कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान · पृष्ठ — 27 से 40
यह पन्ना किसलिए — बच्चों की कॉपी में लिखवाने के लिए। हर हिस्सा पाठ योजना के एक कालांश के साथ चलता है, और उसमें किताब की बातें छोटे, सीधे वाक्यों में दी गई हैं। कालांश 6 किताब के अभ्यास के लिए है, इसलिए उसका श्रुतलेख नहीं है; अध्याय का सार सबसे नीचे अलग से दिया है। ज़रूरी वाले वाक्य हर हाल में लिखवाइए; समय बचे तो वाले तभी, जब कालांश में समय बचे। हर वाक्य के बाद रुकिए, ताकि पीछे बैठे बच्चे भी लिख लें। जिस वाक्य के आगे (दोहराइए) लिखा है, उसे दो बार बोलिए; यह शब्द बच्चों को नहीं लिखना है। तारीख़ और संख्याएँ बोलकर पढ़िए, जैसे 26 दिसंबर 2004 को छब्बीस दिसंबर दो हज़ार चार, पर बच्चे अंक ही लिखें, जैसा किताब में छपा है।
हर हिस्से के ऊपर किताब के वे पृष्ठ लिखे हैं, जहाँ से उसकी बातें ली गई हैं; पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं। लिखवाने वाले वाक्य किताब की ही बातें हैं, बच्चों के लिखने लायक़ छोटे करके। बोलकर समझाइए वाले हिस्से आपके लिए हैं, लिखवाने के लिए नहीं। उनमें उद्धरण-चिह्नों के भीतर की पंक्तियाँ किताब की अपनी हैं, उसी वर्तनी में; जहाँ कोई सुझाव या हिसाब हमारा अपना है, वहाँ हमारी ओर से लिखा है।
कालांश 1 — नीला ग्रह, और जल के दो प्रकार
(पृष्ठ 27–31)
बोर्ड पर पहले लिखिए: नीला ग्रह · तीन-चौथाई · एक-चौथाई · महासागर · भूखंड · महाद्वीप · गोलार्ध · लवणीय (खारा) · अलवणीय (पेय जल) · हिमनद (ग्लेशियर) · भूमिगत जल · अत्यल्प
बोलकर समझाइए: कक्षा में ग्लोब धीरे-धीरे घुमाइए, साथ में किताब का चित्र 2.1 दिखाइए, और किताब का सवाल पूछिए: “आपको सबसे अधिक कौन-सा रंग दिखाई देता है?” किताब का उत्तर है नीला, यानी ‘जल’। फिर नौसेना के प्रतीक चिह्न वाला ‘ध्यान रखें’ पढ़कर सुनाइए: “भारतीय नौसेना के प्रतीक चिह्न पर आदर्श वाक्य ‘शं नो वरुण:’ अंकित है, जिसका अर्थ है, “हे वरुण! हमारे लिए कल्याणकारी हों”। यह महासागर, आकाश तथा जल से संबंधित वैदिक देवता वरुण की स्तुति है।” इसे बोर्ड पर लिखकर बुलवाइए; लिखवाने की ज़रूरत नहीं। आख़िर में किताब का यह सवाल पूछिए: “जब पृथ्वी पर जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, फिर भी ‘जल की कमी’ अथवा ‘जल संकट’ की इतनी चर्चा क्यों सुनाई देती है?” हमारी ओर से: बच्चे वाक्य 8 और 9 के सहारे उत्तर तक पहुँच सकते हैं।
लिखवाइए — ज़रूरी:
- पृथ्वी का तीन-चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है। (दोहराइए)
- इसी कारण अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीली दिखाई देती है, और आरंभिक अंतरिक्ष यात्रियों ने उसे नीला ग्रह कहा।
- ग्लोब पर दिखने वाली सबसे बड़ी जलराशियों को महासागर कहते हैं।
- भूमि ग्लोब के लगभग एक-चौथाई भाग पर फैली हुई है।
- भूमि के एक बड़े भाग को भूखंड कहते हैं।
- भूमि के एक बड़े निरंतर विस्तार को महाद्वीप कहते हैं। (दोहराइए)
- महासागर और महाद्वीप उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में समान रूप से वितरित नहीं हैं।
- पृथ्वी का अधिकांश जल महासागरों में है, और यह जल लवणीय (खारा) है। (दोहराइए)
- अलवणीय जल (पेय जल) पृथ्वी के जल संसाधनों का अत्यल्प हिस्सा है।
लिखवाइए — समय बचे तो:
- पृथ्वी की जलवायु के निर्माण में महासागर और महाद्वीप दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- खारा जल मानव सहित बहुत से स्थलीय जीवों के उपभोग के लिए अनुपयोगी है।
