Chapter 7वैश्वीकरण

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श्रुतलेख नोट्स — शिक्षक द्वारा बोले जाने वाले शब्दश: पाठ

यह क्या है: नीचे दिया गया हर वाक्य वैसा ही है जैसा शिक्षक कक्षा में बोलेंगे और विद्यार्थी अपनी कॉपी में लिखेंगे। यह सारांश नहीं, बोलने की स्क्रिप्ट है।

कैसे इस्तेमाल करें:

  • बोल्ड शब्दों पर आवाज़ ठहराइए — विद्यार्थी इन्हें रेखांकित करेंगे।
  • [रुकिए] का अर्थ है — लिखने का समय दीजिए।
  • 〔शिक्षक के लिए〕 — यह बोलना नहीं है, केवल आपके लिए निर्देश है।
  • कुल 12 श्रुतलेख-खंड, 5 कालांशों में बँटे हुए। ★यह पुस्तक का अंतिम अध्याय है — अंत में पूरी पुस्तक का समापन-खंड भी है।

कालांश 1

खंड 0 — पहले एक चेतावनी

〔शिक्षक के लिए: यह लिखवाना नहीं है, केवल बोलिए। पर बोर्ड पर लिख दीजिए।〕

“शुरू करने से पहले एक बात। इस अध्याय के पृष्ठ 107 पर लिखा है — ‘हम लोग अमरीकी वर्चस्व वाले अध्याय तीन में वर्चस्व के सांस्कृतिक अर्थ के अंतर्गत इस बात को पढ़ चुके हैं।’ — लेकिन वह अध्याय पाठ्यक्रम से पूरी तरह हटा दिया गया है। वह किताब में है ही नहीं। इसलिए मैं वह अवधारणा कालांश चार में अलग से पढ़ाऊँगा। अभी इसे नोट कर लीजिए ताकि आप उसे ढूँढते न रहें।”

खंड 1 — वैश्वीकरण की अवधारणा

〔शिक्षक के लिए: पहले तीन कहानियाँ सुनाइए, फिर लिखवाना शुरू कीजिए।〕

लिखिए — शीर्षक: वैश्वीकरण की अवधारणा। [रुकिए]

एक। पाठ्यपुस्तक तीन कहानियों से शुरू होती है। [रुकिए]

दो। जनार्दन एक कॉल-सेंटर में काम करता है। “वह देर दोपहर में काम के लिए निकलता है; दफ्तर में घुसने के साथ ही वह जॉन बन जाता है; नया लहजा अख़्तियार कर लेता है और हजारों किलोमीटर दूर बसे अपने ग्राहकों से बात करने के लिए एक नयी भाषा बोलने लगता है।” [रुकिए]

तीन। “जनार्दन की छुट्टियाँ भी भारतीय कैलेंडर से नहीं बल्कि अमरीका के कैलेंडर से मेल खाती हैं जहाँ उसके ग्राहक रहते हैं।” [रुकिए]

चार। रामधारी ने अपनी बेटी के जन्मदिन पर एक साइकिल खरीदी “जो बनी तो चीन में थी लेकिन बिक भारत में रही है।” पिछले साल उसने ‘बार्बी डॉल’ खरीदी थी “जो दरअसल संयुक्त राज्य अमरीका में बनी थी और भारत में बिक रही थी।” [रुकिए]

पाँच। सारिका अपने परिवार में पहली पीढ़ी की शिक्षित है। उसे नौकरी और स्वतंत्र कॅरिअर का अवसर मिला है — “ऐसे अवसर के बारे में उसके परिवार की महिलाएँ सोच भी नहीं सकती थीं।” [रुकिए]

छह। पाठ्यपुस्तक कहती है — “सारिका के सामने जीवन-मूल्यों के बीच दुविधा की स्थिति है।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: अब पलटिए। कहिए — “पर अध्याय यहीं नहीं रुकता। वह तुरंत उलटे उदाहरण देता है।”〕

सात। अब पाँच उलटे उदाहरण लिखिए। [रुकिए]

पहला — “फसल के मारे जाने से कुछ किसानों ने आत्महत्या कर ली। इन किसानों ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी से बड़े महंगे बीज खरीदे थे।” [रुकिए]

दूसरा — यूरोप की एक बड़ी कंपनी को एक भारतीय कंपनी ने खरीद लिया, जबकि खरीदी गई कंपनी के मालिक इसका विरोध कर रहे थे। [रुकिए]

तीसरा — “अनेक खुदरा दुकानदारों को भय है कि अगर कुछ बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने देश में खुदरा दुकानों की अपनी शृंखला खोल ली तो उनकी रोजी-रोटी जाती रहेगी।” [रुकिए]

चौथा — मुम्बई के एक फिल्म-निर्माता पर आरोप लगे कि उसने हॉलीवुड में बनी एक फिल्म की कहानी उठाकर अपनी फिल्म बना ली है। [रुकिए]

