NCERT, स्वतंत्र भारत में राजनीति, अध्याय 5, पृष्ठ 72–91 ★★अध्याय की कुंजी: “इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस प्रणाली को पुनर्स्थापित ज़रूर किया, लेकिन कांग्रेस-प्रणाली की प्रकृति को बदलकर।” (पृ. 89)
1 · ⚡ पहले पाँच वाक्य — अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों
- नेहरू (1964) और शास्त्री (1966) — दोनों बार उत्तराधिकार शांतिपूर्ण ढंग से तय हुआ; यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता मानी गई।
- 1967 के चौथे आम चुनाव ‘राजनीतिक भूकंप’ थे — कांग्रेस केंद्र में बच गई पर नौ राज्यों में सत्ता से बाहर हो गई।
- उससे दो नयी परिघटनाएँ जन्मीं — गठबंधन (संयुक्त विधायक दल) और दल-बदल (‘आया राम-गया राम’)।
- 1969 में कांग्रेस टूटी — राष्ट्रपति चुनाव निर्णायक मोड़ बना; कांग्रेस (ओ) बनाम कांग्रेस (आर)।
- ★1971 में ‘गरीबी हटाओ’ के साथ इंदिरा गाँधी ने 375 सीटें जीतीं और कांग्रेस का दबदबा लौटा — पर वह एक अलग किस्म की कांग्रेस थी।
2 · बीस तथ्य जो सीधे पूछे जाते हैं★★
| # | तथ्य |
|---|---|
| 1 | नेहरू की मृत्यु — मई 1964 |
| 2 | ★कांग्रेस अध्यक्ष के. कामराज ने सलाह-मशविरा किया; शास्त्री निर्विरोध चुने गए |
| 3 | शास्त्री का कार्यकाल — 1964 से 1966; नारा ‘जय जवान-जय किसान’ |
| 4 | ★शास्त्री ने एक बड़ी रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेवारी लेकर रेलमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था |
| 5 | ! शास्त्री का निधन — 11 जनवरी 1966, ताशकंद |
| 6 | ★★1966 — इंदिरा गाँधी बनाम मोरारजी देसाई; गुप्त मतदान; दो-तिहाई से अधिक सांसदों का मत |
| 7 | ★1960 का दशक = ‘खतरनाक दशक’ (गरीबी · गैर-बराबरी · सांप्रदायिक और क्षेत्रीय विभाजन) |
| 8 | ! रुपये का अवमूल्यन — 1 डॉलर 5 रुपये से 7 रुपये |
| 9 | ★★1967 के चुनाव = ‘राजनीतिक भूकंप’ |
| 10 | ! इंदिरा गाँधी के मंत्रिमंडल के आधे मंत्री हार गए |
| 11 | ★चार दिग्गजों की हार — कामराज · एस.के. पाटिल · अतुल्य घोष · के.बी. सहाय |
| 12 | ★★कांग्रेस नौ राज्यों में सत्ता से बाहर (7 में बहुमत नहीं + 2 में दलबदल) |
| 13 | ★★मद्रास में डीएमके को पूर्ण बहुमत — किसी गैर-कांग्रेसी दल की पहली पूर्ण-बहुमत जीत |
| 14 | ★‘गैर-कांग्रेसवाद’ का नामकरण — राममनोहर लोहिया |
| 15 | ★★‘आया राम-गया राम’ — हरियाणा के विधायक गया लाल; एक पखवाड़े में तीन बार दल-बदल |
| 16 | ★★‘सिंडिकेट’ के पाँच नेता — कामराज · एस.के. पाटिल · निजलिंगप्पा · संजीव रेड्डी · अतुल्य घोष |
| 17 | ★दस-सूत्री कार्यक्रम — मई 1967, कांग्रेस कार्यसमिति |
| 18 | ★★1969 का राष्ट्रपति चुनाव — वी.वी. गिरि (स्वतंत्र) ने एन. संजीव रेड्डी (आधिकारिक) को हराया |
| 19 | ★★11 नवंबर 1969 — निजलिंगप्पा का पत्र और निष्कासन; नवंबर 1969 तक कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर) |
| 20 | ★★1971 — कांग्रेस (आर)+सीपीआई को 375 सीटें, 48.4% वोट; कांग्रेस (ओ) को 16 सीटें |
3 · 👤 उत्तराधिकार की दो परीक्षाएँ
| 1964 — शास्त्री | 1966 — इंदिरा गाँधी | |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | कामराज का सलाह-मशविरा | मुकाबला → गुप्त मतदान |
| परिणाम | ★निर्विरोध | ★दो-तिहाई से अधिक मत |
| प्रतिद्वंद्वी | कोई नहीं | मोरारजी देसाई |
| पाठ का निष्कर्ष | “आलोचक ठगे-से रह गए” | “सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण… भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता” |
