कक्षा: 12 · विषय: राजनीति विज्ञान — स्वतंत्र भारत में राजनीति · पृष्ठ: 92–111 कुल कालांश: 5 (प्रत्येक 40 मिनट)
🎯 अधिगम-प्रतिफल
पाठ पूरा होने पर विद्यार्थी —
- आपातकाल की पृष्ठभूमि को तीन धाराओं में बता सकेगा — आर्थिक संकट · जन-आंदोलन · न्यायपालिका से संघर्ष;
- 25 जून 1975 तक की घटनाओं का क्रम तिथि-सहित बता सकेगा;
- आपातकाल का व्यावहारिक अर्थ — संघीय ढाँचे का निष्प्रभावी होना, मौलिक अधिकारों का स्थगन, प्रेस सेंसरशिप, निवारक नज़रबंदी — समझा सकेगा;
- तीन सबक और 44वें संशोधन से हुए सुधार बता सकेगा;
- ★यह तर्क कर सकेगा कि आपातकाल संवैधानिक संकट से अधिक एक राजनीतिक संकट था — जो पाठ का अपना निष्कर्ष है।
कालांश 1 · पृष्ठभूमि — आर्थिक संकट और जन-आंदोलन
पृष्ठ 92–95
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 6 मिनट | ★★पहले पन्ने से शुरू कीजिए। ‘नई दुनिया’ का 27 जून 1975 का पन्ना दिखाइए और काला बॉक्स पढ़िए — “‘संपादकीय’ की जगह खाली छोड़ दी गई थी… बाद में खाली जगह छोड़ने पर भी पाबंदी लगा दी गई।” पूछिए: “एक खाली जगह किस तरह विरोध बन जाती है?” |
| 4 मिनट | ‘इस अध्याय में…’ के चार प्रश्न बोर्ड पर लिखवाइए — ये पूरे अध्याय का ढाँचा हैं। |
| 10 मिनट | ★★आर्थिक संकट के आठ कारक (मास्टर नोट्स की सारणी)। ★दो आँकड़े घेर दीजिए — 1973 में 23% और 1974 में 30% मूल्यवृद्धि। और कारक 7 (कर्मचारियों का वेतन रोका जाना) को अगले कालांश की रेल-हड़ताल से जोड़ने के लिए निशान लगवाइए। |
| 6 मिनट | नक्सलवादी आंदोलन का अंश पढ़िए — ★यह अध्याय 5 के उस वाक्य का उत्तर है जो कहता था “आप अगले अध्याय में पढ़ेंगे…”। विद्यार्थी को यह कड़ी दिखाइए, इससे किताब जुड़ी हुई लगती है। |
| 10 मिनट | ★★गुजरात और बिहार के आंदोलन — सारणी बनाइए: गुजरात (जनवरी 1974 → राष्ट्रपति शासन → जून 1975 में चुनाव, कांग्रेस हारी) और बिहार (मार्च 1974 → जेपी → ‘सम्पूर्ण क्रांति’)। ★जेपी की दो शर्तें ज़रूर लिखवाइए — आंदोलन अहिंसक रहेगा और बिहार तक सीमित नहीं। |
| 4 मिनट | ★★दो नारे आमने-सामने लिखिए: “सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है, भावी इतिहास हमारा है!” बनाम “इंदिरा इज़ इंडिया, इंडिया इज़ इंदिरा” (डी.के. बरुआ, 1974)। पूछिए: “दूसरे नारे में लोकतंत्र के लिए क्या खतरा छिपा है?” |
गृहकार्य: पृ. 95 का जयप्रकाश नारायण का जीवनी-बॉक्स उतारिए और लक्ष्मण का 16 अप्रैल 1974 वाला कार्टून देखकर तीन पंक्तियों में लिखिए कि वह क्या कह रहा है।
कालांश 2 · न्यायपालिका से संघर्ष और आपातकाल की घोषणा
पृष्ठ 96–98
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 7 मिनट | 📦 ‘1974 की रेल हड़ताल’ का बॉक्स। ★जॉर्ज फर्नान्डिस · मई 1974 · 20 दिन · बिना समझौते वापस। ★★और वह सवाल ज़रूर उठाइए जो बॉक्स स्वयं उठाता है: “क्या आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी हड़ताल कर सकते हैं या नहीं?” |
