अध्याय 4अंतर्राष्ट्रीय संगठन

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 45–62.

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कक्षा 12 • राजनीति विज्ञान • समकालीन विश्व राजनीति • अध्याय 4 — अंतर्राष्ट्रीय संगठन

कक्षा — 12 · विषय — राजनीति विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति) · पृष्ठ — 45 से 62

“युद्ध रोकने में नाकामयाब” — और फिर भी हर देश इसे बनाए रखना चाहता है। क्यों?

★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी।” इस अध्याय के चार सवाल • क्यों चाहिए • शक्ति कहाँ है • सुधार क्यों नहीं होता • भारत कहाँ खड़ा है

0 | पहले एक चेतावनी | यह अध्याय पहले ‘अध्याय 6’ था

पाठ्यक्रम-युक्तिकरण — पूरा नक्शा

पुराना क्रमअध्यायअबQR कोड
1शीतयुद्ध का दौर❌ हटाया गया—
2दो ध्रुवीयता का अंत✓ अध्याय 112108CH02
3समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व❌ हटाया गया—
4सत्ता के समकालीन केन्द्र✓ अध्याय 212108CH04
5समकालीन दक्षिण एशिया✓ अध्याय 312108CH05
6अंतर्राष्ट्रीय संगठन✓ अध्याय 412108CH06

और इस अध्याय पर उसका असर सबसे गहरा है

परिचय, पृ. 45

  • ! “इन्हीं चुनौतियों में एक थी अमरीका की शक्ति का बढ़ना।”
  • ! “इस अध्याय का अंत इस सवाल से किया गया है कि क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ ऐसे विश्व में कोई भूमिका निभा सकता है जिसमें किसी एक महाशक्ति का दबदबा हो।”
  • और पूरा अंतिम खंड — ‘एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ’ (पृ. 58–60) — उसी वादे को निभाता है।

!! और पृ. 57 पर एक पाठ-त्रुटि भी है: “संयुक्त राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या 1965 में 11 से बढ़ाकर 15” — यह सुरक्षा परिषद् है।

1 | हमें अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्यों चाहिए? | दो उद्धरण, तीन कारण

डेग हैमरसोल्ड — दूसरे महासचिव

संयुक्त राष्ट्रसंघ का गठन मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि उसे नरक से बचाने के लिए हुआ है।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 46

शशि थरूर — पूर्व अवर सचिव

जैसा कि चर्चिल कहते थे, हथियार लड़ाने से बढ़िया है कि ज़बान लड़ाई जाए। क्या यह बात बेहतर नहीं कि एक ऐसी जगह भी हो जहाँ दुनिया के सारे देश इकट्ठे हों और कभी-कभार अपनी बातों से एक-दूसरे का सर खाएँ, बनिस्पत लड़ाई के मैदान में एक-दूसरे का सर कलम करने के?

NCERT, अध्याय 4, पृ. 46

और अध्याय का सबसे संतुलित वाक्य

अंतर्राष्ट्रीय संगठन हर मर्ज़ की दवा नहीं लेकिन वे महत्त्वपूर्ण ज़रूर हैं।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 46

अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्यानहीं है

सबसे महत्वपूर्ण परिभाषा

  • ★★“अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो।”
  • ★“अंतर्राष्ट्रीय संगठन का निर्माण विभिन्न राज्य ही करते हैं और यह उनके मामलों के लिए जवाबदेह होता है।”
  • ★“जब राज्यों में इस बात पर सहमति होती है कि कोई अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनना चाहिए, तभी ऐसे संगठन कायम होते हैं।”
  • “एक बार इनका निर्माण हो जाए तो ये समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान में सदस्य देशों की मदद करते हैं।”

