हर प्रश्न के साथ उसका उत्तर और पृष्ठ-संदर्भ दिया है — यह शिक्षक के लिए है। जिस पत्र में विद्यार्थी अकेले काम करे, वह
15-Student-Worksheet.mdहै, जहाँ उत्तर अंतिम पृष्ठ पर हैं।
खंड क — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)
1अध्याय के आरंभ का उद्धरण किसका है?
उत्तर देखिए
श्री अरविंद का। (पृ. 75)
2‘निवासी’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
वे लोग जो एक स्थान विशेष में रहते हैं। (पृ. 77)
3विश्व के इस भाग को हम प्राय: किस नाम से कहते हैं?
उत्तर देखिए
भारतीय उपमहाद्वीप। (पृ. 77)
4भारत के प्राचीन नाम हमें कहाँ-कहाँ मिलते हैं?
उत्तर देखिए
प्राचीन पुस्तकों, यात्रियों और तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों, और शिलालेखों में। (पृ. 77)
5भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ कौन-सा है?
उत्तर देखिए
ऋग्वेद। (पृ. 77)
6‘सप्त सैंधव’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
‘सात नदियों की भूमि’। (पृ. 77)
7‘सप्त सैंधव’ उपमहाद्वीप के किस भाग का नाम था?
उत्तर देखिए
उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का। (पृ. 77)
8‘सैंधव’ शब्द किससे आया है?
उत्तर देखिए
सिंधु से — जिसका आशय सिंधु नदी या सामान्यत: एक नदी से है। (पृ. 77)
9‘भरत’ नाम सर्वप्रथम कहाँ उल्लिखित हुआ?
उत्तर देखिए
ऋग्वेद में। (पृ. 78)
10ऋग्वेद में ‘भरत’ का क्या अभिप्राय है?
उत्तर देखिए
लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह से। (पृ. 78)
11‘भारतवर्ष’ से क्या आशय है?
उत्तर देखिए
‘भरत’ के देश से। (पृ. 78)
12‘जम्बूद्वीप’ से क्या आशय है?
उत्तर देखिए
‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ से। (पृ. 78)
13जम्बू वृक्ष के तीन अन्य नाम बताइए।
उत्तर देखिए
जम्बुल वृक्ष, मालाबार प्लम, जामुन वृक्ष। (पृ. 78)
14महाभारत में उपमहाद्वीप के लिए कौन-से दो शब्द प्रयुक्त हुए हैं?
उत्तर देखिए
भारतवर्ष और जम्बूद्वीप। (पृ. 78)
15महाभारत का ‘कुरूक्षेत्र’ आज कहाँ है?
उत्तर देखिए
आज हरियाणा का भाग। (पृ. 78)
16महाभारत का ‘वंग’ आज कहाँ है?
उत्तर देखिए
बंगाल का भाग। (पृ. 78)
17महाभारत का ‘प्राग्ज्योतिष’ आज कहाँ है?
उत्तर देखिए
कुछ-कुछ असम का भाग। (पृ. 78)
18पुस्तक अशोक की तिथि लगभग कौन-सी मानने को कहती है?
उत्तर देखिए
लगभग 250 सा.सं.पू.। (पृ. 78)
19अशोक ने अपने एक शिलालेख में संपूर्ण भारत के लिए किस नाम का प्रयोग किया?
उत्तर देखिए
‘जम्बूद्वीप’। (पृ. 78)
20अशोक के समय ‘जम्बूद्वीप’ में किन आधुनिक देशों के भाग सम्मिलित थे?
उत्तर देखिए
आज के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के भाग। (पृ. 78)
21विष्णु पुराण के अनुसार भारत की परिभाषा क्या है?
उत्तर देखिए
वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है। (पृ. 80)
22‘हिमाच्छादित पर्वत’ कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
हिमालय। (पृ. 80)
23दक्षिण भारत में ‘भारत’ को प्राय: कैसे लिखा जाता है?
उत्तर देखिए
‘भारतम्’। (पृ. 80)
242000 वर्ष पूर्व की तमिल कविता में राजा की सीमाएँ कैसे बताई गई हैं?
