117

★★ध्यान दीजिए — पाठ्यपुस्तक में द्रविड़ आंदोलन का खंड जम्मू-कश्मीर के बीच में आता है। पर पढ़ाने के लिए इसे अलग कालांश देना बेहतर है, क्योंकि यह अध्याय का सबसे सकारात्मक उदाहरण है और प्रश्न 8 का उत्तर है।

समयगतिविधि
5 मिनट★नारे से शुरू कीजिए: ‘उत्तर हर दिन बढ़ता जाए, दक्षिण दिन-दिन घटता जाए’। और वह दावा: “यह आंदोलन भारत के क्षेत्रीय आंदोलनों में सबसे ताकतवर आंदोलन था… क्षेत्रीयतावादी भावनाओं की सर्वप्रथम और सबसे प्रबल अभिव्यक्ति।”
8 मिनट★★और अब सबसे महत्वपूर्ण वाक्य — इसे बोर्ड पर घेर दीजिए: “हालाँकि आंदोलन के नेतृवर्ग के एक हिस्से की आकांक्षा एक स्वतंत्र द्रविड़ राष्ट्र बनाने की थी, पर आंदोलन ने कभी सशस्त्र संघर्ष की राह नहीं अपनायी। नेतृत्व ने… सार्वजनिक बहसों और चुनावी मंच का ही इस्तेमाल किया।”
7 मिनट📦 पेरियार का बॉक्स — आत्मसम्मान आंदोलन (1925), जस्टिस पार्टी, द्रविड़ कड़गम, हिंदी और उत्तर भारतीय वर्चस्व का विरोध।
8 मिनट★डीएमके की तीन-सूत्री माँगें (1953–54) — कल्लाकुडी/डालमियापुरम, तमिल संस्कृति का इतिहास, शिल्पकर्म शिक्षा कार्यक्रम। और 1965 का हिंदी-विरोधी आंदोलन → 1967 की जीत।
6 मिनटदलों का विस्तार: अन्नादुरै की मृत्यु के बाद दोफाड़ → आल इंडिया अन्ना द्रमुक; 1990 के दशक में एमडीएमके, पीएमके, डीएमडीके। ★“इनमें से एक न एक दल 1996 से केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा रहा है।”
6 मिनट★★अध्याय का सबसे बड़ा निष्कर्ष लिखवाइए: “एक समय क्षेत्रीय राजनीति को भारतीय राष्ट्र के लिए खतरा माना जाता था। लेकिन तमिलनाडु की राजनीति क्षेत्रवाद और राष्ट्रवाद के बीच सहकारिता की भावना का अच्छा उदाहरण पेश करती है।”

गृहकार्य: प्रश्न 8 — हर क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी माँग की तरफ अग्रसर नहीं होता।

कालांश 3 · जम्मू-कश्मीर

पृष्ठ 115, 118–122

समयगतिविधि
6 मिनट🗺️ मानचित्र से शुरू कीजिए — “केंद्र शासित प्रदेश — जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख”, स्रोत pib.gov.in। और तीन क्षेत्र: जम्मू, कश्मीर, लद्दाख — तीनों की सामाजिक बुनावट लिखवाइए। ★यह प्रश्न 5 का सीधा उत्तर है।
8 मिनट★★समस्या की जड़ें: महाराजा हरि सिंह स्वतंत्र दर्जा चाहते थे → पाकिस्तान का दावा → पर लोगों का नज़रिया: “उन्होंने सोचा कि सबसे पहले वे कश्मीरी हैं। क्षेत्रीय अभिलाषा का यह मुद्दा ‘कश्मीरियत’ कहलाता है।” → अक्तूबर 1947 कबायली घुसपैठ → विलय प्रपत्र।
6 मिनट21 अप्रैल 1948 का UN प्रस्ताव — तीन चरण (पाकिस्तान नागरिक वापस बुलाए · भारत फौज कम करे · जनमत संग्रह); ! “इस प्रस्ताव के अंतर्गत कोई प्रगति न हो सकी।” मार्च 1948 — शेख अब्दुल्ला प्रधानमंत्री; अनुच्छेद 370 पर सहमति।
8 मिनट★★दो विपरीत प्रतिक्रियाओं की सारणी बोर्ड पर — बाहर के लोगों का वर्ग बनाम अधिकांश कश्मीरी; और कश्मीरियों की तीन शिकायतें। ★यह प्रश्न 6 का पूरा ढाँचा है।
8 मिनट★1948 से 2002 तक की समय-रेखा: 1953 पदच्युति → 1965 पदनाम बदला, गुलाम मोहम्मद सादिक पहले मुख्यमंत्री → 1974 इंदिरा–शेख समझौता → 1982 निधन, फारूक अब्दुल्ला → 1986 गठबंधन → ! 1987 का विवादित चुनाव → 1989 उग्रवाद → 1996 और 2002 के चुनाव।
4 मिनट★★2002 से 2019: मुफ्ती मोहम्मद → गुलामनबी आज़ाद → 2008 राष्ट्रपति शासन → 2009 उमर अब्दुल्ला → 2014 रिकॉर्ड मतदान, पीडीपी-बीजेपी → अप्रैल 2016 महबूबा मुफ्ती (पहली महिला मुख्यमंत्री) → जून 2018 राष्ट्रपति शासन → ★★5 अगस्त 2019: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019, अनुच्छेद 370 समाप्त, दो केंद्र शासित प्रदेश।

