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1अध्याय के आरंभ का उद्धरण कहाँ से लिया गया है?
व्याख्या: उद्धरण सुभाषित (नीतिशतक) से है, जो सच्चे ज्ञान को सबसे बड़ी संपत्ति बताता है।
2उस उद्धरण के अनुसार वह कौन-सी संपत्ति है जिसका उपयोग करने से हर दिन वृद्धि होती है?
व्याख्या: उद्धरण कहता है कि यह सबसे बड़ी संपत्ति है — सच्चे ज्ञान की संपत्ति, जिसे चुराया नहीं जा सकता।
3अध्याय के आवरण पर कौन-से तीन चित्र हैं?
व्याख्या: आवरण पर एक ऋषि (हम्पी, कर्नाटक), बुद्ध (भूटान) और महावीर (बिहार) के चित्र हैं।
4पुस्तक भारतीय संस्कृति की तुलना किससे करती है?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि किसी प्राचीन वृक्ष के समान इसमें अनेक जड़ें और अनेक शाखाएँ हैं, और जड़ें एक सामान्य तने को पोषण देती हैं।
5निम्नलिखित में से कौन इस वृक्ष की शाखाओं में नहीं गिनाया गया?
व्याख्या: पुस्तक शाखाओं के रूप में कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, धर्म, शासन पद्धति और मार्शल आर्ट्स गिनाती है।
6पुस्तक के अनुसार भारतीय संस्कृति की कुछ जड़ें किस ओर जाती हैं?
व्याख्या: अनेक पुरातत्व विज्ञानियों तथा विद्वानों ने बताया है कि कुछ जड़ें सिंधु या हड़प्पा अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता की ओर जाती हैं, जिसे अध्याय 6 में पढ़ा गया।
7'आध्यात्मिक' शब्द का अर्थ क्या है?
व्याख्या: आध्यात्मिक का अर्थ है आत्मा से संबंधित, और आध्यात्मिकता वर्तमान व्यक्तित्व से परे एक गहरे या ऊँचे आयाम की खोज है।
8'साधक' किसे कहते हैं?
व्याख्या: साधक ऐसा व्यक्ति है जो इस दुनिया के सत्य को जानना चाहता है; यह एक ऋषि, संत, योगी या दार्शनिक हो सकता है।
9'वेद' शब्द किससे आया है और उसका अर्थ क्या है?
व्याख्या: 'वेद' शब्द विद् से आया है, जिसका अर्थ है 'ज्ञान' — जैसे विद्या।
10चार वेद कौन-से हैं?
व्याख्या: चार वेद हैं — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
11पुस्तक वेदों के बारे में क्या कहती है?
व्याख्या: पुस्तक की भाषा सावधान है — "ये भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं और वस्तुत: विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक हैं।" ⚠ 'में से एक' महत्वपूर्ण है।
12वेदों में क्या हैं?
व्याख्या: वेदों में हजारों ऋचाएँ हैं, जो कविताओं और गीतों के रूप में प्रार्थनाएँ हैं।
13वैदिक ऋचाएँ किस रूप में थीं?
व्याख्या: ये ऋचाएँ लिखित रूप में नहीं थीं, अपितु इनका मौखिक पाठ किया जाता था। यह अभ्यास के 'सही या गलत' प्रश्न 1 का भी उत्तर है।
14वेद कितनी पीढ़ियों तक मौखिक रूप से संप्रेषित किए गए?
व्याख्या: यह ग्रंथ 100 से 200 पीढ़ियों तक गहन प्रशिक्षण के माध्यम से स्मृतिबद्ध किए गए एवं मौखिक रूप से बिना किसी विशेष परिवर्तन के आगे संप्रेषित किए गए।
15विशेषज्ञों ने ऋग्वेद की रचना का कौन-सा काल प्रस्तावित किया है?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि यह कहना कठिन है कि ऋग्वेद की रचना कब हुई, और विशेषज्ञों ने पाँचवीं से दूसरी सहस्राब्दी सा.सं.पू. के बीच का प्रस्ताव किया है।
16यूनेस्को ने वैदिक पाठशैली के संप्रेषण को कब मान्यता दी?
व्याख्या: पुस्तक के अनुसार 2008 में यूनेस्को ने इसे 'मानवीयता के मौखिक और अमूर्त विरासत की अनुपम कोटि' के रूप में मान्यता दी।
17यूनेस्को का पूरा नाम क्या है?
व्याख्या: यूनेस्को का पूरा नाम संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन है।
18वैदिक ऋचाओं की रचना किसने की?
