कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · मध्य स्तर (कक्षा 6–8)
PARAKH — Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development — NCERT की एक स्वतंत्र संघटक इकाई है, जो 8 फरवरी 2023 की अधिसूचना से स्थापित हुई। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 4.4.1 के अंतर्गत विद्यार्थी-मूल्यांकन के मानक और दिशानिर्देश तय करती है।
इस प्रश्न बैंक की अलग बात क्या है
05-Question-Bank.md याद रखने की जाँच करता है — नाम, अर्थ, तिथियाँ। वह बोर्ड-शैली का है
और आवश्यक है।
यह फ़ाइल वह नहीं करती। यहाँ हर प्रश्न विद्यार्थी को एक नई स्थिति देता है और पूछता है कि अध्याय की समझ को वहाँ लगाकर दिखाओ।
| यहाँ नहीं मिलेगा | यहाँ मिलेगा |
|---|---|
| “‘सप्त सैंधव’ का अर्थ लिखिए।” | एक बातचीत देकर — “इनमें से कौन सही कह रहा है और क्यों?” |
| “शब्द-शृंखला लिखिए।” | एक नया शब्द देकर — “यह किस शृंखला से जुड़ता है?” |
| “विष्णु पुराण की परिभाषा लिखिए।” | दो पाठ देकर — “इनमें क्या समान है, और यह क्यों चौंकाने वाला है?” |
मूल्यांकन का नियम: जिस प्रश्न का उत्तर पुस्तक की किसी एक पंक्ति से सीधे उठाया जा सके, वह योग्यता-आधारित प्रश्न नहीं है।
जाँची जा रही योग्यताएँ
| कोड | योग्यता |
|---|---|
| यो-1 | व्युत्पत्ति की समझ — किसी नाम को सही शृंखला से जोड़ना और कारण बताना |
| यो-2 | स्रोत का उपयोग — यह पहचानना कि कौन-सा स्रोत क्या बता सकता है और क्या नहीं |
| यो-3 | साक्ष्यों की तुलना — अलग-अलग स्रोतों में समानता खोजना और उसका अर्थ निकालना |
| यो-4 | भ्रांति सुधारना — प्रचलित गलत धारणा को पाठ के आधार पर ठीक करना |
| यो-5 | भाषा-परिवर्तन की समझ — यह समझना कि शब्द भाषाओं में यात्रा करते हुए क्यों बदलते हैं |
खंड क — प्रकरण-आधारित प्रश्न
प्रकरण 1 — बस में हुई बहस
यो-1 · यो-4 · कुल 8 अंक
स्कूल-यात्रा की बस में तीन दोस्त बहस कर रहे हैं —
आरव: “इंडिया नाम अंग्रेज़ों ने दिया था। आज़ादी के बाद हमें उसे हटा देना चाहिए था।”
मीरा: “नहीं, इंडिया ही असली है — संविधान में वही लिखा है। ‘भारत’ तो बस पुराना नाम है।”
कबीर: “मुझे लगता है दोनों नाम पुराने हैं, पर मुझे कारण नहीं पता।”
1.1आरव की बात में क्या गलती है? अध्याय के आधार पर बताइए कि ‘इंडिया’ नाम वास्तव में
कहाँ से आया। 3 अंक
उत्तर देखिए
आरव गलत है। ‘इंडिया’ नाम अंग्रेज़ों का दिया हुआ नहीं है। वह ‘सिंधु’ नदी से आया: फारसियों ने ‘हिंदु’, फिर यूनानियों ने ‘इंडोई’/‘इंडिके’, और वहीं से ‘इंडिया’। यह अंग्रेज़ों से बहुत पहले का है।
1.2मीरा की बात में क्या गलती है? संविधान वास्तव में क्या कहता है? 2 अंक
उत्तर देखिए
मीरा भी गलत है। संविधान किसी एक नाम को असली नहीं कहता — उसकी पहली पंक्ति है “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा”, अर्थात दोनों नाम साथ हैं।
1.3कबीर सही दिशा में है — उसकी बात को पूरा कीजिए। दोनों नाम कैसे बने? 2 अंक
उत्तर देखिए
