Chapter 2महासागर एवं महाद्वीप

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NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6), अध्याय 2

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कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन) · बाहर की बातें जाँचीं — 9 अक्टूबर 2026

यह पन्ना किसलिए — किताब जहाँ रुकती है, उसके आगे आज क्या सच है, यह कक्षा को बताने के लिए: पाँचवें महासागर की गिनती पर आज की स्थिति, महासागर कितना गहरा है, भारत की सुनामी चेतावनी कौन देता है, अंटार्कटिका में भारत के बाद वाले दो स्टेशन, महासागर से आने वाली ऑक्सीजन, और 8 जून के विश्व महासागर दिवस के साथ प्लास्टिक पर भारत का नियम। हर हिस्से में पहले यह है कि किताब कहाँ रुकती है, फिर आज क्या है (स्रोत और तारीख़ के साथ), और फिर इसे कक्षा में कैसे उठाएँ।

हमारी सलाह है कि परीक्षा में बच्चे किताब वाली बातें और अंक ही लिखें। यहाँ की बातें सिर्फ़ समझाने के लिए हैं, और 9 अक्टूबर 2026 तक की हैं। सरकारी पन्ने बदलते रहते हैं, इसलिए पढ़ाने से पहले स्रोत का लिंक एक बार खोलकर देख लीजिए।

किताब की पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ-संख्या के साथ हैं (छपी किताब)। बाहर के सारे स्रोत अंग्रेज़ी में हैं; उनकी बात यहाँ हिंदी में अपने शब्दों में लिखी है, इसलिए उस पर उद्धरण-चिह्न नहीं हैं। जो बात किसी स्रोत की नहीं, हमारी अपनी समझ या हिसाब है, उसके आगे हमारी ओर से लिखा है।

पाँच महासागर, और पाँचवें की गिनती

किताब कहाँ रुकती है। छपी किताब (पृष्ठ 31) पाँच महासागरों के नाम गिनाती है: “प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, आर्कटिक महासागर एवं दक्षिणी (अथवा अंटार्कटिका) महासागर”। साथ ही वह साफ़ कहती है: “महासागरों का यह सीमांकन प्रचलन से अधिक कुछ नहीं हैं, क्योंकि प्राकृतिक जगत ऐसी किन्हीं भी सीमाओं का पालन नहीं करता है।” दक्षिणी महासागर को अलग गिनना कब से चला, और उसकी सीमा पर सब देश सहमत हैं या नहीं, यह किताब नहीं बताती।

आज का हाल, एक नज़र में

  • अमेरिका सरकार की समुद्र और वायुमंडल से जुड़ी संस्था NOAA के अनुसार असल में पूरी पृथ्वी पर एक ही महासागर है। पृथ्वी के 71 प्रतिशत हिस्से को ढकने वाले इस पानी को भूगोल में अलग-अलग नाम वाले हिस्सों में बाँटा गया है। स्रोत: NOAA, पन्ने का आख़िरी बदलाव 23 सितंबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
  • पहले चार महासागरों के नाम चलते थे: अटलांटिक, प्रशांत, हिंद और आर्कटिक। आज ज़्यादातर देश, जिनमें अमेरिका भी है, दक्षिणी (अंटार्कटिक) महासागर को पाँचवाँ महासागर मानते हैं। NOAA इसे सबसे नया नाम पाने वाला महासागर कहता है। स्रोत: NOAA, पन्ने का आख़िरी बदलाव 23 सितंबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
  • अमेरिका का भौगोलिक नाम बोर्ड (U.S. Board on Geographic Names) दक्षिणी महासागर को अंटार्कटिका के तट से 60° दक्षिण अक्षांश तक फैला पानी मानता है। स्रोत: NOAA, पन्ने का आख़िरी बदलाव 23 सितंबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
  • इस महासागर की सीमाएँ सन् 2000 में अंतरराष्ट्रीय जल-सर्वेक्षण संगठन (International Hydrographic Organization, IHO) के सामने प्रस्ताव के रूप में रखी गई थीं। NOAA के पन्ने पर आज भी लिखा है कि सब देश इन सीमाओं पर सहमत नहीं हैं और IHO के सदस्यों ने इन्हें पक्का नहीं किया है। स्रोत: NOAA, पन्ने का आख़िरी बदलाव 23 सितंबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
  • IHO का अपना समाचार इसके बाद की बात बताता है: मई 2023 में उसकी सभा में देशों ने अंटार्कटिका के चारों ओर “दक्षिणी महासागर” को मान्यता देने वाला प्रस्ताव मंज़ूर किया और उसकी उत्तरी सीमा 60° दक्षिण अक्षांश रखी। साथ में यह भी लिखा गया कि देशों की अपनी-अपनी राय और संभावित आपत्तियाँ दर्ज रहेंगी। उसी समाचार के अनुसार IHO ने यह महासागर पहली बार 1929 में माना था, पर 1953 में यह मान्यता हट गई थी। स्रोत: IHO, 30 मई 2023 (अंग्रेज़ी में)