गृहकार्य: प्रश्न 5 और 6। 🎬 और ‘रोज़ा’ (1992, मणिरत्नम्) का बॉक्स पढ़कर आइए।

कालांश 4 · पंजाब

पृष्ठ 122–125

समयगतिविधि
6 मिनटपृष्ठभूमि: विभाजन → हरियाणा और हिमाचल → 1966 में पंजाबी-भाषी प्रांत। अकाली दल का गठन 1920 के दशक में; ‘पंजाबी सूबा’ आंदोलन।
7 मिनट★अकालियों की तीन कठिनाइयाँ — सरकार समय से पहले बर्खास्त · हिंदुओं में समर्थन नहीं · “सिख समुदाय भी… जाति और वर्ग के धरातल पर बँटा हुआ था” और कांग्रेस को दलितों में ज्यादा समर्थन।
8 मिनट★★आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, 1973 — चारों बातें लिखवाइए: क्षेत्रीय स्वायत्तता · केंद्र-राज्य संबंधों की पुनर्परिभाषा · सिख ‘कौम’ और ‘बोलबाला’ · “यह प्रस्ताव भारत में संघवाद को मजबूत करने की अपील करता है।” ★यही प्रश्न 4 का उत्तर है — विवादास्पद क्यों?
8 मिनट! हिंसा का चक्र: नेतृत्व नरमपंथियों से चरमपंथियों के हाथ में → स्वर्णमंदिर हथियारबंद किला → जून 1984 ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ → 31 अक्तूबर 1984 इंदिरा गाँधी की हत्या → सिख-विरोधी हिंसा, दिल्ली में दो हज़ार से ज्यादा। ! संयत भाषा में; पाठ के शब्द ही बोलिए।
5 मिनट★दोनों अवतरण पढ़िए — नानावती आयोग (2005) और मनमोहन सिंह (11 अगस्त 2005)। पढ़ने के बाद एक क्षण मौन रहिए।
6 मिनट★★राजीव गाँधी–लोंगोवाल समझौता (जुलाई 1985) — पाँच प्रावधान लिखवाइए। ! और फिर: “पंजाब में न तो अमन आसानी से कायम हुआ और न ही समझौते के तत्काल बाद”; 1992 में मात्र 24 फीसदी मतदान; 1997 में अकाली दल (बादल)–भाजपा की जीत।

गृहकार्य: प्रश्न 3 और 4।

कालांश 5 · पूर्वोत्तर

पृष्ठ 125–129

समयगतिविधि
7 मिनट🗺️ मानचित्र पर आठों राज्य और राजधानियाँ। ★‘सात बहनें’ + सिक्किम ‘भाई’; देश की 4 फीसदी आबादी; 22 किलोमीटर की राहदारी; “भारत के लिए एक तरह से दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश-द्वार”। ★★और हाशिये का प्रश्न पढ़िए — “दिल्ली के लोग यूरोप के नक्शे के बारे में ज्यादा जानते हैं और अपने देश के पूर्वोत्तर के हिस्से के बारे में कम।”
5 मिनटपुनर्गठन का कालक्रम: नगालैंड 1963 · मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय 1972 · मिजोरम और अरुणाचल 1987।
5 मिनट★★तीन मुद्दे बोर्ड पर: स्वायत्तता की माँग · अलगाव के आंदोलन · ‘बाहरी’ लोगों का विरोध। यह इस खंड का पूरा ढाँचा है।
6 मिनटस्वायत्तता की माँग: ईस्टर्न इंडिया ट्राइबल यूनियन → 1960 में ऑल पार्टी हिल्स कांफ्रेंस → कई जनजातीय राज्य। ★और आगे: करबी और दिमसा को जिला-परिषद्, बोडो को स्वायत्त परिषद् — “छोटे-छोटे और निरंतर लघुतर होते राज्य बनाते चले जाना संभव नहीं था।”
10 मिनट★★मिजोरम बनाम नगालैंड — तुलना-सारणी बोर्ड पर। मिजोरम: 1959 अकाल → लालडेंगा → 1966 सशस्त्र अभियान → दो दशक → 1986 राजीव-लालडेंगा समझौता → पूर्ण राज्य → “आज मिजोरम पूर्वोत्तर का सबसे शांतिपूर्ण राज्य है।” नगालैंड: 1951 फिजो → “फ़िजो ने बातचीत के कई प्रस्ताव ठुकराए” → “समाधान होना अब भी बाकी है।”
7 मिनट★असम आंदोलन (1979–1985): आसू; 1951 का कट-ऑफ; सांस्कृतिक + आर्थिक दोनों कारण (तेल, चाय, कोयला के बावजूद गरीबी); 1985 असम समझौता; असम गण परिषद् और ‘स्वर्णिम असम’। ! “‘आप्रवास’ की समस्या का समाधान नहीं हो पाया।” ★★और हाशिये का प्रश्न: “कोई आदमी कहीं पहले चला गया हो तो वही दूसरों को ‘बाहरी’ समझने लगता है।”