व्याख्या: वैदिक ऋचाओं की रचना ऋषियों अर्थात कवियों और ऋषिकाओं अर्थात कवियत्रियों द्वारा संस्कृत के एक प्रारंभिक रूप में की गई थी।
19निम्नलिखित में से कौन उन देवों में नहीं गिनाया गया जिन्हें ऋचाएँ संबोधित करती थीं?
व्याख्या: पुस्तक इंद्र, अग्नि, वरुण, मित्र, सरस्वती और उषा का उल्लेख करती है। यम नचिकेता की कथा में आते हैं, इस सूची में नहीं।
20'ब्रह्मांड' की परिभाषा क्या है?
व्याख्या: ब्रह्मांड का अर्थ है विश्व या ब्रह्मांड की सुव्यवस्थित और संतुलित संरचना।
21'ऋत' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: इन दृष्टाओं के साथ मिलकर देवों ने मानव जीवन और ब्रह्मांड में ऋत या सत्य और क्रम को बनाए रखा।
22'एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति' का अर्थ क्या है?
व्याख्या: इसका अर्थ है — परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं। ⚠ ध्यान दीजिए, यह 'ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता' नहीं है।
23'सही या गलत' के प्रश्न 3 में कहा गया है कि 'एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति' में ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता की मान्यता प्रकट होती है। यह कथन —
व्याख्या: यह कथन ग़लत है। मंत्र कहता है कि परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं — यह परम सत्य की एकता है, ब्रह्मांड की शक्तियों की नहीं।
24आद्य ऋषियों और ऋषिकाओं ने देवताओं और देवियों को कैसे माना?
व्याख्या: आद्य ऋषियों और ऋषिकाओं ने देवताओं और देवियों को अलग नहीं, बल्कि एक ही माना।
25ऋग्वेद के अंतिम मंत्रों में किसका आह्वान किया गया?
व्याख्या: ऋग्वेद के अंतिम मंत्रों में लोगों के बीच एकता का आह्वान किया गया — "साथ मिलकर चलें, साथ मिलकर बोलें…"
26'जन' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: प्रारंभिक वैदिक समाज विभिन्न जनों में संगठित था, अर्थात लोगों के बड़े समूहों में।
27ऋग्वेद में कितने जनों की सूची दी गई है?
व्याख्या: ऋग्वेद में ही ऐसे 30 से अधिक जनों की सूची दी गई है — उदाहरणार्थ भरत, पुरु, कुरु, यदु और तुर्वश।
28'भरत' का इस अध्याय में क्या उल्लेख है?
व्याख्या: भरत ऋग्वेद में उल्लिखित 30 से अधिक जनों में से एक है — और अध्याय 5 में पढ़ा गया था कि इसी जन से 'भारत' नाम बना।
29वेदों में शासन के संबंध में कौन-से शब्द मिलते हैं?
व्याख्या: वेदों में राजा, सभा और समिति जैसे कुछ शब्दों के माध्यम से ही संकेत मिलते हैं।
30'सभा' और 'समिति' शब्द क्या इंगित करते हैं?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि सभा और समिति दोनों शब्द सामूहिकता को इंगित करते हैं।
31'आरोग्यकर्ता' कौन होता है?
व्याख्या: आरोग्यकर्ता वह व्यक्ति है जो राहत देने या रोग ठीक करने के लिए पारंपरिक प्रथाओं का उपयोग करता है।
32समय-रेखा पर कौन-कौन से बिंदु अंकित हैं?
व्याख्या: समय-रेखा पर 1500 सा.सं.पू., 1000 सा.सं.पू., 500 सा.सं.पू., 1 सा.सं. और 500 सा.सं. अंकित हैं।
33समय-रेखा पर पट्टियों के बिंदुदार सिरों का क्या अर्थ है?
व्याख्या: बिंदुदार सिरों का अर्थ है कि तिथि अनिश्चित है — यह पुस्तक की ईमानदारी है।
34उपनिषदों में कौन-सी दो नई संकल्पनाएँ मिलती हैं?
व्याख्या: उपनिषद् वैदिक संकल्पनाओं के आधार पर रचित हैं, और इनमें पुनर्जन्म तथा कर्म जैसी नई संकल्पनाएँ मिलती हैं।
35'पुनर्जन्म' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: पुनर्जन्म का अर्थ है बार-बार जन्म लेना।
36'कर्म' से क्या आशय है?