‘भारत’ भीतर से आया — ‘भरत’ नामक वैदिक जन-समूह से (भरत → भारतवर्ष → भारत)। ‘इंडिया’ बाहर से आया — ‘सिंधु’ नदी से (सिंधु → हिंदु → इंडोई → इंडिया)।
1.4आरव को एक वाक्य में समझाइए कि ‘इंडिया’ नाम भी इसी ज़मीन से जुड़ा है। 1 अंक
उत्तर देखिए
कोई भी ऐसा वाक्य जो यह कहे कि ‘इंडिया’ की जड़ ‘सिंधु’ है, जो भारत की ही नदी है — अर्थात वह नाम भी इसी भूमि से निकला, बस दूसरी भाषाओं से घूमकर आया।
प्रकरण 2 — दो पाठ, एक ही बात
यो-3 · कुल 8 अंक
एक शिक्षिका बोर्ड पर दो पंक्तियाँ लिखती हैं और नीचे कुछ नहीं बतातीं —
पंक्ति A: “वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।”
पंक्ति B: “दक्षिण में केप कुमारी से उत्तर में महान पर्वत तक, पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर तक।”
फिर वे पूछती हैं: “इन दोनों में क्या समान है, और इससे आपको क्या अजीब लगता है?”
2.1दोनों पंक्तियाँ किन-किन स्रोतों से हैं? 2 अंक
उत्तर देखिए
पंक्ति A — विष्णु पुराण; पंक्ति B — 2000 वर्ष पूर्व की एक तमिल कविता।
2.2दोनों में क्या समान है? 2 अंक
उत्तर देखिए
दोनों भारत की एक ही सीमाएँ बताते हैं — उत्तर में पर्वत और दक्षिण तथा दोनों ओर समुद्र/महासागर।
2.3★यह क्यों चौंकाने वाला है? (संकेत: सोचिए कि ये दोनों किन भाषाओं में और देश के किन भागों से हैं।) 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि दोनों अलग-अलग भाषाओं (संस्कृत और तमिल) और देश के अलग-अलग भागों (उत्तर और दक्षिण) से हैं, और फिर भी एक ही परिभाषा देते हैं — जबकि उस समय न कोई साझा नक़्शा था, न कोई साझी सरकार। (2 अंक: केवल “दोनों अलग भाषाओं में हैं” कहने पर।)
2.4पुस्तक इससे क्या निष्कर्ष निकालती है? 1 अंक
उत्तर देखिए
“प्रतीत होता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे।”
प्रकरण 3 — एक नया शब्द
यो-1 · यो-5 · कुल 7 अंक
मान लीजिए किसी पुरानी पुस्तक में आपको इस देश के लिए चार नाम मिलते हैं, और उनके साथ यह नहीं लिखा कि वे किस भाषा से हैं —
(क) हिंदुस्तान · (ख) भारतवर्ष · (ग) इंडिके · (घ) जम्बूद्वीप
3.1इन चारों को दो समूहों में बाँटिए — भीतर से आए नाम और बाहर से आए नाम। 2 अंक
उत्तर देखिए
भीतर से: (ख) भारतवर्ष और (घ) जम्बूद्वीप। बाहर से: (क) हिंदुस्तान और (ग) इंडिके। (प्रत्येक सही समूह पर 1 अंक।)
3.2बाहर से आए नामों की साझी जड़ क्या है? 1 अंक
उत्तर देखिए
‘सिंधु’ नदी।
3.3भीतर से आए दोनों नाम किन-किन चीज़ों से बने हैं? 2 अंक
उत्तर देखिए
भारतवर्ष — ‘भरत’ नामक वैदिक जन-समूह से (लोगों से)। जम्बूद्वीप — जामुन वृक्ष से (एक पेड़ से)।
3.4★अब मान लीजिए आपको एक पाँचवाँ नाम मिलता है — ‘सिंध’। आपके अनुसार वह किस समूह
से जुड़ेगा, और क्यों? 2 अंक
उत्तर देखिए
बाहर वाले समूह से (अथवा ‘सिंधु’ वाली शृंखला से) — क्योंकि ‘सिंध’ स्पष्ट रूप से ‘सिंधु’ से बना है, और वही जड़ ‘हिंदु’, ‘हिंदुस्तान’ और ‘इंडिया’ की भी है।
! यह प्रश्न कठिन है और जान-बूझकर है — यह जाँचता है कि विद्यार्थी शृंखला को नियम की तरह लगा पाता है या नहीं, केवल रटे हुए उदाहरणों पर टिका है।
