अध्याय 7भारत की सांस्कृतिक जड़ें

परख प्रश्न23 मिनटस्रोत जाँचे गए

NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 7, पृ. 105–124।

कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · मध्य स्तर (कक्षा 6–8)

PARAKH — Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development — NCERT की एक स्वतंत्र संघटक इकाई है, जो 8 फरवरी 2023 की अधिसूचना से स्थापित हुई। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 4.4.1 के अंतर्गत विद्यार्थी-मूल्यांकन के मानक और दिशानिर्देश तय करती है।

इस प्रश्न बैंक की अलग बात क्या है

05-Question-Bank.md याद रखने की जाँच करता है — नाम, अर्थ, तिथियाँ। वह बोर्ड-शैली का है और आवश्यक है।

यह फ़ाइल वह नहीं करती। यहाँ हर प्रश्न विद्यार्थी को एक नई स्थिति देता है और पूछता है कि अध्याय की समझ को वहाँ लगाकर दिखाओ।

यहाँ नहीं मिलेगायहाँ मिलेगा
“जैन मत के तीन विचार लिखिए।”एक स्थिति देकर — “इनमें से कौन-सा विचार यहाँ काम आएगा?”
“तीनों कथाएँ लिखिए।”तीनों के नाम देकर — “इनमें क्या समान है, और पुस्तक ने ऐसा क्यों चुना?”
“‘ब्रह्म’ की परिभाषा लिखिए।”उद्दालक के दोनों उदाहरण देकर — “ये एक ही बात कैसे कहते हैं?”

मूल्यांकन का नियम: जिस प्रश्न का उत्तर पुस्तक की किसी एक पंक्ति से सीधे उठाया जा सके, वह योग्यता-आधारित प्रश्न नहीं है।

! शिक्षक के लिए एक सीमा: इस फ़ाइल का कोई प्रश्न यह नहीं पूछता कि कौन-सा दर्शन सही है। हर प्रश्न यह पूछता है कि पुस्तक क्या कहती है, और उसका तर्क कैसे काम करता है। पुस्तक ने स्वयं पृ. 118 पर यही रेखा खींची है, और यहाँ वही रेखा है।

जाँची जा रही योग्यताएँ

कोडयोग्यता
यो-1रूपक पढ़ना — वृक्ष के रूपक को अध्याय की सामग्री पर लगाना
यो-2तुलना करना — दो दर्शनों या दो कथाओं में समानता और भेद पहचानना
यो-3विचार लगाना — किसी सिद्धांत को एक नई स्थिति पर लागू करना
यो-4भाषा की सावधानी पढ़ना — यह पहचानना कि पुस्तक कहाँ और क्यों हिचकिचाती है
यो-5साक्ष्य और परंपरा में भेद — यह जानना कि कौन-सा कथन प्रमाण है और कौन-सा परंपरा

खंड क — प्रकरण-आधारित प्रश्न

प्रकरण 1 — जो लिखा नहीं गया, वह बच गया

यो-2 · यो-4 · कुल 9 अंक

कक्षा में एक विद्यार्थी कहता है —

“मुझे यह समझ नहीं आया। पिछले अध्याय में हड़प्पा के लोगों ने लिखा था — मुहरों पर अक्षर मिले हैं — पर हम उन्हें पढ़ नहीं सकते। और इस अध्याय में वेद लिखे ही नहीं गए — फिर भी हमारे पास पूरे-के-पूरे मौजूद हैं। यह उलटा नहीं है?”

1.1वह विद्यार्थी जो अंतर बता रहा है, वह सही है। दोनों स्थितियाँ अपने-अपने शब्दों में लिखिए। 2 अंक

उत्तर देखिए

हड़प्पा उनके पास लेखन था (मुहरों पर चिह्न), पर उसका अर्थ अभी समझा जाना बाकी है — इसलिए हम उनसे कुछ जान नहीं सकते। वेद: वे लिखे नहीं गए, पर मौखिक रूप से पूरे-के-पूरे बच गए — इसलिए हम उनसे बहुत कुछ जान सकते हैं।

1.2★पुस्तक के अनुसार वेद कैसे बचे रहे? दो बातें लिखिए। 2 अंक

उत्तर देखिए

कोई भी दो: मौखिक पाठ किया जाता था; गहन प्रशिक्षण के माध्यम से स्मृतिबद्ध किए गए; 100 से 200 पीढ़ियों तक चले; बिना किसी विशेष परिवर्तन के आगे संप्रेषित हुए।

1.3★★इससे आप ‘स्रोत’ के बारे में क्या सीखते हैं? (संकेत — अध्याय 4 में स्रोतों के प्रकार पढ़े थे।) 3 अंक

उत्तर देखिए

पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि स्रोत का लिखित होना ही पर्याप्त नहीं है — लिखा हुआ भी बेकार हो सकता है यदि उसे पढ़ा न जा सके, और बिना लिखे भी ज्ञान बच सकता है यदि उसे सँभालने की कोई व्यवस्था हो। (2 अंक: यदि केवल एक पक्ष कहा जाए।)

★★यही इस प्रकरण का सबसे मूल्यवान प्रश्न है — यह अध्याय 4, 6 और 7 को एक साथ जोड़ता है।