| 10 मिनट | ★★तीन संवैधानिक मसले बोर्ड पर, तीनों पर न्यायालय का उत्तर ‘नहीं’ (मौलिक अधिकारों में कटौती · संपत्ति के अधिकार में काट-छाँट · नीति-निर्देशक सिद्धांतों के लिए मौलिक अधिकारों में कमी)। फिर केशवानंद भारती — “संविधान का एक बुनियादी ढाँचा है।” |
| 6 मिनट | !★न्यायमूर्ति ए.एन. रे की नियुक्ति (1973) — तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी। और वह शब्द जो इस दौर की पहचान बना — ‘प्रतिबद्ध न्यायपालिका’ और ‘प्रतिबद्ध नौकरशाही’। हाशिया-प्रश्न पूछिए: “क्या न्यायाधीश और अधिकारी शासक दल के प्रति निष्ठावान हों?” |
| 8 मिनट | ★★12 जून 1975 का फ़ैसला — पूरा ब्योरा: न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा · याचिकाकर्ता राजनारायण · आरोप: चुनाव-प्रचार में सरकारी कर्मचारियों की सेवाओं का इस्तेमाल · परिणाम: निर्वाचन अवैध, छह महीने की मोहलत। फिर 24 जून का आंशिक स्थगनादेश। |
| 7 मिनट | ★★25 जून 1975 — दो घटनाएँ एक ही दिन: दिन में रामलीला मैदान की रैली और जेपी का सत्याग्रह-आह्वान; रात में अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल। ! जेपी वाला हाशिया-प्रश्न ज़रूर पढ़िए: “यह तो सेना से बगावत करने को कहने जैसा जान पड़ता है! क्या यह बात लोकतांत्रिक है?” |
| 2 मिनट | मौखिक जाँच: “तीन संवैधानिक मसले? 12 जून का फ़ैसला किसने सुनाया? अनुच्छेद कौन-सा?” |
गृहकार्य: प्रश्न 6 — 1975 में आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने क्या कारण बताए थे?
कालांश 3 · आपातकाल का व्यावहारिक अर्थ
पृष्ठ 98–101
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 5 मिनट | 🎨 पृ. 98 का लक्ष्मण-कार्टून (26 जून 1975) — ‘राजनीतिक संकट’ की लहरें, ‘स्थगनादेश’ वाली कुर्सी, और पीछे से सहारा देता डी.के. बरुआ का हाथ। ★इसे पिछले कालांश के नारे से जोड़िए। |
| 8 मिनट | ★★आपातकाल का व्यावहारिक अर्थ — दो बड़े बदलाव: (1) “शक्तियों के बँटवारे का संघीय ढाँचा व्यावहारिक तौर पर निष्प्रभावी हो जाता है”; (2) “सरकार चाहे तो किसी एक अथवा सभी मौलिक अधिकारों पर रोक लगा सकती है।” ! और 25 जून की रात का क्रम: बिजली कटी → गिरफ़्तारियाँ → 26 जून सुबह 6 बजे मंत्रिमंडल को सूचना। |
| 10 मिनट | ★★परिणामों की छह-पंक्ति सारणी (मास्टर नोट्स से)। प्रेस सेंसरशिप, RSS और जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध, धरना-प्रदर्शन-हड़ताल पर रोक, और सबसे बड़ी बात — “मौलिक अधिकारों की बहाली के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का अधिकार भी नहीं रहा।” |
| 6 मिनट | !★निवारक नज़रबंदी की परिभाषा शब्दशः लिखवाइए — “लोगों को गिरफ्तार इसलिए नहीं किया जाता कि उन्होंने कोई अपराध किया है बल्कि… इस आशंका से कि वे कोई अपराध कर सकते हैं।” फिर अप्रैल 1976 का सर्वोच्च न्यायालय का फ़ैसला और वह वाक्य: “इस फ़ैसले को सर्वोच्च न्यायालय के सर्वाधिक विवादास्पद फ़ैसलों में एक माना गया।” |
