अध्याय 3नियोजित विकास की राजनीति

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समूह 1 — विकास एक राजनीतिक सवाल (कार्ड 1–11)

1. यह अध्याय किस चुनौती पर है? → आर्थिक विकास की चुनौती (अध्याय 1 = एकता, अध्याय 2 = लोकतंत्र, अध्याय 3 = विकास)

2. ★★अध्याय का केंद्रीय दावा? → विकास कोई तकनीकी सवाल नहीं, राजनीतिक सवाल है।

3. उड़ीसा निवेश के लिहाज़ से महत्वपूर्ण क्यों बना? → इस्पात की विश्वव्यापी माँग बढ़ी और वहाँ लौह-अयस्क का विशाल भंडार था, जिसका दोहन अभी बाकी था।

4. !★उड़ीसा में निवेश का पेच क्या था? → “लौह-अयस्क के ज्यादातर भंडार उड़ीसा के सर्वाधिक अविकसित इलाकों में हैं — खासकर आदिवासी-बहुल जिलों में।”

5. ★★उड़ीसा में लौह-अयस्क के खनन को लेकर चार टकराते हित कौन-से हैं? → राज्य सरकार (पूँजी-निवेश और रोज़गार) · आदिवासी (विस्थापन का डर; आजीविका छिनना) · पर्यावरणविद (प्रदूषण) · केंद्र सरकार (बुरी मिसाल और निवेश में बाधा)

6. ★अध्याय का केंद्रीय प्रश्न? → “उड़ीसा में किस तरह के विकास की ज़रूरत है? दरअसल, किसकी ज़रूरतों को उड़ीसा की ज़रूरत कहा जाए?”

7. ‘उड़ीसा में किस तरह के विकास की ज़रूरत है’ — इन सवालों का जवाब कौन दे सकता है? → “इन सवालों के जवाब कोई विशेषज्ञ नहीं दे सकता।”

8. विकास के ऐसे फ़ैसलों में किन हितों को तौलना पड़ता है? → “एक सामाजिक-समूह के हितों को दूसरे के हितों की तुलना में” — और साथ ही “मौजूदा पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी” के हितों को।

9. ★★विकास के फ़ैसलों में विशेषज्ञों की राय कितनी, और अंतिम फ़ैसला किसका? → “खनन, पर्यावरण और अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों की राय जानना महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम निर्णय निश्चित तौर पर राजनीतिक निर्णय होना चाहिए। जन-प्रतिनिधि जनता की भावनाओं को समझते हैं और जन-प्रतिनिधियों को ही ऐसे फ़ैसले लेने चाहिए।”

10. ★पोस्को विरोध का ब्योरा? → जगतसिंह जिले में प्रस्तावित संयंत्र; धिंकिया, नुआगाँव और गढ़कुजंगा पंचायत के एक सौ से ज्यादा स्त्री-पुरुष; माँग — सहमति-पत्र रद्द हो; पुलिस ने रोका; आयोजक — राष्ट्रीय युवा संगठन और नवनिर्माण समिति।

11. ★पोस्को विरोध का नारा? → “हमारी जीविका और जीवन की कीमत पर कंपनी को इस्पात संयंत्र लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”

समूह 2 — वामपंथ, दक्षिणपंथ, सहमति और मतभेद (कार्ड 12–20)

12. ★‘वामपंथ’ का अर्थ? → “उन लोगों की तरफ़ संकेत जो अर्थव्यवस्था के राज्य नियंत्रण के पक्ष में हैं और मुक्त प्रतिस्पर्धा पर राज्य विनियमन को प्राथमिकता देते हैं।”

13. ★‘दक्षिणपंथ’ का अर्थ? → “जो मानते हैं कि खुली प्रतिस्पर्धा और बाज़ारमूलक अर्थव्यवस्था के ज़रिए ही प्रगति हो सकती है” — यानी सरकार को गैरज़रूरी हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

