NCERT, स्वतंत्र भारत में राजनीति, अध्याय 6, पृष्ठ 92–111 ★★अध्याय की कुंजी — दो वाक्य, दोनों पाठ के: “भारत से लोकतंत्र को विदा कर पाना बहुत कठिन है।” (पृ. 102) “सत्ताधारी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत था। फिर भी, इसके नेतृत्व ने लोकतंत्र को ठप्प करने का फ़ैसला किया।” (पृ. 109)
1 · ⚡ पहले पाँच वाक्य — अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों
- 1972–75 का आर्थिक संकट, गुजरात-बिहार के छात्र-आंदोलन और न्यायपालिका से टकराव — तीनों मिलकर आपातकाल की पृष्ठभूमि बने।
- 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गाँधी का निर्वाचन अवैध ठहराया; 25 जून की रात अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल घोषित हुआ।
- इसका अर्थ था — संघीय ढाँचा निष्प्रभावी, मौलिक अधिकार स्थगित, प्रेस सेंसरशिप, और अदालत का दरवाज़ा बंद।
- 1977 के चुनाव आपातकाल पर जनमत-संग्रह थे — कांग्रेस को 154 सीटें, जनता पार्टी और साथियों को 330।
- ★पर जनता सरकार 28 माह में बिखर गई और 1980 में कांग्रेस 353 सीटों के साथ लौट आई — यानी मतदाता तानाशाही को भी सज़ा देता है और अस्थिरता को भी।
2 · बीस तथ्य जो सीधे पूछे जाते हैं★★
| # | तथ्य |
|---|---|
| 1 | ★1973 में कीमतों में 23% और 1974 में 30% वृद्धि |
| 2 | 1972–73 में मानसून की विफलता; खाद्यान्न उत्पादन 8% कम |
| 3 | बांग्लादेश संकट — 80 लाख शरणार्थी; युद्ध के बाद अमरीका ने सहायता बंद की |
| 4 | ★खर्च घटाने के लिए सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोका गया |
| 5 | नक्सलवादी समूह पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा सक्रिय थे |
| 6 | ★गुजरात — जनवरी 1974; राष्ट्रपति शासन; जून 1975 के चुनाव में कांग्रेस हारी |
| 7 | ★★बिहार — मार्च 1974; जेपी की दो शर्तें: आंदोलन अहिंसक रहेगा और बिहार तक सीमित नहीं |
| 8 | ★★जेपी का आह्वान — ‘सम्पूर्ण क्रांति’, ताकि ‘सच्चे लोकतंत्र’ की स्थापना हो |
| 9 | ★रेल हड़ताल — मई 1974, जॉर्ज फर्नान्डिस, 20 दिन, बिना समझौते वापस |
| 10 | ★डी.के. बरुआ (1974) का नारा — “इंदिरा इज़ इंडिया, इंडिया इज़ इंदिरा” |
| 11 | ★★केशवानंद भारती (1973) — “संविधान का एक बुनियादी ढाँचा है” |
| 12 | ! 1973 में तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी करके न्यायमूर्ति ए.एन. रे मुख्य न्यायाधीश |
| 13 | ★★12 जून 1975 — न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा; याचिकाकर्ता राजनारायण |
| 14 | 24 जून 1975 — सर्वोच्च न्यायालय का आंशिक स्थगनादेश |
| 15 | ★★25 जून 1975 — रामलीला मैदान की रैली; रात में अनुच्छेद 352; राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद |
| 16 | ! 26 जून सुबह 6 बजे मंत्रिमंडल को सूचना — “तब तक बहुत कुछ हो चुका था” |
| 17 | ! RSS और जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध |
| 18 | !★अप्रैल 1976 — सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों के फ़ैसले उलटे; “सर्वाधिक विवादास्पद फ़ैसलों में एक” |
| 19 | ★42वाँ संशोधन — विधायिका का कार्यकाल 5 से 6 साल; चुनाव एक साल टाले जा सकते थे |
| 20 | ★★1977 — कांग्रेस 154 सीटें, 35% से कम वोट; जनता पार्टी और साथी 330/542; अकेले जनता पार्टी 295 |
3 · 🔥 आपातकाल की पृष्ठभूमि — तीन धाराएँ
3.1 आर्थिक संकट(आठ कारक)
मानसून की असफलता · व्यापक सूखा · पैदावार में गिरावट · खाद्यान्न उत्पादन 8% कम · विदेशी मुद्रा की कमी · औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में गिरावट · तेल की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी · बेरोज़गारी। ★और दो सीधे राजनीतिक असर: कर्मचारियों का वेतन रोका जाना (→ रेल हड़ताल) और मूल्यवृद्धि (→ छात्र-आंदोलन)।
