अध्याय 8भारतीय राजनीति : नए बदलाव

पाठ योजना14 मिनटस्रोत जाँचे गए

कक्षा: 12 · विषय: राजनीति विज्ञान — स्वतंत्र भारत में राजनीति · पृष्ठ: 136–156 कुल कालांश: 5 (प्रत्येक 40 मिनट) ★★यह पूरी पुस्तक का अंतिम अध्याय है। अंतिम कालांश में केवल इस अध्याय का नहीं, पूरी पुस्तक का समापन कीजिए।

🎯 अधिगम-प्रतिफल

पाठ पूरा होने पर विद्यार्थी —

  1. ★1980 के दशक के अंत के पाँचों बड़े बदलाव क्रम से बता सकेगा;
  2. ★★‘गठबंधन का युग’ क्यों और कैसे शुरू हुआ — यह 1989 के अंकगणित से सिद्ध कर सकेगा;
  3. मंडल आयोग की पृष्ठभूमि, सिफ़ारिशें और परिणाम समझा सकेगा;
  4. अयोध्या-विवाद के विधिक समाधान को पाठ्यपुस्तक के शब्दों में प्रस्तुत कर सकेगा;
  5. ★★‘बढ़ती सहमति’ की चारों बातें उदाहरण सहित बता सकेगा;
  6. तीनों आरेखों के आँकड़े पढ़कर उनका अर्थ निकाल सकेगा।

पढ़ाने से पहले — तीन ज़रूरी बातेंध्यान

  1. यह पुराना अध्याय 9 है (QR: 12122CH09)। युक्तिकरण में पुराना अध्याय 7 (‘जन आंदोलनों का उदय’) हटा दिया गया, इसलिए यह 9 से 8 हो गया।
  2. ★★अयोध्या वाला खंड पूरी तरह पुनर्लिखित है और 9 नवम्बर 2019 के निर्णय तक जाता है। पुरानी गाइड यहाँ सक्रिय रूप से भ्रामक होंगी।
  3. पाठ स्वयं स्वीकार करता है कि वह उत्तर नहीं देता — “यह अध्याय इन सवालों के जवाब नहीं देता।” ★यह बात कक्षा को पहले दिन ही बताइए। इससे चर्चा का दरवाज़ा खुलता है।

कालांश 1 · 1990 का दशक — पाँच बड़े बदलाव

पृष्ठ 136–139

समयगतिविधि
8 मिनट★★आवरण-कार्टून से शुरू कीजिए। ‘INDIAN POLITY’ की ऊँची चरखी दिखाइए। पूछिए: “इन नौ चेहरों में से कितने पहचानते हैं?” फिर तख्तियाँ पढ़वाइए — MANDAL · RATH YATRA · V.P. HATAO — और लपटें: PRICES, RESERVATION। ★यह कार्टून पूरे अध्याय का नक़्शा है।
5 मिनट★चारों प्रश्न बोर्ड पर लिखवाइए — गठबंधन · मंडलीकरण · राम जन्मभूमि · सर्व-सहमति। और वह असाधारण वाक्य: “यह अध्याय इन सवालों के जवाब नहीं देता।” पूछिए: “तो फिर पढ़ें क्यों?” → उत्तर पाठ में ही है: “आज़ादी के बाद की भारतीय राजनीति के इतिहास को आखिर पढ़ने का मकसद ही यही है कि हम अपने वर्तमान को समझ सकें।”
10 मिनट★★पाँचों बदलाव क्रम से लिखवाइए। (1) 1989 में कांग्रेस की हार — 415 → 197; ‘कांग्रेस प्रणाली’ की समाप्ति। (2) ‘मंडल मुद्दे’ का उदय — 1990। (3) नयी आर्थिक नीति — शुरुआत राजीव गाँधी के समय, 1991 तक बड़े पैमाने पर। (4) अयोध्या विवाद। (5) मई 1991 — राजीव गाँधी की हत्या।
7 मिनट🖼️ दोनों अमूल कार्टून दिखाइए — “Cong-Less Government!” और “Caste no bar, Class no bar… Every Mandal’s Choice”। ★कार्टून पढ़ना सिखाइए — यह इस अध्याय का ज़रूरी कौशल है। फिर आर.के. लक्ष्मण का कार्टून: IMF · WB ORDERS · FOREIGN CAPITAL · NRI · LOAN; मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव।
6 मिनट★तीसरे बदलाव पर रुकिए। वह वाक्य लिखवाइए जो आगे पूरे अध्याय को बाँधता है: “इस अवधि में जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा।” पूछिए: “अलग-अलग विचारधारा की सरकारें, पर नीति एक — ऐसा क्यों?”
4 मिनट★★चौथे बदलाव का अद्यतन वाक्य लिखवाइए: “इन परिवर्तनों की परिणति सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ के निर्णय (जिसकी घोषणा 9 नवम्बर, 2019) के उपरांत अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण के रूप में हुई।” ! और साफ़ कह दीजिए कि पुरानी गाइड यहाँ ग़लत होंगी।

