यह दस्तावेज़ सुना जाता है, पढ़ा नहीं जाता
यह फ़ाइल शिक्षक के हाथ में रहती है। विद्यार्थी के पास केवल कॉपी और क़लम।
सबसे बड़ी बाध्यता: एक विद्यार्थी देवनागरी में प्रति मिनट 15–20 शब्द लिख पाता है। 40 मिनट के कालांश में 20 मिनट का श्रुतलेख = 300–400 शब्द। यही पूरा बजट है। इसलिए हर पंक्ति को अपनी जगह कमानी पड़ती है।
चार संकेत — इनका अर्थ
| संकेत | क्या करना है |
|---|---|
| कहिए | बोलिए, लिखवाइए नहीं। यह ढाँचा और संदर्भ देता है |
| लिखवाइए | यही वाक्य कॉपी में जाता है। ⏸ = ठहरिए · 🔁 = दोहराइए |
| ✓ बोर्ड पर | ये शब्द कान से नहीं लिखे जा सकते — खंड शुरू करने से पहले बोर्ड पर लिख दीजिए |
| उतारिए | तालिकाएँ बोर्ड से उतारी जाती हैं, बोली नहीं जातीं |
! सबसे आम ग़लती: तालिका बुलवा देना। इससे पूरा कालांश निकल जाता है और नोट्स गड्डमड्ड हो जाते हैं। तालिका हमेशा बोर्ड पर, हमेशा ‘उतारिए’।
संख्याएँ हमेशा दो बार: पहले शब्दों में, फिर अंकों में — जैसे “बारह गुणा सात मीटर ⟨12 × 7⟩”। सुनी हुई संख्याएँ ग़लत कॉपियों का सबसे बड़ा कारण हैं।
खंड-क्रमांक 01-Lesson-Plan.md के कालांशों से मेल खाते हैं।
खंड 1 — सभ्यता क्या है
कालांश 1 · समय 8 मिनट · लगभग 120 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर (खंड से पहले): सभ्यता · धातु विज्ञान · नगरीकरण · शिल्प · कृषि उत्पादकता · मेसोपोटामिया
कहिए: “अध्याय 4 में हमने देखा था कि मनुष्य एक जगह टिककर रहने लगा और खेती करने लगा। अब हम देखेंगे कि उसके बाद क्या हुआ। पर पहले एक बात तय करनी होगी — सभ्यता किसे कहते हैं? पुस्तक पहले यही तय करती है, और फिर हड़प्पा को उस कसौटी पर तौलती है। यही इस पूरे अध्याय का ढाँचा है।”
लिखवाइए:
सभ्यता शब्द का प्रयोग सामान्यत: मानव समाज के उन्नत चरण के लिए किया जाता है। ⏸
पुस्तक के अनुसार एक सभ्यता में कम से कम सात विशेषताएँ होनी चाहिए। 🔁 ⏸
धातु विज्ञान के अंतर्गत प्रकृति से धातु निष्कर्षण, उन्हें शुद्ध करने, आपस में मिलाने की तकनीकें, और धातु तथा उसके गुणों का वैज्ञानिक अध्ययन शामिल है। ⏸ 🔁
उतारिए — सभ्यता की सात विशेषताएँ (बोर्ड पर लिखिए, विद्यार्थी उतारें)
| # | विशेषता |
|---|---|
| 1 | शासन और प्रशासन का कोई रूप |
| 2 | नगरीकरण |
| 3 | विभिन्न प्रकार के शिल्प |
| 4 | व्यापार — आंतरिक और बाहरी |
| 5 | लेखन का कोई रूप |
| 6 | जीवन और विश्व के बारे में सांस्कृतिक विचार |
| 7 | कृषि उत्पादकता |
कहिए: “इस सूची पर निशान लगाकर रखिए। हम पूरे अध्याय में एक-एक करके देखेंगे कि हड़प्पा में इनके क्या प्रमाण मिले। और एक विशेषता का ख़ाना अंत तक अधूरा रह जाएगा — देखते जाइए कौन-सा।”
खंड 2 — सभ्यताओं का आरंभ
कालांश 1 · समय 4 मिनट · लगभग 55 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: इराक · सीरिया · मिस्र · सा.सं.पू.
