अध्याय 4अंतर्राष्ट्रीय संगठन

शिक्षण नोट्स54 मिनटस्रोत जाँचे गए

NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 45–62 (18 पृष्ठ)।

पाठ्यपुस्तक का पूरा पाठ, पृष्ठ-संदर्भ सहित। यह शिक्षक की फाइल है — पढ़ाने से पहले एक बार पूरी पढ़िए।

PDF वर्गीकरण: LEGACY — 37/37 फॉन्ट 8-बिट एन्कोडेड; 18 पृष्ठ-चित्र दृष्टि से पढ़े गए।

पढ़ाने से पहले — तीन संरचनात्मक बातेंध्यान

(1) यह अध्याय पहले ‘अध्याय 6’ था। QR कोड 12108CH06। पैटर्न अब चारों अध्यायों में पुष्ट है —

पुरानाअध्यायअबQR
1शीतयुद्ध का दौर❌ हटाया—
2दो ध्रुवीयता का अंत✓ अध्याय 112108CH02
3समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व❌ हटाया—
4सत्ता के समकालीन केन्द्र✓ अध्याय 212108CH04
5समकालीन दक्षिण एशिया✓ अध्याय 312108CH05
6अंतर्राष्ट्रीय संगठन✓ अध्याय 4 (यही)12108CH06

(2) ! और यह अध्याय हटाए गए अध्याय पर सबसे ज्यादा टिका है। इसका परिचय ही कहता है —

“इन्हीं चुनौतियों में एक थी अमरीका की शक्ति का बढ़ना… इस अध्याय का अंत इस सवाल से किया गया है कि क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ ऐसे विश्व में कोई भूमिका निभा सकता है जिसमें किसी एक महाशक्ति का दबदबा हो।”

और अध्याय का पूरा अंतिम खंड — ‘एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ’ (पृ. 58–60) — उसी प्रश्न पर है। ‘अमरीकी वर्चस्व’ का अर्थ बताए बिना यह खंड पढ़ाया नहीं जा सकता।

(3) !! पृ. 57 पर एक स्पष्ट पाठ-त्रुटि है। लिखा है —

“संयुक्त राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या सन् 1965 में 11 से बढ़ाकर 15 कर दी गई थी।”

यह सुरक्षा परिषद् की सदस्य संख्या है, संयुक्त राष्ट्रसंघ की नहीं। 1965 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सौ से अधिक सदस्य थे। कक्षा में यह सुधार बोलकर बताइए। विवरण 10-Verification-Log.md §V-3 में।

अध्याय की संरचना

क्रमखंडपृष्ठ
—परिचय45
1हमें अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्यों चाहिए?46–48
2संयुक्त राष्ट्रसंघ का विकास48–50
3संयुक्त राष्ट्रसंघ की संरचना (चार्ट)49
4शीतयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार50–52
5प्रक्रियाओं और ढाँचे में सुधार52–55
6संयुक्त राष्ट्रसंघ का न्यायाधिकार55–56
7संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार और भारत56–58
8एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ58–60
—प्रश्नावली — प्रश्न 1 से 1260–62

परिचय (पृ. 45)

  • “इस अध्याय में हम सोवियत संघ के बिखरने के बाद अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका के बारे में पढ़ेंगे।”
  • “एक उभरते हुए विश्व में नयी चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के पुनर्निर्माण की बातें हो रही थीं।”
  • ! “इन्हीं चुनौतियों में एक थी अमरीका की शक्ति का बढ़ना।”
  • “सुधार की प्रक्रियाओं और उनकी कठिनाइयों की एक मिसाल संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा-परिषद् में होने वाला बदलाव है।”
  • “संयुक्त राष्ट्रसंघ से भारत का जुड़ाव और सुरक्षा परिषद् के सुधारों को लेकर उसका विशेष दृष्टिकोण अपने आप में जानकारी का एक अहम विषय है।”
  • ★अध्याय का केंद्रीय प्रश्न: “क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ ऐसे विश्व में कोई भूमिका निभा सकता है जिसमें किसी एक महाशक्ति का दबदबा हो?”

प्रतीक-चिह्न (पृ. 45): “यह संयुक्त राष्ट्रसंघ का प्रतीक चिह्न है। इसमें दुनिया का नक़्शा बना हुआ है और इसके चारों तरफ जैतून की पत्तियाँ हैं। ये पत्तियाँ विश्व शांति का संकेत करती हैं।”

1. हमें अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्यों चाहिए? (पृ. 46–48)

1.1 दो उद्धरण — अध्याय के सबसे यादगार वाक्य★★

★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ का गठन मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि उसे नरक से बचाने के लिए हुआ है।” — डेग हैमरसोल्ड; संयुक्त राष्ट्रसंघ के दूसरे महासचिव

★★“बतकही की चौपाल, ठीक कहा आपने! संयुक्त राष्ट्रसंघ में खूब बैठकें होती हैं, दनादन भाषण होते हैं — ख़ासकर आम सभा के वार्षिक सत्र में। लेकिन, जैसा कि चर्चिल कहते थे, हथियार लड़ाने से बढ़िया है कि ज़बान लड़ाई जाए। क्या यह बात बेहतर नहीं कि एक ऐसी जगह भी हो जहाँ दुनिया के सारे देश इकट्ठे हों और कभी-कभार अपनी बातों से एक-दूसरे का सर खाएँ, बनिस्पत लड़ाई के मैदान में एक-दूसरे का सर कलम करने के?” — शशि थरूर; संयुक्त राष्ट्रसंघ में सार्वजनिक सूचना और संचार के पूर्व अवर सचिव

★पाठ का निष्कर्ष: “ये दो उद्धरण एक महत्त्वपूर्ण बात की तरफ इशारा करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठन हर मर्ज़ की दवा नहीं लेकिन वे महत्त्वपूर्ण ज़रूर हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठन युद्ध और शांति के मामलों में मदद करते हैं। वे देशों की सहायता करते हैं ताकि हम सब की बेहतर जीवन-स्थितियाँ कायम हों।”

1.2 तीन कारण★

(क) युद्ध टालने का मंच

  • “देशों के बीच मनमुटाव और झगड़े होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अपने वैर-विरोध के कारण वे एक-दूसरे से युद्ध ठान लें। इसकी जगह वे विभेद के मसलों पर बातचीत कर सकते हैं और उसका एक शांतिपूर्ण समाधान ढूँढ़ सकते हैं।”
  • ★“वस्तुत: अधिकांश झगड़ों और विभेदों का समाधान बिना युद्ध के ही किया जाता है, लेकिन यह एक ऐसा तथ्य है जिस पर कम ध्यान जाता है।”

(ख) ★★अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्या नहीं है — यह सबसे महत्वपूर्ण परिभाषा है

★★“अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो। अंतर्राष्ट्रीय संगठन का निर्माण विभिन्न राज्य ही करते हैं और यह उनके मामलों के लिए जवाबदेह होता है। जब राज्यों में इस बात पर सहमति होती है कि कोई अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनना चाहिए, तभी ऐसे संगठन कायम होते हैं। एक बार इनका निर्माण हो जाए तो ये समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान में सदस्य देशों की मदद करते हैं।”

(ग) साझे काम, जो अकेले नहीं हो सकते

  • बीमारी: “कुछ रोगों को तब ही खत्म किया जा सकता है जब विश्व का हर देश अपनी आबादी को टीके लगाने में सहयोग करे।”
  • ★‘ग्लोबल वार्मिंग’ (विश्वव्यापी तापवृद्धि): “वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने से तापमान बढ़ रहा है। इससे समुद्रतल की ऊँचाई बढ़ने का ख़तरा है। अगर ऐसा हुआ तो विश्व के समुद्रतटीय इलाके जिसमें बड़े-बड़े शहर भी शामिल हैं, डूब जाएँगे।” — “सबसे प्रभावकारी समाधान तो यही है कि वैश्विक तापवृद्धि को रोका जाए। इसके लिए विश्व के बड़े औद्योगिक देशों का सहयोग करना जरुरी है।”

1.3 सहयोग की असली दिक्कत★★

★“दुर्भाग्य से, सहयोग की ज़रूरत को पहचानना और सचमुच में सहयोग करना दो अलग-अलग बातें हैं। देश सहयोग करने की ज़रूरत को पहचान सकते हैं लेकिन सहयोग का सबसे बेहतर तरीका क्या हो — इस पर हमेशा उनके बीच सहमति नहीं हो सकती।”

