Chapter 8किसान, ज़मींदार और राज्य

Lesson plan25 min

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कक्षा: XII | बोर्ड: RBSE (NCERT पाठ्यपुस्तक) | माध्यम: हिंदी कुल कालांश: 10 (प्रत्येक 40-45 मिनट) + 1 मूल्यांकन कालांश पुस्तक: भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग-2 | पृष्ठ: 196–223

अ. अधिगम उद्देश्य

क्रमउद्देश्यसंज्ञानात्मक स्तर
1कृषि-इतिहास के स्रोतों (आइन + प्रांतीय-कंपनी दस्तावेज़) और उनकी सीमाओं की समीक्षा कर सकेंगेबोध/मूल्यांकन
2खुद-काश्त/पाहि-काश्त, ज़मीन की मिल्कियत, सिंचाई-तकनीक और फ़सल-विविधता का विवरण दे सकेंगेबोध
3जिन्स-ए-कामिल के आधार पर “गुज़ारे बनाम बाज़ार की खेती” का विश्लेषण कर सकेंगेविश्लेषण
4ग्रामीण समुदाय के तीन घटकों — किसान, पंचायत, मुखिया — के कार्य व जाति-नियमन समझा सकेंगेबोध/विश्लेषण
5कृषि-समाज में महिलाओं की भूमिका, अधिकार व नियंत्रण — दोनों पक्ष प्रस्तुत कर सकेंगेविश्लेषण/संवेदनशीलता
6जंगलवासियों की जीवन-पद्धति और राज्य-वाणिज्य की घुसपैठ से आए बदलावों की विवेचना कर सकेंगेविश्लेषण
7ज़मींदार की तिहरी ताक़त और “शोषक-संरक्षक” द्वैत का मूल्यांकन कर सकेंगेमूल्यांकन
8भू-राजस्व प्रणाली (जमा-हासिल, भूमि-वर्ग, वसूली-विधियाँ) और चाँदी के बहाव को जोड़ सकेंगेबोध/विश्लेषण
9★आइन-ए-अकबरी की रचना-विधि, संरचना व सीमाओं का स्रोत-समीक्षक की तरह मूल्यांकन कर सकेंगेमूल्यांकन/सृजन

★सर्वोच्च उद्देश्य (9): अध्याय स्रोत से शुरू होकर स्रोत की समीक्षा पर लौटता है — विद्यार्थी को यह वृत्त दिखे: “किसान के बारे में जो पता है, वह किसकी नज़र से पता है?”

ब. पूर्व-ज्ञान की जाँच

  • अध्याय 7 — कृषि-क्षेत्र किलेबंदी में; अमर-नायक की कर-वसूली; विजयनगर की सिंचाई (स्रोत 2 की तुलना में काम आएगी)
  • अध्याय 6 — भक्ति संत व जातिगत आलोचना (ज़मींदार-खंड में); सूफ़ी पीर (जंगल-खंड में)
  • कक्षा VII-VIII — मुग़ल वंशावली, मनसब-जागीर का प्रारंभिक परिचय
  • राजनीति विज्ञान — आज की ग्राम पंचायत (73वाँ संशोधन) — तुलना हेतु

स. आवश्यक सामग्री

सामग्रीउपयोग
NCERT पाठ्यपुस्तक (भाग-2)अनिवार्य
02-Presentation.pptxसभी कालांश
विश्व का बहिर्रेखा मानचित्र + भारत का मानचित्रकालांश 8, 10
श्यामपट्ट/चार्टतालिकाओं हेतु
★पुराना ₹1 सिक्का/कोई पुराना सिक्का व किसी फ़सल के दानेकालांश 8 (नक़द या जीन्स?)
★चित्र 8.1–8.16 (प्रोजेक्टर) — यह अध्याय मुग़ल लघुचित्रों से भरा हैचित्र-विश्लेषण

कालांश-वार योजना

🕐 कालांश 1 — 85 फ़ीसदी लोगों का इतिहास, पर आवाज़ किसकी? (प्रस्तावना + §1.1)

उपविषय: प्रस्तावना, स्रोतों की तलाश (पृ. 196-197)

(क) आरंभ — 8 मिनट★

“सोचिए — आज से 400 साल बाद कोई इतिहासकार आपके गाँव का इतिहास लिखे, पर उसके पास सिर्फ़ सरकारी फ़ाइलें हों — पटवारी के कागज़, कर-रसीदें, योजना-रिपोर्टें। वह क्या-क्या जान पाएगा? क्या-क्या कभी नहीं जान पाएगा?” यही इस अध्याय की स्थिति है — “चूँकि किसान अपने बारे में खुद नहीं लिखा करते थे…”