1.4यूनेस्को ने किस बात को मान्यता दी — वेदों को, या किसी और चीज़ को? ध्यान से लिखिए। 2 अंक

उत्तर देखिए

यूनेस्को ने वेदों को नहीं, बल्कि वैदिक पाठशैली के सुव्यवस्थित संप्रेषण को मान्यता दी — अर्थात उस विधि को जिससे वे संरक्षित रहे, न कि उनकी विषयवस्तु को। (1 अंक: केवल 2008 और यूनेस्को बताने पर; पूरा अंक तभी जब यह भेद पकड़ा जाए।)

★यह प्रश्न ध्यान से पढ़ने की जाँच करता है — पुस्तक का वाक्य ठीक यही कहता है।

प्रकरण 2 — तीन लोग जिन्होंने प्रश्न पूछा

यो-2 · कुल 8 अंक

पुस्तक तीन कथाएँ एक साथ रखती है और उनसे पहले यह वाक्य लिखती है —

“उपनिषदों की कई कथाओं से हमें प्रश्न पूछने के महत्व का पता चलता है। फिर चाहे ये प्रश्न किसी महिला, पुरुष या बच्चे ने पूछे हों।”

2.1तीनों कथाओं में प्रश्न पूछने वाला कौन है? नाम और परिचय लिखिए। 2 अंक

उत्तर देखिए

श्वेतकेतु — एक बालक, ऋषि उद्दालक का पुत्र। नचिकेता — एक बालक। गार्गी — एक ऋषिका (कवियत्री/विदुषी)।

2.2★तीनों में क्या समान है? 2 अंक

उत्तर देखिए

तीनों में कोई प्रश्न पूछ रहा है, और तीनों में वह कोई बड़ा या स्थापित विद्वान नहीं है — दो बच्चे और एक स्त्री।

2.3★★नचिकेता की कथा में यम ने पहले उत्तर टाला, और गार्गी को याज्ञवल्क्य ने प्रश्न पूछने से मना किया। फिर भी दोनों को उत्तर मिला। ऐसा क्यों? 3 अंक

उत्तर देखिए

पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि दोनों ने रुककर पीछा नहीं छोड़ा — नचिकेता ने “निरंतर आग्रह” किया, और गार्गी ने मना किए जाने के बाद भी “पुन: प्रश्न पूछा” — और तभी उत्तर मिला। अर्थात कथाएँ यह सिखाती हैं कि प्रश्न पूछते रहना ही ज्ञान तक पहुँचाता है। (2 अंक: यदि केवल एक कथा से यह बात निकाली जाए।)

2.4पुस्तक ने यह वाक्य कथाओं के बाद नहीं, पहले लिखा है। आपके अनुसार क्यों? 1 अंक

उत्तर देखिए

किसी भी तर्कसंगत उत्तर पर पूरा अंक। सबसे अच्छा उत्तर यह कहता है कि पुस्तक पहले बता देना चाहती है कि इन कथाओं को किस दृष्टि से पढ़ना है — ताकि पाठक कहानियों में खोकर उनका साझा सूत्र न चूक जाए।

प्रकरण 3 — बीज और बर्तन

यो-1 · यो-3 · कुल 8 अंक

उद्दालक ने श्वेतकेतु को दो उदाहरण दिए —

(क) बरगद के फल का बीज खोलने पर रिक्त (खाली) दिखाई देता है, किंतु उसमें बरगद के वृक्ष का भावी रूप निहित होता है।

(ख) एक ही प्रकार की मिट्टी से अलग-अलग प्रकार के बर्तन बनाए जा सकते हैं।

3.1इन दोनों उदाहरणों से उद्दालक किस एक बात को समझाना चाहते थे? 2 अंक

उत्तर देखिए

कि हमारे चारों ओर जो कुछ भी है, एक ही तत्व — ब्रह्म — से उसका उद्भव हुआ है, और ब्रह्म अदृश्य रहते हुए भी सर्वव्यापी है।

3.2★दोनों उदाहरण अलग-अलग किस पहलू पर ज़ोर देते हैं? (संकेत — एक में जो दिखता नहीं, वह है; दूसरे में जो अलग-अलग दिखता है, वह एक ही से बना है।) 3 अंक

उत्तर देखिए

पूरे अंक का उत्तर दोनों को अलग करता है: बीज वाला उदाहरण कहता है कि जो दिखाई नहीं देता, वह फिर भी मौजूद है — बीज खाली दिखता है, पर पूरा वृक्ष उसमें है (अदृश्यता)। मिट्टी वाला उदाहरण कहता है कि जो अलग-अलग दिखता है, वह एक ही से बना है — अलग-अलग बर्तन, एक ही मिट्टी (एकता)। (2 अंक: यदि दोनों उदाहरण दोहरा दिए जाएँ पर भेद न बताया जाए।)

3.3★अध्याय में एक मंत्र है जो ठीक यही बात कहता है। वह कौन-सा है, और उसका अर्थ
क्या है? 2 अंक

उत्तर देखिए

तत् त्वम् असि — “वह ब्रह्म आप ही हैं।” (अहम् ब्रह्मास्मि — “मैं ब्रह्म हूँ” — भी स्वीकार्य है, यदि अर्थ सही लिखा हो।)

