कक्षा: XII | बोर्ड: RBSE (NCERT पाठ्यपुस्तक) | माध्यम: हिंदी कुल कालांश: 10 (प्रत्येक 40-45 मिनट) + 1 मूल्यांकन कालांश पुस्तक: भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग-3 | पृष्ठ: 227–257
अ. अधिगम उद्देश्य
| क्रम | उद्देश्य | संज्ञानात्मक स्तर |
|---|---|---|
| 1 | इस्तमरारी बंदोबस्त के उद्देश्य, प्रावधान व परिणाम (नीलामियाँ, चूक के चार कारण) समझा सकेंगे | बोध/विश्लेषण |
| 2 | ज़मींदारों के प्रतिरोध के हथकंडों (फ़र्जी बिक्री, बेनामी, लठियाल) और जोतदारों के उदय का विश्लेषण कर सकेंगे | विश्लेषण |
| 3 | पाँचवीं रिपोर्ट की पृष्ठभूमि व सीमाओं का स्रोत-समीक्षक की तरह मूल्यांकन कर सकेंगे | मूल्यांकन |
| 4 | पहाड़िया (कुदाल) व संथाल (हल) की जीवन-पद्धतियों की तुलना कर दामिन-इ-कोह से संथाल विद्रोह तक की शृंखला बता सकेंगे | बोध/विश्लेषण |
| 5 | बुकानन के विवरणों में कंपनी की वाणिज्यिक दृष्टि पहचान सकेंगे | मूल्यांकन |
| 6 | रैयतवाड़ी प्रणाली (रिकार्डो-प्रभाव सहित) और दक्कन के कर्ज़-चक्र की व्याख्या कर सकेंगे | बोध/विश्लेषण |
| 7 | अमेरिकी गृहयुद्ध → कपास-तेज़ी → 1875 विद्रोह की वैश्विक-स्थानीय कड़ी जोड़ सकेंगे | विश्लेषण |
| 8 | ★सरकारी अभिलेखों (रिपोर्ट, आयोग, डायरी, चित्र) की पक्षधरता पहचानकर मिलान-विधि लागू कर सकेंगे | मूल्यांकन/सृजन |
★सर्वोच्च उद्देश्य (8): अध्याय का उपशीर्षक ही ‘सरकारी अभिलेखों का अध्ययन’ है — हर कहानी के साथ यह पूछना कि “यह हमें किसने, क्यों बताया?”
ब. पूर्व-ज्ञान की जाँच
- अध्याय 8 — मुग़ल ज़मींदार, जमा, रैयत — तुलना का आधार (चर्चा पृ. 235 सीधे यही माँगती है)
- कक्षा VIII — कंपनी-शासन, 1857 का प्रारंभिक परिचय
- अध्याय 10 (आगे) — 1857; अध्याय में दो बार संकेत (दक्कन-विद्रोह पर ब्रिटिश घबराहट)
- भूगोल — झूम खेती, राजमहल-छोटानागपुर क्षेत्र, दक्कन पठार की वर्षा-अनिश्चितता
स. आवश्यक सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| NCERT पाठ्यपुस्तक (भाग-3) | अनिवार्य |
| 02-Presentation.pptx | सभी कालांश |
| भारत का बाह्यरेखा मानचित्र | कालांश 4, 10 (अभ्यास 10) |
| ★चित्र 9.8-9.9 (होजेज) व 9.10-9.14 (लंदन न्यूज़) — प्रोजेक्टर | कालांश 5-6 (चित्र-राजनीति) |
| ★एक पुरानी बही/रसीद-बुक (नमूने के रूप में) | कालांश 8 (दस्तावेज़ों का आतंक) |
| कैलकुलेटर/श्यामपट्ट | स्रोत 10 का ब्याज-हिसाब |
कालांश-वार योजना
🕐 कालांश 1 — सूर्यास्त की नीलामी (प्रस्तावना + §1.1–1.2)
उपविषय: बर्दवान 1797; इस्तमरारी बंदोबस्त (पृ. 227-229)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
