अध्याय 1दो ध्रुवीयता का अंत

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 1–14.

परीक्षा-केंद्रित संक्षेपण। ★सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं को दर्शाता है।

1917 की क्रांति से बना सोवियत संघ दूसरे विश्वयुद्ध के बाद महाशक्ति और ‘दूसरी दुनिया’ का नेता बना, पर आर्थिक ठहराव, राजनीतिक जड़ता और अंततः राष्ट्रवाद के उभार ने उसे तोड़ दिया — 9 नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार गिरी और 25 दिसंबर 1991 को सोवियत संघ समाप्त हुआ, जिससे शीतयुद्ध खत्म हुआ, अमरीका अकेली महाशक्ति बना, नए देश उभरे, और ‘शॉक थेरेपी’ नामक आर्थिक प्रयोग ने इस पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया।

1. बर्लिन की दीवार — प्रतीक★

तथ्यमान
कब बनी1961
किसे किससे अलग करती थीपश्चिमी बर्लिन को पूर्वी बर्लिन से
लंबाई150 किलोमीटर से भी ज्यादा
कितने वर्ष खड़ी रही28 वर्ष
कब गिरी★9 नवंबर, 1989
किसका प्रतीकपूँजीवादी दुनिया और साम्यवादी दुनिया के बीच विभाजन
  • पूर्वी जर्मनी की आम जनता ने इसे गिराया। यह दोनों जर्मनी के एकीकरण और साम्यवादी खेमे की समाप्ति की शुरुआत थी।
  • ★सोवियत संघ के खेमे के पूर्वी यूरोप के आठ देशों ने एक-एक करके अपने साम्यवादी शासन को बदल डाला।
  • ★सोवियत संघ को चुपचाप देखते रहना पड़ा — किसी सैन्य मजबूरी से नहीं, बल्कि आम जनता की सामूहिक कार्रवाई के दबाव के कारण।

2. सोवियत प्रणाली क्या थी?★★

उत्पत्ति और ढाँचा

  • ★समाजवादी सोवियत गणराज्य (यू.एस.एस.आर.) रूस में हुई 1917 की समाजवादी क्रांति के बाद अस्तित्व में आया।
  • क्रांति पूँजीवादी व्यवस्था के विरोध में; समाजवाद के आदर्शों और समतामूलक समाज से प्रेरित।
  • ★“मानव इतिहास में निजी संपत्ति की संस्था को समाप्त करने और समाज को समानता के सिद्धांत पर सचेत रूप से रचने की सबसे बड़ी कोशिश।”
  • ★धुरी कम्युनिस्ट पार्टी थी; किसी अन्य राजनीतिक दल या विपक्ष के लिए जगह नहीं थी।
  • अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध और राज्य के नियंत्रण में।
  • ‘दूसरी दुनिया’ = दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सोवियत तर्ज़ पर ढाले गए पूर्वी यूरोप के देश; नेता — समाजवादी सोवियत गणराज्य।

ताकत★

  • दूसरे विश्वयुद्ध के बाद महाशक्ति के रूप में उभरा।
  • ★“अमरीका को छोड़ दें तो सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था शेष विश्व की तुलना में कहीं ज्यादा विकसित थी।”
  • उन्नत संचार प्रणाली; विशाल ऊर्जा-संसाधन (खनिज-तेल, लोहा-इस्पात, मशीनरी); परिवहन की सुव्यवस्थित विशाल प्रणाली।
  • ★घरेलू उपभोक्ता-उद्योग उन्नत — “पिन से लेकर कार तक सभी चीजों का उत्पादन वहाँ होता था।”
  • ★सरकार ने सभी नागरिकों के लिए एक न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित कर दिया था; स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों की देखभाल और लोक-कल्याण रियायती दर पर।
  • मिल्कियत का प्रमुख रूप राज्य का स्वामित्व।