3.4पुस्तक कहती है कि ‘ब्रह्म’ और ‘ब्रह्मा देव’ भिन्न हैं। यह बात यहाँ क्यों ज़रूरी है? 1 अंक

उत्तर देखिए

क्योंकि यहाँ बात ‘ब्रह्म’ नामक उस दैवी तत्व की हो रही है, न कि ‘ब्रह्मा’ नामक देव की — और दोनों भिन्न हैं, जैसा पुस्तक कोष्ठक में स्पष्ट करती है।

प्रकरण 4 — एक ही पहाड़ पर तीन परंपराएँ

यो-1 · यो-2 · कुल 7 अंक

पुस्तक बताती है कि एलोरा (महाराष्ट्र) में छठवीं और दसवीं शताब्दी सा.सं. के बीच पहाड़ों को काटकर गुफाएँ बनाई गईं — और कुछ गुफाएँ हिंदू दर्शन से हैं, जबकि अन्य बौद्ध और जैन मतों से संबंधित हैं।

4.1★इस एक तथ्य से उस समय के समाज के बारे में क्या पता चलता है? 2 अंक

उत्तर देखिए

कि तीनों परंपराएँ एक ही समय, एक ही स्थान पर, साथ-साथ मौजूद थीं — और सदियों तक एक ही पहाड़ पर निर्माण चलता रहा। (यह सह-अस्तित्व और आपसी संपर्क दर्शाता है।)

4.2★★अध्याय में और भी कई जगह यही बात कही गई है कि इन दर्शनों में भिन्नताएँ थीं, पर कुछ बातें साझी थीं। अध्याय से कोई दो और उदाहरण दीजिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

कोई भी दो, प्रत्येक 1.5 अंक: (i) साझी संकल्पनाएँ (पृ. 119) — धर्म, कर्म, पुनर्जन्म, दुखों और अज्ञानता के अंत की खोज। (ii) ‘अविद्या और मोह’ — ये वही दो शब्द बुद्ध के लिए आए (पृ. 113) और ‘जिन’ की व्याख्या में भी (पृ. 115)। (iii) ‘सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है’ — यह उपनिषदों में भी है (पृ. 110) और जैन मत में भी (पृ. 115)। (iv) पुस्तक स्वयं कहती है कि जैन विचार “बौद्ध तथा वेदांत दर्शन के विचारों को साझा करते हैं।”

4.3पुस्तक इन साझी बातों को वृक्ष के किस भाग से जोड़ती है, और क्यों? 2 अंक

उत्तर देखिए

तने से। क्योंकि जड़ें तने को पोषण देती हैं और तने से शाखाएँ निकलती हैं — अर्थात भिन्न शाखाएँ होते हुए भी सबका आधार एक ही है। पुस्तक का अपना वाक्य: “वास्तव में यह उस वृक्ष का तना या मूल भाग है जिसके उदाहरण के साथ हमने इस अध्याय की शुरुआत की थी।”

खंड ख — अभिकथन एवं कारण

निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए हैं। सही विकल्प चुनिए — (क) दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या है। · (ख) दोनों सही, पर R व्याख्या नहीं है। (ग) A सही, R गलत। · (घ) A गलत, R सही।

1A: वेद 100 से 200 पीढ़ियों तक बिना विशेष परिवर्तन के आगे संप्रेषित हुए।
R: उन्हें ताड़-पत्र की पांडुलिपियों पर लिख लिया गया था। 1 अंक

उत्तर देखिए

(ग) — A सही; R ग़लत — वे लिखे नहीं गए थे; मौखिक पाठ किया जाता था

2A: पुस्तक ‘धर्म’ शब्द के स्थान पर ‘दर्शन’, ‘मत’ और ‘विश्वास’ शब्दों का प्रयोग करती है।
R: अनेक विद्वान मानते हैं कि ‘रिलिजन’ शब्द भारतीय सभ्यता के संदर्भ में बहुत सीमित है। 1 अंक

उत्तर देखिए

(क) — दोनों सही, और R ही A का कारण है — पुस्तक स्वयं यही कारण देती है

3A: पुस्तक ने चार्वाक दर्शन का उल्लेख किया।
R: चार्वाक उस समय का सबसे लोकप्रिय दर्शन था। 1 अंक

उत्तर देखिए

(ग) — A सही; R ग़लत — पुस्तक कहती है कि उसे “अधिक लोकप्रियता नहीं मिली”। उल्लेख का कारण विविधता दर्शाना था

4A: जैन मत को बौद्ध मत से अधिक प्राचीन माना जाता है।
R: जैन मत बौद्ध मत की एक शाखा के रूप में विकसित हुआ। 1 अंक

उत्तर देखिए

(ग) — A सही; R ग़लत — जैन मत स्वतंत्र दर्शन है, बौद्ध मत की शाखा नहीं

5A: ‘जिन’ शब्द का अर्थ ‘विजेता’ है।
R: महावीर ने अनेक राज्यों पर विजय प्राप्त की थी। 1 अंक