व्याख्या: कर्म से आशय है हमारे कर्म और कर्म-फल।
37'वेदांत' दर्शन के अनुसार सब कुछ क्या है?
व्याख्या: वेदांत के अनुसार सब कुछ — मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड — एक दैवी तत्व है, जिसे 'ब्रह्म' अथवा कभी-कभी केवल 'तत्' कहा जाता है।
38'ब्रह्म' के बारे में पुस्तक क्या स्पष्ट करती है?
व्याख्या: पुस्तक कोष्ठक में स्पष्ट लिखती है कि 'ब्रह्म' ब्रह्मा देव से भिन्न है। यह इस अध्याय की सबसे आम ग़लती है।
39'अहम् ब्रह्मास्मि' का अर्थ क्या है?
व्याख्या: अहम् ब्रह्मास्मि का अर्थ है "मैं ब्रह्म हूँ" — अर्थात, मैं दिव्य हूँ।
40'तत् त्वम् असि' का अर्थ क्या है?
व्याख्या: तत् त्वम् असि का अर्थ है "वह ब्रह्म आप ही हैं"।
41'आत्मन्' क्या है?
व्याख्या: उपनिषदों में आत्मन् या स्व की संकल्पना की गई है, जो प्रत्येक जीव में निवास करता है, परंतु ब्रह्म का ही स्वरूप होता है।
42उपनिषदों के अनुसार इस दुनिया में सब कुछ कैसा है?
व्याख्या: उपनिषदों के अनुसार इस दुनिया में सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और परस्पर निर्भर है। यही बात जैन मत में भी आती है।
43'सर्वे भवन्तु सुखिन:' का अर्थ क्या है?
व्याख्या: इसका अर्थ है "सभी जीव सुखी रहें", और यह प्रार्थना सबके लिए रोग तथा दुख से मुक्ति की कामना करती है।
44योग ने किस उद्देश्य से अनेक विधियाँ विकसित कीं?
व्याख्या: योग ने किसी व्यक्ति की चेतना में ब्रह्म का आत्म-बोध प्राप्त करने के उद्देश्य से अनेक विधियाँ विकसित कीं।
45'चेतना' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: चेतना का अर्थ है जागृत होने का गुण या अवस्था — उदाहरण के लिए, व्यक्ति को स्वयं की चेतना होना।
46पुस्तक के अनुसार 'हिंदू दर्शन' कैसे बना?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि इन सभी दर्शनों से मिलकर कुछ आधारभूत विचार बने, जिन्हें हम आज 'हिंदू दर्शन' कहते हैं।
47पुस्तक के अनुसार उपनिषदों की कथाओं से हमें किसका पता चलता है?
व्याख्या: पुस्तक कहती है — "उपनिषदों की कई कथाओं से हमें प्रश्न पूछने के महत्व का पता चलता है। फिर चाहे ये प्रश्न किसी महिला, पुरुष या बच्चे ने पूछे हों।"
48श्वेतकेतु की कथा किस उपनिषद् से है?
व्याख्या: श्वेतकेतु और यथार्थबोध के बीज की कथा छांदोग्य उपनिषद् से है।
49श्वेतकेतु ने गुरुकुल में कितने वर्ष बिताए?
व्याख्या: ऋषि उद्दालक आरुणि ने उसे वेदों के अध्ययन के लिए गुरुकुल भेजा, और वह 12 वर्ष बाद वापस आया।
50लौटने पर उद्दालक ने श्वेतकेतु के बारे में क्या अनुभव किया?
व्याख्या: उद्दालक ने अनुभव किया कि वह अपने ज्ञान के कारण बहुत अहंकारी हो गया है, इसलिए उन्होंने ब्रह्म के स्वरूप पर प्रश्न पूछे।
51उद्दालक ने बरगद के बीज का उदाहरण किसलिए दिया?
व्याख्या: उद्दालक ने समझाया कि ब्रह्म अदृश्य रहते हुए भी सर्वव्यापी है — जैसे बरगद के फल का बीज खोलने पर रिक्त दिखता है, किंतु उसमें वृक्ष का भावी रूप निहित होता है।
52मिट्टी और बर्तनों के उदाहरण से उद्दालक क्या समझाना चाहते थे?
व्याख्या: उन्होंने समझाया कि जैसे एक ही प्रकार की मिट्टी से अलग-अलग बर्तन बनाए जा सकते हैं, उसी प्रकार हमारे चारों ओर जो कुछ भी है, एक ही तत्व — ब्रह्म — से उसका उद्भव हुआ है।
53उद्दालक ने अपनी सीख किन शब्दों से समाप्त की?
