Chapter 11आधारभूत लोकतंत्र — भाग 2: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार

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! यह सामग्री विद्यार्थी की परीक्षा-सामग्री में नहीं जाती

परीक्षा पाठ्यपुस्तक से बनती है। यह फ़ाइल बताती है कि पुस्तक ने क्या छोड़ा — शिक्षक की अपनी समझ के लिए, और उस जिज्ञासु विद्यार्थी के लिए जो कक्षा के बाद रुककर प्रश्न पूछता है।

नीचे का कुछ भी 05-Question-Bank.md, 08-MCQ-Source.md या 05-Exam-Deck-Source.md में नहीं गया है।

1. तीनों सरपंच — स्वतंत्र जाँच में क्या मिला★★

यह इस अध्याय का सबसे संतोषजनक हिस्सा है: पुस्तक ने तीन जीवित व्यक्तियों के बारे में ठोस दावे किए हैं, और खंडन खोजने पर तीनों टिके।

(क) दयानेश्वर कांबले

पुस्तक का दावाजाँच
2017✓ पुष्ट — अक्तूबर 2017 की ग्राम पंचायत चुनाव-प्रक्रिया
सोलापुर जिले का तरंगफल गाँव✓ पुष्ट
किन्नर समुदाय से✓ पुष्ट
छह अन्य उम्मीदवारों को हराया✓ पुष्ट
आदर्श वाक्य ‘लोक सेवा, ग्राम सेवा’✓ पुष्ट

★और एक विवरण जो पुस्तक नहीं देती: समाचार-विवरणों में उन्हें महाराष्ट्र का पहला किन्नर सरपंच बताया गया, और स्थानीय रूप से वे ‘माउली’ नाम से जानी जाती हैं।

! शिक्षक के लिए एक भाषिक टिप्पणी: प्रकाशित समाचार-विवरणों में उनके लिए स्त्रीलिंग रूप प्रयुक्त हुए हैं, जबकि पुस्तक के हिंदी वाक्य में पुल्लिंग क्रिया-रूप है (”…सरपंच चुने गए”)। यह अंतर कक्षा में उठाने का विषय नहीं है। पर यदि कोई विद्यार्थी बाहर से पढ़कर पूछे, तो सही उत्तर यह है कि किसी व्यक्ति की पहचान वही है जो वह स्वयं बताए।

(ख) वंदना बहादुर मैदा

पुस्तक का दावाजाँच
खानखांडवी गाँव, मध्य प्रदेश✓ पुष्ट
भील समुदाय✓ पुष्ट
गाँव की पहली महिला सरपंच✓ पुष्ट
महिलाओं को बैठकों में आने के लिए प्रेरित किया✓ पुष्ट
शिक्षा और स्वच्छता के मुद्दे✓ पुष्ट

★और जो पुस्तक नहीं बताती: प्रकाशित विवरणों के अनुसार वे पहले एक गृहिणी थीं; उन्हें परिवार के विरोध का भी सामना करना पड़ा; और उनकी पंचायत ने पानी की पुरानी कमी दूर करने के लिए एक तालाब बनवाया तथा गाँव में एक विद्यालय भी बनवाया।

(ग) पोपटराव बागुजी पवार

पुस्तक का दावाजाँच
हिवरे बाजार, अहमदनगर जिला✓ पुष्ट (जिले के नाम पर टिप्पणी नीचे)
सूखा और कम कृषि उपज✓ पुष्ट
अन्ना हजारे का मॉडल✓ पुष्ट — यह रालेगण सिद्धि का मॉडल था
2020 में पद्मश्री✓ पुष्ट — सामाजिक कार्य के क्षेत्र में

★और जो पुस्तक नहीं बताती — प्रकाशित विवरणों के अनुसार गाँव में मिट्टी और पत्थर के बंधे, रिसाव-तालाब और चेक-डैम बनाए गए; पलायन उलट गया और लोग गाँव लौटने लगे; और गाँव को समुदाय-नेतृत्व वाले जल-संरक्षण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

! एक नाम-संबंधी बात, जो शिक्षक को जाननी चाहिए

महाराष्ट्र के ‘अहमदनगर’ जिले का नाम बदलकर ‘अहिल्यानगर’ कर दिया गया है।

पुस्तक का ‘अहमदनगर’ ऐतिहासिक रूप से सही है और लिखे जाने के समय भी सही था। यदि कोई विद्यार्थी नए नाम के बारे में पूछे, तो उत्तर यही है — नाम बदला है, जगह वही है। ! परीक्षा में पुस्तक का ही नाम चलेगा।