कमज़ोरियाँ★★

  • नौकरशाही का शिकंजा; प्रणाली सत्तावादी होती गई; नागरिकों का जीवन कठिन।
  • ★“लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं होने के कारण लोग अपनी असहमति अक्सर चुटकुलों और कार्टूनों में व्यक्त करते थे।”
  • ★कम्युनिस्ट पार्टी का सभी संस्थाओं पर गहरा अंकुश; दल जनता के प्रति जवाबदेह नहीं था।
  • ★जनता ने 15 गणराज्यों को मिलाकर सोवियत संघ बनाया था, पर पार्टी ने जनता की इस इच्छा को पहचानने से इंकार कर दिया।
  • ★रूस पंद्रह में से एक गणराज्य था, लेकिन वास्तव में हर मामले में उसका प्रभुत्व था; अन्य क्षेत्रों की जनता उपेक्षित और दमित महसूस करती थी।

3. गिरावट के कारण — छह★★

#कारण
1संस्थाओं की अंदरूनी कमज़ोरी — “राजनीतिक-आर्थिक संस्थाएँ अंदरुनी कमजोरी के कारण लोगों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकीं।” अर्थव्यवस्था गतिरुद्ध; उपभोक्ता-वस्तुओं की बड़ी कमी
2★संसाधन सैन्य-व्यय में झोंके गए — परमाणु हथियार और सैन्य साजो-सामान पर, तथा पूर्वी यूरोप के पिछलग्गू देशों को नियंत्रण में रखने पर
3पश्चिम से तुलना का धक्का — “सोवियत संघ पिछड़ चुका था और अपने पिछड़ेपन की पहचान से लोगों को राजनीतिक-मनोवैज्ञानिक रूप से धक्का लगा।”
4प्रशासनिक-राजनीतिक जड़ता — 70 सालों का शासन, जवाबदेही नहीं; भारी भ्रष्टाचार; खुलेपन के प्रति अनिच्छा; सत्ता का केंद्रीकरण; ‘पार्टी’ अधिकारियों को विशेषाधिकार
5गोर्बाचेव के सुधारों की अनपेक्षित परिणति — “लोगों की आकांक्षाओं-अपेक्षाओं का ऐसा ज्वार उमड़ा जिसका अनुमान शायद ही कोई लगा सकता था।”
6 ★★राष्ट्रवाद और संप्रभुता की इच्छा का उभार — “विघटन का अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण”

अन्य आर्थिक तथ्य: 1979 में अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप से व्यवस्था और कमजोर हुई; खाद्यान्न का आयात साल-दर-साल बढ़ा; 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में व्यवस्था लड़खड़ा रही थी और अंततः ठहर सी गयी।

राष्ट्रवाद की विडंबना — परीक्षा का पसंदीदा बिंदु★★

  • अपेक्षा: मध्य-एशियाई गणराज्यों में उभार सबसे दमदार होगा (रूस से धार्मिक और नस्ली रूप से अलग, आर्थिक रूप से पिछड़े)।
  • ★वास्तविकता: असंतोष यूरोपीय और अपेक्षतया समृद्ध गणराज्यों — रूस, उक्रेन, जार्जिया और बाल्टिक क्षेत्र — में सबसे प्रबल था।
  • कारण: इन्हें लगा कि “ज्यादा पिछड़े इलाकों को सोवियत संघ में शामिल रखने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।”
  • ★मध्य-एशियाई गणराज्यों ने स्वतंत्रता की माँग की ही नहीं — वे ‘सोवियत संघ’ के साथ ही रहना चाहते थे।

4. घटना-चक्र (सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला)★★

तिथिघटना
मार्च 1985गोर्बाचेव महासचिव चुने गए; येल्तसिन रूस की पार्टी के प्रमुख; सुधारों की शृंखला शुरू
जून 1988लिथुआनिया में आज़ादी का आंदोलन; एस्टोनिया और लातविया में फैला
अक्टूबर 1989‘वारसा समझौते’ के सदस्य अपना भविष्य तय करने को स्वतंत्र; नवंबर में बर्लिन की दीवार गिरी
फरवरी 1990ड्यूमा के चुनाव के लिए बहुदलीय राजनीति; ★पार्टी का 72 वर्ष पुराना एकाधिकार समाप्त
मार्च 1990★लिथुआनिया — स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला सोवियत गणराज्य
जून 1990रूसी संसद ने सोवियत संघ से स्वतंत्रता घोषित की
जून 1991येल्तसिन का पार्टी से इस्तीफा; रूस के राष्ट्रपति बने
अगस्त 1991गरमपंथियों का असफल तख़्तापलट
सितंबर 1991तीनों बाल्टिक गणराज्य संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य (मार्च 2004 में नाटो में)
दिसंबर 1991रूस, बेलारूस, उक्रेन ने 1922 की संधि समाप्त की; स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रकुल (CIS); आठ और देश शामिल; जार्जिया 1993 में; UN सीट रूस को
★25 दिसंबर 1991गोर्बाचेव का इस्तीफा — सोवियत संघ का अंत