उत्तर देखिए
दक्षिण में केप कुमारी से उत्तर में महान पर्वत तक, और पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर तक। (पृ. 80)
25भारतीय संविधान की शुरुआत में कौन-सा वाक्यांश है?
उत्तर देखिए
‘इंडिया, दैट इज़ भारत’ — हिंदी अनुवाद में ‘भारत अर्थात इंडिया’। (पृ. 81)
26भारतीय संविधान सर्वप्रथम किस भाषा में लिखा गया था?
उत्तर देखिए
अंग्रेजी में। (पृ. 81)
27‘संविधान’ क्या है?
उत्तर देखिए
किसी देश के आधारभूत सिद्धांतों और कानूनों को बताने वाला प्रलेख। (पृ. 81)
28भारतीय संविधान किस वर्ष लागू हुआ?
उत्तर देखिए
1950 में। (पृ. 81)
29विदेशियों में सर्वप्रथम किसने भारत का उल्लेख किया?
उत्तर देखिए
प्राचीन ईरान (फारस) के निवासियों ने। (पृ. 81)
30किस शताब्दी में एक फारसी सम्राट ने सिंधु-क्षेत्र पर नियंत्रण किया?
उत्तर देखिए
छठी शताब्दी सा.सं.पू. में। (पृ. 81)
31फारसियों ने भारत को किन नामों से निर्दिष्ट किया?
उत्तर देखिए
‘हिंद’, ‘हिंदु’ या ‘हिंदू’। (पृ. 81)
32प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ किस प्रकार का शब्द था?
उत्तर देखिए
पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द — इसे हिंदू धर्म से संदर्भित नहीं किया गया है। (पृ. 81)
33प्राचीन यूनानियों ने भारत को क्या नाम दिया?
उत्तर देखिए
‘इंडोई’ अथवा ‘इंडिके’। (पृ. 81)
34यूनानियों ने ‘हिंदू’ से पहला अक्षर ‘ह’ क्यों हटा दिया?
उत्तर देखिए
क्योंकि यह अक्षर यूनानी भाषा में नहीं था। (पृ. 81)
35प्राचीन चीनी ग्रंथों में इंडिया का उल्लेख किस नाम से हुआ?
उत्तर देखिए
‘यिन्तू’ या ‘यिंदू’। (पृ. 81)
36चीनी शब्द ‘तियन्जू’ का दूसरा संभावित अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
‘स्वर्गतुल्य स्वामी’। (पृ. 83)
37जुआनज़ैंग ने किस शताब्दी में भारत की यात्रा की?
उत्तर देखिए
7वीं सा.सं. में। (पृ. 83)
38जुआनज़ैंग कितने वर्ष बाद चीन लौटे?
उत्तर देखिए
17 वर्ष बाद। (पृ. 83)
39चीन लौटकर जुआनज़ैंग ने क्या किया?
उत्तर देखिए
संस्कृत से चीनी भाषा में उन पांडुलिपियों का अनुवाद किया जो वह अपने साथ ले गए थे। (पृ. 83)
40‘हिंदुस्तान’ शब्द सर्वप्रथम कब और कहाँ प्रयुक्त हुआ?
उत्तर देखिए
आज से 1800 वर्ष पूर्व, एक फारसी शिलालेख में। (पृ. 83)
खंड ख — लघु उत्तरीय (3 अंक)
1भारतीय उपमहाद्वीप की प्राकृतिक सीमाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर में हिमालय और हिंदुकुश, पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और
दक्षिण में हिंद महासागर। ये सीमाएँ चित्र 5.2 पर दिखाई गई हैं, और विष्णु पुराण तथा तमिल कविता — दोनों इन्हीं का वर्णन करते हैं। (पृ. 76–77, 80)
2★‘सप्त सैंधव’ क्या है और यह नाम किस क्षेत्र के लिए प्रयुक्त हुआ था?
उत्तर देखिए
‘सप्त सैंधव’ का अर्थ है ‘सात नदियों की भूमि’। यह नाम ऋग्वेद में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए प्रयुक्त हुआ है — संपूर्ण भारत के लिए नहीं। ‘सैंधव’ शब्द ‘सिंधु’ से आया है, जिसका आशय सिंधु नदी या सामान्यत: एक नदी से है। (पृ. 77)
3★‘भरत’ नाम के बारे में पुस्तक क्या कहती है?