गृहकार्य: पृ. 141 का ‘करके देखें’ — माता-पिता से 1990 के बाद की घटनाओं के बारे में पूछिए और एक सूची बनाइए। ★यह अध्याय का सबसे अच्छा गृहकार्य है।

कालांश 2 · गठबंधन का युग

पृष्ठ 140–143

समयगतिविधि
8 मिनट★★1989 के अंकगणित से शुरू कीजिए। बोर्ड पर: “कांग्रेस हारी — पर किसी को बहुमत भी नहीं मिला। कांग्रेस अब भी सबसे बड़ी पार्टी थी, फिर भी उसने विपक्ष में बैठने का फ़ैसला किया।” पूछिए: “सबसे बड़ी पार्टी विपक्ष में क्यों बैठेगी?”
7 मिनट★‘बाहर से समर्थन’ की अवधारणा। राष्ट्रीय मोर्चा = जनता दल + क्षेत्रीय दल; समर्थन भाजपा + वाम मोर्चा — परस्पर विरुद्ध दो समूह; दोनों सरकार में शामिल नहीं हुए। 🖼️ सुधीर तैलंग का कार्टून दिखाइए — ज्योति बसु और आडवाणी दोनों सिरों पर, बीच में वी.पी. सिंह झूलते हुए।
6 मिनट★★1989 बनाम 1996 की सारणी बोर्ड पर बनवाइए — दोनों बार वाम मोर्चा था, पर एक बार साथ भाजपा और दूसरी बार कांग्रेस; उद्देश्य भी उलटा। फिर पाठ का वाक्य: “इससे पता चलता है कि राजनीतिक समीकरण किस कदर छुईमुई थे।”
5 मिनट🖼️ अजित नैनन का कार्टून — 1971 बनाम 1999; और वह पंक्ति: “चंद सालों पहले वह भी एक वक्त था जब राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से होती थी और उसका खात्मा भी कांग्रेस पर होता था…”
6 मिनट★★‘11 सरकारें’ वाला अनुच्छेद लिखवाइए और वह मुख्य वाक्य: “1989 के बाद से लोकसभा के चुनावों में कभी भी किसी एक पार्टी को 2014 तक पूर्ण बहुमत नहीं मिला।… यद्यपि, पुनः 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में भा.ज.पा. दल को अकेले बहुमत प्राप्त हुआ है।”
8 मिनट★★★‘केंद्रीय सरकार 1989 के बाद’ की पूरी सारणी कॉपी में उतरवाइए। दस पंक्तियाँ, तीन स्तंभ — अवधि · गठबंधन · प्रधानमंत्री। ! इसमें समय लगेगा, पर यह अध्याय का सबसे मूल्यवान पन्ना है।

गृहकार्य: प्रश्न 3 — 1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे क्या रहे हैं?

कालांश 3 · मंडल और दलित राजनीति

पृष्ठ 144–147

समयगतिविधि
5 मिनट★‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ की परिभाषा — यह एक प्रशासनिक कोटि है; अनुसूचित जाति/जनजाति से अलग; इसमें शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय। ! यह भेद ज़रूर स्पष्ट कीजिए — विद्यार्थी अक्सर SC/ST और OBC को मिला देते हैं।
10 मिनट★★मंडल आयोग का पूरा बॉक्स पढ़ाइए। क्रम से: दक्षिण में 1960 से आरक्षण, उत्तर में नहीं → 1977-79 जनता पार्टी → कर्पूरी ठाकुर की बिहार-नीति → 1978 में आयोग → ‘दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग’ → अध्यक्ष बी.पी. मंडल → 1980 में सिफ़ारिशें → 27 प्रतिशत आरक्षण। ★और वह बात जो सब भूल जाते हैं — “कई और समाधान सुझाए जिनमें भूमि-सुधार भी एक था।”
5 मिनट📦 बी.पी. मंडल का बॉक्स — 1967–70 और 1977–79 में सांसद; 1968 में डेढ़ माह तक बिहार के मुख्यमंत्री; 1977 में जनता पार्टी में शामिल।
6 मिनट★लागू होना और न्यायालय — अगस्त 1990; हिंसक विरोध; ‘इंदिरा साहनी केस’; नवंबर 1992 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सही ठहराया। 🖼️ समाचार-कतरनों का कोलाज दिखाइए। ★और वह अंतिम वाक्य: “अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के मसले पर देश के सभी बड़े राजनीतिक दलों में सहमति थी।”
8 मिनट★★दलित राजनीति — 1978 बामसेफ → दलित-शोषित समाज संघर्ष समिति → बहुजन समाज पार्टी। ‘बहुजन’ की परिभाषा लिखवाइए (SC + ST + OBC + अल्पसंख्यक)। 1989 और 1991 में UP में सफलता। ★और वह वाक्य: “आज़ाद भारत में यह पहला मौका था, जब कोई राजनीतिक दल मुख्यतया दलित मतदाताओं के समर्थन के बूते ऐसी राजनीतिक सफलता हासिल कर पाया था।”
6 मिनट📦 कांशीराम का बॉक्स — नौकरी से इस्तीफ़ा; बामसेफ → डीएस-4 → 1984 में बसपा; कुशाग्र रणनीतिकार; ★“आप राजनीतिक सत्ता को सामाजिक समानता का आधार मानते थे।” फिर दोनों गुब्बारे पढ़वाइए — “क्या सारे फ़ायदे कुछ ताकतवर जातियाँ और परिवार ही मुट्ठी में कर लेंगे?” ★यहीं ‘क्रीमी लेयर’ की बहस कक्षा में लाइए।

