कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 105–124 हर प्रश्न के तुरंत बाद उसका उत्तर है — शिक्षक के मूल्यांकन और कक्षा-प्रश्नोत्तरी के लिए। योग्यता-आधारित, प्रकरण वाले प्रश्नों के लिए
08-PARAKH-Question-Bank.mdदेखिए।
! शब्दावली की एक बात: पुस्तक ‘धर्म’ शब्द का प्रयोग नहीं करती — वह ‘दर्शन’, ‘मत’ और ‘विश्वास’ कहती है (पृ. 118)। उत्तरों में यही शब्दावली प्रयोग कीजिए।
खंड क — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)
1अध्याय के आरंभ का उद्धरण कहाँ से है, और वह किस संपत्ति की बात करता है?
उत्तर देखिए
सुभाषित (नीतिशतक) से; सच्चे ज्ञान की संपत्ति की।
2‘वेद’ शब्द कहाँ से आया है और उसका अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
विद् से; अर्थ है ‘ज्ञान’ (जैसे विद्या)।
3चार वेदों के नाम लिखिए।
उत्तर देखिए
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
4वैदिक ऋचाएँ किस रूप में थीं?
उत्तर देखिए
लिखित रूप में नहीं — उनका मौखिक पाठ किया जाता था।
5वेद कितनी पीढ़ियों तक मौखिक रूप से संप्रेषित किए गए?
उत्तर देखिए
100 से 200 पीढ़ियों तक।
6यूनेस्को ने वैदिक पाठशैली को कब मान्यता दी?
उत्तर देखिए
2008 में।
7यूनेस्को का पूरा नाम क्या है?
उत्तर देखिए
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन।
8ऋचाओं की रचना किसने की?
उत्तर देखिए
ऋषियों (कवि) और ऋषिकाओं (कवियत्रियों) ने।
9एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति का अर्थ लिखिए।
उत्तर देखिए
“परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं।”
10‘जन’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
लोगों का बड़ा समूह।
11ऋग्वेद में कितने जनों की सूची है? कोई दो नाम लिखिए।
उत्तर देखिए
30 से अधिक; भरत, पुरु, कुरु, यदु, तुर्वश (कोई दो)।
12‘सभा’ और ‘समिति’ शब्द क्या इंगित करते हैं?
उत्तर देखिए
दोनों सामूहिकता को इंगित करते हैं।
13‘आरोग्यकर्ता’ कौन होता है?
उत्तर देखिए
वह व्यक्ति जो राहत देने या रोग ठीक करने के लिए पारंपरिक प्रथाओं का उपयोग करता है।
14उपनिषदों की दो नई संकल्पनाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
पुनर्जन्म (बार-बार जन्म लेना) और कर्म (हमारे कर्म और कर्म-फल)।
15‘ब्रह्म’ क्या है?
उत्तर देखिए
वह एक दैवी तत्व, जिससे सब कुछ — मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड — बना है; कभी-कभी इसे केवल ‘तत्’ कहा जाता है। ! यह ब्रह्मा देव से भिन्न है।
16अहम् ब्रह्मास्मि का अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
“मैं ब्रह्म हूँ” — अर्थात, मैं दिव्य हूँ।
17‘आत्मन्’ क्या है?
उत्तर देखिए
स्व, जो प्रत्येक जीव में निवास करता है, परंतु ब्रह्म का ही स्वरूप होता है।
18सर्वे भवन्तु सुखिन: का अर्थ लिखिए।
उत्तर देखिए
“सभी जीव सुखी रहें।”
19योग ने किस उद्देश्य से विधियाँ विकसित कीं?
उत्तर देखिए
किसी व्यक्ति की चेतना में ब्रह्म का आत्म-बोध प्राप्त करने के उद्देश्य से।
20श्वेतकेतु की कथा किस उपनिषद् से है?
उत्तर देखिए
छांदोग्य उपनिषद् से।
21नचिकेता की कथा किस उपनिषद् से है?
उत्तर देखिए
कठोपनिषद् से।
22गार्गी और याज्ञवल्क्य की कथा किस उपनिषद् से है?
उत्तर देखिए
बृहदारण्यक उपनिषद् से।
23बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तर देखिए
लुंबिनी में, जो वर्तमान नेपाल में है।
24बुद्ध ने किस आयु में नगर-भ्रमण किया?