उत्तर देखिए
‘भरत’ वह नाम है जो सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित हुआ था। वहाँ इसका अभिप्राय लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह से है — किसी राजा से नहीं। बाद के साहित्य में विभिन्न महाराजाओं के लिए ‘भरत’ नाम उल्लिखित हुआ। इसी से ‘भारतवर्ष’ बना, जिसका आशय ‘भरत’ के देश से है।
(पृ. 78)
4‘जम्बूद्वीप’ नाम कैसे बना और उसका क्या हुआ?
उत्तर देखिए
‘जम्बूद्वीप’ से आशय ‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ से है। यह भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य पेड़ है, जिसे ‘जम्बुल वृक्ष’, ‘मालाबार प्लम’ या ‘जामुन वृक्ष’ भी कहते हैं।
आगे जम्बूद्वीप भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया। (पृ. 78)
5महाभारत में सूचीबद्ध क्षेत्रों के बारे में क्या विशेष बात है?
उत्तर देखिए
महाभारत में अनेक क्षेत्र सूचीबद्ध हैं — जैसे कश्मीर (लगभग आज का कश्मीर),
कुरूक्षेत्र (आज हरियाणा का भाग), वंग (बंगाल का भाग), प्राग्ज्योतिष (कुछ-कुछ असम
का भाग), कच्छ और केरल (लगभग आज का केरल)। विशेष बात यह है कि इनका विस्तार उपमहाद्वीप के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में मिलता है — उत्तर से दक्षिण तक और पूर्व से पश्चिम
तक। (पृ. 78–79)
6★अशोक के शिलालेख से हमें क्या पता चलता है?
उत्तर देखिए
पुस्तक कहती है कि अशोक की तिथि लगभग 250 सा.सं.पू. मानी जा सकती है और उन्होंने बहुत से शिलालेख छोड़े हैं। उनमें से एक में उन्होंने ‘जम्बूद्वीप’ नाम का प्रयोग संपूर्ण भारत का वर्णन करने के लिए किया है। उस समय इसमें आज के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के भाग सम्मिलित थे। (पृ. 78)
7★विष्णु पुराण भारत को कैसे परिभाषित करता है?
उत्तर देखिए
विष्णु पुराण का श्लोक कहता है — “वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।” यहाँ ‘हिमाच्छादित पर्वत’ हिमालय हैं। यह नाम
आज भी प्रयोग में है — उत्तर भारत में ‘भारत’ और दक्षिण भारत में प्राय: ‘भारतम्’।
(पृ. 80)
8★★पुस्तक यह क्यों कहती है कि “प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे”?
उत्तर देखिए
क्योंकि देश के विभिन्न भागों ने भारत के लिए एक समान परिभाषा अपनाई। एक ओर विष्णु पुराण
(संस्कृत) कहता है कि भारत समुद्र के उत्तर और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है; दूसरी
ओर 2000 वर्ष पूर्व की एक तमिल कविता एक राजा की प्रशंसा करते हुए कहती है कि उसका नाम
“दक्षिण में केप कुमारी से उत्तर में महान पर्वत तक, पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर”
तक जाना जाता है। दोनों — उत्तर और दक्षिण, अलग भाषाओं में — एक ही सीमाएँ बताते हैं।
(पृ. 80)
9★फारसियों ने भारत को ‘हिंद’ क्यों कहा, और इसका आगे क्या हुआ?
उत्तर देखिए
छठी शताब्दी सा.सं.पू. में एक फारसी सम्राट ने सैन्य अभियान आरंभ किया और सिंधु नदी के क्षेत्र, जिसे ‘सिंधु’ कहा जाता था, पर नियंत्रण किया। इसलिए फारसियों ने अपने लेखों और
शिलालेखों में भारत को ‘हिंद’, ‘हिंदु’ या ‘हिंदू’ कहा — जो उनकी भाषा में ‘सिंधु’ का रूपांतरण था। आगे इन्हीं फारसी स्रोतों के आधार पर यूनानियों ने ‘इंडोई’/‘इंडिके’ नाम
दिया, और वहीं से ‘इंडिया’ बना। (पृ. 81)
10! प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ शब्द का क्या अर्थ था?