लिखवाइए:
विश्व के विभिन्न भागों में अलग-अलग समय पर सभ्यताओं का आरंभ हुआ। ⏸
मेसोपोटामिया, जो आधुनिक इराक और सीरिया है, वहाँ लगभग छह हज़ार ⟨6,000⟩ वर्ष पहले सभ्यता का आरंभ हुआ। 🔁 ⏸
इसके कुछ शताब्दियों बाद प्राचीन मिस्र की सभ्यता का आरंभ हुआ। ⏸
सिंधु-सरस्वती सभ्यता का काल छब्बीस सौ से उन्नीस सौ साधारण संवत् पूर्व ⟨2600–1900 सा.सं.पू.⟩ माना जाता है। 🔁
खंड 3 — गाँव से नगर
कालांश 2 · समय 8 मिनट · लगभग 120 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: पंजाब · सिंध · सहायक नदी · हड़प्पाई · हड़प्पावासी
कहिए: “अब भूगोल। सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियाँ पंजाब और सिंध के विशाल मैदानों को सींचती हैं। और इनके पूर्व में, कुछ हज़ार साल पहले, एक और नदी बहती थी — सरस्वती।”
लिखवाइए:
सहायक नदी वह नदी है जो किसी बड़ी नदी या झील में मिलती है। ⏸ उदाहरणार्थ, यमुना नदी गंगा नदी की सहायक नदी है। ⏸
सिंधु नदी ने इन मैदानों को उपजाऊ और कृषि के अनुकूल बनाया। ⏸
पैंतीस सौ साधारण संवत् पूर्व ⟨3500 सा.सं.पू.⟩ से इस पूरे क्षेत्र में गाँव, नगरों में परिवर्तित हो गए। 🔁 ⏸
लगभग छब्बीस सौ साधारण संवत् पूर्व ⟨2600 सा.सं.पू.⟩ में बढ़ते व्यापार और अन्य विनिमयों के कारण नगर, महानगरों में परिवर्तित हो गए। 🔁 ⏸
इस विकास प्रक्रिया को भारत का पहला नगरीकरण भी कहा जाता है। ⏸
इस सभ्यता के तीन नाम हैं — सिंधु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता। 🔁 ⏸
इसके निवासियों को हड़प्पाई या हड़प्पावासी कहते हैं। ⏸
उन्नीस सौ बीस-इक्कीस ⟨1920–21⟩ में हड़प्पा इस सभ्यता से संबंधित पहला उत्खनित नगर था। 🔁 ⏸
हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो की खोज उन्नीस सौ चौबीस ⟨1924⟩ में की गई। 🔁
कहिए — ! यह अवश्य कहिए: “इन दोनों तारीख़ों को मत मिलाइए। उन्नीस सौ बीस-इक्कीस — पहला उत्खनित नगर। उन्नीस सौ चौबीस — खोज। यह इस अध्याय की सबसे आम ग़लती है।”
खंड 4 — मानचित्र और सरस्वती
कालांश 2 · समय 6 मिनट · लगभग 70 शब्द + तालिका · CORE
✓ बोर्ड पर: धौलावीरा · मोहनजो-दड़ो · गँवेरीवाला · राखीगढ़ी · कालीबंगा · लोथल · घग्गर · हाकरा · हिंदुकुश · सुलैमान श्रेणी · अरावली श्रेणी
उतारिए — पाँच बड़े नगर
| नगर | आज कहाँ |
|---|---|
| हड़प्पा | पंजाब (पाकिस्तान) |
| मोहनजो-दड़ो | सिंध (पाकिस्तान) |
| गँवेरीवाला | चोलिस्तान मरुस्थल (पाकिस्तान) |
| राखीगढ़ी | हरियाणा |
| धौलावीरा | गुजरात |
!! शिक्षक के लिए — यह तालिका बोर्ड पर आप लिखेंगे, पुस्तक के पृष्ठ 90 से नहीं। पृष्ठ 90 की तालिका एक मिलान-अभ्यास है और उसकी जोड़ियाँ जान-बूझकर बदली हुई हैं। कालीबंगा — राजस्थान भी जोड़ लीजिए।
लिखवाइए:
सरस्वती नदी को आज भारत में घग्गर और पाकिस्तान में हाकरा कहा जाता है। ⏸ 🔁
आज यह एक मौसमी नदी है, जो मात्र वर्षा ऋतु के दौरान बहती है। ⏸