! यह ‘विश्व सरकार’ नहीं है। यही सबसे आम भ्रांति है।

तीन कारण

  • 1. युद्ध टालने का मंच — ★“अधिकांश झगड़ों और विभेदों का समाधान बिना युद्ध के ही किया जाता है, लेकिन यह एक ऐसा तथ्य है जिस पर कम ध्यान जाता है।”
  • 2. साझे काम, जो अकेले नहीं हो सकते —
    • बीमारी — “कुछ रोगों को तब ही खत्म किया जा सकता है जब विश्व का हर देश अपनी आबादी को टीके लगाने में सहयोग करे।”
    • ★‘ग्लोबल वार्मिंग’ — ग्रीनहाउस गैसें → तापमान → समुद्रतल की ऊँचाई → “समुद्रतटीय इलाके जिसमें बड़े-बड़े शहर भी शामिल हैं, डूब जाएँगे।”
  • 3. सहयोग को व्यवस्थित करना — अगली स्लाइड।

“इसके लिए विश्व के बड़े औद्योगिक देशों का सहयोग करना जरुरी है।”

सहयोग की असली दिक्कत

“दो अलग-अलग बातें”

  • ★“सहयोग की ज़रूरत को पहचानना और सचमुच में सहयोग करना दो अलग-अलग बातें हैं।”
  • चार सवालों पर सहमति नहीं बनती —
    • सहयोग में आने वाली लागत का भार कौन कितना उठाए;
    • लाभ का आपसी बँटवारा न्यायोचित ढंग से कैसे हो;
    • मोल-तोल के बाद जो तय हो जाए उससे कोई मुकरे नहीं;
    • आपसी समझौते के बाद जो बातें तय हुई हैं उनसे कोई भी दग़ा न करे।

★★और यहीं संगठन काम आता है — वह “नियमों और नौकरशाही की एक रूपरेखा” देता है।

लेबनान, 2006 — अध्याय का एकमात्र ठोस विफलता-उदाहरण

जून 2006 के दौरान इजराइल ने लेबनान पर हमला किया… भारी संख्या में आम नागरिक मारे गए। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने इस मामले पर एक प्रस्ताव बहुत बाद यानी अगस्त में पास किया और इजराइली सेना इस इलाके से अक्टूबर में ही वापस हो सकी।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 46 — कार्टून का विवरण

2 | संयुक्त राष्ट्रसंघ कैसे बना | लीग की विफलता से 1945 तक

जड़ें कहाँ थीं

शुरुआती सफलताओं के बावजूद यह संगठन [लीग ऑव नेशंस] दूसरा विश्वयुद्ध (1939–45) न रोक सका। पहले की तुलना में इस महायुद्ध में कहीं ज्यादा लोग मारे गये और घायल हुए।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 48 — और पोस्टर का संदेश: “संयुक्त राष्ट्रसंघ की जड़ें युद्ध में थीं”

संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना

  1. 1941अगस्त — अटलांटिक चार्टर पर रूजवेल्ट और चर्चिल के हस्ताक्षर
  2. 1942जनवरी — 26 मित्र-राष्ट्र वाशिंगटन में मिले
  3. 1943दिसंबर — संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा पर हस्ताक्षर
  4. 1945फरवरी — याल्टा सम्मेलन; रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन
  5. 1945अप्रैल–मई — सेन फ्रांसिस्को में दो महीने लंबा सम्मेलन
  6. 194526 जून — चार्टर पर 50 देशों के हस्ताक्षर
  7. 194515 अक्टूबर — पोलैंड के हस्ताक्षर → 51 मूल संस्थापक सदस्य
  8. 194524 अक्टूबर — स्थापना; ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस’
  9. 194530 अक्टूबर — भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल

50 → 51

50 → 51

चार्टर पर 50 ने हस्ताक्षर किए; पोलैंड बाद में जुड़ा — इसलिए मूल संस्थापक 51

उद्देश्य

“झगड़ों को रोकना”