“1797 की एक शाम — बर्दवान में बोली लग रही है। राजा की ज़मीनें बिक रही हैं। बोली लगाने वाले कौन हैं? …राजा के अपने ही नौकर! 95% ख़रीद फ़र्जी! यह नाटक क्यों?” इसी पहेली से पूरा खंड 1 खुलेगा।
(ख) विकास — 25 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | प्रस्तावना — क़ानूनों के परिणाम; लोग “परिणामों में फेर-बदल कर देते थे”; स्रोत-सूची | पाठ-वाचन |
| 2 | औपनिवेशिक शासन सर्वप्रथम बंगाल में; ग्रामीण समाज की पुनर्व्यवस्था | — |
| 3 | 1793 इस्तमरारी बंदोबस्त (कार्नवालिस — चित्र 9.3); राशि निश्चित; चूक पर नीलामी | — |
| 4 | बंदोबस्त क्यों — 1770s संकट (अकाल); संपत्ति-अधिकार + स्थायी दरें → निवेश; योमॅन-वर्ग की आशा; वफ़ादारी | चार-कारण तालिका |
| 5 | किससे बंदोबस्त — राजाओं-ताल्लुक़दारों से; अब ‘ज़मींदार’; ★“भू-स्वामी नहीं, राजस्व समाहर्ता मात्र” | परिभाषा रेखांकित |
| 6 | ज़मींदारी की संरचना — 400 तक गाँव; संपदा; कुल माँग; भीतर बँटवारा | — |
| 7 | 75% ज़मींदारियाँ हस्तांतरित — समस्या का पैमाना | — |
(ग) समेकन — 7 मिनट
‘राजा’ बॉक्स + ताल्लुक़दार-परिभाषा; कालांश 2 का प्रश्न छोड़िए — “चूक क्यों होती थी?”
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- इस्तमरारी बंदोबस्त कब, किस गवर्नर जनरल के काल में? (1793, कार्नवालिस)
- बंदोबस्त की परिभाषा में ज़मींदार क्या था? (राज्य का राजस्व समाहर्ता मात्र)
- बर्दवान की नीलामी में कितने प्रतिशत ख़रीद फ़र्जी थी? (95% से अधिक)
🕐 कालांश 2 — चूक के कारण और कंपनी का शिकंजा (§1.3)
उपविषय: चार कारण; सूर्यास्त विधि; ज़मींदार पर नियंत्रण (पृ. 229-231)
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ★★चूक के चार कारण — ऊँची प्रारंभिक माँग (प्रत्याशित हानि का तर्क); 1790s की नीची कीमतें; अपरिवर्तनीय माँग + सूर्यास्त विधि; ज़मींदार की सीमित शक्ति | क्रमांकित तालिका |
| 2 | कंपनी का शिकंजा — पाँच कदम (सेना भंग, सीमा शुल्क समाप्त, कचहरियाँ कलेक्टर-अधीन, न्याय-पुलिस छीनी, कलेक्टर = विकल्पी सत्ता-केंद्र) | सूची |
| 3 | “ज़िले का पूरा कार्यभार… प्रभाव और प्राधिकार को ख़त्म कर दो” — अनुदेश-उद्धरण | पढ़वाइए |
| 4 | अमला; वसूली की बाधाएँ — ख़राब फ़सल, जान-बूझकर देरी; जोतदार-मंडल ख़ुश क्यों | — |
| 5 | मुक़दमों का अंबार — ★1798 बर्दवान: 30,000+ लंबित वाद | — |
★कक्षा-प्रश्न: “माँग ऊँची रखने का कंपनी का तर्क (‘बोझ शनै: शनै: कम होगा’) किसके नज़रिये से सही था — कंपनी के या किसान के?”
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- सूर्यास्त विधि क्या थी? 2. ज़मींदार की कौन-सी शक्तियाँ छीनी गईं (कोई तीन)? 3. अमला कौन?
