Chapter 4अंतर्राष्ट्रीय संगठन

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 45–62.

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परीक्षा-केंद्रित संक्षेपण। ★सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं को दर्शाता है।

एक पंक्ति में पूरा अध्याय

संयुक्त राष्ट्रसंघ की जड़ें युद्ध में हैं — ‘लीग ऑव नेशंस’ की विफलता के बाद 24 अक्टूबर 1945 को 51 संस्थापक सदस्यों के साथ यह इसलिए बना कि “मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं, उसे नरक से बचाने के लिए” एक मंच हो; शीतयुद्ध के बाद बदली दुनिया में इसके ढाँचे और न्यायाधिकार — दोनों में सुधार की माँग उठी, पर वीटो के कारण वह अटकी रही; भारत छह आधारों पर स्थायी सदस्यता चाहता है पर चार कारणों से उसका विरोध होता है; और अंत में — “संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी।”

0. पहले यह जान लीजिएध्यान

  • यह अध्याय पहले ‘अध्याय 6’ था — QR कोड 12108CH06। (पुराने अध्याय 1 और 3 हटाए गए।)
  • ! इसका परिचय और पूरा अंतिम खंड हटाए गए अध्याय (‘अमरीकी वर्चस्व’) पर टिका है — “इन्हीं चुनौतियों में एक थी अमरीका की शक्ति का बढ़ना।”
  • !! पृ. 57 पर पाठ-त्रुटि: “संयुक्त राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या सन् 1965 में 11 से बढ़ाकर 15 कर दी गई थी” — यह सुरक्षा परिषद् की संख्या है।

1. हमें अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्यों चाहिए?★★

1.1 दो उद्धरण — रट लीजिए

★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ का गठन मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि उसे नरक से बचाने के लिए हुआ है।” — डेग हैमरसोल्ड, दूसरे महासचिव

★★“हथियार लड़ाने से बढ़िया है कि ज़बान लड़ाई जाए… क्या यह बात बेहतर नहीं कि एक ऐसी जगह भी हो जहाँ दुनिया के सारे देश इकट्ठे हों और कभी-कभार अपनी बातों से एक-दूसरे का सर खाएँ, बनिस्पत लड़ाई के मैदान में एक-दूसरे का सर कलम करने के?” — शशि थरूर

★पाठ का निष्कर्ष: “अंतर्राष्ट्रीय संगठन हर मर्ज़ की दवा नहीं लेकिन वे महत्त्वपूर्ण ज़रूर हैं।”

1.2 अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्यानहीं है — सबसे महत्वपूर्ण परिभाषा★★

★★“अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो। अंतर्राष्ट्रीय संगठन का निर्माण विभिन्न राज्य ही करते हैं और यह उनके मामलों के लिए जवाबदेह होता है। जब राज्यों में इस बात पर सहमति होती है कि कोई अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनना चाहिए, तभी ऐसे संगठन कायम होते हैं।”

1.3 तीन कारण

#कारण
1युद्ध टालने का मंच — ★“अधिकांश झगड़ों और विभेदों का समाधान बिना युद्ध के ही किया जाता है, लेकिन यह एक ऐसा तथ्य है जिस पर कम ध्यान जाता है।”
2साझे काम, जो अकेले नहीं हो सकते — बीमारी (हर देश टीके लगाए) और ★‘ग्लोबल वार्मिंग’ (ग्रीनहाउस गैसें → समुद्रतल की ऊँचाई → तटीय शहर डूबेंगे)
3सहयोग को व्यवस्थित करना — नीचे देखिए

1.4 सहयोग की असली दिक्कत — और संगठन का उत्तर★★

★“सहयोग की ज़रूरत को पहचानना और सचमुच में सहयोग करना दो अलग-अलग बातें हैं।”

चार विवाद-बिंदु: (1) लागत का भार कौन कितना उठाए · (2) लाभ का बँटवारा न्यायोचित कैसे हो · (3) मोल-तोल के बाद कोई मुकरे नहीं · (4) समझौते के बाद कोई दग़ा न करे।

