Chapter 3समकालीन दक्षिण एशिया

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 29–44.

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परीक्षा-केंद्रित संक्षेपण। ★सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं को दर्शाता है।

एक पंक्ति में पूरा अध्याय

दक्षिण एशिया सात देशों का एक ऐसा क्षेत्र है “जहाँ सद्भाव और शत्रुता, आशा और निराशा तथा पारस्परिक शंका और विश्वास साथ-साथ बसते हैं” — जहाँ पाकिस्तान में सेना, बांग्लादेश में सैनिक शासन, नेपाल में राजतंत्र और श्रीलंका में जातीय संघर्ष ने लोकतंत्र को चुनौती दी, फिर भी “पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है”; और जहाँ भारत की केंद्रीय स्थिति ही अधिकांश संघर्षों का कारण भी है और सहयोग की कुंजी भी।

0. पहले यह जान लीजिएध्यान★

  • यह अध्याय पहले ‘अध्याय 5’ था — QR कोड 12108CH05।
  • पैटर्न पूरा: पुराने अध्याय 1 और 3 हटाए गए; 2 → 1, 4 → 2, 5 → 3।
  • ★★पृ. 41 का साइड-बॉक्स सीधे हटाए गए अध्याय की ओर इशारा करता है — “अगर अमरीका के बारे में लिखे गए अध्याय को ‘अमरीकी वर्चस्व’ का शीर्षक दिया गया तो इस अध्याय को भारतीय वर्चस्व क्यों नहीं कहा गया?” वह अध्याय अब पाठ्यक्रम में है ही नहीं।

1. क्या है दक्षिण एशिया?★★

1.1 परिभाषा

  • ★सात देश: बांग्लादेश · भूटान · भारत · मालदीव · नेपाल · पाकिस्तान · श्रीलंका
  • ★चार प्राकृतिक सीमाएँ: उत्तर — हिमालय; दक्षिण — हिंद महासागर; पश्चिम — अरब सागर; पूरब — बंगाल की खाड़ी
  • ★“यह भौगोलिक विशिष्टता ही इस उप-महाद्वीपीय क्षेत्र के भाषाई, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अनूठेपन के लिए जिम्मेदार है।”
  • चर्चा में जब-तब अफ़्गानिस्तान और म्यांमार भी शामिल किए जाते हैं।
  • ★★“चीन इस क्षेत्र का एक प्रमुख देश है लेकिन चीन को दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता।”
  • ★“हर अर्थ में विविधताओं से भरा-पूरा इलाका है फिर भी भू-राजनीतिक धरातल पर यह एक क्षेत्र है।”

1.2 राजनीतिक प्रणालियाँ — देश-दर-देश★★

★“दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में एक-सी राजनीतिक प्रणाली नहीं है।” (प्रश्न 2 का उत्तर)

देशस्थिति
भारत और श्रीलंका★ब्रिटेन से आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था सफलतापूर्वक कायम; “एक राष्ट्र के रूप में भारत हमेशा लोकतांत्रिक रहा है। यही बात श्रीलंका पर लागू होती है।”
पाकिस्तान और बांग्लादेशलोकतांत्रिक और सैनिक दोनों तरह के नेताओं का शासन
पाकिस्तानशीतयुद्ध के बाद दो लोकतांत्रिक सरकारें — बेनज़ीर भुट्टो, फिर नवाज़ शरीफ़; 1999 में सैनिक तख़्तापलट; 2008 से लोकतांत्रिक-शासन
नेपाल★2006 तक संवैधानिक राजतंत्र; 2008 में राजतंत्र खत्म → लोकतांत्रिक गणराज्य
भूटान★2008 में संवैधानिक राजतंत्र; राजा के नेतृत्व में बहुदलीय लोकतंत्र
मालदीव★1968 तक सल्तनत → 1968 में गणतंत्र, अध्यक्षात्मक प्रणाली; जून 2005 में संसद ने बहुदलीय प्रणाली के पक्ष में एकमत से मतदान; एमडीपी ने 2018 में जीत हासिल की

★★“बांग्लादेश और नेपाल के अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।”

1.3 लोकतंत्र का जन-समर्थन — सर्वेक्षण के आँकड़े★★

  • पाँच बड़े देशों में सर्वेक्षण; 19 हजार से अधिक नागरिकों के साक्षात्कार पर आधारित।
  • स्रोत: स्टेट ऑव डेमोक्रेसी इन साउथ एशिया, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2007

‘लोकतंत्र बेहतर है’ (%)