3.2 जन-आंदोलन
| आंदोलन | विवरण |
|---|---|
| ★गुजरात (जनवरी 1974) | कीमतें और भ्रष्टाचार → बड़ी पार्टियाँ शरीक → राष्ट्रपति शासन → मोरारजी देसाई की भूख-हड़ताल की धमकी → जून 1975 के चुनाव में कांग्रेस हारी |
| ★★बिहार (मार्च 1974) | कीमतें, खाद्यान्न का अभाव, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार → छात्रों ने जेपी को बुलाया → ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का आह्वान → बिहार सरकार को बर्खास्त करने की माँग |
| रेल हड़ताल (मई 1974) | जॉर्ज फर्नान्डिस; बोनस और सेवा-शर्तें; 20 दिन; सेना तैनात; बिना समझौते वापस |
| नक्सलवादी | मार्क्सवादी-लेनिनवादी (अब माओवादी); पश्चिम बंगाल में सबसे सक्रिय |
! और संतुलन: “इंदिरा गाँधी का मानना था कि ये आंदोलन उनके प्रति व्यक्तिगत विरोध से प्रेरित हैं।”
3.3 न्यायपालिका से संघर्ष — तीन मसले, तीनों पर ‘नहीं’★★
- क्या संसद मौलिक अधिकारों में कटौती कर सकती है? → ! नहीं
- क्या संविधान संशोधन से संपत्ति के अधिकार में काट-छाँट हो सकती है? → ! नहीं
- नीति-निर्देशक सिद्धांतों के लिए मौलिक अधिकारों में कमी? → ! प्रावधान निरस्त
★★परिणति: केशवानंद भारती (1973) — “संविधान का एक बुनियादी ढाँचा है और संसद इन ढाँचागत विशेषताओं में संशोधन नहीं कर सकती।” ! और दो चिंगारियाँ: न्यायमूर्ति ए.एन. रे की नियुक्ति (तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी) और ‘प्रतिबद्ध न्यायपालिका’ तथा ‘प्रतिबद्ध नौकरशाही’ की माँग।
4 · 📅 25 जून 1975 — दिन-प्रतिदिन
| तिथि | घटना |
|---|---|
| ★★12 जून 1975 | इलाहाबाद उच्च न्यायालय — निर्वाचन अवैधानिक। कानूनन सांसद नहीं रहीं; छह महीने में दोबारा निर्वाचित न होने पर प्रधानमंत्री नहीं रह सकतीं। |
| 24 जून 1975 | सर्वोच्च न्यायालय — आंशिक स्थगनादेश: सांसद बनी रहेंगी, पर लोकसभा की कार्रवाई में भाग नहीं ले सकतीं। |
| ★★25 जून 1975 (दिन) | रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन; जेपी का राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह का आह्वान; ! सेना, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों से “अनैतिक और अवैधानिक आदेशों का पालन न करने” की अपील |
| ★★25 जून 1975 (रात) | प्रधानमंत्री की सिफ़ारिश; राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की उद्घोषणा; अनुच्छेद 352 |
| ! रात के बाद | “सभी बड़े अखबारों के दफ्तर की बिजली काट दी गई”; तड़के बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ |
| ! 26 जून, 6 बजे | “एक विशेष बैठक में मंत्रिमंडल को इन बातों की सूचना दी गई, लेकिन तब तक बहुत कुछ हो चुका था।” |
5 · ⚖ आपातकाल का व्यावहारिक अर्थध्यान
5.1 दो संवैधानिक बदलाव
- ★★“शक्तियों के बँटवारे का संघीय ढाँचा व्यावहारिक तौर पर निष्प्रभावी हो जाता है और सारी शक्तियाँ केंद्र सरकार के हाथ में चली आती हैं।”
- ★★“सरकार चाहे तो किसी एक अथवा सभी मौलिक अधिकारों पर रोक लगा सकती है अथवा उनमें कटौती कर सकती है।”
5.2 छह परिणाम
विरोध रुका और हड़तालों पर रोक · विपक्षी नेता जेल में, “तनाव भरा गहरा सन्नाटा” · प्रेस सेंसरशिप · RSS और जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध · धरना-प्रदर्शन-हड़ताल की अनुमति नहीं · ★★“मौलिक अधिकारों की बहाली के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का अधिकार भी नहीं रहा।”
