कक्षा: XII | बोर्ड: RBSE (NCERT पाठ्यपुस्तक) | माध्यम: हिंदी कुल कालांश: 10 (प्रत्येक 40-45 मिनट) + 1 मूल्यांकन कालांश पुस्तक: भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग-2 | पृष्ठ: 115–139
अ. अधिगम उद्देश्य (Learning Objectives)
अध्याय के अंत तक विद्यार्थी सक्षम होंगे —
| क्रम | उद्देश्य | संज्ञानात्मक स्तर |
|---|---|---|
| 1 | अल-बिरूनी, इब्न बतूता तथा बर्नियर का परिचय, कृति व काल बता सकेंगे | स्मरण |
| 2 | किताब-उल-हिन्द, रिह़ला तथा ट्रैवल्स इन द मुग़ल एम्पायर की विशेषताएँ बता सकेंगे | बोध |
| 3 | अल-बिरूनी के तीन अवरोधों तथा उसकी जाति-व्यवस्था की व्याख्या का विश्लेषण कर सकेंगे | विश्लेषण |
| 4 | इब्न बतूता के विवरणों से चौदहवीं सदी के शहरी जीवन का पुनर्निर्माण कर सकेंगे | अनुप्रयोग |
| 5 | बर्नियर की द्वि-विपरीतता की विधि तथा उसकी सीमाओं का मूल्यांकन कर सकेंगे | मूल्यांकन |
| 6 | तीनों यात्रियों की तुलना कर उनके दृष्टिकोणों में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे | विश्लेषण |
| 7 | दास प्रथा व महिलाओं की स्थिति संबंधी साक्ष्यों का संतुलित विवेचन कर सकेंगे | मूल्यांकन |
| 8 | ★यह समझ सकेंगे कि हर स्रोत का एक दृष्टिकोण होता है और उसे कैसे पहचाना जाए | सृजन/मूल्यांकन |
★सर्वोच्च उद्देश्य (उद्देश्य 8): यह अध्याय ‘क्या हुआ’ से अधिक ‘हमें कैसे पता’ सिखाता है। कक्षा का हर कालांश इसी की ओर बढ़ना चाहिए।
ब. पूर्व-ज्ञान की जाँच (कालांश 1 के आरंभ में)
- कक्षा VII–VIII: दिल्ली सल्तनत, मुहम्मद बिन तुग़लक़, मुग़ल साम्राज्य
- भाग-1 से: अध्याय 2 (अभिलेख — स्रोत का दृष्टिकोण), अध्याय 3 (आदर्श बनाम व्यवहार), अध्याय 4 (परिचित से अपरिचित को समझना)
- सामान्य अनुभव: यात्रा, नया स्थान, अजनबीपन
स. आवश्यक सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| NCERT पाठ्यपुस्तक (भाग-2) | अनिवार्य |
| 02-Presentation.pptx | कालांश 1–10 |
| विश्व मानचित्र (रेखा-मानचित्र) | कालांश 4, 10 |
| असली नारियल व पान का पत्ता ★ | कालांश 5 (सर्वश्रेष्ठ गतिविधि) |
| 06-Flashcards.md | कालांश 9-10 पुनरावृत्ति |
| श्यामपट्ट/चार्ट पेपर | तुलना-तालिकाएँ बनाने हेतु |
कालांश-वार योजना
🕐 कालांश 1 — यात्री, नज़रिया और अध्याय का ढाँचा
उपविषय: अध्याय की प्रस्तावना (पृ. 115-116) + अध्याय की संरचना
(क) आरंभ — 7 मिनट★
प्रश्न से शुरुआत कीजिए (व्याख्यान से नहीं):
“आपके घर में रोज़ क्या-क्या होता है जो आप कभी डायरी में नहीं लिखेंगे?” (उत्तर आने दीजिए — चाय बनना, माँ का काम, गली का शोर…) “अब सोचिए — यदि विदेश से कोई मेहमान आपके घर एक हफ़्ते रहे, तो वह क्या-क्या लिखेगा?”
★यहीं अध्याय का मूल सूत्र श्यामपट्ट पर लिखिए:
“जो स्थानीय के लिए साधारण है, वही बाहरी के लिए उल्लेखनीय है।”
(ख) विकास — 25 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | यात्रा के कारण — कार्य, आपदा, व्यापार, सैनिक, पुरोहित, तीर्थ, साहस | पहली पंक्ति पढ़वाइए, सूची बनवाइए |
| 2 | ★NCERT का मूल तर्क — “पूरी तरह से भिन्न सामाजिक तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने के कारण ये लेखक दैनिक गतिविधियों तथा प्रथाओं के प्रति अधिक सावधान रहते थे” | पाठ्यपुस्तक से पढ़वाइए |
| 3 | ! महिला यात्रियों के वृत्तांत का अभाव | “दुर्भाग्य से… लगभग न के बराबर हैं” — इसे रेखांकित करवाइए |
| 4 | वृत्तांतों के प्रकार — दरबारी, धार्मिक, स्थापत्य, प्रशासनिक | तालिका |
| 5 | ★तीन यात्रियों का परिचय-कार्ड | नाम, देश, सदी, कृति, भाषा — तालिका बनवाइए |
| 6 | ★अध्याय की द्वि-चक्रीय संरचना | श्यामपट्ट पर आरेख (नीचे देखें) |
★श्यामपट्ट-आरेख (अवश्य बनाइए):
| चक्र | खंड | प्रश्न |
|---|---|---|
| पहला | §1, §2, §3 | कौन थे? |
| दूसरा | §4, §5, §6 | कैसे देखा? |
| समापन | §7 | किसे नहीं देखा? |
(ग) समापन — 8 मिनट
- मुख्य प्रश्न: “ये यात्री किसके लिए लिखते थे?” — कहिए कि इसका उत्तर हर यात्री के लिए अलग है, और यही अध्याय का असली विषय है
- गृहकार्य: §1.1 (अल-बिरूनी: ख़्वारिज़्म से पंजाब तक) पढ़कर आइए
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- यात्रा के कोई चार कारण बताइए।
- अध्याय किन तीन यात्रियों पर केंद्रित है? (देश व सदी सहित)
- NCERT के अनुसार बाहरी यात्री का वृत्तांत अधिक रोचक क्यों होता है?