| 8 मिनट | ★★प्रतिरोध के पाँच रूप — भूमिगत कार्यकर्ता · ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘स्टेट्समैन’ का खाली जगह छोड़ना · ‘सेमिनार’ और ‘मेनस्ट्रीम’ का बंद होना · गुपचुप न्यूज़लेटर · शिवराम कारंत और फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ का पदवी लौटाना। ! और फिर संतुलन: “मुखालफत और प्रतिरोध के इतने प्रकट कदम कुछ ही लोगों ने उठाए।” |
| 3 मिनट | 📰 पृ. 99–100 के दोनों कोलाज दिखाइए — सेंसर के आदेश, ‘WORK MORE TALK LESS’, और लक्ष्मण का 11 दिसंबर 1975 वाला कार्टून जिसमें अख़बार में सिर्फ़ ‘FINE, GREAT, PLENTY, VERY GOOD’ छपा है। |
गृहकार्य: प्रश्न 8 — आपातकाल का असर: नागरिक अधिकार · कार्यपालिका-न्यायपालिका संबंध · जनसंचार · पुलिस और नौकरशाही।
कालांश 4 · 42वाँ संशोधन, तीन सबक, और 1977 का जनादेश
पृष्ठ 102–104
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 7 मिनट | ★★संविधान में हुए बदलाव: प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति के निर्वाचन को अदालत में चुनौती नहीं; और 42वाँ संशोधन — विधायिका का कार्यकाल 5 से 6 साल, आपातकाल में चुनाव एक साल टाले जा सकते हैं। ★वह निष्कर्ष लिखवाइए: “1971 के बाद अब चुनाव 1976 के बदले 1978 में करवाए जा सकते थे।” |
| 10 मिनट | ★★तीन सबक — यह अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। (1) “भारत से लोकतंत्र को विदा कर पाना बहुत कठिन है।” (2) अर्थगत उलझाव सुधारे गए — अब ‘सशस्त्र विद्रोह’ और मंत्रिमंडल की लिखित सलाह। (3) नागरिक अधिकारों के प्रति सचेतना और नए संगठन। ★सबक 2 को पिछले कालांश के हाशिया-प्रश्न से जोड़िए। |
| 5 मिनट | ! शाह आयोग का निष्कर्ष: “पुलिस और प्रशासन राजनीतिक दबाव की चपेट में आ गए थे। यह समस्या आपातकाल के बाद भी खत्म नहीं हुई।” |
| 8 मिनट | ★★1977 के चुनाव — जनमत-संग्रह। जनवरी 1977 में फ़ैसला, मार्च में चुनाव; जनता पार्टी का गठन; जेपी का नेतृत्व; जगजीवन राम की ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’। ★विपक्ष का नारा — ‘लोकतंत्र बचाओ’। |
| 8 मिनट | ★★परिणाम के आँकड़े लिखवाइए: कांग्रेस 154 सीटें, 35% से कम वोट; जनता पार्टी और साथी 330/542; अकेले जनता पार्टी 295। ! बिहार, उ.प्र., दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कांग्रेस शून्य; राजस्थान और म.प्र. में एक-एक; इंदिरा गाँधी रायबरेली से और संजय गाँधी अमेठी से पराजित। |
| 2 मिनट | ★पर संतुलन ज़रूर दीजिए: “कांग्रेस देश में हर जगह चुनाव नहीं हारी थी” — महाराष्ट्र, गुजरात, उड़ीसा और पूरे दक्षिण भारत में उसकी पकड़ बनी रही। दो कारण बताइए। |
गृहकार्य: प्रश्न 7 — 1977 में पहली दफ़ा विपक्षी दल की सरकार क्यों बन सकी?