पाँचवाँ — “पश्चिमी परिधान पहनने वाली कॉलेज की छात्राओं को एक उग्रवादी संगठन ने अपने एक बयान में धमकी दी है।” [रुकिए]

आठ। इनसे तीन निष्कर्ष निकलते हैं। इन्हें रेखांकित कीजिए। [रुकिए]

पहला — “वैश्वीकरण हर अर्थ में सकारात्मक ही नहीं होता; लोगों पर इसके दुष्प्रभाव भी पड़ सकते हैं।” [रुकिए]

दूसरा — “ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है जो मानते हैं कि वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव कम और नकारात्मक प्रभाव ज्यादा हैं।” [रुकिए]

तीसरा — और यह सबसे महत्वपूर्ण है — “वैश्वीकरण सिर्फ आर्थिक मसलों से नहीं जुड़ा और ज़रूरी नहीं कि प्रभाव की दिशा हमेशा धनी मुल्कों से ग़रीब मुल्कों की ओर गतिशील हो।” [रुकिए]

खंड 2 — परिभाषा

〔शिक्षक के लिए: बोर्ड पर बीच में ‘प्रवाह’ लिखकर चार तीर खींचिए।〕

लिखिए — उपशीर्षक: वैश्वीकरण की परिभाषा। [रुकिए]

एक। “एक अवधारणा के रूप में वैश्वीकरण की बुनियादी बात है — प्रवाह।” [रुकिए]

दो। प्रवाह चार तरह के हैं। [रुकिए]

पहला — “विश्व के एक हिस्से के विचारों का दूसरे हिस्सों में पहुँचना।” [रुकिए]

दूसरा — “पूँजी का एक से ज्यादा जगहों पर जाना।” [रुकिए]

तीसरा — “वस्तुओं का कई-कई देशों में पहुँचना और उनका व्यापार।” [रुकिए]

चौथा — “बेहतर आजीविका की तलाश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों की आवाजाही।” [रुकिए]

तीन। और अब सबसे ज़रूरी वाक्य — इसे रेखांकित कीजिए — “यहाँ सबसे ज़रूरी बात है ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ जो ऐसे प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ है और कायम भी है।” [रुकिए]

चार। अब दो और सूत्र-वाक्य। [रुकिए]

“वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है। इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अवतार हैं और इनके बीच ठीक-ठीक भेद किया जाना चाहिए।” [रुकिए]

पाँच। और चेतावनी भी — “यह मान लेना ग़लत है कि वैश्वीकरण केवल आर्थिक परिघटना है।” और “ठीक इसी तरह यह मान लेना भी भूल होगी कि वैश्वीकरण एकदम सांस्कृतिक परिघटना है।” [रुकिए]

छह। और दूसरा सूत्र-वाक्य — “वैश्वीकरण का प्रभाव बड़ा विषम रहा है — यह कुछ समाजों को बाकियों की अपेक्षा और समाज के एक हिस्से को बाकी हिस्सों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित कर रहा है।” [रुकिए]

सात। इसलिए — “विशिष्ट संदर्भों पर पर्याप्त ध्यान दिए बिना हम वैश्वीकरण के प्रभाव के बारे में सर्व-सामान्य निष्कर्ष निकालने से परहेज करें।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ रुककर कहिए — “इस अध्याय में ‘वैश्वीकरण अच्छा है या बुरा’ पूछना ही गलत सवाल है। सही सवाल है — किसके लिए, कहाँ, और किस कीमत पर?”〕

कालांश 2

खंड 3 — वैश्वीकरण के कारण

लिखिए — शीर्षक: वैश्वीकरण के कारण। [रुकिए]

एक। पहले एक सवाल — अगर प्रवाह तो हमेशा से रहे हैं, तो इसमें नया क्या है? [रुकिए]

दो। पाठ्यपुस्तक कहती है — “वैश्वीकरण मानव-इतिहास के अधिकांश समय जारी रहा है।” [रुकिए]

तीन। तो नयी बात क्या है? — “नयी बात है इन प्रवाहों की गति और इनके प्रसार का धरातल। ये दोनों बातें मौजूदा वैश्वीकरण को अनूठा बनाती हैं।” [रुकिए]

चार। “वैश्वीकरण का एक मजबूत ऐतिहासिक आधार है इसलिए ज़रूरी है कि हम इन प्रवाहों को इतिहास के संदर्भ में देखें।” [रुकिए]

पाँच। अब मुख्य कारण — “हालाँकि वैश्वीकरण के लिए कोई एक कारक जिम्मेवार नहीं, फिर भी प्रौद्योगिकी अपने आप में एक अपरिहार्य कारण साबित हुई है।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: ‘अपरिहार्य’ शब्द पर ज़ोर दीजिए। कहिए — “अपरिहार्य का मतलब है ‘जिसके बिना नहीं हो सकता।’ लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अकेले इसी से हो जाएगा। यह अंतर याद रखिए।”〕

छह। “इसमें कोई शक नहीं कि टेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप के नवीनतम आविष्कारों ने विश्व के विभिन्न भागों के बीच संचार की क्रांति कर दिखायी है।” [रुकिए]

