Chapter 1दो ध्रुवीयता का अंत

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 1–14.

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कक्षा 12 • राजनीति विज्ञान • समकालीन विश्व राजनीति • अध्याय 1 — दो ध्रुवीयता का अंत

कक्षा — 12 · विषय — राजनीति विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति) · पृष्ठ — 1 से 14

9 नवंबर 1989 — 28 साल पुरानी एक दीवार गिरी। किसने गिराई?

न किसी की सेना ने, न संयुक्त राष्ट्र ने — पूर्वी जर्मनी की आम जनता ने। और सोवियत संघ को चुपचाप देखते रहना पड़ा। इस अध्याय के चार हिस्से • सोवियत प्रणाली क्या थी • वह टूटी क्यों • दुनिया कैसे बदली • भारत पर क्या असर पड़ा

0 | पहले तीन शब्द | जो पाठ मान लेता है, पर सिखाता नहीं

एक चेतावनी — यह अध्याय पहले अध्याय 2 था

पाठ्यक्रम युक्तिकरण

  • हाशिये का QR कोड 12108CH02 है — यानी मूलतः यह अध्याय 2 था।
  • पुराना अध्याय 1 — ‘शीतयुद्ध का दौर’ — हटा दिया गया, और यह अध्याय ऊपर खिसक आया।
  • इसलिए यह अध्याय शीतयुद्ध, वारसा समझौता और दो ध्रुवीयता — तीनों का प्रयोग बिना परिभाषा के करता है।
  • ★और प्रश्नावली का प्रश्न 5(ख) ठीक ‘वारसा समझौता’ ही पूछता है।

इसीलिए हम वहीं से शुरू करेंगे जहाँ किताब शुरू नहीं करती।

तीन पद, जो पहले लिख लीजिए

पदअर्थ
दो ध्रुवीयतादूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया का दो महाशक्तियों के खेमों में बँटना — पूँजीवादी अमरीका बनाम समाजवादी सोवियत संघ
शीतयुद्धदोनों खेमों के बीच बिना सीधे युद्ध के तनाव, प्रतिद्वंद्विता और हथियारों की होड़
नाटोअमरीका के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन
वारसा समझौतानाटो के जवाब में सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबंधन

1 | बर्लिन की दीवार | प्रतीक, तथ्य, और उसका गिरना

9 नवंबर 1989

9 नवंबर 1989

वह दिन जब आम जनता ने बर्लिन की दीवार गिरा दी

दीवार — पूरा तथ्य-समुच्चय

तथ्यमान
कब बनी1961
किसे किससे अलग करती थीपश्चिमी बर्लिन को पूर्वी बर्लिन से
लंबाई150 किलोमीटर से भी ज्यादा
कितने वर्ष खड़ी रही28 वर्ष
कब गिरी9 नवंबर 1989
किसका प्रतीकपूँजीवादी और साम्यवादी दुनिया के बीच विभाजन का

दीवार गिरने के बाद क्या हुआ

  • यह दोनों जर्मनी के एकीकरण और साम्यवादी खेमे की समाप्ति की शुरुआत थी।
  • ★पूर्वी यूरोप के आठ देशों ने एक-एक करके अपने साम्यवादी शासन को बदल डाला।
  • सोवियत संघ को चुपचाप देखते रहना पड़ा — किसी सैन्य मजबूरी से नहीं।

यह जनता की सामूहिक कार्रवाई का दबाव था। यही इस अध्याय की आत्मा है।

2 | सोवियत प्रणाली | जन्म, ताकत और अंदरूनी दरारें

यह व्यवस्था आई कहाँ से

1917

  • समाजवादी सोवियत गणराज्य रूस में हुई 1917 की समाजवादी क्रांति के बाद अस्तित्व में आया।
  • क्रांति पूँजीवादी व्यवस्था के विरोध में हुई, समाजवाद के आदर्शों और समतामूलक समाज से प्रेरित।
  • ★यह “मानव इतिहास में निजी संपत्ति की संस्था को समाप्त करने और समाज को समानता के सिद्धांत पर सचेत रूप से रचने की सबसे बड़ी कोशिश” थी।
  • दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पूर्वी यूरोप के जिन देशों की व्यवस्था सोवियत तर्ज़ पर ढली, वह ‘दूसरी दुनिया’ कहलाई।