🕐 कालांश 3 — जोतदार का उदय, ज़मींदार का प्रतिरोध (§1.4–1.5)
उपविषय: जोतदार बनाम ज़मींदार; फ़र्जी बिक्री (पृ. 231-233)
(क) आरंभ — 5 मिनट
स्रोत 1 (दिनाजपुर के जोतदार) का नाटकीय वाचन — “बहुत ही हठीले और ज़िद्दी…”
“यह झुंझलाहट किसकी है? (बुकानन/कंपनी की!) झुंझलाहट में ही जोतदार की ताक़त पढ़िए।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | जोतदार — बुकानन का दिनाजपुर सर्वेक्षण; कई हज़ार एकड़; व्यापार-साहूकारी पर नियंत्रण; बटाईदार (अधियार/बरगादार) से खेती — आधी उपज | — |
| 2 | ★★जोतदार की शक्ति ज़मींदार से अधिक प्रभावी क्यों — गाँव में निवास; जमा-वृद्धि का प्रतिरोध; अधिकारियों को रोकना; रैयत की गोलबंदी; भुगतान में देरी; नीलामी में ख़ुद ख़रीद | छह-बिंदु सूची |
| 3 | अन्य नाम — हवलदार, गाँटीदार, मंडल | — |
| 4 | चित्र 9.5 — शक्ति के धारक; तीरों पर शब्द भरवाइए (लगान, राजस्व, ब्याज, उधार, उपज) | 🔎 गतिविधि |
| 5 | §1.5 — ★★फ़र्जी बिक्री के हथकंडे क्रम से: माता को हस्तांतरण (स्त्री-संपत्ति सुरक्षित); एजेंटों की जोड़-तोड़; ऊँची बोली → भुगतान-इनकार → बार-बार नीलामी → थककर नीची क़ीमत पर वापस | कथा-क्रम |
| 6 | आँकड़े — 1793-1801: चार बड़ी ज़मींदारियों की 30 लाख रु. की बेनामी ख़रीद; 15% सौदे नक़ली | — |
| 7 | लठियाल + पुराने रैयत की वफ़ादारी (“अन्नदाता-प्रजा”) — बाहरी ख़रीददार बेदख़ल | — |
| 8 | आगे — 19वीं सदी के प्रारंभ में ज़मींदार सुदृढ़; ★1930 के दशक की मंदी में भट्ठा बैठा, जोतदार जमे | — |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- अधियार/बरगादार कौन? 2. बेनामी का अर्थ? 3. स्त्रियों की संपत्ति वाला नियम किसने भुनाया? 4. ज़मींदारों का भट्ठा कब बैठा?
🕐 कालांश 4 — पाँचवीं रिपोर्ट : संसद में कंपनी की पेशी (§1.6)
उपविषय: रिपोर्ट की पृष्ठभूमि, विषय-वस्तु, सीमाएँ (पृ. 233-235)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“1,002 पृष्ठ — जिनमें 800+ पृष्ठ सिर्फ़ परिशिष्ट: अर्ज़ियाँ, कलेक्टर-रिपोर्टें, तालिकाएँ। इतनी मोटी रिपोर्ट ब्रिटिश संसद में क्यों पेश हुई? कंपनी पर मुक़दमा कौन चला रहा था?”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 1760s से इंग्लैंड में कंपनी पर नज़र — एकाधिकार-विरोधी (चार्टर रद्द कराना), निजी व्यापारी, उद्योगपति (भारत का बाज़ार), राजनीतिक समूह (“लाभ केवल कंपनी को”) | चार-समूह तालिका |
| 2 | कुशासन-भ्रष्टाचार की बहसें; समाचारपत्र | — |
| 3 | संसद के अधिनियम (18वीं सदी के अंतिम दशक); नियमित रिपोर्टें; समितियाँ; प्रवर समिति → पाँचवीं रिपोर्ट (1813) | — |
| 4 | विषय-वस्तु — 1002 पृष्ठ; परिशिष्ट की सूची | — |
| 5 | ★★सीमाएँ — डेढ़ शताब्दी तक धारणा इसी से बनी; पर शोध (ज़मींदारों के अभिलेखागार, ज़िला-अभिलेख) — लेखक कुप्रशासन की आलोचना पर तुले; ज़मींदारी-पतन अतिरंजित | — |
| 6 | स्रोत 2 — नीलामी-आँकड़े; 🔎 तीनों प्रश्न कक्षा में हल (लहज़ा; उद्देश्य; दो वर्षों से दीर्घकालीन निष्कर्ष असंभव) | स्रोत-कार्य |
★कक्षा-प्रश्न: “अगर रिपोर्ट लिखने वाला पहले से कंपनी को दोषी दिखाना चाहता है, तो उसके ‘सच्चे आँकड़े’ भी हमें कैसे भटका सकते हैं?” (चयन और प्रस्तुति की पक्षधरता।)
(ग) समेकन — 5 मिनट
🗣️ चर्चा (पृ. 235) — अध्याय 8 के ज़मींदार से तुलना: मुग़ल ज़मींदार (जाति+ख़िदमत, वसूली+सेना) बनाम औपनिवेशिक ‘समाहर्ता’।
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- पाँचवीं रिपोर्ट कब, कहाँ पेश? 2. कुल पृष्ठ? 3. किस समिति ने तैयार की? 4. आधुनिक शोध की मुख्य आपत्ति?