इसका वर्णन सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है — एक देवी के रूप में, और पर्वत से समुद्र तक बहने वाली नदी के रूप में। ⏸
सरस्वती की द्रोणी में दो महानगर मिलते हैं — राखीगढ़ी और गँवेरीवाला। 🔁
खंड 5 — नगर-योजना
कालांश 3 · समय 9 मिनट · लगभग 140 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: किलेबंदी · अभिजात वर्ग · ऊपरी नगर · निचला नगर · गोदाम · बिटुमेन
कहिए: “अब वह हिस्सा जो इस सभ्यता को सबसे अलग बनाता है — उनके नगर योजना बनाकर बने थे। और पुस्तक एक शब्द जान-बूझकर नहीं इस्तेमाल करती — ‘घाटी’। सुनिए क्यों।”
लिखवाइए:
पुस्तक सिंधु घाटी शब्द का प्रयोग नहीं करती, क्योंकि अब हम जानते हैं कि यह सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली हुई थी। 🔁 ⏸
अधिकांश हड़प्पा सभ्यता के नगर सुनियोजित योजना के अंतर्गत निर्मित किए गए थे। ⏸
उन नगरों में चौड़ी सड़कें थीं, जो सामान्यत: चारों दिशाओं की ओर उन्मुख होती थीं। ⏸
अधिकांश नगरों के चारों ओर किलेबंदी की गई मिलती है। ⏸
किलेबंदी सुरक्षात्मक उद्देश्यों से किसी बस्ती या नगर के चारों ओर बनाई गई एक विशाल दीवार है। ⏸
नगर के दो विशिष्ट भाग मिलते हैं — ऊपरी नगर, जहाँ संभवत: अभिजात वर्ग के लोग रहते थे, और निचला नगर, जहाँ साधारण लोग रहते थे। 🔁 ⏸
अभिजात वर्ग से आशय है समाज का उच्च स्तर — शासक, अधिकारी, प्रशासक और प्राय: पुरोहित या पुजारी। ⏸
कुछ बड़े भवनों का उपयोग सामूहिक उद्देश्यों के लिए किया जाता था, जैसे गोदाम। ⏸
रोचक बात यह है कि बड़े और छोटे घरों के निर्माण की गुणवत्ता एक समान मिलती है। 🔁 ⏸
धौलावीरा में तीन अलग-अलग क्षेत्र थे, न कि अन्य नगरों की तरह दो क्षेत्र, और वहाँ अधिकांश भवनों की नींव पत्थरों से बनाई गई थी। 🔁
खंड 6 — महास्नानागार
कालांश 3–4 · समय 7 मिनट · लगभग 110 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: महास्नानागार · बिटुमेन · डामर · शिलालेख
लिखवाइए:
मोहनजो-दड़ो का प्रसिद्ध महास्नानागार बारह गुणा सात मीटर ⟨12 × 7⟩ का है। 🔁 ⏸
सबसे ऊपर जमायी गई ईंटों पर डामर के रूप में प्राकृतिक बिटुमेन की जल रोधक परत चढ़ाई गई है। ⏸ 🔁
स्नानागार के चारों ओर छोटे-छोटे कमरे मिलते हैं, और उनमें से एक कमरे के अंदर कुआँ मिला है। ⏸
पानी खाली करने के लिए कोने में एक नाली भी है। ⏸
उतारिए — तीन व्याख्याएँ
| व्याख्या | स्थिति |
|---|---|
| सार्वजनिक स्नान के लिए | अब स्वीकार्य नहीं |
| केवल राजसी परिवार के लिए | विचाराधीन |
| धार्मिक कार्यों के लिए | विचाराधीन |
लिखवाइए — ★यह वाक्य सबसे महत्वपूर्ण है:
पहली व्याख्या अब स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यह पाया गया कि इस नगर के अधिकांश घरों में स्नानागार बने हुए थे। 🔁 🔁 ⏸