इस खेमे का नेता — समाजवादी सोवियत गणराज्य।

प्रणाली का ढाँचा

  • ★धुरी कम्युनिस्ट पार्टी थी — किसी अन्य राजनीतिक दल या विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं।
  • अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध और राज्य के नियंत्रण में।
  • मिल्कियत का प्रमुख रूप — राज्य का स्वामित्व।
  • पंद्रह गणराज्य मिलकर सोवियत संघ बने थे।

यही ढाँचा उसकी सबसे बड़ी ताकत भी था, और सबसे बड़ी कमज़ोरी भी।

ताकत — जो हम अकसर भूल जाते हैं

महाशक्ति

  • ★“अमरीका को छोड़ दें तो सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था शेष विश्व की तुलना में कहीं ज्यादा विकसित थी।”
  • उन्नत संचार प्रणाली, विशाल ऊर्जा-संसाधन — खनिज-तेल, लोहा-इस्पात, मशीनरी — और सुव्यवस्थित परिवहन।
  • ★“पिन से लेकर कार तक सभी चीजों का उत्पादन वहाँ होता था।”
  • सभी नागरिकों के लिए न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित; बेरोज़गारी नहीं थी।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों की देखभाल और लोक-कल्याण रियायती दर पर।

तो फिर यह टूटी क्यों?

कमज़ोरी — जो भीतर पल रही थी

  • नौकरशाही का शिकंजा; प्रणाली सत्तावादी होती गई; नागरिकों का जीवन कठिन।
  • ★“लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं होने के कारण लोग अपनी असहमति अक्सर चुटकुलों और कार्टूनों में व्यक्त करते थे।”
  • कम्युनिस्ट पार्टी का सभी संस्थाओं पर गहरा अंकुश; वह जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थी।
  • ★रूस पंद्रह में से एक गणराज्य था, पर हर मामले में उसका प्रभुत्व था।
  • अन्य क्षेत्रों की जनता स्वयं को उपेक्षित और दमित महसूस करती थी।

ताकत और कमज़ोरी — दोनों एक साथ सच थीं।

3 | टूटी क्यों | छह कारण, और एक विडंबना

छह कारण — पहले चार

अंदर से खोखला

  • 1. संस्थाओं की अंदरूनी कमज़ोरी — “राजनीतिक-आर्थिक संस्थाएँ अंदरुनी कमजोरी के कारण लोगों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकीं।”
    • अर्थव्यवस्था गतिरुद्ध; उपभोक्ता-वस्तुओं की बड़ी कमी; खाद्यान्न का आयात साल-दर-साल बढ़ा।
  • ★2. संसाधन सैन्य-व्यय में झोंके गए — परमाणु हथियार और सैन्य साजो-सामान, तथा पूर्वी यूरोप के पिछलग्गू देशों को नियंत्रण में रखने पर।
  • 3. पश्चिम से तुलना का धक्का — “अपने पिछड़ेपन की पहचान से लोगों को राजनीतिक-मनोवैज्ञानिक रूप से धक्का लगा।”
  • 4. प्रशासनिक-राजनीतिक जड़ता — 70 सालों का जवाबदेही-रहित शासन, भारी भ्रष्टाचार, सत्ता का केंद्रीकरण, ‘पार्टी’ अधिकारियों के विशेषाधिकार।

1979 का अफ़ग़ानिस्तान हस्तक्षेप — इससे व्यवस्था और कमज़ोर हुई।

गोर्बाचेव और दो शब्द

मार्च 1985

  • मार्च 1985 में मिख़ाइल गोर्बाचेव कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने और सुधारों की शृंखला शुरू की।
  • ★पेरेस्त्रोइका = पुनर्रचना • ★ग्लासनोस्त = खुलापन
  • 5. सुधारों की अनपेक्षित परिणति — “लोगों की आकांक्षाओं-अपेक्षाओं का ऐसा ज्वार उमड़ा जिसका अनुमान शायद ही कोई लगा सकता था।”
  • एक तबका सुधारों की गति से नाराज़ था, दूसरा उन्हें बहुत तेज़ मानता था।

