NCERT, स्वतंत्र भारत में राजनीति, अध्याय 4, पृष्ठ 54–71 ★इस अध्याय की दो कुंजियाँ: (1) विदेश नीति घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों दबावों से बनती है। (2) और वह घरेलू राजनीति को बदल भी देती है।
1 · ⚡ पहले पाँच वाक्य — अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों
- आज़ादी की असली कसौटी विदेश नीति का स्वतंत्र संचालन है (नेहरू, मार्च 1949)।
- भारत ने गुटनिरपेक्षता चुनी — यानी किसी सैन्य गुट में शामिल न होना, पर सबसे दोस्ती।
- चीन के साथ पंचशील से दोस्ती शुरू हुई, पर तिब्बत और सीमा-विवाद ने उसे 1962 के युद्ध तक पहुँचा दिया।
- पाकिस्तान से 1947, 1965 और 1971 में टकराव हुआ — पर 1960 की सिंधु जल संधि यह भी बताती है कि सहयोग पूरी तरह असंभव नहीं था।
- भारत ने NPT को भेदभावपूर्ण मानकर ठुकराया, 1974 में ‘शांतिपूर्ण’ परीक्षण किया, 1998 में सैन्य क्षमता स्वीकार की — और नीति रखी ‘प्रयोग पहले नहीं’।
2 · अठारह तथ्य जो सीधे पूछे जाते हैं★★
| # | तथ्य |
|---|---|
| 1 | नेहरू 1946 से 1964 तक प्रधानमंत्री के साथ-साथ विदेश मंत्री भी थे |
| 2 | ★नेहरू के तीन उद्देश्य: संप्रभुता बचाना · क्षेत्रीय अखंडता · तेज़ आर्थिक विकास |
| 3 | संविधान का अनुच्छेद 51 — ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का बढ़ावा’ (नीति-निर्देशक सिद्धांत) |
| 4 | ★डा. भीमराव अंबेडकर अमरीकी खेमे के पक्ष में सोचने वालों में थे; भारतीय जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी भी |
| 5 | NATO — अमरीका; ‘वारसा पैक्ट’ — सोवियत संघ |
| 6 | ★★1956: स्वेज (ब्रिटेन का मिस्र पर हमला) → भारत ने विरोध की अगुवाई की; हंगरी (सोवियत हमला) → भारत ने निंदा नहीं की |
| 7 | मार्च 1947 — एशियाई संबंध सम्मेलन (आज़ादी से पाँच महीने पहले) |
| 8 | ★★1955 — बांडुंग सम्मेलन = गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव |
| 9 | ★★सितंबर 1961 — बेलग्रेड = NAM का पहला सम्मेलन |
| 10 | ★★29 अप्रैल 1954 — पंचशील; नेहरू और चाऊ एन लाई |
| 11 | ★1950 — चीन ने तिब्बत पर नियंत्रण किया; ‘मध्यवर्ती राज्य’ खत्म |
| 12 | ★1959 — दलाई लामा को भारत में शरण; निवास धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) |
| 13 | ★1957–59 — चीन ने अक्साई-चीन पर कब्ज़ा किया और सड़क बनाई |
| 14 | ★★अक्तूबर 1962 — चीन का आक्रमण, ठीक क्यूबा मिसाइल संकट के समय |
| 15 | ★1962 के बाद कृष्णमेनन का इस्तीफा; नेहरू सरकार के विरुद्ध पहला अविश्वास प्रस्ताव |
| 16 | ★★1964 — भाकपा टूटी; चीन-पक्षधर खेमे ने माकपा (CPI-M) बनाई |
| 17 | ★★1960 — सिंधु नदी जल संधि (नेहरू–अयूब खान, विश्व बैंक की मध्यस्थता) |
| 18 | ★★1966 — ताशकंद-समझौता (शास्त्री–अयूब खान, सोवियत मध्यस्थता) |
3 · 🌏 गुटनिरपेक्षता — एक पृष्ठ में
3.1 परिभाषा(नेहरू के शब्दों में, प्रश्न 10 का अवतरण)
“गुटनिरपेक्षता का व्यापक अर्थ है अपने को किसी भी सैन्य गुट में शामिल नहीं करना… चीजों को यथासंभव सैन्य दृष्टिकोण से न देखना… किसी सैन्य गुट के नज़रिए को अपनाने की जगह स्वतंत्र रूप से स्थिति पर विचार करना तथा सभी देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते कायम करना।”