उत्तर देखिए
पुस्तक विशेष रूप से चेतावनी देती है — “प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है। यहाँ इसे हिंदू धर्म से संदर्भित नहीं किया गया है।” अर्थात यह सिंधु के क्षेत्र को
दर्शाने वाला शब्द था, किसी धर्म को नहीं। (पृ. 81)
11यूनानियों ने ‘हिंदू’ से ‘ह’ क्यों हटा दिया?
उत्तर देखिए
क्योंकि यह अक्षर यूनानी भाषा में नहीं था। इसीलिए हिंदु से ‘इंडोई’ अथवा ‘इंडिके’
बना, और आगे चलकर ‘इंडिया’। (पृ. 81)
12चीनियों ने भारत को क्या नाम दिए, और ‘तियन्जू’ विशेष क्यों है?
उत्तर देखिए
प्राचीन चीनी ग्रंथों में इंडिया का उल्लेख ‘यिन्तू’ या ‘यिंदू’ से हुआ, और यह शब्द भी मूलत: ‘सिंधु’ से आया है। एक अन्य चीनी शब्द ‘तियन्जू’ भी ‘सिंधु’ से लिया गया था,
परंतु उसे ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ के रूप में भी समझा जा सकता है। यह बताता है कि चीनियों का बुद्ध की भूमि के रूप में भारत के प्रति कितना सम्मान था। (पृ. 81, 83)
13जुआनज़ैंग के बारे में तीन बातें लिखिए।
उत्तर देखिए
- जुआनज़ैंग (पूर्व में ह्वेनसांग उच्चारित) ने 7वीं सा.सं. में चीन से भारत की यात्रा की।
- उन्होंने भारत के कई भागों का भ्रमण किया, विद्वानों से मिले, बौद्ध ग्रंथों को एकत्रित किया और 17 वर्ष बाद चीन वापस लौट गए।
- वहाँ उन्होंने संस्कृत से चीनी भाषा में उन पांडुलिपियों का अनुवाद किया जो वह अपने साथ ले गए थे। (पृ. 83)
14! ‘हिंदुस्तान’ शब्द के बारे में पुस्तक क्या कहती है?
उत्तर देखिए
यह शब्द आज से 1800 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम एक फारसी शिलालेख में प्रयोग किया गया था।
बाद में, भारत पर आक्रमण करने वालों ने भारतीय उपमहाद्वीप को वर्णित करने के लिए इसी शब्द का प्रयोग किया। (पृ. 83)
15भारतीय संविधान भारत के नाम के बारे में क्या कहता है?
उत्तर देखिए
भारतीय संविधान, जो सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया था, की शुरुआत में ही ‘इंडिया, दैट इज़ भारत’ वाक्यांश का प्रयोग किया गया है। संविधान के हिंदी अनुवाद में भी वही ‘भारत अर्थात इंडिया’ उल्लिखित है। चित्र 5.5 में संविधान के प्रथम पृष्ठ पर यह पंक्ति दिखती है —
“भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा।” (पृ. 81–82)
खंड ग — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)
1★★‘भारत’ और ‘इंडिया’ — दोनों नाम कैसे बने? तुलना कीजिए।
उत्तर देखिए
दोनों नाम प्राचीन हैं, पर उनके रास्ते बिलकुल अलग हैं।
(क) ‘भारत’ — भीतर से आया नाम
- ‘भरत’ वह नाम है जो सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित हुआ; वहाँ इसका अभिप्राय लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह से है।
- बाद के साहित्य में विभिन्न महाराजाओं के लिए यह नाम आया।
- महाभारत में ‘भारतवर्ष’ — अर्थात ‘भरत’ का देश — समूचे उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त हुआ।
- कुछ शताब्दियों बाद ‘भारत’ नाम सामान्यतया प्रयुक्त होने लगा (विष्णु पुराण)।
- शृंखला: भरत → भारतवर्ष → भारत
(ख) ‘इंडिया’ — बाहर से आया नाम
