Chapter 8भारतीय राजनीति : नए बदलाव

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पाठ्यपुस्तक: स्वतंत्र भारत में राजनीति, पृष्ठ 136–156 · पुस्तक का अंतिम अध्याय !! यह अध्याय 9 नवम्बर 2019 के अयोध्या निर्णय, 2019 के लोकसभा चुनाव और 17वीं लोकसभा तक अद्यतन है।


🧭 एक नज़र में

खंडपृष्ठकेंद्रीय बात
1990 का दशक137–139पाँच बड़े बदलाव
गठबंधन का युग140–1431989 के बाद 11 सरकारें; कोई एकल बहुमत नहीं (2014 तक)
OBC का राजनीतिक उदय144–147मंडल आयोग · इंदिरा साहनी · बामसेफ → बसपा
सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता148–150भाजपा · हिन्दुत्व · शाहबानो · अयोध्या
एक नयी सहमति150–153तीन आरेख + बढ़ती सहमति की चार बातें
निष्कर्ष154“लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी”

1 · 1990 का दशक — पाँच बड़े बदलाव★★

“1980 के दशक के आखिर के सालों में देश में ऐसे पाँच बड़े बदलाव आए, जिनका हमारी आगे की राजनीति पर गहरा असर पड़ा।”

#बदलावमुख्य तथ्य
11989 में कांग्रेस की हार1984 में 415 → 1989 में 197 सीटें; ★‘कांग्रेस प्रणाली’ की समाप्ति; 1991 में मध्यावधि चुनाव
2‘मंडल मुद्दे’ का उदय1990 में राष्ट्रीय मोर्चा ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू कीं; OBC आरक्षण; हिंसक विरोध
3नयी आर्थिक नीतिढाँचागत समायोजन कार्यक्रम; शुरुआत राजीव गाँधी के समय, 1991 तक व्यापक
4अयोध्या का विवादधर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के विमर्श की दिशा बदली; परिणति 9 नवम्बर 2019 के निर्णय के उपरांत
5राजीव गाँधी की हत्यामई 1991, तमिलनाडु दौरे पर, लिट्टे से जुड़े श्रीलंकाई तमिलों द्वारा; नरसिम्हा राव PM

तीसरे बदलाव का महत्वपूर्ण वाक्य★

“बहरहाल इस अवधि में जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा।” (यह ‘बढ़ती सहमति’ की पहली बात की जड़ है।)

2 · गठबंधन का युग

1989 का अंकगणित — यह ठीक-ठीक समझिए★

  • कांग्रेस हारी, पर किसी दूसरी पार्टी को बहुमत भी नहीं मिला
  • कांग्रेस अब भी सबसे बड़ी पार्टी थी — फिर भी उसने विपक्ष में बैठने का फ़ैसला किया
  • राष्ट्रीय मोर्चा = जनता दल + कुछ अन्य क्षेत्रीय दल
  • समर्थन दिया परस्पर विरुद्ध दो समूहों ने — भाजपा और वाम मोर्चा
  • ★दोनों ने सरकार में शिरकत नहीं की — यह ‘बाहर से समर्थन’ का पहला बड़ा उदाहरण है

1989 बनाम 1996 — ‘छुईमुई’ समीकरण★★

19891996
सरकारराष्ट्रीय मोर्चा (वी.पी. सिंह)संयुक्त मोर्चा (देवगौड़ा)
समर्थनभाजपा + वाम मोर्चाकांग्रेस + वाम मोर्चा
उद्देश्यकांग्रेस को बाहर रखनाभाजपा को बाहर रखना

★“इससे पता चलता है कि राजनीतिक समीकरण किस कदर छुईमुई थे।”

अध्याय का धुरी-वाक्य★★

“1989 के बाद से लोकसभा के चुनावों में कभी भी किसी एक पार्टी को 2014 तक पूर्ण बहुमत नहीं मिला। इस बदलाव के साथ केंद्र में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ और क्षेत्रीय पार्टियों ने गठबंधन सरकार बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। यद्यपि, पुनः 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में भा.ज.पा. दल को अकेले बहुमत प्राप्त हुआ है।”

‘11 सरकारें’