  • ★“संयुक्त राष्ट्रसंघ का उद्देश्य है अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना।”
  • “यह संगठन विभिन्न देशों के बीच जारी ऐसे झगड़ों को रोकने का काम करेगा जो आगे चलकर युद्ध का रूप ले सकते हैं” —
  • “और अगर युद्ध छिड़ ही जाए तो शत्रुता के दायरे को सीमित करने का काम करेगा।”
  • ★“चूँकि झगड़े अक्सर सामाजिक-आर्थिक विकास के अभाव में खड़े होते हैं इसलिए संयुक्त राष्ट्रसंघ की एक मंशा पूरे विश्व में सामाजिक-आर्थिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों को एक साथ लाने की है।”

2011 तक सदस्य देशों की संख्या — 193.

3 | संरचना | छह अंग, और एक निर्णायक भेद

छह प्रमुख अंग

अंगमुख्य नियम
★आम सभा193 सदस्य; सबको एकसमान मत; प्रमुख निर्णयों के लिए दो-तिहाई ! निर्णय बाध्यकारी नहीं
★सुरक्षा-परिषद्15 = 5 स्थायी + 10 अस्थायी; स्थायी को वीटो; अस्थायी 2 वर्ष के लिए ★निर्णय सभी पर बाध्यकारी
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय15 न्यायधीश, 9 वर्ष; आम सभा और सुरक्षा परिषद् दोनों में पूर्ण बहुमत; मुख्यालय हेग
सचिवालयप्रधान महासचिव; नियुक्ति सुरक्षा-परिषद् की सलाह पर आम सभा, 5 वर्ष के लिए
आर्थिक और सामाजिक परिषद्54 सदस्य, 3 वर्ष के लिए; सभी भौगोलिक क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व
न्यासिता परिषद्★पलाउ के आज़ाद होने पर 1 नवम्बर 1994 से स्थगित

पूरा अध्याय इसी एक भेद पर टिका है

आम सभा — निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं। सुरक्षा-परिषद् — निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 49 — संरचना-चार्ट

पाँच स्थायी सदस्य — और वे ही क्यों

चीन · फ्रांस · रूस · ब्रिटेन · अमरीका

  • ★“दूसरे विश्वयुद्ध के तुरंत बाद के समय में ये देश सबसे ज्यादा ताकतवर थे और इस महायुद्ध के विजेता भी रहे, इसलिए इन्हें स्थायी सदस्य के रूप में चुना गया।”
  • दो फायदे: सदस्यता स्थायी और ‘वीटो’ का अधिकार।
  • अस्थायी सदस्य — 2 वर्ष के लिए; ★“तत्काल बाद किसी देश को फिर से इस पद के लिए नहीं चुना जा सकता”; निर्वाचन ऐसे कि सभी महादेशों का प्रतिनिधित्व हो।

★और सबसे महत्त्वपूर्ण — “अस्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार नहीं है।”

अन्य निकाय — नाम याद रखिए

  • कार्यक्रम और कोष: UNCTAD · UNEP · UNDP · UNICEF · UNFPA · UNHCR · WFP
  • विशेष एजेंसियाँ: ILO · FAO · UNESCO · WHO · IMF · IMO · ITU
  • संबद्ध संगठन: ★IAEA (आम सभा और सुरक्षा-परिषद् दोनों के प्रति उत्तरदायी) · OPCW · WTO
  • अन्य इकाईयाँ: OHCHR · UNU · UNAIDS
  • सहायक निकाय: सैन्य समिति · अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (पूर्व यूगोस्लाविया, रवांडा) · शांति संस्थापक अभियान और मिशन

महासचिव — “संयुक्त राष्ट्रसंघ का सबसे अधिक दिखने वाला सार्वजनिक चेहरा और उसका प्रधान प्रतिनिधि।”