बांग्लादेशभारतनेपालपाकिस्तानश्रीलंका
6970623771

‘अपने देश के लिए लोकतंत्र उपयुक्त’ (%) — दक्षिण एशिया 88 · बांग्लादेश 93 · श्रीलंका 92 · भारत 92 · पाकिस्तान 84 · नेपाल 79

★★निष्कर्ष: “ये निष्कर्ष बड़े महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि पहले से माना जाता रहा है कि लोकतंत्र सिर्फ विश्व के धनी देशों में फल-फूल सकता है। इस लिहाज से देखें तो दक्षिण एशिया के लोकतंत्र के अनुभवों से लोकतंत्र की वैश्विक कल्पना का दायरा बढ़ा है।”

1.4 HDI — केवल याद रखने योग्य क्रम

★श्रीलंका 76 · भारत 130 · बांग्लादेश 136 · नेपाल 149 · पाकिस्तान 150 (UNDP मानव विकास रिपोर्ट 2018)

★श्रीलंका हर संकेतक में सबसे आगे है — आयु प्रत्याशा 75.5, साक्षरता 91.2%, माध्यमिक नामांकन 98, बाल मृत्यु दर सबसे कम 8.0।

2. दक्षिण एशिया का घटनाक्रम (1947 से)★★

तिथिघटना
1947भारत और पाकिस्तान का उदय
1948★श्रीलंका (सिलोन) की आज़ादी; कश्मीर पर भारत-पाक लड़ाई
1954–55पाकिस्तान ‘सिएटो’ और ‘सेंटो’ में शामिल
सितंबर 1960★सिंधु नदी जल समझौता
1962भारत-चीन सीमा-विवाद
1965भारत-पाक युद्ध; UN पर्यवेक्षण मिशन
1966ताशकंद समझौता; शेख मुजीब का छ: सूत्री प्रस्ताव
मार्च 1971बांग्लादेश की आज़ादी की उद्घोषणा
अगस्त 1971★भारत-सोवियत 20 वर्षीय मैत्री संधि
दिसंबर 1971★भारत-पाक युद्ध; बांग्लादेश की मुक्ति
जुलाई 1972★शिमला-समझौता
मई 1974भारत का परमाणु-परीक्षण
1976पाकिस्तान-बांग्लादेश कूटनयिक संबंध बहाल
दिसंबर 1985★★दक्षेस का पहला सम्मेलन (ढाका); घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर
1987★भारत-श्रीलंका समझौता; भारतीय शांति सेना (1987–90)
1988★मालदीव में भारत ने सेना भेजी; परमाणु ठिकानों पर हमला न करने का समझौता
1988–91★पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में लोकतंत्र की बहाली
1993दक्षेस का सातवाँ सम्मेलन (ढाका) — SAPTA
दिसंबर 1996★फरक्का संधि (गंगा जल, भारत-बांग्लादेश)
मई 1998★भारत और पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण
दिसंबर 1998भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार संधि
फरवरी 1999★वाजपेयी की लाहौर बस-यात्रा; शांति घोषणापत्र
जून–जुलाई 1999★करगिल-युद्ध
जुलाई 2001आगरा-बैठक असफल
फरवरी 2004★★12वें दक्षेस सम्मेलन में SAFTA पर हस्ताक्षर
2007★अफ़गानिस्तान दक्षेस का सदस्य बना
नवंबर 201418वाँ दक्षेस सम्मेलन, काठमांडू

3. पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र★★

3.1 शासकों का क्रम — याद रखने का सूत्र

अयूब → याहिया → भुट्टो → जियाउल-हक → बेनज़ीर → मुशर्रफ → 2008 से लोकतंत्र

कालशासक / घटना
पहले संविधान के बाद★जनरल अयूब खान — अपना निर्वाचन भी करा लिया; जनता का गुस्सा भड़का, पद छोड़ना पड़ा
इसके बाद★जनरल याहिया खान — इनके शासन में बांग्लादेश-संकट और 1971 का युद्ध
1971–1977★जुल्फ़िकार अली भुट्टो की निर्वाचित सरकार
1977★जनरल जियाउल-हक ने सरकार गिरायी
1982 के बादजियाउल-हक को लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन का सामना
1988★बेनज़ीर भुट्टो के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकार
1988–1999पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी बनाम मुस्लिम लीग की होड़
1999★★जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने नवाज़ शरीफ़ को हटाया
2001मुशर्रफ का राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन
2008 से★लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता शासन कर रहे हैं