चार विवाद-बिंदु:

  1. “सहयोग में आने वाली लागत का भार कौन कितना उठाए”;
  2. “सहयोग से होने वाले लाभ का आपसी बँटवारा न्यायोचित ढंग से कैसे हो”;
  3. “मोल-तोल के बाद जो तय हो जाए उससे कोई मुकरे नहीं”;
  4. “आपसी समझौते के बाद जो बातें तय हुई हैं उनसे कोई भी दग़ा न करे।”

★★और यहीं संगठन काम आता है: “एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन सहयोग करने के उपाय और सूचनाएँ जुटाने में मदद कर सकता है। ऐसा संगठन नियमों और नौकरशाही की एक रूपरेखा दे सकता है ताकि सदस्यों को यह विश्वास हो कि आने वाली लागत में सबकी समुचित साझेदारी होगी, लाभ का बँटवारा न्यायोचित होगा और कोई सदस्य एक बार समझौते में शामिल हो जाता है तो वह इस समझौते के नियम और शर्तों का पालन करेगा।” (पृ. 48)

1.4 कार्टून (पृ. 46) — लेबनान, 2006

“जून 2006 के दौरान इजराइल ने लेबनान पर हमला किया। उसका कहना था कि उग्रवादी गुट हिजबुल्लाह पर नियंत्रण करने के लिए हमला ज़रूरी है। भारी संख्या में आम नागरिक मारे गए। कई सार्वजनिक इमारत और रिहायशी इलाके इजराइली बमबारी की चपेट में आए। ★संयुक्त राष्ट्रसंघ ने इस मामले पर एक प्रस्ताव बहुत बाद यानी अगस्त में पास किया और इजराइली सेना इस इलाके से अक्टूबर में ही वापस हो सकी। ये दोनों कार्टून इस संकट में संयुक्त राष्ट्रसंघ और उसके महासचिव की भूमिका पर टिप्पणी करते हैं।”

कक्षा के लिए: यह अध्याय का एकमात्र ठोस उदाहरण है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ कैसे विफल होता है — देर से बोलता है। प्रश्न 11 में यही आलोचना का आधार है।

1.5 बॉक्स — अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) (पृ. 47)★

मदतथ्य
काम“वैश्विक स्तर की वित्त-व्यवस्था की देखरेख करता है और माँगे जाने पर वित्तीय तथा तकनीकी सहायता मुहैया करता है।”
★सदस्य190 (19 फरवरी 2024 की स्थिति) देश
★★मुख्य बात“हर सदस्य की राय का वजन बराबर नहीं है।”
समूह-7 का मत★41.29 प्रतिशत — अमरीका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और कनाडा
अन्य अग्रणीचीन 6.09% · भारत 2.64% · रूस 2.59% · ब्राजील 2.22% · सऊदी अरब 2.02%
★अकेले अमरीका16.52 प्रतिशत मताधिकार

2. संयुक्त राष्ट्रसंघ का विकास (पृ. 48–50)

2.1 ‘लीग ऑव नेशंस’ — और उसकी विफलता★

  • “पहले विश्वयुद्ध ने दुनिया को इस बात के लिए जगाया कि झगड़ों के निपटारे के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाने का प्रयास ज़रूर किया जाना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप ‘लीग ऑव नेशंस’ का जन्म हुआ।”
  • ★“शुरुआती सफलताओं के बावजूद यह संगठन दूसरा विश्वयुद्ध (1939–45) न रोक सका। पहले की तुलना में इस महायुद्ध में कहीं ज्यादा लोग मारे गये और घायल हुए।”
  • ★पोस्टर (पृ. 48) का संदेश: “यह पोस्टर एक अर्थ में महत्त्वपूर्ण है। यह दिखाता है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ की जड़ें युद्ध में थीं।” (1942 की घोषणा के आधार पर, 1943 में अमरीका के युद्ध सूचना विभाग द्वारा तैयार)

2.2 संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना (पृ. 48 का बॉक्स) —परीक्षा का सबसे बड़ा स्रोत★★

तिथिघटना
★अगस्त 1941अमरीकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट और ब्रितानी प्रधानमंत्री चर्चिल द्वारा अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर।
★जनवरी 1942धुरी शक्तियों के खिलाफ लड़ रहे 26 मित्र-राष्ट्र अटलांटिक चार्टर के समर्थन में वाशिंगटन में मिले, और दिसंबर 1943 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा पर हस्ताक्षर हुए।
★फरवरी 1945तीन बड़े नेताओं (रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन) ने याल्टा सम्मेलन में प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय संगठन के बारे में संयुक्त राष्ट्रसंघ का एक सम्मेलन करने का निर्णय किया।
अप्रैल–मई 1945सेन फ्रांसिस्को में संयुक्त राष्ट्रसंघ का अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाने के मसले पर केंद्रित दो महीने लंबा सम्मेलन संपन्न।
★★26 जून 1945संयुक्त राष्ट्रसंघ चार्टर पर 50 देशों के हस्ताक्षर। पोलैंड ने 15 अक्टूबर को हस्ताक्षर किए। इस तरह संयुक्त राष्ट्रसंघ में 51 मूल संस्थापक सदस्य हैं।
★★24 अक्टूबर 1945संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना। 24 अक्टूबर संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस।
★30 अक्टूबर 1945भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल।

! 50 बनाम 51 का भेद परीक्षा में सीधे पूछा जाता है — 26 जून को 50 ने हस्ताक्षर किए; पोलैंड बाद में जुड़ा; इसलिए मूल संस्थापक 51।

2.3 उद्देश्य और चरित्र (पृ. 50)★

  • “‘लीग ऑव नेशंस’ के उत्तराधिकारी के रूप में संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना हुई।”
  • ★उद्देश्य: “अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना।”
  • आशा: “यह संगठन विभिन्न देशों के बीच जारी ऐसे झगड़ों को रोकने का काम करेगा जो आगे चलकर युद्ध का रूप ले सकते हैं और अगर युद्ध छिड़ ही जाए तो शत्रुता के दायरे को सीमित करने का काम करेगा।”
  • ★“चूँकि झगड़े अक्सर सामाजिक-आर्थिक विकास के अभाव में खड़े होते हैं इसलिए संयुक्त राष्ट्रसंघ की एक मंशा पूरे विश्व में सामाजिक-आर्थिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों को एक साथ लाने की है।”
  • ★“2011 तक संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य देशों की संख्या 193 थी। इसमें लगभग सभी स्वतंत्र देश शामिल हैं।”
  • “संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा में हरेक सदस्य को एक वोट हासिल है।”
  • ★पाँच स्थायी सदस्य — अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन। “दूसरे विश्वयुद्ध के तुरंत बाद के समय में ये देश सबसे ज्यादा ताकतवर थे और इस महायुद्ध के विजेता भी रहे, इसलिए इन्हें स्थायी सदस्य के रूप में चुना गया।”

2.4 महासचिव (पृ. 50)★

★“संयुक्त राष्ट्रसंघ का सबसे अधिक दिखने वाला सार्वजनिक चेहरा और उसका प्रधान प्रतिनिधि महासचिव होता है।”

मदतथ्य
वर्तमान महासचिव★एंटोनियो गुटेरेस
कौन-से★नौवें महासचिव
पद कब संभाला★1 जनवरी 2017
पृष्ठभूमि1995 से 2002 तक पुर्तगाल के प्रधानमंत्री; 2005 से 2015 तक यूनाइटेड नेशंस हाई कमीशनर फॉर रिफ्यूजीज; सोशलिस्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष (1999–2005)

प्रमुख एजेंसियाँ (पृ. 50 में नामित): WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन), UNDP (विकास कार्यक्रम), UNHRC (मानवाधिकार आयोग), UNHCR (शरणार्थी उच्चायोग), UNICEF (बाल कोष), UNESCO (शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन)।