14. ‘वामपंथ’ और ‘दक्षिणपंथ’ पद क्या बताते हैं? → कि कोई दल सामाजिक बदलाव को लेकर कौन-सा पक्ष लेगा और आर्थिक पुनर्वितरण में राज्य की भूमिका पर उसकी क्या राय होगी।

15. ★1960 के दशक में कौन कहाँ था? (अध्याय 2 से कड़ी) → CPI और सोशलिस्ट पार्टी = वामपंथ · स्वतंत्र पार्टी = दक्षिणपंथ · कांग्रेस = मध्यमार्गी, पर 1955 के बाद वाम की ओर झुकी।

16. ★आज़ादी के समय दो सहमतियाँ? → (1) “भारत के विकास का अर्थ आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक-सामाजिक न्याय — दोनों ही हैं।” (2) “इस मामले को व्यवसायी, उद्योगपति और किसानों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता; सरकार को प्रमुख भूमिका निभानी थी।”

17. ★★तीन मतभेद के प्रश्न? → (1) “क्या कोई ऐसा केंद्रीय संगठन ज़रूरी है जो पूरे देश के लिए योजना बनाए?” (2) “क्या सरकार को कुछ महत्त्वपूर्ण उद्योग और व्यवसाय खुद चलाने चाहिए?” (3) “अगर सामाजिक न्याय आर्थिक संवृद्धि के आड़े आता हो तो सामाजिक-न्याय पर कितना ज़ोर देना उचित होगा?”

18. ★क्या विकास पर ये तीन मतभेद सुलझ गए? → नहीं — “इनमें से प्रत्येक सवाल पर टकराव हुए जो आज तक जारी हैं।”

19. ★★‘विकास’ सबके लिए एक जैसा क्यों नहीं है? → उद्योगपति, शहरी उपभोक्ता और आदिवासी — तीनों के लिए अर्थ अलग। “इसी कारण ‘विकास’ से जुड़ी कोई भी ‘चर्चा’ विवादों से परे नहीं होती।”

20. आज़ादी के बाद पहले दशक में ‘विकास’ का क्या अर्थ लगाया जाता था? → “‘विकास’ का अर्थ था ज्यादा-से-ज्यादा आधुनिक होना और आधुनिक होने का अर्थ था, पश्चिमी औद्योगिक देशों की तरह होना।” — और आधुनिकीकरण = संवृद्धि, भौतिक प्रगति और वैज्ञानिक तर्कबुद्धि।

समूह 3 — दो मॉडल और योजना आयोग (कार्ड 21–30)

21. ★विकास के दो मॉडल और उनके देश? → उदारवादी-पूंजीवादी मॉडल — यूरोप के अधिकतर हिस्सों और संयुक्त राज्य अमरीका में · समाजवादी मॉडल — सोवियत संघ ने

22. ★★भारत किस मॉडल से प्रभावित था? → “उस वक्त हिंदुस्तान में बहुत-से लोग विकास के सोवियत मॉडल से गहरे तौर पर प्रभावित थे।” — इनमें CPI, सोशलिस्ट पार्टी और खुद कांग्रेस के नेहरू तक शामिल थे। ★“अमरीकी तर्ज़ के पूँजीवादी विकास के पैरोकार बहुत कम थे।”

23. ★आज़ादी के आंदोलन के दौरान कौन-सी तीन बातें तय हो गई थीं? → (1) आर्थिक सरोकार अंग्रेजी हुकूमत से एकदम अलग होंगे (2) सरकार संकुचित व्यापारिक हितों के लिए काम नहीं करेगी (3) “गरीबी मिटाने और सामाजिक-आर्थिक पुनर्वितरण के काम का मुख्य जिम्मा सरकार का होगा।”

24. ! तीन बातें तय होने के बाद भी विकास की मुख्य बहस क्या बची रही? → “कुछ औद्योगीकरण को उचित रास्ता मानते थे तो कुछ की नज़र में कृषि का विकास करना और ग्रामीण क्षेत्र की गरीबी को दूर करना सर्वाधिक ज़रूरी था।”