5.3 निवारक नज़रबंदी★
“लोगों को गिरफ्तार इसलिए नहीं किया जाता कि उन्होंने कोई अपराध किया है बल्कि… इस आशंका से कि वे कोई अपराध कर सकते हैं।” ! गिरफ्तार लोग बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का सहारा लेकर चुनौती भी नहीं दे सकते थे। !★★अप्रैल 1976 में सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने उच्च न्यायालयों के फ़ैसले उलट दिए — “सरकार आपातकाल के दौरान नागरिक से जीवन और आज़ादी का अधिकार वापस ले सकती है।”
5.4 प्रतिरोध के पाँच रूप★
भूमिगत कार्यकर्ता · ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘स्टेट्समैन’ का खाली जगह छोड़ना · ‘सेमिनार’ और ‘मेनस्ट्रीम’ का बंद हो जाना · गुपचुप न्यूज़लेटर · ★★शिवराम कारंत (पद्मभूषण) और फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ (पद्मश्री) का पदवी लौटाना। ! पर पाठ ईमानदार है: “मुखालफत और प्रतिरोध के इतने प्रकट कदम कुछ ही लोगों ने उठाए।”
6 · 📜 संविधान में बदलाव और तीन सबक
6.1 आपातकाल के दौरान
| बदलाव | विवरण |
|---|---|
| 1 | प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती |
| ★★2 | 42वाँ संविधान संशोधन — विधायिका का कार्यकाल 5 से 6 साल; ! “यह व्यवस्था मात्र आपातकाल की अवधि भर के लिए नहीं की गई थी” |
| 3 | ! “आपातकाल के दौरान चुनाव को एक साल के लिए स्थगित किया जा सकता था” |
| ★परिणाम | “1971 के बाद अब चुनाव 1976 के बदले 1978 में करवाए जा सकते थे।” |
6.2 तीन सबक★★
| # | सबक |
|---|---|
| 1 | ★★“थोड़े ही दिनों के अंदर कामकाज फिर से लोकतांत्रिक ढर्रे पर लौट आया… भारत से लोकतंत्र को विदा कर पाना बहुत कठिन है।” |
| 2 | ★★खामियाँ सुधारी गईं — अब ‘अंदरूनी’ आपातकाल सिर्फ़ ‘सशस्त्र विद्रोह’ की स्थिति में; और मंत्रिमंडल की सलाह राष्ट्रपति को लिखित में देनी होगी |
| 3 | ★“हर कोई नागरिक अधिकारों के प्रति ज्यादा सचेत हुआ”; अदालतें सक्रिय हुईं; नागरिक अधिकारों के कई संगठन वजूद में आए |
7 · 🗳 1977 और 1980 — दो जनादेशध्यान
7.1 1977
| मद | विवरण |
|---|---|
| फ़ैसला | जनवरी 1977 — 18 महीने के आपातकाल के बाद; सभी नेता रिहा |
| चुनाव | मार्च 1977 |
| ★जनता पार्टी | विपक्षी दलों का एकजुट होकर नया दल; जयप्रकाश नारायण का नेतृत्व; जगजीवन राम की ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ भी शामिल |
| ★नारा | ‘लोकतंत्र बचाओ’ |
| ★★असली ताक़त | “जनता पार्टी के गठन के कारण यह भी सुनिश्चित हो गया कि गैर-कांग्रेसी वोट एक ही जगह पड़ेंगे।” |
परिणाम: ! कांग्रेस 154 सीटें, 35% से कम वोट · ★जनता पार्टी और साथी 330 / 542 · अकेले जनता पार्टी 295 · ! बिहार, उ.प्र., दिल्ली, हरियाणा, पंजाब में शून्य; राजस्थान और म.प्र. में एक-एक · ! इंदिरा गाँधी रायबरेली से और संजय गाँधी अमेठी से पराजित।
★★“आज़ादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि कांग्रेस लोकसभा का चुनाव हार गई।”
7.2 पर कांग्रेस हर जगह नहीं हारी★
“महाराष्ट्र, गुजरात और उड़ीसा में उसने कई सीटों पर अपना कब्ज़ा बरकरार रखा था और दक्षिण भारत के राज्यों में तो… उसकी चुनावी विजय का चक्का बेरोक-टोक चला था।”
| कारण | विवरण |
|---|---|
| 1 | “आपातकाल का प्रभाव हर राज्य पर एकसमान नहीं पड़ा था” — ज़बरन विस्थापन और नसबंदी ज्यादातर उत्तर भारत में |
| ★★2 | “उत्तर भारत का मध्यवर्ग कांग्रेस से दूर जाने लगा था और मध्यवर्ग के कई तबके जनता पार्टी को एक मंच के रूप में पाकर इससे आ जुड़े।” |
7.3 जनता सरकार का पतनध्यान