3.2 लोकतंत्र स्थायी क्यों नहीं बना — पाँच कारण(प्रश्न 3)★★

  1. ★सेना, धर्मगुरु और भूस्वामी अभिजनों का सामाजिक दबदबा — इसी से निर्वाचित सरकारें गिराकर सैनिक शासन कायम हुआ।
  2. ★भारत के साथ तनातनी → सेना-समर्थक समूह ज्यादा मजबूत।
  3. ★सेना-समर्थक तर्क: “पाकिस्तान के राजनीतिक दलों और लोकतंत्र में खोट है”; “राजनीतिक दलों के स्वार्थ साधन तथा लोकतंत्र की धमाचौकड़ी से पाकिस्तान की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी” — “इस तरह ये ताकतें सैनिक शासन को जायज़ ठहराती हैं।”
  4. ★“पाकिस्तान में लोकतांत्रिक शासन चले — इसके लिए कोई खास अंतर्राष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलता।”
  5. ★पश्चिमी देशों की भूमिका — “अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने अपने-अपने स्वार्थों से गुज़रे वक्त में पाकिस्तान में सैनिक शासन को बढ़ावा दिया”; कारण — ‘विश्वव्यापी इस्लामी आतंकवाद’ का डर, परमाणु हथियार आतंकवादी समूहों के हाथ लगने का डर, और यह मान्यता कि पाकिस्तान ‘पश्चिम’ तथा दक्षिण एशिया में पश्चिमी हितों का रखवाला है।

3.3 दूसरा पक्ष — मत भूलिए★

★“लोकतंत्र तो खैर पाकिस्तान में पूरी तरह सफल नहीं हो सका है लेकिन इस देश में लोकतंत्र का जज्बा बहुत मज़बूती के साथ कायम रहा है। पाकिस्तान में अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है और वहाँ मानवाधिकार आंदोलन भी काफी मजबूत है।”

कार्टून: मुशर्रफ की दोहरी भूमिका — सेना के जनरल + राष्ट्रपति; “जोड़ घटाव में मैं हमेशा अच्छा रहा हूँ।”

4. बांग्लादेश में लोकतंत्र★★

4.1 क्यों टूटा पाकिस्तान — चार शिकायतें

  1. ★पश्चिमी पाकिस्तान का दबदबा;
  2. ★उर्दू भाषा को लादे जाने का विरोध;
  3. ★बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ दुर्व्यवहार;
  4. ★प्रशासन में न्यायोचित प्रतिनिधित्व तथा राजनीतिक सत्ता में समुचित हिस्सेदारी की माँग।

4.2 मुक्ति की प्रक्रिया★★

  • नेतृत्व — शेख मुजीबुर्रहमान; 1966 में छ: सूत्री प्रस्ताव; पूर्वी क्षेत्र के लिए स्वायत्तता की माँग।
  • ★1970 के चुनावों में अवामी लीग को पूर्वी पाकिस्तान की सारी सीटों पर विजय; संविधान सभा में बहुमत।
  • ! पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं के दबदबे में सरकार ने सभा आहूत करने से इंकार किया; शेख़ मुजीब गिरफ्तार।
  • ★जेनरल याहिया खान के सैनिक शासन में पाकिस्तानी सेना ने आंदोलन कुचलने की कोशिश; हजारों लोग मारे गए।
  • बड़ी संख्या में लोग भारत पलायन कर गए → शरणार्थियों की समस्या।
  • ★भारत ने आज़ादी की माँग का समर्थन किया और वित्तीय तथा सैन्य सहायता दी।
  • ★1971 में युद्ध → पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण → स्वतंत्र राष्ट्र ‘बांग्लादेश’।

4.3 आज़ादी के बाद★

वर्षघटना
1972★संविधान — धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समाजवादी देश घोषित
1975! शेख मुजीब का संशोधन — संसदीय की जगह अध्यक्षात्मक प्रणाली; अवामी लीग को छोड़ सभी पार्टियाँ समाप्त
अगस्त 1975★सेना की बग़ावत; शेख मुजीब मारे गए
1979★जियाउर्रहमान — बांग्लादेश नेशनल पार्टी बनायी और चुनाव जीता
इसके बादजियाउर्रहमान की हत्या; लेफ्टिनेंट जेनरल एच एम इरशाद का सैनिक-शासन
1987इरशाद के खिलाफ प्रदर्शन; नूर हुसैन पुलिस द्वारा मारे गए
1990★जनता के व्यापक विरोध के आगे झुककर इरशाद को पद छोड़ना पड़ा
1991★चुनाव; तब से बहुदलीय चुनावों पर आधारित प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र कायम