★★संगठन का उत्तर: “एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन… नियमों और नौकरशाही की एक रूपरेखा दे सकता है ताकि सदस्यों को यह विश्वास हो कि आने वाली लागत में सबकी समुचित साझेदारी होगी, लाभ का बँटवारा न्यायोचित होगा और कोई सदस्य एक बार समझौते में शामिल हो जाता है तो वह इस समझौते के नियम और शर्तों का पालन करेगा।”

1.5 लेबनान का उदाहरण (कार्टून, पृ. 46)

★जून 2006 — इजराइल ने लेबनान पर हमला (हिजबुल्लाह पर नियंत्रण के लिए); भारी संख्या में आम नागरिक मारे गए; ! संयुक्त राष्ट्रसंघ ने प्रस्ताव अगस्त में पास किया और इजराइली सेना अक्टूबर में वापस हुई।

यही अध्याय का एकमात्र ठोस विफलता-उदाहरण है — देर से बोलना।

2. संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना — घटना-चक्र★★

तिथिघटना
★अगस्त 1941अटलांटिक चार्टर — रूजवेल्ट (अमरीका) और चर्चिल (ब्रिटेन)
★जनवरी 194226 मित्र-राष्ट्र वाशिंगटन में मिले; दिसंबर 1943 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा पर हस्ताक्षर
★फरवरी 1945याल्टा सम्मेलन — रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन
अप्रैल–मई 1945सेन फ्रांसिस्को — दो महीने लंबा सम्मेलन
★★26 जून 1945चार्टर पर 50 देशों के हस्ताक्षर
★15 अक्टूबर 1945पोलैंड के हस्ताक्षर → कुल 51 मूल संस्थापक सदस्य
★★24 अक्टूबर 1945संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना; ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस’
★30 अक्टूबर 1945भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल

2.1 पृष्ठभूमि — ‘लीग ऑव नेशंस’

  • पहले विश्वयुद्ध के बाद बना। ★“शुरुआती सफलताओं के बावजूद यह संगठन दूसरा विश्वयुद्ध (1939–45) न रोक सका।”
  • ★पोस्टर का संदेश: “यह दिखाता है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ की जड़ें युद्ध में थीं।”

2.2 उद्देश्य★

  1. ★“अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना।”
  2. “अगर युद्ध छिड़ ही जाए तो शत्रुता के दायरे को सीमित करने का काम करेगा।”
  3. ★“चूँकि झगड़े अक्सर सामाजिक-आर्थिक विकास के अभाव में खड़े होते हैं इसलिए… पूरे विश्व में सामाजिक-आर्थिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों को एक साथ लाने की है।”

2.3 महासचिव★

मदतथ्य
वर्तमान★एंटोनियो गुटेरेस — नौवें महासचिव
पद संभाला★1 जनवरी 2017
पृष्ठभूमिपुर्तगाल के प्रधानमंत्री (1995–2002); UNHCR (2005–2015); सोशलिस्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष (1999–2005)
नियुक्ति★सुरक्षा-परिषद् की सलाह पर आम सभा, पाँच सालों के लिए

3. संयुक्त राष्ट्रसंघ की संरचना — छह प्रमुख अंग★★

अंगमुख्य तथ्य
★★सुरक्षा-परिषद्15 सदस्य = 5 स्थायी (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमरीका) + 10 अस्थायी; स्थायी को वीटो; अस्थायी का चुनाव आम सभा द्वारा 2 वर्षों के लिए; ★निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी
★★आम सभा193 सदस्य; सबको एकसमान मत; प्रमुख निर्णयों के लिए दो-तिहाई, बाकी में सामान्य बहुमत; ★निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय15 न्यायधीश, 9 वर्षों के लिए; आम सभा और सुरक्षा परिषद् दोनों में पूर्ण बहुमत से; ★मुख्यालय हेग
सचिवालयअंतर्राष्ट्रीय स्टाफ; प्रधान — महासचिव
आर्थिक और सामाजिक परिषद्54 सदस्य, 3 वर्षों के लिए; सभी भौगोलिक क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व
★न्यासिता परिषद्अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के आज़ाद होने पर 1 नवम्बर 1994 से स्थगित