- छठी शताब्दी सा.सं.पू. में एक फारसी सम्राट ने सिंधु नदी के क्षेत्र पर नियंत्रण किया।
- फारसियों ने भारत को ‘हिंद’/‘हिंदु’/‘हिंदू’ कहा — ‘सिंधु’ का रूपांतरण।
- यूनानियों ने इन्हीं फारसी स्रोतों के आधार पर ‘इंडोई’/‘इंडिके’ कहा, ‘ह’ हटाकर, क्योंकि वह अक्षर यूनानी भाषा में नहीं था।
- शृंखला: सिंधु → हिंदु → इंडोई/इंडिके → इंडिया
(ग) मूल अंतर: ‘भारत’ एक जन-समूह से आया, ‘इंडिया’ एक नदी से।
और दोनों आज भी साथ हैं — भारतीय संविधान की पहली पंक्ति कहती है: “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा।” (पृ. 77–83)
2★“भारत के लिए देश के विभिन्न भागों ने एक समान परिभाषा को अपनाया है।” — इस कथन को
समझाइए।
उत्तर देखिए
यह अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है, और पुस्तक इसके तीन प्रमाण देती है —
1. श्री अरविंद का उद्धरण (पृ. 75) भारत में प्रारंभिक काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता थी, जो हिमालय और दो समुद्रों के बीच की भूमि से जुड़ी थी।
2. विष्णु पुराण (संस्कृत, उत्तर)“वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।”
3. तमिल कविता (2000 वर्ष पूर्व, दक्षिण) एक राजा की प्रशंसा — “दक्षिण में केप कुमारी से उत्तर में महान पर्वत तक, पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर” तक।
तीनों एक ही चतुर्भुज खींचते हैं — उत्तर में पर्वत, दक्षिण में समुद्र, और दोनों ओर
महासागर। अलग-अलग भाषाओं में, अलग-अलग सदियों में, देश के अलग-अलग भागों से — एक ही परिभाषा।
इसीलिए पुस्तक कहती है: “प्रतीत होता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे।” (पृ. 75, 80)
3प्राचीन भारतीय ग्रंथों और शिलालेखों में भारत के कौन-कौन से नाम मिलते हैं?
उत्तर देखिए
1. सप्त सैंधव — ऋग्वेद में, उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का नाम; अर्थ
‘सात नदियों की भूमि’; ‘सैंधव’ शब्द ‘सिंधु’ से।
2. भारतवर्ष — महाभारत में, समूचे उपमहाद्वीप के लिए; आशय ‘भरत’ के देश से।
3. जम्बूद्वीप — महाभारत में; आशय ‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ से; आगे यह
उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया।
4. जम्बूद्वीप (शिलालेख में) — अशोक ने, लगभग 250 सा.सं.पू., अपने एक शिलालेख में
इसी नाम का प्रयोग संपूर्ण भारत के लिए किया; उस समय इसमें आज के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के भाग सम्मिलित थे।
5. भारत — विष्णु पुराण में, और आज भी प्रयोग में; दक्षिण भारत में प्राय: ‘भारतम्’।
(पृ. 77–80)
4विदेशियों द्वारा भारत को दिए गए नामों की व्युत्पत्ति समझाइए।
उत्तर देखिए
सभी विदेशी नामों की जड़ एक ही है — ‘सिंधु’ नदी।
फारसीछठी शताब्दी सा.सं.पू. में एक फारसी सम्राट ने सिंधु नदी के क्षेत्र पर
नियंत्रण किया, और फारसियों ने भारत को ‘हिंद’, ‘हिंदु’ या ‘हिंदू’ कहा — जो उनकी भाषा में ‘सिंधु’ का रूपांतरण था। (ध्यान रहे — प्राचीन फारसी में यह पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है, हिंदू धर्म का संदर्भ नहीं।)