★आंदोलन की विशेषता: “बांग्लादेश की जनता जल्दी ही लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई। आंदोलन में छात्र आगे-आगे चल रहे थे।”

दीवार-चित्र के नारे (पृ. 34): ‘जय बांग्ला’ · ‘जय बंगबंधु’ · ‘विप्लववीर ही सच्चे इंसान हैं’ · ‘क्रांति ही मुक्ति का इकलौता रास्ता है’ — पीठ पर अंकित ‘गणतंत्र मुक्त पाक’।

5. नेपाल में राजतंत्र और लोकतंत्र★★

5.1 पृष्ठभूमि

  • ★“नेपाल अतीत में एक हिन्दू-राज्य था फिर आधुनिक काल में कई सालों तक यहाँ संवैधानिक राजतंत्र रहा।”
  • ! “राजा ने सेना की सहायता से शासन पर पूरा नियंत्रण कर लिया और नेपाल में लोकतंत्र की राह अवरुद्ध हो गई।”

5.2 दो आंदोलन — यही अध्याय की कुंजी है★

पहला आंदोलनदूसरा आंदोलन
कब1990★अप्रैल 2006
क्या मिलाराजा ने नए लोकतांत्रिक संविधान की माँग मान ली★राजा ज्ञानेन्द्र ने बाध्य होकर संसद को बहाल किया (अप्रैल 2002 में भंग)
नेतृत्वलोकतंत्र-समर्थक आंदोलन★सात दलों का गठबंधन (सेवेन पार्टी अलाएंस) + माओवादी + सामाजिक कार्यकर्ता
चरित्र—★“मोटे तौर पर अहिंसक”

5.3 बीच का दौर — त्रिकोणीय संघर्ष★

  • ! “नेपाल में लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा और समस्याओं से भरा रहा।”
  • ★1990 के दशक में माओवादी अनेक हिस्सों में प्रभाव जमाने में कामयाब; राजा और सत्ताधारी अभिजन के खिलाफ़ सशस्त्र विद्रोह करना चाहते थे।
  • ★★“कुछ समय तक राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ।”
  • ! 2002 में राजा ने संसद भंग की और सरकार गिरा दी।

5.4 उसके बाद — तीन मतभेद और अंतिम परिणाम★

मतभेद:

  1. कुछ लोग मानते थे कि “अलंकारिक अर्थों में राजा का पद कायम रखना ज़रूरी था ताकि नेपाल अपने अतीत से जुड़ा रहे।”
  2. ★माओवादियों ने सशस्त्र संघर्ष छोड़ने की बात मान ली, पर चाहते थे कि संविधान में “मूलगामी सामाजिक आर्थिक पुनर्रचना के कार्यक्रम” शामिल हों — सात दलों के गठबंधन के हरेक दल को यह स्वीकार नहीं था।
  3. माओवादी और कुछ अन्य समूह भारत सरकार की भूमिका को लेकर शंकित थे।

परिणाम: ★2008 में राजतंत्र खत्म → लोकतांत्रिक गणराज्य; ★2015 में नया संविधान।

चित्र: दुर्गा थापा — 1990 की रैली और 2006 के उत्सव में; एक ही चेहरा, दो आंदोलन।

6. श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र★★

6.1 अलग तरह की चुनौती★

★★“यह चुनौती न तो सेना की थी और न ही राजतंत्र की। श्रीलंका को जातीय संघर्ष का सामना करना पड़ा जिसकी माँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाय।”

  • आज़ादी 1948; तब सिलोन कहा जाता था।

6.2 संघर्ष की जड़(प्रश्न 5 का उत्तर)★

पक्षविवरण
★बहुसंख्यक सिंहलीराजनीति पर इनके हितों की नुमाइंदगी करने वालों का दबदबा; “श्रीलंका सिर्फ सिंहली लोगों का है”, इसलिए तमिलों के साथ कोई ‘रियायत’ नहीं
★तमिलभारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी बड़ी आबादी; बसना आज़ादी के बाद भी जारी रहा; उपेक्षा भरे बरताव से उग्र तमिल राष्ट्रवाद
★★लिट्टे‘लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम’ — 1983 से श्रीलंकाई सेना से सशस्त्र संघर्ष; ‘तमिल ईलम’ यानी अलग देश की माँग; किसी समय उत्तर-पूर्वी हिस्से पर नियंत्रण
★भारतभारत की तमिल जनता का सरकार पर दबाव; 1987 में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप
अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ★नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश

6.3 भारत की भूमिका — और उसका सबक★★

  • ★1987 — भारत ने श्रीलंका से समझौता किया और भारतीय सेना भेजी।
  • ! “आखिर में भारतीय सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में फंस गई।”
  • !★“श्रीलंकाई जनता ने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है।”
  • ★1989 — “भारत ने अपनी ‘शांति सेना’ लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली।”
  • ★2009 — लिट्टे को खत्म कर दिया गया; सशस्त्र संघर्ष समाप्त।

6.4 श्रीलंका की उपलब्धियाँ — परीक्षा का पसंदीदा बिंदु★★

  1. ★“संघर्षों की चपेट में होने के बाद भी श्रीलंका ने अच्छी आर्थिक वृद्धि और विकास के उच्च स्तर को हासिल किया है।”
  2. ★“जनसंख्या की वृद्धि-दर पर सफलतापूर्वक नियंत्रण करने वाले विकासशील देशों में श्रीलंका प्रथम है।”
  3. ★“दक्षिण एशिया के देशों में सबसे पहले श्रीलंका ने ही अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।” (प्रश्न 1-ग)
  4. ★“गृहयुद्ध से गुजरने के बावजूद कई सालों से इस देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है।”
  5. ★“अंदरूनी संघर्ष के झंझावातों को झेलकर भी श्रीलंका ने लोकतांत्रिक राजव्यवस्था कायम रखी है।”

कार्टून: एक ओर शेर के रूप में सिंहली कट्टरपंथी, दूसरी ओर बाघ के रूप में तमिल उग्रवादी — बीच में श्रीलंका का नेतृत्व।

7. भारत-पाकिस्तान संघर्ष★★

7.1 ढाँचा★

★★“दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति केंद्रीय है और इस वजह से इनमें से अधिकांश संघर्षों का रिश्ता भारत से है। इन संघर्षों में सबसे प्रमुख और सर्वग्रासी संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच का संघर्ष है।”

7.2 कश्मीर★★

  • विभाजन के तुरंत बाद कश्मीर पर लड़ाई; पाकिस्तान का दावा कि कश्मीर पाकिस्तान का है।
  • ★1947–48 तथा 1965 के युद्ध से समाधान नहीं हुआ।
  • ★★1948 के युद्ध के फलस्वरूप कश्मीर के दो हिस्से — पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और भारत का जम्मू-कश्मीर प्रान्त; बीच में नियंत्रण-सीमा रेखा।
  • ★1971 में भारत ने निर्णायक युद्ध जीता, लेकिन कश्मीर मसला अनसुलझा ही रहा।

7.3 सामरिक और परमाणु★

  • सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण और हथियारों की होड़ — दोनों पर तनातनी।
  • ★1990 के दशक में परमाणु हथियार और मिसाइल → होड़ ने नया चरित्र ग्रहण किया।
  • ★★1998 — भारत ने पोखरण में, पाकिस्तान ने चगाई पहाड़ी पर परमाणु-परीक्षण किए।
  • ★“इसके बाद से ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान एक सैन्य-संबंध में बंध चुके हैं और इनके बीच सीधे और सर्वव्यापी युद्ध छिड़ने की आशंका कम हो गई है।”

7.4 आपसी आरोपध्यान

  • भारत → पाकिस्तान: कश्मीरी उग्रवादियों को हथियार, प्रशिक्षण और धन; आतंकवादी हमले के लिए सुरक्षा; ★1985–1995 में खालिस्तान-समर्थक उग्रवादियों को हथियार और गोले-बारुद।
  • भारत → आईएसआई: ★बांग्लादेश और नेपाल के गुप्त ठिकानों से पूर्वोत्तर भारत में भारत-विरोधी अभियान।
  • पाकिस्तान → भारत: ★सिंध और बलूचिस्तान में समस्या भड़काने का आरोप।

7.5 नदी-जल और सीमा★★

  • 1960 तक सिन्धु नदी के इस्तेमाल पर तीखे विवाद।
  • ★★1960 में विश्व बैंक की मदद से ‘सिंधु-जल संधि’ — और “यह संधि भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है।”
  • ★सरक्रिक (कच्छ का रन) — विवाद छोटा दिखता है, पर उसके समाधान का असर सटे समुद्री-संसाधन के नियंत्रण पर पड़ेगा।