गोर्बाचेव दोनों का समर्थन खो बैठे।

छठा कारण — और सबसे बड़ा

विभिन्न गणराज्यों में राष्ट्रवाद और संप्रभुता की भावना का उभार ही सोवियत संघ के विघटन का अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण था।

NCERT, अध्याय 1, पृ. 5

विडंबना — जहाँ सबका अनुमान गलत निकला

परीक्षा का पसंदीदा बिंदु

  • अपेक्षा थी: उभार मध्य-एशियाई गणराज्यों में सबसे प्रबल होगा — वे धार्मिक और नस्ली रूप से रूस से अलग तथा आर्थिक रूप से पिछड़े थे।
  • ★वास्तविकता: असंतोष रूस, उक्रेन, जार्जिया और बाल्टिक क्षेत्र — यानी यूरोपीय और अपेक्षतया समृद्ध गणराज्यों में सबसे प्रबल था।
  • कारण: उन्हें लगता था कि “ज्यादा पिछड़े इलाकों को सोवियत संघ में शामिल रखने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।”
  • ★मध्य-एशियाई गणराज्यों ने स्वतंत्रता की माँग की ही नहीं — वे सोवियत संघ के साथ ही रहना चाहते थे।

इसीलिए बाद में उन्हें राष्ट्रकुल का संस्थापक सदस्य बनाया गया।

4 | घटना-चक्र | मार्च 1985 से 25 दिसंबर 1991

विघटन का घटना-चक्र

  1. 1985मार्च — गोर्बाचेव महासचिव बने; सुधारों की शृंखला शुरू
  2. 1988जून — लिथुआनिया में आज़ादी का आंदोलन; एस्टोनिया और लातविया में फैला
  3. 1989अक्तूबर — वारसा समझौते के सदस्य अपना भविष्य तय करने को स्वतंत्र
  4. 19899 नवंबर — बर्लिन की दीवार गिरी
  5. 1990फरवरी — बहुदलीय राजनीति; पार्टी का 72 वर्ष पुराना एकाधिकार समाप्त
  6. 1990मार्च — लिथुआनिया: स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला गणराज्य
  7. 1991जून — येल्तसिन पार्टी से इस्तीफ़ा देकर रूस के राष्ट्रपति बने
  8. 1991अगस्त — गरमपंथियों का असफल तख़्तापलट
  9. 1991दिसंबर — रूस, बेलारूस, उक्रेन ने 1922 की संधि समाप्त की; राष्ट्रकुल (CIS) बना
  10. 199125 दिसंबर — गोर्बाचेव का इस्तीफा; सोवियत संघ का अंत

तख़्तापलट, येल्तसिन और अंत

  • अगस्त 1991 में कम्युनिस्ट पार्टी के गरमपंथियों का तख़्तापलट असफल रहा।
  • जनता खुली छूट का स्वाद चख चुकी थी और पीछे लौटना नहीं चाहती थी।
  • ★बोरिस येल्तसिन जनविरोध के नायक बनकर उभरे — रूस के पहले चुने हुए राष्ट्रपति।
  • दिसंबर 1991 — रूस, बेलारूस और उक्रेन ने 1922 की संधि समाप्त की और स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल बनाया।
  • ★रूस उत्तराधिकारी राज्य बना — सुरक्षा परिषद् की सीट, एकमात्र परमाणु शक्ति, संधियों का जिम्मा।

जार्जिया 1993 में राष्ट्रकुल का सदस्य बना।

5 | तीन परिणतियाँ | दुनिया कैसे बदल गई

पहली — शीतयुद्ध के संघर्ष का अंत

  • ★“समाजवादी प्रणाली पूँजीवादी प्रणाली को पछाड़ पाएगी या नहीं — यह विचारधारात्मक विवाद अब कोई मुद्दा नहीं रहा।”
  • इसी विवाद ने सेनाओं को उलझाया, हथियारों की होड़ शुरू की, परमाणु संचय बढ़ाया और विश्व को सैन्य गुटों में बाँटा।
  • ★“शीतयुद्ध के समाप्त होने से हथियारों की होड़ भी समाप्त हो गई और एक नई शांति की संभावना का जन्म हुआ।”