उत्तर देखिए

(ग) — A सही; R ग़लत — विजय किसी क्षेत्र या शत्रु पर नहीं, अविद्या और मोह पर है

6A: पुस्तक के अनुसार जनजातियाँ और प्रमुख विचारधाराएँ एक-दूसरे को प्रभावित करती रहीं।
R: दोनों ही दिशाओं में देवताओं, संकल्पनाओं और रीतियों का आदान-प्रदान होता रहा है। 1 अंक

उत्तर देखिए

(क) — दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है

खंड ग — पाठ एवं आरेख व्याख्या

1★नीचे पुस्तक के चार वाक्यांश दिए हैं। हर एक के सामने लिखिए कि पुस्तक वहाँ हिचकिचा क्यों रही है — अर्थात वह क्या स्वीकार कर रही है। 4 अंक

पुस्तक का वाक्यांशवह क्या स्वीकार कर रही है
“यह कहना कठिन है कि ऋग्वेद की रचना कब हुई…”
“उनके जन्म के समय के विषय में विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं है।”
“परंपरा के अनुसार पुरी के भगवान जगन्नाथ मूल रूप से जनजाति देवता थे।”
“विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक हैं।”
उत्तर देखिए

प्रत्येक पंक्ति 1 अंक।

वाक्यांशवह क्या स्वीकार कर रही है
“यह कहना कठिन है…”कि ऋग्वेद की रचना-तिथि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है — इसीलिए एक तिथि नहीं, एक लंबी अवधि दी गई है
“विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं है”कि बुद्ध की जन्म-तिथि पर विद्वान असहमत हैं — पुस्तक अपनी संख्या देती है, पर उसे अंतिम नहीं कहती
“परंपरा के अनुसार”कि यह परंपरा का कथन है, सिद्ध ऐतिहासिक तथ्य नहीं
“में से एक”कि वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं, पर विश्व में और भी उतने ही पुराने ग्रंथ हैं

★इस प्रश्न का उद्देश्य तथ्य नहीं, भाषा पढ़वाना है। जो विद्यार्थी इन चारों को पकड़ लेता

है, उसने इस अध्याय की सबसे बड़ी आदत सीख ली।

2★★समय-रेखा (पृ. 108) पर उपनिषद् और वैदिक दर्शन की पट्टियाँ बनी हैं। इन पट्टियों के सिरे बिंदुदार (dashed) हैं, बीच का भाग ठोस। 3 अंक

2.1 बिंदुदार सिरों का क्या अर्थ है? (1) 2.2 ★यह पुस्तक की ईमानदारी क्यों मानी जानी चाहिए? (2)

उत्तर देखिए
  • 2.1 (1) — कि उस काल की तिथि अनिश्चित है — हमें ठीक-ठीक पता नहीं कि वह कब आरंभ हुआ और कब समाप्त।
  • 2.2 (2) — क्योंकि पुस्तक एक ठोस रेखा खींचकर झूठी निश्चितता दिखा सकती थी, पर उसने चित्र में ही यह बता दिया कि यहाँ हमें पक्का नहीं पता। अर्थात ईमानदारी केवल शब्दों में नहीं, आरेख में भी है।

3एक विद्यार्थी ने अपनी कॉपी में लिखा 3 अंक

3.1 उसने क्या ग़लती की? (1) 3.2 सही वाक्य लिखिए, और बताइए कि पुस्तक ने यह भेद कहाँ स्पष्ट किया है। (2)

उत्तर देखिए

“ब्रह्मा देव के अनुसार सब कुछ एक ही तत्व है।”

  • 3.1 (1) — उसने ‘ब्रह्म’ को ‘ब्रह्मा देव’ समझ लिया — ये दो अलग चीज़ें हैं।
  • 3.2 (2) — सही वाक्य: “वेदांत दर्शन के अनुसार सब कुछ — मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड — एक दैवी तत्व है, जिसे ‘ब्रह्म’ या कभी-कभी केवल ‘तत्’ कहा जाता है।” पुस्तक ने यह भेद पृ. 109 पर कोष्ठक में स्पष्ट किया है — “(यह ब्रह्मा देव से भिन्न है)”।

खंड घ — मुक्त-उत्तर एवं अनुप्रयोग

1★★पुस्तक कहती है कि अनेकांतवाद का अर्थ है — “सत्य के अनेक पक्ष हैं और इसे केवल एक कथन द्वारा पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता है।”
अपने जीवन से एक ऐसी स्थिति बताइए जहाँ यह विचार काम आ सकता है, और समझाइए कि कैसे। 4 अंक

उत्तर देखिए

इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।

अंककसौटी
4एक ठोस, अपनी स्थिति (जैसे — दो दोस्तों के झगड़े में दोनों की बात अलग-अलग सही लगना; किसी घटना को दो लोग अलग-अलग बताना) और यह समझाना कि अनेकांतवाद वहाँ कैसे मदद करता है — कि एक ही कथन पूरे सत्य को नहीं पकड़ता
2–3स्थिति सही, पर जोड़ अधूरा
1केवल परिभाषा दोहराई

★यह प्रश्न जान-बूझकर व्यक्तिगत है। यह जाँचता है कि विद्यार्थी एक दार्शनिक विचार को