🕐 कालांश 5 — कुदाल की दुनिया : पहाड़िया (§2.1)
उपविषय: झूम-जीवन; औपनिवेशिक दृष्टि; संहार से शांति-नीति (पृ. 236-240)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“एक ही पहाड़ी को कलेक्टर ‘उजाड़-ख़तरनाक’ कहता है और चित्रकार होजेज ‘रमणीय’। जंगल वही — आँखें अलग। आज हम तीसरी आँख भी जोड़ेंगे — पहाड़िया की अपनी।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | बुकानन की झलक — अभेद्य पहाड़ियाँ; शत्रुतापूर्ण-आशंकित निवासी; ★डायरी की सीमा (क्षण-विशेष) | — |
| 2 | पहाड़िया जीवन — जंगल-उपज (महुआ, कोया, राल, काठकोयला); झूम: झाड़ी काटना-जलाना, राख की पोटाश, दालें-ज्वार-बाजरा, कुदाल से खुरचना, परती छोड़ना | ★चक्र-तालिका |
| 3 | जंगल = पहचान और जीवन का आधार; मुखिया के काम | — |
| 4 | मैदानों पर आक्रमण के तीन कारण; ★ज़मींदारों का ख़िराज, व्यापारियों का पथकर — शांति-सौदे | — |
| 5 | शांति भंग — स्थायी खेती का आक्रामक विस्तार; अंग्रेज़ों के तीन कारण (राजस्व, निर्यात-फ़सलें, सुव्यवस्थित समाज); ★★औपनिवेशिक दृष्टि — “असभ्य, बर्बर, उपद्रवी” → सफ़ाया+पालतू+सभ्य बनाना | उद्धरण-चर्चा |
| 6 | ★★1770s संहार-नीति बनाम 1780s क्लीवलैंड की शांति-नीति (भत्ता; परिणाम — मुखियाओं की सत्ता गई, ‘वैतनिक मुखिया’) | दो-स्तंभ तुलना |
| 7 | 1810-11 में बुकानन को संदेह से क्यों देखा — “प्रत्येक गोरा आदमी…” उद्धरण | पढ़वाइए |
| 8 | होजेज-प्रसंग — कुक-यात्रा, क्लीवलैंड-मित्रता, एक्वाटिंट, स्वच्छंदतावाद; 🔎 चित्र 9.8-9.9 प्रश्न | चित्र-विश्लेषण |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- झूम-ज़मीन उपजाऊ किससे बनती थी? (राख की पोटाश) 2. ख़िराज व पथकर कौन देता था? 3. शांति-नीति किसने प्रस्तावित की? 4. एक्वाटिंट क्या है?