नौ महासचिव

#नामकालदेशपहचान
1ट्राइग्व ली1946–52नार्वेकश्मीर पर युद्धविराम के प्रयास; त्यागपत्र
2डेग हैमरशोल्ड1953–61स्वीडन★कांगो; मरणोपरांत नोबेल
3यू थांट1961–71बर्माक्यूबा मिसाइल-संकट; वियतनाम पर अमरीका की आलोचना
4कुर्त वाल्डहीम1972–81ऑस्ट्रियाबांग्लादेश राहत-अभियान
5पेरेज द कूइयार1982–91पेरुफॉकलैंड मध्यस्थता; नामीबिया
6बुतरस घाली1992–96मिस्र‘एन अजेंडा फॉर पीस’
7कोफी अन्नान1997–2006घाना★इराक हमले को अवैध कहा; 2001 का नोबेल
8बान की मून2007–16द. कोरियादूसरे एशियाई; यूएन वीमेन
9★एंटोनियो गुटेरेस2017 सेपुर्तगालनौवें; पहले UNHCR (2005–15)

4 | वीटो | अध्याय का सबसे बड़ा विवाद

एक वीटो, और सब रुक जाता है

स्थायी सदस्यों में से कोई एक अपने निषेधाधिकार (वीटो) का प्रयोग कर सकता है और इस तरह वह किसी फैसले को रोक सकता है, भले ही अन्य स्थायी सदस्यों और सभी अस्थायी सदस्यों ने उस फ़ैसले के पक्ष में मतदान किया हो।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 55

135

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सोवियत संघ/रूस द्वारा वीटो का प्रयोग (1 जून 2018 तक) — अमरीका 84 · यूके 32 · फ्रांस 18 · चीन 11

विरोध — और वह क्यों नहीं हटेगा

नैतिकता बनाम व्यावहारिकता

  • विरोध का तर्क: ★“निषेधाधिकार लोकतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के बीच बराबरी की धारणा से मेल नहीं खाता, अत: यह संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए उचित या प्रासंगिक नहीं है।”
  • पर व्यावहारिक सच्चाई: ★★“स्थायी सदस्य ऐसे सुधार के लिए शायद ही राजी होंगे।”
  • ★★“इस बात का खतरा है कि ‘वीटो’ न हो तो सन् 1945 के समान इन ताकतवर देशों की दिलचस्पी संयुक्त राष्ट्रसंघ में न रहे; इससे बाहर रहकर वे अपनी रुचि के अनुसार काम करें और उनके जुड़ाव अथवा समर्थन के अभाव में यह संगठन प्रभावकारी न रह जाए।”

★और किताब की अपनी साइड-टिप्पणी, जो मुख्य पाठ का खंडन करती है: “असल में वीटो की ज़रूरत तो कमजोर देशों को है, उनको नहीं जिनके पास पहले से बहुत ताकत है।”

5 | सुधार की माँग | सहमति है, तरीके पर नहीं

1991 के बाद बदली हुई दुनिया — सात बदलाव

“ये सच्चाइयाँ बदल गई हैं”

  • सोवियत संघ बिखर गया।
  • ★अमरीका सबसे ज्यादा ताकतवर है।
  • रूस और अमरीका के बीच संबंध अब कहीं ज्यादा सहयोगात्मक हैं।
  • ★चीन बड़ी तेजी से एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है; भारत भी तेजी से इस दिशा में अग्रसर है।
  • एशिया की अर्थव्यवस्था अप्रत्याशित दर से तरक्की कर रही है।
  • अनेक नए देश संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल हुए हैं।
  • ★नयी चुनौतियाँ — जनसंहार, गृहयुद्ध, जातीय संघर्ष, आतंकवाद, परमाण्विक प्रसार, जलवायु में बदलाव, पर्यावरण की हानि, महामारी।

संयुक्त राष्ट्रसंघ 1945 की दुनिया के हिसाब से बना था।

सुधार की असली दिक्कत — एक वाक्य में

लगभग सभी देश सहमत हैं कि दोनों ही तरह के ये सुधार जरुरी हैं। देशों के बीच में सहमति इस बात पर नहीं है कि इसके लिए दरअसल ठीक करना क्या है, कैसे करना है और कब करना है?