8. भारत और उसके अन्य पड़ोसी★★

8.1 बांग्लादेश(प्रश्न 7 — दो सहयोग, दो असहमति)★★

! असहमति★सहयोग
गंगा और ब्रह्मपुत्र के जल में हिस्सेदारीपिछले बीस वर्षों में आर्थिक संबंध बेहतर
भारत में अवैध आप्रवास पर ढाका का खंडनबांग्लादेश भारत की ‘लुक ईस्ट’/‘एक्ट ईस्ट’ (2014 से) नीति का हिस्सा
भारत-विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी जमातों को समर्थनआपदा-प्रबंधन और पर्यावरण पर निरंतर सहयोग
भारतीय सेना को पूर्वोत्तर जाने का रास्ता देने से इंकार★2015 में परिक्षेत्रों (एन्केलेव) का आदान-प्रदान
प्राकृतिक गैस निर्यात न करने का फैसला
बांग्लादेश के आरोप: भारत “नदी-जल में हिस्सेदारी के सवाल पर इलाके के दादा की तरह बरताव करता है”; चटगाँव पर्वतीय क्षेत्र में विद्रोह को हवा देना; गैस में सेंधमारी; व्यापार में बेईमानी

8.2 नेपाल★

  • ★★संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक बिना पासपोर्ट और वीज़ा के आ-जा सकते हैं और काम कर सकते हैं।
  • ! भारत की शिकायतें: नेपाल की चीन से दोस्ती; भारत-विरोधी तत्त्वों के खिलाफ कदम न उठाना; ★माओवादी आंदोलन को सुरक्षा-खतरा मानना (क्योंकि बिहार से आन्ध्र प्रदेश तक नक्सलवादी समूहों का उभार)।
  • ! नेपाल की शिकायतें: भारत अंदरूनी मामलों में दखल देता है; नदी जल तथा पनबिजली पर आँख गड़ाए है; ★“चारों तरफ से जमीन से घिरे नेपाल को लगता है कि भारत उसको अपने भूक्षेत्र से होकर समुद्र तक पहुँचने से रोकता है।”
  • ★फिर भी — “भारत-नेपाल के संबंध एकदम मजबूत और शांतिपूर्ण है”; व्यापार, वैज्ञानिक सहयोग, साझे प्राकृतिक संसाधन, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन ग्रिड पर साथ।

8.3 श्रीलंका · भूटान · मालदीव★

देशमुख्य बातें
श्रीलंकातनाव — जातीय संघर्ष; ★1987 के हस्तक्षेप के बाद से “असलंग्नता की नीति”; ★मुक्त व्यापार समझौता; ★‘सुनामी’ के बाद पुनर्निर्माण में भारतीय मदद
भूटानकोई बड़ा झगड़ा नहीं; ★पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों को अपने क्षेत्र से खदेड़ भगाया; ★पनबिजली की बड़ी परियोजनाएँ; विकास कार्यों के लिए सबसे ज्यादा अनुदान भारत से
मालदीव★★1988 में भाड़े के तमिल सैनिकों के हमले पर भारतीय वायुसेना और नौसेना ने तुरंत कार्रवाई की; आर्थिक विकास, पर्यटन और मत्स्य उद्योग में मदद

8.4 ‘बड़े होने’ की समस्या(प्रश्न 11)★★

छोटे देशों की दृष्टिभारत की दृष्टि
★“भारत का आकार बड़ा है और वह शक्तिशाली है। इसकी वजह से अपेक्षाकृत छोटे देशों का भारत के इरादों को लेकर शक करना लाजिमी है।”★“भारत सरकार को अक्सर महसूस होता है कि उसके पड़ोसी देश उसका बेज़ा फायदा उठा रहे हैं।”
★“छोटे देशों को लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा कायम करना चाहता है।”★“भारत नहीं चाहता कि इन देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो। उसे भय लगता है कि ऐसी स्थिति में बाहरी ताकतों को इस क्षेत्र में प्रभाव जमाने में मदद मिलेगी।”

★पर सारे झगड़े भारत-केंद्रित नहीं — नेपाल-भूटान (जातीय मूल के नेपालियों का भूटान आप्रवास) · बांग्लादेश-म्यांमार (रोहिंग्या आप्रवास) · बांग्लादेश-नेपाल (हिमालयी नदियों के जल की हिस्सेदारी)।