3. संयुक्त राष्ट्रसंघ की संरचना (पृ. 49 का चार्ट)★★

3.1 छह प्रमुख अंग

अंगसंरचना और नियम
★★सुरक्षा-परिषद्15 सदस्य। पाँच स्थायी सदस्यों — चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमरीका — को वीटो (निषेधाधिकार) का अधिकार। दस अस्थायी सदस्यों का चुनाव आम सभा द्वारा दो वर्षों के लिए। ★निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी।
★★आम सभा193 सदस्यों के प्रतिनिधि। सभी को एकसमान मत। प्रमुख निर्णयों के लिए दो तिहाई और बाकी में सामान्य बहुमत की जरूरत। ★निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय15 न्यायधीशों का चुनाव 9 वर्षों के लिए, आम सभा और सुरक्षा परिषद् दोनों में पूर्ण बहुमत द्वारा। ★मुख्यालय हेग में।
सचिवालयअन्य प्रमुख संगठनों के कार्यों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्टाफ। इसका प्रधान महासचिव होता है, जिसकी नियुक्ति सुरक्षा-परिषद् की सलाह पर आम सभा पाँच सालों के लिए करती है।
आर्थिक और सामाजिक परिषद्सदस्य देशों का चुनाव आम सभा द्वारा तीन वर्षों के लिए। सभी भौगोलिक क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देते हुए 54 सदस्य।
★न्यासिता परिषद्संयुक्त राष्ट्रसंघ की न्यासिता प्रणाली के अंतर्गत आने वाली अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के आजाद होने के साथ 1 नवम्बर 1994 से यह परिषद् स्थगित।

★★सुरक्षा-परिषद् बनाम आम सभा — सबसे महत्वपूर्ण भेद: सुरक्षा-परिषद् के निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी हैं; आम सभा के नहीं। यही पूरे अध्याय की शक्ति-कुंजी है।

3.2 अन्य निकाय (चार्ट से)

श्रेणीसंस्थाएँ
कार्यक्रम और कोषUNCTAD (व्यापार एवं विकास सम्मेलन) · UNEP (पर्यावरण) · UNDP (विकास) · UNICEF (बालकोष) · UNFPA (जनसंख्या-कोष) · UNHCR (शरणार्थी उच्चायोग) · WFP (विश्व खाद्य कार्यक्रम)
विशेष एजेंसियाँ (वित्तीय सहायता के बिना)ILO · FAO · UNESCO · WHO · IMF · IMO · ITU
संबद्ध संगठन★IAEA (आम सभा और सुरक्षा-परिषद् दोनों के प्रति उत्तरदायी) · OPCW (रासायनिक हथियारों पर निषेध) · WTO
सहायक निकायसैन्य समिति · अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (पूर्व यूगोस्लाविया, रवांडा) · शांति संस्थापक अभियान और मिशन · समितियाँ और तदर्थ निकाय
अन्य इकाईयाँOHCHR (मानवाधिकार उच्चायोग) · UNU (विश्वविद्यालय) · UNAIDS
विशेष कार्यों के आयोगमानवाधिकार, मादक द्रव्य, टिकाऊ विकास, महिलाओं की स्थिति
क्षेत्रीय आयोगआर्थिक आयोग (अफ्रीका, यूरोप, दक्षिण अमरीका और कैरेबियाई देश); आर्थिक और सामाजिक आयोग (एशिया-प्रशांत और पश्चिम एशिया)
शोध और प्रशिक्षणUNRISD

! चार्ट में एक असंगति: विशेष एजेंसियों में “अंतर्राष्ट्रीय मौसम-विज्ञान संगठन (IMO)” लिखा है। मौसम-विज्ञान संगठन का संक्षिप्त नाम WMO है; IMO समुद्री (Maritime) संगठन है। देखिए 10-Verification-Log.md §V-4.

4. शीतयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार (पृ. 50–52)

4.1 1991 से आए सात बदलाव (पृ. 52)★

“संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना दूसरे विश्वयुद्ध के तत्काल बाद सन् 1945 में हुई थी। इस महायुद्ध के बाद विश्व राजनीति की जो सच्चाइयाँ थीं उसी के अनुरूप इसका गठन हुआ… शीतयुद्ध के बाद ये सच्चाइयाँ बदल गई हैं। 1991 से आए बदलावों में से कुछ निम्नलिखित हैं —”

  1. सोवियत संघ बिखर गया।
  2. ★अमरीका सबसे ज्यादा ताकतवर है।
  3. सोवियत संघ के उत्तराधिकारी राज्य रूस और अमरीका के बीच अब संबंध कहीं ज्यादा सहयोगात्मक हैं।
  4. ★चीन बड़ी तेजी से एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है; भारत भी तेजी से इस दिशा में अग्रसर है।
  5. एशिया की अर्थव्यवस्था अप्रत्याशित दर से तरक्की कर रही है।
  6. अनेक नए देश संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल हुए हैं (सोवियत संघ से आज़ाद हुए देश अथवा पूर्वी यूरोप के भूतपूर्व साम्यवादी देश)।
  7. ★“विश्व के सामने चुनौतियों की एक पूरी नयी कड़ी (जनसंहार, गृहयुद्ध, जातीय संघर्ष, आतंकवाद, परमाण्विक प्रसार, जलवायु में बदलाव, पर्यावरण की हानि, महामारी) मौजूद है।”

4.2 दो तरह के सुधार (पृ. 51)★★

“संयुक्त राष्ट्रसंघ के सामने दो तरह के बुनियादी सुधारों का मसला है।”

#किस तरह का सुधार
1★“इस संगठन की बनावट और इसकी प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए।”
2★“इस संगठन के न्यायाधिकार में आने वाले मुद्दों की समीक्षा की जाए।”

★★और यही अध्याय का सबसे सटीक वाक्य है: “लगभग सभी देश सहमत हैं कि दोनों ही तरह के ये सुधार जरुरी हैं। देशों के बीच में सहमति इस बात पर नहीं है कि इसके लिए दरअसल ठीक करना क्या है, कैसे करना है और कब करना है?”

बनावट और प्रक्रियाओं में सुधार — बहस के तीन बिंदु:

  • ★सबसे बड़ी बहस सुरक्षा परिषद् के कामकाज को लेकर;
  • माँग — “सुरक्षा परिषद् में स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ायी जाए ताकि समकालीन विश्व राजनीति की वास्तविकताओं की इस संगठन में बेहतर नुमाइंदगी हो सके”;
  • ★“ख़ास तौर से एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमरीका के ज्यादा देशों को सुरक्षा-परिषद् में सदस्यता देने की बात उठ रही है”;
  • “इसके अतिरिक्त, अमरीका और पश्चिमी देश संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट से जुड़ी प्रक्रियाओं और इसके प्रशासन में सुधार चाहते हैं।”

न्यायाधिकार का सवाल — दो विरोधी इच्छाएँ:

  • कुछ देश और विशेषज्ञ चाहते हैं कि संगठन शांति और सुरक्षा से जुड़े मिशनों में ज्यादा प्रभावकारी अथवा बड़ी भूमिका निभाए;
  • औरों की इच्छा है कि यह संगठन अपने को विकास तथा मानवीय भलाई के कामों (स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, जनसंख्या नियंत्रण, मानवाधिकार, लिंगगत न्याय और सामाजिक न्याय) तक सीमित रखे।