व्याख्या: उन्होंने कहा — "सभी में यही सूक्ष्म तत्व व्याप्त है… तुम वही हो, श्वेतकेतु।" यह 'तत् त्वम् असि' का ही कथा-रूप है।
54नचिकेता की कथा किस उपनिषद् से है?
व्याख्या: नचिकेता और उसकी ज्ञान पिपासा की कथा कठोपनिषद् से है।
55नचिकेता ने अपने पिता से बार-बार क्या पूछा?
व्याख्या: पिता यज्ञ के समय समस्त संपत्ति का दान दे रहे थे, और नचिकेता ने बार-बार पूछा कि वे उसे किस देवता को अर्पित करेंगे।
56क्रोध में आकर पिता ने क्या कहा?
व्याख्या: बार-बार यही प्रश्न पूछने पर पिता क्रोध में आ गए और उत्तर दिया — "मैं तुम्हें यम अर्थात मृत्यु के देवता को अर्पित करता हूँ।"
57यमलोक में नचिकेता का प्रश्न क्या था?
व्याख्या: उनके मन में एक प्रश्न था — "शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?"
58यम ने पहले क्या किया, और अंतत: क्या हुआ?
व्याख्या: यम ने पहले तो बालक के प्रश्न का उत्तर टालने का प्रयास किया, किंतु नचिकेता के निरंतर आग्रह करते रहने पर अंतत: प्रसन्न होकर उन्हें आत्मा के बारे में समझाया।
59यम ने आत्मा के बारे में क्या बताया?
व्याख्या: यम ने समझाया कि आत्मा सभी जीवों में निहित है — इसका न तो जन्म होता है और न ही मृत्यु होती है; यह अमर है।
60गार्गी और याज्ञवल्क्य की कथा किस उपनिषद् से है?
व्याख्या: गार्गी और याज्ञवल्क्य के शास्त्रार्थ की कथा बृहदारण्यक उपनिषद् से है।
61दार्शनिक शास्त्रार्थ के विजेता को पुरस्कार देने की घोषणा किसने की?
व्याख्या: एक बार विद्वान राजा जनक ने एक दार्शनिक शास्त्रार्थ के विजेता को पुरस्कार देने की घोषणा की।
62गार्गी कौन थीं?
व्याख्या: गार्गी एक ऋषिका थीं, और उन्होंने विश्व तथा ब्रह्म के स्वरूप पर याज्ञवल्क्य से अनेक प्रश्न पूछे।
63गार्गी के प्रश्नों पर याज्ञवल्क्य ने क्या किया, और फिर क्या हुआ?
व्याख्या: याज्ञवल्क्य ने उन्हें आगे प्रश्न पूछने से मना किया; हालाँकि कुछ समय बाद गार्गी ने पुन: प्रश्न पूछा, तब उन्होंने समझाया कि कैसे ब्रह्म ही संसार, ऋतुओं, नदियों तथा अन्य सभी चीजों का निर्माण करता है।
64उपनिषदों की तीनों कथाओं में क्या समान है?
व्याख्या: तीनों कथाओं में प्रश्न पूछने वाला कोई बड़ा विद्वान नहीं है — श्वेतकेतु और नचिकेता दो बच्चे हैं, और गार्गी एक ऋषिका हैं।
65पुस्तक के अनुसार बौद्ध मत जैसे दर्शनों ने क्या किया?
व्याख्या: कुछ अन्य दर्शनों का अविर्भाव हुआ, जिन्होंने वेदों की प्रभुता को नहीं स्वीकार किया और अपनी स्वयं की पद्धति विकसित की; उनमें से एक बौद्ध मत है।
66सिद्धार्थ गौतम का जन्म कहाँ हुआ?
व्याख्या: लगभग ढाई सहस्राब्दी पूर्व राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने लुंबिनी में जन्म लिया, जो वर्तमान नेपाल में है।
67बुद्ध के जन्म की तिथि के बारे में पुस्तक क्या कहती है?
व्याख्या: पुस्तक स्वयं कहती है कि विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं है, और अध्याय 4 में 560 सा.सं.पू. को अनुमानित जन्म वर्ष माना गया है — तथा इससे कहानी प्रभावित नहीं होगी।
68सिद्धार्थ ने किस आयु में रथ पर नगर-भ्रमण की इच्छा प्रकट की?
व्याख्या: एक दिन, 29 वर्ष की आयु में उन्होंने रथ पर बैठकर नगर में घूमने की इच्छा प्रकट की।
69नगर-भ्रमण में सिद्धार्थ ने क्या-क्या देखा?