3.2 जड़ें★
स्वतंत्रता आंदोलन में — “भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन अपने आप में कोई स्वतंत्र घटना नहीं है”; आज़ादी से पहले ही अन्य उपनिवेशों के नेताओं से संपर्क; सुभाषचंद्र बोस की आई.एन.ए.।
3.3 ✓ उपलब्धियाँ
| # | उपलब्धि |
|---|---|
| 1 | ★दोनों खेमों से सहायता और अनुदान मिले |
| 2 | संयुक्त राष्ट्र के शांति-अभियानों में भारतीय सेना की भागीदारी |
| 3 | एशिया-अफ्रीका के नव-स्वतंत्र देशों के बीच नेतृत्व और ‘नैतिक ताकत’ की पहचान |
| 4 | अनौपनिवेशीकरण और रंगभेद-विरोध में अग्रणी भूमिका |
3.4 सीमाएँ और आलोचनाएँध्यान
| # | सीमा |
|---|---|
| 1 | ! 1956 का दोहरा रुख — स्वेज पर मुखर, हंगरी पर चुप |
| 2 | ! 1962 में अमरीका और ब्रिटेन से सैन्य मदद माँगनी पड़ी |
| 3 | ! 1971 की सोवियत संधि पर ‘खेमे में जाने’ का आरोप |
| 4 | ! घर में भी असहमति — अंबेडकर, जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी |
4 · 🇨🇳 चीन — दोस्ती से युद्ध तक
4.1 दोस्ती के तीन चिह्न
1949 की क्रांति के बाद भारत मान्यता देने वाले पहले देशों में · अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नेहरू की मदद · 29 अप्रैल 1954 का पंचशील।
4.2 खटास के दो कारणध्यान
| # | कारण |
|---|---|
| 1 | ★★तिब्बत — 1950 में चीन का नियंत्रण; 1959 में दलाई लामा को भारत की शरण; चीन का कड़ा विरोध |
| 2 | ★★सीमा-विवाद — पश्चिम में अक्साई-चीन, पूर्व में अरुणाचल प्रदेश (‘नेफा’) |
4.3 दोनों देशों के तर्क
| पक्ष | तर्क |
|---|---|
| भारत | “सीमा-रेखा का मामला अंग्रेजी-शासन के समय ही सुलझाया जा चुका है” |
| चीन | “अंग्रेजी शासन के समय का फ़ैसला नहीं माना जा सकता” |
4.4 1962 का युद्ध — क्रम★★
अक्तूबर 1962 (क्यूबा संकट के समय) → पहला हमला एक हफ्ते, अरुणाचल में कब्ज़ा → नवंबर में दूसरा दौर → पश्चिमी मोर्चे पर भारत ने रोका → पूर्व में चीनी सेना असम के मैदानी हिस्से के प्रवेशद्वार तक → चीन का एकतरफा युद्धविराम, सेनाएँ पुरानी जगह लौटीं।
4.5 छह परिणाम(यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला उत्तर है)★★
- छवि को देश और विदेश, दोनों जगह धक्का
- ! अमरीका-ब्रिटेन से सैन्य मदद; सोवियत संघ तटस्थ
- स्वाभिमान को चोट, पर राष्ट्र-भावना बलवती
- सैन्य कमांडरों के इस्तीफे; रक्षामंत्री कृष्णमेनन की विदाई
- ! नेहरू की छवि धूमिल; तैयारी न होने की आलोचना
- ★★पहला अविश्वास प्रस्ताव; उप-चुनावों में कांग्रेस की हार — “देश का राजनीतिक मानस बदलने लगा था”
4.6 दो और असर★
| असर | विवरण |
|---|---|
| वामपंथ पर | ★★1964 में भाकपा का विभाजन → माकपा; कई माकपा नेता गिरफ्तार |
| पूर्वोत्तर पर | ★नगालैंड को प्रांत का दर्जा; मणिपुर और त्रिपुरा को विधानसभा-निर्वाचन का अधिकार |
4.7 1962 के बाद
1976 — पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल · 1979 — वाजपेयी (विदेश मंत्री) का दौरा · बाद में राजीव गाँधी का प्रधानमंत्री के रूप में दौरा · इसके बाद ज़ोर व्यापारिक मसलों पर।
5 · 🇵🇰 पाकिस्तान — टकराव और सहयोग, दोनों