“1989 के चुनावों से भारत में गठबंधन की राजनीति के एक लंबे दौर की शुरुआत हुई। इसके बाद से केंद्र में 11 सरकारें बनीं। ये सभी या तो गठबंधन की सरकारें थीं अथवा दूसरे दलों के समर्थन पर टिकी अल्पमत की सरकारें थीं।” “इस नए दौर में कोई सरकार क्षेत्रीय पार्टियों की साझेदारी अथवा उनके समर्थन से ही बनायी जा सकती थी।” ! “हालांकि, 2014 में यह प्रवृत्ति बदल गयी है।”

केंद्रीय सरकार 1989 के बाद(यह सारणी अवश्य याद कीजिए)★★★

अवधिगठबंधन / सरकारप्रधानमंत्री
दिसंबर 1989 – नवंबर 1990राष्ट्रीय मोर्चा; वाम मोर्चा और भाजपा का समर्थनवी.पी. सिंह
नवंबर 1990 – जून 1991समाजवादी जनता पार्टी; कांग्रेस का समर्थनचंद्रशेखर
जून 1991 – मई 1996कांग्रेस; AIADMK तथा अन्य का समर्थनपी.वी. नरसिम्हा राव
मई 1996 – जून 1996भाजपा — अल्पमत सरकारअटल बिहारी वाजपेयी
जून 1996 – अप्रैल 1997संयुक्त मोर्चा; कांग्रेस का समर्थनएच.डी. देवगौड़ा
अप्रैल 1997 – मार्च 1998संयुक्त मोर्चा; कांग्रेस का समर्थनइंद्रकुमार गुजराल
मार्च 1998 – अक्तूबर 1999भाजपा-नीत राजगअटल बिहारी वाजपेयी
अक्तूबर 1999 – मई 2004भाजपा-नीत राजगअटल बिहारी वाजपेयी
मई 2004 – मई 2014कांग्रेस-नीत संप्रगमनमोहन सिंह
मई 2014 के बादभाजपा-नीत राजगनरेंद्र मोदी

★1999 की राजग सरकार ने अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा किया।

3 · अन्य पिछड़ा वर्ग का राजनीतिक उदय

‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ की परिभाषा★

  • OBC = ‘अदर बैकवर्ड क्लासेज़’ — विचार-विवेचन की एक प्रशासनिक कोटि
  • ★★यह अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति से अलग एक कोटि है
  • इसमें शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों की गणना होती है
  • इन्हें ‘पिछड़ा वर्ग’ भी कहा जाता है

मंडल आयोग — पूरा क्रम★★

चरणविवरण
पृष्ठभूमिदक्षिण के राज्यों में 1960 के दशक से OBC आरक्षण; ! उत्तर भारत में नहीं
आवाज़1977–79 की जनता पार्टी सरकार के समय उत्तर भारत में राष्ट्रीय स्तर पर माँग
अग्रणी★बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर — बिहार में OBC आरक्षण की नयी नीति
गठन1978 में केंद्र सरकार ने आयोग बैठाया
नामआज़ादी के बाद दूसरा अवसर → ‘दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग’; अध्यक्ष बी.पी. मंडल → ‘मंडल कमीशन’
रिपोर्ट1980 में सिफ़ारिशें — तब तक जनता पार्टी की सरकार गिर चुकी थी
मशविरापिछड़ा वर्ग को ‘पिछड़ी जाति’ के अर्थ में स्वीकार किया जाए
सर्वेक्षणशिक्षा संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में बड़ी कम मौजूदगी
मुख्य सिफ़ारिश★★शिक्षा संस्थाओं तथा सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत सीट आरक्षित
अन्य सुझाव★“कई और समाधान सुझाए जिनमें भूमि-सुधार भी एक था”
लागूअगस्त 1990 — राष्ट्रीय मोर्चा सरकार; केंद्रीय सरकार और उपक्रमों की नौकरियों में
विरोधउत्तर भारत के कई शहरों में हिंसक विरोध
न्यायालय‘इंदिरा साहनी केस’; नवंबर 1992 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सही ठहराया
सहमति★“अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के मसले पर देश के सभी बड़े राजनीतिक दलों में सहमति थी”

📦 बी.पी. मंडल (1918–1982)

  • 1967–1970 तथा 1977–1979 में बिहार से सांसद
  • दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष; बिहार के समाजवादी नेता
  • ★1968 में डेढ़ माह तक बिहार के मुख्यमंत्री; 1977 में जनता पार्टी में शामिल