5. विघटन की तीन परिणतियाँ★★

(1) शीतयुद्ध के दौर के संघर्ष की समाप्ति

  • ★“समाजवादी प्रणाली पूँजीवादी प्रणाली को पछाड़ पाएगी या नहीं — यह विचारधारात्मक विवाद अब कोई मुद्दा नहीं रहा।”
  • इस विवाद ने सेनाओं को उलझाया, हथियारों की होड़ शुरू की, परमाणु संचय बढ़ाया, विश्व को सैन्य गुटों में बाँटा।
  • ★“शीतयुद्ध के समाप्त होने से हथियारों की होड़ भी समाप्त हो गई और एक नई शांति की संभावना का जन्म हुआ।”

(2) विश्व राजनीति में शक्ति-संबंध बदले

  • ★दो संभावनाएँ थीं — एकध्रुवीय विश्व (एक महाशक्ति का दबदबा) या बहुध्रुवीय विश्व (कई मोहरे)।
  • ★“हुआ यह कि अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा।”
  • पूँजीवादी अर्थव्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभुत्वशाली।
  • ★विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ताकतवर सलाहकार बन गईं — क्योंकि इन्होंने कर्ज़ दिया है।
  • ★“राजनीतिक रूप से उदारवादी लोकतंत्र… सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा है।”

(3) नए देशों का उदय

  • बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के देश — ‘यूरोपीय संघ’ से जुड़ना और नाटो का हिस्सा बनना चाहते थे।
  • मध्य एशियाई देश — अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति का फायदा; रूस से मजबूत रिश्ते जारी रखे और पश्चिमी देशों, अमरीका, चीन से भी संबंध बनाए।

6. शॉक थेरेपी★★

यह थी क्या

  • ★रूस, मध्य एशिया के गणराज्यों और पूर्वी यूरोप में पूँजीवाद की ओर संक्रमण का मॉडल, जिसे विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने निर्देशित किया। नाम का अर्थ — ‘आघात पहुँचाकर उपचार करना’।
  • गति और गहनता अलग-अलग रही, पर दिशा और चरित्र बड़ी सीमा तक एक जैसे थे।

तत्व

  1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर पूरी तरह मुड़ना — सोवियत दौर की हर संरचना से निजात।
  2. ★“मिल्कियत का सबसे प्रभावी रूप निजी स्वामित्व होगा” — राज्य की संपदा का निजीकरण।
  3. सामूहिक ‘फार्म’ को निजी ‘फार्म’ में बदला गया।
  4. ★कोई ‘तीसरा रुख़’ मंज़ूर नहीं — राज्य-नियंत्रित समाजवाद या पूँजीवाद के अलावा कोई विकल्प नहीं।
  5. ‘मुक्त व्यापार’ को पूर्ण रूप से अपनाना; वित्तीय खुलापन और मुद्राओं की परिवर्तनीयता।
  6. ★सोवियत खेमे के आपसी व्यापारिक गठबंधन समाप्त; हर देश को सीधे पश्चिमी मुल्कों से जोड़ा गया → पश्चिमी अर्थतंत्र में समाहित।

परिणाम★★

★“1990 में अपनायी गई ‘शॉक थेरेपी’ जनता को उपभोग के उस ‘आनंदलोक’ तक नहीं ले गई जिसका उसने वादा किया था… पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो गई।”