25. !★★क्या योजना आयोग एक संवैधानिक निकाय है? → नहीं! “योजना आयोग संविधान द्वारा स्थापित बाकी आयोगों अथवा दूसरे निकायों की तरह नहीं है।” — पिछले साल की किताब ‘भारतीय संविधान: सिद्धांत और व्यवहार’ में इसका कहीं ज़िक्र नहीं है।

26. ★योजना आयोग की स्थापना कब और कैसे? → मार्च 1950 में, भारत सरकार ने एक सीधे-सादे प्रस्ताव के जरिए की।

27. ★★योजना आयोग की भूमिका क्या है? → “यह आयोग एक सलाहकार की भूमिका निभाता है और इसकी सिफ़ारिशें तभी प्रभावकारी हो पाती हैं जब मंत्रिमंडल उन्हें मंज़ूर करे।”

28. योजना आयोग का अध्यक्ष कौन बना? → प्रधानमंत्री

29. ★योजना आयोग के प्रस्ताव में उद्धृत तीन नीति-निर्देशक तत्व? → (क) “स्त्री और पुरुष, सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधनों का बराबर-बराबर अधिकार हो।” (ख) “समुदाय के भौतिक संसाधनों की मिल्कियत और नियंत्रण को इस तरह बाँटा जाएगा कि उससे सर्वसामान्य की भलाई हो।” (ग) “अर्थव्यवस्था का संचालन इस तरह नहीं किया जाएगा कि धन अथवा उत्पादन के साधन एकाध जगह केंद्रित हो जाएँ।”

30. ★नीति आयोग कब बना और उसका पूरा नाम? → 1 जनवरी 2015 को अस्तित्व में आया; पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था।

समूह 4 — नियोजन और ‘बॉम्बे प्लान’ (कार्ड 31–40)

31. ★नियोजन पर सब किस बात पर सहमत थे? → “विकास का काम निजी हाथों में नहीं सौंपा जा सकता और सरकार के लिए ज़रूरी है कि वह विकास का एक खाका अथवा योजना तैयार करे।”

32. ★1940–50 के दशक में नियोजन के पक्ष में हवा क्यों बह रही थी — तीन कारण? → (1) “यूरोप ‘महामंदी’ का शिकार होकर कुछ सबक सीख चुका था।” (2) “जापान और जर्मनी ने युद्ध की विभीषिका झेलने के बाद अपनी अर्थव्यवस्था फिर खड़ी कर ली थी।” (3) “सोवियत संघ ने 1930 तथा 1940 के दशक में भारी कठिनाइयों के बीच शानदार आर्थिक प्रगति की थी।”

33. ! निजी निवेशकों के बारे में सामान्य धारणा क्या है? → “निजी निवेशक — उद्योगपति और बड़े व्यापारिक उद्यमी — नियोजन के पक्ष में नहीं होते; वे एक खुली अर्थव्यवस्था चाहते हैं जहाँ पूँजी के बहाव पर सरकार का कोई अंकुश न हो।”

34. ★★निजी निवेशक नियोजन के पक्ष में नहीं होते, पर भारत में क्या हुआ? → “लेकिन, भारत में ऐसा नहीं हुआ। 1944 में उद्योगपतियों का एक तबका एकजुट हुआ। इस समूह ने देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया। इसे ‘बॉम्बे प्लान’ कहा जाता है।”

35. ‘बॉम्बे प्लान’ की मंशा क्या थी? → सरकार “औद्योगिक तथा अन्य आर्थिक निवेश के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए।”

36. ★★बॉम्बे प्लान से नियोजन पर क्या निष्कर्ष निकलता है? → “इस तरह चाहे दक्षिणपंथी हों अथवा वामपंथी, उस वक्त सभी चाहते थे कि देश नियोजित अर्थव्यवस्था की राह पर चले।”

