पाठ्यपुस्तक: NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 63–80 पढ़ने का समय: पहली बार 35 मिनट · दोहराने में 12 मिनट · परीक्षा से पहले 5 मिनट (सिर्फ ★★वाले भाग)
एक नज़र में पूरा अध्याय
सुरक्षा = खतरे से आजादी — पर हर खतरे से नहीं। सिर्फ उन खतरों से जो ‘केंद्रीय मूल्यों’ को छूते हों और इतने गंभीर हों कि क्षति ‘अपूरणीय’ हो।
इसके बाद अध्याय दो नज़रिए खड़े करता है —
- पारंपरिक (राष्ट्रीय) सुरक्षा — संदर्भी राज्य, खतरा सैन्य, स्रोत दूसरा मुल्क, उपाय अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन और तीन तरह के समझौते।
- अपारंपरिक सुरक्षा — संदर्भी व्यक्ति और समूची मानवता, खतरे आतंकवाद, मानवाधिकार-हनन, निर्धनता, प्रवासन, महामारी, तापवृद्धि, उपाय सहयोग।
अंत में भारत की सुरक्षा-नीति के चार घटक और यह निष्कर्ष कि लोकतंत्र स्वयं सुरक्षा का साधन है।
1 · सुरक्षा क्या है? (पृ. 64–65)
- ★★परिभाषा: “सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है — खतरे से आजादी।”
- ! समस्या: अगर हर खतरा शामिल कर लें तो “हर घड़ी और हर जगह सुरक्षा के ही सवाल नज़र आयेंगे।”
- ★पहली शर्त — ‘केंद्रीय मूल्य’: “केवल उन चीजों को सुरक्षा का विषय बनाया जाय जिनसे जीवन के ‘केंद्रीय मूल्यों’ को खतरा हो।”
- ★★दूसरी शर्त — गंभीरता: “सुरक्षा का रिश्ता बड़े गंभीर खतरों से है; ऐसे खतरे जिनको रोकने के उपाय न किए गए तो हमारे केंद्रीय मूल्यों को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।”
- ! पर पाठ खुद पूछता है: “किसके केंद्रीय मूल्य?” — देश के, आम नागरिक के, या सरकार के?
- ★निष्कर्ष: “सुरक्षा एक विवादग्रस्त धारणा है” — क्योंकि “करीब 200 मुल्कों के 7 अरब लोग सुरक्षा की एक जैसी धारणा” नहीं रख सकते।
याद रखने का सूत्र: खतरे से आजादी → पर सिर्फ केंद्रीय मूल्यों पर → और सिर्फ गंभीर खतरों से।
2 · पारंपरिक सुरक्षा — बाहरी (पृ. 65–67)
परिभाषा
- ★यही ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ है। “सैन्य ख़तरे को किसी देश के लिए सबसे ज्यादा ख़तरनाक माना जाता है” और “इस ख़तरे का स्रोत कोई दूसरा मुल्क होता है।”
- ★★खतरे में पड़ने वाले केंद्रीय मूल्य — संप्रभुता · स्वतंत्रता · क्षेत्रीय अखंडता।
- ! “अक्सर निहत्थे और आम औरत-मर्द को जंग का निशाना बनाया जाता है; उनका और उनकी सरकार का हौसला तोड़ने की कोशिश होती है।”
तीन विकल्प(प्रश्न 6)★★
| क्रम | विकल्प | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | आत्मसमर्पण | बिना युद्ध किए दूसरे की बात मान लेना |
| 2 | अपरोध (Deterrence) | नाश इतना बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा हमला करने से बाज आये |
| 3 | रक्षा (Defence) | युद्ध ठन जाए तो अपनी रक्षा करना या हमलावर को पराजित करना |
★★कुंजी-वाक्य: “कोई सरकार आत्मसमर्पण को अपने देश की नीति के रूप में कभी नहीं प्रचारित करना चाहेगी।” — इसलिए सुरक्षा-नीति = अपरोध + रक्षा (आत्मसमर्पण नीति नहीं बनता)।
शक्ति-संतुलन(प्रश्न 7)★
- पड़ोसियों की सापेक्ष ताकत देखकर खतरे का अनुमान।
- ★★इरादा नहीं, क्षमता देखी जाती है — “हमले का कोई प्रकट कारण भी नहीं जान पड़ता। फिर भी यह देखकर कि कोई देश बहुत ताकतवर है यह भांपा जा सकता है कि भविष्य में वह हमलावर हो सकता है।”