यूनानीइन्हीं फारसी स्रोतों के आधार पर यूनानियों ने ‘इंडोई’ अथवा ‘इंडिके’ नाम
दिया। उन्होंने ‘हिंदू’ का पहला अक्षर ‘ह’ हटा दिया, क्योंकि वह अक्षर यूनानी भाषा में नहीं था। (सिंधु → हिंदु → इंडोई/इंडिके)
चीनी चीनी ग्रंथों में ‘यिन्तू’ या ‘यिंदू’ — यह भी मूलत: ‘सिंधु’ से।
(सिंधु → हिंदू → इंदू → यिंदू) एक अन्य शब्द ‘तियन्जू’ भी ‘सिंधु’ से आया, पर उसे ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ भी समझा जा सकता है — जो बुद्ध की भूमि के रूप में भारत के प्रति चीनियों के सम्मान को दर्शाता है।
फारसी (बाद में)‘हिंदुस्तान’ — 1800 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम एक फारसी शिलालेख
में; बाद में आक्रमण करने वालों ने उपमहाद्वीप के लिए यही प्रयोग किया। (पृ. 81–83)
5अध्याय के आरंभ में दिए गए उद्धरण का क्या अर्थ है? (यह अभ्यास-प्रश्न 1 है)
उत्तर देखिए
श्री अरविंद कहते हैं कि भारत में प्रारंभिक काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता स्थापित हो गई थी, जो हिमालय और दो समुद्रों के बीच की इस भूमि से जुड़ी हुई थी।
अध्याय स्वयं इसका प्रमाण देता है
- विष्णु पुराण (संस्कृत) और 2000 वर्ष पुरानी तमिल कविता — दोनों एक ही सीमाएँ बताते हैं।
- महाभारत कश्मीर से केरल तक के क्षेत्र गिनाता है, और उनका विस्तार संपूर्ण उपमहाद्वीप में मिलता है।
- अशोक का शिलालेख संपूर्ण भारत के लिए एक ही नाम — जम्बूद्वीप — प्रयोग करता है।
अर्थात देश के अलग-अलग भागों ने, अलग-अलग भाषाओं और सदियों में, एक ही परिभाषा अपनाई — और
यही वह एकता है जिसकी बात उद्धरण करता है। (पृ. 75, 78–80)
6प्राचीन काल में विश्व के विभिन्न भागों से लोग भारत की यात्रा क्यों करते थे?
(यह अभ्यास-प्रश्न 4 है — पुस्तक चार-पाँच उद्देश्यों का संकेत देती है)
उत्तर देखिए
1. धर्म और तीर्थयात्रा — जुआनज़ैंग बौद्ध ग्रंथ एकत्र करने आए, और चीनियों के लिए भारत
बुद्ध की भूमि थी (यही ‘तियन्जू’ शब्द दर्शाता है)।
2. अध्ययन और विद्वानों से भेंट — जुआनज़ैंग ने भारत के कई भागों का भ्रमण किया और विद्वानों से मिले।
3. व्यापार — प्राचीन काल से लोग व्यापार के लिए दूर-दूर तक यात्रा करते थे।
4. सैन्य अभियान और विजय — छठी शताब्दी सा.सं.पू. का फारसी सम्राट, और बाद के
आक्रमणकारी।
5. जिज्ञासा और लेखन — पुस्तक कहती है कि भारत के नाम यात्रियों और तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों में मिलते हैं — अर्थात लोग यहाँ आकर लिखते भी थे।
(यह खुला प्रश्न है — कोई भी तर्कसंगत उद्देश्य स्वीकार्य है।) (पृ. 77, 81, 83)
खंड घ — सही/गलत(अभ्यास-प्रश्न 2)
! पाठ्यपुस्तक में इस अध्याय की कोई उत्तर-कुंजी नहीं छपी है। नीचे दिए उत्तर पुस्तक के पाठ से निकाले गए हैं, NCERT द्वारा छापे हुए नहीं।
| # | कथन | उत्तर | कारण |
|---|---|---|---|
| 1 | ‘ऋग्वेद’ में भारत के संपूर्ण भूगोल का वर्णन किया गया है। | गलत | ऋग्वेद केवल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को ‘सप्त सैंधव’ कहता है (पृ. 77) |
| 2 | ‘विष्णु पुराण’ में संपूर्ण उपमहाद्वीप का वर्णन किया गया है। | सही | “समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में” — यह पूरे उपमहाद्वीप की सीमा है (पृ. 80) |