🕑 कालांश 2 — अल-बिरूनी : जीवन तथा किताब-उल-हिन्द
उपविषय: §1.1 व §1.2 (पृ. 116-117)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“मान लीजिए आपको ज़बरदस्ती किसी अनजान देश ले जाया जाए। क्या आप उस देश के बारे में अच्छी किताब लिखेंगे?” (विद्यार्थी प्राय: ‘नहीं’ कहेंगे) → “अल-बिरूनी के साथ यही हुआ — और उसने इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण किताबों में से एक लिखी।”
(ख) विकास — 27 मिनट
| क्रम | बिंदु | ध्यान देने योग्य |
|---|---|---|
| 1 | जन्म 973, ख़्वारिज़्म — “शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र” | — |
| 2 | भाषाएँ — सीरियाई, फ़ारसी, हिब्रू, संस्कृत; यूनानी नहीं जानता था | ! यह अपवाद महत्त्वपूर्ण है |
| 3 | ★1017 — बंधक के रूप में ग़ज़नी | “वह बंधक के रूप में ग़ज़नी आया था” — रेखांकित करवाइए |
| 4 | भारत-रुचि के तीन कारण — 8वीं सदी से अनुवाद-परंपरा; पंजाब का ग़ज़नवी साम्राज्य में आना; ब्राह्मण विद्वानों के साथ वर्षों बिताना | — |
| 5 | 📦 बॉक्स — ग्रंथों का अनुवाद ★ | पतंजलि → अरबी; यूक्लिड → संस्कृत |
| 6 | किताब-उल-हिन्द — अरबी, 80 अध्याय, बारह विषय | विषय-सूची लिखवाइए |
| 7 | ★त्रि-चरणीय शैली — प्रश्न → संस्कृतवादी वर्णन → तुलना | “लगभग ज्यामितीय संरचना”; कारण — गणित की ओर झुकाव |
| 8 | 📦 स्रोत 1 — उद्देश्य | “सहायक… सूचना का संग्रह” |
(ग) समापन — 8 मिनट★
📦 साइड-बॉक्स ‘हिंदू’ — पूरा पढ़वाइए और श्यामपट्ट पर शब्द-शृंखला बनाइए: फ़ारसी (सिंधु के पूर्व का क्षेत्र) → अरबी (अल-हिंद, हिंदी) → तुर्क (हिंदू, हिंदुस्तान, हिंदवी) → [बहुत बाद में] धार्मिक अर्थ
सूत्र: “नाम पहले भूगोल का था — धर्म का बहुत बाद में बना।”
गृहकार्य: §2.1 (इब्न बतूता) पढ़िए; चित्र 5.2 देखकर सोचिए — “कपड़े यूनानी हैं या अरबी?”
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- अल-बिरूनी भारत कैसे आया?
- किताब-उल-हिन्द की भाषा, आकार और शैली बताइए।
- ‘हिंदू’ शब्द का मूल अर्थ क्या था?
- उसने कौन-सी दो कृतियों का अनुवाद किया — किस-किस भाषा में?
🕒 कालांश 3 — इब्न बतूता : विश्व-यात्री
उपविषय: §2.1 व §2.2 (पृ. 118-121)
(क) आरंभ — 6 मिनट
📦 स्रोत 2 ‘घोंसले से निकलता पक्षी’ कक्षा में पढ़वाइए — फिर पूछिए:
“बाईस वर्ष की उम्र में घर छोड़ना — क्या आप ऐसा कर सकते हैं? और वह तीस साल बाद लौटा।”
(ख) विकास — 26 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | परिचय — तैंजियर (मोरक्को), शरिया-विशेषज्ञ परिवार, 1304-77 | — |
| 2 | ★ज्ञान-मीमांसा — “पुस्तकों के स्थान पर यात्राओं से अर्जित अनुभव को ज्ञान का अधिक महत्त्वपूर्ण स्रोत” | ★अल-बिरूनी से मूल भेद — श्यामपट्ट पर लिखिए |
| 3 | यात्रा-वृत्त — 1333 सिंध → दिल्ली का क़ाज़ी → कारागार → 1342 चीन का दूत → मालद्वीप (18 माह) → श्रीलंका, बंगाल, असम → सुमात्रा → ज़ायतुन, बीजिंग → 1354 वापसी | कालक्रम-शृंखला बनवाइए |
| 4 | मार्को पोलो से तुलना (1254-1323, इटली) | — |
| 5 | यात्रा की कठिनाइयाँ — समय-तालिका (मुल्तान 40, सिंध 50, दौलताबाद 40, ग्वालियर 10 दिन); डाकुओं का आक्रमण | चित्र 5.3 दिखाइए |
| 6 | 📦 बॉक्स — एकाकी यात्री ★ | कक्षा में पढ़वाइए — ज्वर, अकेलापन, आँसू |
| 7 | ★★स्रोत 3 — शिक्षा तथा मनोरंजन | इस कालांश का सबसे महत्त्वपूर्ण बिंदु (नीचे देखें) |
| 8 | 📦 बॉक्स — इब्न बतूता के पदचिह्नों पर | रज़्ज़ाक, बल्ख़ी, हाज़िन |
★★स्रोत 3 पर विशेष 8 मिनट दीजिए — पाँच निष्कर्ष निकलवाइए:
- रिह़ला श्रुतलेखन से बना (इब्न जुज़ई)
- राजकीय आदेश पर बना
- विषय-सूची पहले से तय थी
- उद्देश्य — मनोरंजन + शिक्षा
- ★‘असाधारण’ पर सचेत बल
श्यामपट्ट-सूत्र: “जिस वृत्तांत का उद्देश्य ही ‘असाधारण’ बताना हो, उसमें ‘साधारण’ का अभाव होगा।”
(ग) समापन — 6 मिनट
मानचित्र 1 दिखाइए; नोट पढ़वाइए — “कई जगहों के नाम उस तरह से लिखे गए हैं जिस तरह इब्न बतूता उन्हें जानता होगा” → ‘देहली’, ‘ग़ज़ना’
“वर्तनी भी एक ऐतिहासिक साक्ष्य है।”
गृहकार्य: §3 (बर्नियर) पढ़िए; चित्र 5.6 व 5.7 की तुलना कीजिए
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- इब्न बतूता किस उम्र में घर से निकला? कितने वर्ष बाद लौटा?