इस विषय में हमारे पास इतिहास के अन्य स्रोत नहीं हैं — न कोई शिलालेख, न कोई ग्रंथ, और न ही किसी यात्री का विवरण। 🔁 🔁
कहिए: “यह आख़िरी वाक्य पूरे अध्याय की कुंजी है। इसीलिए इस अध्याय में बार-बार ‘संभवत:’ और ‘रहा होगा’ आता है। यह पुस्तक की कमज़ोरी नहीं — यही ईमानदार इतिहास है।”
खंड 7 — जल प्रबंधन
कालांश 4 · समय 6 मिनट · लगभग 90 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: जलाशय · जल-निकास प्रणाली · अपशिष्ट जल · कच्छ का रन
लिखवाइए:
हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को बहुत महत्व देते थे, और उनके घरों में स्नान के लिए अलग स्नानागार हुआ करते थे। ⏸
ये नगर जल-निकास प्रणाली से जुड़े हुए थे, जो साधारणत: सड़कों के नीचे होती थीं और जिनमें अपशिष्ट जल बहता था। 🔁 ⏸
मोहनजो-दड़ो में लोग ईंटों से बनाए कुओं से पानी निकाला करते थे। ⏸
धौलावीरा में तिहत्तर मीटर ⟨73⟩ लंबा सबसे बड़ा जलाशय मिला है। 🔁 ⏸
वहाँ पत्थरों और चट्टान को काटकर कम से कम छह विशाल जलाशयों का निर्माण किया गया था। ⏸
इनमें से अधिकांश को कुशल जल संचयन और वितरण के लिए भूमिगत नालियों से जोड़ा गया था। 🔁
कहिए — ! यह अवश्य कहिए: “अपनी कॉपी के हाशिये में लिख लीजिए — तिहत्तर मीटर सबसे बड़ा जलाशय है। चित्र छह दशमलव आठ वाला जलाशय तैंतीस मीटर का है, और वह चट्टान काटकर बना है। ये दो अलग जलाशय हैं। परीक्षा में यही उलटा जाता है।”
खंड 8 — भोजन और कृषि
कालांश 4 · समय 6 मिनट · लगभग 90 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: दलहन · बाजरा · यूरेशिया · बनावली
लिखवाइए:
हड़प्पावासी दलहन और अनेक किस्म की सब्जियों के अतिरिक्त जौ, गेहूँ, कुछ मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान की खेती करते थे। 🔁 ⏸
दलहन फसलों की वह श्रेणी है, जिसमें सेम, मटर के दाने और दालें सम्मिलित हैं। ⏸
यूरेशिया में कपास उगाने में वे सर्वप्रथम थे, जिसका उपयोग वे कपड़ा बुनने में किया करते थे। 🔁 ⏸
उन्होंने हल सहित खेती के कई उपकरण बनाए, जिनमें से कुछ का उपयोग आधुनिक समय में भी किसानों द्वारा किया जाता है। ⏸
अभी की तरह तब भी ग्रामीण क्षेत्रों से पर्याप्त कृषि उपज प्रतिदिन उपलब्ध होने पर ही नगर जीवित रह सकते थे। 🔁 ⏸
मिट्टी के पात्रों की वैज्ञानिक जाँच में प्रत्याशित अवशेष के रूप में दुग्ध उत्पाद, और अप्रत्याशित अवशेष के रूप में हल्दी, अदरक और केले मिले। 🔁
खंड 9 — सक्रिय व्यापार
कालांश 4 · समय 8 मिनट · लगभग 130 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: कार्नेलियन · सूसा · ओमान · स्टीऐटाइट · कांस्य · टिन · लोथल · बेसिन
लिखवाइए:
हड़प्पावासी न केवल अपनी सभ्यता के भीतर, बल्कि भारत के भीतर और बाहर की अन्य सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी सक्रिय रूप से व्यापार किया करते थे। ⏸
उनके सर्वाधिक प्रिय आभूषण कार्नेलियन के मोती थे, जो अधिकतर गुजरात में पाए जाने वाले लाल रंग के अल्प मूल्यवान पत्थर होते थे। 🔁 ⏸