🕐 कालांश 6 — हल की जीत : संथाल और दामिन-इ-कोह (§2.2)
उपविषय: संथाल-आगमन; दामिन-इ-कोह; पहाड़िया-पराभव; संथाल विद्रोह (पृ. 240-243)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“अंग्रेज़ों को पहाड़िया ‘उपद्रवी’ लगे और संथाल ‘आदर्श बाशिंदे’ — दोनों जंगल के ही लोग थे। फ़र्क़ क्या था? एक कुदाल चलाता था, दूसरा हल चलाने को तैयार था।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | बुकानन का गंजुरिया-वर्णन — “मानव श्रम के समुचित प्रयोग से काया पलट”; शानदार तंबाकू-सरसों | — |
| 2 | संथाल कैसे आए — 1780s से बंगाल; ज़मींदारों का भाड़ा, अंग्रेज़ों का निमंत्रण (जंगल महाल); पहाड़िया असफलता के बाद ध्यान संथालों पर | — |
| 3 | ★★दामिन-इ-कोह (1832) — सीमांकन, ‘संथालों की भूमि’; शर्त — दसवाँ भाग दस वर्षों में जोतना; सर्वेक्षण-नक्शा-खंबे | — |
| 4 | ★आँकड़े — गाँव 40 (1838) → 1,473 (1851); जनसंख्या 3,000 → 82,000+; कंपनी का राजस्व बढ़ा; संथाल गीतों की ‘यात्रा’ को पूर्ण विराम | संख्या-चिप्स |
| 5 | ★★पहाड़िया-पराभव — ऊपरी बंजर पहाड़ियों में सीमित; झूम के लिए उर्वर ज़मीन दुर्लभ → ग़रीबी; शिकार भी संकट में | कारण-शृंखला |
| 6 | संथाल-परिवर्तन — खानाबदोशी छोड़ी; वाणिज्यिक फ़सलें, व्यापारी-साहूकार से लेन-देन | — |
| 7 | ★★मोहभंग — राज्य के भारी कर; दिकुओं (साहूकारों) का ऊँचा ब्याज व क़ब्ज़ा; ज़मींदारों का दावा → 1850s: “अपना शासन” वाला आदर्श संसार → विद्रोह 1855-56 (सिधू मांझी) | तीन-निशाने तालिका |
| 8 | संथाल परगना — भागलपुर+बीरभूम से 5,500 वर्ग मील; विशेष क़ानून | — |
| 9 | ★चित्र-राजनीति — 9.10 (शांत गाँव) बनाम 9.12-9.14 (युद्ध, जलते गाँव, हाथी पर विजयगर्वित अधिकारी, हुक्का) — ब्रिटिश जनता के लिए ‘अजेय हुकूमत’ का संदेश | 🔎 ILN-पाठक कल्पना |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- दामिन-इ-कोह कब सीमांकित? 2. अनुदान-पत्र की शर्त? 3. दिकू किन्हें कहा गया? 4. संथाल परगना किन ज़िलों से बना?
🕐 कालांश 7 — बुकानन की आँखें (§2.3)
उपविषय: बुकानन कौन; यात्राओं की असलियत; विकास-दृष्टि (पृ. 243-245)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“एक डॉक्टर जो चिड़ियाघर बनाता है, चट्टानें परखता है, और हर घाटी को देखकर सोचता है — ‘यहाँ लाख के बागान लग सकते हैं।’ यह जिज्ञासा है या नौकरी?”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | बुकानन-परिचय — चिकित्सक; बंगाल चिकित्सा सेवा 1794-1815; वेलेज़्ली का शल्य-चिकित्सक; अलीपुर चिड़ियाघर; वानस्पतिक उद्यान; 1815 वापसी; ‘हैमिल्टन’ नाम | बॉक्स-वाचन |
| 2 | ★★यात्रा की असलियत — कंपनी-कर्मचारी; नक्शा नवीस-सर्वेक्षक-कुलियों का दल; ख़र्च कंपनी का; “क्या देखना, खोजना, लिखना” की हिदायतें; गाँव में ‘सरकार का एजेंट’ | — |