★★सबसे महत्वपूर्ण भेद: सुरक्षा-परिषद् के निर्णय बाध्यकारी हैं; आम सभा के नहीं।

अन्य निकाय (नाम याद रखिए):

  • कार्यक्रम और कोष: UNCTAD · UNEP · UNDP · UNICEF · UNFPA · UNHCR · WFP
  • विशेष एजेंसियाँ: ILO · FAO · UNESCO · WHO · IMF · IMO · ITU
  • संबद्ध संगठन: ★IAEA (आम सभा और सुरक्षा-परिषद् दोनों के प्रति उत्तरदायी) · OPCW · WTO
  • अन्य इकाईयाँ: OHCHR · UNU · UNAIDS
  • सहायक निकाय: सैन्य समिति · अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (पूर्व यूगोस्लाविया, रवांडा) · शांति संस्थापक अभियान और मिशन

4. सुधार की माँग★★

4.1 1991 से आए सात बदलाव

  1. सोवियत संघ बिखर गया।
  2. ★अमरीका सबसे ज्यादा ताकतवर है।
  3. रूस और अमरीका के संबंध अब कहीं ज्यादा सहयोगात्मक हैं।
  4. ★चीन तेजी से महाशक्ति के रूप में उभर रहा है; भारत भी इस दिशा में अग्रसर है।
  5. एशिया की अर्थव्यवस्था अप्रत्याशित दर से तरक्की कर रही है।
  6. अनेक नए देश शामिल हुए (सोवियत संघ से आज़ाद, या पूर्वी यूरोप के भूतपूर्व साम्यवादी देश)।
  7. ★नयी चुनौतियाँ — जनसंहार, गृहयुद्ध, जातीय संघर्ष, आतंकवाद, परमाण्विक प्रसार, जलवायु में बदलाव, पर्यावरण की हानि, महामारी।

4.2 दो तरह के सुधार★★

#क्या
1संगठन की बनावट और प्रक्रियाओं में सुधार
2संगठन के न्यायाधिकार में आने वाले मुद्दों की समीक्षा

★★“लगभग सभी देश सहमत हैं कि दोनों ही तरह के ये सुधार जरुरी हैं। देशों के बीच में सहमति इस बात पर नहीं है कि इसके लिए दरअसल ठीक करना क्या है, कैसे करना है और कब करना है?”

4.3 1992 का प्रस्ताव — तीन शिकायतें★

  1. ★“सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती।”
  2. ★“इसके फ़ैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है और इन फ़ैसलों पर चंद देशों का दबदबा होता है।”
  3. ★“सुरक्षा परिषद् में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है।”

★1 जनवरी 1997 — कोफी अन्नान ने जाँच शुरू करवाई कि सुधार कैसे कराए जाएँ।

4.4 नए स्थायी सदस्य के लिए छह मानदंड★★

  1. ★बड़ी आर्थिक ताकत
  2. ★बड़ी सैन्य ताकत
  3. ★संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में ज्यादा योगदान
  4. ★आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र
  5. ★लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाला देश
  6. ★भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिहाज से विश्व की विविधता की नुमाइंदगी

! और पाठ स्वयं इन्हें तोड़ता है: “सरकारें अपने-अपने हित और महत्त्वाकांक्षाओं के लिहाज से कुछ कसौटियों को फायदेमंद तो कुछ को नुकसानदेह मानती हैं।” — और “अगर लोकतंत्र और मानवाधिकार के प्रति सम्मान ही कसौटी हो तो… बेहतरीन रिकार्ड वाले देशों की कतार लग जाएगी।”

4.5 प्रतिनिधित्व का मसला — चार असंभव सवाल★

भौगोलिक बराबरी? · महादेश बनाम क्षेत्र-उपक्षेत्र? · आर्थिक विकास? (“विकासशील देश विकास की अलग-अलग सीढ़ियों पर खड़े हैं”) · ★संस्कृति? — “कोई विश्व को सभ्यता या संस्कृति के आधार पर बाँटकर कैसे देख सकता है जब कि किसी एक ही राष्ट्र के भीतर विभिन्न संस्कृति-धाराएँ उपस्थित होती हैं?”