अपने अनुभव पर लगा पाता है या नहीं — यही योग्यता है।

2★रोहिनेय की कथा की सीख पुस्तक स्वयं देती है — “हर व्यक्ति को जीवन में दूसरा अवसर मिलना चाहिए।”
क्या आप इससे सहमत हैं? कारण सहित लिखिए। और बताइए कि रोहिनेय ने वह दूसरा अवसर पाने के लिए स्वयं क्या-क्या किया। 4 अंक

उत्तर देखिए

किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। दूसरा भाग तथ्यात्मक है और उसके अंक निश्चित हैं — रोहिनेय ने: महावीर के पास जाकर अपने अपराध स्वीकार किए, चुराया हुआ धन वापस किया, क्षमा माँगी, भिक्षु बन गया, और आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

अंककसौटी
4पक्ष और कारण और रोहिनेय के कम से कम तीन कदम
2–3पक्ष और कारण, पर कदम अधूरे
1केवल पक्ष

★इस प्रश्न में एक बात छिपी है, और अच्छे उत्तर उसे पकड़ते हैं: दूसरा अवसर मिला ज़रूर, पर रोहिनेय ने उसे कमाया भी — उसने धन लौटाया और अपराध स्वीकार किए। यह बताने वाले उत्तर को अतिरिक्त मान्यता दीजिए।

3★★पृ. 117 का बॉक्स कहता है कि अहिंसा का अर्थ शारीरिक हिंसा न करने से भी कहीं अधिक है — इसमें विचारों की हिंसा से भी संयम शामिल है।
यह विचार बुद्ध के किस कथन से मिलता है? और आपके अनुसार ‘विचारों की हिंसा’ से बचना कठिन क्यों है? 4 अंक

उत्तर देखिए

पहला भाग निश्चित है यह विचार बुद्ध के उस कथन से मिलता है कि “युद्ध के मैदान में हजारों व्यक्तियों पर हजारों बार विजय पाने की तुलना में स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है।” (2 अंक) दूसरा भाग मुक्त है (2 अंक) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि विचार दिखाई नहीं देते, इसलिए उन पर कोई बाहर से रोक नहीं लगा सकता — यह काम स्वयं ही करना पड़ता है। (पुस्तक स्वयं जोड़ती है कि कभी-कभार ये नकारात्मक विचार स्वयं हमारी ओर भी निर्देशित होते हैं — इसे पकड़ने वाले उत्तर को अतिरिक्त मान्यता।)

4★पुस्तक ने चार्वाक दर्शन का उल्लेख करते हुए स्वयं बताया कि उसने ऐसा क्यों किया।
वह कारण लिखिए, और बताइए कि इससे उस समय के समाज के बारे में क्या पता चलता है। 3 अंक

उत्तर देखिए

कारण पुस्तक स्वयं देती है“ताकि यह दर्शाया जा सके कि यहाँ बौद्धिक या आध्यात्मिक विश्वास प्रथाओं में व्यापक विविधता थी और लोग अपने अनुसार इन्हें चुनने के लिए स्वतंत्र थे।” (2 अंक) दूसरा भाग: इससे पता चलता है कि उस समय का समाज ऐसे दर्शन को भी अपने भीतर जगह देता था जो बाक़ी सबसे उलट था (चार्वाक पुनर्जन्म को नहीं मानता था)। (1 अंक)

5आपके क्षेत्र में कौन-से त्योहार मनाए जाते हैं, और उनसे जुड़ी कोई एक कहानी या प्रथा
लिखिए। यह कहानी लिखित रूप में आई या सुनकर — आपको कैसे पता चली? 4 अंक

उत्तर देखिए

इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है — यह विद्यार्थी के अपने क्षेत्र पर आधारित है।

अंककसौटी
4त्योहार और कोई कहानी/प्रथा और यह बताना कि वह उसे कैसे पता चली — विशेषकर यदि उत्तर हो “किसी से सुनकर”, और विद्यार्थी इसे मौखिक परंपरा से जोड़ दे
2–3त्योहार और कहानी, पर स्रोत नहीं बताया
1केवल त्योहार का नाम

★यह प्रश्न अध्याय की सबसे सूक्ष्म बात पर है पुस्तक कहती है कि मौखिक परंपराएँ आज भी जीवित हैं — “ज्ञान जो नित्य अभ्यास के द्वारा आगे संचारित हुआ, न कि लिखित शास्त्रों के द्वारा।” जो विद्यार्थी लिखता है “मुझे यह दादी ने बताया, किताब में नहीं पढ़ा” — उसने बिना जाने उस पंक्ति का प्रमाण दे दिया।

उत्तर एवं अंकन योजना

सामान्य नियम: इन प्रश्नों में कारण पर अंक हैं। जहाँ विद्यार्थी का उत्तर पुस्तक से भिन्न शब्दों में हो पर तर्क सही हो, पूरे अंक दीजिए।

खंड क

प्रकरण 1 (9)