उत्तर देखिए
29 वर्ष की आयु में।
25बुद्ध को ज्ञान कहाँ और किस वृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ?
उत्तर देखिए
बोधगया (वर्तमान बिहार) में, पीपल के वृक्ष के नीचे।
26‘बुद्ध’ शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
‘ज्ञानी’ या ‘जागृत’ व्यक्ति।
27बुद्ध के अनुसार मानवीय कष्ट के दो स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
‘अविद्या’ और ‘मोह’।
28‘भिक्षुणी’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
महिला भिक्षु।
29महावीर का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर देखिए
छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में, वैशाली (वर्तमान बिहार) नगर के समीप।
30महावीर ने किस आयु में घर त्यागा, और कितने वर्ष बाद उन्हें ज्ञान मिला?
उत्तर देखिए
30 वर्ष की आयु में; 12 वर्ष बाद।
31‘जिन’ शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
‘विजेता’।
32‘अपरिग्रह’ का अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
‘असंग्रह’।
33जातक कथाएँ किसकी कहानियाँ हैं?
उत्तर देखिए
बुद्ध के पूर्व जन्मों की।
34एलोरा की गुफाएँ कब बनीं?
उत्तर देखिए
छठवीं और दसवीं शताब्दी सा.सं. के बीच।
35‘चार्वाक’ दर्शन को और किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर देखिए
‘लोकायत’।
36वर्ष 2011 में भारत में कितनी जनजातियाँ थीं, और उनकी संख्या कितनी थी?
उत्तर देखिए
705 जनजातियाँ; लगभग 104 मिलियन।
37डोनीपोलो किसके मिले-जुले रूप माने गए हैं?
उत्तर देखिए
सूर्य और चंद्रमा के।
38मुंडा और संथाल जनजातियाँ किसकी पूजा करती हैं?
उत्तर देखिए
सिंगबोंगा की, जिन्हें वे परमेश्वर कहते हैं।
खंड ख — लघु उत्तरीय (2–3 अंक)
1पुस्तक भारतीय संस्कृति की तुलना किससे करती है? यह रूपक समझाइए। (3)
उत्तर देखिए
पुस्तक भारतीय संस्कृति की तुलना एक प्राचीन वृक्ष से करती है। किसी प्राचीन वृक्ष के समान इसमें अनेक जड़ें और अनेक शाखाएँ हैं। जड़ें एक सामान्य तने को पोषण देती हैं, और इस तने से अनेक शाखाएँ निकलती हैं जो भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं — जैसे कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, धर्म, शासन पद्धति और मार्शल आर्ट्स। हालाँकि ये सब एक ही सामान्य तने से जुड़ी हुई हैं।
2वेदों के बारे में चार बातें लिखिए। (2)
उत्तर देखिए
‘वेद’ शब्द विद् से आया है, जिसका अर्थ है ‘ज्ञान’। (2) चार वेद हैं — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। (3) ये भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं और विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक हैं। (4) इनमें हजारों ऋचाएँ हैं, जो कविताओं और गीतों के रूप में प्रार्थनाएँ हैं।
3★वेदों की मौखिक परंपरा के बारे में लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
वैदिक ऋचाएँ लिखित रूप में नहीं थीं, अपितु इनका मौखिक पाठ किया जाता था। यह ग्रंथ 100 से 200 पीढ़ियों तक गहन प्रशिक्षण के माध्यम से स्मृतिबद्ध किए गए एवं मौखिक रूप से बिना किसी विशेष परिवर्तन के आगे संप्रेषित किए गए। इसी सुव्यवस्थित संप्रेषण को 2008 में यूनेस्को ने ‘मानवीयता के मौखिक और अमूर्त विरासत की अनुपम कोटि’ के रूप में मान्यता दी।
4★एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति का क्या अर्थ है, और यह किस बात को दर्शाता है? (2)