4 · दलित राजनीति

बामसेफ से बसपा तक★

वर्ष / चरणविवरण
1978‘बामसेफ’ का गठन — बैकवर्ड एंड माइनॉरिटीज़ कम्युनिटीज़ एम्पलाइज़ फेडरेशन
! “यह सरकारी कर्मचारियों का कोई साधारण-सा ट्रेड यूनियन नहीं था”
‘बहुजन’★अनुसूचित जाति + अनुसूचित जनजाति + अन्य पिछड़ा वर्ग + अल्पसंख्यक
परवर्ती विकास‘दलित-शोषित समाज संघर्ष समिति’
बसपाइससे बहुजन समाज पार्टी का उदय; अगुआई कांशीराम ने की
आरंभिक आधारपंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दलित मतदाता
सफलता★1989 और 1991 के चुनावों में उत्तर प्रदेश में

★★“आज़ाद भारत में यह पहला मौका था, जब कोई राजनीतिक दल मुख्यतया दलित मतदाताओं के समर्थन के बूते ऐसी राजनीतिक सफलता हासिल कर पाया था।”

बसपा का तर्क

  • संगठन की बुनियाद व्यवहार केंद्रित नीतियों पर
  • बहुजन देश की आबादी में सबसे ज्यादा हैं → संख्या के लिहाज़ से मजबूत राजनीतिक ताकत
  • बसपा उत्तर प्रदेश में बड़ी ताकत बनी; एक से ज्यादा दफे सरकार बनायी
  • ★“भारत के कई हिस्सों में दलित राजनीति और अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीति ने स्वतंत्र रूप धारण किया है और इन दोनों के बीच अक्सर प्रतिस्पर्धा भी चलती है।”

📦 कांशीराम (1934–2006)

  • बहुजन समाज के सशक्तीकरण के प्रतिपादक; बसपा के संस्थापक
  • सामाजिक-राजनीतिक कार्य के लिए केंद्र सरकार की नौकरी से इस्तीफ़ा
  • बामसेफ → डीएस-4 → 1984 में बसपा की स्थापना; कुशाग्र रणनीतिकार
  • ★“आप राजनीतिक सत्ता को सामाजिक समानता का आधार मानते थे”

5 · सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र

भाजपा का उदय

  • आपातकाल के बाद भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय
  • जनता पार्टी के बिखराव के बाद 1980 में भारतीय जनता पार्टी
  • आरंभ में जनसंघ की अपेक्षा कहीं अधिक बड़ा राजनीतिक पटल
  • विचारधारा — गांधीवादी समाजवाद + सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
  • ! 1984 के चुनावों में बहुत सफलता नहीं
  • 1986 के बाद — राष्ट्रवाद पर विचारधारा के केन्द्र के रूप में बल; हिन्दुत्व की राजनीति भी अपनाई

‘हिन्दुत्व’ — पाठ्यपुस्तक की परिभाषा★★

“हिन्दुत्व को विनायक दामोदर सावरकर ने भारतीय राष्ट्रीयता के आधार के रूप में लोकप्रिय किया था। इसका मूल आशय यह था कि एक भारतीय होने के लिए आवश्यक है कि वह भारतभूमि को अपनी ‘पितृभूमि’ और साथ ही ‘पुण्यभूमि’ भी स्वीकार करे। हिंदुत्व के विश्वासियों का तर्क है कि एक सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण एक संगठित राष्ट्रीय संस्कृति के आधार पर संभव है।”

शाहबानो वाद (1985)★

बिंदुविवरण
वादीएक 62 वर्षीय तलाकशुदा मुस्लिम महिला
माँगभूतपूर्व पति से गुजारा भत्ता
निर्णयसर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो के पक्ष में
प्रतिक्रियापुरातन पंथी मुसलमानों ने इसे ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप माना
क़ानूनमुस्लिम महिला (तलाक से जुड़े अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 — SC के निर्णय को निरस्त
विरोध★“अनेक महिला संगठनों, अनेक मुस्लिम समूहों तथा अधिकांश बुद्धिजीवियों ने विरोध किया”
भाजपाइसे “अल्पसंख्यक समुदाय को दी गयी अनावश्यक छूट और उसका तुष्टिकरण” बताया