सात। अब एक बहुत सुंदर ऐतिहासिक उदाहरण लिखिए — “शुरू-शुरू में जब छपाई, यानी मुद्रण की तकनीक आयी थी तो उसने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी। इसी तरह आज हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव हमारे सोचने के तरीके पर पड़ेगा।” [रुकिए]

आठ। “हम अपने बारे में जिस ढंग से सोचते हैं और हम सामूहिक जीवन के बारे में जिस तर्ज़ पर सोचते हैं — प्रौद्योगिकी का उस पर असर पड़ेगा।” [रुकिए]

नौ। लेकिन अब एक ज़रूरी सीमा — “बहरहाल, संचार-साधनों की तरक्की और उनकी उपलब्धता मात्र से वैश्वीकरण अस्तित्व में आया हो — ऐसी बात नहीं।” [रुकिए]

दस। तो और क्या चाहिए? — “यहाँ ज़रूरी बात यह है कि विश्व के विभिन्न भागों के लोग अब समझ रहे हैं कि वे आपस में जुड़े हुए हैं।” [रुकिए]

ग्यारह। “आज हम इस बात को लेकर सजग हैं कि विश्व के एक हिस्से में घटने वाली घटना का प्रभाव विश्व के दूसरे हिस्से में भी पड़ेगा। बर्ड फ्लू अथवा ‘सुनामी’ किसी एक राष्ट्र की हदों में सिमटे नहीं रहते। ये घटनाएँ राष्ट्रीय-सीमाओं का जोर नहीं मानतीं।” [रुकिए]

बारह। और एक आखिरी बात — “इन प्रवाहों की गति में अंतर हो सकता है। विश्व के विभिन्न भागों के बीच पूँजी और वस्तु की गतिशीलता लोगों की आवाजाही की तुलना में ज्यादा तेज और व्यापक होगी।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ कहिए — “इस वाक्य को याद रखिए। अगले कालांश में यही सबसे बड़ी बात बनेगी।”〕

खंड 4 — राजनीतिक प्रभाव

〔शिक्षक के लिए: बोर्ड पर तीन तीर बनाइए — नीचे, सीधा, ऊपर।〕

लिखिए — शीर्षक: राजनीतिक प्रभाव। [रुकिए]

एक। “राज्य की संप्रभुता की परंपरागत धारणा पर वैश्वीकरण का असर कैसे होता है? इस सवाल का जवाब देते समय हमें कम से कम तीन पहलुओं का ध्यान रखना होगा।” [रुकिए]

दो। पहला पहलू। “वैश्वीकरण के कारण राज्य की क्षमता यानी सरकारों को जो करना है उसे करने की ताकत में कमी आती है।” [रुकिए]

तीन। “पूरी दुनिया में कल्याणकारी राज्य की धारणा अब पुरानी पड़ गई है और इसकी जगह न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य ने ले ली है।” [रुकिए]

चार। “राज्य अब कुछेक मुख्य कामों तक ही अपने को सीमित रखता है, जैसे कानून और व्यवस्था को बनाये रखना तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा करना।” [रुकिए]

पाँच। “लोक कल्याणकारी राज्य की जगह अब बाज़ार आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताओं का प्रमुख निर्धारक है।” [रुकिए]

छह। “पूरे विश्व में बहुराष्ट्रीय निगम अपने पैर पसार चुके हैं और उनकी भूमिका बढ़ी है। इससे सरकारों के अपने दम पर फ़ैसला करने की क्षमता में कमी आती है।” [रुकिए]

सात। दूसरा पहलू। “वैश्वीकरण से हमेशा राज्य की ताकत में कमी आती हो — ऐसी बात नहीं।” [रुकिए]

आठ। “राजनीतिक समुदाय के आधार के रूप में राज्य की प्रधानता को कोई चुनौती नहीं मिली है और राज्य इस अर्थ में आज भी प्रमुख है।” [रुकिए]

नौ। “राज्य कानून और व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अपने अनिवार्य कार्यों को पूरा कर रहे हैं और बहुत सोच-समझकर अपने कदम उन्हीं दायरों से खींच रहे हैं जहाँ उनकी मर्जी हो। राज्य अभी भी महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ ज़ोर देकर कहिए — “ध्यान दीजिए — पीछे हटना मजबूरी नहीं, चुनाव भी है।”〕

दस। तीसरा पहलू — और यह सबसे ज़्यादा छूटता है। “वस्तुत: कुछ मायनों में वैश्वीकरण के फलस्वरूप राज्य की ताकत में इजाफा हुआ है।” [रुकिए]

ग्यारह। “अब राज्यों के हाथ में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी मौजूद है जिसके बूते राज्य अपने नागरिकों के बारे में सूचनाएँ जुटा सकते हैं। इस सूचना के दम पर राज्य ज्यादा कारगर ढंग से काम कर सकते हैं। उनकी क्षमता बढ़ी है; कम नहीं हुई।” [रुकिए]