उत्तर देखिए
इसका अर्थ है — “परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं।” यह दर्शाता है कि आद्य ऋषियों और ऋषिकाओं ने देवताओं और देवियों को अलग नहीं, बल्कि एक ही माना।
5वैदिक समाज कैसे संगठित था? (2)
उत्तर देखिए
प्रारंभिक वैदिक समाज विभिन्न जनों में संगठित था, अर्थात लोगों के बड़े समूहों में। ऋग्वेद में ही ऐसे 30 से अधिक जनों की सूची दी गई है — उदाहरणार्थ भरत, पुरु, कुरु, यदु और तुर्वश। प्रत्येक जन उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग के एक विशेष क्षेत्र के साथ जुड़ा था।
6वैदिक ग्रंथों में उल्लिखित व्यवसायों की सूची बनाइए। (2)
उत्तर देखिए
किसान, बुनकर, कुम्हार, शिल्पकार, बढ़ई, आरोग्यकर्ता, नर्तक-नर्तकी, नाई और पुजारी।
7‘वेदांत’ दर्शन क्या कहता है? (2)
उत्तर देखिए
वेदांत के अनुसार सब कुछ — मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड — एक दैवी तत्व है, जिसे ‘ब्रह्म’ (यह ब्रह्मा देव से भिन्न है) अथवा कभी-कभी केवल ‘तत्’ कहा जाता है।
8उपनिषदों में आत्मन् की क्या संकल्पना है? (3)
उत्तर देखिए
उपनिषदों में आत्मन् या स्व की संकल्पना की गई है, जो प्रत्येक जीव में निवास करता है, परंतु ब्रह्म का ही स्वरूप होता है। इसके अनुसार इस दुनिया में सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और परस्पर निर्भर है। इसमें एक महत्वपूर्ण प्रार्थना समझाई गई है जो “सर्वे भवन्तु सुखिन:” या “सभी जीव सुखी रहें” के साथ आरंभ होती है और सबके लिए रोग तथा दुख से मुक्ति की कामना करती है।
9★श्वेतकेतु की कथा में उद्दालक ने कौन-से दो उदाहरण दिए? (3)
उत्तर देखिए
बरगद के फल का बीज खोलने पर रिक्त (खाली) दिखाई देता है, किंतु इसमें बरगद के वृक्ष का भावी रूप निहित होता है। (2) जैसे एक ही प्रकार की मिट्टी से अलग-अलग प्रकार के बर्तन बनाए जा सकते हैं, उसी प्रकार हमारे चारों ओर जो कुछ भी है, एक ही तत्व — ब्रह्म — से उसका उद्भव हुआ है।
उन्होंने अपनी सीख यह कहकर समाप्त की — “सभी में यही सूक्ष्म तत्व व्याप्त है… तुम वही हो, श्वेतकेतु।”
10नचिकेता की कथा संक्षेप में लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
एक व्यक्ति यज्ञ के समय अपनी समस्त संपत्ति का दान दे रहे थे। उनके पुत्र नचिकेता ने पूछा कि वे उसे किस देवता को अर्पित करेंगे। बार-बार यही प्रश्न पूछने पर पिता क्रोध में आ गए और उत्तर दिया कि “मैं तुम्हें यम अर्थात मृत्यु के देवता को अर्पित करता हूँ।” नचिकेता यमलोक की ओर निकल पड़े। उनका प्रश्न था — “शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?” यम ने पहले तो उत्तर टालने का प्रयास किया, किंतु नचिकेता के निरंतर आग्रह करते रहने पर अंतत: उन्होंने प्रसन्न होकर आत्मा के बारे में समझाया, जो सभी जीवों में निहित है — इसका न तो जन्म होता है और न ही मृत्यु; यह अमर है।
11★गार्गी और याज्ञवल्क्य की कथा में क्या हुआ? (3)
उत्तर देखिए
विद्वान राजा जनक ने एक दार्शनिक शास्त्रार्थ के विजेता को पुरस्कार देने की घोषणा की। याज्ञवल्क्य नामक सुप्रसिद्ध ऋषि राजदरबार में आए और गार्गी (एक ऋषिका) के प्रश्न पूछने से पहले तक अनेक विद्वानों को पराजित किया। गार्गी ने विश्व के स्वरूप पर अनेक प्रश्न पूछे और अंत में ब्रह्म के स्वरूप पर भी। तब याज्ञवल्क्य ने उन्हें आगे प्रश्न पूछने से मना किया। हालाँकि कुछ समय बाद गार्गी ने पुन: प्रश्न पूछा, तब याज्ञवल्क्य ने समझाया कि कैसे ब्रह्म ही संसार, ऋतुओं, नदियों तथा अन्य सभी चीजों का निर्माण करता है।