(ख) विकास — 25 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1प्रस्तावना — ~85% लोग गाँवों में; खेतिहर-भूमिहर दोनों फ़सल के दावेदार → सहयोग, प्रतियोगिता, संघर्षपाठ से पढ़वाइए
2मुग़ल राज्य — आमदनी का बड़ा हिस्सा कृषि से उगाही; नुमाइंदे — निर्धारक, वसूली करने वाले, हिसाब रखने वाले—
3व्यापार-मुद्रा-बाज़ार गाँवों में घुसे → गाँव-शहर जुड़ाव🧭 §7 का बीज
4§1.1 — आइन-ए-अकबरी: अबुल फ़ज़्ल, अकबर का दरबारी इतिहासकार—
5★★आइन का उद्देश्य — मज़बूत सत्ताधारी वर्ग का खाका; “बगावत का असफल होना पहले ही तय”★नीचे कक्षा-प्रश्न
6★★★“सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया” — वाक्य लिखवाइएश्यामपट्ट
7पूरक स्रोत — 17वीं-18वीं सदी के गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान दस्तावेज़ + ईस्ट इंडिया कंपनी★राजस्थान-गौरव: हमारे प्रदेश के दस्तावेज़ स्रोत हैं

★कक्षा-प्रश्न: “अगर लेखक पहले से मान चुका है कि ‘राज्य के ख़िलाफ़ बगावत असफल ही होगी’, तो वह किसानों के विद्रोहों को कैसे दर्ज करेगा?”

(ग) समेकन — 7 मिनट

अध्याय की संरचना-तालिका (मास्टर 0.3) — अर्थ → समाज → जेंडर → जंगल → ज़मींदार → राज्य → विश्व → स्रोत।

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. गाँवों में कितने फ़ीसदी लोग रहते थे? (~85%)
  2. आइन किसने, किसके हुक्म पर लिखी? (अबुल फ़ज़्ल, अकबर)
  3. कृषि-इतिहास के लिए किन तीन प्रांतों के दस्तावेज़ मिलते हैं? (गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान)

🕐 कालांश 2 — किसान, ज़मीन और गतिशीलता (§1.2 + स्रोत 1)

उपविषय: रैयत, खुद-काश्त/पाहि-काश्त, मिल्कियत (पृ. 197-198)

(क) आरंभ — 5 मिनट

स्रोत 1 (बाबरनामा) नाटकीय वाचन — “डेढ़ दिनों के अंदर उनका हर नामोनिशान मिट जाता है… यकायक एक गाँव या शहर खड़ा हो जाता है!”

“एक विदेशी बादशाह को यह बात इतनी अजीब क्यों लगी?”

(ख) विकास — 28 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1शब्दावली — रैयत/रिआया, मुज़रियान, किसान, आसामी—
2★★खुद-काश्त बनाम पाहि-काश्त; पाहि बनने के दो कारण — मर्ज़ी (बेहतर कर-शर्तें) / मजबूरी (अकाल)दो-स्तंभ तालिका
3औसत किसान — जोड़ी बैल, दो हल; गुजरात 6 एकड़ = समृद्ध; बंगाल 5 एकड़ सीमा, 10 = अमीर★संख्याएँ रेखांकित
4★व्यक्तिगत मिल्कियत — ज़मीन खरीदी-बेची जाती; हदों पर निशान (19वीं सदी का विवरण)—
5स्रोत 1 का विश्लेषण — गतिशीलता के चार आधार (बारिश-खेती, सस्ती झोंपड़ी, अपार जंगल, बेशुमार आबादी)🔎 पृ. 198 प्रश्न
6🧭 यह गतिशीलता आगे तीन जगह लौटेगी — पाहि-काश्त, “भागना = हथियार”, जंगल-बसावटअग्रिम-संकेत

(ग) समेकन — 7 मिनट

एक वाक्य: “मुग़ल किसान ज़मीन से बँधा दास नहीं — चलता-फिरता, ख़रीदता-बेचता, मोल-भाव करता उत्पादक था।”

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. रैयत का बहुवचन? (रिआया)
  2. दूसरे गाँव से ठेके पर खेती करने वाला? (पाहि-काश्त)
  3. बंगाल में अमीर आसामी की ज़मीन? (10 एकड़)

🕐 कालांश 3 — पानी, औज़ार और फ़सलों की भरमार (§1.3–1.4)

उपविषय: सिंचाई-तकनीक, फ़सलें, नयी दुनिया (पृ. 198-201)