5.1 सहयोग के दो प्रमाण(इन्हें भूलिए मत — प्रश्न 1(ख) यहीं से है)★
- बँटवारे में अपहृत महिलाओं की वापसी के लिए दोनों सरकारों का साझा प्रयास
- ★★सिंधु नदी जल संधि, 1960 — विश्व बैंक की मध्यस्थता; नेहरू और अयूब खान; “नरमी-गरमी के बावजूद इस संधि पर ठीक-ठाक अमल होता रहा”
5.2 1965 — क्रम
| क्रम | घटना |
|---|---|
| अप्रैल 1965 | कच्छ के रन में पाकिस्तानी हमला |
| अगस्त–सितंबर | जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर हमला |
| ★ | पाकिस्तान की उम्मीद थी कि कश्मीर की जनता साथ देगी — ऐसा नहीं हुआ |
| ★★ | शास्त्री का आदेश: पंजाब की सीमा से जवाबी हमला; सेना लाहौर के नज़दीक तक |
| अंत | संयुक्त राष्ट्र का हस्तक्षेप; 1966 का ताशकंद-समझौता (सोवियत मध्यस्थता) |
| ! कीमत | “इस युद्ध से भारत की कठिन आर्थिक स्थिति पर और ज्यादा बोझ पड़ा” |
5.3 1971 — पृष्ठभूमि
1970 का पहला आम चुनाव, खंडित जनादेश → भुट्टो (पश्चिम) बनाम मुजीबुर्रहमान की अवामी लीग (पूर्व) → कारण: “दोयम दर्जे के नागरिक का बरताव” → शासकों ने जनादेश नहीं माना → मुजीब की गिरफ्तारी और दमन → ★★80 लाख शरणार्थी → भारत का नैतिक समर्थन और भौतिक सहायता।
5.4 अंतर्राष्ट्रीय समीकरण — यह याद रखिए★★
जुलाई 1971: किसिंजर का पाकिस्तान होते हुए गुपचुप चीन-दौरा → अमरीका-पाकिस्तान-चीन की धुरी → जवाब में भारत-सोवियत 20-वर्षीय शांति और मित्रता संधि → “हमला होने की सूरत में सोवियत संघ भारत की मदद करेगा।”
5.5 दिसंबर 1971 — तीन संख्याएँ
★★दस दिन · ढाका की तीन तरफ़ से घेराबंदी · 90,000 सैनिकों का आत्म-समर्पण (16 दिसंबर 1971)। फिर एकतरफा युद्ध-विराम, बांग्लादेश का उदय, और 3 जुलाई 1972 को शिमला-समझौता (इंदिरा गाँधी–भुट्टो)।
5.6 करगिल, 1999
द्रास, माश्कोह, काकसर, बतालिक · “अपने को मुजाहिद्दीन बताने वाले” · पाकिस्तानी सेना की मिलीभगत · 26 जुलाई 1999 तक अधिकांश ठिकाने वापस · ★विश्व का ध्यान क्योंकि एक साल पहले दोनों देश परमाणु-क्षमता दिखा चुके थे · लड़ाई के बाद मुशर्रफ की अगुवाई में सेना का नियंत्रण।
6 · ☢ परमाणु नीति — छह चरणध्यान
| चरण | विवरण |
|---|---|
| 1 | ★1940 के दशक के अंत — होमी जहाँगीर भाभा के निर्देशन में कार्यक्रम की शुरुआत |
| 2 | नेहरू: शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अणु ऊर्जा; ★“नेहरू परमाणु हथियारों के खिलाफ़ थे” |
| 3 | ! अक्तूबर 1964 — चीन का परमाणु परीक्षण |
| 4 | !★1968 की NPT — ‘भेदभावपूर्ण’; भारत ने दस्तखत से इनकार किया |
| 5 | ★★मई 1974 — पहला परीक्षण, “शांतिपूर्ण परीक्षण” करार दिया गया |
| 6 | ★★1995 NPT विस्तार का विरोध और CTBT से इनकार → मई 1998 के परीक्षण → तुरंत बाद पाकिस्तान के परीक्षण → प्रतिबंध, जो बाद में हटा लिए गए |
भारत का तर्क — एक वाक्य में★★
“इन संधियों के द्वारा परमाणु हथियारों से लैस देशों की जमात के परमाणु शक्ति पर एकाधिकार को वैधता दी जा रही थी।” — और वे पाँच देश सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य भी थे।
नीति के दो स्तंभ★★
(1) रक्षा के लिए हथियार, पर ‘प्रयोग पहले नहीं’। (2) वैश्विक और भेदभाव-हीन निशस्त्रीकरण के प्रति वचनबद्धता।