4.3 महासचिवों का बॉक्स (पृ. 51)★★

#महासचिवकालदेशमुख्य बातें
1ट्राइग्व ली1946–1952नार्वेवकील और विदेश मंत्री; ★कश्मीर को लेकर भारत-पाक लड़ाई में युद्धविराम के लिए प्रयास; कोरिया-युद्ध शीघ्र समाप्त करवाने में नाकामयाब रहने पर आलोचना; दोबारा बनाने का सोवियत संघ ने विरोध किया; ★पद से त्यागपत्र
2डेग हैमरशोल्ड1953–1961स्वीडनअर्थशास्त्री और वकील; स्वेज नहर विवाद और अफ्रीका के अनौपनिवेशीकरण के लिए काम; ★कांगो-संकट के प्रयासों के लिए मरणोपरांत नोबेल शांति पुरस्कार; सोवियत संघ और फ्रांस ने आलोचना की
3यू थांट1961–1971बर्मा (म्यांमार)शिक्षक और राजनयिक; ★क्यूबा के मिसाइल-संकट के समाधान और कांगो-संकट की समाप्ति के लिए प्रयास; साइप्रस में शांतिसेना बहाल की; वियतनाम युद्ध के दौरान अमरीका की आलोचना की
4कुर्त वाल्डहीम1972–1981ऑस्ट्रियाकूटनयिक और विदेशमंत्री; नामीबिया और लेबनॉन की समस्याओं पर प्रयास; ★बांग्लादेश में राहत-अभियान की देख-रेख; तीसरी बार की दावेदारी का चीन ने विरोध किया
5जेवियर पेरेज द कूइयार1982–1991पेरुवकील और राजनयिक; साइप्रस, अफगानिस्तान और अल सल्वाडोर में शांति-स्थापना; नामीबिया की आज़ादी के लिए मध्यस्थता; ★फॉकलैंड युद्ध के बाद ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच मध्यस्थता
6बुतरस बुतरस घाली1992–1996मिस्रराजनयिक, विधिवेत्ता और विदेशमंत्री; ★‘एन अजेंडा फॉर पीस’ रिपोर्ट; मोजांबिक में सफल अभियान; ! बोस्निया, सोमालिया और रवांडा की असफलताओं के आरोप; अमरीका ने दुबारा बनने का विरोध किया
7कोफी ए. अन्नान1997–2006घानासंयुक्त राष्ट्रसंघ के अधिकारी; ★एड्स, टीबी और मलेरिया से लड़ने के लिए वैश्विक कोष; ★अमरीकी नेतृत्व में इराक पर हमले को अवैध करार दिया; 2005 में मानवाधिकार परिषद् तथा शांति संस्थापक आयोग की स्थापना; ★2001 का नोबेल शांति पुरस्कार
8बान की मून2007–2016कोरिया गणराज्यकूटनयिक और विदेशमंत्री; ★इस पद पर बैठने वाले दूसरे एशियाई; जलवायु परिवर्तन पर प्रकाश; सहस्राब्दि और सतत विकास लक्ष्य; ★यूएन वीमेन के निर्माण के लिए काम; युद्ध वियोजन और परमाणु निरस्त्रीकरण पर जोर
9★अन्तोनियो गुटेरेस2017 सेपुर्तगालपुर्तगाल के प्रधानमंत्री (1995–2002); UNHCR (2005–2015); सोशलिस्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष (1999–2005); ★नवें महासचिव

चित्र (पृ. 52): बान की मून, 2015 में नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र की 70वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने की शुरुआत करते हुए।

5. प्रक्रियाओं और ढाँचे में सुधार (पृ. 52–55)

5.1 1992 का प्रस्ताव — तीन शिकायतें★★

“सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा में एक प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। प्रस्ताव में तीन मुख्य शिकायतों का जिक्र था —”

  1. ★“सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती।”
  2. ★“इसके फ़ैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है और इन फ़ैसलों पर चंद देशों का दबदबा होता है।”
  3. ★“सुरक्षा परिषद् में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है।”

★“एक जनवरी 1997 को संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव कोफी अन्नान ने जाँच शुरू करवाई कि सुधार कैसे कराए जाएँ। मिसाल के तौर पर यही कि क्या सुरक्षा परिषद् के नए सदस्य चुने जाने चाहिए?”

5.2 नए सदस्य के लिए छह मानदंड (पृ. 53)★★

“सुझाव आए कि एक नए सदस्य को —”

  1. ★बड़ी आर्थिक ताकत होना चाहिए।
  2. ★बड़ी सैन्य ताकत होना चाहिए।
  3. ★संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में ऐसे देश का योगदान ज्यादा हो।
  4. ★आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र हो।
  5. ★ऐसा देश जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान करता हो।
  6. ★यह देश ऐसा हो कि अपने भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिहाज से विश्व की विविधता की नुमाइंदगी करता हो।

★★और फिर पाठ स्वयं इन्हें तोड़ता है: “स्पष्ट है कि इन मानदंडों में से हर एक की कुछ न कुछ वैधता है। सरकारें अपने-अपने हित और महत्त्वाकांक्षाओं के लिहाज से कुछ कसौटियों को फायदेमंद तो कुछ को नुकसानदेह मानती हैं। भले ही कोई देश सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए इच्छुक न हो, वह फिर भी बता सकता है कि इन कसौटियों में दिक्कत है।”

पाठ के अपने प्रति-प्रश्न: अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी हो? सैन्य-ताकत कितनी? बजट में कितना योगदान? बड़ी जनसंख्या बाधक है या सहायक? — और सबसे तीखा: “अगर लोकतंत्र और मानवाधिकार के प्रति सम्मान ही कसौटी हो तो इस मामले में बेहतरीन रिकार्ड वाले देशों की कतार लग जाएगी। सवाल यह है कि क्या ये देश ‘परिषद्’ के सदस्य के रूप में प्रभावकारी होंगे?”

5.3 प्रतिनिधित्व का मसला (पृ. 54)★

  • भौगोलिक बराबरी? “क्या एशिया, अफ्रीका, लातिनी अमरीका और कैरेबियाई क्षेत्र की एक-एक सीट सुरक्षा परिषद् में होनी चाहिए?”
  • महादेश बनाम क्षेत्र-उपक्षेत्र?
  • आर्थिक विकास के आधार पर? — “अगर आर्थिक विकास को आधार मानें तब भी कठिनाई है। विकासशील देश विकास की अलग-अलग सीढ़ियों पर खड़े हैं।”
  • ★संस्कृति के आधार पर? — “कोई विश्व को सभ्यता या संस्कृति के आधार पर बाँटकर कैसे देख सकता है जब कि किसी एक ही राष्ट्र के भीतर विभिन्न संस्कृति-धाराएँ उपस्थित होती हैं?”

5.4 वीटो — सबसे बड़ा विवाद (पृ. 54–55)★★

  • “कुछ का जोर था कि पाँच स्थायी सदस्यों को दिया गया निषेधाधिकार (वीटो पावर) खत्म होना चाहिए।”
  • ★“अनेक का मानना था कि निषेधाधिकार लोकतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के बीच बराबरी की धारणा से मेल नहीं खाता, अत: यह संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए उचित या प्रासंगिक नहीं है।”

नियम — जैसे मुद्रित हैं:

  • ★“दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में स्थिरता कायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के घोषणापत्र में पाँच स्थायी सदस्यों को विशेष हैसियत दी गई।”
  • “पाँच स्थायी सदस्यों को मुख्य फायदा था कि सुरक्षा-परिषद् में उनकी सदस्यता स्थायी होगी और उन्हें ‘वीटो’ का अधिकार होगा।”
  • ★“अस्थायी सदस्य दो वर्षों के लिए चुने जाते हैं… दो साल की अवधि तक अस्थायी सदस्य रहने के तत्काल बाद किसी देश को फिर से इस पद के लिए नहीं चुना जा सकता। अस्थायी सदस्यों का निर्वाचन इस तरह से होता है कि विश्व के सभी महादेशों का प्रतिनिधित्व हो सके।”
  • ★★“सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अस्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार नहीं है। सुरक्षा-परिषद् में फैसला मतदान के जरिए होता है। हर सदस्य को एक वोट का अधिकार होता है। बहरहाल, स्थायी सदस्यों में से कोई एक अपने निषेधाधिकार (वीटो) का प्रयोग कर सकता है और इस तरह वह किसी फैसले को रोक सकता है, भले ही अन्य स्थायी सदस्यों और सभी अस्थायी सदस्यों ने उस फ़ैसले के पक्ष में मतदान किया हो।”

★★वीटो क्यों नहीं हटेगा — पाठ का अपना तर्क: “निषेधाधिकार को समाप्त करने की मुहिम तो चली है लेकिन इस बात की भी समझ बनी है कि स्थायी सदस्य ऐसे सुधार के लिए शायद ही राजी होंगे। शीतयुद्ध भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन संभव है कि विश्व अभी इतने आमूल-चूल बदलाव के लिए तैयार न हो। इस बात का खतरा है कि ‘वीटो’ न हो तो सन् 1945 के समान इन ताकतवर देशों की दिलचस्पी संयुक्त राष्ट्रसंघ में न रहे; इससे बाहर रहकर वे अपनी रुचि के अनुसार काम करें और उनके जुड़ाव अथवा समर्थन के अभाव में यह संगठन प्रभावकारी न रह जाए।”