क्षेत्रपरिणाम
उद्योगरूस का राज्य-नियंत्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा; ★लगभग 90 प्रतिशत उद्योग निजी हाथों को बेचे गए
★नाम‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’ — उद्योगों की कीमत कम आँकी गई और औने-पौने दामों में बेच दिए गए
अधिकार-पत्रनागरिकों को दिए गए, पर अधिकांश ने कालाबाजारियों को बेच दिए क्योंकि धन की ज़रूरत थी
मुद्रारूबल के मूल्य में नाटकीय गिरावट; मुद्रास्फीति से जमापूँजी जाती रही
खाद्यसामूहिक खेती समाप्त; खाद्यान्न की सुरक्षा नहीं रही; रूस ने खाद्यान्न आयात शुरू किया
★जीडीपी1999 का वास्तविक GDP 1989 की तुलना में कहीं नीचे
बैंकरूस के डेढ़ हज़ार बैंकों-संस्थानों में से लगभग आधे दिवालिया; इंकॉम बैंक के डूबने से दस हज़ार कंपनियाँ और शेयरधारक भी डूबे
समाजसमाज कल्याण की व्यवस्था नष्ट; ज्यादातर लोग ग़रीबी में; मध्य वर्ग हाशिए पर; अकादमिक-बौद्धिक लोग बिखरे या बाहर चले गए
★माफिया‘माफिया वर्ग’ उभरा और अधिकतर आर्थिक गतिविधियों पर नियंत्रण कर लिया
असमानतानिजीकरण ने नई विषमताओं को जन्म दिया; अमीर-गरीब के बीच तीखा विभाजन

राजनीतिक विफलता★

  • ★“आर्थिक बदलाव को बड़ी प्राथमिकता दी गई… लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण का कार्य ऐसी प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका।”
  • संविधान हड़बड़ी में तैयार किए गए; राष्ट्रपति को कार्यपालिका प्रमुख और लगभग हरसंभव शक्ति; संसद कमजोर।
  • ★तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने पहले 10 वर्ष, फिर अगले 10 साल के लिए अपने को बहाल किया; असहमति की अनुमति नहीं दी।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता स्थापित करने का काम अभी भी बाकी है।

फिर सुधार

  • ★“रूस सहित अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था ने सन् 2000 में यानी अपनी आज़ादी के 10 साल बाद खड़ा होना शुरू किया।”
  • कारण — खनिज, तेल, प्राकृतिक गैस और धातु का निर्यात।
  • रूस, कज़ाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और अज़रबैजान बड़े तेल-गैस उत्पादक; बाकी को पाईप-लाइन का किराया मिला।

7. संघर्ष और तनाव★

क्षेत्रक्या हुआ
चेचन्या और दाग़िस्तान (रूस)हिंसक अलगाववादी आंदोलन; मास्को की ग़ैर-जिम्मेदार सैन्य बमबारी में मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन
ताज़िकिस्तान★दस वर्षों यानी 2001 तक गृहयुद्ध
नगरनो-कराबाख (अज़रबैजान)स्थानीय अर्मेनियाई अलग होकर अर्मेनिया से मिलना चाहते हैं
जार्जियादो प्रांत स्वतंत्रता चाहते हैं; गृहयुद्ध
यूक्रेन, किरगिज़स्तान, जार्जियामौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने के आंदोलन
चेकोस्लोवाकिया★शांतिपूर्वक दो देश बने — चेक और स्लोवाकिया
युगोस्लाविया★1991 के बाद कई प्रांतों में टूटा; बोस्निया-हर्जेगोविना, स्लोवेनिया, क्रोएशिया ने स्वतंत्रता घोषित की; ‘नाटो’ को हस्तक्षेप करना पड़ा; बमबारी हुई; जातीय संघर्ष ने गृहयुद्ध का रूप लिया

मध्य एशिया — बड़ी ताकतों का अखाड़ा: हाइड्रोकार्बनिक (पेट्रोलियम) संसाधनों का विशाल भंडार; रूस, चीन और अफ़ग़ानिस्तान से सटा, पश्चिम एशिया से नजदीक; ★11 सितंबर 2001 के बाद अमरीका ने किराए पर सैनिक ठिकाने लिए और अफ़ग़ानिस्तान-इराक युद्ध में विमान उड़ाने की अनुमति ली; ★रूस इन्हें अपना निकटवर्ती ‘विदेश’ मानता है; चीन के व्यापारिक हित भी।