2. ‘8,000 कस्बे और 4,000 से अधिक नगर’ — ये जोड़े नहीं जाते★★

पुस्तक कहती है (पृ. 163): “हमारे देश में लगभग 6,00,000 गाँव, 8,000 कस्बे और 4,000 से अधिक नगर हैं।”

जनगणना 2011 के आँकड़े इस तरह हैं —

श्रेणीसंख्या
सांविधिक नगर (statutory towns)4,041
जनगणना नगर (census towns)लगभग 3,894
★कुल नगर/कस्बेलगभग 7,935

! यानी ‘8,000’ और ‘4,000 से अधिक’ दो अलग-अलग समूह नहीं हैं

‘लगभग 8,000’ कुल संख्या है, और ‘4,000 से अधिक’ उसी का एक हिस्सा है।

यदि कोई विद्यार्थी इन्हें जोड़कर ‘12,000 शहरी बस्तियाँ’ लिख दे, तो वह ग़लत होगा।

★सुरक्षित तरीक़ा: कक्षा में इन दोनों संख्याओं को अलग-अलग पढ़िए और जोड़ने को मत कहिए। छात्र-सामग्री में भी उन्हें अलग-अलग ही रखा गया है।

और गाँवों की संख्या पर भी एक बात

भारत में गाँवों की कोई एक अंतिम संख्या नहीं है। जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 6.4 लाख गाँव दर्ज हैं, जिनमें से लगभग 5.94 लाख आबाद हैं; और अलग-अलग मंत्रालयों के अपने आँकड़े थोड़े अलग हैं, क्योंकि ‘गाँव’ की परिभाषा और डेटाबेस अलग-अलग हैं।

★इसीलिए पुस्तक ने ‘लगभग’ लिखा है। वह शब्द सावधानी का है, और उसे सराहा जाना चाहिए।

3. ‘बाल संसद’ — पूरी कहानी★

पुस्तक केवल इतना कहती है कि यह ‘बेयरफुट कॉलेज’ की शाखा है, जिसे बंकर रॉय ने कुछ दशक पूर्व आरंभ किया।

क्याविवरण
संस्थाबेयरफुट कॉलेज — एक जमीनी संगठन
कहाँतिलोनिया, राजस्थान
कब से1972 से
किसनेसंजीत ‘बंकर’ रॉय ने
किसके लिएवे बच्चे और वयस्क जो औपचारिक शिक्षा से छूट गए
★रात्रि विद्यालयदिन में काम करने वाले बच्चों के लिए — जहाँ लड़कियों की संख्या लड़कों से कहीं अधिक रही है
पुरस्कारवर्ल्ड्स चिल्ड्रन्स ऑनरेरी अवार्ड, 2001 — ✓ पुस्तक का वर्ष सही है

★और पुरस्कार का कारण भी दर्ज है: यह इसलिए दिया गया कि संस्था ने तीस से अधिक वर्षों तक हज़ारों निर्धन बच्चों — विशेषकर लड़कियों — को शिक्षा तक पहुँचाया।

★यह विवरण कक्षा में एक वाक्य में बताने लायक़ है: “रात्रि विद्यालय इसलिए थे क्योंकि वे बच्चे दिन में काम करते थे।” यह पूरे खंड को अचानक ठोस बना देता है।

! नाम का एक छोटा-सा अंतर: पुरस्कार का प्रचलित नाम ‘The World’s Children’s Honorary Award’ है; पुस्तक ने ‘वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड’ लिखा है। यह लिप्यंतरण का अंतर है, तथ्य का नहीं।

4. सांगखू राधू खांडू — कुछ और विवरण

पुस्तक इसे केवल ‘पश्चिमी सिक्किम’ की एक ग्राम पंचायत बताती है।

जो विवरण पुस्तक में नहीं हैं —

  • यह पंचायत पश्चिम सिक्किम के डेंटम क्षेत्र में है;
  • वहाँ ‘बाल हितैषी ग्राम पंचायत इकाई’ की पहल स्थानीय प्रशासन और जिला बाल संरक्षण इकाई के समन्वय से शुरू हुई;
  • और इसी पंचायत ने राष्ट्रीय स्तर पर ग्राम पंचायत विकास योजना से जुड़ा एक पुरस्कार भी जीता है।

★यह जोड़ कक्षा में उपयोगी है क्योंकि यह दिखाता है कि ‘बाल हितैषी’ कोई अकेली-अनूठी घटना नहीं, बल्कि एक चलती हुई सरकारी पहल है — और कोई भी पंचायत उसमें शामिल हो सकती है।

5. ‘अर्थशास्त्र’ — दो बातें जिन पर विद्वानों में मतभेद है★★

पुस्तक कहती है (पृ. 170): ”…जिसे लगभग 2300 वर्ष पहले ‘कौटिल्य’ (जिन्हें बाद में ‘चाणक्य’ नाम से भी जाना गया) ने लिखा था।”