अयोध्या — पूरी समय-रेखा(पाठ्यपुस्तक के अनुसार)★★

वर्षघटना
1528श्री राम के जन्मस्थान पर तीन-गुम्बद ढाँचा निर्मित; 500 वर्ष के इतिहास में अनेक संघर्ष — लखनऊ, बाराबंकी और फैजाबाद के गजेटियर में अंकित
28 नवंबर 1858📦 निहंग सिखों ने स्थल पर नियंत्रण कर पूजन और हवन किया
1949! न्यायिक प्रक्रिया प्रारम्भ होने के कारण ढाँचा सील
1986★फैजाबाद (अब अयोध्या) जिला न्यायालय के निर्णय से ताला खुला, पूजा की अनुमति
—मन्दिर का शिलान्यास हुआ, किन्तु आगे का निर्माण प्रतिबन्धित रहा
1992! ढाँचे का ध्वंस — “कुछ आलोचकों ने माना कि इस घटना ने भारतीय लोकतन्त्र के सिद्धान्तों को बड़ी चुनौती दी है”
9 नवम्बर 2019★★उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ का 5–0 निर्णय

‘विधिक कार्यवाही से मैत्रीपूर्ण स्वीकृति’★★

मुख्य वाक्य:

“एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक लोकतांत्रिक समाज में इन विवादों का हल सामान्यतः विधि की उचित प्रक्रिया से होता है।”

रास्ते: न्यायालय में सुनवाईयां · मध्यस्थता के प्रयास · जन आन्दोलन

निर्णय के दो आदेश:

  1. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को विवादित स्थल राम मन्दिर निर्माण के लिए आवंटित
  2. संबंधित सरकार सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि आवंटित करे

पाठ्यपुस्तक का मूल्यांकन: “यह विषय पुरातात्विक उत्खनन और ऐतिहासिक अभिलेखों जैसे साक्ष्यों के आधार पर विधि की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए सुलझाया गया।… यह भारत के सभ्यतागत स्वभाव में निहित लोकतान्त्रिक प्रकृति की परिपक्वता को प्रदर्शित करता है।”

न्यायालय का अवतरण(निर्णय, पृष्ठ 920)★

“संविधान एक धर्म और दूसरे धर्म की आस्था और विश्वास के बीच अंतर नहीं करता है। सभी प्रकार के विश्वास, पूजा और प्रार्थना समान हैं…”

6 · तीन आरेख★★

आरेख 1 — सीटें

वर्षभाजपाकांग्रेस
19842415
198985197
1991120232
1996160140
1998182141
1999182114
2004138145
2009116206
201428244
201930352

आरेख 2 — वोट में हिस्सा (%)

वर्षकांग्रेसभाजपा
198448.17.4
198939.511.4
199136.420.1
199628.820.3
1998(अंकित नहीं)25.6
199928.323.8
200426.522.2
200928.618.8
201419.531.3
201919.537.4

! 1998 पर दोनों रेखाएँ लगभग मिल जाती हैं; आरेख में वहाँ केवल एक अंक 25.6 छपा है।

★★पाठ्यपुस्तक का निष्कर्ष: “1989 के चुनाव के बाद से, 1996, 2004 और 2009 को छोड़कर ज्यादातर समय दोनों पार्टियों कांग्रेस और भाजपा को मिले वोटों का योग 50 फीसदी से ज्यादा रहा है।”

आरेख 3 — 17वीं लोकसभा में दलों की स्थिति

दलसीटेंहिस्सा
भारतीय जनता पार्टी30356%
इंडियन नेशनल कांग्रेस5210%
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम244%
शिवसेना183%
जनता दल यूनाईटेड163%
बीजू जनता दल122%
बहुजन समाज पार्टी102%
अन्य पार्टियाँ10820%

📊 सन् 2004 से संसद में दलीय स्थिति(चुनिंदा पंक्तियाँ)

पार्टी2004200920142019
भारतीय जनता पार्टी138116282303
इंडियन नेशनल कांग्रेस1452064452
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम09371
बहुजन समाज पार्टी1921–10
समाजवादी पार्टी362355
CPI(M)431693
CPI10412
अन्य54609882
कुल543543543543