5. वीटो — अध्याय का सबसे बड़ा विवाद★★

5.1 नियम

  • ★“दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में स्थिरता कायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के घोषणापत्र में पाँच स्थायी सदस्यों को विशेष हैसियत दी गई।”
  • दो फायदे: सदस्यता स्थायी और ‘वीटो’ का अधिकार।
  • अस्थायी सदस्य — 2 वर्षों के लिए; ★“दो साल की अवधि तक अस्थायी सदस्य रहने के तत्काल बाद किसी देश को फिर से इस पद के लिए नहीं चुना जा सकता”; निर्वाचन ऐसे कि सभी महादेशों का प्रतिनिधित्व हो।
  • ★★“अस्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार नहीं है… स्थायी सदस्यों में से कोई एक अपने निषेधाधिकार का प्रयोग कर सकता है और इस तरह वह किसी फैसले को रोक सकता है, भले ही अन्य स्थायी सदस्यों और सभी अस्थायी सदस्यों ने उस फ़ैसले के पक्ष में मतदान किया हो।”

5.2 विरोध — और वह क्यों नहीं हटेगाध्यान

  • विरोध का तर्क: ★“निषेधाधिकार लोकतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के बीच बराबरी की धारणा से मेल नहीं खाता, अत: यह संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए उचित या प्रासंगिक नहीं है।”
  • ★★पर पाठ का उत्तर: “स्थायी सदस्य ऐसे सुधार के लिए शायद ही राजी होंगे।… इस बात का खतरा है कि ‘वीटो’ न हो तो सन् 1945 के समान इन ताकतवर देशों की दिलचस्पी संयुक्त राष्ट्रसंघ में न रहे; इससे बाहर रहकर वे अपनी रुचि के अनुसार काम करें और उनके जुड़ाव अथवा समर्थन के अभाव में यह संगठन प्रभावकारी न रह जाए।”
  • साइड-टिप्पणी: ★“असल में वीटो की ज़रूरत तो कमजोर देशों को है, उनको नहीं जिनके पास पहले से बहुत ताकत है।”

5.3 वीटो का इस्तेमाल (1 जून 2018 तक)★★

सोवियत संघ/रूसअमरीकायूकेफ्रांसचीन
★13584321811

6. न्यायाधिकार — 2005 का शिखर सम्मेलन★

60 साल पूरे होने पर, सितम्बर 2005 में सभी सदस्य देशों के प्रमुख इकट्ठे हुए। छह निर्णय —

  1. ★शांति संस्थापक आयोग का गठन
  2. ★★“यदि कोई राष्ट्र अपने नागरिकों को अत्याचारों से बचाने में असफल हो जाए तो विश्व-बिरादरी इसका उत्तरदायित्व ले — इस बात की स्वीकृति।”
  3. ★मानवाधिकार परिषद् की स्थापना (2006 के 19 जून से सक्रिय)
  4. सहस्राब्दि विकास लक्ष्य को प्राप्त करने पर सहमति
  5. हर रूप-रीति के आतंकवाद की निंदा
  6. एक लोकतंत्र-कोष का गठन और ट्रस्टीशिप काउंसिल को समाप्त करने पर सहमति

! पाठ स्वयं कहता है — “ये मुद्दे भी संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए बड़े पेंचदार हैं।” (शांति आयोग किसमें दखल दे? मानवाधिकार कौन तय करेगा? आतंकवाद की सर्वमान्य परिभाषा हो सकती है?)

7. संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार और भारत★★

7.1 भारत का सामान्य रुख़

  • बदले हुए विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ की मजबूती और दृढ़ता जरुरी है।
  • संगठन सहयोग बढ़ाने और विकास को बढ़ावा देने में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाए।
  • ★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ के अजेंडे में विकास का मामला प्रमुख होना चाहिए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए यह ज़रुरी पूर्व शर्त है।”

7.2 सुरक्षा परिषद् की संरचना पर चिंता

  • ★“सुरक्षा-परिषद् की सदस्य संख्या स्थिर रही है जबकि आम सभा में सदस्यों की संख्या खूब बढ़ी है।” → “प्रतिनिधित्वमूलक चरित्र की हानि हुई है।”
  • ! 1965 में सुरक्षा परिषद् 11 से 15 हुई, पर स्थायी सदस्यों की संख्या स्थिर रही।
  • ★भारत अस्थायी और स्थायी — दोनों तरह के सदस्यों की संख्या में बढ़ोत्तरी का समर्थक है।
  • “उसमें अभी की अपेक्षा ज्यादा विकासशील देश होने चाहिए।”

7.3 भारत की दावेदारी के छह आधार(प्रश्न 9)★★

  1. ★विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश; विश्व की कुल-जनसंख्या का 1/5वाँ हिस्सा।
  2. ★विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र।
  3. ★संयुक्त राष्ट्रसंघ की लगभग सभी पहलकदमियों में भाग; शांति बहाल करने के प्रयासों में लंबे समय से ठोस भूमिका।
  4. ★तेजी से अंतर्राष्ट्रीय फलक पर आर्थिक-शक्ति बनकर उभर रहा है।
  5. ★बजट में नियमित योगदान; “यह कभी भी अपने भुगतान से चुका नहीं है।”
  6. ★प्रतीकात्मक महत्व — “अगर आपकी साख एक ताकतवर देश के रूप में है तो आपका प्रभाव ज्यादा होगा।”

7.4 विरोध के चार कारणध्यान

  1. ★कुछ देश भारत के परमाणु हथियारों को लेकर चिंतित हैं।
  2. ★कुछ मानते हैं कि पाकिस्तान के साथ कठिनाई के कारण भारत स्थायी सदस्य के रूप में अप्रभावी रहेगा।
  3. ★कुछ का मानना कि ब्राजील, जर्मनी, जापान और शायद दक्षिण अफ्रीका को भी शामिल करना पड़ेगा — जिसका ये देश विरोध करते हैं।
  4. ★कुछ चाहते हैं कि विस्तार हो तो अफ्रीका और दक्षिण अमरीका को ज़रूर प्रतिनिधित्व मिले, “क्योंकि मौजूदा सुरक्षा परिषद् में इन्हीं महादेशों की नुमाइंदगी नहीं है।”

★निष्कर्ष: “भारत या किसी और देश के लिए निकट भविष्य में… स्थायी सदस्य बन पाना मुश्किल लगता है।”

8. एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ★★

8.1 अमरीका पर अंकुश क्यों कठिन — तीन कारणध्यान

  1. ★“सोवियत संघ की गैर मौजूदगी में अब अमरीका एकमात्र महाशक्ति है। अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत के बूते वह संयुक्त राष्ट्रसंघ या किसी अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन की अनदेखी कर सकता है।”
  2. ★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ के भीतर अमरीका का खास प्रभाव है” — चार वजहें: बजट में सबसे ज्यादा योगदान · वित्तीय ताकत बेजोड़ · ★संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीकी भू-क्षेत्र में स्थित है · कई नौकरशाह इसके नागरिक हैं।
  3. ★वीटो — और “महासचिव के चयन में भी अमरीका की बात बहुत वज़न रखती है”; “अमरीका… शेष विश्व में फूट डाल सकता है और डालता है।”

8.2 और फिर भी — संगठन क्यों ज़रूरी है★★

  • ★“संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीका की ताकत पर अंकुश लगाने में ख़ास सक्षम नहीं। फिर भी… संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीका और शेष विश्व के बीच विभिन्न मसलों पर बातचीत कायम कर सकता है और इस संगठन ने ऐसा किया भी है।”
  • “अमरीकी नेता अक्सर आलोचना करते हैं लेकिन वे समझते हैं कि… संयुक्त राष्ट्रसंघ के जरिए 190 राष्ट्रों को एक साथ किया जा सकता है।”
  • ★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ ही वह जगह है जहाँ अमरीका के किसी खास रवैये और नीति की आलोचना की सुनवाई हो और कोई बीच का रास्ता निकालने तथा रियायत देने की बात कही-सोची जा सके।”