प्रकरण 4 — ‘ह’ कहाँ गया
यो-5 · कुल 6 अंक
रिया ने बोर्ड पर लिखी शृंखला देखी — सिंधु → हिंदु → इंडोई — और चिढ़कर बोली:
“यूनानियों ने हमारा नाम बिगाड़ दिया! पहले फारसियों ने ‘स’ को ‘ह’ कर दिया, फिर यूनानियों ने ‘ह’ ही उड़ा दिया। किसी ने ठीक से बोला ही नहीं।”
4.1यूनानियों ने ‘ह’ क्यों हटाया? पुस्तक का कारण लिखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि ‘ह’ अक्षर यूनानी भाषा में था ही नहीं।
4.2★क्या रिया सही कह रही है कि “किसी ने ठीक से बोला ही नहीं”? कारण सहित अपना पक्ष
लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि यह बिगाड़ नहीं, भाषा का सामान्य व्यवहार है — हर भाषा दूसरी भाषा के शब्द को अपने ढाँचे में ढाल लेती है, क्योंकि हर भाषा में सब ध्वनियाँ नहीं होतीं। (यदि विद्यार्थी रिया से सहमत हो पर तर्क दे, तो 2 अंक।)
4.3क्या आप कोई ऐसा अंग्रेज़ी शब्द सोच सकते हैं जिसे हम हिंदी में थोड़ा बदलकर बोलते हैं?
एक उदाहरण दीजिए। 1 अंक
उत्तर देखिए
कोई भी उपयुक्त उदाहरण। किसी भी तर्कसंगत उत्तर पर पूरा अंक — यहाँ विद्यार्थी की अपनी भाषा-चेतना जाँची जा रही है, कोई सूची नहीं।
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए हैं। सही विकल्प चुनिए — (क) दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या है। · (ख) दोनों सही, पर R व्याख्या नहीं है। (ग) A सही, R गलत। · (घ) A गलत, R सही।
1A: ‘सप्त सैंधव’ संपूर्ण भारत का नाम नहीं था।
R: ऋग्वेद में यह नाम उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए प्रयुक्त हुआ है। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और R ही A का कारण है
2A: यूनानियों ने भारत को ‘इंडोई’ कहा।
R: यूनानी भारत आकर यहाँ के लोगों से यह नाम सीखे थे। 1 अंक
उत्तर देखिए
(ग) — A सही; R गलत — उन्होंने यह नाम फारसी स्रोतों से लिया, सीधे भारत से नहीं
3A: अशोक का शिलालेख महाभारत से अधिक निश्चित तिथि देता है।
R: शिलालेख एक निश्चित समय पर खुदते हैं, जबकि ग्रंथ सदियों में लिखे जाते रहे। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और यही अंतर का कारण है
4A: प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ शब्द का धर्म से संबंध नहीं था।
R: वह पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द था, जो सिंधु के क्षेत्र को दर्शाता था। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है
5A: ‘भारत’ और ‘इंडिया’ — दोनों नाम भारत की भूमि से जुड़े हैं।
R: दोनों नाम एक ही जन-समूह से बने हैं। 1 अंक
उत्तर देखिए
(ग) — A सही; R गलत — ‘भारत’ जन-समूह से और ‘इंडिया’ नदी से बना; दोनों की जड़ अलग है
6A: महाभारत में सूचीबद्ध क्षेत्रों का विस्तार संपूर्ण उपमहाद्वीप में मिलता है।
R: उनमें कश्मीर से लेकर केरल तक के क्षेत्र सम्मिलित हैं। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और यही विस्तार का प्रमाण है