8. भारत और सोवियत संघ★★

आयामविवरण
आर्थिकभिलाई, बोकारो और विशाखापट्टनम के इस्पात कारखानों तथा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स को आर्थिक और तकनीकी सहायता; ★विदेशी मुद्रा की कमी के समय रुपये को माध्यम बनाकर व्यापार
राजनीतिक★कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के रुख को समर्थन; ★सन् 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मदद; भारत ने भी सोवियत विदेश नीति का अप्रत्यक्ष समर्थन किया
सैन्यऐसे वक्त सैनिक साजो-सामान दिए जब शायद ही कोई अन्य देश तैयार था; संयुक्त रूप से सैन्य उपकरण तैयार करने के समझौते
सांस्कृतिकहिंदी फिल्म और भारतीय संस्कृति लोकप्रिय; भारतीय लेखक-कलाकारों की यात्राएँ

9. भारत और रूस★★

बहुध्रुवीय विश्व का साझा सपना — छह तत्व

  1. अंतर्राष्ट्रीय फलक पर कई शक्तियाँ मौजूद हों;
  2. ★सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी हो — किसी भी देश पर हमला हो तो सभी उसे अपने लिए खतरा मानें और साथ मिलकर कार्रवाई करें;
  3. क्षेत्रीयताओं को ज्यादा जगह मिले;
  4. अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का समाधान बातचीत से हो;
  5. हर देश की स्वतंत्र विदेश नीति हो;
  6. संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं द्वारा फैसले हों और वे मजबूत, लोकतांत्रिक और शक्तिसंपन्न बनें।
  • ★2001 के भारत-रूस सामरिक समझौते के अंग के रूप में 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर।
भारत को फायदारूस को फायदा
कश्मीर, ऊर्जा-आपूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की सूचनाएँ, पश्चिम एशिया में पहुँच, चीन के साथ संबंधों में संतुलन★भारत रूस के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार देश; भारतीय सेना को अधिकांश साजो-सामान रूस से
तेल संकट में रूस ने हमेशा मदद की; ऊर्जा-आयात बढ़ाने की कोशिश (कज़ाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान के साथ भी)भारत तेल के आयातक देशों में से एक है, इसलिए महत्त्वपूर्ण
★परमाण्विक योजना; अंतरिक्ष उद्योग में क्रायोजेनिक रॉकेट; वैज्ञानिक परियोजनाओं में साझेदारीतेल वाले इलाकों में साझेदारी और निवेश

याद रखने योग्य आँकड़े★★

विवरणमान
सोवियत संघ की उत्पत्ति1917 की समाजवादी क्रांति के बाद
गणराज्यों की संख्या15
बर्लिन दीवार — निर्माण / लंबाई / अवधि / पतन1961 / 150+ किमी / 28 वर्ष / 9 नवंबर 1989
साम्यवादी शासन बदलने वाले पूर्वी यूरोपीय देशआठ
अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप1979
कम्युनिस्ट पार्टी का शासन70 साल
सत्ता पर पार्टी का एकाधिकार72 वर्ष (फरवरी 1990 में समाप्त)
गोर्बाचेव महासचिव बनेमार्च 1985
स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला गणराज्य★लिथुआनिया, मार्च 1990
CIS बनाने वाले तीन देश★रूस, बेलारूस, उक्रेन — दिसंबर 1991
समाप्त की गई संधि1922 की
जार्जिया राष्ट्रकुल में1993
बाल्टिक देश नाटो मेंमार्च 2004
सोवियत संघ का अंत★25 दिसंबर 1991
शॉक थेरेपी अपनायी गई1990
निजी हाथों में बेचे गए उद्योग★लगभग 90 प्रतिशत
GDP तुलना1999 का GDP 1989 से नीचे
रूस के बैंक / दिवालियाडेढ़ हज़ार / लगभग आधे
इंकॉम बैंक से डूबींदस हज़ार कंपनियाँ और शेयरधारक
अर्थव्यवस्था का सुधारसन् 2000, आज़ादी के 10 साल बाद
तुर्कमेनिस्तान-उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति10 + 10 वर्ष
ताज़िकिस्तान गृहयुद्धदस वर्ष, 2001 तक
युगोस्लाविया का टूटना1991 के बाद
भारत-रूस सामरिक समझौता / दस्तावेज़2001 / 80
भारत — रूस के लिए हथियारों का★दूसरा सबसे बड़ा खरीददार
सोवियत मदद — युद्ध1971 (पाकिस्तान से)