★साइड-टिप्पणी (पृ. 55): “यह बात बिलकुल ग़लत है। असल में वीटो की ज़रूरत तो कमजोर देशों को है, उनको नहीं जिनके पास पहले से बहुत ताकत है।”

5.5 वीटो का इस्तेमाल — आँकड़े (पृ. 55,1 जून 2018 तक)★★

देशवीटो का प्रयोग
★सोवियत संघ / रूस135
अमरीका84
यूके32
फ्रांस18
चीन11

5.6 संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में योगदान (पृ. 53,2019)

क्र.देश%क्र.देश%
1★संयुक्त राज्य अमेरिका22.012ऑस्ट्रेलिया2.2
2★चीन12.013स्पेन2.1
3जापान8.514तुर्की1.3
4जर्मनी6.015नीदरलैंड1.3
5यू.के.4.516मैक्सिको1.2
6फ्रांस4.417सऊदी अरब1.1
7इटली3.318स्विटज़रलैंड1.1
8ब्राज़ील2.919अर्जेंटीना0.9
9कनाडा2.720स्वीडन0.9
10रूस2.4★21★भारत★0.8
11दक्षिण कोरिया2.2

★कक्षा के लिए दो चौंकाने वाली बातें: रूस केवल 10वें स्थान पर (2.4%) है, और भारत 21वें (0.8%) — जबकि दोनों सुरक्षा परिषद् की चर्चा के केंद्र में हैं। और चीन अब दूसरे स्थान (12.0%) पर है।

5.7 बॉक्स — विश्व बैंक (पृ. 53)

  • ★“दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सन् 1944 में विश्व बैंक की औपचारिक स्थापना हुई।”
  • “इस बैंक की गतिविधियाँ प्रमुख रूप से विकासशील देशों से संबंधित हैं।”
  • काम के क्षेत्र: मानवीय विकास (शिक्षा, स्वास्थ्य), कृषि और ग्रामीण विकास (सिंचाई, ग्रामीण सेवाएँ), पर्यावरण सुरक्षा (प्रदूषण में कमी, नियमों का निर्माण और उन्हें लागू करना), आधारभूत ढाँचा (सड़क, शहरी विकास, बिजली) तथा सुशासन (कदाचार का विरोध, विधिक संस्थाओं का विकास)।
  • ★“यह अपने सदस्य-देशों को आसान ऋण और अनुदान देता है। ज्यादा गरीब देशों को ये अनुदान वापिस नहीं चुकाने पड़ते।”

6. संयुक्त राष्ट्रसंघ का न्यायाधिकार (पृ. 55–56)

6.1 2005 का शिखर सम्मेलन — छह निर्णय★★

“संयुक्त राष्ट्रसंघ ने जब अपने अस्तित्व के 60 साल पूरे किए तो इसके सभी सदस्य देशों के प्रमुख इस सालगिरह को मनाने के लिए 2005 के सितम्बर में इकट्ठे हुए… बदलते हुए परिवेश में संयुक्त राष्ट्रसंघ को ज्यादा प्रासंगिक बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने का फ़ैसला किया —”

  1. ★शांति संस्थापक आयोग का गठन।
  2. ★★“यदि कोई राष्ट्र अपने नागरिकों को अत्याचारों से बचाने में असफल हो जाए तो विश्व-बिरादरी इसका उत्तरदायित्व ले — इस बात की स्वीकृति।”
  3. ★मानवाधिकार परिषद् की स्थापना (2006 के 19 जून से सक्रिय)।
  4. सहस्राब्दि विकास लक्ष्य (मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल्स) को प्राप्त करने पर सहमति।
  5. हर रूप-रीति के आतंकवाद की निंदा।
  6. एक लोकतंत्र-कोष का गठन तथा ट्रस्टीशिप काउंसिल (न्यासिता परिषद्) को समाप्त करने पर सहमति।

6.2 और फिर पाठ स्वयं सवाल उठाता हैध्यान

“यह समझना कठिन नहीं कि ये मुद्दे भी संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए बड़े पेंचदार हैं।”

  • शांति संस्थापक आयोग को क्या करना चाहिए? “दुनिया में बहुत-से झगड़े चल रहे हैं। यह आयोग किसमें दखल दे? हर झगड़े में दखल देना क्या इस आयोग के लिए उचित अथवा संभव होगा?”
  • ★“अत्याचारों से निपटने में विश्व-बिरादरी की जिम्मेदारी क्या होगी? मानवाधिकार क्या है और इस बात को कौन तय करेगा कि किस स्तर का मानवाधिकार-उल्लंघन हो रहा है? मानवाधिकार-उल्लंघन की दशा में क्या कार्रवाई की जाए — इसे कौन तय करेगा?”
  • “‘सतत विकास लक्ष्य’ में निर्धारित विकास संबंधी महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को मानक बनाना कहाँ तक व्यावहारिक है?”
  • ★“क्या आतंकवाद की कोई सर्वमान्य परिभाषा हो सकती है?”
  • “संयुक्त राष्ट्रसंघ लोकतंत्र को बढ़ावा देने में धन का इस्तेमाल कैसे करेगा?”

कार्टून (पृ. 56): ‘शब्दों की बरसात’ — दारफुर की हालत की एक बानगी; शब्द उड़ रहे हैं — वंचना, नरसंहार, शांतिसैनिक, अंतर्राष्ट्रीय नाराजगी, ‘अब कभी नहीं’, सहायता। पाठ का प्रश्न: “आपका क्या मानना है, संयुक्त राष्ट्रसंघ इस तरह की स्थितियों में किस प्रकार हस्तक्षेप कर सकता है? क्या इसके लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के न्यायाधिकार में बदलाव की जरूरत है?”

मानचित्र (पृ. 56): संयुक्त राष्ट्रसंघ शांति स्थापना अभियान — माली (MINUSMA), पश्चिमी सहारा (MINURSO), मध्य अफ्रीकी गणराज्य (MINUSCA), दारफुर (UNAMID), कोसोवो (UNMIK), साइप्रस (UNFICYP), लेबनान (UNIFIL), ★भारत और पाकिस्तान (UNMOGIP), हैती (MINUJUSTH), लाइबेरिया (UNMIL), डी.आर. कांगो (MONUSCO), दक्षिण सूडान (UNMISS), अबेई (UNISFA), मध्य एशिया (UNTSO), सीरिया (UNDOF)। (मानचित्र अक्टूबर 2017 का)

7. संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार और भारत (पृ. 56–58)

7.1 भारत का सामान्य रुख़

  • “भारत ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के ढाँचे में बदलाव के मसले को कई आधारों पर समर्थन दिया है।”
  • “भारत का मानना है कि बदले हुए विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ की मजबूती और दृढ़ता जरुरी है।”
  • “भारत इस बात का भी समर्थन करता है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और विकास को बढ़ावा देने में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाए।”
  • ★★“भारत का विश्वास है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ के अजेंडे में विकास का मामला प्रमुख होना चाहिए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए यह ज़रुरी पूर्व शर्त है।”

7.2 सुरक्षा परिषद् की संरचना पर भारत की चिंता★

  • ★“सुरक्षा-परिषद् की सदस्य संख्या स्थिर रही है जबकि संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा में सदस्यों की संख्या खूब बढ़ी है। भारत का मानना है कि इससे सुरक्षा परिषद् के प्रतिनिधित्वमूलक चरित्र की हानि हुई है।”
  • “भारत का तर्क है कि परिषद् का विस्तार करने पर वह ज्यादा प्रतिनिधिमूलक होगी और उसे विश्व-बिरादरी का ज्यादा समर्थन मिलेगा।”
  • !! पाठ का वाक्य (त्रुटि सहित): “संयुक्त राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या सन् 1965 में 11 से बढ़ाकर 15 कर दी गई थी लेकिन स्थायी सदस्यों की संख्या स्थिर रही। इसके बाद से परिषद् का आकार जस का तस बना हुआ है।” → यह सुरक्षा परिषद् की संख्या है। देखिए 10-Verification-Log.md §V-3.
  • “संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा में ज्यादातर विकासशील सदस्य-देश हैं। इस कारण, सुरक्षा परिषद् के फ़ैसलों में उनकी भी सुनी जानी चाहिए क्योंकि इन फ़ैसलों का उन पर प्रभाव पड़ता है।”
  • ★“भारत सुरक्षा परिषद् के अस्थायी और स्थायी, दोनों ही तरह के सदस्यों की संख्या में बढ़ोत्तरी का समर्थक है।”
  • तर्क: “पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा-परिषद् की गतिविधियों का दायरा बढ़ा है। सुरक्षा-परिषद् के कामकाज की सफलता विश्व-बिरादरी के समर्थन पर निर्भर है। इस कारण सुरक्षा परिषद् के पुनर्गठन की कोई योजना व्यापक धरातल पर बननी चाहिए। मिसाल के लिए, उसमें अभी की अपेक्षा ज्यादा विकासशील देश होने चाहिए।”