व्याख्या: उन्होंने अपने जीवन में पहली बार एक वृद्ध, एक रोगी और एक शव को देखा; और एक संन्यासी को भी, जो प्रसन्न और शांत लग रहा था।
70'संन्यासी' किसे कहते हैं?
व्याख्या: संन्यासी वह व्यक्ति है जो चेतना का उच्चतर स्तर प्राप्त करने के लिए कठोर अनुशासन में रहता है।
71बुद्ध को ज्ञान कहाँ और किस वृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ?
व्याख्या: बोधगया में, जो वर्तमान बिहार में है, एक पीपल के वृक्ष के नीचे कई दिनों तक ध्यानरत रहने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
72बुद्ध के अनुसार मानवीय कष्ट के स्रोत कौन-से हैं?
व्याख्या: उन्होंने अनुभव किया कि 'अविद्या' और 'मोह' मानवीय कष्ट के स्रोत हैं, और इन दोनों कारणों को दूर करने की विधि संकल्पित की।
73'बुद्ध' शब्द का अर्थ क्या है?
व्याख्या: सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए, जिसका अर्थ है 'ज्ञानी' या 'जागृत' व्यक्ति।
74'मोह' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: मोह का अर्थ है किसी व्यक्ति या वस्तु के साथ संबंध की स्थिति, सामान्य रूप से भावना या आदत के माध्यम से।
75'अहिंसा' का मूल अर्थ क्या है?
व्याख्या: बुद्ध के उपदेशों में 'अहिंसा' का विचार निहित है, जिसका मूल अर्थ है — चोट नहीं पहुँचाना या नुकसान नहीं पहुँचाना।
76'संघ' क्या है?
व्याख्या: बुद्ध ने संघ की स्थापना की, जो भिक्षुओं और आगे चलकर भिक्षुणियों का एक समुदाय है।
77'भिक्षुणी' किसे कहते हैं?
व्याख्या: भिक्षुणी का अर्थ है महिला भिक्षु।
78"जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता…" — इस कथन के अनुसार शुद्ध कौन है?
व्याख्या: बुद्ध ने कहा — "परंतु वह व्यक्ति शुद्ध है जिसमें सत्य और धर्म निवास करते हैं।" अर्थात शुद्धता आचरण से आती है, कर्मकांड से नहीं।
79बुद्ध के अनुसार सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?
व्याख्या: बुद्ध ने कहा कि युद्ध के मैदान में हजारों व्यक्तियों पर हजारों बार विजय पाने की तुलना में स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है।
80पृष्ठ 114 की पत्थर की कृति कितनी पुरानी है?
व्याख्या: यह लगभग 1800 वर्ष पुरानी पत्थर की कृति है, जिसमें बुद्ध उपदेश देते हुए दर्शाए गए हैं।
81जैन मत के बारे में पुस्तक क्या कहती है?
व्याख्या: जैन मत एक अन्य महत्वपूर्ण दर्शन है जो उसी समय काफी लोकप्रिय हुआ, यद्यपि इस मत को अधिक प्राचीन माना जाता है। यह अभ्यास के 'सही या गलत' प्रश्न 5 का भी उत्तर है।
82राजकुमार वर्धमान का जन्म कब और कहाँ हुआ?
व्याख्या: राजकुमार वर्धमान का जन्म छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वैशाली नगर के समीप हुआ था, जो वर्तमान बिहार में है।
83महावीर ने किस आयु में अपना घर त्यागा?
व्याख्या: उन्होंने 30 वर्ष की आयु में अपना घर त्यागने और आध्यात्मिक ज्ञान की खोज का निर्णय लिया। ⚠ ध्यान दीजिए — बुद्ध की आयु 29 वर्ष थी।
84महावीर को कितने वर्ष बाद 'अनंत' ज्ञान प्राप्त हुआ?
व्याख्या: उन्होंने संन्यासी जीवन के अनुशासन का पालन किया और 12 वर्ष बाद उन्हें 'अनंत' ज्ञान या सर्वोपरि विवेक प्राप्त हुआ।
85'महावीर' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: उन्हें 'महावीर' या 'महानायक' के नाम से जाना जाने लगा।
86'जैन' शब्द 'जिन' से आया है — 'जिन' का अर्थ क्या है, और किस पर विजय?