गृहकार्य: प्रश्न 2 का मिलान और प्रश्न 1 का कालक्रम।

कालांश 4 · सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और अयोध्या

पृष्ठ 148–150

! इस कालांश की तैयारी पूरी करके आइए। पाठ के शब्द ही बोलिए; अपनी राजनीतिक टिप्पणी न जोड़िए।

समयगतिविधि
6 मिनट★भाजपा का उदय — जनसंघ → जनता पार्टी में विलय → 1980 में भाजपा। विचारधारा: गांधीवादी समाजवाद + सांस्कृतिक राष्ट्रवाद; 1984 में कम सफलता; 1986 के बाद राष्ट्रवाद पर बल; हिन्दुत्व की राजनीति।
6 मिनट★★‘हिन्दुत्व’ की परिभाषा शब्दशः लिखवाइए — विनायक दामोदर सावरकर; ‘पितृभूमि’ और ‘पुण्यभूमि’; संगठित राष्ट्रीय संस्कृति का तर्क। ! यह एक परिभाषा है, समर्थन नहीं — इसे तटस्थ स्वर में पढ़ाइए।
8 मिनट★शाहबानो वाद — 62 वर्षीय तलाकशुदा महिला; गुजारा भत्ता; सर्वोच्च न्यायालय ने पक्ष में निर्णय; ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप का आरोप; मुस्लिम महिला (तलाक से जुड़े अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 ने निर्णय निरस्त किया। ★और वह ज़रूरी संतुलन-वाक्य: “सरकार के इस कार्य का अनेक महिला संगठनों, अनेक मुस्लिम समूहों तथा अधिकांश बुद्धिजीवियों ने विरोध किया।”
10 मिनट★★अयोध्या की समय-रेखा बोर्ड पर: 1528 (तीन-गुम्बद ढाँचा) → 28 नवंबर 1858 (निहंग सिखों वाला बॉक्स) → 1949 (ढाँचा सील) → 1986 (फैजाबाद जिला न्यायालय, ताला खुला) → शिलान्यास → 1992 (ध्वंस) → 9 नवम्बर 2019 (5–0 निर्णय)।
7 मिनट★★‘विधिक कार्यवाही से मैत्रीपूर्ण स्वीकृति’ — मुख्य वाक्य लिखवाइए: “एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक लोकतांत्रिक समाज में इन विवादों का हल सामान्यतः विधि की उचित प्रक्रिया से होता है।” फिर दोनों आदेश: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को विवादित स्थल; सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए उपयुक्त भूमि।
3 मिनट★सर्वोच्च न्यायालय का पहला अवतरण पढ़िए — “संविधान एक धर्म और दूसरे धर्म की आस्था और विश्वास के बीच अंतर नहीं करता है। सभी प्रकार के विश्वास, पूजा और प्रार्थना समान हैं।” पढ़ने के बाद एक क्षण मौन रहिए।

गृहकार्य: प्रश्न 5 — आपातकाल के बाद के दौर में भाजपा के विकास-क्रम का उल्लेख करें।