37. ★भारत ने किसकी तरह पंचवर्षीय योजनाओं का विकल्प चुना? → “सोवियत संघ की तरह भारत के योजना आयोग ने भी पंचवर्षीय योजनाओं का विकल्प चुना।”

38. ★बजट के दो हिस्से? → गैरयोजना-व्यय — “सालाना आधार पर दैनंदिन मदों” पर खर्च · योजना-व्यय — योजना की “प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए पाँच साल की अवधि में” खर्च

39. पंचवर्षीय योजना का फ़ायदा? → “सरकार के सामने अर्थव्यवस्था की एक बड़ी तसवीर होती थी और वह अर्थव्यवस्था में लंबी अवधि के हस्तक्षेप कर सकती थी।”

40. ★योजनाओं का कालक्रम? → 1951 — प्रथम योजना का प्रारूप (नवंबर 1951 में वास्तविक दस्तावेज़) · 1956 — दूसरी योजना (गहमागहमी चरम पर) · 1961 — तीसरी योजना · ! 1966 — चौथी चालू होनी थी, पर आर्थिक संकट के कारण विराम।

समूह 5 — पहली और दूसरी योजना (कार्ड 41–54)

41. प्रथम पंचवर्षीय योजना की अवधि और लक्ष्य? → 1951–1956; “देश को गरीबी के मकड़जाल से निकालने की कोशिश।”

42. ★★प्रथम योजना का मुख्य ज़ोर? → कृषि-क्षेत्र पर — बाँध और सिंचाई में निवेश, क्योंकि “विभाजन के कारण कृषि-क्षेत्र को गहरी मार लगी थी।”

43. प्रथम योजना की विशाल परियोजना? → भाखड़ा-नांगल

44. ★के.एन. राज की दलील? → “अगले दो दशक तक भारत को अपनी चाल ‘धीमी’ रखनी चाहिए, क्योंकि तेज़ रफ़्तार विकास से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचेगा।”

45. ★प्रथम योजना में भूमि-सुधार का महत्त्व? → “देश में भूमि के वितरण का जो ढर्रा मौजूद है उससे कृषि के विकास को सबसे बड़ी बाधा पहुँचती है” — इसलिए भूमि-सुधार को “देश के विकास की बुनियादी चीज़” माना गया।

46. प्रथम योजना का परिव्यय? → Rs 2,069 करोड़ (समाचारपत्र-शीर्षक, पृ. 49)

47. ★बचत की समस्या क्या थी? → राष्ट्रीय आय बढ़ाने के लिए बचत खर्चे से ज्यादा होनी चाहिए थी — ! पर 1950 के दशक में खर्च का स्तर भी बहुत नीचे था और “रोज़गार के काबिल जितने लोग थे उनकी तुलना में देश का मौजूदा पूँजी-भंडार कम था।”

48. पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान बचत का क्या हुआ? → “बचत तीसरी पंचवर्षीय योजना तक बढ़ी… लेकिन उम्मीद के अनुरूप नहीं थी… 1960 के दशक से 1970 के दशक के शुरुआती सालों तक बचत की मात्रा में लगातार कमी आई।”

49. ★★दूसरी योजना का मुख्य ज़ोर और उसका शिल्पी? → भारी उद्योगों का विकास; पी.सी. महालनोबिस के नेतृत्व में तैयार।

50. ★★पहली और दूसरी योजना का मूलमंत्र? → “पहली योजना का मूलमंत्र था धीरज, लेकिन दूसरी योजना की कोशिश तेज़ गति से संरचनात्मक बदलाव करने की थी।”

51. दूसरी योजना में देसी उद्योगों को कैसे संरक्षण मिला? → “सरकार ने देसी उद्योगों को संरक्षण देने के लिए आयात पर भारी शुल्क लगाया।”

52. दूसरी योजना में कौन-से उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित हुए? → बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी और संचार