कक्षा में

सवाल रखिए: किताब कहती है कि महासागरों की सीमाएँ बस चलन से बनी हैं, प्रकृति उन्हें नहीं मानती। अगर पानी एक ही है, तो लोग उसे पाँच नामों में क्यों बाँटते हैं?

उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): नाम और सीमाएँ नक्शा पढ़ने, जहाज़ चलाने और आपस में बात करने की सुविधा के लिए हैं; पानी कहीं रुकता नहीं। दक्षिणी महासागर इसका अच्छा उदाहरण है: उसकी सीमा का प्रस्ताव 2000 में रखा गया, IHO की सभा ने उसे 2023 में जाकर माना, और तब भी देशों की अपनी-अपनी राय दर्ज रही। बच्चे इससे देखते हैं कि भूगोल की कुछ बातें प्रकृति तय करती है और कुछ बातें लोग आपस में तय करते हैं।

दूसरा सवाल: 60° दक्षिण अक्षांश ग्लोब पर कहाँ होगा? उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): भूमध्य रेखा के दक्षिण में, दक्षिणी ध्रुव (90° द.) से 30° पहले। ग्लोब पर यह रेखा उँगली से घुमाकर दिखाइए और पूछिए कि इसके दक्षिण में कौन-सा महाद्वीप है। ऊपर की परिभाषा के अनुसार दक्षिणी महासागर अंटार्कटिका के तट से इसी रेखा तक का पानी है।

महासागर कितना गहरा है

किताब कहाँ रुकती है। छपी किताब (पृष्ठ 31) कहती है: “सूर्य की रोशनी वाली सतह से लेकर अंधेरी गहराइयों तक समुद्र के प्रत्येक क्षेत्र में जीवन के विविध रूप पाए जाते हैं।” ये गहराइयाँ कितनी हैं, और सबसे गहरी जगह कहाँ है, यह किताब यहाँ नहीं बताती।

आज का माप, एक नज़र में

कक्षा में

सवाल रखिए: औसत गहराई लगभग 3,682 मीटर है, यानी लगभग कितने किलोमीटर? सबसे गहरी जगह औसत से लगभग कितने गुना गहरी है?

उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): 3,682 मीटर लगभग 3.7 किलोमीटर है। 10,935 को 3,682 से भाग दें तो लगभग 2.97 आता है, यानी सबसे गहरी जगह औसत से लगभग तीन गुना गहरी है। यह हमारा हिसाब है। बच्चों से स्कूल से 3.7 किलोमीटर दूर की कोई जानी-पहचानी जगह सोचने को कहिए, फिर बताइए कि औसत समुद्र इतना नीचे तक जाता है। फिर किताब की बात से जोड़िए: “सूर्य की रोशनी वाली सतह से लेकर अंधेरी गहराइयों तक समुद्र के प्रत्येक क्षेत्र में जीवन के विविध रूप पाए जाते हैं।” (पृष्ठ 31)

सुनामी की चेतावनी: भारत का केंद्र

किताब कहाँ रुकती है। छपी किताब (पृष्ठ 34) सुनामी के बारे में कहती है: “हालाँकि तट से टकराने से पहले इसका अनुमान लगाया जा सकता है।” और आगे: “विशेषकर भारत समेत बहुत से देश ‘हिंद महासागर सुनामी चेतावनी प्रणाली’ में सहयोग कर रहे हैं।” भारत में यह चेतावनी कौन देता है, कब से देता है, और कितनी जल्दी, यह किताब नहीं बताती।