- किन पर विशेष ध्यान — नजदीक के देश, जिनसे अनबन हो, या जिनसे अतीत में लड़ाई हो चुकी हो।
- ★सिर्फ सेना नहीं — आर्थिक और प्रौद्योगिकी की ताकत भी, क्योंकि “सैन्य-शक्ति का यही आधार है।”
गठबंधन(प्रश्न 8)★
- उद्देश्य: “सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम।”
- रूप: ज्यादातर लिखित संधि; और “यह बात बिलकुल स्पष्ट रहती है कि खतरा किससे है।”
- ★★सबसे ज़रूरी बात: “गठबंधन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं और राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं।”
- ★उदाहरण: 1980 के दशक में अमरीका ने सोवियत संघ के खिलाफ इस्लामी उग्रवादियों को समर्थन दिया; 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के हमले के बाद उन्हीं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
खतरा ‘बाहर’ से क्यों माना जाता है★★
- देश के भीतर हिंसा से निपटने की व्यवस्था है — “इसे सरकार कहते हैं।”
- “लेकिन विश्व-राजनीति में ऐसी कोई केंद्रीय सत्ता नहीं जो सबके ऊपर हो।”
- ! “संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने सदस्य देशों का दास है” — उतनी ही सत्ता जितनी सदस्य सौंपें।
- ★★इसलिए — “हर देश को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है।”
3 · पारंपरिक सुरक्षा — आंतरिक (पृ. 67–68)
- 1945 के बाद उपेक्षित क्यों: अमरीका और सोवियत संघ “अपनी सीमा के अंदर एकीकृत और शांति संपन्न”; पश्चिमी यूरोप को भीतर से खतरा नहीं। ध्यान सीमापार पर गया।
- ! पर उपनिवेशों में खतरा था — फ्रांस को वियतनाम में (1950 का दशक), ब्रिटेन को केन्या में (1950 और 1960 के दशक)।
नव-स्वतंत्र देश — दो विशिष्ट चुनौतियाँ(प्रश्न 4)★★
- ★पड़ोसी देश से सैन्य हमले की आशंका — सीमा रेखा, भूक्षेत्र और आबादी पर नियंत्रण को लेकर।
- ★अंदरूनी सैन्य-संघर्ष — अलगाववादी आंदोलन।
- ★★और दोनों जुड़ते भी हैं — “अगर कोई पड़ोसी मुल्क ऐसे आंदोलन को हवा दे तो दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव बनता था।”
- ★“अनेक नव स्वतंत्र देश अमरीका या सोवियत संघ से कहीं ज्यादा अपने पड़ोसी देशों से आशंकित थे।”
दो आँकड़े जो हर बार पूछे जा सकते हैं★★
“विश्व के सशस्त्र संघर्षों में 95 प्रतिशत अब आंतरिक युद्ध के अंतर्गत हैं। सन् 1946 से 1991 के बीच गृह युद्धों की संख्या में बारहगुनी वृद्धि हुई — जो पिछले 200 वर्षों में सबसे लंबी छलांग है।”
- और तीसरा: “दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जितने युद्ध हुए उसमें एक तिहाई के लिए शीतयुद्ध जिम्मेदार रहा; इनमें से अधिकांश तीसरी दुनिया में हुए।”
4 · सुरक्षा के पारंपरिक तरीके (पृ. 68–70)
‘न्याय-युद्ध’ की परंपरा★
- यूरोपीय परंपरा का विस्तार। दो पक्षों पर सीमा —
- ★लक्ष्य: युद्ध सिर्फ आत्म-रक्षा या दूसरों को जनसंहार से बचाने के लिए।
- ★साधन: निहत्थे, संघर्षविमुख या आत्मसमर्पण करने वाले शत्रु को न मारें; उतना ही बल जितना आत्मरक्षा के लिए ज़रूरी; बल तभी जब बाकी उपाय असफल हो गए हों।
तीन तरीके(प्रश्न 1 का सुमेल)★★
| तरीका | परिभाषा |
|---|---|
| निरस्त्रीकरण | “कुछ खास किस्म के हथियारों से बाज आयें” — यानी हथियार त्यागना |