| 3 | कंपनी की संसाधन-खोज — भूविज्ञानी, भूगोलवेत्ता, वनस्पतिज्ञ, चिकित्सक; बुकानन के प्रेक्षण — लौह खनिज, अबरक, ग्रेनाइट, साल्टपीटर; नमक-लोहा बनाने की पद्धतियाँ | स्रोत 4 पढ़वाइए |
| 4 | ★★विकास-दृष्टि — भूदृश्य ‘कैसे अधिक उत्पादक बने’; प्राथमिकताएँ स्थानीय निवासियों से भिन्न; कंपनी के वाणिज्यिक सरोकार + पाश्चात्य प्रगति-विचार; वनवासी जीवन-शैली का आलोचक | — |
| 5 | स्रोत 3 (संथाल — “होशियार पर नीचता से रहते”) व स्रोत 5 (“कमी है तो बस प्रगति की…”) | 🗣️ चर्चा पृ. 245 |
★कक्षा-प्रश्न (केंद्रीय): “स्रोत 5 में बुकानन जिस दृश्य को ‘बढ़िया पर अधूरा’ कहता है, पहाड़िया उसी दृश्य को क्या कहता? ‘पूर्ण’? इस एक शब्द के अंतर में पूरा उपनिवेशवाद है।”
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- बुकानन किस सेवा में, कब तक? 2. उसने किन खनिजों के स्थान खोजे (कोई तीन)? 3. ‘बुकानन-हैमिल्टन’ नाम क्यों?
🕐 कालांश 8 — दक्कन : रैयतवाड़ी और कर्ज़-चक्र (§3.1–3.3)
उपविषय: सूपा 1875; रिकार्डो; रैयतवाड़ी; कर्ज़ (पृ. 245-249)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
“12 मई 1875, सूपा की मंडी। सैकड़ों किसान जमा हैं। वे अनाज नहीं लूटते पहले — वे काग़ज़ माँगते हैं: बही-खाते, ऋणपत्र। इनकार होते ही सब जला देते हैं। किसान सोने-चाँदी से पहले काग़ज़ क्यों जलाता है?” उत्तर कालांश के अंत तक खुलेगा।
(ख) विकास — 27 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | विद्रोह-विधि (NCERT) — विद्रोह से जीवन-अनुभव की झलक; जाँच से साक्ष्य | — |
| 2 | घटना — सूपा (पूना) → अहमदनगर; 6,500 वर्ग किमी, 30+ गाँव; स्वरूप एक-समान; साहूकार भागे; 1857 की याद; थाने-सेना; 95 गिरफ़्तार | स्रोत 6 वाचन |
| 3 | स्रोत 7 — ‘नेटिव ओपिनियन’ रिपोर्ट; 🔎 पूर्वाग्रह-शब्द छाँटिए (“जासूसी”, “अपराधी”) | गतिविधि |
| 4 | §3.2 — इस्तमरारी बाहर क्यों नहीं — 1810 के बाद कीमतें ↑, सरकार हिस्सा नहीं ले सकती → अस्थायी बंदोबस्त; ★★रिकार्डो — ‘औसत लगान’, अधिशेष पर कर, वरना किरायाजीवी; “बंगाल ने रिकार्डो की पुष्टि की” | सिद्धांत-सरलीकरण |
| 5 | ★★रैयतवाड़ी — सीधे रैयत से; औसत आय का अनुमान; क्षमता-आकलन; अनुपात; हर 30 साल पुनर्सर्वेक्षण, दर ↑ — “चिरस्थायी नहीं” | बंगाल से तुलना-तालिका |
| 6 | §3.3 — 1820s पहला बंदोबस्त: माँग अत्यधिक → गाँव छोड़े; कलेक्टरों की कठोर वसूली (फ़सल-ज़ब्ती, सामूहिक जुर्माना) | — |
| 7 | ★1832 के बाद कीमतें गिरीं (डेढ़ दशक); 1832-34 अकाल — 1/3 पशुधन, आधी जनसंख्या; बकाया आसमान पर | — |
| 8 | कर्ज़-चक्र — राजस्व, ज़रूरतें, हल-बैल, शादियाँ — सब उधार से; 1840s तक सब कर्ज़ में; 1845 के बाद सुधार → विस्तार → फिर उधार | चक्र-आरेख (तालिका-रूप) |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- विद्रोह कब-कहाँ शुरू? 2. रिकार्डो के अनुसार कर न लगे तो किसान क्या बन जाएँगे? 3. रैयतवाड़ी में पुनर्सर्वेक्षण कितने वर्षों बाद? 4. 1832-34 के अकाल का असर?