- रिह़ला किसने लिखा और किसके आदेश पर?
- सिंध से दिल्ली की यात्रा में कितने दिन लगते थे?
- अल-बिरूनी और इब्न बतूता की ज्ञान-प्राप्ति की विधि में मूल अंतर क्या था?
🕓 कालांश 4 — बर्नियर : यूरोपीय यात्री और उसका उद्देश्य
उपविषय: §3 व §3.1 (पृ. 122-123)
(क) आरंभ — 6 मिनट★
चित्र 5.6 (बर्नियर — यूरोपीय पोशाक) और 5.7 (तैवर्नियर — भारतीय पोशाक) साथ-साथ दिखाइए:
“दोनों फ्रांस से हैं। एक भारतीय कपड़ों में, दूसरा यूरोपीय कपड़ों में। इससे क्या पता चलता है?” संकेत: तैवर्नियर व्यापारी था — उसे घुलना-मिलना पड़ता था; बर्नियर दरबारी बुद्धिजीवी — वह बाहरी बना रहा।
(ख) विकास — 26 मिनट
| क्रम | बिंदु | ध्यान |
|---|---|---|
| 1 | यूरोपीय यात्रियों का क्रम — 1500 पुर्तगाली → 1600 के बाद डच, अंग्रेज़, फ्रांसीसी | कालक्रम |
| 2 | पूर्ववर्ती लेखक — रॉबर्टो नोबिली, दुआर्ते बरबोसा, तैवर्नियर (छह बार), मनूकी (भारत में ही बस गया) | — |
| 3 | बर्नियर — चिकित्सक + राजनीतिक दार्शनिक + इतिहासकार; 1656-68 (बारह वर्ष) | ‘विशिष्ट’ क्यों? |
| 4 | दरबारी संबंध — दारा शिकोह के चिकित्सक; फिर दानिशमंद ख़ान के साथ | — |
| 5 | ★किसके लिए लिखा? — कृति लुई XIV को समर्पित; अन्य कार्य मंत्रियों को पत्रों के रूप में | ★यह कुंजी है |
| 6 | 📦 स्रोत 4 — मुग़ल सेना के साथ यात्रा | गतिविधि (नीचे) |
| 7 | ★★मुद्रण बनाम हस्तलिपि | तालिका बनवाइए |
★गतिविधि (8 मिनट) — “तब और अब”: श्यामपट्ट पर दो स्तंभ। स्रोत 4 से बर्नियर की सूची लिखवाइए (तंबू, दरी, बिस्तर, तकिया, चावल, नींबू, दही…), फिर पूछिए — “आज आप क्या ले जाएँगे?”
निष्कर्ष: आवश्यकताएँ वही हैं — रूप बदला है।
★★मुद्रण-तालिका (अवश्य बनवाइए):
| अल-बिरूनी/इब्न बतूता | बर्नियर | |
|---|---|---|
| माध्यम | हस्तलिपि | मुद्रण |
| प्रकाशन | 1800 से पहले सामान्यत: नहीं | 1670-71 |
| अनुवाद | सीमित | 5 वर्ष में 4 भाषाओं में |
| पुनर्मुद्रण | — | फ्रांसीसी 8 बार, अंग्रेज़ी 3 बार |
सूत्र: “किसका विचार फैलेगा — यह गुणवत्ता से कम, तकनीक से अधिक तय होता है।”
(ग) समापन — 6 मिनट
📦 बॉक्स — ‘भारत के विषय में विचारों का निर्माण व प्रसार’: 1750 के बाद शेख़ इतिसमुद्दीन व मिर्ज़ा अबु तालिब को अपने ही देश की बनी-बनाई छवि से लड़ना पड़ा।
गृहकार्य: §4 (अल-बिरूनी की समझ) पढ़िए
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- बर्नियर भारत में कब से कब तक रहा?
- उसने अपनी प्रमुख कृति किसे समर्पित की और क्यों यह महत्त्वपूर्ण है?
- बर्नियर के वृत्तांत का प्रसार अल-बिरूनी से अधिक क्यों हुआ?