एक ध्रुव मिट गया — दो ध्रुवीयता का अंत यही है।

दूसरी — शक्ति-संबंध बदल गए

  • दो संभावनाएँ थीं — एकध्रुवीय विश्व (एक महाशक्ति का दबदबा) या बहुध्रुवीय विश्व (कई मोहरे)।
  • ★“हुआ यह कि अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा।”
  • पूँजीवादी अर्थव्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभुत्वशाली प्रणाली बन गई।
  • ★विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ताकतवर सलाहकार बन गईं — क्योंकि इन्होंने कर्ज़ दिया है।
  • ★“राजनीतिक रूप से उदारवादी लोकतंत्र… सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा है।”

यही आज की दुनिया का ढाँचा है।

तीसरी — नए देशों का उदय

  • बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के देश — ‘यूरोपीय संघ’ से जुड़ना और नाटो का हिस्सा बनना चाहते थे।
  • तीनों बाल्टिक गणराज्य सितंबर 1991 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य बने; मार्च 2004 में नाटो में शामिल।
  • मध्य एशियाई देशों ने अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाया।
  • उन्होंने रूस से मजबूत रिश्ते जारी रखे और साथ ही पश्चिमी देशों, अमरीका और चीन से भी संबंध बनाए।

पंद्रह गणराज्य — पंद्रह अलग रास्ते।

6 | शॉक थेरेपी | एक इलाज जो बीमारी बन गया

नाम में ही चेतावनी थी

साम्यवादी शासन के पतन के बाद पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का एक खास मॉडल अपनाया गया, जिसे ‘शॉक थेरेपी’ यानी ‘आघात पहुँचाकर उपचार करना’ कहा गया। इसे विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने निर्देशित किया था।

NCERT, अध्याय 1, पृ. 9

इसके छह तत्व

1990

  • 1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर पूरी तरह मुड़ना — सोवियत दौर की हर संरचना से निजात।
  • 2. ★“मिल्कियत का सबसे प्रभावी रूप निजी स्वामित्व होगा” — राज्य की संपदा का निजीकरण।
  • 3. सामूहिक ‘फार्म’ को निजी ‘फार्म’ में बदलना; खेती में पूँजीवादी पद्धति।
  • 4. ★कोई ‘तीसरा रुख़’ मंज़ूर नहीं — समाजवाद और पूँजीवाद के बीच कोई विकल्प नहीं।
  • 5. ‘मुक्त व्यापार’ को पूर्ण रूप से अपनाना; वित्तीय खुलापन और मुद्राओं की परिवर्तनीयता।
  • 6. ★सोवियत खेमे के आपसी व्यापारिक गठबंधन समाप्त — हर देश सीधे पश्चिमी मुल्कों से जुड़ा।

गति और गहनता अलग-अलग रही, पर दिशा और चरित्र बड़ी सीमा तक एक जैसे थे।

90%

लगभग 90%

रूस के उद्योग जो निजी हाथों में बेच दिए गए — कीमत कम आँककर, औने-पौने दामों में

इसे क्या नाम मिला

इसे ‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’ कहा गया, क्योंकि उद्योगों की कीमत कम आँकी गई और उन्हें औने-पौने दामों में बेच दिया गया।

NCERT, अध्याय 1, पृ. 9

शॉक थेरेपी के परिणाम

क्षेत्रक्या हुआ
उद्योगऔद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा; लगभग 90% निजी हाथों में
अधिकार-पत्रनागरिकों ने अधिकांश कालाबाजारियों को बेच दिए
मुद्रारूबल का नाटकीय पतन; मुद्रास्फीति से जमापूँजी जाती रही
खाद्यसामूहिक खेती समाप्त; रूस को खाद्यान्न आयात करना पड़ा
जीडीपी1999 का वास्तविक GDP 1989 से कहीं नीचे
बैंकडेढ़ हज़ार में से लगभग आधे दिवालिया; इंकॉम बैंक से दस हज़ार कंपनियाँ डूबीं
समाजकल्याण-व्यवस्था नष्ट; मध्य वर्ग हाशिए पर; माफिया वर्ग का उभार
विषमतानिजीकरण ने अमीर-गरीब के बीच तीखा विभाजन पैदा किया

और लोकतंत्र?