कालांश 5 · जनता सरकार, विरासत और निष्कर्ष
पृष्ठ 105–111
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 8 मिनट | !★★जनता सरकार का पतन — क्रम बोर्ड पर: प्रधानमंत्री-पद की होड़ (मोरारजी देसाई, चरण सिंह, जगजीवन राम) → मोरारजी प्रधानमंत्री → 28 माह में बहुमत गया → चरण सिंह की सरकार, कांग्रेस के समर्थन से, मात्र 4 महीने → जनवरी 1980 में मध्यावधि चुनाव → कांग्रेस को 353 सीटें। |
| 4 मिनट | ★★दो सबक साथ रखिए: 1977 — अलोकतांत्रिक सरकार को दंड। 1980 — “सरकार अगर अस्थिर हो और उसके भीतर कलह हो, तो मतदाता ऐसी सरकार को कड़ा दंड देते हैं।” |
| 5 मिनट | 🎨 पृ. 107 के तीन कार्टून दिखाइए। ★दूसरा सबसे तीखा है — “THAT’S A LIE. EVERYBODY KNOWS WE ALL WORKED FOR TWO YEARS AND BROUGHT IT DOWN!” यह प्रश्न 4 का तैयार उत्तर है। |
| 8 मिनट | ★★विरासत — दलगत प्रणाली में तीन बदलाव: (1) कांग्रेस ने “स्वयं को विशेष विचारधारा से जोड़ा” और एक नेता की लोकप्रियता पर निर्भर हुई; (2) विपक्ष ‘गैर-कांग्रेसवाद’ की ओर मुड़ा; (3) ★“1977 के बाद पिछड़े वर्गों की भलाई का मुद्दा भारतीय राजनीति पर हावी होना शुरू हुआ” — मंडल आयोग की नियुक्ति। |
| 8 मिनट | ★★अध्याय का निष्कर्ष: “संसद और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को लेकर छिड़ा संवैधानिक संघर्ष भी आपातकाल के मूल में था” — पर — “सत्ताधारी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत था। फिर भी, इसके नेतृत्व ने लोकतंत्र को ठप्प करने का फ़ैसला किया। …यह राजनीतिक संकट तत्कालीन संवैधानिक संकट से कहीं ज्यादा संगीन था।” |
| 5 मिनट | 🗺️ पृ. 106 का मानचित्र और उसका हाशिया-प्रश्न: “अगर उत्तर और दक्षिण के राज्यों में मतदाताओं ने इतने अलग ढर्रे पर मतदान किया, तो हम कैसे कहें कि 1977 के चुनावों का जनादेश क्या था?” 🎬 और ‘हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी’ (2005) का उल्लेख। |
| 2 मिनट | ★अंतिम प्रश्न पढ़िए — “क्या नागरिकों को विरोध की कार्रवाई में शामिल होने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए…? ऐसे विरोध की सीमा क्या मानी जाए?” इसे अनुत्तरित छोड़िए — पाठ्यपुस्तक भी यही करती है। |
गृहकार्य / मूल्यांकन: प्रश्न 10 पूरा (पार्थ चटर्जी का अवतरण, तीनों उपप्रश्न)।
📌 कालांश-वार ‘कभी मत छोड़िए’ सूची
| कालांश | अनिवार्य |
|---|---|
| 1 | ★★खाली संपादकीय वाला बॉक्स · 23%/30% मूल्यवृद्धि · जेपी की दो शर्तें · दोनों नारे |
| 2 | ★★तीन संवैधानिक मसले और केशवानंद भारती · 12 जून 1975 · अनुच्छेद 352 · 25 जून की दोनों घटनाएँ |
| 3 | ★★आपातकाल के दो बड़े अर्थ · छह परिणाम · निवारक नज़रबंदी की परिभाषा · अप्रैल 1976 का फ़ैसला · प्रतिरोध के पाँच रूप |
| 4 | ★★42वाँ संशोधन (5→6 साल) · तीन सबक · 154/330/295 के आँकड़े · दक्षिण भारत वाला संतुलन |
| 5 | ★★28 माह और 4 महीने · 353 सीटें · दो सबक · “राजनीतिक संकट… कहीं ज्यादा संगीन था” |