व्याख्या: 'जिन' का अर्थ है 'विजेता', पर यह किसी क्षेत्र या शत्रुओं पर विजय नहीं, बल्कि अविद्या और मोह पर विजय है — ताकि ज्ञान प्राप्त किया जा सके।
87जैन मत के तीन मुख्य विचार कौन-से हैं?
व्याख्या: जैन मत के उपदेशों में अहिंसा, 'अनेकांतवाद' और 'अपरिग्रह' शामिल हैं।
88'अनेकांतवाद' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: अनेकांतवाद का अर्थ है 'केवल एक' पक्ष या दृष्टिकोण नहीं; अर्थात सत्य के अनेक पक्ष हैं और इसे केवल एक कथन द्वारा पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता।
89'अपरिग्रह' का क्या अर्थ है?
व्याख्या: अपरिग्रह का अर्थ है 'असंग्रह'; इसके अंतर्गत पार्थिव वस्तुओं से दूर और केवल अनिवार्य वस्तुओं तक सीमित रहने की सलाह दी जाती है।
90जैन मत में किस बात पर बल दिया गया है?
व्याख्या: जैन मत में सभी जीवों, मानवों से लेकर अदृश्य जीवों तक, आपसी संबद्धता और आपसी निर्भरता पर बल दिया गया है, क्योंकि ये सभी एक-दूसरे के पूरक हैं।
91जातक कथाएँ किसकी कहानियाँ हैं?
व्याख्या: जातक कथाएँ बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियाँ हैं और बड़े ही सरल तरीके से बौद्ध आदर्शों को व्यक्त करती हैं।
92वानर-राज ने अपने वानरों को बचाने के लिए क्या किया?
व्याख्या: वानर-राज ने नदी के दूसरे किनारे पर एक पेड़ को पकड़ा और उन्हें नदी पार कराने के लिए अपने शरीर को मानो एक पुल बना दिया; इस प्रक्रिया में वे घायल हुए और अंत में उनकी मृत्यु हो गई।
93वानर-राज के बलिदान का राजा पर क्या प्रभाव पड़ा?
व्याख्या: राजा वानर-राज के इस नि:स्वार्थ बलिदान से बहुत अधिक प्रभावित हुआ और वह भी प्रजा के साथ अपनी भूमिका पर सोच-विचार करने लगा।
94रोहिनेय कौन था?
व्याख्या: रोहिनेय एक बहुत कुशल चोर था, जो पकड़े जाने के सभी प्रयासों को विफल कर देता था।
95मंत्री के जाल से रोहिनेय कैसे बच निकला?
व्याख्या: महावीर के शब्दों को याद रखते हुए रोहिनेय मंत्री की योजना समझ गया और उसके जाल से बच निकला।
96रोहिनेय की कथा क्या सिखाती है?
व्याख्या: यह कहानी सम्यक कर्म और सम्यक विचारों के महत्व को दर्शाती है और यह भी बताती है कि हर व्यक्ति को जीवन में दूसरा अवसर मिलना चाहिए।
97बौद्ध और जैन मत में अहिंसा का अर्थ शारीरिक हिंसा से आगे क्या है?
व्याख्या: दोनों में अहिंसा का अर्थ शारीरिक हिंसा न करने से भी कहीं अधिक है; इसमें विचारों की हिंसा से भी संयम रखने के लिए कहा गया है।
98पृष्ठ 117 का भित्तिचित्र कहाँ से है?
व्याख्या: वह भित्तिचित्र नई दिल्ली के एक जैन मंदिर से है।
99एलोरा की गुफाएँ कब बनाई गईं?
व्याख्या: बौद्ध एलोरा (महाराष्ट्र) में छठवीं और दसवीं शताब्दी सा.सं. के बीच पहाड़ों में काटकर गुफाएँ बनाई गईं।
100एलोरा की गुफाओं में क्या विशेष है?
व्याख्या: इनमें से कुछ गुफाएँ हिंदू दर्शन से हैं, जबकि अन्य बौद्ध और जैन मतों से संबंधित हैं — एक ही स्थान पर तीनों परंपराएँ।
101पत्थर की गुफाओं में क्या मिला है?
व्याख्या: कई स्थानों पर पत्थर की गुफाओं में उन भिक्षुओं के नाम भी मिले हैं जो यहाँ रहते थे और पत्थरों के बिस्तर पर सोए थे।
102पुस्तक 'धर्म' शब्द का प्रयोग क्यों नहीं करती?
व्याख्या: पुस्तक इन्हें 'दर्शन', 'मत' या 'विश्वास' कहती है, क्योंकि इन मतों के अनेक आयाम हैं और अनेक विद्वान मानते हैं कि 'रिलिजन' शब्द भारतीय सभ्यता के संदर्भ में बहुत सीमित है।
103चार्वाक दर्शन को और किस नाम से जाना जाता है?