(क) आरंभ — 5 मिनट

“आलू, टमाटर, मिर्च, मक्का, पपीता, अनानास — इनमें से अकबर ने बचपन में क्या-क्या खाया होगा?” उत्तर: कुछ भी नहीं — ये सब 17वीं सदी में नयी दुनिया से आए! (तम्बाकू भी — अकबर ने 1604 में पहली बार देखा।)

(ख) विकास — 28 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1विस्तार के तीन कारण — ज़मीन, मज़दूर, गतिशीलता; प्राथमिक उद्देश्य — पेट भरना—
2वर्षा-फ़सल संबंध: 40 इंच+ → चावल; कम → गेहूँ; कमतर → ज्वार-बाजरा; ★“मानसून = रीढ़”तालिका
3सिंचाई — राज्य की मदद: नहरें, मरम्मत; शाह नहर (पंजाब, शाहजहाँ)—
4स्रोत 2 — रहट (लाहौर-दीपालपुर) व बालटी (आगरा-चाँदवार-बयाना); चित्र 8.2🔎 विजयनगर से तुलना (पृ. 199)
5तकनीक — लकड़ी का हलका हल + लोहे का फाल (नमी बचती); बरमा बनाम हाथ से छिड़काव; लोहे की निराई-गुड़ाई—
6§1.4 — खरीफ़-रबी; 2-3 फ़सलें; ★आगरा 39, दिल्ली 43, बंगाल चावल-50संख्या-चिप्स
7★★जिन्स-ए-कामिल — कपास, गन्ना; राज्य क्यों बढ़ावा देता था (ज़्यादा कर)कक्षा-प्रश्न
8तम्बाकू-बॉक्स (दक्कन → उत्तर; 1604; जहाँगीर की बेअसर पाबंदी) + आबादी-बॉक्स (1600-1700 में +5 करोड़, ~33%)—
9नयी फ़सलें — मक्का (अफ्रीका-स्पेन मार्ग), टमाटर-आलू-मिर्च, अनानास-पपीताआरंभ से जोड़िए

★कक्षा-प्रश्न: “किसान अनाज की जगह कपास क्यों उगाएगा — जबकि कपास खाई नहीं जा सकती?” (नकदी → कर नकद में → बाज़ार से अनाज; राज्य का प्रोत्साहन।)

(ग) समेकन — 7 मिनट

🗣️ चर्चा (पृ. 201) — अध्याय 2 की तकनीकों से तुलना-तालिका।

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. शाह नहर कहाँ, किसके काल में? (पंजाब, शाहजहाँ)
  2. जिन्स-ए-कामिल का अर्थ व दो उदाहरण? (सर्वोत्तम फ़सलें; कपास, गन्ना)
  3. 1600-1700 के बीच आबादी कितनी बढ़ी? (~5 करोड़, ~33%)

🕐 कालांश 4 — गाँव का समाज : जाति और पंचायत (§2.1–2.2)

उपविषय: जाति-भेद, पंचायत, मुखिया, जाति पंचायत (पृ. 201-204)

(क) आरंभ — 5 मिनट

“ज़मीन की कमी नहीं थी — फिर भी गाँव में बहुत बड़ा तबका ग़रीब क्यों था?” NCERT का उत्तर एक वाक्य में: “कुछ जाति के लोगों को सिर्फ़ नीच समझे जाने वाले काम ही दिए जाते थे। इस तरह वे ग़रीब रहने के लिए मजबूर थे।”

(ख) विकास — 30 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1तीन घटक — खेतिहर, पंचायत, मुखिया (मुक़द्दम/मंडल)—
2§2.1 — जाति-भेद; हालत दलितों जैसी; हलालख़ोरान (हदों के बाहर), मल्लाहज़ादे (दासों-सी तुलना)—
3★जाति-गरीबी-हैसियत सीधा रिश्ता निचले तबकों में — बीच में नहीं—
4बीच के समूह — मारवाड़ की किताब: राजपूत किसान, जाट नीचे; गौरव का राजपूत-दावा; अहीर-गुज्जर-माली ऊपर; सदगोप-कैवर्त★मारवाड़ = राजस्थान-जोड़
5§2.2 — पंचायत = बुज़ुर्गों का जमावड़ा, पुश्तैनी संपत्ति वाले; अल्पतंत्र; “नीच” मज़दूरों की जगह नहीं; फ़ैसला सब पर बाध्य★‘अल्पतंत्र’ शब्द समझाइए
6मुखिया — चुनाव बुज़ुर्गों की सहमति + ज़मींदार की मंज़ूरी; बर्खास्तगी संभव; हिसाब-किताब, पटवारीभ्रष्ट मंडल-बॉक्स
7ख़ज़ाना — कर-अधिकारियों की ख़ातिरदारी, बाढ़, बाँध-नहर—
8★★सामाजिक नियमन — जाति की हदें; पूर्वी भारत में शादियाँ मंडल की मौजूदगी में; जुर्माना व निष्कासन (सीमित समय; जाति-पेशा दोनों से हाथ)—
9जाति पंचायतें — ★राजस्थान: दीवानी झगड़े, ज़मीन-दावे, शादियों के मानदंड, तरजीह-क्रम; “फ़ौजदारी छोड़ राज्य जाति पंचायत के फ़ैसले मानता था”—
10★★दरख़्वास्तें (राजस्थान-महाराष्ट्र) — ज़बरन कर/बेगार के ख़िलाफ़; सामूहिक; “न्यूनतम बुनियादी साधन = परंपरागत रिवाजी हक़”; समझौता या गाँव छोड़कर भागना = प्रभावी हथियार★कालांश 2 की गतिशीलता से जोड़िए