NCERT, अध्याय 4, पृ. 51

दो तरह के सुधार, और 1992 की तीन शिकायतें

1992 · 1 जनवरी 1997

  • दो तरह के सुधार — (1) संगठन की बनावट और प्रक्रियाओं में; (2) संगठन के न्यायाधिकार में आने वाले मुद्दों की समीक्षा।
  • 1992 में आम सभा का प्रस्ताव — तीन शिकायतें:
    • ★“सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती।”
    • ★“इसके फ़ैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है और इन फ़ैसलों पर चंद देशों का दबदबा होता है।”
    • ★“सुरक्षा परिषद् में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है।”

★1 जनवरी 1997 — कोफी अन्नान ने जाँच शुरू करवाई कि सुधार कैसे कराए जाएँ।

नए स्थायी सदस्य के लिए छह मानदंड — और हर एक की दिक्कत

मानदंडपाठ का अपना प्रति-प्रश्न
बड़ी आर्थिक ताकत“अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी होनी चाहिए?”
बड़ी सैन्य ताकत“उसके पास कितनी बड़ी सैन्य-ताकत होनी चाहिए?”
बजट में ज्यादा योगदान“कोई राष्ट्र… कितना योगदान करे कि सदस्यता हासिल कर सके?”
आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र“उसकी बड़ी जनसंख्या इसमें बाधक है या सहायक?”
लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान★“बेहतरीन रिकार्ड वाले देशों की कतार लग जाएगी। क्या ये देश प्रभावकारी होंगे?”
विश्व की विविधता की नुमाइंदगी★“कोई विश्व को सभ्यता या संस्कृति के आधार पर बाँटकर कैसे देख सकता है?”

और यही अध्याय की सबसे बड़ी ईमानदारी है

सरकारें अपने-अपने हित और महत्त्वाकांक्षाओं के लिहाज से कुछ कसौटियों को फायदेमंद तो कुछ को नुकसानदेह मानती हैं। भले ही कोई देश सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए इच्छुक न हो, वह फिर भी बता सकता है कि इन कसौटियों में दिक्कत है।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 53

2005 का शिखर सम्मेलन — छह निर्णय

60 साल पूरे होने पर

  • शांति संस्थापक आयोग का गठन।
  • ★★“यदि कोई राष्ट्र अपने नागरिकों को अत्याचारों से बचाने में असफल हो जाए तो विश्व-बिरादरी इसका उत्तरदायित्व ले — इस बात की स्वीकृति।”
  • ★मानवाधिकार परिषद् की स्थापना (2006 के 19 जून से सक्रिय)।
  • सहस्राब्दि विकास लक्ष्य को प्राप्त करने पर सहमति।
  • हर रूप-रीति के आतंकवाद की निंदा।
  • एक लोकतंत्र-कोष का गठन; ट्रस्टीशिप काउंसिल को समाप्त करने पर सहमति।

! और पाठ स्वयं कहता है — “ये मुद्दे भी संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए बड़े पेंचदार हैं।” (शांति आयोग किसमें दखल दे? आतंकवाद की सर्वमान्य परिभाषा हो सकती है?)

6 | भारत | छह आधार, चार विरोध

भारत का मूल रुख़

भारत का विश्वास है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ के अजेंडे में विकास का मामला प्रमुख होना चाहिए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए यह ज़रुरी पूर्व शर्त है।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 56–57