व्याख्या: चार्वाक दर्शन को कभी-कभी 'लोकायत' भी कहा जाता है।
104चार्वाक दर्शन क्या कहता है?
व्याख्या: चार्वाक के अनुसार यह भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य है और इसलिए मृत्यु के पश्चात जीवन का होना असंभव है।
105पुस्तक ने चार्वाक दर्शन का उल्लेख क्यों किया?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि इसका उल्लेख इसलिए किया गया ताकि यह दर्शाया जा सके कि यहाँ बौद्धिक या आध्यात्मिक विश्वास प्रथाओं में व्यापक विविधता थी और लोग अपने अनुसार इन्हें चुनने के लिए स्वतंत्र थे।
106वैदिक, बौद्ध और जैन दर्शनों में कौन-सी संकल्पनाएँ समान थीं?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि इनमें कुछ समान संकल्पनाएँ थीं — धर्म, कर्म, पुनर्जन्म, दुखों और अज्ञानता के अंत की खोज एवं अनेक अन्य मूल्य; और यही उस वृक्ष का तना है।
107'मौखिक परंपरा' से क्या आशय है?
व्याख्या: इसका अर्थ है उन उपदेशों और प्रथाओं के बारे में ज्ञान जो नित्य अभ्यास के द्वारा आगे संचारित हुआ, न कि लिखित शास्त्रों के द्वारा; और वेदों के संदर्भ में यह लागू होता है।
108मानव वैज्ञानिक जनजाति को क्या मानते हैं?
व्याख्या: मानव वैज्ञानिक जनजाति को उन परिवारों या वंशों का समूह मानते हैं जो एक सामान्य उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा साझा करते हैं, समुदाय में रहते हैं, जिसके एक मुखिया होते हैं, और जिनके पास कोई निजी संपत्ति नहीं होती।
109प्राचीन भारत में 'जनजाति' के लिए कौन-सा शब्द था?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि प्राचीन भारत में 'जनजाति' के लिए कोई शब्द नहीं था — जनजातियाँ केवल अलग-अलग जन थीं जो एक विशेष परिवेश में रहती थीं, जैसे वन या पहाड़।
110वर्ष 2011 में भारत में कितनी जनजातियाँ थीं?
व्याख्या: आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 में भारत के अधिकांश राज्यों में 705 जनजातियाँ निवास करती थीं।
1112011 में जनजातीय जनसंख्या लगभग कितनी थी?
व्याख्या: उनकी संख्या लगभग 104 मिलियन थी — यह ऑस्ट्रेलिया और युनाइटेड किंगडम की कुल जनसंख्या से अधिक है।
11219वीं शताब्दी के मानव वैज्ञानिकों के विचारों का क्या हुआ?
व्याख्या: उन्होंने जनजातियों को प्राय: 'आदिम' या 'हीन' बताया था, किंतु जनजातीय समुदायों तथा उनकी समृद्ध एवं जटिल संस्कृतियों के गहन अध्ययन के बाद इन विचारों को अधिकांशत: नकार दिया गया है।
113लोक-जनजातीय परंपराओं और प्रमुख विचारधाराओं के बीच आदान-प्रदान किस दिशा में हुआ?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि दोनों ही दिशाओं में देवताओं, संकल्पनाओं, दंतकथाओं और रीतियों का आपस में आदान-प्रदान होता रहा है।
114पुरी के भगवान जगन्नाथ के बारे में पुस्तक क्या कहती है?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि परंपरा के अनुसार पुरी (ओडिशा) के भगवान जगन्नाथ मूल रूप से जनजाति देवता थे।
115प्रमुख परंपरा से जनजातीय परंपरा की ओर आदान-प्रदान का उदाहरण क्या है?
व्याख्या: कुछ जनजातियों में हिंदू देवों को काफी समय पहले ही अपना लिया गया था और महाभारत तथा रामायण के उनके अपने रूप हैं — यह पूर्वोत्तर से तमिलनाडु तक लिखा गया है।
116यह परस्पर संपर्क इतनी सहजता से क्यों हो सका?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि लोक, जनजातियों और हिंदू विश्वास में अनेक समान प्रकार की संकल्पनाएँ थीं।
117तीनों परंपराओं में प्राकृतिक तत्वों को पवित्र क्यों माना गया?