12★बुद्ध ने नगर-भ्रमण के समय क्या देखा, और उसका क्या परिणाम हुआ? (3)
उत्तर देखिए
29 वर्ष की आयु में रथ पर बैठकर नगर में घूमते समय उन्होंने अपने जीवन में पहली बार एक वृद्ध, एक रोगी और एक शव को देखा। उन्होंने एक संन्यासी को भी देखा, जो प्रसन्न और शांत लग रहा था। इन सबका अनुभव करने के बाद सिद्धार्थ ने अपने राजसी जीवन, अपनी पत्नी और बेटे को त्यागने का विचार किया।
13बुद्ध के उपदेशों की मुख्य बातें लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
उन्होंने अनुभव किया कि ‘अविद्या’ और ‘मोह’ मानवीय कष्ट के स्रोत हैं। उनके उपदेशों में ‘अहिंसा’ का विचार निहित है, जिसका मूल अर्थ है — चोट नहीं पहुँचाना या नुकसान नहीं पहुँचाना। उन्होंने निष्ठापूर्वक आंतरिक अनुशासन पर भी बल दिया। उन्होंने संघ की स्थापना की, जो भिक्षुओं (आगे चलकर भिक्षुणियों) का एक समुदाय है।
14★‘जैन’ शब्द कहाँ से आया है, और उसका असली आशय क्या है? (2)
उत्तर देखिए
‘जैन’ शब्द जिन से आया है, जिसका अर्थ है ‘विजेता’। इसका अर्थ किसी क्षेत्र या शत्रुओं पर विजय पाने से नहीं है, बल्कि अविद्या और मोह पर विजय पाने से है, ताकि ज्ञान प्राप्त किया जा सके।
15★जैन मत के तीन विचार लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
अहिंसा — किसी भी सांस लेने वाले, जीवित, संवेदनशील जीव को मारा, सताया या दुर्व्यवहार न किया जाए। (2) अनेकांतवाद — ‘केवल एक’ पक्ष या दृष्टिकोण नहीं; सत्य के अनेक पक्ष हैं और इसे केवल एक कथन द्वारा पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता। (3) अपरिग्रह — ‘असंग्रह’; पार्थिव वस्तुओं से दूर और स्वयं को केवल अनिवार्य वस्तुओं तक सीमित रखना।
16पुस्तक ‘धर्म’ शब्द का प्रयोग क्यों नहीं करती? (3)
उत्तर देखिए
पुस्तक कहती है कि अंग्रेजी में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख मतों को ‘धर्म’ कहा जाता है, किंतु उसने इन्हें ‘दर्शन’ या ‘मत’ और ‘विश्वास’ कहा है। इसका कारण यह है कि इन मतों और दर्शनों के अनेक आयाम हैं — दार्शनिक, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक और धार्मिक पक्ष। अनेक विद्वान मानते हैं कि अंग्रेजी का शब्द ‘रिलिजन’ भारतीय सभ्यता के संदर्भ में बहुत सीमित है।
17★पुस्तक ने चार्वाक दर्शन का उल्लेख क्यों किया? (2)
उत्तर देखिए
चार्वाक के अनुसार यह भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य है और मृत्यु के पश्चात जीवन का होना असंभव है।
पुस्तक कहती है कि इसका उल्लेख इसलिए किया गया “ताकि यह दर्शाया जा सके कि यहाँ बौद्धिक या आध्यात्मिक विश्वास प्रथाओं में व्यापक विविधता थी और लोग अपने अनुसार इन्हें चुनने के लिए स्वतंत्र थे।”
18‘जनजाति’ की परिभाषा लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
मानव वैज्ञानिक जनजाति को उन परिवारों या वंशों का समूह मानते हैं, जो एक सामान्य उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा साझा करते हैं; आपस में निकट संबंध बनाए रखते हुए समुदाय में रहते हैं; जिसके एक मुखिया होते हैं; और जिनके पास अपनी कोई निजी संपत्ति नहीं होती है।
19★प्राचीन भारत में ‘जनजाति’ शब्द के बारे में पुस्तक क्या कहती है? (2)