बारह। और निष्कर्ष — “इस प्रकार नई प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: बोर्ड पर तीन तीरों की ओर इशारा करके कहिए — “नीचे, सीधा, ऊपर। तीनों सच हैं। परीक्षा में तीनों लिखिए, वरना उत्तर अधूरा रहेगा।”〕

कालांश 3

खंड 5 — आर्थिक प्रभाव

लिखिए — शीर्षक: आर्थिक प्रभाव। [रुकिए]

एक। “जैसे ही आर्थिक वैश्वीकरण का उल्लेख होता है, हमारा ध्यान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व व्यापार संगठन जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं पर जाता है।” [रुकिए]

दो। “हालाँकि वैश्वीकरण को इतने संकीर्ण नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।” [रुकिए]

तीन। तो सही कसौटी क्या है? इसे रेखांकित कीजिए — “हमें इससे होने वाले आर्थिक फायदों के बँटवारे के अर्थ में सोचना चाहिए — यानी किसे वैश्वीकरण से सबसे ज्यादा फायदा हुआ और किसे सबसे कम। यह भी देखने की ज़रूरत है कि वैश्वीकरण के कारण किसने नुकसान उठाया।” [रुकिए]

चार। और एक ज़रूरी बात — “कुछ आर्थिक प्रवाह स्वेच्छा से होते हैं जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और ताकतवर देशों द्वारा जबरन लादे जाते हैं।” [रुकिए]

पाँच। अब चारों प्रवाहों की स्थिति देखिए। [रुकिए]

वस्तुएँ — “वैश्वीकरण के चलते पूरी दुनिया में वस्तुओं के व्यापार में इजाफा हुआ है; अलग-अलग देश अपने यहाँ होने वाले आयात पर प्रतिबंध लगाते थे लेकिन अब ये प्रतिबंध कम हो गए हैं।” [रुकिए]

पूँजी — “दुनिया भर में पूँजी की आवाजाही पर अब कहीं कम प्रतिबंध हैं। …धनी देश के निवेशकर्ता अपना धन अपने देश की जगह कहीं और निवेश कर सकते हैं, खासकर विकासशील देशों में जहाँ उन्हें ज्यादा मुनाफा होगा।” [रुकिए]

विचार — “वैश्वीकरण के चलते अब विचारों के सामने राष्ट्र की सीमाओं की बाधा नहीं रही, उनका प्रवाह अबाध हो उठा है। इंटरनेट और कंप्यूटर से जुड़ी सेवाओं का विस्तार इसका एक उदाहरण है।” [रुकिए]

छह। और अब चौथा प्रवाह — यहाँ ध्यान दीजिए। [रुकिए]

“लेकिन वैश्वीकरण के कारण जिस सीमा तक वस्तुओं और पूंजी का प्रवाह बढ़ा है उस सीमा तक लोगों की आवाजाही नहीं बढ़ सकी है।” [रुकिए]

सात। कारण क्या है? — “विकसित देश अपनी वीजा-नीति के जरिए अपनी राष्ट्रीय सीमाओं को बड़ी सतर्कता से अभेद्य बनाए रखते हैं ताकि दूसरे देशों के नागरिक विकसित देशों में आकर कहीं उनके नागरिकों के नौकरी-धंधे न हथिया लें।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ रुककर पूछिए — “पूँजी के लिए सीमाएँ खुल गईं, लोगों के लिए नहीं। क्या यह ‘मुक्त बाज़ार’ है?” दो-तीन उत्तर लेकर आगे बढ़िए।〕

आठ। और एक और चेतावनी — “हर जगह एक समान नीति अपना लेने का मतलब यह नहीं होता कि हर जगह परिणाम भी समान होंगे। …यहाँ भी हमें सर्व-सामान्य निष्कर्ष निकालने के बजाय संदर्भ-विशेष पर ध्यान देना होगा।” [रुकिए]

नौ। “आर्थिक वैश्वीकरण के कारण पूरे विश्व में जनमत बड़ी गहराई से बँट गया है।” [रुकिए]

दस। आलोचकों का पक्ष लिखिए। “आर्थिक वैश्वीकरण से आबादी के एक बड़े छोटे तबके को फायदा होगा जबकि नौकरी और जन-कल्याण — शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई की सुविधा आदि — के लिए सरकार पर आश्रित रहने वाले लोग बदहाल हो जाएँगे।” [रुकिए]

ग्यारह। इसीलिए वे माँग करते हैं कि “एक ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ तैयार किया जाना चाहिए ताकि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं उन पर वैश्वीकरण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।” [रुकिए]

बारह। लेकिन कुछ आंदोलनों का कहना है कि “‘सामाजिक सुरक्षा-कवच’ की बात अव्यावहारिक है और इतना भर उपाय पर्याप्त नहीं होगा।” [रुकिए]

तेरह। और सबसे तीखा वाक्य — “कुछ अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक वैश्वीकरण को विश्व का ‘पुन:उपनिवेशीकरण’ कहा है।” [रुकिए]