(क) तिथि और लेखकत्व

दृष्टिकोणक्या कहता है
पारंपरिकग्रंथ चौथी शताब्दी ईसा पूर्व का है, और उसे चाणक्य ने लिखा — जो मौर्य मंत्री थे। पुस्तक का ‘लगभग 2300 वर्ष’ इसी से मेल खाता है।
! आधुनिक शोध का एक बड़ा हिस्साग्रंथ एक व्यक्ति की रचना नहीं, बल्कि कई शताब्दियों में संकलित, संशोधित और पुनर्संपादित हुआ है
ट्रॉटमैन (1971) का सांख्यिकीय अध्ययनग्रंथ कई लेखकों की रचनाओं का संकलन है; कौटिल्य पूरे ग्रंथ के लेखक नहीं हो सकते
ऑलिवेल और मैक्क्लिशप्रमुख संकलन-संशोधन पहली–तीसरी शताब्दी ईस्वी में हुआ

स्तर: ! मतभेद — और यह वास्तविक मतभेद है, कोई किनारे की बात नहीं।

! पर कक्षा 6 में इसे खोलने की आवश्यकता नहीं है। पुस्तक ने पारंपरिक तिथि दी है, जो व्यापक रूप से प्रचलित है और परीक्षा में वही चलेगी।

★यदि कोई विद्यार्थी विशेष रूप से पूछे, तो यह उत्तर पूरा और ईमानदार है: “बहुत से विद्वान मानते हैं कि यह ग्रंथ एक ही व्यक्ति ने एक ही समय में नहीं लिखा — वह लंबे समय में बना। पर परंपरा उसे कौटिल्य से जोड़ती है।”

(ख) ‘करवाटिका’ — 100 गाँव या 200?

पुस्तक कहती है — करवाटिका प्रत्येक 100 गाँवों पर।

पर अर्थशास्त्र के अनुवादों में यहाँ अंतर है —

अनुवादकरवाटिका
कुछ प्रचलित अनुवाद (शामशास्त्री की परंपरा)200 गाँवों पर
अन्य अनुवाद और सारांश100 गाँवों पर

स्तर: ! पाठ-भेद। संग्रहण (10), द्रोणमुख (400) और स्थानीय (800) पर सभी अनुवाद सहमत हैं; केवल करवाटिका पर अंतर है।

★छात्र-सामग्री में पुस्तक का ही मान — 100 — गया है, और वही परीक्षा-योग्य है। ! कक्षा में यह अंतर मत उठाइए।

6. ‘एक-तिहाई आरक्षण’ — इसका इतिहास, संक्षेप में★

पुस्तक केवल यह बताती है कि प्रावधान है। वह यह नहीं बताती कि यह कब और कैसे आया।

संदर्भ के लिए इतना पर्याप्त है —

  • पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा 1990 के दशक की शुरुआत में मिला, और तभी से महिलाओं तथा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की व्यवस्था बनी;
  • आज अनेक राज्यों ने इस आरक्षण को बढ़ाकर आधा कर दिया है — पर पुस्तक ने ‘एक-तिहाई’ कहा है, और वही न्यूनतम राष्ट्रीय प्रावधान है।

! अधिक विवरण कक्षा 6 में मत जोड़िए। अनुच्छेद-संख्याएँ और संशोधन आगे की कक्षाओं में आते हैं, और पुस्तक ने उन्हें जान-बूझकर नहीं दिया।

★जो एक बात कक्षा में कहने लायक़ है, वह यह है: यह आरक्षण तीनों स्तरों पर है — ग्राम, खंड और जिला। पुस्तक ने भी ‘सभी तीनों स्तरों पर’ लिखा है।

7. ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ — एक वाक्य का संदर्भ★

पुस्तक इसका नाम लेती है, पर विवरण नहीं देती।

कक्षा के लिए इतना पर्याप्त है — यह एक केंद्र सरकार की योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बस्तियों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना है — यानी ऐसी सड़कें जो वर्ष भर, बरसात में भी, चलने योग्य रहें।

★और ‘बारहमासी’ शब्द पर एक क्षण रुकिए। यही शब्द लक्ष्मणपुर की समस्या का उत्तर है — “भारी वर्षा से खराब हुई मुख्य सड़क का रख-रखाव।”

★यह जोड़ कक्षा में बनाइए। यह पूरे अध्याय को एक वृत्त बना देता है — पृष्ठ 164 पर समस्या, पृष्ठ 169 पर उत्तर।