खंड ग — स्रोत एवं मानचित्र व्याख्या
1★नीचे चार स्रोत दिए हैं। बताइए कि कौन-सा स्रोत क्या बता सकता है, और क्या नहीं। 4 अंक
| स्रोत | यह क्या बता सकता है | यह क्या नहीं बता सकता |
|---|---|---|
| अशोक का शिलालेख | ||
| महाभारत |
(दोनों पंक्तियाँ भरिए — प्रत्येक 2 अंक।)
उत्तर देखिए
प्रत्येक पंक्ति 2 अंक।
| स्रोत | बता सकता है | नहीं बता सकता |
|---|---|---|
| अशोक का शिलालेख | निश्चित तिथि (लगभग 250 सा.सं.पू.); उस समय ‘जम्बूद्वीप’ किस विस्तार के लिए प्रयुक्त होता था | उससे पहले क्या नाम चलते थे, या आम लोग क्या कहते थे |
| महाभारत | कौन-कौन से क्षेत्र जाने जाते थे; ‘भारतवर्ष’ और ‘जम्बूद्वीप’ नामों का प्रयोग | निश्चित तिथि — क्योंकि यह सदियों में लिखा जाता रहा |
पूरे अंक तब जब दोनों स्तंभ भरे जाएँ। केवल “बता सकता है” भरने पर आधे अंक।
2चित्र 5.2 के मानचित्र को देखकर बताइए 3 अंक
2.1 भारतीय उपमहाद्वीप की चार प्राकृतिक सीमाएँ कौन-सी हैं? (2) 2.2 विष्णु पुराण की परिभाषा “समुद्र के उत्तर, हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण” — क्या यह मानचित्र से मेल खाती है? (1)
उत्तर देखिए
- 2.1 (2) — उत्तर में हिमालय और हिंदुकुश, पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिंद महासागर।
- 2.2 (1) — हाँ — मानचित्र पर उत्तर में हिमालय (हिमाच्छादित पर्वत) और शेष तीन ओर समुद्र/महासागर दिखते हैं।
3★चित्र 5.4 के नीचे पुस्तक ने लिखा है: “आपको इन क्षेत्रों को याद रखने की आवश्यकता नहीं है, परंतु आप ध्यान दें कि इनका विस्तार उपमहाद्वीप के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में मिलता है।” 3 अंक
3.1 पुस्तक इन नामों को याद क्यों नहीं करवाना चाहती? (1) 3.2 तो फिर वह मानचित्र किसलिए दिया गया है? (2)
उत्तर देखिए
- 3.1 (1) — क्योंकि उद्देश्य नाम याद कराना नहीं है; यह एक बहुत लंबी सूची है और उससे कोई समझ नहीं बनती।
- 3.2 (2) — यह दिखाने के लिए कि इन क्षेत्रों का विस्तार उपमहाद्वीप के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में मिलता है — अर्थात महाभारत का ‘भारतवर्ष’ पूरा उपमहाद्वीप था, कोई छोटा-सा हिस्सा नहीं।
खंड घ — मुक्त-उत्तर एवं अनुप्रयोग
1★एक विद्यार्थी लिखता है: “ऋग्वेद में भरत नाम के एक महान राजा का उल्लेख है, जिनके नाम
पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा।”
इस वाक्य में क्या गलत है और क्या सही? इसे ठीक करके दोबारा लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
क्या सही है ‘भरत’ नाम ऋग्वेद में है, और उसी से ‘भारत’ बना — यह भाग सही है। क्या गलत है: ऋग्वेद में ‘भरत’ एक राजा नहीं, लोगों का एक प्रमुख वैदिक समूह है; राजा वाला अर्थ बाद के साहित्य में आया।
सुधरा हुआ वाक्य“ऋग्वेद में ‘भरत’ नामक एक प्रमुख वैदिक जन-समूह का उल्लेख है, और उसी से ‘भारतवर्ष’ अर्थात ‘भरत’ का देश — और आगे चलकर ‘भारत’ — नाम बना। बाद के साहित्य में ‘भरत’ नाम विभिन्न महाराजाओं के लिए भी प्रयुक्त हुआ।”