उत्तर देखिए
पुस्तक कहती है कि प्राचीन भारत में ‘जनजाति’ के लिए कोई शब्द नहीं था — जनजातियाँ केवल अलग-अलग जन थीं जो एक विशेष परिवेश में रहती थीं, जैसे कि वन या पहाड़। भारत के संविधान में अंग्रेजी में ‘ट्राइब’ और ‘ट्राइबल कम्युनिटी’ तथा हिंदी में ‘जनजाति’ शब्द का उपयोग किया गया है।
2019वीं शताब्दी के मानव वैज्ञानिकों के विचारों के बारे में पुस्तक क्या कहती है? (2)
उत्तर देखिए
19वीं शताब्दी में जनजातियों का अध्ययन करने वाले मानव वैज्ञानिकों ने उन्हें प्राय: सभ्य मानवों की तुलना में ‘आदिम’ या ‘हीन’ बताया है। जनजातीय समुदायों तथा उनकी समृद्ध एवं जटिल संस्कृतियों के गहन अध्ययन के बाद इस प्रकार के पक्षपातपूर्ण विचारों को अधिकांशत: नकार दिया गया है।
21★चार जनजातीय उदाहरण लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
तमिलनाडु के नीलगिरि पर्वत की टोडा जनजाति — इस पर्वत के 30 से अधिक शिखर देवी-देवताओं के निवास स्थान हैं; ये इतने पवित्र माने जाते हैं कि टोडा लोग अपनी अंगुली से इनकी ओर संकेत भी नहीं करते। (2) अरुणाचल प्रदेश की अनेक जनजातियाँ — डोनीपोलो, जो सूर्य और चंद्रमा के मिले-जुले रूप माने गए और आगे चलकर परमात्मा माने गए। (3) मध्य भारत — खंडोबा भगवान। (4) पूर्वी भारत की मुंडा और संथाल जनजातियाँ — सिंगबोंगा, जिन्हें वे परमेश्वर कहते हैं और जिन्होंने संपूर्ण विश्व बनाया है।
22‘आगे बढ़ने से पहले’ के चार बिंदु लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
भारत के प्राचीनतम ग्रंथ, वेदों ने अनेक दर्शनों को जन्म दिया; वेदांत और योग इनमें प्रमुख हैं। (2) बौद्ध और जैन मत वेदों के प्राधिकार क्षेत्र से परे गए और उन्होंने कुछ विशिष्ट मूल्यों एवं प्रथाओं पर बल दिया। (3) यद्यपि इन मतों के सिद्धांत और विधियाँ भिन्न थे, फिर भी इनमें कुछ महत्वपूर्ण संकल्पनाएँ समान थीं; ये दुख के कारण और अज्ञान के निवारण के साधनों का पता लगाने का सतत प्रयास करते रहे। (4) हजारों वर्षों से जनजातीय विश्वास, प्रथाओं तथा कलाओं का हिंदू दर्शन के साथ मेल-जोल होता रहा है, और इनके बीच दोनों ओर से अबाधित आदान-प्रदान चलता रहा है।
खंड ग — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)
1★★उपनिषदों की तीन कथाओं में क्या समान है? तीनों का संक्षिप्त विवरण देते हुए समझाइए।
उत्तर देखिए
पुस्तक स्वयं आरंभ में कहती है — “उपनिषदों की कई कथाओं से हमें प्रश्न पूछने के महत्व का पता चलता है। फिर चाहे ये प्रश्न किसी महिला, पुरुष या बच्चे ने पूछे हों।”
- श्वेतकेतु (छांदोग्य उपनिषद्) — 12 वर्ष गुरुकुल में बिताकर लौटा, पर अहंकारी हो गया था और पिता उद्दालक के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सका। उद्दालक ने बरगद के बीज और एक ही मिट्टी से बने अलग-अलग बर्तनों के उदाहरण से समझाया — “तुम वही हो, श्वेतकेतु।”
- नचिकेता (कठोपनिषद्) — पिता से बार-बार प्रश्न पूछा; यमलोक गया; यम ने पहले उत्तर टालना चाहा, पर नचिकेता के निरंतर आग्रह पर उन्होंने आत्मा के बारे में समझाया — “इसका न तो जन्म होता है और न ही मृत्यु; यह अमर है।”
- गार्गी (बृहदारण्यक उपनिषद्) — एक ऋषिका, जिसने याज्ञवल्क्य से ब्रह्म के स्वरूप पर प्रश्न पूछे। याज्ञवल्क्य ने उन्हें आगे प्रश्न पूछने से मना किया — हालाँकि कुछ समय बाद गार्गी ने पुन: प्रश्न पूछा, और तभी उन्हें उत्तर मिला।