और वह गणना जो उलटी पड़ीध्यान
“कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संभवतया यह सोचकर उनका समर्थन किया होगा कि… इंदिरा गाँधी उन पर निर्भर रहेंगी।” ★पूरा अध्याय इसी गणना के उलट जाने की कहानी है।
4 · 🌪 1967 — ‘राजनीतिक भूकंप’ध्यान
4.1 संदर्भ — आठ आर्थिक कारक
मानसून की असफलता · व्यापक सूखा · पैदावार में गिरावट · गंभीर खाद्य संकट · विदेशी मुद्रा-भंडार में कमी · औद्योगिक उत्पादन में गिरावट · निर्यात में गिरावट · ★सैन्य खर्चे में भारी बढ़ोतरी
★“नियोजन और आर्थिक विकास के संसाधनों को सैन्य-मद में लगाना पड़ा।” — यह अध्याय 3 और 4 से कड़ी है।
4.2 सरकार की भूल(यह वाक्य लिख लीजिए)ध्यान
“सरकार ने इसे कानून और व्यवस्था की समस्या माना न कि जनता की बदहाली की अभिव्यक्ति। इससे लोगों की नाराजगी बढ़ी और जन विरोध ने ज्यादा उग्र रूप धारण किया।”
4.3 गैर-कांग्रेसवाद★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| किसने नाम दिया | ★राममनोहर लोहिया |
| व्यावहारिक कारण | “कांग्रेस के वोट बँट जाने के कारण ही वह सत्तासीन है” |
| तरीका | कुछ राज्यों में कांग्रेस-विरोधी मोर्चा, अन्य में सीटों का चुनावी तालमेल |
| ★★सैद्धांतिक तर्क | “कांग्रेस का शासन अलोकतांत्रिक और गरीब लोगों के हितों के खिलाफ़ है, इसलिए गैर-कांग्रेसी दलों का एक साथ आना जरूरी है, ताकि गरीबों के हक में लोकतंत्र को वापस लाया जा सके।” |
4.4 परिणाम
| स्तर | परिणाम |
|---|---|
| लोकसभा | “जैसे-तैसे बहुमत”, पर मतों और सीटों में रिकॉर्ड गिरावट |
| राज्य | ★★नौ राज्यों में सत्ता गई — पंजाब, हरियाणा, उ.प्र., म.प्र., बिहार, प. बंगाल, उड़ीसा, मद्रास, केरल |
| मद्रास | ★★डीएमके को पूर्ण बहुमत — “चुनावी इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी गैर-कांग्रेसी दल को किसी राज्य में पूर्ण बहुमत मिला” |
| अन्य आठ राज्य | गैर-कांग्रेसी दलों की गठबंधन सरकार |
| ★प्रसिद्ध पंक्ति | “दिल्ली से हावड़ा जाने वाली ट्रेन अपने पूरे रास्ते में एक भी कांग्रेस-शासित राज्य से होकर नहीं गुज़रेगी।” |
5 · 🤝 दो नयी परिघटनाएँ
5.1 गठबंधन
“संयुक्त विधायक दल” की सरकारें; ★“घटक दल विचारधारा के लिहाज से एक-दूसरे से भिन्न थे।”
| राज्य | घटक |
|---|---|
| ★बिहार | एसएसपी + पीएसपी + वामपंथी सीपीआई + दक्षिणपंथी जनसंघ |
| पंजाब | ‘पॉपुलर यूनाइटेड फ्रंट’ — दोनों अकाली गुट, सीपीआई, सीपीआई(एम), एसएसपी, रिपब्लिकन पार्टी, जनसंघ |
5.2 दल-बदल
परिभाषा: “कोई जनप्रतिनिधि किसी खास दल के चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव लड़े और जीत जाए और चुनाव जीतने के बाद इस दल को छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल हो जाए, तो इसे दल-बदल कहते हैं।”
- तीन राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बहाल हुईं — हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश।
- ★★‘आया राम-गया राम’ — गया लाल, एक पखवाड़े में तीन बार; कांग्रेस में लौटने के 9 घंटों के अंदर फिर पलटे; राव वीरेन्द्र सिंह की घोषणा: “गया राम था अब आया राम है।”
- ★“बाद के समय में दल-बदल रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया।”
6 · ⚔ इंदिरा बनाम सिंडिकेट, और 1969 की टूटध्यान
6.1 सिंडिकेट
| पाँच नेता | प्रांत |
|---|---|
| के. कामराज (अगुवा) | मद्रास |
| एस.के. पाटिल | बंबई सिटी |
| एस. निजलिंगप्पा | मैसूर |