भारत की दावेदारी बनाम विरोध

★छह आधार! चार विरोध
विश्व में सबसे बड़ी आबादी; कुल-जनसंख्या का 1/5वाँ हिस्साकुछ देश भारत के परमाणु हथियारों को लेकर चिंतित हैं
विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्रपाकिस्तान से संबंधों की कठिनाई के कारण “अप्रभावी रहेगा”
लगभग सभी पहलकदमियों में भाग; शांति-प्रयासों में लंबे समय से ठोस भूमिकाब्राजील, जर्मनी, जापान और शायद दक्षिण अफ्रीका को भी शामिल करना पड़ेगा
तेजी से आर्थिक-शक्ति बनकर उभर रहा हैअफ्रीका और दक्षिण अमरीका को पहले प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए
बजट में नियमित योगदान; “कभी भी अपने भुगतान से चुका नहीं”
★प्रतीकात्मक महत्व — “अगर आपकी साख एक ताकतवर देश के रूप में है तो आपका प्रभाव ज्यादा होगा”

भारत की मुख्य चिंता — और एक पाठ-त्रुटि

  • ★“सुरक्षा-परिषद् की सदस्य संख्या स्थिर रही है जबकि संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा में सदस्यों की संख्या खूब बढ़ी है” → “प्रतिनिधित्वमूलक चरित्र की हानि हुई है।”
  • ! पाठ लिखता है — “संयुक्त राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या सन् 1965 में 11 से बढ़ाकर 15 कर दी गई थी” — यह सुरक्षा परिषद् है।
  • “भारत सुरक्षा परिषद् के अस्थायी और स्थायी, दोनों ही तरह के सदस्यों की संख्या में बढ़ोत्तरी का समर्थक है।”
  • “उसमें अभी की अपेक्षा ज्यादा विकासशील देश होने चाहिए।”

★पाठ का निष्कर्ष: “भारत या किसी और देश के लिए निकट भविष्य में संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य बन पाना मुश्किल लगता है।”

UN बजट में योगदान (2019) — और एक चौंकाने वाली बात

क्र.देश%क्र.देश%
1संयुक्त राज्य अमेरिका22.06फ्रांस4.4
2चीन12.010★रूस★2.4
3जापान8.511दक्षिण कोरिया2.2
4जर्मनी6.017सऊदी अरब1.1
5यू.के.4.5★21★भारत★0.8

और IMF में तो सिद्धांत ही अलग है

190 (19 फरवरी 2024 की स्थिति) देश अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सदस्य हैं लेकिन हर सदस्य की राय का वजन बराबर नहीं है। समूह-7 के सदस्यों के पास 41.29 प्रतिशत मत हैं… अकेले अमरीका के पास 16.52 प्रतिशत मताधिकार है।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 47

7 | एक-ध्रुवीय विश्व | और फिर भी अपरिहार्य

अमरीका पर अंकुश क्यों कठिन — तीन कारण

“आसानी से अंकुश नहीं लगाया जा सकता”

  • ★1. “सोवियत संघ की गैर मौजूदगी में अब अमरीका एकमात्र महाशक्ति है। अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत के बूते वह संयुक्त राष्ट्रसंघ या किसी अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन की अनदेखी कर सकता है।”
  • ★2. “संयुक्त राष्ट्रसंघ के भीतर अमरीका का खास प्रभाव है” —
    • बजट में सबसे ज्यादा योगदान; वित्तीय ताकत बेजोड़;
    • ★“संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीकी भू-क्षेत्र में स्थित है”; “कई नौकरशाह इसके नागरिक हैं।”
  • ★3. वीटो — और “महासचिव के चयन में भी अमरीका की बात बहुत वज़न रखती है।”

! “अमरीका अपनी इस ताकत के बूते शेष विश्व में फूट डाल सकता है और डालता है, ताकि उसकी नीतियों का विरोध मंद पड़ जाए।”

और फिर भी — संगठन क्यों ज़रूरी है

संयुक्त राष्ट्रसंघ ही वह जगह है जहाँ अमरीका के किसी खास रवैये और नीति की आलोचना की सुनवाई हो और कोई बीच का रास्ता निकालने तथा रियायत देने की बात कही-सोची जा सके।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 59