उन्होंने शंखों से बहुत सुंदर चूड़ियाँ भी बनाईं, और चूँकि शंख का खोल सख़्त होता है, अत: उन्हें बनाने के लिए परिष्कृत तकनीक की आवश्यकता भी होती होगी। ⏸
तांबे में टिन मिलाने पर कांस्य धातु बन जाती है, जो तांबे की तुलना में कठोर होती है। 🔁 ⏸
यह भारत की प्रथम गहन समुद्री गतिविधि थी। 🔁 ⏸
गुजरात की एक लघु बस्ती लोथल में दो सौ सत्रह मीटर लंबाई और छत्तीस मीटर चौड़ाई ⟨217 × 36⟩ का एक विशाल बेसिन पाया गया है। 🔁 ⏸
मुहरें एक मुलायम पत्थर स्टीऐटाइट की बनी थीं, जिन्हें गरम कर कठोर बनाया जाता था। ⏸
इस लेखन प्रणाली और पशुओं के चित्रों के प्रतीकों के अर्थ को अभी समझा जाना बाकी है। 🔁 🔁
उतारिए — व्यापार के दो प्रमाण
| वस्तु | कहाँ मिली |
|---|---|
| कार्नेलियन मनके | सूसा (वर्तमान ईरान) |
| हाथी दाँत का कंघा (लगभग 7 सेमी.) | ओमान का तट |
खंड 10 — प्राचीन जीवन
कालांश 5 · समय 4 मिनट · लगभग 60 शब्द · EXTRA
यह खंड
EXTRAहै — यदि कालांश आगे चल रहा हो तभी लिखवाइए। कालांश 5 का मुख्य काम वस्तुएँ दिखाना है, लिखवाना नहीं।
✓ बोर्ड पर: टेराकोटा · नर्तकी · पुरोहित राजा · स्वास्तिक · करनपुरा
लिखवाइए:
मोहनजो-दड़ो से प्राप्त नर्तकी की लघु कांस्य प्रतिमा दस दशमलव आठ सेंटीमीटर ⟨10.8⟩ ऊँची है। 🔁 ⏸
धौलावीरा से कांस्य दर्पण, टेराकोटा का पात्र, भार तौलने के पत्थर, कांस्य छैनी और पच्चीस सेंटीमीटर ⟨25⟩ के पत्थर पर उकेरा गया खेल-बोर्ड प्राप्त हुए हैं। ⏸
एक छोटी मूर्ति को प्राय: पुरोहित राजा कहा जाता है, यद्यपि यह मालूम नहीं है कि यह प्रतिमा किसकी है। 🔁 🔁
कहिए: “यह आख़िरी वाक्य ध्यान से सुनिए। नाम प्रचलित है, पर पुस्तक कहती है कि पता नहीं यह किसकी मूर्ति है। पुस्तक ने यही काम तीन बार किया है — ‘घाटी’ शब्द छोड़ा, महास्नानागार की पहली व्याख्या छोड़ी, और अब यह। तीनों में एक ही बात है — नाम प्रमाण नहीं होता।”
खंड 11 — अंत अथवा नई शुरुआत
कालांश 6 · समय 8 मिनट · लगभग 130 शब्द · CORE
✓ बोर्ड पर: ह्रास · कालीबंगा · बनावली · जलवायु · शुष्कता
लिखवाइए:
उन्नीस सौ साधारण संवत् पूर्व ⟨1900 सा.सं.पू.⟩ के आस-पास इस सभ्यता की सभी उपलब्धियों के बावजूद उसका ह्रास हो गया। 🔁 ⏸
इसके नगर एक के बाद एक खाली होते गए, और लोगों ने परिवर्तित वातावरण में ग्रामीण जीवन-शैली को अपनाया। ⏸
ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्ववर्ती सरकार या प्रशासन अब विद्यमान नहीं रहा। ⏸
बहुत समय पहले यह सोचा गया कि युद्ध या आक्रमण ने इन नगरों का विध्वंस किया होगा, लेकिन युद्ध या आक्रमण के कोई निशान नहीं मिलते। 🔁 ⏸
जहाँ तक प्रमाणों की बात है, हड़प्पावासियों ने वास्तव में कभी भी कोई सेना या युद्ध के हथियार नहीं रखे, और यह अपेक्षाकृत एक शांतिपूर्ण सभ्यता प्रतीत होती है। ⏸