चौदह। अब समर्थकों का पक्ष। “इससे समृद्धि बढ़ती है और ‘खुलेपन’ के कारण ज्यादा से ज्यादा आबादी की खुशहाली बढ़ती है। व्यापार की बढ़ती से हर देश को अपना बेहतर कर दिखाने का मौका मिलता है।” [रुकिए]

पंद्रह। “इन लोगों का कहना है कि आर्थिक वैश्वीकरण अपरिहार्य है और इतिहास की धारा को अवरुद्ध करना कोई बुद्धिमानी नहीं।” [रुकिए]

सोलह। और मध्यमार्गी समर्थकों का कहना है — “वैश्वीकरण ने चुनौतियाँ पेश की हैं और सजग-सचेत होकर पूरी बुद्धिमत्ता से इसका सामना किया जाना चाहिए।” [रुकिए]

सत्रह। और इस पर सब सहमत हैं — “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि ‘पारस्परिक निर्भरता’ की रफ्तार अब तेज हो चली है।” [रुकिए]

कालांश 4

खंड 6 — ‘वर्चस्व’ — हटाए गए अध्याय की भरपाई

〔शिक्षक के लिए: यह पाठ्यपुस्तक में नहीं है, पर ज़रूरी है। बोर्ड पर तीन पंक्तियाँ लिखिए।〕

लिखिए — उपशीर्षक: वर्चस्व के तीन अर्थ। [रुकिए]

“अब मैं वह अवधारणा दे रहा हूँ जो हटाए गए अध्याय में थी। इसके बिना अगला खंड अधूरा रहेगा।”

एक। सैन्य वर्चस्व — बल का असंतुलन। यह डर से काम करता है। [रुकिए]

दो। संरचनात्मक वर्चस्व — वैश्विक अर्थव्यवस्था के नियम बनाने की क्षमता। यह संस्थाओं और नियमों से काम करता है। [रुकिए]

तीन। सांस्कृतिक वर्चस्व — और यह सबसे महत्वपूर्ण है — जब किसी शक्ति के विचार, मूल्य और जीवन-शैली इतने सामान्य लगने लगें कि उनका विकल्प ही सोचा न जा सके। [रुकिए]

चार। यह बल से नहीं, आकर्षण से काम करता है। यानी सबसे कारगर वर्चस्व वह है जो वर्चस्व दिखाई ही न दे। [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: अब कहिए — “इसे याद रखिए। अगले ही खंड में पाठ्यपुस्तक कहेगी ‘संसार वैसा ही दीखता है जैसा ताकतवर संस्कृति इसे बनाना चाहती है’ — वह यही बात है।”〕

खंड 7 — सांस्कृतिक प्रभाव

लिखिए — शीर्षक: सांस्कृतिक प्रभाव। [रुकिए]

एक। “वैश्वीकरण के परिणाम सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक दायरों में ही नज़र नहीं आते; हम घर में बैठे हों तब भी इसकी चपेट में होते हैं।” [रुकिए]

दो। “हम जो कुछ खाते-पीते-पहनते हैं अथवा सोचते हैं — सब पर इसका असर नज़र आता है। हम जिन बातों को अपनी पसंद कहते हैं वे बातें भी वैश्वीकरण के असर में तय होती हैं।” [रुकिए]

तीन। “इस भय को बल मिला है कि यह प्रक्रिया विश्व की संस्कृतियों को खतरा पहुँचाएगी। वैश्वीकरण से यह होता है क्योंकि वैश्वीकरण सांस्कृतिक समरूपता ले आता है।” [रुकिए]

चार। लेकिन ध्यान दीजिए — “सांस्कृतिक समरूपता का यह अर्थ नहीं कि किसी विश्व-संस्कृति का उदय हो रहा है। विश्व-संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।” [रुकिए]

पाँच। “राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभुत्वशाली संस्कृति कम ताकतवर समाजों पर अपनी छाप छोड़ती है और संसार वैसा ही दीखता है जैसा ताकतवर संस्कृति इसे बनाना चाहती है।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ रुककर बोर्ड की ओर इशारा कीजिए और कहिए — “यही सांस्कृतिक वर्चस्व है।”〕

छह। “जो यह तर्क देते हैं वे अक्सर दुनिया के ‘मैक्डोनॉल्डीकरण’ की तरफ इशारा करते हैं। उनका मानना है कि विभिन्न संस्कृतियाँ अब अपने को प्रभुत्वशाली अमरीकी ढर्रे पर ढालने लगी हैं।” [रुकिए]

सात। “चूँकि इससे पूरे विश्व की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर धीरे-धीरे खत्म होती है इसलिए यह केवल गरीब देशों के लिए ही नहीं बल्कि समूची मानवता के लिए खतरनाक है।” [रुकिए]

आठ। लेकिन अब पाठ्यपुस्तक पलटती है। यह वाक्य ध्यान से लिखिए। [रुकिए]