🕔 कालांश 5 — अल-बिरूनी : अवरोध और जाति-व्यवस्था★
उपविषय: §4.1 व §4.2 (पृ. 124-125)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“किसी दूसरे देश को समझने में सबसे बड़ी रुकावट क्या हो सकती है?” (उत्तर आने दीजिए) → “अल-बिरूनी ने हज़ार साल पहले इसका उत्तर दिया था — और तीन रुकावटें गिनाई थीं।”
(ख) विकास — 28 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ★★तीन अवरोध — भाषा • धर्म-प्रथा • अभिमान | श्यामपट्ट पर बड़े अक्षरों में |
| 2 | ‘अभिमान’ पर चर्चा | “पहले दो बाहरी हैं, तीसरा भीतरी” |
| 3 | 📦 बॉक्स — विशाल पहुँच वाली एक भाषा | ★“अरबी भाषा की तरह ही” — समकक्ष माना, हीन नहीं |
| 4 | ! अल-बिरूनी की अपनी सीमा — “लगभग पूरी तरह से ब्राह्मणों द्वारा रचित कृतियों पर आश्रित”; वेद, पुराण, भगवद्गीता, पतंजलि, मनुस्मृति | ★विडंबना रेखांकित कीजिए |
| 5 | 📦 बॉक्स — ईश्वर ही जानता है! ★ | 216,432 वर्ष; भौतिक तर्क से संदेह |
| 6 | जाति-व्यवस्था — विधि = “अन्य समुदायों में प्रतिरूपों की खोज”; फ़ारस के चार वर्ग | ★उद्देश्य — “ये वर्ग केवल भारत तक सीमित नहीं” |
| 7 | ★★अपवित्रता की अस्वीकृति | तर्क-शृंखला (नीचे) |
| 8 | 📦 स्रोत 5 — वर्ण व्यवस्था | पाँच विश्लेषण-बिंदु |
★★अपवित्रता-तर्क की चार सीढ़ियाँ (श्यामपट्ट पर):
| सीढ़ी | तर्क |
|---|---|
| 1 | हर अपवित्र वस्तु अपनी पवित्रता पुन: प्राप्त करती है |
| 2 | सूर्य हवा को स्वच्छ करता है; समुद्र का नमक पानी को गंदा होने से बचाता है |
| 3 | “यदि ऐसा नहीं होता तो पृथ्वी पर जीवन असंभव होता” |
| 4 | ∴ अपवित्रता की अवधारणा प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है |
सूत्र: “वह ग्रंथ से सहमत हुआ, पर सिद्धांत से असहमत — यही सच्चा विद्वान है।”
★स्रोत 5 पर विशेष ध्यान — अंतिम वाक्य रेखांकित करवाइए:
“ये एक साथ एक ही शहरों और गाँवों में रहते हैं, समान घरों और आवासों में मिल-जुल कर।” → यह प्रेक्षण है, ग्रंथ नहीं! अत: वह केवल ग्रंथों पर आश्रित नहीं था।
(ग) समापन — 7 मिनट
★आदर्श बनाम व्यवहार: अंत्यज (‘व्यवस्था से परे’) — “सामाजिक प्रताड़ना का शिकार… फिर भी आर्थिक तंत्र में शामिल”
🧭 भाग-1, अध्याय 3 से जोड़िए — धर्मसूत्रों का आदर्श बनाम वास्तविकता
गृहकार्य: §5 (इब्न बतूता की उत्कंठा) पढ़िए; कल कक्षा में नारियल और पान का पत्ता लाया जाएगा
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- अल-बिरूनी के तीन अवरोध कौन-से थे?
- उसने अपवित्रता की अवधारणा को क्यों अस्वीकार किया? (दो उदाहरण सहित)
- ‘अंत्यज’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- क्या अल-बिरूनी केवल संस्कृत ग्रंथों पर आश्रित था? स्रोत 5 से प्रमाण दीजिए।
🕕 कालांश 6 — इब्न बतूता : अपरिचित को समझाने की कला★★
उपविषय: §5 व §5.1 (पृ. 126)
★यह अध्याय का सबसे आनंददायक कालांश है — इसे गतिविधि-आधारित रखिए।
(क) आरंभ — प्रमुख गतिविधि (15 मिनट)★★
कक्षा में असली नारियल और पान का पत्ता लाइए।
चरण 1 (5 मिनट): एक विद्यार्थी को नारियल दीजिए और कहिए —
“अब आप इसका वर्णन एक ऐसे व्यक्ति के लिए लिखिए जिसने इसे कभी नहीं देखा, और जो कभी देख भी नहीं पाएगा। आप चित्र नहीं बना सकते।”
चरण 2 (5 मिनट): दो-तीन विद्यार्थियों से पढ़वाइए। (वे प्राय: तुलना का ही सहारा लेंगे — यही सिद्ध करना है।)
चरण 3 (5 मिनट): अब स्रोत 6 पढ़वाइए और तुलना कीजिए।
(ख) विकास — 20 मिनट
| क्रम | बिंदु |
|---|---|
| 1 | ★चौदहवीं सदी का ‘वैश्विक संचार तंत्र’ — “पूर्व में चीन से लेकर पश्चिम में उत्तर-पश्चिमी अफ़्रीका तथा यूरोप तक” |
| 2 | शहरी केंद्रों की बहुभाषिकता — अरबी, फ़ारसी, तुर्की |
| 3 | ★चयन का नियम — “जो भी कुछ अपरिचित था उसे विशेष रूप से रेखांकित किया जाता था” |
| 4 | 📦 स्रोत 6 — नारियल — चार सीढ़ियाँ (नीचे) |
| 5 | 📦 स्रोत 7 — पान — अंगूर-लता से तुलना; फल नहीं होता; प्रक्रिया-वर्णन |
★नारियल-वर्णन की चार सीढ़ियाँ (श्यामपट्ट पर):
| सीढ़ी | विधि | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | परिचित से तुलना (वृक्ष) | खजूर |
| 2 | अंतर स्पष्ट | “सिवाय एक अपवाद के” |
| 3 | परिचित से तुलना (फल) | मानव सिर, आँखें, मुख, मस्तिष्क, बाल |
| 4 | ★उपयोगिता | रस्सी; लोहे की कीलों के बजाय जहाज़ की सिलाई |
★सीढ़ी 4 पर विशेष ध्यान दिलाइए — यह तकनीकी साक्ष्य है, कौतुक नहीं।
(ग) समापन — 5 मिनट
कक्षा-प्रश्न: “क्या इब्न बतूता का वर्णन सटीक है?”