(ग) समेकन — 5 मिनट

🗣️ चर्चा (पृ. 206) — आज की ग्राम पंचायत से तुलना: तब अल्पतंत्र, अब निर्वाचित-आरक्षित।

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. मुखिया के दो नाम? (मुक़द्दम, मंडल)
  2. मुखिया की मंज़ूरी कौन देता था? (ज़मींदार)
  3. राज्य किन मामलों में जाति पंचायत के फ़ैसले नहीं मानता था? (फ़ौजदारी न्याय)
  4. किसानों का “बड़ा प्रभावी हथियार”? (गाँव छोड़कर भाग जाना)

🕐 कालांश 5 — दस्तकार, “छोटा गणराज्य?” और महिलाएँ (§2.3–2.4 + §3)

उपविषय: ग्रामीण दस्तकार, मुद्रा, कृषि समाज में महिलाएँ (पृ. 204-207)

(क) आरंभ — 5 मिनट

“19वीं सदी के अंग्रेज़ अफ़सरों ने भारतीय गाँव को ‘छोटा गणराज्य’ कहा — भाईचारे वाला, आत्मनिर्भर। इस कालांश के अंत में आप बताएँगे — वे कहाँ सही थे, कहाँ ग़लत।”

(ख) विकास — 30 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1§2.3 — 25% घर दस्तकारों के (कहीं-कहीं); किसान-दस्तकार भेद मुश्किल; फ़ुरसत के महीनों में दस्तकारी—
2अदायगी — फ़सल का हिस्सा / ज़मीन का टुकड़ा; महाराष्ट्र में मीरास/वतन; ★जजमानी (18वीं सदी बंगाल; ! शब्द 16-17वीं सदी में प्रचलित नहीं)★भ्रांति-निवारण
3§2.4 — “छोटा गणराज्य”? तीन खंडन: व्यक्तिगत मिल्कियत; जाति-जेंडर विषमता; ताकतवरों का न्याय-अधिकार व शोषणआरंभ-प्रश्न का उत्तर
4नकद के रिश्ते — केंद्रीय इलाकों में कर नकद; निर्यात-दस्तकारों को नकद मज़दूरी/पूर्व-भुगतान; कपास-रेशम-नील नकद—
5तैवर्नियर-बॉक्स — सराफ़ = गाँव का बैंकरचित्र 8.6
6§3 — श्रम-विभाजन: मर्द जोतते-हल चलाते; महिलाएँ बुआई-निराई-कटाई-दाना निकालना; “कंधे से कंधा”—
7पूर्वाग्रह — राजस्वला स्त्री: हल-चाक नहीं (पश्चिम), पान-बगान नहीं (बंगाल)—
8★दस्तकारी में महिलाएँ — सूत, मिट्टी, कढ़ाई; “जितना वाणिज्यीकरण, उतनी महिला-श्रम की माँग”; नियोक्ताओं के घर, बाज़ार—
9★★महिला = संसाधन — प्रजनन-क्षमता; शादीशुदा महिलाओं की कमी (कुपोषण, प्रसव-मृत्यु); “दुल्हन की क़ीमत”, दहेज नहीं; तलाकशुदा-विधवा विवाह वैधसंभ्रांत-रिवाजों से भेद
10★★नियंत्रण — मुखिया मर्द; बेवफ़ाई के शक पर भयानक दंड; दरख़्वास्तों में महिला का नाम तक दर्ज नहीं (“मर्द की माँ/बहन/पत्नी”)—
11★संपत्ति-अधिकार — भूमिहर भद्रजनों में पुश्तैनी हक़; पंजाब — विधवाएँ भी ज़मीन-बाज़ार में; हिंदू-मुसलमान महिलाओं को ज़मींदारी; ★बंगाल की राजशाही ज़मींदारी की कर्ता-धर्ता स्त्री—