| अस्त्र-नियंत्रण | “हथियारों को विकसित करने अथवा हासिल करने के संबंध में कायदे-कानूनों का पालन” — यानी नियम के तहत रखना |
| विश्वास बहाली (CBMs) | “सूचनाओं तथा विचारों के नियमित आदान-प्रदान” |
चार संधियाँ — रटने का ढाँचा★★
| संधि | वर्ष | कोटि | पहचान-चिह्न |
|---|---|---|---|
| BWC — जैविक हथियार संधि | 1972 | निरस्त्रीकरण | 155 से ज्यादा हस्ताक्षरकर्ता |
| CWC — रासायनिक हथियार संधि | 1997 | निरस्त्रीकरण | 193 हस्ताक्षरकर्ता |
| ABM — एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि | 1972 | अस्त्र-नियंत्रण | मिसाइल रक्षा-कवच पर रोक |
| NPT — परमाणु अप्रसार संधि | 1968 | अस्त्र-नियंत्रण | 1967 की रेखा |
| SALT II / START | — | अस्त्र-नियंत्रण | परिसीमन / न्यूनीकरण |
- ★मोड़ का कारण: BWC और CWC पर सभी महाशक्तियों ने दस्तख़त किए — “लेकिन महाशक्तियाँ परमाण्विक हथियार का विकल्प नहीं छोड़ना चाहती थीं इसलिए दोनों ने अस्त्र-नियंत्रण का सहारा लिया।”
NPT — 1967 बनाम 1968★★
संधि का वर्ष 1968। रेखा 1967 की। “जिन देशों ने 1967 से पहले परमाणु हथियार बना लिये थे या उनका परीक्षण कर लिया था उन्हें रखने की अनुमति दी गई। जो देश 1967 तक ऐसा नहीं कर पाये थे उन्हें हासिल करने के अधिकार से वंचित किया गया।”
- ★मूल्यांकन: “NPT ने परमाण्विक आयुधों को समाप्त तो नहीं किया लेकिन इन्हें हासिल कर सकने वाले देशों की संख्या ज़रूर कम की।”
CBMs किसलिए★
- देश एक-दूसरे को फौजी मकसद, सैन्य योजनाएँ, किस तरह के सैन्य-बल हैं और कहाँ तैनात हैं — यह बताते हैं।
- मकसद: “औचक हमले की योजना नहीं बनायी जा रही” — यह आश्वासन।
- ★“यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि प्रतिद्वन्द्वी देश किसी ग़लतफहमी या गफलत में पड़कर जंग के लिए आमादा न हो जाएँ।”
खंड का निष्कर्ष — रटने योग्य★★
“सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में माना जाता है कि सैन्य बल से सुरक्षा को खतरा पहुँचता है और सैन्य बल से ही सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है।”
5 · अपारंपरिक धारणा (पृ. 70–72)
- ★परिभाषा: “सिर्फ सैन्य खतरों से संबद्ध नहीं। इसमें मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले व्यापक खतरों और आशंकाओं को शामिल किया जाता है।”
- चार सवाल: सुरक्षा किसकी? · किन चीजों की? · किन खतरों से? · किन तरीकों से?
- ★★संदर्भी बदल जाता है:
- पारंपरिक — “भूक्षेत्र और संस्थाओं सहित राज्य”
- अपारंपरिक — “सिर्फ राज्य ही नहीं — व्यक्तियों और समुदायों या कहें कि समूची मानवता”
- ★इसीलिए नाम — ‘मानवता की सुरक्षा’ अथवा ‘विश्व-रक्षा’।
मानवता की सुरक्षा★★
- “जनता-जनार्दन की सुरक्षा को राज्यों की सुरक्षा से बढ़कर मानता है।”
- ★★“मानवता की सुरक्षा और राज्य की सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए और अक्सर होते भी हैं। लेकिन सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।”
- ★★सबूत: “पिछले 100 वर्षों में जितने लोग विदेशी सेना के हाथों मारे गए उससे कहीं ज्यादा लोग खुद अपनी ही सरकारों के हाथों खेत रहे।”
तीन अर्थ — मतभेद कहाँ है★
| अर्थ | दायरा |
|---|---|
| संकीर्ण | हिंसक खतरे — कोफ़ी अन्नान: “व्यक्तियों और समुदायों को अंदरूनी खून-खराबा से बचाना” |