संतुलित उत्तर: वर्णन सटीक, उपमा अतिरंजित — पर उपयोगिता वाला भाग पूर्णत: सटीक।
गृहकार्य: §5.2 व §5.3 (शहर व डाक-व्यवस्था) पढ़िए
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- नारियल का वर्णन करने के लिए इब्न बतूता ने कौन-सी दो तुलनाएँ कीं?
- नारियल के रेशे का क्या उपयोग होता था?
- पान की कौन-सी बात इब्न बतूता को असामान्य लगी?
🕖 कालांश 7 — इब्न बतूता : शहर, बाज़ार और डाक-व्यवस्था★
उपविषय: §5.2 व §5.3 (पृ. 127-129)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“आज दिल्ली से सूचना जयपुर पहुँचने में कितना समय लगता है? और आप ख़ुद कितनी देर में पहुँचेंगे?” “चौदहवीं सदी में भी सूचना आदमी से दस गुना तेज़ चलती थी। कैसे? आज यही पढ़ेंगे।”
(ख) विकास — 28 मिनट
खंड A — शहर (12 मिनट)
| क्रम | बिंदु |
|---|---|
| 1 | “व्यापक अवसरों से भरपूर… जिनके पास आवश्यक इच्छा, साधन तथा कौशल था” — ! अवसर सबके लिए नहीं |
| 2 | दिल्ली — भारत में सबसे बड़ा; दौलताबाद आकार में चुनौती देता था |
| 3 | 📦 स्रोत 8 — देहली — प्राचीर 11 हाथ, 28 द्वार, बदायूँ दरवाज़ा, मांडवी (अनाज मंडी), गुल दरवाज़ा (फलों का बगीचा), क़ब्रगाह के फूल |
| 4 | ★चित्र 5.8 व 5.9 से मिलान — “क्या इब्न बतूता ने जो लिखा, वह इन चित्रों में दिखता है?” |
| 5 | ★★बाज़ार = आर्थिक + धार्मिक (मस्जिद व मंदिर) + सांस्कृतिक (नर्तक, संगीतकार, गायक) |
| 6 | 📦 स्रोत 9 — तारावबाद (दौलताबाद) — गुरुवार का आयोजन; हिंदू व मुस्लिम दोनों शासक आते थे |
| 7 | आर्थिक प्रेक्षण — दो फ़सलें, अंतर-एशियाई व्यापार, सूती कपड़ा, मलमल, रेशम, ज़री, साटन |
| 8 | ! इतिहासकार बनाम इब्न बतूता — “उसकी शहरों की समृद्धि का वर्णन करने में अधिक रुचि नहीं थी” — पर इतिहासकारों ने उससे गाँव से अधिशेष के अधिग्रहण का तर्क निकाला |
खंड B — डाक-व्यवस्था (16 मिनट) ★★ 📦 स्रोत 10 विस्तार से पढ़वाइए, फिर श्यामपट्ट पर तालिका:
| प्रकार | नाम | दूरी |
|---|---|---|
| अश्व डाक | उलुक | हर चार मील पर राजकीय घोड़े |
| पैदल डाक | अवस्थान = दावा | प्रति मील तीन (= 1/3 मील) |
★पैदल-डाक की कार्य-विधि — विद्यार्थियों से क्रम बनवाइए:
- हर तीन मील पर घनी आबादी वाला गाँव, बाहर तीन मंडप
- हर व्यक्ति के पास दो हाथ लंबी छड़, ऊपर ताँबे की घंटियाँ
- संदेशवाहक एक हाथ में पत्र, दूसरे में घंटी वाली छड़ लेकर दौड़ता है
- मंडप के लोग घंटी की आवाज़ सुनकर तैयार हो जाते हैं
- एक व्यक्ति पत्र लेकर अगले दावा तक दौड़ता है
- यही प्रक्रिया गंतव्य तक चलती है
★मुख्य प्रश्न: “पैदल डाक घोड़ों से तेज़ कैसे थी?”
उत्तर देखिए
उत्तर: घोड़े को थकान व विश्राम चाहिए; धावक हर 1/3 मील पर बदल जाता है; घंटी के पूर्व-संकेत से शून्य प्रतीक्षा-समय। — यह रिले सिद्धांत है।
★श्यामपट्ट पर निर्णायक तुलना:
| समय | |
|---|---|
| यात्री (सिंध → दिल्ली) | 50 दिन |
| सूचना (डाक द्वारा) | 5 दिन |
(ग) समापन — 5 मिनट
📦 बॉक्स — ‘एक विचित्र देश?’ (अब्दुर रज़्ज़ाक): कालीकट = ‘विचित्र’; मंगलौर का मंदिर = ‘अतुलनीय’
“एक ही यात्री, एक ही यात्रा — दो विपरीत प्रतिक्रियाएँ। क्यों?”
गृहकार्य: §6 (बर्नियर तथा ‘अपविकसित’ पूर्व) पढ़िए
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- दिल्ली की प्राचीर की चौड़ाई कितनी थी? शहर में कितने द्वार थे?
- बाज़ार केवल आर्थिक स्थान नहीं थे — दो प्रमाण दीजिए।
- उलुक और दावा में अंतर बताइए।
- पैदल डाक-व्यवस्था अश्व-व्यवस्था से तेज़ क्यों थी?