(ग) समेकन — 5 मिनट

🗣️ चर्चा (पृ. 207): अपने प्रांत में कृषि-भूमि पर महिला-पहुँच — आज भी खेत-मज़दूरी में महिलाएँ अधिक, खाते में नाम कम — निरंतरता पहचानवाइए।

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. महाराष्ट्र में दस्तकारों की पुश्तैनी ज़मीन? (मीरास/वतन)
  2. गाँव का मुद्रा-परिवर्तक? (सराफ़ — तैवर्नियर)
  3. ग्रामीण संप्रदायों में विवाह हेतु क्या अदा होता था? (“दुल्हन की क़ीमत”)
  4. राजशाही ज़मींदारी किस प्रांत में थी? (बंगाल; कर्ता-धर्ता एक स्त्री)

🕐 कालांश 6 — जंगल और कबीले (§4)

उपविषय: जंगलवासी, राज्य-वाणिज्य की घुसपैठ, सरदार से राजा (पृ. 208-211)

(क) आरंभ — 5 मिनट

“‘जंगली’ शब्द सुनते ही मन में क्या आता है? अब NCERT का वाक्य सुनिए — ‘जंगली होने का मतलब सभ्यता का न होना बिलकुल नहीं था।’ आज हम यह शब्द वापस उसके असली अर्थ में सीखेंगे।”

(ख) विकास — 30 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1विस्तार — झारखंड-पूर्वी भारत, मध्य भारत, तराई, पश्चिमी घाट, दक्कन; औसत ~40%; खरबंदीमानचित्र पर
2★★‘जंगली’ = जंगल-उत्पाद, शिकार, स्थानांतरीय खेती से गुज़ारा; भीलों का ऋतु-चक्र (बसंत-उत्पाद, गर्मी-मछली, मानसून-खेती, शरद/जाड़ा-शिकार)ऋतु-तालिका; ★राजस्थान के भील
3राज्य की नज़र — जंगल = मवास (बदमाशों का अड्डा); बाबर — रक्षाकवच, परगना के लोग विद्रोही—
4घुसपैठ-1 राज्य — हाथी (पेशकश में); ★★शिकार अभियान = सद्भावनापूर्ण शासन का प्रतीक (कोने-कोने का दौरा, शिकायतें)चित्र 8.9 🔎
5घुसपैठ-2 वाणिज्य — शहद, मधुमोम, लाक (★लाक = 17वीं सदी का मुख्य निर्यात); हाथी बिकते; लोहानी कबीला — भारत-अफ़ग़ानिस्तान व पंजाब व्यापार—
6सामाजिक बदलाव — सरदार → ज़मींदार → राजा; खानदानी सेना; सिंध — 6000 घुड़सवार 7000 पैदल; ★अहोम पायक (ज़मीन बदले सैनिक सेवा), जंगली हाथी पर एकाधिकार—
7राजतांत्रिक संक्रमण 16वीं सदी में विकसित (आइन से जानकारी); कोच राजा — पड़ोसी कबीलों पर कब्ज़ा—
8सांस्कृतिक प्रभाव — सूफ़ी पीर व इस्लाम का धीरे-धीरे अपनाया जाना🧭 अ.6
9स्रोत 3 — चंडीमंगल (मुकुंदराम चक्रवर्ती): कालकेतु; ज़फ़र मियाँ + 22,000; “शेर डर गए”नाटकीय वाचन + 🔎
10स्रोत 4 — पहाड़-मैदान व्यापार (आइन, ~1595, अवध) — ऊपर से सोना-ताँबा-कस्तूरी-शहद-बाज़; नीचे से कपड़े-नमक-हींग-बरतन🔎 परिवहन-प्रश्न

(ग) समेकन — 5 मिनट

🗣️ चर्चा (पृ. 211) — राजस्थान के वन-क्षेत्र (उदयपुर-बाँसवाड़ा भील-अंचल, सरिस्का); आज के बदलाव के कारण — तब से समान/भिन्न?