आज का हाल, एक नज़र में

  • भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र (Indian Tsunami Early Warning Centre, ITEWC) हैदराबाद में भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) में बना है। INCOIS पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है। स्रोत: PIB, 21 सितंबर 2020 (अंग्रेज़ी में)
  • 2012 की इस विज्ञप्ति के अनुसार यह केंद्र 15 अक्टूबर 2007 से काम कर रहा था। स्रोत: PIB, 12 दिसंबर 2012 (अंग्रेज़ी में)
  • 2012 की इसी विज्ञप्ति के अनुसार केंद्र पूरे हिंद महासागर और दुनिया के दूसरे महासागरों में सुनामी पैदा कर सकने वाले भूकंप को उसके होने के 10 मिनट के भीतर पकड़ सकता था, और 20 मिनट के भीतर संबंधित अधिकारियों तक चेतावनी-सलाह भेज सकता था। स्रोत: PIB, 12 दिसंबर 2012 (अंग्रेज़ी में)
  • उसी विज्ञप्ति के अनुसार पृथ्वी के महासागर आपस में जुड़े हैं, इसलिए दुनिया के किसी भी महासागर में बड़े भूकंप से उठी सुनामी लहरें भारत के तटों तक असर कर सकती हैं। स्रोत: PIB, 12 दिसंबर 2012 (अंग्रेज़ी में)
  • 2012 में यह केंद्र ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ हिंद महासागर क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय सुनामी सलाह देने वाले केंद्रों (Regional Tsunami advisory Service Provider, RTSP) में से एक था। स्रोत: PIB, 12 दिसंबर 2012 (अंग्रेज़ी में)
  • 2020 की विज्ञप्ति के अनुसार यह केंद्र यूनेस्को के अंतर-सरकारी समुद्र-विज्ञान आयोग (Intergovernmental Oceanographic Commission, IOC) के ढाँचे में हिंद महासागर के 25 देशों को सुनामी सेवाएँ दे रहा था। स्रोत: PIB, 21 सितंबर 2020 (अंग्रेज़ी में)
  • उसी विज्ञप्ति के अनुसार ओडिशा के दो गाँवों, वेंकटरायपुर (Venkatraipur) और नोलियासाही (Noliasahi), को IOC (यूनेस्को) ने सुनामी के लिए तैयार समुदाय (Tsunami Ready) के रूप में मान्यता दी। स्रोत: PIB, 21 सितंबर 2020 (अंग्रेज़ी में)
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2015 में 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस घोषित किया। स्रोत: संयुक्त राष्ट्र, विश्व सुनामी जागरूकता दिवस का पन्ना (अंग्रेज़ी में)

कक्षा में

सवाल रखिए: किताब कहती है कि सुनामी के तट से टकराने से पहले उसका अनुमान लगाया जा सकता है। अगर भूकंप का 10 मिनट में पता चल जाए और 20 मिनट में चेतावनी पहुँच जाए, तो दूर के किसी तट के लोगों के लिए यह समय क्यों काम का है?

उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): भूकंप की जगह से तट तक लहर को पहुँचने में समय लगता है; तट जितना दूर, उतना ज़्यादा समय। चेतावनी पहले मिल जाए तो लोग ऊँची जगह पर जा सकते हैं। ध्यान रखिए कि 10 और 20 मिनट 2012 की विज्ञप्ति की संख्याएँ हैं; इन्हें आज की क्षमता की तरह मत बताइए।

दूसरा सवाल: राजस्थान समुद्र से दूर है। फिर हमें सुनामी के बारे में क्यों जानना चाहिए? उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): भारत के कई राज्य समुद्र के किनारे हैं, और किताब का 2004 वाला उदाहरण दिखाता है कि एक भूकंप कई देशों तक असर कर सकता है। 5 नवंबर के आस-पास कक्षा में भारत का नक्शा खोलकर तटीय राज्य ढूँढने को कहिए और पूछिए कि चेतावनी मिलने पर वहाँ के बच्चे क्या करेंगे।

अंटार्कटिका में भारत: बाद के दो स्टेशन

किताब कहाँ रुकती है। छपी किताब (पृष्ठ 37) कहती है: “1983 में भारत ने अंटार्कटिका में ‘दक्षिण गंगोत्री’ नामक पहला वैज्ञानिक बेस स्टेशन स्थापित किया था। बाद में दो और बेस स्टेशन स्थापित किए गए।” उन दो स्टेशनों के नाम और साल किताब नहीं देती।