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | गलती पहचानी और सुधरा वाक्य लिखा और यह जोड़ा कि राजा वाला अर्थ बाद में आया |
| 2–3 | गलती पहचानी, पर सुधार अधूरा |
| 1 | केवल “गलत है” लिखा, कारण नहीं |
2पुस्तक कहती है कि चीनी शब्द ‘तियन्जू’ को ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ भी समझा जा सकता है।
इससे उस समय के चीन और भारत के संबंध के बारे में क्या पता चलता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर यह कहता है कि चीनियों के मन में भारत के प्रति गहरा सम्मान था, क्योंकि वे उसे बुद्ध की भूमि मानते थे — और उन्होंने यह आदर देश के नाम में ही पिरो दिया। (जुआनज़ैंग की 17 वर्ष की यात्रा को उदाहरण के रूप में जोड़ने पर अतिरिक्त मान्यता।)
3★“अगर ‘इंडिया’ नाम विदेशियों का दिया हुआ है, तो हमें उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”
— किसी ने यह कहा। अध्याय के आधार पर अपना पक्ष लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि ‘इंडिया’ विदेशियों का गढ़ा हुआ नाम नहीं है — उसकी जड़ ‘सिंधु’ है, जो भारत की ही नदी है; और संविधान ने दोनों नाम जान-बूझकर साथ रखे हैं।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | ‘सिंधु’ वाली जड़ और संविधान — दोनों तर्क |
| 2–3 | एक तर्क, दूसरा नहीं |
| 1 | पक्ष है पर कोई कारण नहीं |
4आपके गाँव/मोहल्ले/शहर का नाम क्या है? क्या आप जानते हैं कि वह नाम कहाँ से आया?
यदि नहीं, तो आप उसका पता कैसे लगाएँगे — किन स्रोतों से? 4 अंक
उत्तर देखिए
इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | नाम बताया और कम से कम दो अलग प्रकार के स्रोत सुझाए — जैसे बुज़ुर्गों से पूछना (मौखिक), पुराने काग़ज़/रजिस्टर (लिखित), कोई पुराना मंदिर, कुआँ या शिलालेख (पुरातात्विक) |
| 2–3 | एक ही प्रकार का स्रोत सुझाया |
| 1 | केवल नाम बताया |
यह प्रश्न अध्याय 4 को अध्याय 5 से जोड़ता है — वही स्रोत-श्रेणियाँ, अब बच्चे के अपने
मोहल्ले पर।
5पुस्तक अध्याय भर में किसी फारसी सम्राट का नाम, किसी तमिल कविता का नाम, या ऋग्वेद की तिथि नहीं देती। आपके अनुसार ऐसा क्यों है? 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि पुस्तक जान-बूझकर चुप है, क्योंकि वे बातें निश्चित नहीं हैं — पुस्तक स्वयं कहती है कि “प्राचीन भारतीय ग्रंथों की तिथि निर्धारित करना कठिन है।” जहाँ पक्का पता न हो, वहाँ नाम या तिथि देना गलत होगा।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 3 | “अनिश्चित है इसलिए नहीं दिया” और यह कि यह ईमानदारी है, कमी नहीं |
| 2 | विचार सही, पर अधूरा |
| 1 | कोई और तर्कसंगत कारण |
★यह प्रश्न पूरे प्रश्न-बैंक का सबसे मूल्यवान है। वह जाँचता है कि विद्यार्थी ने अध्याय 4
का सबसे बड़ा पाठ पकड़ा या नहीं — कि “नहीं पता” कहना एक वैध उत्तर है।
उत्तर एवं अंकन योजना