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. जंगलों का अखिल भारतीय औसत? (~40%)
  2. मवास का अर्थ? (बदमाशों को शरण देने वाला अड्डा — राज्य की नज़र में जंगल)
  3. अहोम राजाओं के सैनिक-सेवक? (पायक)
  4. चंडीमंगल के रचयिता व नायक? (मुकुंदराम चक्रवर्ती; कालकेतु)

🕐 कालांश 7 — ज़मींदार : पिरामिड का संकरा शीर्ष (§5)

उपविषय: ज़मींदार की ताक़त, उत्पत्ति, दोहरा चरित्र (पृ. 211-213)

(क) आरंभ — 5 मिनट

बॉक्स “एक समांतर सैनिक बल!” पढ़वाइए — 384,558 घुड़सवार; 42,77,057 पैदल; 1863 हाथी; 4260 तोपें; 4500 नावें।

“यह किसकी सेना है? बादशाह की नहीं — ज़मींदारों की मिली-जुली ताक़त! फिर भी साम्राज्य चला कैसे?”

(ख) विकास — 30 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1परिभाषा — खेती से कमाई, पर उत्पादन में सीधी हिस्सेदारी नहीं; ऊँची हैसियत के दो कारण — जाति + ख़िदमत—
2ताक़त के तीन आधार — मिल्कियत (बेच-नाम-गिरवी; दिहाड़ी/पराधीन मज़दूर) • कर-वसूली (बदले वित्तीय मुआवज़ा) • किले + सैनिक टुकड़ियाँतीन-स्तंभ तालिका
3★★पिरामिड-रूपक — संकरा शीर्ष; अबुल फ़ज़्ल: “ऊँची जाति” ब्राह्मण-राजपूत गठबंधन + मध्यम जातियाँ + मुसलमान ज़मींदारआरेख (तालिका-रूप)
4उत्पत्ति — जंग में जीत (संभावित); बेदखली पर सनद के बिना कम संभावना! सूक्ष्मता
5★★धीमी प्रक्रिया के चार तरीक़े — जंगल-बारी, हस्तांतरण, राज्यादेश, ख़रीद; → “निचली” जातियाँ भी दाख़िल; ज़मींदारी धड़ल्ले से खरीदी-बेची जातीक्रमांकित सूची
6वंश-रणनीतियाँ — राजपूत-जाट (उत्तर भारत); सदगोप (बंगाल)—
7★विकास-भूमिका — बसावट की अगुआई, साजो-सामान व उधार, मौद्रीकरण, फ़सल-बिक्री, हाट बसाना—
8★★★शोषक या संरक्षक? — “पारस्परिकता, पैतृकवाद, संरक्षण”; दो प्रमाण: भक्ति-संतों का निशाना राजस्व अधिकारी (ज़मींदार/साहूकार नहीं); 17वीं सदी के विद्रोहों में ज़मींदारों को किसानों का समर्थन★केंद्रीय बहस

★कक्षा-प्रश्न: “अगर ज़मींदार सचमुच सबसे बड़ा शोषक होता, तो विद्रोही किसान उसी के झंडे तले क्यों लड़ते?”

(ग) समेकन — 5 मिनट

🗣️ चर्चा (पृ. 213) — आज़ादी के बाद ज़मींदारी-उन्मूलन के कारण इसी अनुभाग से निकलवाइए।

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. ज़मींदार की निजी ज़मीन क्या कहलाती थी? (मिल्कियत)
  2. ख़िदमत का अर्थ? (राज्य को ख़ास सेवाएँ)
  3. बेदखली की पुष्टि किससे होती थी? (राज्यादेश — सनद)
  4. जंगल साफ़ कर ज़मींदारी बसाना क्या कहलाता था? (जंगल-बारी)

🕐 कालांश 8 — राज्य की तिजोरी : भू-राजस्व और चाँदी (§6–§7)

उपविषय: जमा-हासिल, भूमि-वर्गीकरण, वसूली-विधियाँ, चाँदी का बहाव (पृ. 213-217)

(क) आरंभ — 5 मिनट

हाथ में सिक्का और अनाज के दाने लेकर: “अकबर का हुक्म था — कोशिश करो कि किसान यह (सिक्का) दे; पर यह (अनाज) भी लेने से मना मत करो। आज समझेंगे क्यों।”