53. ★★पहली से दूसरी योजना में आबंटन के तीन मुख्य आँकड़े? → कृषि और सामुदायिक विकास — 15.1 से 11.8 · सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण — 17 से 10.1 · उद्योग और खनन — 7.6 से 18.5 (लगभग ढाई गुना)

54. ! दूसरी योजना की तीन समस्याएँ और तीन आलोचनाएँ? → समस्याएँ: प्रौद्योगिकी में पिछड़ापन (विदेशी मुद्रा खर्च) · उद्योगों ने कृषि से ज्यादा निवेश खींचा (खाद्यान्न-संकट की आशंका) · “उद्योग और कृषि के बीच संतुलन साधने में भारी कठिनाई।” आलोचनाएँ: “शहरों की तरफ़दारी” · “कृषि की जगह उद्योग को प्राथमिकता देकर गलती की गई” · “भारी उद्योगों की जगह कृषि-आधारित उद्योगों पर ज़ोर।”

समूह 6 — केरल मॉडल, जीवनियाँ और मिलान (कार्ड 55–61)

55. ★‘केरल मॉडल’ की बुनियादी बात? → “ज़रूरी नहीं कि हर नियोजन केंद्रीकृत ही हो। ऐसा भी नहीं है कि नियोजन का मतलब हमेशा उद्योगों और बड़ी-बड़ी परियोजनाओं से ही लगाया जाए।”

56. ★केरल मॉडल में किन पाँच बातों पर ज़ोर है? → शिक्षा · स्वास्थ्य · भूमि-सुधार · कारगर खाद्य-वितरण · गरीबी-उन्मूलन

57. ★★केरल मॉडल का विरोधाभास? → प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम और औद्योगिक-आधार तुलनात्मक रूप से कमज़ोर — इसके बावजूद साक्षरता शत-प्रतिशत, आयु-प्रत्याशा बढ़ी, शिशु मृत्यु-दर, मातृ मृत्यु-दर और जन्म-दर कम, और कहीं ज्यादा चिकित्सा-सुविधा।

58. ★‘नव लोकतांत्रिक पहल’ क्या थी? → 1987 से 1991 के बीच केरल सरकार का अभियान — जिसमें विज्ञान और पर्यावरण के मामले में शत-प्रतिशत साक्षरता का अभियान शामिल था; उद्देश्य — लोगों को स्वयंसेवी नागरिक संगठनों के माध्यम से विकास में सीधे शामिल करना और पंचायत, प्रखंड तथा जिला स्तर की योजनाओं में भागीदारी।

59. ★पी.सी. महालनोबिस (1893–1972) के बारे में चार बातें? → अंतरराष्ट्रीय स्तर के विख्यात वैज्ञानिक एवं सांख्यिकीविद · भारतीय सांख्यिकी संस्थान (1931) के संस्थापक · ★दूसरी पंचवर्षीय योजना के योजनाकार · तीव्र औद्योगीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की सक्रिय भूमिका के समर्थक।

60. ★जे.सी. कुमारप्पा (1892–1960) के बारे में? → ★असली नाम जे.सी. कॉर्नेलियस · अर्थशास्त्री एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट; इंग्लैंड और अमेरिका में शिक्षा · ★महात्मा गाँधी के अनुयायी · ★‘इकॉनोमी ऑफ़ परमानेंस’ के लेखक · योजना आयोग के सदस्य।

61. !! चरण सिंह, महालनोबिस, बिहार का अकाल और वर्गीज़ कूरियन — इनके मेल क्या हैं? → (क) चरण सिंह — (iii) किसान · (ख) पी.सी. महालनोबिस — (i) औद्योगीकरण · (ग) बिहार का अकाल — (ii) जोनिंग · (घ) वर्गीज़ कूरियन — (iv) सहकारी डेयरी ! इनमें से केवल महालनोबिस अध्याय में हैं — बाकी तीन हटाए गए खंड से हैं। उत्तर याद कीजिए, ढूँढ़िए मत।