| व्यापक | + अकाल, महामारी, आपदा — क्योंकि इनसे “युद्ध, जन-संहार और आतंकवाद साथ मिलकर” से भी ज्यादा मौतें होती हैं |
| व्यापकतम | + आर्थिक सुरक्षा और मानवीय गरिमा = ★‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’ |
विश्व सुरक्षा★
- कब उभरी — 1990 के दशक में। किन खतरों से — वैश्विक तापवृद्धि, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, एड्स और बर्ड फ्लू जैसी महामारियाँ।
- ★★मूल तर्क — “कोई भी देश इन समस्याओं का समाधान अकेले नहीं कर सकता।”
- ★असर असमान है — समुद्रतल 2 मीटर ऊँचा → बांग्लादेश का 20% डूबेगा · कमोबेश पूरा मालदीव · थाईलैंड की 50% आबादी को खतरा।
6 · खतरे के नये स्रोत (पृ. 72–76)
(क) आतंकवाद(प्रश्न 5)★★
- परिभाषा: “राजनीतिक खून-खराबा जो जान-बूझकर और बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है।”
- अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद: “एक से ज्यादा देशों में व्याप्त; निशाने पर कई देशों के नागरिक।”
- तरीका: बल-प्रयोग या उसकी धमकी से राजनीतिक स्थिति बदलना; विमान-अपहरण; भीड़ भरी जगहों पर बम।
- मोड़: 11 सितंबर 2001 — वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला।
- ! पर — “आतंकवाद कोई नयी परिघटना नहीं है।” पहले मध्यपूर्व, यूरोप, लातिनी अमरीका और दक्षिण एशिया में।
उत्तर देखिए
उत्तर: आतंकवाद अपारंपरिक खतरा है — क्योंकि निशाने पर नागरिक हैं, यह सीमा नहीं मानता, और अकेली सेना से हल नहीं होता।
(ख) मानवाधिकार★
- तीन कोटियाँ: (1) राजनीतिक अधिकार (अभिव्यक्ति, सभा) (2) आर्थिक और सामाजिक अधिकार (3) उपनिवेशीकृत जनता तथा जातीय व मूलवासी अल्पसंख्यकों के अधिकार।
- ! “वर्गीकरण पर व्यापक सहमति है” — पर इस पर नहीं कि किसे सार्वभौम माना जाए और उल्लंघन पर क्या किया जाए।
- तीन घटनाएँ: रवांडा में जनसंहार · कुवैत पर इराक का हमला · पूर्वी तिमूर में इंडोनेशियाई सेना का रक्तपात।
- दो पक्ष: UN घोषणापत्र हस्तक्षेप का अधिकार देता है बनाम ! “संभव है ताकतवर देशों के हितों से यह निर्धारित होता हो कि UN किस मामले में कार्रवाई करेगा।”
(ग) वैश्विक निर्धनता★★
| तथ्य | आँकड़ा |
|---|---|
| विश्व जनसंख्या | 760 करोड़ → 1000 करोड़ (21वीं सदी के मध्य तक) |
| वृद्धि का 50% | भारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया |
| अगले 50 साल | सबसे गरीब देशों की जनसंख्या तीन गुनी; अनेक धनी देशों की घटेगी |
- ★चक्र: उच्च आय + कम वृद्धि → और धनी | निम्न आय + तीव्र वृद्धि → और गरीब।
- असमानता उत्तर-दक्षिण के बीच और दक्षिण के भीतर भी।
- ★★“सबसे ज्यादा सशस्त्र संघर्ष सहारा मरुस्थल के दक्षिणवर्ती अफ्रीकी देशों में होते हैं। यह इलाका दुनिया का सबसे गरीब इलाका है।”
(घ) प्रवासन — तीन शब्द, तीन अर्थ★★
| पद | कौन | राज्य की जिम्मेदारी |
|---|---|---|
| आप्रवासी | अपनी मर्जी से स्वदेश छोड़ने वाले | स्वीकारने की बाध्यता नहीं |
| शरणार्थी | युद्ध, प्राकृतिक आपदा या राजनीतिक उत्पीड़न से मज़बूर | स्वीकार करने की अपेक्षा |
| आंतरिक विस्थापित | घर छोड़ा, पर राष्ट्रीय सीमा के भीतर ही | — उदाहरण: कश्मीरी पंडित (1990 का दशक) |
- ★★“विश्व का शरणार्थी-मानचित्र विश्व के संघर्ष-मानचित्र से लगभग हू-ब-हू मेल खाता है।”