  • ★“आर्थिक बदलाव को बड़ी प्राथमिकता दी गई… लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण का कार्य ऐसी प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका।”
  • संविधान हड़बड़ी में तैयार किए गए; राष्ट्रपति को लगभग हरसंभव शक्ति; संसद कमजोर।
  • ★तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने पहले 10 वर्ष, फिर अगले 10 साल के लिए अपने को बहाल किया।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता स्थापित करने का काम अभी भी बाकी है।

अर्थव्यवस्थाओं ने सन् 2000 में — आज़ादी के 10 साल बाद — खड़ा होना शुरू किया, वह भी तेल, गैस, खनिज और धातु के निर्यात से।

7 | संघर्ष और तनाव | मलबे में उठे नए झगड़े

कहाँ क्या हुआ

क्षेत्रक्या हुआ
चेचन्या और दाग़िस्तान (रूस)हिंसक अलगाववादी आंदोलन; मास्को की बमबारी में मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन
ताज़िकिस्तानदस वर्षों यानी 2001 तक गृहयुद्ध
नगरनो-कराबाख (अज़रबैजान)स्थानीय अर्मेनियाई अलग होकर अर्मेनिया से मिलना चाहते हैं
जार्जियादो प्रांत स्वतंत्रता चाहते हैं; गृहयुद्ध
यूक्रेन, किरगिज़स्तान, जार्जियामौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने के आंदोलन
चेकोस्लोवाकिया★शांतिपूर्वक दो देश — चेक और स्लोवाकिया
युगोस्लाविया★1991 के बाद टूटा; जातीय संघर्ष → गृहयुद्ध; नाटो का हस्तक्षेप और बमबारी

कार्टून का एक वाक्य, जो पूरा सवाल खोल देता है

जो हमारे साथ है वह राष्ट्रवाद है, जो हमारे खिलाफ है वह अलगाववाद है।

NCERT, अध्याय 1, पृ. 10 — कार्टून-संवाद

मध्य एशिया — बड़ी ताकतों का अखाड़ा

  • वहाँ हाइड्रोकार्बनिक (पेट्रोलियम) संसाधनों का विशाल भंडार है।
  • यह क्षेत्र रूस, चीन और अफ़ग़ानिस्तान से सटा और पश्चिम एशिया से नज़दीक है।
  • ★11 सितंबर 2001 के बाद अमरीका ने किराए पर सैनिक ठिकाने लिए और युद्ध में विमान उड़ाने की अनुमति ली।
  • ★रूस इन्हें अपना निकटवर्ती ‘विदेश’ मानता है और चाहता है कि वे उसके प्रभाव में रहें।
  • चीन के व्यापारिक हित भी वहाँ बढ़ रहे हैं।

रूस, कज़ाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और अज़रबैजान बड़े तेल-गैस उत्पादक हैं।

8 | भारत | पुरानी दोस्ती और नया रिश्ता

भारत और सोवियत संघ — चार आयाम

विरासत

  • आर्थिक — भिलाई, बोकारो और विशाखापट्टनम के इस्पात कारखानों तथा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स को आर्थिक-तकनीकी सहायता।
    • ★विदेशी मुद्रा की कमी के समय रुपये को माध्यम बनाकर व्यापार।
  • राजनीतिक — ★कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के रुख को समर्थन; ★1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मदद।
  • सैन्य — ★ऐसे वक्त सैनिक साजो-सामान दिए जब शायद ही कोई अन्य देश तैयार था; संयुक्त उत्पादन के समझौते।
  • सांस्कृतिक — हिंदी फिल्में और भारतीय संस्कृति लोकप्रिय; राजकपूर और अमिताभ बच्चन घर-घर जाने जाते हैं।