★समानतातीनों में कोई प्रश्न पूछ रहा है, और तीनों में वह कोई बड़ा विद्वान नहीं है — दो बच्चे और एक स्त्री। तीनों कथाएँ यही सिखाती हैं कि प्रश्न पूछना ही ज्ञान का द्वार है।
2★बुद्ध की जीवन-कथा और उनके उपदेशों पर विस्तार से लिखिए।
उत्तर देखिए
जन्म और पृष्ठभूमि लगभग ढाई सहस्राब्दी पूर्व राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने लुंबिनी (वर्तमान नेपाल में) जन्म लिया। पुस्तक स्वयं कहती है कि उनके जन्म के समय पर विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं है, और अध्याय 4 में 560 सा.सं.पू. को अनुमानित जन्म वर्ष माना गया है।
चार दृश्य वे राजमहल में सुरक्षित वातावरण में बड़े हुए। 29 वर्ष की आयु में रथ पर
नगर-भ्रमण करते समय उन्होंने पहली बार एक वृद्ध, एक रोगी और एक शव देखा; और एक संन्यासी
भी, जो प्रसन्न और शांत लग रहा था।
त्याग और ज्ञान इसके बाद उन्होंने राजसी जीवन, पत्नी और बेटे को त्यागने का विचार किया।
संन्यासी की तरह पैदल चलते हुए और अन्य संन्यासियों व विद्वानों से मिलते हुए उन्होंने दुखों के मूल कारण को खोजा। बोधगया (वर्तमान बिहार) में पीपल के वृक्ष के नीचे कई दिनों तक ध्यानरत
रहने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
खोज उन्होंने अनुभव किया कि ‘अविद्या’ और ‘मोह’ मानवीय कष्ट के स्रोत हैं। इसके बाद वे
‘बुद्ध’ कहलाए — ‘ज्ञानी’ या ‘जागृत’ व्यक्ति।
उपदेशअहिंसा (मूल अर्थ — चोट या नुकसान न पहुँचाना) और आंतरिक अनुशासन। उन्होंने
संघ की स्थापना की — भिक्षुओं और आगे चलकर भिक्षुणियों का समुदाय। भारत और पूरे एशिया पर उनका गहरा प्रभाव था, जो आज भी अनुभव किया जा सकता है।
3★जैन मत के मुख्य विचारों को समझाइए। (अभ्यास प्रश्न 4)
उत्तर देखिए
महावीर राजकुमार वर्धमान का जन्म छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वैशाली (वर्तमान बिहार) के समीप हुआ। 30 वर्ष की आयु में घर त्यागा, संन्यासी जीवन के अनुशासन का
पालन किया, और 12 वर्ष बाद उन्हें ‘अनंत’ ज्ञान प्राप्त हुआ। वे ‘महावीर’ या ‘महानायक’ कहलाए।
‘जैन’ शब्द: जिन से — ‘विजेता’; पर किसी क्षेत्र या शत्रु पर नहीं, अविद्या और मोह पर विजय।
तीन मुख्य विचार
- अहिंसा — महावीर का कथन: “सभी सांस लेने वाले, उपस्थित, जीवित, संवेदनशील जीवों को मारा न जाए, न ही उनके साथ हिंसा की जाए, न दुर्व्यवहार किया जाए, न ही सताया जाए तथा न ही दूर हटाया जाए।”
- अनेकांतवाद — ‘केवल एक’ पक्ष या दृष्टिकोण नहीं; सत्य के अनेक पक्ष हैं और इसे केवल एक कथन द्वारा पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता।
- अपरिग्रह — ‘असंग्रह’; पार्थिव वस्तुओं से दूर और केवल अनिवार्य वस्तुओं तक सीमित रहना।
आपसी संबद्धता जैन मत में सभी जीवों, मानवों से लेकर अदृश्य जीवों तक, आपसी संबद्धता और आपसी निर्भरता पर बल दिया गया है — क्योंकि ये सभी एक-दूसरे के पूरक हैं और एक-दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते। “प्रकृति, जीवों और वनस्पतियों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने इस गहन सत्य की बार-बार पुष्टि की है।”
★और यह भी जोड़िए ये विचार बौद्ध तथा वेदांत दर्शन के विचारों को काफी हद तक साझा करते हैं, जो भारतीय संस्कृति के केंद्र में हैं।
4★★वैदिक, बौद्ध और जैन दर्शनों में क्या समान था? ‘वृक्ष’ के रूपक से इसे जोड़िए।
उत्तर देखिए