आज का हाल, एक नज़र में

  • भारत के दूसरे अनुसंधान स्टेशन मैत्री के लिए 1988 में शिरमाकर ओएसिस (Schirmacher Oasis) में बर्फ़ से खाली, चट्टानी जगह चुनी गई। स्रोत: NCPOR (National Centre for Polar and Ocean Research), भारत के अनुसंधान स्टेशन का पन्ना (अंग्रेज़ी में)
  • नया भारतीय स्टेशन भारती, मैत्री से लगभग 3,000 किलोमीटर पूर्व में है। इसे 18 मार्च 2012 को चालू किया गया, ताकि वहाँ साल भर वैज्ञानिक शोध हो सके। स्रोत: NCPOR, भारती स्टेशन का पन्ना (अंग्रेज़ी में)
  • (हमारी ओर से) किताब जिन दो और स्टेशनों की बात करती है, NCPOR के इन पन्नों के हिसाब से वे मैत्री और भारती हैं।
  • संसद ने 1 अगस्त 2022 को भारतीय अंटार्कटिक विधेयक, 2022 (Indian Antarctic Bill, 2022) पास किया। लोकसभा ने इसे 22 जुलाई को और राज्यसभा ने 1 अगस्त 2022 को पास किया। इसका मक़सद अंटार्कटिका के पर्यावरण और उससे जुड़े पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए भारत के अपने राष्ट्रीय उपाय बनाना है। विज्ञप्ति के अनुसार विधेयक में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारतीय अंटार्कटिक प्राधिकरण (Indian Antarctic Authority) बनाने का प्रस्ताव था। यह विज्ञप्ति संसद में पास होने तक की बात बताती है। स्रोत: PIB, 1 अगस्त 2022 (अंग्रेज़ी में)
  • राष्ट्रपति ने 6 अगस्त 2022 को इस पर स्वीकृति दी, और यह भारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 (2022 का अधिनियम संख्या 13) बना। छपे हुए क़ानून की धारा 23 में यह संस्था “अंटार्कटिक शासन और पर्यावरण संरक्षण समिति” (Committee on Antarctic Governance and Environmental Protection) कहलाती है, और इसके अध्यक्ष पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव हैं। स्रोत: भारत का राजपत्र, 8 अगस्त 2022 (अंग्रेज़ी में, PRS पर रखी प्रति)
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की 7 अगस्त 2023 की अधिसूचना (S.O. 3509(E)) से यह क़ानून 7 अगस्त 2023 से लागू हुआ। स्रोत: राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र, NCPOR (अंग्रेज़ी में)

कक्षा में

सवाल रखिए: किताब के अनुसार पहला स्टेशन 1983 में बना, और NCPOR के अनुसार भारती 2012 में चालू हुआ। पहले और तीसरे स्टेशन के बीच कितने साल का अंतर है? साल भर बर्फ़ के बीच रहकर शोध करने वालों को क्या-क्या चाहिए होगा?

उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): 2012 में से 1983 घटाइए, तो 29 साल। दूसरे हिस्से के लिए बच्चों की सूची बनवाइए: गरम रहने की जगह, खाना, ईंधन, बिजली, दवा, बाहर से संपर्क। यह सूची हमारी सोच है, किसी स्रोत की नहीं।

दूसरा सवाल: संसद में किसी विधेयक का पास होना और उस क़ानून का लागू होना, क्या एक ही बात है? उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): नहीं, ये अलग क़दम हैं। ऊपर का उदाहरण देखिए: संसद में पास 1 अगस्त 2022 को, राष्ट्रपति की स्वीकृति 6 अगस्त 2022 को, और क़ानून लागू 7 अगस्त 2023 से, यानी पास होने के लगभग एक साल बाद। बच्चों के लिए सीख: कोई बात तय होने और उसके सच में चल पड़ने के बीच फ़र्क़ होता है, इसलिए तारीख़ के साथ यह भी देखिए कि बात किस क़दम की है।