(ख) विकास — 30 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1★भू-राजस्व = आर्थिक बुनियाद; दीवान का दफ़्तर; राजस्व अधिकारी = “निर्णायक ताकत”—
2★★दो चरण — जमा (निर्धारण) बनाम हासिल (वसूली); अमील-गुज़ार; नकद-कोशिश + फ़सल-विकल्प; राज्य हिस्सा अधिकतम रखने की कोशिशपरिभाषा-जोड़ी
3नपाई — जुती + जोतने लायक; आइन में संकलन; ★1665 औरंगज़ेब का हुक्म (स्रोत 7 — आसामीवार मौजूदात; “किफ़ायत व कल्याण”)🔎 सर्वेक्षण-प्रश्न
4! जंगली इलाकों की नपाई नहीं हो पाई🧭 §4 से जोड़
5★★स्रोत 5 — भूमि-वर्गीकरण: पोलज-परौती-चचर-बंजर; पहले दो की तीन किस्में; मध्यम उत्पाद का एक-तिहाई = शाही शुल्कतालिका + 🔎
6★★स्रोत 6 — नक़द या जीन्स: कणकुत, बटाई/भाओली, खेत बटाई, लाँग बटाईचार-विधि तालिका + 🔎
7बॉक्स — अमीन, मनसबदारी (नक़दी बनाम जागीर; तबादले)अ.9 का बीज
8मानचित्र 1 — बाबर 1530 → अकबर 1605 → औरंगज़ेब 1707🔎 विस्तार-प्रभाव
9§7 — चार साम्राज्य (मिंग-सफ़ावी-ऑटोमन-मुग़ल); नयी दुनिया; निर्यात-भुगतान में चाँदी भारत खिंची; ★“भारत में चाँदी के प्राकृतिक संसाधन नहीं”; 16-18वीं सदी मुद्रा-स्थिरता; ढलाई-विस्तार; नकदी-कर आसान—
10स्रोत 8 — कारेरी (~1690): अमेरिका → यूरोप → तुर्की-फ़ारस-अरब → मोचा-बसरा → हिंदुस्तान; जापान (डच); “नकद वहीं रह जाता है”विश्व-मानचित्र पर तीर

(ग) समेकन — 5 मिनट

🗣️ चर्चा (पृ. 215) — “लचीली व्यवस्था?” दोनों पक्ष की तालिका। + चर्चा (पृ. 216) आज के कृषि-कर से तुलना (गृहकार्य)।

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. जमा और हासिल का भेद? (निर्धारित बनाम वास्तविक वसूली)
  2. तीन-चार वर्ष खाली ज़मीन? (चचर)
  3. कणकुत का शाब्दिक अर्थ? (कण = अनाज, कुत = अंदाज़ा)
  4. कारेरी कौन था, कब आया? (इटली का मुसाफ़िर, ~1690)

🕐 कालांश 9 — आइन-ए-अकबरी : स्रोत की शल्य-परीक्षा (§8)

उपविषय: रचना, पाँच दफ़्तर, विधि, सीमाएँ (पृ. 217-221)

(क) आरंभ — 5 मिनट

“जिस किताब से हमने यह पूरा अध्याय पढ़ा, आज उसी किताब का ‘पोस्टमार्टम’ करेंगे — इतिहासकार की तरह।”

(ख) विकास — 30 मिनट

क्रमबिंदुविधि
1रचना — अकबर के 42वें शासन-वर्ष, 1598 ई. में, पाँच संशोधनों के बाद पूरी; अकबरनामा की तीसरी जिल्द (पहली दो — ऐतिहासिक दास्तान); राजपत्र-स्वरूप—
2★★पाँच भाग (दफ़्तर) — मंज़िल-आबादी (शाही घर), सिपह-आबादी (प्रशासन-सेना; मनसबदार-विद्वान-कवि जीवनियाँ), मुल्क-आबादी (“बारह प्रांतों का बयान”), 4-5 (रीति-रिवाज + शुभ वचन)तालिका
3मुल्क-आबादी — सरकार-स्तर की तालिकाएँ, आठ खाने (परगनात, क़िला, अराज़ी, नकदी, सुयूरग़ल, ज़मींदार, ★जातियाँ+फ़ौज)—
4★★स्रोत 9 — “गुलाब बाग की सिंचाई”: अबुल फ़ज़्ल की छह विधियाँ (दस्तावेज़, जवाब-तलबी, परखे गए बयान, संस्मरण-आदेश, दफ़्तर की मूल प्रतियाँ, मसौदे)🔎 स्रोत-सूची प्रश्न
5विश्वसनीयता — पाँच संशोधन; मौखिक की पुष्टि; आँकड़े शब्दों में भी—
6★★चार सीमाएँ — जोड़ की ग़लतियाँ (मामूली); आँकड़ों की विषमता (बंगाल-उड़ीसा की ज़मींदार-जातियाँ नहीं); कीमतें-मज़दूरी कम दर्ज; ★आगरा-केंद्रित आँकड़े — “बाकी हिस्सों के लिए प्रासंगिकता सीमित”क्रमांकित सूची
7फिर भी — “असामान्य व अनोखा दस्तावेज़”; पहले के इतिहासकार = केवल राजनीतिक वारदातें; आइन = लोग-पेशे-उत्पाद; संदर्भ बिंदु—
8अनुवाद-बॉक्स — ब्लॉकमेन (संपादन; खंड 1, 1873), जैरेट (खंड 2-3; 1891, 1894), एशियाटिक सोसाइटी—
9🧭 पूरा वृत्त — कालांश 1 का वाक्य दोहराइए: “सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया” — अब विद्यार्थी इसे प्रमाणों से सिद्ध कर सकते हैंसमापन

★कक्षा-प्रश्न (स्रोत 9 से): “अबुल फ़ज़्ल ने ‘सच बोलने वाले’ बयान ‘परखे’ — पर वेतन अकबर देता था। क्या कोई दरबारी इतिहासकार पूरी तरह निष्पक्ष हो सकता है?”