- अलवणीय जल हिमनद (ग्लेशियर), नदियों, झीलों, वायुमंडल और भूमिगत जल के रूप में मिलता है।
बोर्ड से उतरवाइए:
| ग्लोब पर रंग | क्या दिखाता है |
|---|---|
| नीला | जल |
| भूरा | भूमि |
कालांश 2 — पाँच महासागर
(पृष्ठ 30–32)
बोर्ड पर पहले लिखिए: प्रशांत · अटलांटिक · हिंद · आर्कटिक · दक्षिणी (अथवा अंटार्कटिका) · सीमांकन · प्रचलन · समुद्री · वनस्पति जगत · प्राणि जगत · शैवाल
बोलकर समझाइए: किताब के “समुद्री जीवन” वाले छायाचित्र दिखाइए और कुछ नाम बोलिए, जैसे प्रवाल भित्ति, शार्क, डॉल्फिन, स्पर्म ह्वेल, शैवाल, एंपरर पेंग्विन। नाम लिखवाने की ज़रूरत नहीं। फिर चित्र 2.3 पर उँगली से एक महासागर से दूसरे तक चलिए और किताब का सवाल पूछिए: “क्या सभी महासागर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं या उनके बीच कोई विभाजन है?” किताब का उत्तर है: “ये वास्तव में अलग-अलग नहीं हैं।” हमारी ओर से: वाक्य 3 से पहले दो शब्दों के सीधे अर्थ बता दीजिए: सीमांकन यानी सीमा तय करना, और प्रचलन यानी चलन।
लिखवाइए — ज़रूरी:
- विश्व के मानचित्र में पाँच महासागर हैं: प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, आर्कटिक और दक्षिणी (अथवा अंटार्कटिका) महासागर।
- ये महासागर वास्तव में अलग-अलग नहीं हैं; वे आपस में जुड़े हुए हैं। (दोहराइए)
- महासागरों का सीमांकन प्रचलन से अधिक कुछ नहीं है, क्योंकि प्राकृतिक जगत ऐसी सीमाओं का पालन नहीं करता। (दोहराइए)
- समुद्री जल विभिन्न महासागरों में बहता रहता है, जो समुद्री जीवन को समृद्ध करने में सहायक है।
- सूर्य की रोशनी वाली सतह से लेकर अंधेरी गहराइयों तक समुद्र के हर क्षेत्र में जीवन के विविध रूप पाए जाते हैं।
- प्रशांत महासागर सबसे बड़ा है और आर्कटिक महासागर सबसे छोटा। (दोहराइए)
लिखवाइए — समय बचे तो:
- समुद्री का अर्थ है: महासागरों एवं सागरों में पाए जाने वाले अथवा उससे संबंधित।
- समुद्री वनस्पति जगत में छोटे पौधे और सभी समुद्री शैवाल आते हैं।
- समुद्री प्राणि जगत में रंगीन मछलियाँ, डॉल्फिन, ह्वेल और गहरे समुद्र के अनगिनत जीव शामिल हैं।
बोर्ड से उतरवाइए:
| आकार में क्रम | महासागर |
|---|---|
| 1 (सबसे बड़ा) | प्रशांत महासागर |
| 2 | अटलांटिक महासागर |
| 3 | हिंद महासागर |
| 4 | दक्षिणी महासागर |
| 5 (सबसे छोटा) | आर्कटिक महासागर |
कालांश 3 — हिंद महासागर, और आपदाएँ
(पृष्ठ 33–34)
बोर्ड पर पहले लिखिए: अरब सागर · बंगाल की खाड़ी · लक्षद्वीप · अंडमान और निकोबार · मानसूनी वर्षा · चक्रवात · सुनामी · 26 दिसंबर 2004 · इंडोनेशिया · पूर्व चेतावनी प्रणाली · आपदा प्रबंधन · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
बोलकर समझाइए: चित्र 2.1 फिर दिखाइए और पूछिए कि पृथ्वी पर ये सफ़ेद आकृतियाँ क्या हैं। किताब का उत्तर: “वे बादलों के विशाल समूह हैं। ये बादल महाद्वीपों में वर्षा लाते हैं।” फिर 2004 की सुनामी वाला ‘ध्यान रखें’ पढ़कर सुनाइए, और चित्र 2.4 पर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह दिखाइए; किताब के अनुसार भारत में यह द्वीप समूह और तमिलनाडु व केरल के तटीय क्षेत्र इस सुनामी से भीषण रूप से प्रभावित हुए। आपदा प्रबंधन के लिए किताब की पंक्ति पढ़िए: “जिन घटनाओं के कारण जान और माल की क्षति होती है, उन्हें आपदा प्रबंधन के अंतर्गत नियंत्रित किया जाता है।”
लिखवाइए — ज़रूरी:
- हिंद महासागर का विस्तार उत्तर में एशिया, पश्चिम में अफ्रीका, पूर्व में आस्ट्रेलिया और दक्षिण में दक्षिणी महासागर तक है।