8.3 अध्याय का निष्कर्ष(प्रश्न 11 का सीधा उत्तर)★★

★★“संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी। आज विभिन्न समाजों और मसलों के बीच आपसी तार जुड़ते जा रहे हैं। इसे ‘पारस्परिक निर्भरता’ का नाम दिया जाता है। इसे देखते हुए यह कल्पना करना कठिन है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसे संगठन के बिना विश्व के सात अरब से भी ज्यादा लोग कैसे रहेंगे।”

★“प्रौद्योगिकी यह सिद्ध कर रही है कि आने वाले दिनों में विश्व में पारस्परिक निर्भरता बढ़ती जाएगी। इसलिए, संयुक्त राष्ट्रसंघ का महत्त्व भी निरंतर बढ़ेगा।”

9. पाँच अन्य संगठन — एक तालिका में★

संगठनस्थापनामुख्य कामविशेष तथ्य
★IMF(पाठ में वर्ष नहीं)वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देखरेख; वित्तीय और तकनीकी सहायता190 सदस्य (2024); ★“हर सदस्य की राय का वजन बराबर नहीं”; समूह-7 का 41.29%; अकेले अमरीका 16.52%; चीन 6.09%, भारत 2.64%
★विश्व बैंक1944मानवीय विकास, कृषि-ग्रामीण विकास, पर्यावरण सुरक्षा, आधारभूत ढाँचा, सुशासनआसान ऋण और अनुदान; ★“ज्यादा गरीब देशों को ये अनुदान वापिस नहीं चुकाने पड़ते”
★WTO1995वैश्विक व्यापार के नियम तय करना★GATT का उत्तराधिकारी; 164 सदस्य (2016); ! “विकासशील देशों की शिकायत — कार्यविधि पारदर्शी नहीं और बड़ी आर्थिक ताकतें उन्हें धकियाती हैं”
★IAEA1957परमाणविक ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा; सैन्य इस्तेमाल रोकनानियमित जाँच ताकि नागरिक संयंत्र सैन्य उद्देश्य के लिए न हों
एमनेस्टी इंटरनेशनल—मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान; रिपोर्ट तैयार और प्रकाशित“सरकारों को ये रिपोर्ट अक्सर नागवार लगती हैं”
ह्यूमन राइट्स वॉच—मानवाधिकारों की वकालत और अनुसंधान★“अमरीका का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन”; बारूदी सुरंगों पर रोक, बाल सैनिकों का प्रयोग रोकने और अंतर्राष्ट्रीय दंड न्यायालय की स्थापना के अभियानों में मदद