7.3 भारत की दावेदारी के छह आधार(प्रश्न 9 का उत्तर)★★

  1. ★“भारत विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। भारत में विश्व की कुल-जनसंख्या का 1/5वाँ हिस्सा निवास करता है।”
  2. ★“भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।”
  3. ★“भारत ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की लगभग सभी पहलकदमियों में भाग लिया है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के शांति बहाल करने के प्रयासों में भारत लंबे समय से ठोस भूमिका निभाता आ रहा है।”
  4. ★“वह तेजी से अंतर्राष्ट्रीय फलक पर आर्थिक-शक्ति बनकर उभर रहा है।”
  5. ★“भारत ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में नियमित रूप से अपना योगदान दिया है और यह कभी भी अपने भुगतान से चुका नहीं है।”
  6. ★★प्रतीकात्मक महत्व: “भारत इस बात से आगाह है कि सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता का एक प्रतीकात्मक महत्त्व भी है। इससे पता चलता है कि किसी देश का अंतर्राष्ट्रीय मामलों में महत्त्व बढ़ रहा है। किसी देश को अपनी इस बढ़ी हुई हैसियत का फायदा उसकी विदेश नीति में मिलता है। अगर आपकी साख एक ताकतवर देश के रूप में है तो आपका प्रभाव ज्यादा होगा।”

7.4 भारत का विरोध कौन करता है — चार कारण (पृ. 58)ध्यान★

“भारत चाहता है कि वह संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद् में निषेधाधिकार संपन्न (वीटोधारी) सदस्य बने, लेकिन कुछ देश सुरक्षा परिषद् में भारत को स्थायी सदस्य बनाने का विरोध करते हैं। सिर्फ पड़ोसी पाकिस्तान ही नहीं, जिनके साथ भारत के संबंध दिक्कततलब रहे हैं, बल्कि कुछ और देश भी चाहते हैं कि भारत को… शामिल न किया जाए।”

#विरोध का कारण
1★“कुछ देश भारत के परमाणु हथियारों को लेकर चिंतित हैं।”
2★“कुछ और देशों का मानना है कि पाकिस्तान के साथ संबंधों में कठिनाई के कारण भारत स्थायी सदस्य के रूप में अप्रभावी रहेगा।”
3★“कुछ अन्य देशों का मानना है कि उभरती हुई ताकत के रूप में अन्य देशों मसलन ब्राजील, जर्मनी, जापान और शायद दक्षिण अफ्रीका को भी शामिल करना पड़ेगा जिसका ये देश विरोध करते हैं।”
4★“कुछ देशों का विचार है कि अगर सुरक्षा परिषद् में किसी तरह का विस्तार होता है तो अफ्रीका और दक्षिण अमरीका को ज़रूर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए क्योंकि मौजूदा सुरक्षा परिषद् में इन्हीं महादेशों की नुमाइंदगी नहीं है।”

★पाठ का निष्कर्ष: “इन सरोकारों को देखते हुए भारत या किसी और देश के लिए निकट भविष्य में संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य बन पाना मुश्किल लगता है।”

7.5 बॉक्स — विश्व व्यापार संगठन (WTO) (पृ. 57)

  • ★“वैश्विक व्यापार के नियमों को तय करता है। इस संगठन की स्थापना सन् 1995 में हुई।”
  • ★“यह संगठन ‘जेनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ’ के उत्तराधिकारी के रूप में काम करता है जो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अस्तित्व में आया था।” (प्रश्न 5 का उत्तर)
  • ★सदस्य: 164 (29 जुलाई 2016 की स्थिति)
  • ! “हर फ़ैसला सभी सदस्यों की सहमति से किया जाता है लेकिन अमरीका, यूरोपीय संघ तथा जापान जैसी बड़ी आर्थिक शक्तियाँ विश्व-व्यापार संगठन में व्यापार के नियमों को इस तरह बनाने में कामयाब हो गई हैं जिससे उनके हित सधते हों।”
  • ★“विकासशील देशों की बहुधा शिकायत रहती है कि इस संगठन की कार्यविधि पारदर्शी नहीं है और बड़ी आर्थिक ताकतें उन्हें धकियाती हैं।”

7.6 बॉक्स — अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी (IAEA) (पृ. 58)

  • ★“इस संगठन की स्थापना 1957 में हुई।”
  • ★“यह संगठन परमाणविक ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और सैन्य उद्देश्यों में इसके इस्तेमाल को रोकने की कोशिश करता है।” (प्रश्न 4 का उत्तर)
  • “इस संगठन के अधिकारी नियमित रूप से विश्व की परमाणविक सुविधाओं की जाँच करते हैं ताकि नागरिक परमाणु-संयंत्रों का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए न हो।”

8. एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ (पृ. 58–60)★★

8.1 केंद्रीय प्रश्न

★“क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीकी प्रभुत्व के विरुद्ध संतुलनकारी भूमिका निभा सकता है? क्या यह संगठन शेष विश्व और अमरीका के बीच संवाद कायम करके अमरीका को अपनी मनमानी करने से रोक सकता है?”

8.2 अमरीका पर अंकुश क्यों कठिन है — तीन कारणध्यान★

“अमरीका की ताकत पर आसानी से अंकुश नहीं लगाया जा सकता।”

  1. ★“सोवियत संघ की गैर मौजूदगी में अब अमरीका एकमात्र महाशक्ति है। अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत के बूते वह संयुक्त राष्ट्रसंघ या किसी अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन की अनदेखी कर सकता है।”
  2. ★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ के भीतर अमरीका का खास प्रभाव है।” — चार कारण:
    • “वह संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला देश है।”
    • “अमरीका की वित्तीय ताकत बेजोड़ है।”
    • ★“यह भी एक तथ्य है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीकी भू-क्षेत्र में स्थित है और इस कारण भी अमरीका का प्रभाव इसमें बढ़ जाता है।”
    • “संयुक्त राष्ट्रसंघ के कई नौकरशाह इसके नागरिक हैं।”
  3. ★वीटो: “अगर अमरीका को लगे कि कोई प्रस्ताव उसके अथवा उसके साथी राष्ट्रों के हितों के अनुकूल नहीं है… तो अपने ‘वीटो’ से वह उसे रोक सकता है।”
    • ★“अपनी ताकत और निषेधाधिकार के कारण संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव के चयन में भी अमरीका की बात बहुत वज़न रखती है। अमरीका अपनी इस ताकत के बूते शेष विश्व में फूट डाल सकता है और डालता है, ताकि उसकी नीतियों का विरोध मंद पड़ जाए।”

8.3 और फिर भी — संयुक्त राष्ट्रसंघ क्यों ज़रूरी है★★

★“इस तरह संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीका की ताकत पर अंकुश लगाने में ख़ास सक्षम नहीं। फिर भी, एकध्रुवीय विश्व में जहाँ अमरीकी ताकत का बोलबाला है — संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीका और शेष विश्व के बीच विभिन्न मसलों पर बातचीत कायम कर सकता है और इस संगठन ने ऐसा किया भी है।”