“इसके साथ-साथ यह मान लेना एक भूल है कि वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक हैं।” [रुकिए]

नौ। “संस्कृति कोई जड़ वस्तु नहीं होती। हर संस्कृति हर समय बाहरी प्रभावों को स्वीकार करते रहती है।” [रुकिए]

दस। “कभी-कभी बाहरी प्रभावों से हमारी पसंद-नापसंद का दायरा बढ़ता है तो कभी इनसे परंपरागत सांस्कृतिक मूल्यों को छोड़े बिना संस्कृति का परिष्कार होता है।” [रुकिए]

ग्यारह। अब दो उदाहरण लिखिए। [रुकिए]

पहला — “बर्गर मसाला-डोसा का विकल्प नहीं है इसलिए बर्गर से वस्तुत: कोई खतरा नहीं है। इससे हुआ मात्र इतना है कि हमारे भोजन की पसंद में एक चीज़ और शामिल हो गई है।” [रुकिए]

दूसरा — और यह सबसे सुंदर है — “नीली जीन्स भी हथकरघा पर बुने खादी के कुर्ते के साथ खूब चलती है। यहाँ हम बाहरी प्रभाव से एक अनूठी बात देखते हैं कि नीली जीन्स के ऊपर खादी का कुर्ता पहना जा रहा है।” [रुकिए]

बारह। “मज़ेदार बात तो यह है कि इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है जिसने हमें नीली जीन्स दी है। जीन्स के ऊपर कुर्ता पहने अमरीकियों को देखना अब संभव है।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ पाँच सेकंड रुकिए और कहिए — “यह वाक्य याद रखिए। यह प्रश्न 10 और प्रश्न 11 — दोनों का उत्तर है।”〕

तेरह। और अब निष्कर्ष — “सांस्कृतिक समरुपता वैश्वीकरण का एक पहलू है तो वैश्वीकरण से इसका उलटा प्रभाव भी पैदा हुआ है। वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होते जा रही है। इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण कहते हैं।” [रुकिए]

चौदह। लेकिन संतुलन के साथ — “इसका मतलब यह नहीं कि संस्कृतियों के मेलजोल में उनकी ताकत का सवाल गौण है, परंतु इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि सांस्कृतिक प्रभाव एकतरफा नहीं होता।” [रुकिए]

कालांश 5

खंड 8 — भारत और वैश्वीकरण

लिखिए — शीर्षक: भारत और वैश्वीकरण। [रुकिए]

एक। “पूँजी, वस्तु, विचार और लोगों की आवाजाही का भारतीय इतिहास कई सदियों का है।” [रुकिए]

दो। “औपनिवेशिक दौर में ब्रिटेन के साम्राज्यवादी मंसूबों के परिणामस्वरूप भारत आधारभूत वस्तुओं और कच्चे माल का निर्यातक तथा बने-बनाये सामानों का आयातक देश था।” [रुकिए]

तीन। “आज़ादी हासिल करने के बाद, ब्रिटेन के साथ अपने इन अनुभवों से सबक लेते हुए हमने फ़ैसला किया कि दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय खुद सामान बनाया जाए।” [रुकिए]

चार। “हमने यह भी फ़ैसला किया कि दूसरों देशों को निर्यात की अनुमति नहीं होगी ताकि हमारे अपने उत्पादक चीजों को बनाना सीख सकें।” — इसे ‘संरक्षणवाद’ कहा गया। [रुकिए]

पाँच। लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। “कुछ क्षेत्रों में तरक्की हुई तो कुछ ज़रूरी क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, आवास और प्राथमिक शिक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितने के वे हकदार थे। भारत में आर्थिक-वृद्धि की दर धीमी रही।” [रुकिए]

छह। और फिर मोड़ आया। “1991 में, वित्तीय संकट से उबरने और आर्थिक वृद्धि की ऊँची दर हासिल करने की इच्छा से भारत में आर्थिक-सुधारों की योजना शुरू हुई। इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों पर आयद बाधाएँ हटायी गईं। इन क्षेत्रों में व्यापार और विदेशी निवेश भी शामिल थे।” [रुकिए]

सात। अब अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण वाक्य। इसे दो लाइन छोड़कर, अलग से लिखिए। [रुकिए]

“यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत के लिए यह सब कितना अच्छा साबित हुआ है क्योंकि अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ दस सेकंड रुकिए। यह प्रश्न 9 और प्रश्न 11 — दोनों का केंद्र है।〕

खंड 9 — वैश्वीकरण का प्रतिरोध

लिखिए — शीर्षक: वैश्वीकरण का प्रतिरोध। [रुकिए]

एक। वामपंथी आलोचकों का तर्क — “मौजूदा वैश्वीकरण विश्वव्यापी पूंजीवाद की एक ख़ास अवस्था है जो धनिकों को और ज्यादा धनी — तथा इनकी संख्या में कमी — और गरीब को और ज्यादा ग़रीब बनाती है।” [रुकिए]