आधी ऑक्सीजन: महासागर के बहते जीव

किताब कहाँ रुकती है। छपी किताब (पृष्ठ 37) कहती है: “यह भी ध्यातव्य है कि दुनिया-भर की आधी ऑक्सीजन महासागर का वनस्पति जगत उत्पन्न करता है।” समुद्री वनस्पति जगत में क्या आता है, यह किताब पृष्ठ 31 पर बताती है: “छोटे पौधे एवं सभी समुद्री शैवाल”। पर महासागर के जीव ख़ुद कितनी ऑक्सीजन ख़र्च करते हैं, यह किताब नहीं बताती।

आज का हाल, एक नज़र में

कक्षा में

सवाल रखिए: किताब “वनस्पति जगत” कहती है, और NOAA इसमें कुछ बैक्टीरिया भी गिनता है। प्रकाश-संश्लेषण के लिए क्या चाहिए? तो ये बहते जीव महासागर के किस हिस्से में यह काम कर पाते होंगे?

उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): प्रकाश-संश्लेषण के लिए धूप चाहिए, इसलिए ये जीव पानी की ऊपरी, रोशनी वाली परत में ही यह काम कर सकते हैं; पिछले हिस्से की अंधेरी गहराइयों में नहीं। किताब की आधी वाली बात को NOAA भी लगभग आधी कहता है; साथ में यह भी बताइए कि लगभग उतनी ही ऑक्सीजन समुद्री जीव ख़ुद ख़र्च कर लेते हैं। प्रोक्लोरोकॉकस से बच्चे यह सीखते हैं कि बहुत छोटा जीव भी बहुत बड़ा काम कर सकता है।

8 जून और प्लास्टिक

किताब कहाँ रुकती है। छपी किताब (पृष्ठ 38) कहती है: “संयुक्त राष्ट्र ने 8 जून को विश्व महासागर दिवस के रूप में घोषित किया है” और चेताती है: “हम प्रतिवर्ष लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंकते हैं, जो समुद्री जीव-जंतुओं का जीवन संकट में डालता है।” यह दिवस कब घोषित हुआ, और भारत ने प्लास्टिक पर कौन-सा नियम बनाया, यह किताब नहीं बताती।

आज का हाल, एक नज़र में

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 दिसंबर 2008 के अपने प्रस्ताव 63/111 से 8 जून को विश्व महासागर दिवस घोषित किया। स्रोत: संयुक्त राष्ट्र, विश्व महासागर दिवस की पृष्ठभूमि का पन्ना (अंग्रेज़ी में)
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 12 अगस्त 2021 को प्लास्टिक कचरा प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 (Plastic Waste Management Amendment Rules, 2021) जारी (अधिसूचित) किए। इनसे पहचानी गई, एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की चीज़ों को बनाने, बाहर से मँगाने, जमा करने, बाँटने, बेचने और इस्तेमाल करने पर 1 जुलाई 2022 से रोक लगी। स्रोत: PIB, 21 जुलाई 2022 (अंग्रेज़ी में)
  • रोक वाली चीज़ों में प्लास्टिक की डंडी वाले ईयर बड, गुब्बारों की प्लास्टिक डंडियाँ, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी और आइसक्रीम की डंडियाँ, और सजावट वाला थर्मोकोल भी हैं। पूरी सूची स्रोत में है। स्रोत: PIB, 21 जुलाई 2022 (अंग्रेज़ी में)
  • 21 जुलाई 2022 की इस विज्ञप्ति के अनुसार यह रोक 1 जुलाई 2022 से लागू है। स्रोत: PIB, 21 जुलाई 2022 (अंग्रेज़ी में)

कक्षा में

सवाल रखिए: रोक वाली सूची में से कौन-सी चीज़ें आपने अपने आस-पास देखी हैं? राजस्थान समुद्र से दूर है, फिर भी यहाँ का प्लास्टिक समुद्र तक कैसे पहुँच सकता है?

उत्तर की दिशा (हमारी ओर से): कचरा नालियों और नदियों के साथ बहकर दूर तक जा सकता है, इसलिए समुद्र से दूर रहने वाले भी किताब के लाखों टन वाले कचरे में हिस्सेदार हो सकते हैं। सूची की चीज़ें छोटी हैं (डंडियाँ, झंडे, ईयर बड), पर गिनती में बहुत। कक्षा में यह भी बताइए कि दिवस संयुक्त राष्ट्र ने घोषित किया, जबकि रोक भारत सरकार के नियम से लगी: एक जागरूकता का दिन है, दूसरा क़ानूनी नियम।