  • 1.1 (2) — हड़प्पा: उनके पास लेखन था (मुहरों पर चिह्न), पर उसका अर्थ अभी समझा जाना बाकी है — इसलिए हम उनसे कुछ जान नहीं सकते। वेद: वे लिखे नहीं गए, पर मौखिक रूप से पूरे-के-पूरे बच गए — इसलिए हम उनसे बहुत कुछ जान सकते हैं।
  • 1.2 (2) — कोई भी दो: मौखिक पाठ किया जाता था; गहन प्रशिक्षण के माध्यम से स्मृतिबद्ध किए गए; 100 से 200 पीढ़ियों तक चले; बिना किसी विशेष परिवर्तन के आगे संप्रेषित हुए।
  • 1.3 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि स्रोत का लिखित होना ही पर्याप्त नहीं है — लिखा हुआ भी बेकार हो सकता है यदि उसे पढ़ा न जा सके, और बिना लिखे भी ज्ञान बच सकता है यदि उसे सँभालने की कोई व्यवस्था हो। (2 अंक: यदि केवल एक पक्ष कहा जाए।)

    ★★यही इस प्रकरण का सबसे मूल्यवान प्रश्न है — यह अध्याय 4, 6 और 7 को एक साथ जोड़ता है।

  • 1.4 (2) — यूनेस्को ने वेदों को नहीं, बल्कि वैदिक पाठशैली के सुव्यवस्थित संप्रेषण को मान्यता दी — अर्थात उस विधि को जिससे वे संरक्षित रहे, न कि उनकी विषयवस्तु को। (1 अंक: केवल 2008 और यूनेस्को बताने पर; पूरा अंक तभी जब यह भेद पकड़ा जाए।)

    ★यह प्रश्न ध्यान से पढ़ने की जाँच करता है — पुस्तक का वाक्य ठीक यही कहता है।

प्रकरण 2 (8)

  • 2.1 (2) — श्वेतकेतु — एक बालक, ऋषि उद्दालक का पुत्र। नचिकेता — एक बालक। गार्गी — एक ऋषिका (कवियत्री/विदुषी)।
  • 2.2 (2) — तीनों में कोई प्रश्न पूछ रहा है, और तीनों में वह कोई बड़ा या स्थापित विद्वान नहीं है — दो बच्चे और एक स्त्री।
  • 2.3 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि दोनों ने रुककर पीछा नहीं छोड़ा — नचिकेता ने “निरंतर आग्रह” किया, और गार्गी ने मना किए जाने के बाद भी “पुन: प्रश्न पूछा” — और तभी उत्तर मिला। अर्थात कथाएँ यह सिखाती हैं कि प्रश्न पूछते रहना ही ज्ञान तक पहुँचाता है। (2 अंक: यदि केवल एक कथा से यह बात निकाली जाए।)
  • 2.4 (1) — किसी भी तर्कसंगत उत्तर पर पूरा अंक। सबसे अच्छा उत्तर यह कहता है कि पुस्तक पहले बता देना चाहती है कि इन कथाओं को किस दृष्टि से पढ़ना है — ताकि पाठक कहानियों में खोकर उनका साझा सूत्र न चूक जाए।

प्रकरण 3 (8)

  • 3.1 (2) — कि हमारे चारों ओर जो कुछ भी है, एक ही तत्व — ब्रह्म — से उसका उद्भव हुआ है, और ब्रह्म अदृश्य रहते हुए भी सर्वव्यापी है।
  • 3.2 (3) — पूरे अंक का उत्तर दोनों को अलग करता है: बीज वाला उदाहरण कहता है कि जो दिखाई नहीं देता, वह फिर भी मौजूद है — बीज खाली दिखता है, पर पूरा वृक्ष उसमें है (अदृश्यता)। मिट्टी वाला उदाहरण कहता है कि जो अलग-अलग दिखता है, वह एक ही से बना है — अलग-अलग बर्तन, एक ही मिट्टी (एकता)। (2 अंक: यदि दोनों उदाहरण दोहरा दिए जाएँ पर भेद न बताया जाए।)
  • 3.3 (2) — तत् त्वम् असि — “वह ब्रह्म आप ही हैं।” (अहम् ब्रह्मास्मि — “मैं ब्रह्म हूँ” — भी स्वीकार्य है, यदि अर्थ सही लिखा हो।)
  • 3.4 (1) — क्योंकि यहाँ बात ‘ब्रह्म’ नामक उस दैवी तत्व की हो रही है, न कि ‘ब्रह्मा’ नामक देव की — और दोनों भिन्न हैं, जैसा पुस्तक कोष्ठक में स्पष्ट करती है।

प्रकरण 4 (7)

  • 4.1 (2) — कि तीनों परंपराएँ एक ही समय, एक ही स्थान पर, साथ-साथ मौजूद थीं — और सदियों तक एक ही पहाड़ पर निर्माण चलता रहा। (यह सह-अस्तित्व और आपसी संपर्क दर्शाता है।)
  • 4.2 (3) — कोई भी दो, प्रत्येक 1.5 अंक: (i) साझी संकल्पनाएँ (पृ. 119) — धर्म, कर्म, पुनर्जन्म, दुखों और अज्ञानता के अंत की खोज। (ii) ‘अविद्या और मोह’ — ये वही दो शब्द बुद्ध के लिए आए (पृ. 113) और ‘जिन’ की व्याख्या में भी (पृ. 115)। (iii) ‘सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है’ — यह उपनिषदों में भी है (पृ. 110) और जैन मत में भी (पृ. 115)। (iv) पुस्तक स्वयं कहती है कि जैन विचार “बौद्ध तथा वेदांत दर्शन के विचारों को साझा करते हैं।”
  • 4.3 (2) — तने से। क्योंकि जड़ें तने को पोषण देती हैं और तने से शाखाएँ निकलती हैं — अर्थात भिन्न शाखाएँ होते हुए भी सबका आधार एक ही है। पुस्तक का अपना वाक्य: “वास्तव में यह उस वृक्ष का तना या मूल भाग है जिसके उदाहरण के साथ हमने इस अध्याय की शुरुआत की थी।”