दो। “राज्य के कमजोर होने से गरीबों के हित की रक्षा करने की उसकी क्षमता में कमी आती है।” [रुकिए]

तीन। दक्षिणपंथी आलोचकों का तर्क — “राजनीतिक अर्थों में उन्हें राज्य के कमजोर होने की चिंता है। वे चाहते हैं कि कम से कम कुछ क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता और ‘संरक्षणवाद’ का दौर फिर कायम हो।” [रुकिए]

चार। “सांस्कृतिक संदर्भ में इनकी चिंता है कि परंपरागत संस्कृति की हानि होगी और लोग अपने सदियों पुराने जीवन-मूल्य तथा तौर-तरीकों से हाथ धो देंगे।” [रुकिए]

पाँच। अब एक बहुत ज़रूरी बारीकी। [रुकिए] — “यहाँ हम गौर करें कि वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलन भी विश्वव्यापी नेटवर्क में भागीदारी करते हैं और अपने से मिलती-जुलती सोच रखने वाले दूसरे देशों के लोगों से गठजोड़ करते हैं।” [रुकिए]

छह। और यह वाक्य रेखांकित कीजिए — “वैश्वीकरण-विरोधी बहुत से आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं बल्कि वैश्वीकरण के किसी खास कार्यक्रम के विरोधी हैं जिसे वे साम्राज्यवाद का एक रूप मानते हैं।” [रुकिए]

सात। अब कुछ तिथियाँ। [रुकिए]

“1999 में, सिएट्ल में विश्व व्यापार संगठन की मंत्री-स्तरीय बैठक हुई। यहाँ बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।” [रुकिए]

आठ। “विरोधियों का तर्क था कि उदीयमान वैश्विक आर्थिक-व्यवस्था में विकासशील देशों के हितों को समुचित महत्त्व नहीं दिया गया है।” [रुकिए]

नौ। “नव-उदारवादी वैश्वीकरण के विरोध का एक विश्व-व्यापी मंच ‘वर्ल्ड सोशल फोरम’ है। इस मंच के तहत मानवाधिकार-कार्यकर्त्ता, पर्यावरणवादी, मजदूर, युवा और महिला कार्यकर्त्ता एकजुट होकर नव-उदारवादी वैश्वीकरण का विरोध करते हैं।” [रुकिए]

दस। तीन तिथियाँ — “‘वर्ल्ड सोशल फोरम’ की पहली बैठक 2001 में ब्राजील के पोर्तो अलगेरे में हुई। 2004 में इसकी चौथी बैठक मुंबई में हुई थी। इसकी बैठक नेपाल में फरवरी 2024 में हुई थी।” [रुकिए]

खंड 10 — भारत और वैश्वीकरण का प्रतिरोध

लिखिए — उपशीर्षक: भारत और वैश्वीकरण का प्रतिरोध। [रुकिए]

एक। “सामाजिक आंदोलनों से लोगों को अपने पास-पड़ोस की दुनिया को समझने में मदद मिलती है। लोगों को अपनी समस्याओं के हल तलाशने में भी सामाजिक आंदोलनों से मदद मिलती है।” [रुकिए]

दो। “आर्थिक वैश्वीकरण के ख़िलाफ़ वामपंथी तेवर की आवाजें राजनीतिक दलों की तरफ से उठी हैं तो इंडियन सोशल फोरम जैसे मंचों से भी।” [रुकिए]

तीन। “औद्योगिक श्रमिक और किसानों के संगठनों ने बहुराष्ट्रीय निगमों के प्रवेश का विरोध किया है।” [रुकिए]

चार। “कुछ वनस्पतियाँ मसलन ‘नीम’ को अमरीकी और यूरोपीय फर्मों ने पेटेन्ट कराने के प्रयास किए। इसका भी कड़ा विरोध हुआ।” [रुकिए]

पाँच। “वैश्वीकरण का विरोध राजनीति के दक्षिणपंथी खेमों से भी हुआ है। यह खेमा विभिन्न सांस्कृतिक प्रभावों का विरोध कर रहा है जिसमें केबल नेटवर्क के जरिए उपलब्ध कराए जा रहे विदेशी टी.वी. चैनलों से लेकर वैलेन्टाईन-डे मनाने तथा स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं की पश्चिमी पोशाकों के लिए बढ़ती अभिरुचि तक का विरोध शामिल है।” [रुकिए]

खंड 11 — और जहाँ से शुरू हुए, वहीं लौटिए

〔शिक्षक के लिए: अब पृष्ठ 99 का पोस्टर दिखाइए। यह लिखवाना नहीं है, केवल पढ़कर सुनाइए।〕

“अब किताब का पहला पन्ना फिर खोलिए — पृष्ठ 99। वहाँ ‘विश्व सामाजिक मंच’ का पोस्टर है और उसका नारा है — ‘एक और दुनिया मुमकिन है।’”