सामान्य नियम: इन प्रश्नों में कारण पर अंक हैं। जहाँ विद्यार्थी का उत्तर पुस्तक से भिन्न शब्दों में हो पर तर्क सही हो, पूरे अंक दीजिए।
खंड क
प्रकरण 1 (8)
- 1.1 (3) — आरव गलत है। ‘इंडिया’ नाम अंग्रेज़ों का दिया हुआ नहीं है। वह ‘सिंधु’ नदी से आया: फारसियों ने ‘हिंदु’, फिर यूनानियों ने ‘इंडोई’/‘इंडिके’, और वहीं से ‘इंडिया’। यह अंग्रेज़ों से बहुत पहले का है।
- 1.2 (2) — मीरा भी गलत है। संविधान किसी एक नाम को असली नहीं कहता — उसकी पहली पंक्ति है “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा”, अर्थात दोनों नाम साथ हैं।
- 1.3 (2) — ‘भारत’ भीतर से आया — ‘भरत’ नामक वैदिक जन-समूह से (भरत → भारतवर्ष → भारत)। ‘इंडिया’ बाहर से आया — ‘सिंधु’ नदी से (सिंधु → हिंदु → इंडोई → इंडिया)।
- 1.4 (1) — कोई भी ऐसा वाक्य जो यह कहे कि ‘इंडिया’ की जड़ ‘सिंधु’ है, जो भारत की ही नदी है — अर्थात वह नाम भी इसी भूमि से निकला, बस दूसरी भाषाओं से घूमकर आया।
प्रकरण 2 (8)
- 2.1 (2) — पंक्ति A — विष्णु पुराण; पंक्ति B — 2000 वर्ष पूर्व की एक तमिल कविता।
- 2.2 (2) — दोनों भारत की एक ही सीमाएँ बताते हैं — उत्तर में पर्वत और दक्षिण तथा दोनों ओर समुद्र/महासागर।
- 2.3 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि दोनों अलग-अलग भाषाओं (संस्कृत और तमिल) और देश के अलग-अलग भागों (उत्तर और दक्षिण) से हैं, और फिर भी एक ही परिभाषा देते हैं — जबकि उस समय न कोई साझा नक़्शा था, न कोई साझी सरकार। (2 अंक: केवल “दोनों अलग भाषाओं में हैं” कहने पर।)
- 2.4 (1) — “प्रतीत होता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे।”
प्रकरण 3 (7)
- 3.1 (2) — भीतर से: (ख) भारतवर्ष और (घ) जम्बूद्वीप। बाहर से: (क) हिंदुस्तान और (ग) इंडिके। (प्रत्येक सही समूह पर 1 अंक।)
- 3.2 (1) — ‘सिंधु’ नदी।
- 3.3 (2) — भारतवर्ष — ‘भरत’ नामक वैदिक जन-समूह से (लोगों से)। जम्बूद्वीप — जामुन वृक्ष से (एक पेड़ से)।
- 3.4 (2) — बाहर वाले समूह से (अथवा ‘सिंधु’ वाली शृंखला से) — क्योंकि ‘सिंध’
स्पष्ट रूप से ‘सिंधु’ से बना है, और वही जड़ ‘हिंदु’, ‘हिंदुस्तान’ और ‘इंडिया’ की भी है।
! यह प्रश्न कठिन है और जान-बूझकर है — यह जाँचता है कि विद्यार्थी शृंखला को नियम की तरह लगा पाता है या नहीं, केवल रटे हुए उदाहरणों पर टिका है।
प्रकरण 4 (6)
- 4.1 (2) — क्योंकि ‘ह’ अक्षर यूनानी भाषा में था ही नहीं।
- 4.2 (3) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि यह बिगाड़ नहीं, भाषा का सामान्य व्यवहार है — हर भाषा दूसरी भाषा के शब्द को अपने ढाँचे में ढाल लेती है, क्योंकि हर भाषा में सब ध्वनियाँ नहीं होतीं। (यदि विद्यार्थी रिया से सहमत हो पर तर्क दे, तो 2 अंक।)
- 4.3 (1) — कोई भी उपयुक्त उदाहरण। किसी भी तर्कसंगत उत्तर पर पूरा अंक — यहाँ विद्यार्थी की अपनी भाषा-चेतना जाँची जा रही है, कोई सूची नहीं।
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
| # | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 1 | (क) | दोनों सही, और R ही A का कारण है |