प्रधानमंत्री-पद की होड़ (मोरारजी देसाई, चरण सिंह, जगजीवन राम) → मोरारजी प्रधानमंत्री → ! “किसी दिशा, नेतृत्व अथवा एक साझे कार्यक्रम का अभाव” → 28 माह में बहुमत गया → चरण सिंह की सरकार कांग्रेस के समर्थन से, मात्र 4 महीने → जनवरी 1980 के चुनाव → ★★कांग्रेस को 353 सीटें।
★★दूसरा सबक: “सरकार अगर अस्थिर हो और उसके भीतर कलह हो, तो मतदाता ऐसी सरकार को कड़ा दंड देते हैं।”
8 · 🏛 विरासत और निष्कर्षध्यान
8.1 दलगत प्रणाली में तीन बदलाव
- कांग्रेस ने “स्वयं को विशेष विचारधारा से जोड़ा” — “देश की एकमात्र समाजवादी और ग़रीबों की हिमायती पार्टी”
- ★“यह पार्टी अब एक नेता यानी इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता पर भी निर्भर हुई”
- विपक्ष ‘गैर-कांग्रेसवाद’ की ओर मुड़ा — “गैर-कांग्रेसी वोट बिखरने नहीं चाहिए”
8.2 और सबसे दूरगामी बदलाव★★
“अप्रत्यक्ष रूप से 1977 के बाद पिछड़े वर्गों की भलाई का मुद्दा भारतीय राजनीति पर हावी होना शुरू हुआ।” बिहार में ‘अन्य पिछड़ी जातियों’ के आरक्षण पर शोर → केंद्र की जनता पार्टी सरकार ने मंडल आयोग नियुक्त किया।
8.3 संवैधानिक या राजनीतिक संकट?★★
| पक्ष | पाठ का कथन |
|---|---|
| संवैधानिक | “संसद और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को लेकर छिड़ा संवैधानिक संघर्ष भी आपातकाल के मूल में था” |
| ★★राजनीतिक | “सत्ताधारी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत था। फिर भी, इसके नेतृत्व ने लोकतंत्र को ठप्प करने का फ़ैसला किया।” |
★★पाठ का निर्णय: “यह राजनीतिक संकट तत्कालीन संवैधानिक संकट से कहीं ज्यादा संगीन था।”
9 · दस भूलें जो सबसे ज़्यादा होती हैंध्यान
| # | ! भूल | ✓ सही |
|---|---|---|
| 1 | आपातकाल इंदिरा गाँधी ने घोषित किया | ★सिफ़ारिश उनकी थी; उद्घोषणा राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने की |
| 2 | आर्थिक संकट के कारण आपातकाल घोषित हुआ | ! सरकार ने कारण “गड़बड़ी की आशंका” बताया — आर्थिक स्थिति नहीं |
| 3 | अनुच्छेद 356 लगाया गया | ★नहीं — अनुच्छेद 352 (356 राष्ट्रपति शासन का है, जो गुजरात में लगा था) |
| 4 | 12 जून को सर्वोच्च न्यायालय ने फ़ैसला दिया | ★नहीं — इलाहाबाद उच्च न्यायालय; सर्वोच्च न्यायालय ने 24 जून को आंशिक स्थगनादेश दिया |
| 5 | शाह आयोग आपातकाल से पहले बना | ! नहीं — 1977 में जनता पार्टी ने नियुक्त किया (प्रश्न 2 का उत्तर यही है) |
| 6 | 42वाँ संशोधन आपातकाल के बाद हुआ | ★नहीं — आपातकाल के दौरान पारित हुआ |
| 7 | कांग्रेस पूरे देश में हारी | ★नहीं — महाराष्ट्र, गुजरात, उड़ीसा और पूरे दक्षिण भारत में पकड़ बनी रही |
| 8 | जनता पार्टी ने पूरा कार्यकाल किया | ! नहीं — मोरारजी सरकार 28 माह, चरण सिंह सरकार 4 महीने |
| 9 | ‘सम्पूर्ण क्रांति’ इंदिरा गाँधी का नारा था | ★नहीं — जयप्रकाश नारायण का |
| 10 | रेल हड़ताल सफल रही | ! नहीं — “20 दिन के बाद… बगैर किसी समझौते के वापस ले ली गई” |
10 · ⚡ अंतिम मिनट की सूची — बीस शब्द
आर्थिक संकट (23%/30%) · नक्सलवादी आंदोलन · गुजरात जनवरी 1974 · बिहार मार्च 1974 · जेपी की दो शर्तें · ‘सम्पूर्ण क्रांति’ · रेल हड़ताल (जॉर्ज फर्नान्डिस, 20 दिन) · “इंदिरा इज़ इंडिया” · तीन संवैधानिक मसले · केशवानंद भारती · ए.एन. रे · ‘प्रतिबद्ध न्यायपालिका’ · 12 जून 1975 (जगमोहन लाल सिन्हा, राजनारायण) · 24 जून का स्थगनादेश · 25 जून — रामलीला मैदान और अनुच्छेद 352 · फखरुद्दीन अली अहमद · प्रेस सेंसरशिप · निवारक नज़रबंदी · अप्रैल 1976 का फ़ैसला · शिवराम कारंत और ‘रेणु’ · शाह आयोग · 42वाँ संशोधन (5→6) · तीन सबक · ‘लोकतंत्र बचाओ’ · 154/330/295 · 28 माह और 4 महीने · 353 सीटें · मंडल आयोग