🕗 कालांश 8 — बर्नियर : द्वि-विपरीतता और भूस्वामित्व का प्रश्न★★
उपविषय: §6 व §6.1 (पृ. 130-132)
(क) आरंभ — 6 मिनट
श्यामपट्ट पर लिखिए: “भारत में मध्य की स्थिति के लोग नहीं हैं।” — बर्नियर
“यह वाक्य सही है या ग़लत? आज हम पता करेंगे — और यह भी कि उसने ऐसा क्यों कहा।”
(ख) विकास — 28 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ★बर्नियर का उद्देश्य — “नीति-निर्माताओं तथा बुद्धिजीवी वर्ग को प्रभावित करने का” | ★कुंजी-वाक्य |
| 2 | ★★द्वि-विपरीतता की तीन सीढ़ियाँ | श्यामपट्ट (नीचे) |
| 3 | मूल दावा — “भारत में निजी भूस्वामित्व का अभाव”; “सम्राट सारी भूमि का स्वामी” | — |
| 4 | ★तर्क-शृंखला — छह कड़ियाँ | तीर-चिह्नों के साथ (नीचे) |
| 5 | 📦 स्रोत 11 — ग़रीब किसान | सात समस्याएँ सूचीबद्ध करवाइए |
| 6 | 📦 बॉक्स — व्यापक ग़रीबी (पेलसर्ट) | ★दोहरा उपयोग (समर्थन + सावधानी) |
| 7 | 📦 स्रोत 12 — यूरोप के लिए चेतावनी | ★यहाँ वह स्वयं उद्देश्य बता देता है |
| 8 | ★★NCERT का खंडन — अबुल फ़ज़्ल | तालिका (नीचे) |
| 9 | ★विचार की विरासत — बर्नियर → मॉन्टेस्क्यू → मार्क्स | शृंखला |
★★द्वि-विपरीतता की तीन सीढ़ियाँ:
| सीढ़ी | क्या होता है |
|---|---|
| 1 | भिन्नता देखना — स्वाभाविक |
| 2 | विपरीत बना देना — भारत = यूरोप का उलटा |
| 3 | पदानुक्रम बना देना — यूरोप ऊँचा, भारत नीचा |
सूत्र: “भिन्नता देखना ग़लत नहीं; भिन्नता को ऊँच-नीच बना देना ग़लत है।”
★तर्क-शृंखला (तीर-चिह्नों के साथ लिखवाइए): राजकीय भूस्वामित्व → भूधारक बच्चों को भूमि नहीं दे सकते → दूरगामी निवेश में उदासीनता → ‘बेहतर’ भूधारकों का वर्ग नहीं उभरा → कृषि का विनाश व किसानों का उत्पीड़न → सभी वर्गों के जीवन-स्तर में पतन (सिवाय शासक वर्ग के)
★★खंडन-तालिका (अवश्य बनवाइए):
| बर्नियर की समझ | वास्तविकता |
|---|---|
| लगान (स्वामी की वसूली) | उपज पर कर |
| ∴ राजा = भूमि का स्वामी | ∴ राजा = सुरक्षा-प्रदाता |
| — | अबुल फ़ज़्ल: “राजत्व का पारिश्रमिक” |
| — | “एक भी सरकारी मुग़ल दस्तावेज़ यह इंगित नहीं करता” |
सूत्र: “उसने राशि देखी, प्रकृति नहीं समझी।” सूत्र: “एक भूल जब छप जाती है, तो वह सिद्धांत बन जाती है।” — बर्नियर (17वीं) → मॉन्टेस्क्यू ‘प्राच्य निरंकुशवाद’ (18वीं) → मार्क्स ‘एशियाई उत्पादन शैली’ (19वीं)
(ग) समापन — 5 मिनट
★वास्तविक ग्रामीण समाज के चार स्तर: बड़े ज़मींदार → बड़ा किसान (किराए का श्रम, माल-उत्पादन) → छोटे किसान → “अस्पृश्य” भूमिविहीन श्रमिक (बलाहार)
“तो क्या ‘मध्य की स्थिति के लोग’ सचमुच नहीं थे?” — चार स्तर, दो नहीं।
★चित्र 5.11 दिखाइए: “उन्नीसवीं शताब्दी के ऐसे चित्रों ने अपरिवर्तनशील ग्रामीण समाज की धारणा को दृढ़ता प्रदान की” → चित्र भी पूर्वाग्रह फैलाते हैं।
गृहकार्य: §6.3 व §7 पढ़िए
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- ‘द्वि-विपरीतता’ क्या है? एक उदाहरण दीजिए।
- अबुल फ़ज़्ल ने भूमि राजस्व को क्या कहा?
- बर्नियर के विचार से कौन-से दो सिद्धांत निकले?
- वास्तविक ग्रामीण समाज के कितने स्तर थे? नाम बताइए।
🕘 कालांश 9 — बर्नियर के अंतर्विरोध, शहर तथा महिलाएँ
उपविषय: §6.3, §6 का अंत, §7 (पृ. 133-136)
(क) आरंभ — 7 मिनट★★
स्रोत 11 और स्रोत 13 की एक-एक पंक्ति साथ लिखिए:
| स्रोत 11 | स्रोत 13 |
|---|---|
| “रेतीली भूमियाँ या बंजर पर्वत” | “अधिकांश भाग अत्यधिक उपजाऊ” |
| “आबादी भी कम है” | “जनसंख्या पर्याप्त है” |
“ये दोनों वाक्य एक ही लेखक के हैं। कैसे?”