व्याख्या: तीनों में पर्वतों, नदियों, पेड़ों, पौधों और जंतुओं तथा कुछ पत्थरों को भी पवित्र माना गया, क्योंकि इन सबमें चेतना है।
118टोडा जनजाति के अनुसार नीलगिरि पर्वत के कितने शिखर देवी-देवताओं के निवास स्थान हैं?
व्याख्या: टोडा जनजाति के अनुसार इस पर्वत के 30 से अधिक शिखर देवी-देवताओं के निवास स्थान हैं; ये इतने पवित्र माने गए हैं कि वे अपनी अंगुली से इनकी ओर संकेत भी नहीं करते।
119डोनीपोलो किसके मिले-जुले रूप माने गए हैं, और कहाँ पूजे जाते हैं?
व्याख्या: अरुणाचल प्रदेश की अनेक जनजातियाँ डोनीपोलो की पूजा करती हैं, जो सूर्य और चंद्रमा के मिले-जुले रूप माने गए हैं और आगे चलकर परमात्मा माने गए।
120सिंगबोंगा की पूजा कौन-सी जनजातियाँ करती हैं?
व्याख्या: पूर्वी भारत में मुंडा और संथाल जनजातियाँ सिंगबोंगा की पूजा करती हैं, जिन्हें वे परमेश्वर कहते हैं और जिन्होंने यह संपूर्ण विश्व बनाया है।
121'जनजातीय विश्वास परंपराएँ आत्मा और छोटे देवों तक सीमित हैं' — यह कथन —
व्याख्या: यह कथन ग़लत है। पुस्तक कहती है कि हिंदू धर्म के समान अनेक जनजातियों में भी उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना है — जैसे डोनीपोलो और सिंगबोंगा।
122आंद्रे बेते के कथन का मुख्य बिंदु क्या है?
व्याख्या: बेते कहते हैं कि जनजातीय धर्मों पर हिंदू दर्शन के प्रभाव को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है, किंतु यह भी सत्य है कि न केवल निर्माण के चरण में, बल्कि पूरे विकास-क्रम में हिंदू दर्शन जनजातीय आस्थाओं से प्रभावित हुआ है।
123आंद्रे बेते कौन हैं?
व्याख्या: आंद्रे बेते एक भारतीय समाजशास्त्री हैं, जिनका कथन पृष्ठ 121 पर उद्धृत है।
124पुस्तक के अनुसार इस लंबे समय के परस्पर संपर्क का परिणाम क्या रहा?
व्याख्या: पुस्तक कहती है — "स्पष्ट रूप से, इस लंबे समय के परस्पर संपर्क का परिणाम आपसी समृद्धि रही है।"
125वटवृक्ष को इस अध्याय का प्रतीक क्यों चुना गया?
व्याख्या: वटवृक्ष अपनी उन शाखाओं को, जो तने से जुड़ी होती हैं, नई जड़ें बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है — अर्थात शाखा और जड़ का भेद मिट जाता है। यही पूरे अध्याय का तर्क है।
126वटवृक्ष किन अध्यायों की विषयवस्तुओं के लिए दृष्टांत बताया गया है?
व्याख्या: पुस्तक कहती है कि वटवृक्ष अध्याय 7 और 8 की विषयवस्तुओं के लिए एक उपयुक्त दृष्टांत तथा भारतीय सभ्यता का उत्कृष्ट प्रतीक है।
127निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
व्याख्या: बुद्ध 29 वर्ष की आयु में रथ पर नगर-भ्रमण पर गए और चार दृश्य देखे; महावीर ने 30 वर्ष की आयु में घर त्यागा।
128बुद्ध और महावीर के जन्मस्थान क्रमश: कौन-से हैं?
व्याख्या: बुद्ध का जन्म लुंबिनी में हुआ, जो वर्तमान नेपाल में है; और महावीर का जन्म वैशाली नगर के समीप हुआ, जो वर्तमान बिहार में है।
129बोधगया किसलिए जाना जाता है?
व्याख्या: बोधगया (वर्तमान बिहार में) वह स्थान है जहाँ बुद्ध को पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ। वैशाली महावीर का जन्मस्थान है — दोनों बिहार में हैं, इसीलिए ये भ्रमित होते हैं।
130इस अध्याय में '12 वर्ष' दो जगह आता है — कहाँ-कहाँ?
व्याख्या: श्वेतकेतु 12 वर्ष गुरुकुल में रहा; और महावीर को संन्यासी जीवन के 12 वर्ष बाद 'अनंत' ज्ञान प्राप्त हुआ।