| 3 | अशोक के समय ‘जम्बूद्वीप’ में आज का भारत, अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्र, बांग्लादेश और पाकिस्तान सम्मिलित थे। | सही | पुस्तक का अपना वाक्य (पृ. 78) |
| 4 | महाभारत में कश्मीर, कच्छ और केरल समेत कई क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया गया है। | सही | पुस्तक की अपनी सूची (पृ. 78) |
| 5 | ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग 2000 वर्ष से भी पहले सर्वप्रथम एक यूनानी शिलालेख में किया गया था। | गलत | दो गलतियाँ — यह 1800 वर्ष पूर्व था, और फारसी शिलालेख में, यूनानी नहीं (पृ. 83) |
| 6 | प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ शब्द का उपयोग हिंदू धर्म के लिए किया गया है। | गलत | पुस्तक स्पष्ट कहती है कि वह पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है (पृ. 81) |
| 7 | विदेशी यात्रियों द्वारा इंडिया को ‘भारत’ नाम दिया गया। | गलत | उलटा है — ‘भारत’ नाम भारतीयों ने दिया; विदेशियों ने सिंधु-आधारित नाम दिए (पृ. 77, 81, 84) |
★शिक्षक के लिए दो चेतावनियाँ: कथन 5 में दो गलतियाँ एक साथ हैं — संख्या और भाषा। पूरे अंक के लिए दोनों बतानी चाहिए। कथन 7 इस अध्याय का सबसे अच्छा प्रश्न है — उसका उत्तर देने के लिए अध्याय के दोनों हिस्से समझने पड़ते हैं।
खंड ङ — क्रियाकलाप एवं परियोजनाएँ
1. पृ. 83 की तालिका पूरी कीजिए — भारत के लिए प्रयुक्त नाम:
| भाषा | नाम |
|---|---|
| फारसी | हिंद / हिंदु / हिंदू |
| यूनानी | इंडोई / इंडिके |
| चीनी | यिन्तू / यिंदू (तथा तियन्जू) |
| अरबी और फारसी | हिंदुस्तान |
| अंग्रेजी | इंडिया (पहले से भरा) |
| फ्रेंच | इन्डे (पहले से भरा) |
2. चित्र 5.2 पर भारतीय उपमहाद्वीप की चार प्राकृतिक सीमाएँ पहचानिए और लिखिए।
3. अध्याय 3, पृ. 46 का कालिदास वाला बॉक्स दोबारा पढ़िए। वहाँ जिस चित्र 5.2 की बात थी, वह अब आपके सामने है। श्लोक की पंक्ति “पश्चिमी से लेकर पूर्वी समुद्र तक” को मानचित्र पर दिखाइए।
4. यदि आपका जन्म 2000 वर्ष पूर्व हुआ होता और आपको अपने देश का नामकरण करने का अवसर मिलता, तो आप किस नाम का चयन करते एवं क्यों? (अभ्यास-प्रश्न 3 — पूर्णत: कल्पना का प्रश्न; कोई सही उत्तर नहीं।)
5. अपनी मातृभाषा में इस देश का नाम क्या है? क्या वह ‘भारत’ वाली शृंखला से जुड़ता है या ‘सिंधु’ वाली से?
अंक-विभाजन का सुझाव (25 अंक की इकाई परीक्षा)
| खंड | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| क — अति लघु उत्तरीय | 5 प्रश्न × 1 अंक | 5 |
| ख — लघु उत्तरीय | 3 प्रश्न × 3 अंक | 9 |
| ग — दीर्घ उत्तरीय | 1 प्रश्न × 5 अंक | 5 |
| घ — सही/गलत | 4 कथन × 1 अंक | 4 |
| ङ — तालिका/मानचित्र | 1 क्रियाकलाप × 2 अंक | 2 |
| कुल | 25 |
दीर्घ उत्तरीय के लिए सुझाव: प्रश्न 1 (दोनों नामों की तुलना) या प्रश्न 2 (एक समान परिभाषा) लीजिए। पहला अध्याय का ढाँचा जाँचता है, दूसरा उसका केंद्रीय विचार।
सही/गलत में कथन 5 और 7 अवश्य रखिए — वहीं असली जाँच है।