खंड ख — अभिकथन एवं कारण

#उत्तरकारण
1(ग)A सही; R ग़लत — वे लिखे नहीं गए थे; मौखिक पाठ किया जाता था
2(क)दोनों सही, और R ही A का कारण है — पुस्तक स्वयं यही कारण देती है
3(ग)A सही; R ग़लत — पुस्तक कहती है कि उसे “अधिक लोकप्रियता नहीं मिली”। उल्लेख का कारण विविधता दर्शाना था
4(ग)A सही; R ग़लत — जैन मत स्वतंत्र दर्शन है, बौद्ध मत की शाखा नहीं
5(ग)A सही; R ग़लत — विजय किसी क्षेत्र या शत्रु पर नहीं, अविद्या और मोह पर है
6(क)दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है

खंड ग

1 (4) — प्रत्येक पंक्ति 1 अंक।

वाक्यांशवह क्या स्वीकार कर रही है
“यह कहना कठिन है…”कि ऋग्वेद की रचना-तिथि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है — इसीलिए एक तिथि नहीं, एक लंबी अवधि दी गई है
“विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं है”कि बुद्ध की जन्म-तिथि पर विद्वान असहमत हैं — पुस्तक अपनी संख्या देती है, पर उसे अंतिम नहीं कहती
“परंपरा के अनुसार”कि यह परंपरा का कथन है, सिद्ध ऐतिहासिक तथ्य नहीं
“में से एक”कि वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं, पर विश्व में और भी उतने ही पुराने ग्रंथ हैं

★इस प्रश्न का उद्देश्य तथ्य नहीं, भाषा पढ़वाना है। जो विद्यार्थी इन चारों को पकड़ लेता है, उसने इस अध्याय की सबसे बड़ी आदत सीख ली।

2 (3)

  • 2.1 (1) — कि उस काल की तिथि अनिश्चित है — हमें ठीक-ठीक पता नहीं कि वह कब आरंभ हुआ और कब समाप्त।
  • 2.2 (2) — क्योंकि पुस्तक एक ठोस रेखा खींचकर झूठी निश्चितता दिखा सकती थी, पर उसने चित्र में ही यह बता दिया कि यहाँ हमें पक्का नहीं पता। अर्थात ईमानदारी केवल शब्दों में नहीं, आरेख में भी है।

3 (3)

  • 3.1 (1) — उसने ‘ब्रह्म’ को ‘ब्रह्मा देव’ समझ लिया — ये दो अलग चीज़ें हैं।
  • 3.2 (2) — सही वाक्य: “वेदांत दर्शन के अनुसार सब कुछ — मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड — एक दैवी तत्व है, जिसे ‘ब्रह्म’ या कभी-कभी केवल ‘तत्’ कहा जाता है।” पुस्तक ने यह भेद पृ. 109 पर कोष्ठक में स्पष्ट किया है — “(यह ब्रह्मा देव से भिन्न है)”।

खंड घ — रूब्रिक

1 (4) — इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।

अंककसौटी
4एक ठोस, अपनी स्थिति (जैसे — दो दोस्तों के झगड़े में दोनों की बात अलग-अलग सही लगना; किसी घटना को दो लोग अलग-अलग बताना) और यह समझाना कि अनेकांतवाद वहाँ कैसे मदद करता है — कि एक ही कथन पूरे सत्य को नहीं पकड़ता
2–3स्थिति सही, पर जोड़ अधूरा
1केवल परिभाषा दोहराई

★यह प्रश्न जान-बूझकर व्यक्तिगत है। यह जाँचता है कि विद्यार्थी एक दार्शनिक विचार को अपने अनुभव पर लगा पाता है या नहीं — यही योग्यता है।

2 (4) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। दूसरा भाग तथ्यात्मक है और उसके अंक निश्चित हैं — रोहिनेय ने: महावीर के पास जाकर अपने अपराध स्वीकार किए, चुराया हुआ धन वापस किया, क्षमा माँगी, भिक्षु बन गया, और आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

अंककसौटी
4पक्ष और कारण और रोहिनेय के कम से कम तीन कदम
2–3पक्ष और कारण, पर कदम अधूरे
1केवल पक्ष

★इस प्रश्न में एक बात छिपी है, और अच्छे उत्तर उसे पकड़ते हैं: दूसरा अवसर मिला ज़रूर, पर रोहिनेय ने उसे कमाया भी — उसने धन लौटाया और अपराध स्वीकार किए। यह बताने वाले उत्तर को अतिरिक्त मान्यता दीजिए।