दूसरे अध्यायों से जोड़

  • पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति: (हमारी ओर से) दक्षिणी महासागर की सीमा 60° दक्षिण अक्षांश से बताई जाती है; अक्षांश, भूमध्य रेखा और गोलार्ध की यही भाषा पहले अध्याय में सीखी थी। ग्लोब पर महासागर और महाद्वीप ढूँढते समय वही काम आती है।
  • स्थलरूप एवं जीवन: (हमारी ओर से) इस अध्याय में महाद्वीपों को ज़मीन के बड़े हिस्सों की तरह देखा; अगले अध्याय में उसी ज़मीन के रूपों की बात है। मारियाना गर्त जैसी गहराई को ज़मीन के ऊँचे-नीचे रूपों के साथ रखकर दिखाइए।
  • आधारभूत लोकतंत्र, भाग 1: शासन: (हमारी ओर से) शासन पढ़ाते समय भारतीय अंटार्कटिक विधेयक का उदाहरण काम आ सकता है: लोकसभा ने 22 जुलाई 2022 को और राज्यसभा ने 1 अगस्त 2022 को इसे पास किया, राष्ट्रपति ने 6 अगस्त 2022 को स्वीकृति दी, और क़ानून 7 अगस्त 2023 से लागू हुआ।

कक्षा के लिए पाँच सवाल (सोचने के, परीक्षा के नहीं)

  1. अगर कल सब देश तय कर लें कि महासागर चार ही हैं, तो क्या पानी में कुछ बदलेगा? फिर नाम का फ़र्क़ किसके लिए मायने रखता है?
  2. 2020 की विज्ञप्ति के अनुसार भारत का सुनामी केंद्र हिंद महासागर के दूसरे देशों को भी सेवा दे रहा था। ऐसी जानकारी पड़ोसी देशों के साथ बाँटना सबके लिए अच्छा क्यों है?
  3. अंटार्कटिका जैसी बर्फ़ीली और दूर की जगह पर स्टेशन बनाने और चलाने में कौन-कौन सी मुश्किलें आती होंगी?
  4. समुद्र में बहते जिन जीवों का नाम हमने कभी नहीं सुना, वे हमारी साँस से कैसे जुड़े हैं? धूप, प्लवक, ऑक्सीजन और हम को जोड़कर एक चित्र-शृंखला बनाइए।
  5. एक हफ़्ते तक घर में एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की चीज़ें गिनिए। इनमें से किसके बिना काम चल सकता है?

अंत में

(हमारी ओर से) यह अध्याय पृथ्वी को पानी और ज़मीन के बड़े हिस्सों में बाँटकर दिखाता है, और साथ में याद दिलाता है कि ये बँटवारे हमारे बनाए हैं। आज की बातें भी यही दिखाती हैं: दक्षिणी महासागर को IHO की सभा ने 2023 में जाकर माना और तब भी देशों की अपनी-अपनी राय दर्ज रही, सुनामी की चेतावनी कई देश मिलकर बाँटते हैं, और पृथ्वी की लगभग आधी ऑक्सीजन महासागर से आती है, जिसे किताब महासागर के वनस्पति जगत की देन बताती है। ये बातें किताब को बदलती नहीं, उसे और साफ़ करती हैं। अध्याय का अंत किताब के इसी वाक्य पर कीजिए: “महासागरों का यह सीमांकन प्रचलन से अधिक कुछ नहीं हैं, क्योंकि प्राकृतिक जगत ऐसी किन्हीं भी सीमाओं का पालन नहीं करता है।” (पृष्ठ 31)

जाँच की तिथि — बाहर की हर बात 9 अक्टूबर 2026 तक की है, और ऊपर के सारे स्रोत 9 अक्टूबर 2026 को खोलकर पढ़े गए। NOAA के पन्नों पर लिखी तारीख़ उनके आख़िरी बदलाव (23 सितंबर 2026) की है। PIB की विज्ञप्तियाँ 2012, 2020 और 2022 की हैं, इसलिए उनकी संख्याएँ और बातें उन्हीं तारीख़ों की बताई गई हैं। संयुक्त राष्ट्र और NCPOR के पन्नों पर पन्ने की अपनी तारीख़ नहीं है, इसलिए उनसे केवल वे तारीख़ें ली गई हैं जो पन्ने पर किसी घटना के साथ लिखी हैं।