“पर उसी पोस्टर में मंच के भीतर की बहसें भी हैं — ‘एक ओर पुराने किस्म की सतही वामपंथी राजनीति है और दूसरी ओर अलग-अलग रंगों वाली अराजकतावादी ताकतें हैं। इनका साझे मुद्दों पर सघन रूप से एक होना नामुमकिन है।’”

“और उसी पोस्टर के लाल हिस्से में ‘मुंबई प्रतिरोध 2004’ नाम का एक समूह इसी विश्व सामाजिक मंच का विरोध कर रहा है। वह कहता है कि मंच के तौर-तरीके अलोकतांत्रिक हैं, वह साम्राज्यवादी देशों और बड़े व्यापार के धन पर निर्भर है, और यहाँ तक कि ‘एन.जी.ओ. साम्राज्यवाद के दलाल हैं।’”

〔शिक्षक के लिए: अब कहिए — “ध्यान दीजिए, यह पाठ्यपुस्तक का कथन नहीं है — यह मुंबई प्रतिरोध का आरोप है। और अध्याय का सबसे बड़ा पाठ यही है — वैश्वीकरण-विरोध भी एकजुट नहीं है। उसके भीतर भी उतनी ही बहस है जितनी वैश्वीकरण के बारे में।”〕

खंड 12 — पुस्तक का समापन

〔शिक्षक के लिए: यह पुस्तक 1 का अंतिम अध्याय है। यह अंतिम बात ज़रूर लिखवाइए।〕

लिखिए — शीर्षक: पुस्तक का सार — सात अध्याय, एक सवाल। [रुकिए]

एक। अध्याय एक — दो ध्रुवीयता का अंत — सोवियत संघ का विघटन और एक-ध्रुवीय विश्व का उदय। [रुकिए]

दो। अध्याय दो — सत्ता के समकालीन केन्द्र — यूरोपीय संघ, आसियान और चीन। [रुकिए]

तीन। अध्याय तीन — समकालीन दक्षिण एशिया — पड़ोस की राजनीति और सार्क। [रुकिए]

चार। अध्याय चार — अंतर्राष्ट्रीय संगठन — “संयुक्त राष्ट्रसंघ के बिना दुनिया और बदहाल होगी।” [रुकिए]

पाँच। अध्याय पाँच — समकालीन विश्व में सुरक्षा — “सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।” [रुकिए]

छह। अध्याय छह — पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन — “जवाब इस बात से तय होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है।” [रुकिए]

सात। अध्याय सात — वैश्वीकरण — “वैश्वीकरण का प्रभाव बड़ा विषम रहा है।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: अब यह अंतिम बात कहिए, लिखवाइए नहीं — “पूरी किताब एक ही सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है — शीतयुद्ध के बाद दुनिया में ताकत कहाँ चली गई? पहले चार अध्याय बताते हैं ‘कहाँ’ — रूस से अमरीका की ओर, फिर यूरोप, आसियान और चीन की ओर, और फिर संस्थाओं की ओर। अगले तीन बताते हैं कि ‘उसका असर आम आदमी पर क्या पड़ा’ — उसकी सुरक्षा पर, उसके पर्यावरण पर, और उसकी रोज़ी-रोटी तथा संस्कृति पर। और तीनों का जवाब एक ही है — असर सब पर बराबर नहीं पड़ा।” 〕

शिक्षक के लिए अंतिम जाँच-सूची

श्रुतलेख-खंडकालांशअनुमानित समय
0, 1, 2 — चेतावनी, तीन कहानियाँ, परिभाषा136 मिनट
3, 4 — कारण और राजनीतिक प्रभाव236 मिनट
5 — आर्थिक प्रभाव334 मिनट
6, 7 — ‘वर्चस्व’ की भरपाई और सांस्कृतिक प्रभाव436 मिनट
8, 9, 10, 11, 12 — भारत, प्रतिरोध, पोस्टर और पुस्तक-समापन538 मिनट

★जिन वाक्यों को अवश्य रेखांकित करवाइए:

  1. “एक अवधारणा के रूप में वैश्वीकरण की बुनियादी बात है — प्रवाह।”
  2. “सबसे ज़रूरी बात है ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’।”
  3. “वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है।” और “प्रभाव बड़ा विषम रहा है।”
  4. “प्रौद्योगिकी अपने आप में एक अपरिहार्य कारण साबित हुई है।” — पर “संचार-साधनों की तरक्की मात्र से… ऐसी बात नहीं।”
  5. “छपाई की तकनीक ने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी।”
  6. “नई प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।”
  7. “विकसित देश अपनी वीजा-नीति के जरिए अपनी राष्ट्रीय सीमाओं को… अभेद्य बनाए रखते हैं।”
  8. “कुछ अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक वैश्वीकरण को विश्व का ‘पुन:उपनिवेशीकरण’ कहा है।”
  9. “जीन्स के ऊपर कुर्ता पहने अमरीकियों को देखना अब संभव है।”
  10. “वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होते जा रही है — सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण।”
  11. “अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं बल्कि… फायदों में सबका साझा हो।”
  12. “वैश्वीकरण-विरोधी बहुत से आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं।”