8. ‘ग्राम सभा’ के बारे में एक सामान्य ग़लतफ़हमीध्यान

कई पाठक मान लेते हैं कि ग्राम सभा ‘गाँव के सब लोग’ हैं।

पुस्तक की परिभाषा इससे कुछ सँकरी है —

”…जो कि मतदाता के रूप में नामांकित गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वयस्कों का समूह होता है।”

कौन ग्राम सभा में हैकौन नहीं
वे वयस्क जो मतदाता के रूप में नामांकित हैंबच्चे
वे जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है

★और यही कारण है कि ‘बाल सभा’ और ‘बाल पंचायत’ की अलग से आवश्यकता पड़ी (पृ. 167) — क्योंकि बच्चे ग्राम सभा के सदस्य नहीं होते।

★★यह जोड़ बहुत अच्छा है और पुस्तक इसे कहीं नहीं कहती। कक्षा में यह प्रश्न पूछिए: “अगर ग्राम सभा में सब वयस्क हैं, तो बच्चों की बात कौन सुनेगा?” — और उत्तर अगला ही खंड है।

9. दो पिरामिड — एक ऐसी उपमा जो हमेशा काम करती है

अध्याय 10 और 11, दोनों में एक पिरामिड है, और दोनों में तीन स्तर हैं। यही इस अध्याय की सबसे आम भूल का स्रोत है।

कक्षा में यह उपमा दीजिए (पुस्तक की नहीं, पर सुरक्षित है):

“एक बड़ा डिब्बा है, और उसके अंदर एक छोटा डिब्बा है। बड़े डिब्बे के तीन खाने हैं — केंद्र, राज्य, स्थानीय। और उसके सबसे नीचे वाले खाने के अंदर एक और डिब्बा है, जिसके भी तीन खाने हैं — जिला, खंड, ग्राम।”

★या इससे भी सरल: “पिछला पिरामिड पूरे देश का था। यह पिरामिड उसके सबसे नीचे वाले हिस्से का है।”

यह एक वाक्य कक्षा में तीन बार बोलिए — और यह भूल लगभग पूरी तरह रुक जाती है।

जो सत्यापित नहीं हो सका

★‘सत्यापित नहीं हो सका’ अपने आप में एक निष्कर्ष है — और उसे छिपाना नहीं चाहिए।

  1. ‘अर्थशास्त्र’ की तिथि और एकल लेखकत्व — पुस्तक की ‘लगभग 2300 वर्ष’ और कौटिल्य वाली बात पारंपरिक दृष्टिकोण है; आधुनिक शोध का एक बड़ा हिस्सा इसे एक संकलित ग्रंथ मानता है, जिसका बड़ा संशोधन पहली–तीसरी शताब्दी ईस्वी में हुआ।
  2. ‘करवाटिका’ कितने गाँवों पर — पुस्तक 100 कहती है; कुछ प्रचलित अनुवादों में 200 है।
  3. ‘8,000 कस्बे’ और ‘4,000 से अधिक नगर’ — ये दो अलग समूह नहीं हैं; जनगणना 2011 के अनुसार कुल लगभग 7,935 नगर, जिनमें 4,041 सांविधिक हैं।
  4. गाँवों की संख्या — भारत में इसकी कोई एक अंतिम गणना नहीं है; अलग-अलग विभागों के आँकड़े अलग हैं। पुस्तक का ‘लगभग’ इसीलिए उचित है।
  5. लक्ष्मणपुर — यह एक काल्पनिक गाँव है, कोई वास्तविक स्थान नहीं। (पुस्तक भी उसे किसी मानचित्र पर नहीं दिखाती।)
  6. ‘अहमदनगर’ — जिले का नाम अब ‘अहिल्यानगर’ है; पुस्तक का नाम लिखे जाने के समय सही था।

शिक्षक के लिए — एक अंतिम बात

इस अध्याय में जोड़ने को बहुत कुछ है — संवैधानिक अनुच्छेद, आरक्षण का इतिहास, अर्थशास्त्र की तिथि-बहस, गाँवों की गणना।

और लगभग वह सब जोड़ना एक भूल होगी।

इस अध्याय का पूरा काम दो भेदों में है —

(1) दो पिरामिड अलग हैं — देश के तीन स्तर, और पंचायती राज के तीन स्तर; (2) ग्राम सभा चुनती है; ग्राम पंचायत चुनी जाती है।

यदि कक्षा वर्ष के अंत तक ये दो बातें याद रखे, तो यह अध्याय पूरी तरह सफल है।

बाक़ी सब आगे की कक्षाओं में आएगा — और पुस्तक स्वयं यह कह चुकी है कि पंचायती राज संस्थाओं पर राज्यों का अधिकार है, इसलिए विवरण जगह-जगह अलग होंगे।