याद रखने योग्य आँकड़े★★

विवरणमान
अटलांटिक चार्टरअगस्त 1941 — रूजवेल्ट और चर्चिल
मित्र-राष्ट्रों की बैठकजनवरी 1942, वाशिंगटन — 26 देश
संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणादिसंबर 1943
याल्टा सम्मेलनफरवरी 1945 — रूजवेल्ट, चर्चिल, स्टालिन
सेन फ्रांसिस्को सम्मेलनअप्रैल–मई 1945, दो महीने
चार्टर पर हस्ताक्षर★26 जून 1945 — 50 देश
पोलैंड के हस्ताक्षर / मूल संस्थापक★15 अक्टूबर 1945 / 51
स्थापना / UN दिवस★24 अक्टूबर 1945
भारत शामिल हुआ★30 अक्टूबर 1945
आम सभा के सदस्य193 (2011 तक)
सुरक्षा परिषद्15 = 5 स्थायी + 10 अस्थायी
अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल2 वर्ष; तत्काल पुनर्निर्वाचन नहीं
आर्थिक और सामाजिक परिषद्54 सदस्य, 3 वर्ष
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय15 न्यायधीश, 9 वर्ष, मुख्यालय हेग
महासचिव का कार्यकाल5 वर्ष
न्यासिता परिषद् स्थगित★1 नवम्बर 1994 (पलाउ)
आम सभा का प्रस्ताव1992 — तीन शिकायतें
अन्नान की जाँच1 जनवरी 1997
60वीं सालगिरह का सम्मेलनसितम्बर 2005 — छह निर्णय
मानवाधिकार परिषद् सक्रिय★19 जून 2006
गुटेरेस ने पद संभाला★1 जनवरी 2017 — नौवें महासचिव
सुरक्षा परिषद् 11 → 15! 1965 (पाठ में ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ’ लिखा है — त्रुटि)
वीटो का प्रयोग (1 जून 2018 तक)★रूस/सोवियत संघ 135 · अमरीका 84 · यूके 32 · फ्रांस 18 · चीन 11
बजट में योगदान (2019)★अमरीका 22.0 · चीन 12.0 · जापान 8.5 · जर्मनी 6.0 · यूके 4.5 · फ्रांस 4.4 · रूस 2.4 (10वाँ) · भारत 0.8 (21वाँ)
IMF (2024)★190 सदस्य; समूह-7 का 41.29%; अमरीका 16.52%; चीन 6.09%; भारत 2.64%; रूस 2.59%; ब्राजील 2.22%; सऊदी अरब 2.02%
WTO1995 में स्थापना; 164 सदस्य (2016)
IAEA / विश्व बैंक1957 / 1944
भारत की जनसंख्या का हिस्साविश्व का 1/5वाँ
विश्व की जनसंख्यासात अरब से भी ज्यादा
लेबनान संकटजून 2006 हमला → अगस्त में प्रस्ताव → अक्टूबर में वापसी

अंतिम क्षण के जालध्यान

  1. ★50 बनाम 51 — 26 जून 1945 को 50 ने हस्ताक्षर किए; पोलैंड 15 अक्टूबर को जुड़ा → 51 मूल संस्थापक।
  2. 24 अक्टूबर = स्थापना; 30 अक्टूबर = भारत का शामिल होना। दोनों 1945 के।
  3. ★★आम सभा के निर्णय बाध्यकारी नहीं; सुरक्षा-परिषद् के हैं।
  4. ★वीटो केवल पाँच स्थायी सदस्यों के पास — महासचिव के पास नहीं (प्रश्न 1-ग का जाल)।
  5. ★एक ही वीटो से प्रस्ताव रुक जाता है, भले सभी अन्य पक्ष में हों।
  6. अस्थायी सदस्य 2 वर्ष के लिए; तत्काल दोबारा नहीं चुने जा सकते।
  7. ! 1965 की ‘11 से 15’ — यह सुरक्षा परिषद् है, संयुक्त राष्ट्रसंघ नहीं (पाठ-त्रुटि)।
  8. ★न्यासिता परिषद् समाप्त नहीं, स्थगित है — 1 नवम्बर 1994 से, पलाउ के आज़ाद होने पर।
  9. WTO का पूर्ववर्ती GATT है — ‘जेनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ’, ‘एरेंजमेंट’ नहीं (प्रश्न 5 का जाल)।
  10. ★IAEA परमाणु; OPCW रासायनिक हथियार।
  11. हैमरसोल्ड को नोबेल मरणोपरांत (कांगो); अन्नान को 2001 में।
  12. ★बजट में रूस 10वें और भारत 21वें स्थान पर — दोनों सुधार-बहस के केंद्र में हैं, पर योगदान कम।
  13. ★वीटो सबसे ज्यादा सोवियत संघ/रूस ने (135), अमरीका ने 84।
  14. ! आम सभा 193 सदस्य, पर पृ. 59 पर ‘190 राष्ट्र’ लिखा है — दोनों पाठ्यपुस्तक में हैं।

पाठ्यपुस्तक में मुद्रित उत्तर

इस अध्याय में कोई उत्तर-कुंजी और कोई सारांश खंड मुद्रित नहीं है। उत्तर 05-Question-Bank.md में — शिक्षक द्वारा तैयार।