  • ★“अमरीकी नेता अक्सर संयुक्त राष्ट्रसंघ की आलोचना करते हैं लेकिन वे इस बात को समझते हैं कि झगड़ों और सामाजिक-आर्थिक विकास के मसले पर संयुक्त राष्ट्रसंघ के जरिए 190 राष्ट्रों को एक साथ किया जा सकता है।”
  • ★★“जहाँ तक शेष विश्व की बात है तो उसके लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ ऐसा मंच है जहाँ अमरीकी रवैये और नीतियों पर कुछ अंकुश लगाया जा सकता है। यह बात ठीक है कि वाशिंगटन के विरुद्ध शेष विश्व शायद ही कभी एकजुट हो पाता है और अमरीका की ताकत पर अंकुश लगाना एक हद तक असंभव है, लेकिन इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्रसंघ ही वह जगह है जहाँ अमरीका के किसी खास रवैये और नीति की आलोचना की सुनवाई हो और कोई बीच का रास्ता निकालने तथा रियायत देने की बात कही-सोची जा सके।”

8.4 अध्याय का निष्कर्ष(प्रश्न 11 का सीधा उत्तर)★★

★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी। आज विभिन्न समाजों और मसलों के बीच आपसी तार जुड़ते जा रहे हैं। इसे ‘पारस्परिक निर्भरता’ का नाम दिया जाता है। इसे देखते हुए यह कल्पना करना कठिन है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसे संगठन के बिना विश्व के सात अरब से भी ज्यादा लोग कैसे रहेंगे।”

★अंतिम अनुच्छेद (पृ. 60): “प्रौद्योगिकी यह सिद्ध कर रही है कि आने वाले दिनों में विश्व में पारस्परिक निर्भरता बढ़ती जाएगी। इसलिए, संयुक्त राष्ट्रसंघ का महत्त्व भी निरंतर बढ़ेगा। लोगों को और सरकारों को संयुक्त राष्ट्रसंघ तथा दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के समर्थन और उपयोग के तरीके तलाशने होंगे — ऐसे तरीके जो उनके हितों और विश्व बिरादरी के हितों से व्यापक धरातल पर मेल खाते हों।”

कार्टून (पृ. 59): “अगर दाएँ हाथ से बात नहीं समझोगे… तो बाएँ हाथ से समझायी जाएगी” — एक हाथ में UN और जैतून की टहनी, दूसरे में ‘WAR’ लिखा काँटेदार दस्ताना।

8.5 दो स्वयंसेवी संगठन

संगठनविवरण
एमनेस्टी इंटरनेशनल (पृ. 59)एक स्वयंसेवी संगठन। पूरे विश्व में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलाता है। मानवाधिकारों से जुड़ी रिपोर्ट तैयार और प्रकाशित करता है। ★“सरकारों को ये रिपोर्ट अक्सर नागवार लगती हैं क्योंकि एमनेस्टी का ज्यादा जोर सरकारों द्वारा किए जा रहे दुर्व्यवहार पर होता है।”
ह्यूमन राइट्स वॉच (पृ. 60)मानवाधिकारों की वकालत और अनुसंधान करने वाला अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन। ★“यह अमरीका का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन है।” “दुनिया भर के मीडिया का ध्यान मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर खींचता है।” ★“इसने बारूदी सुरंगों पर रोक लगाने के लिए, बाल सैनिकों का प्रयोग रोकने के लिए और अंतर्राष्ट्रीय दंड न्यायालय स्थापित करने के लिए अभियान चलाने में मदद की है।”

1. निषेधाधिकार (वीटो) के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। इनमें प्रत्येक के आगे सही या ग़लत का चिह्न लगाएँ। (क) सुरक्षा-परिषद् के सिर्फ स्थायी सदस्यों को ‘वीटो’ का अधिकार है। (ख) यह एक तरह की नकारात्मक शक्ति है। (ग) सुरक्षा परिषद् के फ़ैसलों से असंतुष्ट होने पर महासचिव ‘वीटो’ का प्रयोग करता है। (घ) एक ‘वीटो’ से भी सुरक्षा-परिषद् का प्रस्ताव नामंजूर हो सकता है।

2. संयुक्त राष्ट्रसंघ के कामकाज के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक के सामने सही या ग़लत का चिह्न लगाएँ। (क) सुरक्षा और शांति से जुड़े सभी मसलों का निपटारा सुरक्षा-परिषद् में होता है। (ख) मानवतावादी नीतियों का क्रियान्वयन विश्वभर में फैली मुख्य शाखाओं तथा एजेंसियों के मार्फत होता है। (ग) सुरक्षा के किसी मसले पर पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सहमत होना उसके बारे में लिए गए फैसले के क्रियान्वयन के लिए ज़रूरी है। (घ) संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा के सभी सदस्य संयुक्त राष्ट्रसंघ के बाकी प्रमुख अंगों और विशेष एजेंसियों के स्वत: सदस्य हो जाते हैं।

3. निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सुरक्षा-परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव को ज्यादा वज़नदार बनाता है? (क) परमाणु क्षमता (ख) भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ के जन्म से ही उसका सदस्य है। (ग) भारत एशिया में है। (घ) भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और स्थिर राजनीतिक व्यवस्था

4. परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग और उसकी सुरक्षा से संबद्ध संयुक्त राष्ट्रसंघ की एजेंसी का नाम है — (क) संयुक्त राष्ट्रसंघ निरस्त्रीकरण समिति (ख) अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी (ग) संयुक्त राष्ट्रसंघ अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (घ) इनमें से कोई नहीं।

5. विश्व व्यापार संगठन निम्नलिखित में से किस संगठन का उत्तराधिकारी है? (क) जेनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ (ख) जेनरल एरेंजमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ (ग) विश्व स्वास्थ्य संगठन (घ) संयुक्त राष्ट्रसंघ विकास कार्यक्रम

6. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें। (क) संयुक्त राष्ट्रसंघ का मुख्य उद्देश्य ________ है। (ख) संयुक्त राष्ट्रसंघ का सबसे जाना-पहचाना पद ________ का है। (ग) संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा-परिषद् में ________ स्थायी और ________ अस्थायी सदस्य हैं। (घ) ________ संयुक्त राष्ट्रसंघ के वर्तमान महासचिव हैं। (च) मानवाधिकारों की रक्षा में सक्रिय दो स्वयंसेवी संगठन ________ और ________ हैं।

7. संयुक्त राष्ट्रसंघ की मुख्य शाखाओं और एजेंसियों का सुमेल उनके काम से करें —

  1. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् 2. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय 3. अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी
  2. सुरक्षा-परिषद् 5. संयुक्त राष्ट्रसंघ शरणार्थी उच्चायोग 6. विश्व व्यापार संगठन
  3. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष 8. आम सभा 9. विश्व स्वास्थ्य संगठन 10. सचिवालय (क) वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देखरेख। (ख) अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संरक्षण। (ग) सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण की चिंता। (घ) परमाणु प्रौद्योगिकी का शांतिपूर्ण उपयोग और सुरक्षा। (ड) सदस्य देशों के बीच मौजूद विवादों का निपटारा। (च) आपातकाल में आश्रय तथा चिकित्सीय सहायता मुहैया करना। (छ) वैश्विक मामलों पर बहस-मुबाहिसा (ज) संयुक्त राष्ट्रसंघ के मामलों का समायोजन और प्रशासन (झ) सबके लिए स्वास्थ्य (ञ) सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार की राह आसान बनाना।

8. सुरक्षा-परिषद् के कार्य क्या हैं?

9. भारत के नागरिक के रूप में सुरक्षा-परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष का समर्थन आप कैसे करेंगे? अपने प्रस्ताव का औचित्य सिद्ध करें।

10. संयुक्त राष्ट्रसंघ के ढाँचे को बदलने के लिए सुझाए गए उपायों के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें?