- भारत के दोनों ओर हिंद महासागर के दो भाग हैं: पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी। (दोहराइए)
- भारत में होने वाली अपेक्षित मानसूनी वर्षा महासागरों से उत्पन्न होती है। (दोहराइए)
- इस वर्षा के अभाव में हमारी कृषि और पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
- महासागर तूफानों को भी जन्म देते हैं, जैसे चक्रवात, जो तटीय क्षेत्रों में दूर-दूर तक क्षति पहुँचाते हैं।
- सुनामी विशाल और शक्तिशाली तरंगें होती हैं, जो महासागर तल में तीव्र भूकंप अथवा ज्वालामुखी के फटने के कारण आती हैं। (दोहराइए)
- 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर के आस-पास भारत और अन्य 13 देश प्रचंड सुनामी से प्रभावित हुए।
- तट से टकराने से पहले सुनामी का अनुमान लगाया जा सकता है।
लिखवाइए — समय बचे तो:
- यह सुनामी इंडोनेशिया में आए भूकंप के कारण आई थी, और इसमें दो लाख से अधिक लोगों की जान गई।
- सुनामी हजारों किलोमीटर तक जाकर तटीय क्षेत्रों को डुबा सकती है।
- भारत समेत बहुत से देश हिंद महासागर सुनामी चेतावनी प्रणाली में सहयोग कर रहे हैं।
- भारत में सभी प्रकार की आपदाओं का सामना करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण है।
बोर्ड से उतरवाइए:
| द्वीप समूह | कहाँ है |
|---|---|
| लक्षद्वीप द्वीप समूह | अरब सागर में |
| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | बंगाल की खाड़ी में |
कालांश 4 — महाद्वीप और द्वीप
(पृष्ठ 34–37)
बोर्ड पर पहले लिखिए: यूरेशिया · अफ्रीका-यूरेशिया · भूगर्भशास्त्री · सापेक्षिक आकार · द्वीप · ग्रीनलैंड · 1,300 · अंटार्कटिका · 1983 · दक्षिण गंगोत्री
बोलकर समझाइए: चित्र 2.3 पर बच्चों से महाद्वीप गिनवाइए। अलग-अलग उत्तर आएँगे, और किताब भी यही कहती है: “यह हमारी रुचि पर निर्भर करता है कि हम चार से सात के बीच किसी भी संख्या की सूची बना सकते हैं!” फिर महाद्वीपों वाले वर्गों के आरेख में वर्ग गिनवाइए और याद दिलाइए कि यह आरेख “वास्तविक आकार को नहीं, अपितु सापेक्षिक आकार को दर्शाता है।” हमारी ओर से: हमारी गिनती में एशिया 51, अफ्रीका 30, उत्तरी अमेरिका 21, दक्षिणी अमेरिका 18, अंटार्कटिका 13, यूरोप 11 और आस्ट्रेलिया 8 वर्ग हैं; बच्चों की गिनती इससे मिलाइए। ओलंपिक के पाँच छल्लों वाला ‘ध्यान रखें’ और अंटार्कटिका वाला ‘ध्यान रखें’ पढ़कर सुनाइए; इनकी बातें बोर्ड पर हैं, लिखवाने की ज़रूरत नहीं।
लिखवाइए — ज़रूरी:
- महाद्वीपों की गिनती कई प्रकार से की जा सकती है; चार से सात के बीच कोई भी संख्या हो सकती है। (दोहराइए)
- उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका को देखा जाए तो वे एक ही भूखंड हैं।
- यूरोप और एशिया भी एक ही भूखंड हैं, पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारणों से इन्हें दो महाद्वीपों के रूप में देखा जा सकता है।
- भूगर्भशास्त्री सामान्यत: यूरोप और एशिया को एक ही महाद्वीप मानते हैं, जिसे यूरेशिया कहते हैं। (दोहराइए)
- व्यवहार में सात महाद्वीपों की सूची ही व्यापक रूप से अपनाई जाती है।
- चारों ओर जल से घिरे हुए भूखंड को द्वीप कहा जाता है। (दोहराइए)
- महाद्वीप भी चारों ओर जल से घिरे होते हैं, पर आकार में बड़े होने के कारण उन्हें द्वीप नहीं कहा जाता।
लिखवाइए — समय बचे तो:
- अफ्रीका और यूरेशिया को सामान्यत: दो महाद्वीप समझा जाता है, और कभी-कभी एक भी।
- विश्व का सबसे बड़ा द्वीप ग्रीनलैंड है।
- भारत में 1,300 से अधिक द्वीप हैं।