- आँकड़े: 1990–95 में 70 देशों के बीच 93 युद्ध, साढ़े 55 लाख मृतक; 1990 के दशक में 60 जगहों से प्रवास, तीन को छोड़कर सबका मूल सशस्त्र संघर्ष।
- शरण (2017): अफ्रीका 30% · मिडिल ईस्ट व उत्तरी अफ्रीका 26% · यूरोप 17% · अमेरिका 16% · एशिया-पैसिफिक 11%।
(ङ) स्वास्थ्य-महामारी★
- फैलने का रास्ता — आप्रवास, व्यवसाय, पर्यटन, सैन्य-अभियान।
- आँकड़ा — 2003 तक 4 करोड़ HIV-एड्स संक्रमित; दो-तिहाई अफ्रीका में, शेष के 50% दक्षिण एशिया में।
- ! असमानता: धनी देशों में मृत्यु-दर घटी; अफ्रीका के लिए उपचार “कीमत को देखते हुए आकाश-कुसुम”।
- नयी: एबोला, हैन्टावायरस, हेपेटाइटिस-सी। पुरानी: कोरोना, टीबी, मलेरिया, डेंगी, हैजा — औषधि-प्रतिरोधक।
- आर्थिक चोट: ब्रिटेन को ‘मैड-काऊ’ से अरबों डॉलर; बर्ड फ्लू से कई दक्षिण एशियाई देशों को मुर्ग-निर्यात बंद करना पड़ा।
- ★★निष्कर्ष: “पारस्परिक निर्भरता बढ़ रही है और राष्ट्रीय सीमाएँ अब पहले की तुलना में कम सार्थक रह गई हैं।”
(च) सीमा कहाँ खींचें — ‘न्यूनतम मानक’★★
- ! “अगर हम हर तरह के कष्ट या बीमारी को शामिल कर लें तो सुरक्षा की धारणा में संगति नहीं रह जाती।”
- ★★कसौटी: “अगर किसी मसले से संदर्भी (राज्य अथवा जनसमूह) के अस्तित्व को खतरा हो रहा हो तो उसे सुरक्षा का मसला कहा जा सकता है — चाहे इस खतरे की प्रकृति कुछ भी हो।”
- तीन उदाहरण: मालदीव (समुद्रतल) · दक्षिणी अफ्रीका — हर 6 वयस्क में 1 HIV-एड्स पीड़ित, बोस्तवाना में 3 में 1 · रवांडा 1994 — हुतु ने कुछ ही हफ्तों में लगभग 5 लाख तुत्सी मार डाले।
7 · सहयोगमूलक सुरक्षा (पृ. 76–77)
- ★★मूल तर्क: “गरीबी मिटाने, तेल तथा बहुमूल्य धातुओं की आपूर्ति बढ़ाने, आप्रवासियों और शरणार्थियों की आवाजाही के प्रबंधन तथा महामारी के नियंत्रण में सैन्य-बल से क्या मदद मिलेगी यह कहना मुश्किल है।”
- ★★“वस्तुत: ऐसे अधिकांश मसलों में सैन्य-बल के प्रयोग से मामला और बिगड़ेगा।”
- सहयोग के स्तर: द्विपक्षीय · क्षेत्रीय · महादेशीय · वैश्विक।
- कौन शामिल: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (UN, WHO, विश्व बैंक, IMF) · स्वयंसेवी संगठन (एमनेस्टी इंटरनेशनल, रेड क्रॉस) · धार्मिक, मज़दूर, सामाजिक, विकास और व्यवसायिक संगठन · ★हस्तियाँ — नेल्सन मंडेला, मदर टेरेसा।
- ★और फिर भी बल — अंतिम उपाय के रूप में, उन सरकारों के खिलाफ जो अपनी ही जनता को मार रही हों या दुख-दर्द की उपेक्षा कर रही हों।
- ★★शर्त: “बल-प्रयोग सामूहिक स्वीकृति से और सामूहिक रूप में किया जाए” — कोई एक देश अकेले नहीं।
8 · भारत — सुरक्षा की रणनीतियाँ (पृ. 77–79)
| घटक | सार |
|---|---|
| ★1. सैन्य-क्षमता | पाकिस्तान — 1947-48, 1965, 1971, 1999; चीन — 1962। चारों तरफ परमाणु-सम्पन्न देश। 1974 पहला परीक्षण; 1998 के फ़ैसलों को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से उचित ठहराया गया। |
| ★★2. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ | नेहरू — एशियाई एकता, विउपनिवेशीकरण, निरस्त्रीकरण; UN को अंतिम पंच। “सार्वभौम और बिना भेदभाव वाली” अप्रसार-नीति; नव-अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था; गुटनिरपेक्षता = तीसरा विकल्प; क्योटो प्रोटोकॉल 1997 — 160 देशों में भारत; UN शांतिबहाली मिशनों में सेना। |