उतारिए — पतन के दो सहमत कारण
| # | कारण | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | जलवायु परिवर्तन | 2200 सा.सं.पू. से वर्षा में कमी और शुष्कता → कृषि कठिन → नगरों को खाद्य आपूर्ति में कमी |
| 2 | सरस्वती का सूखना | मध्य बेसिन सूख गया; कालीबंगा और बनावली अचानक छोड़ दिए गए |
लिखवाइए:
पुस्तक जोड़ती है कि इसमें अन्य कारण भी रहे होंगे। ⏸
ये दो कारण हमें याद दिलाते हैं कि हम अपने कल्याण के लिए अपनी जलवायु और पर्यावरण पर कितने निर्भर हैं। 🔁 ⏸
यद्यपि नगर लुप्त हो गए, लेकिन हड़प्पा की संस्कृति एवं प्रौद्योगिकी अधिकांशत: बची रही और यह भारतीय सभ्यता के अगले चरण में पहुँच गई। 🔁 🔁
कहिए — ! अंत में यह अवश्य: “दो तारीख़ें मत मिलाइए। बाईस सौ — जलवायु परिवर्तन का आरंभ। उन्नीस सौ — सभ्यता का ह्रास। और आख़िरी वाक्य ही अध्याय के शीर्षक का उत्तर है — ‘अंत अथवा नई शुरुआत?’ उत्तर है, नई शुरुआत।”
समय और शब्द का पूरा बजट
| खंड | कालांश | समय | शब्द | स्तर |
|---|---|---|---|---|
| 1 · सभ्यता क्या है | 1 | 8 मि. | ~120 | CORE |
| 2 · सभ्यताओं का आरंभ | 1 | 4 मि. | ~55 | CORE |
| 3 · गाँव से नगर | 2 | 8 मि. | ~120 | CORE |
| 4 · मानचित्र और सरस्वती | 2 | 6 मि. | ~70 + तालिका | CORE |
| 5 · नगर-योजना | 3 | 9 मि. | ~140 | CORE |
| 6 · महास्नानागार | 3–4 | 7 मि. | ~110 | CORE |
| 7 · जल प्रबंधन | 4 | 6 मि. | ~90 | CORE |
| 8 · भोजन और कृषि | 4 | 6 मि. | ~90 | CORE |
| 9 · सक्रिय व्यापार | 4 | 8 मि. | ~130 | CORE |
| 10 · प्राचीन जीवन | 5 | 4 मि. | ~60 | EXTRA |
| 11 · अंत अथवा नई शुरुआत | 6 | 8 मि. | ~130 | CORE |
कुल
CORE= लगभग 1,055 शब्द, छह कालांशों में फैले हुए। किसी एक कालांश में 20 मिनट से अधिक श्रुतलेख मत कराइए। कालांश 4 सबसे भारी है — वहाँ खंड 7, 8 और 9 मिलकर 20 मिनट लेते हैं, और वही उसकी सीमा है। यदि समय कम पड़े, तो खंड 8 का अंतिम वाक्य (बर्तनों वाला) और खंड 9 का शंख वाला वाक्य छोड़े जा सकते हैं — उन्हें बोलकर समझा दीजिए।
शिक्षक हेतु तीन अंतिम बातें
1. संख्याओं पर कभी जल्दी मत कीजिए। इस अध्याय में 73, 33, 12 × 7, 217 × 36, 10.8, 1920–21, 1924, 3500, 2600, 2200, 1900 — ग्यारह संख्याएँ हैं और उनमें से चार जोड़ियाँ आपस में उलटी जाती हैं। हर संख्या पहले शब्दों में, फिर अंकों में। यह धीमा लगता है, पर यही एकमात्र तरीक़ा है।
2. पृष्ठ 90 की तालिका कभी मत बुलवाइए। वह मिलान-अभ्यास है और उसकी जोड़ियाँ बदली हुई हैं। खंड 4 की तालिका आप बोर्ड पर लिखेंगे — पुस्तक से नहीं।
3. खंड 6 का अंतिम वाक्य दो बार दोहराइए। “न कोई शिलालेख, न कोई ग्रंथ, न किसी यात्री का विवरण” — यह पूरे अध्याय की कुंजी है, और वही समझाता है कि हर बात ‘संभवत:’ क्यों है। यदि यह एक वाक्य कॉपी में सही चला गया, तो अध्याय का आधा काम हो गया।