★★कारण भूगोल भी है: “दक्षिण एशिया का भूगोल भी है जहाँ भारत बीच में स्थित है और बाकी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं।”

9. शांति और सहयोग★★

9.1 दक्षेस (SAARC)

  • ★साउथ एशियन एसोशियन फॉर रिजनल कोऑपरेशन; शुरुआत 1985 में; पहला सम्मेलन ढाका में।
  • ★“बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम।”
  • ! “दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली है।”
  • 2007 में अफ़गानिस्तान सदस्य बना; नवंबर 2014 में 18वाँ सम्मेलन काठमांडू में।

9.2 साफ्टा (SAFTA) — तीन तिथियाँ★★

तिथिक्या
2002दक्षेस के सदस्य देशों ने SAFTA पर दस्तख़त किये
फरवरी 2004★12वें दक्षेस सम्मेलन में हस्ताक्षर
1 जनवरी 2006★समझौता प्रभावी हुआ
  • ★लक्ष्य — “इन देशों के बीच आपसी व्यापार में लगने वाले सीमा शुल्क को कम कर दिया जाए।”
  • ★★भावना — “यदि दक्षिण एशिया के सभी देश अपनी सीमारेखा के आर-पार मुक्त-व्यापार पर सहमत हो जाएँ तो इस क्षेत्र में शांति और सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।”

! तीन दृष्टिकोण:

कौनक्या मानता है
कुछ छोटे देश“‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है” और व्यावसायिक मौजूदगी के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है
भारत“‘साफ्टा’ से इस क्षेत्र के हर देश को फायदा होगा” और मुक्त व्यापार से राजनीतिक सहयोग बेहतर होगा
भारत में कुछ लोगपरेशान होने की ज़रूरत नहीं — भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय समझौता कर चुका है

9.3 भारत-पाकिस्तान शांति-प्रयास(प्रश्न 6)★

  • ★“दोनों देश युद्ध के जोखिम कम करने के लिए विश्वास बहाली के उपाय करने पर सहमत हो गये हैं।”
  • ★“सामाजिक कार्यकर्ता और महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुई हैं।”
  • नेता सम्मेलनों में भेंट करते हैं; ★“व्यापार बढ़ गया था और वीजा अधिक आसानी से दिए जाने लगे।”
  • ! “हालाँकि, हाल के दिनों में स्थिति बदल गई है।”

9.4 बाहरी शक्तियाँ(प्रश्न 8)★★

★“कोई भी क्षेत्र हवा में नहीं होता।”

शक्तिभूमिका
चीन“पिछले दस वर्षों में भारत और चीन के संबंध बेहतर हुए हैं”; ! “चीन की रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के साथ है और यह भारत-चीन संबंधों में एक बड़ी कठिनाई है”; 1991 के बाद से आर्थिक संबंध ज्यादा मज़बूत
अमरीका★“शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमरीकी प्रभाव तेजी से बढ़ा है”; भारत और पाकिस्तान दोनों से संबंध बेहतर; ★“वह भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है”; अमरीका में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की अच्छी-खासी संख्या; क्षेत्र की जनसंख्या और बाजार का आकार भारी भरकम

9.5 अध्याय का अंतिम वाक्य★★

★★“दक्षिण एशिया को संघर्षों की आशंका वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहेगा अथवा यह एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक हित एक हैं — यह बात किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।”