| 2 | (ग) | A सही; R गलत — उन्होंने यह नाम फारसी स्रोतों से लिया, सीधे भारत से नहीं |
| 3 | (क) | दोनों सही, और यही अंतर का कारण है |
| 4 | (क) | दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है |
| 5 | (ग) | A सही; R गलत — ‘भारत’ जन-समूह से और ‘इंडिया’ नदी से बना; दोनों की जड़ अलग है |
| 6 | (क) | दोनों सही, और यही विस्तार का प्रमाण है |
खंड ग
1 (4) — प्रत्येक पंक्ति 2 अंक।
| स्रोत | बता सकता है | नहीं बता सकता |
|---|---|---|
| अशोक का शिलालेख | निश्चित तिथि (लगभग 250 सा.सं.पू.); उस समय ‘जम्बूद्वीप’ किस विस्तार के लिए प्रयुक्त होता था | उससे पहले क्या नाम चलते थे, या आम लोग क्या कहते थे |
| महाभारत | कौन-कौन से क्षेत्र जाने जाते थे; ‘भारतवर्ष’ और ‘जम्बूद्वीप’ नामों का प्रयोग | निश्चित तिथि — क्योंकि यह सदियों में लिखा जाता रहा |
पूरे अंक तब जब दोनों स्तंभ भरे जाएँ। केवल “बता सकता है” भरने पर आधे अंक।
2 (3)
- 2.1 (2) — उत्तर में हिमालय और हिंदुकुश, पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिंद महासागर।
- 2.2 (1) — हाँ — मानचित्र पर उत्तर में हिमालय (हिमाच्छादित पर्वत) और शेष तीन ओर समुद्र/महासागर दिखते हैं।
3 (3)
- 3.1 (1) — क्योंकि उद्देश्य नाम याद कराना नहीं है; यह एक बहुत लंबी सूची है और उससे कोई समझ नहीं बनती।
- 3.2 (2) — यह दिखाने के लिए कि इन क्षेत्रों का विस्तार उपमहाद्वीप के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में मिलता है — अर्थात महाभारत का ‘भारतवर्ष’ पूरा उपमहाद्वीप था, कोई छोटा-सा हिस्सा नहीं।
खंड घ — रूब्रिक
1 (4) — क्या सही है: ‘भरत’ नाम ऋग्वेद में है, और उसी से ‘भारत’ बना — यह भाग सही है। क्या गलत है: ऋग्वेद में ‘भरत’ एक राजा नहीं, लोगों का एक प्रमुख वैदिक समूह है; राजा वाला अर्थ बाद के साहित्य में आया।
सुधरा हुआ वाक्य: “ऋग्वेद में ‘भरत’ नामक एक प्रमुख वैदिक जन-समूह का उल्लेख है, और उसी से ‘भारतवर्ष’ अर्थात ‘भरत’ का देश — और आगे चलकर ‘भारत’ — नाम बना। बाद के साहित्य में ‘भरत’ नाम विभिन्न महाराजाओं के लिए भी प्रयुक्त हुआ।”
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | गलती पहचानी और सुधरा वाक्य लिखा और यह जोड़ा कि राजा वाला अर्थ बाद में आया |
| 2–3 | गलती पहचानी, पर सुधार अधूरा |
| 1 | केवल “गलत है” लिखा, कारण नहीं |
2 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह कहता है कि चीनियों के मन में भारत के प्रति गहरा सम्मान था, क्योंकि वे उसे बुद्ध की भूमि मानते थे — और उन्होंने यह आदर देश के नाम में ही पिरो दिया। (जुआनज़ैंग की 17 वर्ष की यात्रा को उदाहरण के रूप में जोड़ने पर अतिरिक्त मान्यता।)
3 (4) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि ‘इंडिया’ विदेशियों का गढ़ा हुआ नाम नहीं है — उसकी जड़ ‘सिंधु’ है, जो भारत की ही नदी है; और संविधान ने दोनों नाम जान-बूझकर साथ रखे हैं।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | ‘सिंधु’ वाली जड़ और संविधान — दोनों तर्क |