| एन. संजीव रेड्डी | आंध्र प्रदेश |
| अतुल्य घोष | पश्चिम बंगाल |
★“शास्त्री और उसके बाद इंदिरा गाँधी, दोनों ही सिंडिकेट की सहायता से प्रधानमंत्री के पद पर आरूढ़ हुए थे।” ! पर 1971 के बाद “ये बड़े और ताकतवर नेता प्रभावहीन हो गए।”
6.2 इंदिरा गाँधी की रणनीति — एक वाक्य में★★
“उन्होंने एक साधारण से सत्ता-संघर्ष को विचारधारात्मक संघर्ष में बदल दिया।” और उसका औज़ार — मई 1967 का दस-सूत्री कार्यक्रम: बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण · आम बीमा का राष्ट्रीयकरण · शहरी संपदा और आय का परिसीमन · खाद्यान्न का सरकारी वितरण · भूमि सुधार · ग्रामीण गरीबों को आवासीय भूखंड।
6.3 1969 का राष्ट्रपति चुनाव — पूरा क्रम★★
| क्रम | घटना |
|---|---|
| 1 | राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु से पद खाली |
| 2 | सिंडिकेट ने एन. संजीव रेड्डी (लोकसभा अध्यक्ष) को आधिकारिक उम्मीदवार बनवाया |
| 3 | ★इंदिरा गाँधी ने उपराष्ट्रपति वी.वी. गिरि को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में बढ़ावा दिया |
| 4 | अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने ‘व्हिप’ जारी किया — रेड्डी को वोट दें |
| 5 | ★★इंदिरा गाँधी ने “अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट” डालने को कहा |
| 6 | ★★वी.वी. गिरि विजयी — स्वतंत्र उम्मीदवार ने आधिकारिक उम्मीदवार को हराया |
6.4 टूट
“आधिकारिक उम्मीदवार की हार से पार्टी का टूटना तय हो गया।” → कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को निष्कासित किया (11 नवंबर 1969 का पत्र) → इंदिरा गाँधी: “मेरी पार्टी ही असली कांग्रेस है।”
| नवंबर 1969 तक | नाम |
|---|---|
| सिंडिकेट का खेमा | कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन) = कांग्रेस (ओ) = ‘पुरानी कांग्रेस’ |
| इंदिरा गाँधी का खेमा | कांग्रेस (रिक्विजिनिस्ट) = कांग्रेस (आर) = ‘नयी कांग्रेस’ |
★और उन्होंने इसे नाम दिया — “‘समाजवादी’ और ‘पुरातनपंथी’ तथा गरीबों के हिमायती और अमीरों के तरफ़दार के बीच की लड़ाई।”
6.5 ‘प्रिवी पर्स’ — पाँच चरण★
आश्वासन (रियासतों के विलय के समय) → संविधान के समानता-सिद्धांत से टकराव और नेहरू का असंतोष → ! 1970 में संविधान संशोधन राज्यसभा में विफल → ! अध्यादेश सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निरस्त → ★★1971 की भारी जीत के बाद संविधान संशोधन और कानूनी अड़चनों का अंत।
! मोरारजी देसाई का विरोध: “यह ‘रियासतों के साथ विश्वासघात’ के बराबर होगा।”
7 · 🗳 1971 — ‘गरीबी हटाओ’ और पुनर्स्थापनध्यान
7.1 मध्यावधि चुनाव के तीन कारण
दूसरे दलों पर निर्भरता समाप्त करना · संसद में पार्टी की स्थिति मज़बूत करना · अपने कार्यक्रमों के पक्ष में जनादेश हासिल करना। ★दिसंबर 1970 में लोकसभा भंग; फ़रवरी 1971 में पाँचवें आम चुनाव।
7.2 मुकाबला
| ‘ग्रैंड अलायंस’ | शासक दल |
|---|---|
| एसएसपी · पीएसपी · भारतीय जनसंघ · स्वतंत्र पार्टी · भारतीय क्रांतिदल | कांग्रेस (आर) + सीपीआई |
! “‘ग्रैंड अलायंस’ के पास कोई सुसंगत राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था।”
7.3 दो नारे★★
| “इंदिरा हटाओ” | “गरीबी हटाओ” |
|---|---|
| नकारात्मक; एक व्यक्ति के बारे में | सकारात्मक; जनता के बारे में |
| कोई कार्यक्रम नहीं | सार्वजनिक क्षेत्र की संवृद्धि · भू-परिसीमन · असमानता की समाप्ति · प्रिवी पर्स की समाप्ति |