याद रखने योग्य आँकड़े★★

विवरणमान
दक्षिण एशिया के देशसात
भारत-पाकिस्तान का उदय / श्रीलंका की आज़ादी1947 / 1948
सिंधु-जल संधिसितंबर 1960, विश्व बैंक की मदद से
ताशकंद समझौता / छ: सूत्री प्रस्ताव1966
भारत-सोवियत मैत्री संधिअगस्त 1971 — 20 सालों के लिए
बांग्लादेश की मुक्तिदिसंबर 1971
शिमला-समझौताजुलाई 1972
भुट्टो की निर्वाचित सरकार1971–1977
जियाउल-हक ने सरकार गिरायी1977
लिट्टे का संघर्ष शुरू / खत्म1983 / 2009
दक्षेस की शुरुआत / पहला सम्मेलन1985 / ढाका
भारतीय शांति सेना1987–90; 1989 में वापस
मालदीव में भारतीय हस्तक्षेप1988
लोकतंत्र की बहाली — पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल1988–91
नेपाल का नया संविधान / इरशाद का इस्तीफा1990
बांग्लादेश में चुनाव1991
SAPTA1993, सातवाँ सम्मेलन (ढाका)
फरक्का संधिदिसंबर 1996
परमाणु परीक्षण — भारत / पाकिस्तानमई 1998 — पोखरण / चगाई पहाड़ी
भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार संधिदिसंबर 1998
लाहौर बस-यात्रा / करगिल-युद्धफरवरी 1999 / जून–जुलाई 1999
मुशर्रफ का तख़्तापलट / राष्ट्रपति बनना1999 / 2001
आगरा-बैठकजुलाई 2001 — असफल
SAFTA — दस्तख़त / हस्ताक्षर / प्रभावी2002 / फरवरी 2004 (12वाँ सम्मेलन) / 1 जनवरी 2006
मालदीव में बहुदलीय प्रणाली का मतदानजून 2005
नेपाल का दूसरा आंदोलनअप्रैल 2006
अफ़गानिस्तान दक्षेस का सदस्य2007
नेपाल गणराज्य / भूटान संवैधानिक राजतंत्र / पाकिस्तान में लोकतंत्रसभी 2008
18वाँ दक्षेस सम्मेलननवंबर 2014, काठमांडू
नेपाल का नया संविधान / परिक्षेत्रों का आदान-प्रदान2015
एमडीपी की जीत2018
सर्वेक्षण में नागरिक19 हजार से अधिक
लोकतंत्र उपयुक्त (%)दक्षिण एशिया 88 · बांग्लादेश 93 · श्रीलंका 92 · भारत 92 · पाकिस्तान 84 · नेपाल 79
‘लोकतंत्र बेहतर’ (%)श्रीलंका 71 · भारत 70 · बांग्लादेश 69 · नेपाल 62 · पाकिस्तान 37
HDI स्थानश्रीलंका 76 · भारत 130 · बांग्लादेश 136 · नेपाल 149 · पाकिस्तान 150

अंतिम क्षण के जालध्यान

  1. ★चीन दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता — भले ही वह क्षेत्र का प्रमुख देश है।
  2. ★नेपाल और भूटान — दोनों भूमि से घिरे हिमालयी देश। पर 2008 में नेपाल गणराज्य बना, भूटान संवैधानिक राजतंत्र। प्रश्न 1(ख) = नेपाल, प्रश्न 1(ज) = भूटान।
  3. ★मालदीव — 1968 में सल्तनत से गणतंत्र; जून 2005 में बहुदलीय प्रणाली। दो अलग तिथियाँ।
  4. ★★SAFTA की तीन तिथियाँ — 2002 दस्तख़त · फरवरी 2004 हस्ताक्षर · 1 जनवरी 2006 प्रभावी।
  5. SAPTA (1993) ≠ SAFTA (2004) — वरीयता बनाम मुक्त व्यापार।
  6. ★दक्षेस 1985 में शुरू; अफ़गानिस्तान 2007 में सदस्य बना।
  7. ★1948 के युद्ध से कश्मीर के दो हिस्से और नियंत्रण-सीमा रेखा बनी — 1965 या 1971 से नहीं।
  8. ★पोखरण = भारत; चगाई पहाड़ी = पाकिस्तान।
  9. ★1987 में शांति सेना भेजी गई; 1989 में “लक्ष्य हासिल किए बिना” वापस बुलायी गई।
  10. ★पाकिस्तान के चार सैनिक शासक क्रम में — अयूब खान · याहिया खान · जियाउल-हक · मुशर्रफ।
  11. शेख मुजीब 1971 के नायक थे, पर 1975 में उन्होंने ही एक-दलीय शासन बनाया और अगस्त 1975 में मारे गए।
  12. ★नेपाल के दो आंदोलन — 1990 (नया संविधान) और अप्रैल 2006 (संसद की बहाली)।
  13. ★श्रीलंका HDI में 76वें स्थान पर है — दक्षिण एशिया में सबसे ऊपर, गृहयुद्ध के बावजूद।
  14. ★पाकिस्तान में ‘लोकतंत्र बेहतर’ कहने वाले केवल 37% — पाँचों देशों में सबसे कम।
  15. सिंधु-जल संधि (1960) = भारत-पाकिस्तान, सिंधु; फरक्का संधि (1996) = भारत-बांग्लादेश, गंगा।

पाठ्यपुस्तक में मुद्रित उत्तर

इस अध्याय में कोई उत्तर-कुंजी और कोई सारांश खंड मुद्रित नहीं है। उत्तर 05-Question-Bank.md में — शिक्षक द्वारा तैयार।