व्यक्ति — एक नज़र में★

नेताकालपहचान
व्लादिमीर लेनिन1870–1924बोल्शेविक कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक; 1917 की रूसी क्रांति के नायक; संस्थापक-अध्यक्ष (1917–1924)
जोजेफ स्टालिन1879–1953लेनिन के उत्तराधिकारी (1924–1953); तेज़ औद्योगीकरण और खेती का बलपूर्वक सामूहिकीकरण; 1930 के दशक के आतंक और तानाशाही के लिए जिम्मेदार
निकिता ख़्रुश्चेव1894–1971राष्ट्रपति (1953–1964); स्टालिन की शैली के आलोचक; 1956 में सुधार; ★‘शांतिपूर्ण सहअस्तित्व’; हंगरी के दमन और क्यूबा मिसाइल संकट में शामिल
लिओनिड ब्रेझनेव1906–1982राष्ट्रपति (1964–1982); ★एशिया की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का सुझाव; चेकोस्लोवाकिया के दमन और अफगानिस्तान पर आक्रमण में शामिल
मिख़ाइल गोर्बाचेवजन्म 1931★अंतिम राष्ट्रपति (1985–1991); ★पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त; हथियारों की होड़ पर रोक; सेना वापस बुलाई; जर्मनी के एकीकरण में सहायक; शीतयुद्ध समाप्त किया
बोरिस येल्तसिन1931–2007★रूस के पहले चुने हुए राष्ट्रपति (1991–1999); 1991 के विरोध का नेतृत्व; विघटन में केंद्रीय भूमिका

अंतिम क्षण के जालध्यान

  1. ★अध्याय का नाम ‘दो ध्रुवीयता का अंत’ है — ‘शीतयुद्ध का दौर’ वाला अध्याय हटा दिया गया है।
  2. 1917 = क्रांति; 1922 = संघ-निर्माण की संधि (दिसंबर 1991 में समाप्त)। दोनों अलग।
  3. बर्लिन दीवार बनी 1961, गिरी 1989 — बीच में 28 वर्ष।
  4. ★स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला गणराज्य लिथुआनिया (मार्च 1990), रूस नहीं।
  5. ★राष्ट्रवाद मध्य एशिया में नहीं, यूरोपीय-समृद्ध गणराज्यों में प्रबल था। मध्य एशिया ने स्वतंत्रता माँगी ही नहीं।
  6. CIS बनाने वाले तीन — रूस, बेलारूस, उक्रेन।
  7. उत्तराधिकारी राज्य = रूस — UNSC सीट, एकमात्र परमाणु शक्ति, संधियों का जिम्मा।
  8. ★शॉक थेरेपी को विश्व बैंक और IMF ने निर्देशित किया।
  9. ‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’ = लगभग 90% उद्योगों की औने-पौने बिक्री।
  10. ★चेकोस्लोवाकिया शांतिपूर्वक बँटा; युगोस्लाविया में गृहयुद्ध और नाटो की बमबारी।
  11. गोर्बाचेव = सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति; येल्तसिन = रूस के पहले चुने हुए राष्ट्रपति।
  12. ख़्रुश्चेव → हंगरी + क्यूबा; ब्रेझनेव → चेकोस्लोवाकिया + अफगानिस्तान।
  13. तीन परिणतियाँ: शीतयुद्ध की समाप्ति · अमरीका अकेली महाशक्ति · नए देशों का उदय।

पाठ्यपुस्तक में मुद्रित उत्तर

इस अध्याय में कोई उत्तर-कुंजी और कोई सारांश खंड मुद्रित नहीं है। उत्तर 05-Question-Bank.md में — शिक्षक द्वारा तैयार।