कुल सदस्य 543 = राज्यों से 530 + केंद्रशासित प्रदेशों से 13

7 · लोकसभा चुनाव 2004–2019

वर्षघटना
2004कांग्रेस पूरे ज़ोर से गठबंधन में; राजग की हार; संप्रग सरकार; वाम मोर्चा का समर्थन; ! राजग और संप्रग के कुल वोटों का अंतर बड़ा कम
जुलाई 2008भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर वाम दलों ने समर्थन वापस लिया — फिर भी सरकार ने कार्यकाल पूरा किया
200915वीं लोकसभा; कांग्रेस 145 → 206; मनमोहन सिंह का दूसरा कार्यकाल
सितंबर 2013भाजपा ने नरेंद्र मोदी को PM पद का उम्मीदवार घोषित किया
201416वीं लोकसभा; भाजपा को अपने दम पर 282; ★“30 साल बाद एकल पार्टी बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी”; फिर भी राजग सरकार का विकल्प चुना
2019भाजपा 303 सीटों के साथ फिर विजयी

★★“जब भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल रहा है तब भी गठबंधन की राजनीति की मान्यता अभी भी प्रासंगिक है।”

8 · बढ़ती सहमति — चार बातें★★

#बातसार
1नयी आर्थिक नीति पर सहमतिकुछ समूह खिलाफ़, पर ज्यादातर दल पक्ष में; मान्यता कि इससे देश समृद्ध होगा और भारत विश्व की आर्थिक शक्ति बनेगा
2पिछड़ी जातियों के दावे की स्वीकृति★“आज सभी राजनीतिक दल शिक्षा और रोज़गार में पिछड़ी जातियों के लिए सीटों के आरक्षण के पक्ष में हैं”; OBC को सत्ता में समुचित हिस्सेदारी
3प्रांतीय दलों की भूमिका की स्वीकृति★“प्रांतीय दल और राष्ट्रीय दल का भेद अब लगातार कम होता जा रहा है”
4विचारधारा की जगह कार्यसिद्धिदल विचारधारागत अंतर की जगह सत्ता में हिस्सेदारी पर ज़ोर; अधिकतर दल ‘हिंदुत्व’ से सहमत नहीं, फिर भी गठबंधन में शामिल हुए और सरकार पाँच साल चली

9 · निष्कर्ष

  • राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कहीं ज्यादा तेज़ है — पर मुख्य दलों में कुछेक मसलों पर सहमति है
  • जन आंदोलन विकास के नए रूप, स्वप्न और तरीके पहचान रहे हैं
  • मुद्दे — गरीबी, विस्थापन, न्यूनतम मज़दूरी, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा
  • “ये आंदोलन राज्य को उसकी ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत कर रहे हैं”
  • लोग जाति, लिंग, वर्ग और क्षेत्र के संदर्भ में न्याय तथा लोकतंत्र के मुद्दे उठा रहे हैं

★★अंतिम वाक्य: “हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी और यह राजनीति इस अध्याय में वर्णित कुछ चीज़ों के मंथन के बीच आकार ग्रहण करेगी।”

📌 अंतिम-मिनट की जाँच-सूची

  • पाँचों बदलाव क्रम से
  • 415 → 197 और ‘कांग्रेस प्रणाली’ की समाप्ति
  • “जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा”
  • 1989 का अंकगणित और ‘बाहर से समर्थन’
  • 1989 बनाम 1996 की सारणी
  • ★★‘केंद्रीय सरकार 1989 के बाद’ की दसों पंक्तियाँ
  • OBC की परिभाषा (SC/ST से अलग)
  • कर्पूरी ठाकुर · 1978 · 1980 · 27 प्रतिशत · भूमि-सुधार
  • इंदिरा साहनी केस — नवंबर 1992
  • बामसेफ 1978 · ‘बहुजन’ की परिभाषा · कांशीराम · 1984
  • हिन्दुत्व की परिभाषा — सावरकर, ‘पितृभूमि’ और ‘पुण्यभूमि’
  • शाहबानो और 1986 का अधिनियम + दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
  • अयोध्या की पूरी समय-रेखा — 1528, 1858, 1949, 1986, 1992, 9 नवम्बर 2019
  • 5–0 निर्णय के दोनों आदेश
  • ★★तीनों आरेख के आँकड़े
  • ★★बढ़ती सहमति की चारों बातें
  • 282 और 303 · “30 साल बाद पहला एकल बहुमत”
  • अंतिम वाक्य