7 · 🏛 अध्याय का दूसरा दावा — विदेश नीति ने घरेलू राजनीति बदलीध्यान
| प्रसंग | घरेलू परिणाम |
|---|---|
| ! 1962 की हार | पहला अविश्वास प्रस्ताव · कृष्णमेनन की विदाई · उप-चुनावों में हार · नेहरू की छवि धूमिल |
| ! चीन-सोवियत मतभेद | ★★1964 में भाकपा का विभाजन → माकपा |
| ! तीनों युद्ध | तीसरी योजना पटरी से उतरी; तीन वार्षिक योजनाएँ; चौथी 1969 में; रक्षा-व्यय में भारी वृद्धि |
| ✓ 1971 की जीत | ★★इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता चरम पर; अनेक राज्यों में कांग्रेस की भारी जीत |
| ✓ 1962 के बाद पूर्वोत्तर | नगालैंड को प्रांत; मणिपुर-त्रिपुरा को विधानसभा |
★इस सारणी को याद कर लीजिए — यह प्रश्न 9 का तैयार उत्तर है।
8 · 🤝 सर्व-सहमति और 1977 के बाद(प्रश्न 6ख)
- “राजनीतिक दलों के बीच छोटे-मोटे मतभेद जरूर हैं” — पर ★★“राष्ट्रीय अखंडता, अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हित के मसलों पर व्यापक सहमति है।”
- इसीलिए “विदेश नीति की भूमिका पार्टी की राजनीति में बड़ी सीमित रही।”
- ★1977 — जनता पार्टी: “सच्ची गुटनिरपेक्ष नीति”; आशय — सोवियत झुकाव खत्म करना।
- इसके बाद की सभी सरकारों ने चीन से बेहतर और अमरीका से नजदीकी रिश्तों की पहल की।
- ★★कारण: (1) 1990 के बाद रूस का अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व घटा; (2) “सैन्य-हितों के बजाय आर्थिक-हितों का जोर ज्यादा है।”
- सूत्र-वाक्य: “विदेश नीति हमेशा राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।”
9 · दस भूलें जो सबसे ज़्यादा होती हैंध्यान
| # | ! भूल | ✓ सही |
|---|---|---|
| 1 | बांडुंग में NAM का पहला सम्मेलन हुआ | ★बांडुंग (1955) = नींव; बेलग्रेड (1961) = पहला सम्मेलन |
| 2 | पंचशील 1955 में | ★29 अप्रैल 1954 |
| 3 | 1971 की संधि अमरीका से निकटता के कारण | ★★उल्टा — अमरीका-चीन-पाक धुरी के जवाब में |
| 4 | पड़ोसियों से संबंध शुरू से ही तनावपूर्ण | ★नहीं — पंचशील और सिंधु जल संधि इसके प्रमाण हैं |
| 5 | 1965 में मध्यस्थ अमरीका था | ★सोवियत संघ — ताशकंद-समझौता |
| 6 | 1962 में सोवियत संघ ने भारत की मदद की | ! नहीं — “सोवियत संघ इस संकट की घड़ी में तटस्थ बना रहा” |
| 7 | अक्साई-चीन पूर्वी छोर पर है | ★पश्चिमी छोर (लद्दाख); पूर्वी छोर = अरुणाचल/‘नेफा’ |
| 8 | भारत ने NPT पर बाद में दस्तखत कर दिए | ! नहीं — भारत ने NPT और CTBT, दोनों से इनकार किया |
| 9 | 1974 का परीक्षण सैन्य घोषित किया गया | ★1974 = “शांतिपूर्ण परीक्षण”; सैन्य क्षमता 1998 में जताई गई |
| 10 | माकपा 1962 में बनी | ★भाकपा 1964 में टूटी; तभी माकपा बनी |
10 · ⚡ अंतिम मिनट की सूची — बीस शब्द
अनुच्छेद 51 · गुटनिरपेक्षता · NATO · वारसा पैक्ट · स्वेज 1956 · हंगरी 1956 · एशियाई संबंध सम्मेलन 1947 · बांडुंग 1955 · बेलग्रेड 1961 · पंचशील 1954 · मध्यवर्ती राज्य · दलाई लामा 1959 · अक्साई-चीन · नेफा · क्यूबा मिसाइल संकट · कृष्णमेनन · माकपा 1964 · सिंधु जल संधि 1960 · ताशकंद 1966 · शिमला 1972 · 80 लाख / 90,000 · भाभा · NPT · CTBT · ‘प्रयोग पहले नहीं’ · करगिल 1999