★लक्ष्य-वर्ग: भूमिहीन किसान · दलित और आदिवासी · अल्पसंख्यक · महिलाएँ · बेरोज़गार नौजवान।
7.4 परिणाम — ये चार आँकड़े★★
| दल / गठबंधन | सीटें | वोट |
|---|---|---|
| कांग्रेस (आर) + सीपीआई | 375 | 48.4% |
| अकेले कांग्रेस (आर) | 352 | 44% |
| कांग्रेस (ओ) | 16 | लगभग एक-चौथाई |
| ‘ग्रैंड अलायंस’ | 60 से कम | — |
7.5 और उसके बाद
1971 का बांग्लादेश युद्ध → “लोकप्रियता में चार चाँद लग गए”; “विपक्ष के नेताओं तक ने उसके राज्यकौशल की प्रशंसा की” → 1972 के राज्य विधानसभा चुनावों में व्यापक सफलता → ★“इन दो लगातार जीतों के साथ कांग्रेस का दबदबा एक बार फिर कायम हुआ” → “महज चार साल की अवधि में…”।
8 · 🏛 निष्कर्ष — पुनर्स्थापन हुआ, पर किसका?ध्यान
8.1 नयी कांग्रेस की पाँच विशेषताएँ
- लोकप्रियता वही, “लेकिन यह अलग किस्म की पार्टी थी”
- ★★“पूर्णतया अपने सर्वोच्च नेता की लोकप्रियता पर आश्रित”
- ! “सांगठनिक ढाँचा भी अपेक्षाकृत कमजोर”
- ★★“भीतर कई गुट नहीं थे” — विभिन्न मतों और हितों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी नहीं रही
- जीत के लिए गरीब, महिला, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों पर ज्यादा निर्भर
8.2 और जो चीज़ खो गई(यह अनुच्छेद ज़रूर याद रखिए)★★
“कांग्रेस प्रणाली के भीतर हर तनाव और संघर्ष को पचा लेने की क्षमता थी… लेकिन नयी कांग्रेस ज्यादा लोकप्रिय होने के बावजूद इस क्षमता से हीन थी। …जनता की आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति की लोकतांत्रिक ज़मीन छोटी पड़ती गई।” ★और यहीं से अगला अध्याय शुरू होता है — “देश के संवैधानिक लोकतंत्र के अस्तित्व पर ही खतरा मँडराने लगा था।”
9 · दस भूलें जो सबसे ज़्यादा होती हैंध्यान
| # | ! भूल | ✓ सही |
|---|---|---|
| 1 | 1967 में कांग्रेस केंद्र में भी हार गई | ★नहीं — लोकसभा में “जैसे-तैसे बहुमत” मिला; हार राज्यों में हुई |
| 2 | कांग्रेस 1967 में टूटी | ★नहीं — टूट 1969 में हुई |
| 3 | ‘गैर-कांग्रेसवाद’ इंदिरा गाँधी का शब्द है | ★नहीं — राममनोहर लोहिया का |
| 4 | सिंडिकेट इंदिरा गाँधी के खिलाफ़ शुरू से था | ! नहीं — उसी ने उन्हें प्रधानमंत्री बनवाया था |
| 5 | 1969 में संजीव रेड्डी जीते | ★नहीं — वी.वी. गिरि जीते; रेड्डी आधिकारिक उम्मीदवार होकर भी हारे |
| 6 | कांग्रेस (ओ) = इंदिरा गाँधी का खेमा | ★उल्टा — (ओ) = सिंडिकेट/पुरानी, (आर) = इंदिरा/नयी |
| 7 | ‘ग्रैंड अलायंस’ में कम्युनिस्ट भी थे | ★नहीं — वह गैर-कम्युनिस्ट और गैर-कांग्रेसी दलों का था; सीपीआई तो इंदिरा गाँधी के साथ थी |
| 8 | ‘आया राम-गया राम’ 1990 के दशक का है | ★नहीं — 1967, हरियाणा के गया लाल से |
| 9 | दस-सूत्री कार्यक्रम 1969 का है | ★नहीं — मई 1967 |
| 10 | प्रिवी पर्स 1970 में समाप्त हुआ | ! नहीं — 1970 में प्रयास विफल हुआ; 1971 की जीत के बाद संविधान संशोधन से रास्ता खुला |
10 · ⚡ अंतिम मिनट की सूची — बीस शब्द
‘खतरनाक दशक’ · कामराज योजना · निर्विरोध (1964) · गुप्त मतदान (1966) · ताशकंद 11 जनवरी 1966 · अवमूल्यन 5→7 · ‘राजनीतिक भूकंप’ · गैर-कांग्रेसवाद · लोहिया · अन्नादुरई और डीएमके · नौ राज्य · संयुक्त विधायक दल · दल-बदल · ‘आया राम-गया राम’ · गया लाल · सिंडिकेट के पाँच नाम · दस-सूत्री कार्यक्रम (मई 1967) · वी.वी. गिरि बनाम संजीव रेड्डी · ‘अंतरात्मा की आवाज़’ · कांग्रेस (ओ)/(आर) · प्रिवी पर्स · ‘ग्रैंड अलायंस’ · ‘इंदिरा हटाओ’ बनाम ‘गरीबी हटाओ’ · 375/352/16 · ‘ज़ंजीर’ 1973