- 1983 में भारत ने अंटार्कटिका में दक्षिण गंगोत्री नाम का पहला वैज्ञानिक बेस स्टेशन स्थापित किया।
बोर्ड से उतरवाइए:
| गिनती | महाद्वीप |
|---|---|
| चार महाद्वीप | अफ्रीका-यूरेशिया, अमेरिका, अंटार्कटिका, आस्ट्रेलिया |
| पाँच महाद्वीप | अफ्रीका, अमेरिका, अंटार्कटिका, आस्ट्रेलिया, यूरेशिया |
| छह महाद्वीप | अफ्रीका, अंटार्कटिका, आस्ट्रेलिया, यूरेशिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका |
| सात महाद्वीप | अफ्रीका, अंटार्कटिका, आस्ट्रेलिया, एशिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, यूरोप |
कालांश 5 — महासागर और जीवन, और हमारा दायित्व
(पृष्ठ 37–38)
बोर्ड पर पहले लिखिए: जलचक्र · मरुस्थल · आधी ऑक्सीजन · पृथ्वी के फेफड़े · संयुक्त राष्ट्र · 8 जून · विश्व महासागर दिवस · प्लास्टिक कचरा · सामूहिक दायित्व
बोलकर समझाइए: जलचक्र के बारे में किताब कहती है कि इसे “आप आगे विज्ञान में पढ़ेंगे”। हमारी ओर से: अभी इसका पूरा अर्थ मत समझाइए; बस इतना बताइए कि महासागरों से महाद्वीपों पर होने वाली वर्षा इसका भाग है। फिर बताइए कि लोग बहुत पुराने समय से एक जगह से दूसरी जगह जाने, व्यापार, सैनिक अभियानों और मछली पकड़ने के लिए समुद्र की यात्रा करते आए हैं, और तटीय क्षेत्रों की किंवदंतियों और कहानियों में समुद्र, समुद्री देवताओं और देवियों और समुद्री दैत्यों की बातें मिलती हैं। आख़िर में विश्व महासागर दिवस वाला ‘ध्यान रखें’ पढ़कर सुनाइए।
लिखवाइए — ज़रूरी:
- महासागरों से महाद्वीपों पर वर्षा होती है; यह पृथ्वी के जलचक्र का भाग है।
- महासागरों के बिना वर्षा नहीं होगी, तो पृथ्वी मरुस्थल बन जाएगी। (दोहराइए)
- दुनिया-भर की आधी ऑक्सीजन महासागर का वनस्पति जगत उत्पन्न करता है। (दोहराइए)
- इसीलिए महासागरों को पृथ्वी के फेफड़े कहा जाता है।
- महासागर जलवायु को नियंत्रित करने और पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र ने 8 जून को विश्व महासागर दिवस घोषित किया है।
- हम प्रतिवर्ष लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंकते हैं, जो समुद्री जीव-जंतुओं का जीवन संकट में डालता है।
- महासागरों को बचाने का प्रयास करना हम सबका सामूहिक दायित्व है। (दोहराइए)
लिखवाइए — समय बचे तो:
- महासागर भोजन और औषधि के प्रमुख स्रोत हैं।
- आवश्यकता से अधिक मछली पकड़ना भी समुद्री जीवन के पतन का एक कारण है।
- महासागरों ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की संस्कृति को भी पोषित किया है।
अध्याय का सार
(पृष्ठ 38)
बोलकर समझाइए: ये वाक्य किताब के “आगे बढ़ने से पहले…” वाले हिस्से से हैं, जहाँ पूरा अध्याय तीन बातों में समेटा गया है। हमारी ओर से: इन्हें कालांश 5 के अंत में लिखवाइए, या तब, जब पूरा अध्याय दोहराना हो।
लिखवाइए — ज़रूरी:
- पृथ्वी की सतह पर विस्तृत जलाशयों को महासागर और विशाल भूखंडों को महाद्वीप कहा जाता है।
- महासागर आपस में जुड़े हुए हैं।
- महाद्वीपों को विभिन्न प्रकार से गिना जा सकता है, किंतु सामान्यत: इन्हें सात महाद्वीपों के रूप में गिना जाता है। (दोहराइए)
- दक्षिणी गोलार्ध की तुलना में उत्तरी गोलार्ध में स्थल भाग अधिक है। (दोहराइए)
- महासागर सभी प्रकार के समुद्री जीवन को पोषित करते हैं और विश्व की जलवायु में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- अत्यधिक मानवीय गतिविधियों के कारण इन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, और इन्हें सामूहिक रूप से संरक्षित करने की आवश्यकता है।