🕐 कालांश 9 — कपास, काग़ज़ और क्रोध (§3.4–3.6 + §4)
उपविषय: कपास-तेज़ी; ऋण-स्रोत सूखना; अन्याय-बोध; दंगा आयोग (पृ. 249-255)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“अमेरिका में गोली चली — और महाराष्ट्र के गाँव में किसान को 100 रु. प्रति एकड़ अग्रिम मिलने लगा। फिर अमेरिका में शांति हुई — और वही किसान भूखा रह गया। यह 19वीं सदी का वैश्वीकरण है।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | पृष्ठभूमि — ब्रिटेन की 3/4 कपास अमेरिका से; चिंता; 1857 कपास आपूर्ति संघ, 1859 मैनचेस्टर कॉटन कंपनी; भारत = विकल्प | — |
| 2 | ★★1861 गृहयुद्ध — आयात 3% से कम (20 लाख → 55 हज़ार गाँठें); बम्बई सौदागरों के दौरे; अग्रिमों की शृंखला (निर्यातक → शहरी साहूकार → ग्रामीण ऋणदाता); 100 रु./एकड़ | प्रवाह-शृंखला |
| 3 | 1860-64 रकबा दोगुना; 1862: ब्रिटेन के आयात का 90% भारत से; ★पर “अधिकांश किसान कर्ज़ के बोझ से और अधिक दब गए” | — |
| 4 | §3.5 — 1865: सपना ख़त्म; ऋण-स्रोत सूखा; ★नया बंदोबस्त: माँग 50-100% ↑; ऋणदाता का इनकार | दोहरी-मार तालिका |
| 5 | §3.6 — ★★अन्याय-बोध: क्रोध कर्ज़ पर नहीं — संवेदनहीनता व रूढ़ि-उल्लंघन पर; प्रथागत मानक — ब्याज > मूलधन नहीं; आयोग का केस — 100 रु. पर 2,000 रु. ब्याज | ★केंद्रीय तर्क |
| 6 | ★★1859 परिसीमन क़ानून और उलटा असर — हर 3 साल नया बंधपत्र, मिश्रधन नया ‘मूलधन’; हथकंडे — रसीद-इनकार, जाली आँकड़े, सस्ती फ़सल-वसूली, संपत्ति-क़ब्ज़ा | — |
| 7 | दस्तावेज़ों का आतंक — अँगूठे के निशान, अनजाने खंड, “हर लिखे शब्द से डर” — पर लाचारी | स्रोत 8-9 वाचन + 🔎 |
| 8 | स्रोत 10 — ब्याज-गणना: 12 वर्ष में 1000 पर 2,028-10-3 | गणित-गतिविधि |
| 9 | §4 — दक्कन दंगा आयोग (भारत सरकार का दबाव, 1857-भय; रिपोर्ट 1878 संसद में); सामग्री — बयान, आँकड़े, कलेक्टर-रिपोर्टें; ★★★पक्षधरता — आयोग से पूछा ही यह गया कि क्या सरकारी माँग कारण थी; उत्तर — दोष साहूकारों का; “सरकार यह मानने को कदापि तैयार नहीं…” | नीला अनुच्छेद वाचन |
| 10 | विधि-सूत्र — सरकारी रिपोर्टें + समाचारपत्र, गैर-सरकारी वृत्तांत, वैधिक अभिलेख, मौखिक स्रोत से मिलान | — |
★कक्षा-प्रश्न (समापन): आरंभ के प्रश्न का उत्तर लिखवाइए — “किसान काग़ज़ इसलिए जलाता था क्योंकि नयी व्यवस्था में काग़ज़ ही उसकी ग़ुलामी का ताला था।”
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- मैनचेस्टर कॉटन कंपनी कब बनी? 2. 1862 में ब्रिटेन के कपास-आयात में भारत का हिस्सा? 3. परिसीमन क़ानून का उद्देश्य व उलटा असर? 4. आयोग की रिपोर्ट संसद में कब पेश हुई?