भिन्नताएँ थीं, पर साझी संकल्पनाएँ भी थीं। पुस्तक कहती है: “यद्यपि वैदिक, बौद्ध और जैन दर्शनों में महत्वपूर्ण भिन्नताएँ थीं, तथापि उनमें कुछ समान संकल्पनाएँ भी थीं, जैसे — धर्म, कर्म, पुनर्जन्म, दुखों और अज्ञानता के अंत की खोज एवं अनेक अन्य महत्वपूर्ण मूल्य।”
★वृक्ष से जोड़: “वास्तव में यह उस वृक्ष का तना या मूल भाग है जिसके उदाहरण के साथ हमने इस अध्याय की शुरुआत की थी।”
अन्य उदाहरण जो यह दिखाते हैं
- ‘अविद्या और मोह’ — ये ठीक वही दो शब्द हैं जो बुद्ध के लिए आए और ‘जिन’ की व्याख्या में भी।
- ‘सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है’ — यह उपनिषदों में भी है और जैन मत में भी।
- एलोरा में एक ही पहाड़ में हिंदू, बौद्ध और जैन — तीनों परंपराओं की गुफाएँ हैं।
- और वटवृक्ष (पृ. 123), जिसकी शाखाएँ नई जड़ें बनाती हैं — शाखा और जड़ का भेद मिट जाता है।
5★लोक और जनजातीय परंपराओं का भारतीय संस्कृति में क्या योगदान रहा है?
उत्तर देखिए
मौखिक परंपराएँ शास्त्रों के अलावा भारत में समृद्ध मौखिक परंपराएँ भी रही हैं — ज्ञान जो नित्य अभ्यास के द्वारा आगे संचारित हुआ, न कि लिखित शास्त्रों के द्वारा। “वेदों के संदर्भ में यह लागू होता है।”
★★आदान-प्रदान दोनों दिशाओं में
- जनजातीय → प्रमुख परंपरा: परंपरा के अनुसार पुरी (ओडिशा) के भगवान जगन्नाथ मूल रूप से जनजाति देवता थे; देवी माताओं के विभिन्न रूपों के लिए भी यही कहा जा सकता है।
- प्रमुख परंपरा → जनजातीय: कुछ जनजातियों में हिंदू देवों को काफी समय पहले ही अपना लिया गया, और महाभारत तथा रामायण के उनके अपने रूप हैं — पूर्वोत्तर से तमिलनाडु तक।
यह संपर्क सहजता से क्यों हुआ“क्योंकि लोक, जनजातियों और हिंदू विश्वास में अनेक समान प्रकार की संकल्पनाएँ थीं।” तीनों में प्राकृतिक तत्वों — पर्वतों, नदियों, पेड़ों, पौधों, जंतुओं और कुछ पत्थरों — को पवित्र माना गया, क्योंकि इन सबमें चेतना है।
उदाहरणटोडा (नीलगिरि के 30 से अधिक शिखर); डोनीपोलो (अरुणाचल — सूर्य और चंद्रमा के मिले-जुले रूप); खंडोबा (मध्य भारत); सिंगबोंगा (मुंडा और संथाल — “जिन्हें वे परमेश्वर कहते हैं”)।
★निष्कर्ष“देवताओं में इतनी बहुलता के पश्चात, हिंदू धर्म के समान अनेक जनजातियों में भी उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना है।” और “इस लंबे समय के परस्पर संपर्क का परिणाम आपसी समृद्धि रही है।”
6आंद्रे बेते के कथन पर विचार-विमर्श कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 5)
उत्तर देखिए
कथन“भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाली हजारों जातियाँ और जनजातियाँ इतिहास के आरंभिक समय तथा उससे भी पहले से आपस में एक-दूसरे की धार्मिक आस्थाओं और प्रथाओं को प्रभावित करती रही हैं। जनजातीय धर्मों पर हुए हिंदू दर्शन के प्रभाव को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है, किंतु यह भी सत्य है कि न केवल इसके निर्माण के चरण में, बल्कि इसके पूरे विकास-क्रम में हिंदू दर्शन जनजातीय आस्थाओं से प्रभावित हुआ है।”
★कथन का मुख्य बिंदु प्रभाव दोनों दिशाओं में गया।
- पहली दिशा (हिंदू दर्शन → जनजातीय धर्म) को “व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है” — अर्थात यह सब मानते हैं।
- ★बेते दूसरी दिशा पर ज़ोर देते हैं — हिंदू दर्शन भी जनजातीय आस्थाओं से प्रभावित हुआ।