ताशकंद में आज भी 70 फीसदी लोग हिंदी फिल्में खरीदते हैं।

भारत और रूस — बहुध्रुवीय विश्व का साझा सपना

  • 1. अंतर्राष्ट्रीय फलक पर कई शक्तियाँ मौजूद हों।
  • 2. ★सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी — किसी पर हमला हो तो सभी उसे अपने लिए खतरा मानें और साथ मिलकर कार्रवाई करें।
  • 3. क्षेत्रीयताओं को ज्यादा जगह मिले।
  • 4. अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का समाधान बातचीत से हो।
  • 5. हर देश की स्वतंत्र विदेश नीति हो।
  • 6. संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ मजबूत, लोकतांत्रिक और शक्तिसंपन्न बनें।

★2001 के भारत-रूस सामरिक समझौते के अंग के रूप में 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर।

किसे क्या मिलता है

भारत कोरूस को
कश्मीर मुद्दे पर समर्थन★भारत हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार
ऊर्जा-आपूर्ति; तेल संकट में हमेशा मददभारत तेल के बड़े आयातकों में — इसलिए महत्त्वपूर्ण
आतंकवाद से जुड़ी सूचनाएँतेल वाले इलाकों में साझेदारी और निवेश
पश्चिम एशिया तक पहुँचबहुध्रुवीय विश्व में एक बड़ा लोकतांत्रिक साथी
चीन के साथ संबंधों में संतुलन
★परमाण्विक योजना; क्रायोजेनिक रॉकेट

9 | निचोड़ | पूरा अध्याय एक स्लाइड में

छह नेता — एक नज़र में

नेताकालपहचान
लेनिन1870–1924बोल्शेविक पार्टी के संस्थापक; 1917 की क्रांति के नायक
स्टालिन1879–1953तेज़ औद्योगीकरण + बलपूर्वक सामूहिकीकरण; 1930 के दशक का आतंक
ख़्रुश्चेव1894–1971★‘शांतिपूर्ण सहअस्तित्व’; हंगरी + क्यूबा
ब्रेझनेव1906–1982एशिया की सामूहिक सुरक्षा; चेकोस्लोवाकिया + अफगानिस्तान
गोर्बाचेवजन्म 1931★अंतिम राष्ट्रपति; पेरेस्त्रोइका + ग्लासनोस्त; शीतयुद्ध समाप्त
येल्तसिन1931–2007★रूस के पहले चुने हुए राष्ट्रपति; 1991 के विरोध का नेतृत्व

पूरा अध्याय एक स्लाइड में

  • जन्म — 1917 की क्रांति से सोवियत संघ; 15 गणराज्य; कम्युनिस्ट पार्टी धुरी; ‘दूसरी दुनिया’ का नेता।
  • ताकत — अमरीका के बाद सबसे विकसित अर्थव्यवस्था; पिन से लेकर कार तक; न्यूनतम जीवन स्तर।
  • दरार — सत्तावाद, जवाबदेही का अभाव, रूस का प्रभुत्व, सैन्य-खर्च, 1979 का अफ़ग़ानिस्तान।
  • अंत — मार्च 1985 गोर्बाचेव → मार्च 1990 लिथुआनिया → अगस्त 1991 तख़्तापलट → 25 दिसंबर 1991।
  • कारण — छह; छठा = राष्ट्रवाद = “अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक”, और वह समृद्ध गणराज्यों में भड़का।
  • परिणति — शीतयुद्ध का अंत · अमरीका अकेली महाशक्ति · नए देशों का उदय।
  • अर्थव्यवस्था — शॉक थेरेपी → 90% उद्योग बिके, 1999 का GDP 1989 से नीचे, माफिया वर्ग।
  • भारत — सोवियत विरासत (1971, भिलाई, कश्मीर) + रूस से नया रिश्ता (2001, 80 दस्तावेज़)।

9 नवंबर 1989 को दीवार गिरी, 25 दिसंबर 1991 को संघ खत्म हुआ — और दो ध्रुवीयता का अंत हो गया।

एक सवाल, जो अध्याय के बाद भी बचा रहता है

अगर सोवियत संघ न टूटा होता, तो आज की दुनिया कैसी होती?

प्रश्नावली का प्रश्न 10 इसी सवाल का बच्चा है