कालांश 5 · आँकड़े, बढ़ती सहमति और पुस्तक का समापन

पृष्ठ 150–156

समयगतिविधि
8 मिनट★★★आरेख 1 — सीटों की सारणी उतरवाइए। दस वर्ष, दो स्तंभ। फिर सिर्फ़ दो पंक्तियाँ घेरवाइए: 1984 — भाजपा 2, कांग्रेस 415 और 2019 — भाजपा 303, कांग्रेस 52। ★पूछिए: “पैंतीस साल में क्या हुआ?”
7 मिनट★★आरेख 2 — वोट-हिस्सा। कांग्रेस 48.1 → 19.5; भाजपा 7.4 → 37.4। और पाठ का प्रमुख निष्कर्ष: “1989 के चुनाव के बाद से, 1996, 2004 और 2009 को छोड़कर ज्यादातर समय दोनों पार्टियों को मिले वोटों का योग 50 फीसदी से ज्यादा रहा है।” ★1998 पर ध्यान दिलाइए — वहाँ दोनों रेखाएँ मिल जाती हैं।
7 मिनट★★‘बढ़ती सहमति’ की चारों बातें लिखवाइए — (1) नयी आर्थिक नीति पर सहमति (2) पिछड़ी जातियों के दावे की स्वीकृति (3) प्रांतीय दलों की भूमिका की स्वीकृति (4) विचारधारा की जगह कार्यसिद्धि पर ज़ोर। ★चौथी बात प्रश्न 4 का पूरा उत्तर है।
6 मिनट★2004 से 2019 का सफ़र: 2004 संप्रग → जुलाई 2008 वाम दलों का समर्थन वापस, फिर भी कार्यकाल पूरा → 2009 कांग्रेस 145 से 206 → सितंबर 2013 मोदी उम्मीदवार घोषित → 2014 में 282, “30 साल बाद पहला एकल बहुमत” → 2019 में 303। ★और वह वाक्य: “जब भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल रहा है तब भी गठबंधन की राजनीति की मान्यता अभी भी प्रासंगिक है।”
5 मिनट★17वीं लोकसभा का पाई-चार्ट और ‘सन् 2004 से संसद में दलीय स्थिति’ की सारणी में चार पंक्तियाँ दिखाइए — AIADMK (0→9→37→1) · वाम दल (53 → 5) · बसपा (19→21→0→10) · ‘अन्य’ (54→98)।
7 मिनट★★पुस्तक का समापन। समापन-अनुच्छेद पढ़िए — जन आंदोलन; गरीबी, विस्थापन, न्यूनतम मज़दूरी, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा; जाति, लिंग, वर्ग और क्षेत्र के संदर्भ में न्याय। फिर अंतिम वाक्य लिखवाइए: “हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी।” और अंत में चर्चा-बॉक्स का प्रश्न कक्षा में खोलिए: “उन कारकों पर चर्चा करें जिन्होंने भारत में लोकतंत्र को पनपने में सक्षम बनाया है।”

गृहकार्य / मूल्यांकन: प्रश्न 6, 7 और 8।

📌 कालांश-वार ‘कभी मत छोड़िए’ सूची

कालांशअनिवार्य
1★★पाँचों बदलाव · “इस अवधि में जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा” · 9 नवम्बर 2019 वाला वाक्य
2★★1989 का अंकगणित · 1989 बनाम 1996 की सारणी · ‘11 सरकारें’ · केंद्रीय सरकार की पूरी सारणी
3★★OBC की परिभाषा · कर्पूरी ठाकुर · 27 प्रतिशत · भूमि-सुधार वाली बात · इंदिरा साहनी · बामसेफ → बसपा · ‘बहुजन’
4★★हिन्दुत्व की परिभाषा · शाहबानो और 1986 का अधिनियम · अयोध्या की समय-रेखा · 5–0 निर्णय और दोनों आदेश
5★★तीनों आरेख · बढ़ती सहमति की चारों बातें · 282 और 303 · पुस्तक का अंतिम वाक्य

🎓 पूरी पुस्तक का समापन — पाँच मिनट का भाषण

★अंतिम कालांश की आख़िरी पाँच मिनट में यह कहिए:

“हमने यह पुस्तक शुरू की थी विभाजन और विलय से — जब यह तय भी नहीं था कि भारत नाम का देश टिकेगा या नहीं। बीच में हमने देखा एक दल का प्रभुत्व, फिर उसका टूटना, फिर आपातकाल, फिर क्षेत्रीय आकांक्षाएँ। और आज हम यहाँ पहुँचे हैं — जहाँ प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं तेज़ है, पर बुनियादी बातों पर सहमति भी है।

पाठ्यपुस्तक का अंतिम वाक्य याद रखिए — ‘हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी।’ यह भविष्यवाणी नहीं है। यह एक ज़िम्मेदारी है — और वह ज़िम्मेदारी अब आपकी है।”