3 (4) — पहला भाग निश्चित है: यह विचार बुद्ध के उस कथन से मिलता है कि “युद्ध के मैदान में हजारों व्यक्तियों पर हजारों बार विजय पाने की तुलना में स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है।” (2 अंक) दूसरा भाग मुक्त है (2 अंक) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि विचार दिखाई नहीं देते, इसलिए उन पर कोई बाहर से रोक नहीं लगा सकता — यह काम स्वयं ही करना पड़ता है। (पुस्तक स्वयं जोड़ती है कि कभी-कभार ये नकारात्मक विचार स्वयं हमारी ओर भी निर्देशित होते हैं — इसे पकड़ने वाले उत्तर को अतिरिक्त मान्यता।)

4 (3) — कारण पुस्तक स्वयं देती है: “ताकि यह दर्शाया जा सके कि यहाँ बौद्धिक या आध्यात्मिक विश्वास प्रथाओं में व्यापक विविधता थी और लोग अपने अनुसार इन्हें चुनने के लिए स्वतंत्र थे।” (2 अंक) दूसरा भाग: इससे पता चलता है कि उस समय का समाज ऐसे दर्शन को भी अपने भीतर जगह देता था जो बाक़ी सबसे उलट था (चार्वाक पुनर्जन्म को नहीं मानता था)। (1 अंक)

5 (4) — इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है — यह विद्यार्थी के अपने क्षेत्र पर आधारित है।

अंककसौटी
4त्योहार और कोई कहानी/प्रथा और यह बताना कि वह उसे कैसे पता चली — विशेषकर यदि उत्तर हो “किसी से सुनकर”, और विद्यार्थी इसे मौखिक परंपरा से जोड़ दे
2–3त्योहार और कहानी, पर स्रोत नहीं बताया
1केवल त्योहार का नाम

★यह प्रश्न अध्याय की सबसे सूक्ष्म बात पर है: पुस्तक कहती है कि मौखिक परंपराएँ आज भी जीवित हैं — “ज्ञान जो नित्य अभ्यास के द्वारा आगे संचारित हुआ, न कि लिखित शास्त्रों के द्वारा।” जो विद्यार्थी लिखता है “मुझे यह दादी ने बताया, किताब में नहीं पढ़ा” — उसने बिना जाने उस पंक्ति का प्रमाण दे दिया।

योग्यता-वार आवरण

योग्यताकहाँ जाँची गईकुल अंक
यो-1 — रूपक पढ़नाप्रकरण 3 (3.1), प्रकरण 4 (4.1, 4.3)10
यो-2 — तुलना करनाप्रकरण 1 (1.1), प्रकरण 2, प्रकरण 4 (4.2), खंड ख (4)15
यो-3 — विचार लगानाप्रकरण 3 (3.2), खंड घ (1, 2, 3)15
यो-4 — भाषा की सावधानीप्रकरण 1 (1.3, 1.4), खंड ग (1, 2), खंड ख (1, 2)16
यो-5 — साक्ष्य और परंपराखंड ग (1, 3), खंड घ (4, 5), खंड ख (3, 6)14
कुल62

एक 40 अंक का पेपर बनाना हो तो: प्रकरण 1 (9) + प्रकरण 2 (8) + खंड ख के चार प्रश्न (4) + खंड ग का प्रश्न 1 और 3 (7) + खंड घ का प्रश्न 1 और 5 (8) + प्रकरण 4 का 4.3 (2) = 38 अंक, जिसे 40 पर समायोजित कर लीजिए।

शिक्षक हेतु दो चेतावनियाँ

1. ★खंड ग का प्रश्न 1 इस पूरी फ़ाइल का हृदय है — उसे जल्दी में मत जाँचिए। वह प्रश्न तथ्य नहीं, भाषा पढ़वाता है। पुस्तक की चार हिचकिचाहटें — “कहना कठिन है”, “सर्वसम्मति नहीं है”, “परंपरा के अनुसार”, “में से एक” — इस अध्याय की सबसे बड़ी शैक्षिक उपलब्धि हैं। जो विद्यार्थी यह पकड़ लेता है कि लेखक जान-बूझकर सावधान है, उसने इतिहास पढ़ना सीख लिया — भले उसे तिथियाँ याद न हों।

2. खंड घ के प्रश्न 1, 2, 3 और 5 पर ‘सही उत्तर’ मत ढूँढ़िए। इनमें कोई एक सही उत्तर नहीं है। प्रश्न 1 एक दार्शनिक विचार को अपने अनुभव पर लगवाता है; प्रश्न 5 अध्याय को बच्चे के अपने घर से जोड़ता है। और एक बात: इन प्रश्नों के उत्तरों में विद्यार्थी अपने घर, त्योहार और परंपराएँ लाएँगे। हर उत्तर को समान सम्मान दीजिए — यह अध्याय स्वयं यही सिखाता है कि आदान-प्रदान दोनों दिशाओं में होता है, और उसका परिणाम आपसी समृद्धि है।

और याद रखिए: यह फ़ाइल 05-Question-Bank.md के अतिरिक्त है, उसके स्थान पर नहीं। परीक्षा अभी भी पाठ्यपुस्तक से बनती है।