अध्याय का निष्कर्ष

संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी। आज विभिन्न समाजों और मसलों के बीच आपसी तार जुड़ते जा रहे हैं। इसे ‘पारस्परिक निर्भरता’ का नाम दिया जाता है। इसे देखते हुए यह कल्पना करना कठिन है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसे संगठन के बिना विश्व के सात अरब से भी ज्यादा लोग कैसे रहेंगे।

NCERT, अध्याय 4, पृ. 59

चार अन्य संगठन — एक तालिका में

संगठनस्थापनामुख्य कामविशेष तथ्य
IMF—वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देखरेख190 सदस्य (2024); “हर सदस्य की राय का वजन बराबर नहीं”
विश्व बैंक1944मानवीय विकास, कृषि, पर्यावरण, आधारभूत ढाँचा, सुशासन“ज्यादा गरीब देशों को ये अनुदान वापिस नहीं चुकाने पड़ते”
WTO1995वैश्विक व्यापार के नियमGATT का उत्तराधिकारी; 164 सदस्य (2016)
IAEA1957परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोगआम सभा और सुरक्षा-परिषद् दोनों के प्रति उत्तरदायी

दो स्वयंसेवी संगठन

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल — “पूरे विश्व में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलाता है”; रिपोर्ट “सरकारों को अक्सर नागवार लगती हैं क्योंकि एमनेस्टी का ज्यादा जोर सरकारों द्वारा किए जा रहे दुर्व्यवहार पर होता है।”
  • ★ह्यूमन राइट्स वॉच — “अमरीका का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन।”
    • “दुनिया भर के मीडिया का ध्यान मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर खींचता है।”
    • ★“इसने बारूदी सुरंगों पर रोक लगाने के लिए, बाल सैनिकों का प्रयोग रोकने के लिए और अंतर्राष्ट्रीय दंड न्यायालय स्थापित करने के लिए अभियान चलाने में मदद की है।”

दोनों प्रश्नावली के प्रश्न 6(च) का उत्तर हैं।

8 | निचोड़ | एक विरोधाभास, आठ कदम

पूरा अध्याय एक स्लाइड में

  • क्यों चाहिए — “हर मर्ज़ की दवा नहीं लेकिन महत्त्वपूर्ण ज़रूर”; “नरक से बचाने के लिए।”
  • यह क्या है — ★“कोई शक्तिशाली राज्य नहीं… राज्य ही इसका निर्माण करते हैं।”
  • कैसे बना — लीग की विफलता → 1941 अटलांटिक चार्टर → 1945 याल्टा और सेन फ्रांसिस्को → 24 अक्टूबर 1945; 51 संस्थापक; भारत 30 अक्टूबर।
  • शक्ति कहाँ — ★सुरक्षा-परिषद् में; उसके निर्णय बाध्यकारी हैं, आम सभा के नहीं।
  • दिक्कत — 1945 का ढाँचा, आज की दुनिया; 1992 की तीन शिकायतें।
  • सुधार क्यों नहीं — ★वीटो; और यह डर कि उसके बिना ताकतवर देश बाहर चले जाएँगे।
  • भारत — छह आधार, चार विरोध, और “निकट भविष्य में मुश्किल लगता है।”
  • फिर भी — ★★“इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी।”

★“प्रौद्योगिकी यह सिद्ध कर रही है कि आने वाले दिनों में विश्व में पारस्परिक निर्भरता बढ़ती जाएगी। इसलिए, संयुक्त राष्ट्रसंघ का महत्त्व भी निरंतर बढ़ेगा।”

और एक सवाल, जो अध्याय के बाद भी बचा रहता है

क्या हम पाँच बड़े दादाओं की दादागिरी खत्म करना चाहते हैं या उनमें शामिल होकर एक और दादा बनना चाहते हैं?

NCERT, अध्याय 4, पृ. 57 — साइड-बॉक्स