(ग) समेकन — 5 मिनट

अभ्यास प्रश्न 1 का ढाँचा मौखिक बनवाइए (समस्याएँ + इतिहासकारों के उपाय)।

(घ) मूल्यांकन-प्रश्न

  1. आइन कब, कितने संशोधनों के बाद पूरी हुई? (1598, पाँच)
  2. तीसरे भाग का नाम व विषय? (मुल्क-आबादी — वित्त-राजस्व + बारह प्रांतों का बयान)
  3. किन दो सूबों की ज़मींदार-जाति सूचनाएँ नहीं? (बंगाल, उड़ीसा)
  4. मानक अंग्रेज़ी अनुवाद किनके? (ब्लॉकमेन खंड-1; जैरेट खंड 2-3)

🕐 कालांश 10 — पुनरावृत्ति : काल-रेखा, मानचित्र, सूत्र

(क) गतिविधियाँ — 35 मिनट

क्रमगतिविधि
1काल-रेखा — 1526 से 1857 तक बोर्ड पर शृंखला-खेल (हर विद्यार्थी एक पड़ाव)
2मानचित्र कार्य (अभ्यास 10) — विश्व-नक्शे पर चाँदी-मार्ग: अमेरिका → यूरोप → मोचा-बसरा → भारत; जापान-डच; पूर्वी बंदरगाह
3चार तीर-शृंखलाएँ (मास्टर 5.2) — वंश-क्रम, भूमि-वर्ग, वसूली-विधियाँ, आइन-दफ़्तर
4पाँच भ्रांतियाँ (मास्टर 5.3) — सही/ग़लत + कारण खेल
5अभ्यास 1-9 के उत्तर-ढाँचे मौखिक
6पाँच स्तंभ (मास्टर 5.1) की तालिका भरवाइए

(ख) समापन — 5 मिनट

सूत्र-वाक्य लिखवाइए: “मुग़ल साम्राज्य की बुनियाद क़िले नहीं, खेत थे…”

(ग) गृहकार्य

  • अभ्यास 2, 6, 8 लिखित; परियोजना 11 (गाँव-दौरा) समूह में — दो सप्ताह।

🕐 कालांश 11 — मूल्यांकन

खंडप्रारूपअंक
क5 × MCQ (शब्दावली, आँकड़े, वंश-क्रम)5
ख5 × एक-पंक्ति (पाहि-काश्त, जिन्स-ए-कामिल, मवास, जमा-हासिल, सुयूरग़ल)5
ग2 × लघूत्तर — पंचायत के कार्य; भूमि-वर्गीकरण6
घ1 × निबंधात्मक — ज़मींदार की भूमिका अथवा महिलाओं की भूमिका6
ङ1 × स्रोत-आधारित — स्रोत 1/5/9 पर तीन प्रश्न4
चमानचित्र — चाँदी-मार्ग अथवा मुग़ल-विस्तार4
योग30

द. समावेशी शिक्षण-संकेत

  • चित्र-समृद्ध अध्याय: 16 चित्र — हर कालांश में एक लघुचित्र-विश्लेषण (चित्र 8.1, 8.3, 8.4, 8.5, 8.9 सर्वोत्तम)।
  • राजस्थान-जोड़: मारवाड़ की किताब (राजपूत-जाट), राजस्थान की जाति पंचायतें व दरख़्वास्तें, भील ऋतु-चक्र, आज की बावड़ी-सिंचाई बनाम रहट — विद्यार्थियों के परिवेश से सीधे जुड़ते हैं।
  • धीमे अधिगमकर्ता: चार तीर-शृंखलाएँ + खुद/पाहि-काश्त + पोलज-परौती-चचर-बंजर — न्यूनतम सुरक्षित स्तर।
  • प्रतिभाशाली: “सत्ता के गलियारों का नज़रिया”, जजमानी-शब्द की कालबद्धता, आगरा-केंद्रित आँकड़ों की सीमा — लघु-निबंध।