- और यह भी कि यह प्रभाव केवल आरंभ में नहीं, “पूरे विकास-क्रम में” चलता रहा।
पुस्तक के उदाहरण जो इसे सिद्ध करते हैंजगन्नाथ, जो परंपरा के अनुसार मूल रूप से
जनजाति देवता थे; और देवी माताओं के विभिन्न रूप।
निष्कर्ष“स्पष्ट रूप से, इस लंबे समय के परस्पर संपर्क का परिणाम आपसी समृद्धि रही है।”
खंड घ — सही या गलत(पुस्तक के अभ्यास से, पृ. 122)
| # | कथन | उत्तर और कारण |
|---|---|---|
| 1 | वैदिक ऋचाओं को ताड़-पत्र की पांडुलिपियों पर लिखा गया है। | ग़लत — वे लिखित रूप में नहीं थीं; मौखिक पाठ किया जाता था और वे 100 से 200 पीढ़ियों तक स्मृतिबद्ध रहीं। |
| 2 | वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं। | सही — “ये भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं और वस्तुत: विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक हैं।” |
| 3 | “एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति” में ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता की मान्यता प्रकट होती है। | ! ग़लत — इसका अर्थ है “परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं” — यह परम सत्य की एकता है, ब्रह्मांड की शक्तियों की नहीं। यह सबसे कठिन प्रश्न है। |
| 4 | बौद्ध मत वेदों से अधिक पुराना है। | ग़लत — वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं; बौद्ध मत प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. में उभरा और उसने वेदों की प्रभुता को नहीं स्वीकार किया। |
| 5 | जैन मत का उद्भव बौद्ध मत की एक शाखा के रूप में हुआ। | ग़लत — जैन मत एक स्वतंत्र दर्शन है, और पुस्तक कहती है कि “इस मत को अधिक प्राचीन माना जाता है।” |
| 6 | बौद्ध और जैन मत दोनों ही शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा सभी जीवों को नुकसान न पहुँचाने का समर्थन करते हैं। | सही — दोनों में अहिंसा केंद्रीय है, और वह विचारों की हिंसा तक फैली है। |
| 7 | जनजातीय विश्वास परंपराएँ आत्मा और छोटे देवों तक सीमित हैं। | ग़लत — “हिंदू धर्म के समान अनेक जनजातियों में भी उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना है” — जैसे डोनीपोलो और सिंगबोंगा। |
शिक्षक के लिए — तीन चेतावनियाँध्यान
1. पुस्तक की शब्दावली का पालन कीजिए — ‘दर्शन’, ‘मत’, ‘विश्वास’। पुस्तक पृ. 118 पर एक पूरा बॉक्स इसी बात को समर्पित करती है कि वह ‘धर्म’ शब्द का प्रयोग जान-बूझकर नहीं करती। प्रश्न बनाते और उत्तर जाँचते समय यही शब्दावली रखिए।
2. ! ‘सही या गलत’ का प्रश्न 3 सबसे कठिन है — और उसका उत्तर ‘ग़लत’ है। विद्यार्थी एकं सत् को पहचान लेते हैं और ‘सही’ लिख देते हैं, यह देखे बिना कि कथन में ‘ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता’ लिखा है, जबकि मंत्र ‘परम सत्य की एकता’ की बात करता है। यह अंतर पढ़ाइए, वरना पूरी कक्षा यह प्रश्न ग़लत करेगी।
3. ऋग्वेद की तिथि और समय-रेखा के तीर पर प्रश्न मत बनाइए।
पुस्तक की तिथि-सीमा (पाँचवीं से दूसरी सहस्राब्दी सा.सं.पू.) पर विद्वानों में मतभेद है, और
समय-रेखा के तीर की दिशा में एक आरेखन-असंगति है। इन दोनों पर इस प्रश्न बैंक में कोई प्रश्न नहीं
है — कारण 10-Verification-Log.md में हैं।
पर पुस्तक की सावधान भाषा — “यह कहना कठिन है…”, “विशेषज्ञों ने प्रस्ताव किया है…” —
अवश्य पढ़ाइए। वही शब्द उस वाक्य को सही बनाते हैं।