🕐 कालांश 10 — पुनरावृत्ति : तीन क्षेत्र, एक पद्धति
(क) गतिविधियाँ — 35 मिनट
| क्रम | गतिविधि |
|---|---|
| 1 | मानचित्र कार्य (अभ्यास 10) — बंगाल-ज़िले, राजमहल/दामिन/संथाल परगना, पूना-अहमदनगर-सूपा; इस्तमरारी बनाम रैयतवाड़ी क्षेत्रों की छायांकन |
| 2 | तीन तीर-शृंखलाएँ (मास्टर 5.2) बोर्ड पर तीन समूहों से |
| 3 | काल-रेखा-खेल — 1765-1875 के दस पड़ाव |
| 4 | स्रोत-मिलान प्रश्नोत्तरी — कथन → स्रोत (पाँचवीं रिपोर्ट/बुकानन/ILN/आयोग/अर्जी) |
| 5 | पाँच भ्रांतियाँ (मास्टर 5.3) — सही/ग़लत + कारण |
| 6 | अभ्यास 1-9 के उत्तर-ढाँचे मौखिक |
(ख) समापन — 5 मिनट
सूत्र-वाक्य लिखवाइए (मास्टर 5.4) + अगले अध्याय (1857) का सेतु — “दक्कन-विद्रोह में अंग्रेज़ों को 1857 क्यों दिखा, अगली बार वहीं चलेंगे।”
(ग) गृहकार्य
- अभ्यास 6, 8, 9 लिखित; परियोजना 12 (वृद्धजन-साक्षात्कार) दो सप्ताह में।
🕐 कालांश 11 — मूल्यांकन
| खंड | प्रारूप | अंक |
|---|---|---|
| क | 5 × MCQ (तिथियाँ, शब्दावली, आँकड़े) | 5 |
| ख | 5 × एक-पंक्ति (सूर्यास्त विधि, दामिन-इ-कोह, दिकू, किरायाजीवी, बेनामी) | 5 |
| ग | 2 × लघूत्तर — जोतदार की शक्ति; रैयतवाड़ी की विशेषताएँ | 6 |
| घ | 1 × निबंधात्मक — पहाड़िया बनाम संथाल आजीविका अथवा अमेरिकी गृहयुद्ध का प्रभाव | 6 |
| ङ | 1 × स्रोत-आधारित — स्रोत 1/2/8/10 पर तीन प्रश्न | 4 |
| च | मानचित्र — अध्याय-क्षेत्र | 4 |
| योग | 30 |
द. समावेशी शिक्षण-संकेत
- चित्र-संपन्न अध्याय: होजेज बनाम लंदन न्यूज़ — ‘चित्र भी स्रोत हैं, और पक्षधर भी’ का सर्वोत्तम पाठ।
- राजस्थान-सेतु: ग्रामीण ऋण/साहूकारी व्यवहार, ब्याज-दर चर्चा (पृ. 255) स्थानीय अनुभव से जीवंत; भील-गोंड क्षेत्रों के वन-प्रश्न पहाड़िया-प्रसंग से जोड़ें; रैयतवाड़ी जैसी प्रत्यक्ष-बंदोबस्त प्रणालियों की तुलना राजस्थान की रियासती-बंदोबस्त से करवा सकते हैं।
- धीमे अधिगमकर्ता: तीन क्षेत्र-कहानियाँ तीन कार्डों पर; तीर-शृंखलाएँ; 10 मुख्य तिथियाँ।
- प्रतिभाशाली: ‘रूढ़ि-उल्लंघन बनाम कर्ज़’ का सूक्ष्म भेद; पाँचवीं रिपोर्ट/दंगा आयोग की पक्षधरता पर लघु-निबंध; रिकार्डो-सिद्धांत का भारत-प्रयोग।