| 2–3 | एक तर्क, दूसरा नहीं |
| 1 | पक्ष है पर कोई कारण नहीं |
4 (4) — इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | नाम बताया और कम से कम दो अलग प्रकार के स्रोत सुझाए — जैसे बुज़ुर्गों से पूछना (मौखिक), पुराने काग़ज़/रजिस्टर (लिखित), कोई पुराना मंदिर, कुआँ या शिलालेख (पुरातात्विक) |
| 2–3 | एक ही प्रकार का स्रोत सुझाया |
| 1 | केवल नाम बताया |
यह प्रश्न अध्याय 4 को अध्याय 5 से जोड़ता है — वही स्रोत-श्रेणियाँ, अब बच्चे के अपने मोहल्ले पर।
5 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि पुस्तक जान-बूझकर चुप है, क्योंकि वे बातें निश्चित नहीं हैं — पुस्तक स्वयं कहती है कि “प्राचीन भारतीय ग्रंथों की तिथि निर्धारित करना कठिन है।” जहाँ पक्का पता न हो, वहाँ नाम या तिथि देना गलत होगा।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 3 | “अनिश्चित है इसलिए नहीं दिया” और यह कि यह ईमानदारी है, कमी नहीं |
| 2 | विचार सही, पर अधूरा |
| 1 | कोई और तर्कसंगत कारण |
★यह प्रश्न पूरे प्रश्न-बैंक का सबसे मूल्यवान है। वह जाँचता है कि विद्यार्थी ने अध्याय 4 का सबसे बड़ा पाठ पकड़ा या नहीं — कि “नहीं पता” कहना एक वैध उत्तर है।
योग्यता-वार आवरण
| योग्यता | कहाँ जाँची गई | कुल अंक |
|---|---|---|
| यो-1 — व्युत्पत्ति की समझ | प्रकरण 1, प्रकरण 3, खंड ख (5) | 12 |
| यो-2 — स्रोत का उपयोग | खंड ख (3), खंड ग (1, 3), खंड घ (4, 5) | 15 |
| यो-3 — साक्ष्यों की तुलना | प्रकरण 2, खंड ग (2), खंड ख (6) | 12 |
| यो-4 — भ्रांति सुधारना | प्रकरण 1 (1.1, 1.2), खंड ख (2, 4), खंड घ (1, 3) | 15 |
| यो-5 — भाषा-परिवर्तन | प्रकरण 3 (3.4), प्रकरण 4, खंड घ (2) | 12 |
| कुल | 59 |
एक 40 अंक का पेपर बनाना हो तो: प्रकरण 1 और 2 (16) + खंड ख के चार प्रश्न (4) + खंड ग का प्रश्न 1 और 3 (7) + खंड घ का प्रश्न 1 और 5 (7) + प्रकरण 4 में से 4.1 और 4.2 (5)
- खंड घ का प्रश्न 2 (3) = 42 अंक, जिसे 40 पर समायोजित कर लीजिए।
शिक्षक हेतु दो चेतावनियाँ
1. प्रकरण 1 को पहला प्रश्न रखिए, और उसे गंभीरता से लीजिए। आरव और मीरा की बातें काल्पनिक नहीं हैं — ये ठीक वही दो बातें हैं जो बच्चे कक्षा के बाहर सुनते हैं। इस प्रश्न का उद्देश्य केवल अंक देना नहीं, एक भ्रांति ठीक करना है। जो बच्चा 1.4 में ‘सिंधु’ वाली बात लिख देता है, उसने अध्याय का असली काम कर लिया।
2. खंड घ के प्रश्न 3 और 5 पर ‘सही उत्तर’ मत ढूँढ़िए। इनमें कोई एक सही उत्तर नहीं है — ये जाँचते हैं कि बच्चा तर्क के साथ पक्ष रख पाता है या नहीं, और यह भी कि वह अनिश्चितता को स्वीकार कर पाता है या नहीं। जो बच्चा प्रश्न 5 में लिखता है “लेखक को पता नहीं होगा, इसलिए नहीं लिखा” — उसने ठीक ही सोचा है, भले शब्द सरल हों।
और याद रखिए: यह फ़ाइल
05-Question-Bank.mdके अतिरिक्त है, उसके स्थान पर नहीं। परीक्षा अभी भी पाठ्यपुस्तक से बनती है।