(ख) विकास — 26 मिनट
खंड A — बर्नियर के अंतर्विरोध (10 मिनट)
| क्रम | बिंदु |
|---|---|
| 1 | ★स्रोत 11 बनाम स्रोत 13 — पूरी तुलना-तालिका बनवाइए (भूमि, जनसंख्या, कृषि, उत्पादन, व्यापार, धन) |
| 2 | “उत्पादन हर जगह पतनोन्मुख” बनाम “पूरे विश्व से बड़ी मात्रा में बहुमूल्य धातुएँ भारत में आती थीं” |
| 3 | 📦 स्रोत 14 — राजकीय कारख़ाने — छह कक्ष; पर निष्कर्ष “निश्चेष्ट नियमित ढंग” |
| 4 | ★चित्र 5.12 (पन्ने-माणिक जड़ा सोने का चम्मच) — “क्या यह ‘निश्चेष्ट’ शिल्पकार का काम लगता है?” |
| 5 | ! स्रोत 13 में भी पूर्वाग्रह — “शिल्पकार जो मूल रूप से आलसी होता है” |
सूत्र: “तथ्य सही, निष्कर्ष पूर्वाग्रही।”
खंड B — शहरी केंद्र (6 मिनट)
| क्रम | बिंदु |
|---|---|
| 1 | ★15% नगरीय जनसंख्या — यूरोप से अधिक |
| 2 | ‘शिविर नगर’ की अवधारणा |
| 3 | ! NCERT का खंडन — “अतिसरलीकृत चित्रण” |
| 4 | पाँच नगर-प्रकार — उत्पादन, व्यापारिक, बंदरगाह, धार्मिक, तीर्थ |
| 5 | महाजन → सेठ → नगर सेठ; आठ व्यावसायिक वर्ग (हकीम, पंडित, वकील, चित्रकार, वास्तुविद, संगीतकार, सुलेखक) |
खंड C — महिलाएँ (10 मिनट) !
| क्रम | बिंदु | ध्यान |
|---|---|---|
| 1 | ★दो चेतावनियाँ — लेखक पुरुष थे; वे “सामाजिक पक्षपात को ‘सामान्य’ परिस्थिति मान लेते थे” | पहले यह स्थापित कीजिए |
| 2 | दास प्रथा — खुली बिक्री; तीन दृष्टांत; विभेद; कम क़ीमत; स्रोत 15 — गुप्तचरी; युद्ध-स्रोत | — |
| 3 | सती — स्रोत 16 | ! संयत स्वर (नीचे नीति देखें) |
| 4 | ★★खंड का निर्णायक मोड़ | अगला बिंदु |
! स्रोत 16 की कक्षा-नीति (अनिवार्य):
- संयत स्वर में पढ़ाइए; नाटकीय पठन से बचिए
- इसे किसी समुदाय पर आरोप नहीं, एक ऐतिहासिक सामाजिक कुरीति के रूप में रखिए, जिसका भारतीय समाज ने स्वयं विरोध किया और जिसे 1829 में क़ानून द्वारा समाप्त किया गया
- मूल बिंदु प्रथा नहीं, ‘बाध्यता’ है — “अनिच्छुक पीड़िता… जबरन… हाथ और पैर बाँध दिए”
★★खंड का निर्णायक मोड़ — श्यामपट्ट पर लिखिए:
“लेकिन महिलाओं का जीवन सती प्रथा के अलावा कई और चीज़ों के चारों ओर घूमता था।”
- कृषि व कृषि-आधारित उत्पादन में श्रम
- व्यापारिक गतिविधियों में भागीदारी
- ★वाणिज्यिक विवादों को अदालत तक ले जाना
- निष्कर्ष: “अत: यह असंभाव्य लगता है कि महिलाओं को उनके घरों के ख़ास स्थानों तक परिसीमित कर रखा जाता था।”
(ग) समापन — 7 मिनट★★
💬 चर्चा-प्रश्न (अध्याय का सर्वश्रेष्ठ):
“सामान्य महिला श्रमिकों के जीवन ने इब्न बतूता और बर्नियर जैसे यात्रियों का ध्यान अपनी ओर क्यों नहीं खींचा?”
चार कारण निकलवाइए: (1) ‘असाधारण’ का नियम (2) यात्रियों का सामाजिक दायरा — दरबार व अमीर वर्ग (3) लेखक पुरुष थे (4) उन्हें पूर्व-पश्चिम भेद दिखाने वाली सामग्री चाहिए थी
सूत्र: “यात्रियों ने सती देखी, पर बाज़ार में काम करती स्त्री नहीं देखी — क्योंकि पहली असाधारण थी, दूसरी सामान्य।”
गृहकार्य: काल-रेखा (पृ. 137) याद कीजिए; अध्याय के प्रश्न 1-5 का उत्तर लिखिए
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- स्रोत 11 और 13 में तीन अंतर बताइए।
- ‘शिविर नगर’ से बर्नियर का क्या आशय था? NCERT इसे क्यों अस्वीकार करती है?
- दासियों की तीन भूमिकाएँ बताइए।
- महिलाओं की तीन आर्थिक भूमिकाएँ बताइए।
🕙 कालांश 10 — काल-रेखा, संश्लेषण और मानचित्र कार्य★
उपविषय: काल-रेखा (पृ. 137) + पूरे अध्याय का संश्लेषण + मानचित्र कार्य
(क) आरंभ — 5 मिनट
काल-रेखा का शीर्षक पढ़वाइए: “कुछ यात्री जिन्होंने वृत्तांत छोड़े”
“ध्यान दीजिए — यह ‘आने वाले सब यात्रियों’ की सूची नहीं है। इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?”