गृहकार्य: प्रश्न 7 — असम आंदोलन सांस्कृतिक अभिमान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली-जुली अभिव्यक्ति था।

कालांश 6 · सिक्किम, गोवा, और पाँच सबक

पृष्ठ 130–135

समयगतिविधि
6 मिनट📦 सिक्किम का विलय — ‘शरणागति’ का अर्थ; चोग्याल; नेपाली बहुसंख्या; 1974 का पहला चुनाव; अप्रैल 1975 का प्रस्ताव और जनमत-संग्रह; 22वाँ राज्य। ★निष्कर्ष: “विलय को स्थानीय जनता का समर्थन हासिल था। इस कारण यह मामला सिक्किम की राजनीति में कोई विभेदकारी मुद्दा न बन सका!”
6 मिनट📦 गोवा की मुक्ति — पुर्तगाली शासन; दिसंबर 1961 की दो दिन की कार्रवाई; फिर महाराष्ट्र में विलय की माँग बनाम गोवानी पहचान; ★जनवरी 1967 का जनमत सर्वेक्षण; 1987 में राज्य। ★यह उदाहरण दिखाता है कि जनमत-संग्रह से क्षेत्रीय प्रश्न हल हो सकते हैं।
14 मिनट★★पाँच सबक — यह कालांश का केंद्र है। पाँचों बोर्ड पर लिखवाइए, विशेष रूप से: सबक 1 (स्कॉटलैंड, वेल्स, बास्क, श्रीलंकाई तमिल — यानी यह वैश्विक परिघटना है); सबक 2 (मिजोरम का उदाहरण); सबक 3 (सत्ता की साझेदारी — “क्षेत्रों को मिलाकर ही पूरा देश बनता है”); सबक 4 (आर्थिक असमानता); सबक 5 (संविधान का लचीलापन; छठी अनुसूची; और ! अनुच्छेद 370 का अगस्त 2019 में निरस्त होना)।
6 मिनट★★अध्याय का अंतिम वाक्य लिखवाइए: “क्षेत्रीय आकांक्षाओं को यहाँ अलगाववाद की राह पर जाने का मौका नहीं मिला। भारत की राजनीति ने यह स्वीकार किया है कि क्षेत्रीयता, लोकतांत्रिक राजनीति का अभिन्न अंग है।” और इसे पहले पन्ने के पोस्टर से जोड़िए — वृत्त पूरा हो गया।
5 मिनट📦 राजीव गाँधी का बॉक्स — ★★तीनों समझौते उन्हीं के काल में: पंजाब (जुलाई 1985), असम (1985), मिजोरम (1986)। यह बोर्ड पर लिखवाइए।
3 मिनटप्रश्न 10 का अवतरण (संजीब बरुआ) पढ़िए — “सात बहनें… एक ही माँ की सात बेटियाँ”।

गृहकार्य / मूल्यांकन: प्रश्न 9 और 10। ★और प्रश्न 2 का मानचित्र-कार्य।

📌 कालांश-वार ‘कभी मत छोड़िए’ सूची

कालांशअनिवार्य
1★★सात भाषाओं वाला पोस्टर और उसका निष्कर्ष · “राष्ट्र का मतलब यह नहीं कि क्षेत्र को नकार दिया जाए”
2★★“आंदोलन ने कभी सशस्त्र संघर्ष की राह नहीं अपनायी” · तमिलनाडु = क्षेत्रवाद और राष्ट्रवाद की सहकारिता
3★★तीन क्षेत्रों की बुनावट · ‘कश्मीरियत’ · दो विपरीत प्रतिक्रियाएँ और तीन शिकायतें · 5 अगस्त 2019
4★★आनंदपुर साहिब प्रस्ताव की चारों बातें · जून 1984 · 31 अक्तूबर 1984 · पंजाब समझौते के पाँच प्रावधान
5★★आठ राज्य और 22 किमी राहदारी · तीन मुद्दे · मिजोरम बनाम नगालैंड · असम समझौता 1985
6★★पाँचों सबक · अंतिम वाक्य · राजीव गाँधी के तीन समझौते