11. हालाँकि संयुक्त राष्ट्रसंघ युद्ध और इससे उत्पन्न विपदा को रोकने में नाकामयाब रहा है लेकिन विभिन्न देश अभी भी इसे बनाए रखना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्रसंघ को एक अपरिहार्य संगठन मानने के क्या कारण हैं।

12. संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार का अर्थ है सुरक्षा परिषद् के ढाँचे में बदलाव। इस कथन का सत्यापन करें।

उत्तर देखिए

उत्तर-कुंजी: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्रित नहीं है और कोई सारांश खंड भी नहीं है। उत्तर 05-Question-Bank.md में शिक्षक द्वारा तैयार हैं।

शब्दावली

पदअंग्रेज़ीअध्याय में प्रयुक्त अर्थ
अंतर्राष्ट्रीय संगठनInternational organisation★“कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो”; राज्य ही इसका निर्माण करते हैं और यह उनके प्रति जवाबदेह होता है
लीग ऑव नेशंसLeague of Nationsपहले विश्वयुद्ध के बाद बना संगठन, जो दूसरा विश्वयुद्ध न रोक सका; संयुक्त राष्ट्रसंघ इसका उत्तराधिकारी है
अटलांटिक चार्टरAtlantic Charter★अगस्त 1941 — रूजवेल्ट और चर्चिल के हस्ताक्षर
याल्टा सम्मेलनYalta Conference★फरवरी 1945 — रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन
वीटो / निषेधाधिकारVeto★★पाँच स्थायी सदस्यों का अधिकार; एक वीटो से प्रस्ताव रुक जाता है, भले सभी अन्य पक्ष में हों; “एक तरह की नकारात्मक शक्ति”
आम सभाGeneral Assembly193 सदस्य; सबको एक मत; ★निर्णय बाध्यकारी नहीं
सुरक्षा-परिषद्Security Council15 सदस्य (5 स्थायी + 10 अस्थायी); ★निर्णय सभी पर बाध्यकारी
न्यासिता परिषद्Trusteeship Council★अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के आज़ाद होने पर 1 नवम्बर 1994 से स्थगित
शांति संस्थापक आयोगPeacebuilding Commission2005 के शिखर सम्मेलन का निर्णय
मानवाधिकार परिषद्Human Rights Council★2006 के 19 जून से सक्रिय
सहस्राब्दि विकास लक्ष्यMillennium Development Goals2005 के सम्मेलन में सहमति
सतत विकास लक्ष्यSustainable Development Goals (SDGs)पाठ का साइड-बॉक्स इन्हें खोजने को कहता है
पारस्परिक निर्भरताInterdependence★★“आज विभिन्न समाजों और मसलों के बीच आपसी तार जुड़ते जा रहे हैं”
IMFअंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष★190 सदस्य (2024); हर सदस्य की राय का वजन बराबर नहीं; अमरीका के पास 16.52% मताधिकार
विश्व बैंकWorld Bank★1944 में औपचारिक स्थापना; आसान ऋण और अनुदान
WTOविश्व व्यापार संगठन★1995 में स्थापना; GATT का उत्तराधिकारी; 164 सदस्य (2016)
IAEAअंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी★1957 में स्थापना; परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग
एमनेस्टी इंटरनेशनलAmnesty Internationalमानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलाने वाला स्वयंसेवी संगठन
ह्यूमन राइट्स वॉचHuman Rights Watch★“अमरीका का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन”

मुख्य आँकड़े और तिथियाँ

मानसंदर्भ
अगस्त 1941अटलांटिक चार्टर — रूजवेल्ट और चर्चिल
जनवरी 1942 / 2626 मित्र-राष्ट्र वाशिंगटन में मिले
दिसंबर 1943संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा पर हस्ताक्षर
फरवरी 1945याल्टा सम्मेलन — रूजवेल्ट, चर्चिल, स्टालिन
अप्रैल–मई 1945सेन फ्रांसिस्को सम्मेलन — दो महीने
★26 जून 1945 / 50चार्टर पर 50 देशों के हस्ताक्षर
★15 अक्टूबर 1945 / 51पोलैंड के हस्ताक्षर → 51 मूल संस्थापक सदस्य
★24 अक्टूबर 1945संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना; संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस
★30 अक्टूबर 1945भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल
1939–45दूसरा विश्वयुद्ध, जिसे लीग ऑव नेशंस न रोक सका
1944विश्व बैंक की औपचारिक स्थापना
1957IAEA की स्थापना
! 1965 — 11 से 15सुरक्षा परिषद् की सदस्य संख्या बढ़ी (पाठ में ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ’ लिखा है — त्रुटि)
1992आम सभा का प्रस्ताव — तीन शिकायतें
1 जनवरी 1997कोफी अन्नान ने सुधार की जाँच शुरू करवाई
1995 / 164WTO की स्थापना / सदस्य (29 जुलाई 2016)
सितम्बर 200560वीं सालगिरह का शिखर सम्मेलन — छह निर्णय
19 जून 2006मानवाधिकार परिषद् सक्रिय
1 नवम्बर 1994न्यासिता परिषद् स्थगित (पलाउ)
1 जनवरी 2017गुटेरेस ने पद संभाला — नौवें महासचिव
2015UN की 70वीं वर्षगांठ; बान की मून नई दिल्ली में
★193 / 190आम सभा के सदस्य (2011 तक) / पाठ में एक जगह ‘190 राष्ट्र’
15 / 5 / 10सुरक्षा परिषद् — कुल / स्थायी / अस्थायी
2 वर्ष / 3 वर्ष / 5 वर्ष / 9 वर्षअस्थायी सदस्य / आर्थिक-सामाजिक परिषद् / महासचिव / न्यायाधीश
54 / 15आर्थिक और सामाजिक परिषद् के सदस्य / अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश
★हेगअंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय
★135 · 84 · 32 · 18 · 11वीटो का प्रयोग — सोवियत संघ/रूस · अमरीका · यूके · फ्रांस · चीन (1 जून 2018 तक)
★22.0 · 12.0 · 8.5 · 0.8UN बजट में योगदान — अमरीका · चीन · जापान · भारत (21वाँ) (2019)
★190 / 41.29% / 16.52%IMF — सदस्य (2024) / समूह-7 का मत / अकेले अमरीका
6.09 · 2.64 · 2.59 · 2.22 · 2.02IMF मताधिकार — चीन · भारत · रूस · ब्राजील · सऊदी अरब
1/5वाँ हिस्साविश्व की जनसंख्या में भारत का हिस्सा
सात अरब से भी ज्यादाविश्व की जनसंख्या (पाठ के अनुसार)
जून / अगस्त / अक्टूबर 2006इजराइल का लेबनान पर हमला / UN का प्रस्ताव / सेना की वापसी

भ्रमित करने वाले युग्मध्यान

युग्मभेद
★50 बनाम 5126 जून 1945 को 50 देशों ने हस्ताक्षर किए; पोलैंड ने 15 अक्टूबर को → 51 मूल संस्थापक
24 अक्टूबर बनाम 30 अक्टूबर 1945संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना बनाम भारत का शामिल होना
★★आम सभा बनाम सुरक्षा-परिषद्आम सभा — 193 सदस्य, निर्णय बाध्यकारी नहीं; सुरक्षा-परिषद् — 15 सदस्य, निर्णय सभी पर बाध्यकारी
स्थायी बनाम अस्थायी सदस्य5 बनाम 10; वीटो केवल स्थायी को; अस्थायी 2 वर्ष के लिए, तत्काल पुनर्निर्वाचन नहीं
! 1965 की ‘11 से 15’यह सुरक्षा परिषद् की संख्या है, संयुक्त राष्ट्रसंघ की नहीं — पाठ-त्रुटि
लीग ऑव नेशंस बनाम संयुक्त राष्ट्रसंघपहले विश्वयुद्ध के बाद बनाम दूसरे के बाद; दूसरा पहले का उत्तराधिकारी
★IMF बनाम विश्व बैंकIMF — वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देखरेख (1944 का ब्रेटन वुड्स दौर, 190 सदस्य); विश्व बैंक — 1944 में औपचारिक स्थापना; विकासशील देशों को ऋण और अनुदान
★WTO बनाम GATTWTO 1995 में बना; GATT का उत्तराधिकारी
IAEA बनाम OPCWपरमाणु बनाम रासायनिक हथियार
एमनेस्टी बनाम ह्यूमन राइट्स वॉचदोनों स्वयंसेवी; ★HRW “अमरीका का सबसे बड़ा”
हैमरसोल्ड बनाम अन्नानदोनों को नोबेल — हैमरसोल्ड को मरणोपरांत (कांगो); अन्नान को 2001 में
यू थांट बनाम बान की मूनदोनों एशियाई — बान की मून “इस पद पर बैठने वाले दूसरे एशियाई”
2005 सितम्बर बनाम 19 जून 2006शिखर सम्मेलन का निर्णय बनाम मानवाधिकार परिषद् का सक्रिय होना
! 193 बनाम 190आम सभा के सदस्य 193 (2011 तक); पर पृ. 59 पर “190 राष्ट्र” लिखा है