| ★3. आंतरिक सुरक्षा | नगालैंड, मिजोरम, पंजाब, कश्मीर में अलगाव की कोशिशें → उत्तर: लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था, जो “शिकायतों को खुलकर रखने और सत्ता में भागीदारी” का मौका देती है। |
| ★★4. आर्थिक विकास | गरीबी और असमानता से निज़ात का प्रयास — ! “आंशिक रूप से सफल”; पर लोकतंत्र गरीब को आवाज़ देता है और सरकार पर “आर्थिक संवृद्धि को मानवीय विकास का सहगामी” बनाने का दबाव डालता है। |
★★अध्याय का अंतिम वाक्य — याद कीजिए: “लोकतंत्र सिर्फ राजनीतिक आदर्श नहीं है; लोकतांत्रिक शासन जनता को ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने का साधन भी है।”
अंतिम पन्ना — परीक्षा से 5 मिनट पहले
पाँच वाक्य जो रट लीजिए★★
- “सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है — खतरे से आजादी” — पर सिर्फ केंद्रीय मूल्यों पर पड़ने वाले गंभीर खतरों से, जिनसे अपूरणीय क्षति हो।
- “सैन्य बल से सुरक्षा को खतरा पहुँचता है और सैन्य बल से ही सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है।” (पारंपरिक धारणा)
- “सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।” (अपारंपरिक धारणा)
- “ऐसे अधिकांश मसलों में सैन्य-बल के प्रयोग से मामला और बिगड़ेगा।” (सहयोगमूलक सुरक्षा)
- “लोकतंत्र सिर्फ राजनीतिक आदर्श नहीं है; लोकतांत्रिक शासन जनता को ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने का साधन भी है।” (भारत)
आठ भ्रम जो हर साल होते हैं★
| ! भ्रम | ✓ सही |
|---|---|
| NPT 1967 में हुई | NPT 1968; 1967 वह रेखा है जिससे पहले हथियार बनाने वालों को अनुमति मिली |
| BWC 1997, CWC 1972 | BWC 1972 (जैविक, 155+), CWC 1997 (रासायनिक, 193) |
| निरस्त्रीकरण = अस्त्र-नियंत्रण | निरस्त्रीकरण = हथियार त्यागना; अस्त्र-नियंत्रण = नियम के तहत रखना |
| अपरोध = रक्षा | अपरोध = युद्ध रोकना; रक्षा = युद्ध सीमित करना/समाप्त करना |
| शरणार्थी = आप्रवासी | शरणार्थी मज़बूरी से, आप्रवासी अपनी मर्जी से |
| कश्मीरी पंडित शरणार्थी हैं | वे “आंतरिक रूप से विस्थापित जन” हैं — सीमा नहीं पार की |
| 95% = गृहयुद्धों की वृद्धि | 95% = आज के सशस्त्र संघर्षों में आंतरिक युद्धों का हिस्सा; बारहगुनी = 1946–91 की वृद्धि |
| भारत ने 1998 में पहला परीक्षण किया | पहला 1974 में; 1998 में परीक्षण के ‘फ़ैसले’ |
एक पंक्ति में हर खंड★
- सुरक्षा क्या है → खतरे से आजादी, पर केंद्रीय मूल्य + गंभीरता की दो शर्तों के साथ।
- पारंपरिक-बाहरी → सैन्य खतरा, दूसरा मुल्क; उपाय अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन।
- पारंपरिक-आंतरिक → 95% संघर्ष अब भीतर; नव-स्वतंत्र देशों की दो विशिष्ट चुनौतियाँ।
- पारंपरिक तरीके → न्याय-युद्ध; निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रण, CBMs; BWC/CWC/ABM/NPT।
- अपारंपरिक → संदर्भी व्यक्ति और मानवता; ‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’।
- नये स्रोत → आतंकवाद, मानवाधिकार, निर्धनता, प्रवासन, महामारी — और ‘न्यूनतम मानक’ की कसौटी।
- सहयोगमूलक → सेना काम नहीं आती; बल अंतिम उपाय, सामूहिक स्वीकृति से।
- भारत → चार घटक; और लोकतंत्र स्वयं सुरक्षा का साधन।