(ख) विकास — 25 मिनट
खंड A — काल-रेखा के चार पाठ (12 मिनट)
| पाठ | निष्कर्ष |
|---|---|
| (क) भौगोलिक | 10वीं-15वीं सदी → मध्य/पश्चिम एशिया; 16वीं सदी से → यूरोप |
| (ख) भाषिक | अरबी → फ़ारसी → यूरोपीय भाषाएँ |
| (ग) तकनीकी | हस्तलिपि → मुद्रण |
| (घ) ★सीमाएँ | एक भी महिला नहीं; एक भी भारतीय यात्री नहीं |
खंड B — तीनों यात्रियों की अंतिम तुलना (13 मिनट) ★★ पूरी तालिका विद्यार्थियों से भरवाइए (यह सर्वोत्तम पुनरावृत्ति है):
| अल-बिरूनी | इब्न बतूता | बर्नियर | |
|---|---|---|---|
| देश व सदी | |||
| कृति व भाषा | |||
| आने का कारण | |||
| ज्ञान का स्रोत | |||
| मूल दृष्टि | |||
| पाठक | |||
| मुख्य सीमा |
★अंतिम सूत्र: “अल-बिरूनी ने पढ़कर समझा • इब्न बतूता ने घूमकर देखा • बर्नियर ने तुलना करके आँका।”
(ग) समापन — 10 मिनट
★मानचित्र कार्य (प्रश्न 10): विश्व रेखा-मानचित्र पर इब्न बतूता की यात्रा
- स्थल-मार्ग लाल, जल-मार्ग नीला
- समुद्र: भूमध्य सागर, लाल सागर, अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी, दक्षिण चीन सागर
★★अध्याय का समापन-वाक्य कक्षा में पढ़वाइए:
“साथ ही उपमहाद्वीप के पुरुषों (और संभवत: महिलाओं) के अनुभव और प्रेक्षण अपेक्षाकृत अज्ञात हैं जिन्होंने समुद्रों और पर्वतों को पार किया… उम्मीद है कि इन पर और अन्य प्रश्नों पर आने वाले वर्षों में इतिहासकार योजनापूर्ण तरीके से ध्यान केंद्रित करेंगे।”
अंतिम सूत्र: “हमने सुना कि बाहर वाले ने भारत को कैसा देखा — अब यह जानना बाक़ी है कि भारतीय ने बाहर की दुनिया को कैसा देखा।”
★यहाँ रुककर कहिए: “इतिहास एक पूरा उत्तर नहीं, एक चालू काम है — और शायद उस काम में आप में से कोई शामिल हो।”
गृहकार्य/परियोजना: प्रश्न 11 — किसी बड़े संबंधी का साक्षात्कार (पाँच प्रश्न: कहाँ, कैसे, कितना समय, क्यों, कठिनाई)
🎯 कालांश-मूल्यांकन
- काल-रेखा से तीन यात्रियों के नाम, देश व काल बताइए।
- सोलहवीं सदी से यात्रियों का स्रोत-क्षेत्र क्यों बदल गया?
- काल-रेखा की दो सीमाएँ बताइए।
🕚 कालांश 11 (वैकल्पिक) — मूल्यांकन व प्रतिपुष्टि
| भाग | समय | विवरण |
|---|---|---|
| क | 10 मि. | फ्लैशकार्ड क्विज़ (06-Flashcards.md) |
| ख | 20 मि. | लिखित परीक्षा — 1 स्रोत-आधारित (5 अंक) + 1 लघु उत्तर (3 अंक) + 5 वस्तुनिष्ठ (5 अंक) |
| ग | 10 मि. | प्रतिपुष्टि — सर्वाधिक छूटने वाले दस बिंदुओं पर पुनरावृत्ति |
द. शिक्षण-सामग्री का कालांश-वार मानचित्र
| कालांश | स्रोत-बॉक्स | साइड-बॉक्स | चित्र |
|---|---|---|---|
| 1 | — | — | 5.1 (क)(ख) |
| 2 | स्रोत 1 | ग्रंथों का अनुवाद • मापतंत्र विज्ञान • हिंदू ★ | 5.2 |
| 3 | स्रोत 2, 3 ★ | एकाकी यात्री ★• इब्न बतूता के पदचिह्नों पर | 5.3, 5.5; मानचित्र 1 |
| 4 | स्रोत 4 | भारत के विषय में विचारों का निर्माण व प्रसार | 5.6 + 5.7 ★ |
| 5 | स्रोत 5 ★ | विशाल पहुँच वाली एक भाषा • ईश्वर ही जानता है! ★ | — |
| 6 | स्रोत 6, 7 ★ | — | 5.1 (क)(ख) ★ |
| 7 | स्रोत 8, 9, 10 ★★ | एक विचित्र देश? ★ | 5.8, 5.9 ★, 5.10 |
| 8 | स्रोत 11, 12 ★ | व्यापक ग़रीबी | 5.11 ★ |
| 9 | स्रोत 13, 14, 15, 16 ★★ | — | 5.12 ★ |
| 10 | — | — | 5.13, 5.14, 5.4 |
य. विभेदित शिक्षण (Differentiated Instruction)
| स्तर | रणनीति |
|---|---|
| कमज़ोर विद्यार्थी | तीनों यात्रियों का परिचय-कार्ड याद करवाइए; 06-Flashcards का प्रयोग; स्रोत-बॉक्सों के केवल मूल बिंदु |
| औसत विद्यार्थी | तुलना-तालिकाएँ स्वयं भरवाइए; NCERT प्रश्न 1-5 के उत्तर लिखवाइए |
| ★प्रतिभाशाली विद्यार्थी | स्रोत 11 बनाम 13 का विरोधाभास स्वयं खोजने दीजिए; बर्नियर → मॉन्टेस्क्यू → मार्क्स की शृंखला; प्रश्न 9 (शिल्प-कार्यों की तुलना); परियोजना 12 |
र. मूल्यांकन-योजना (Assessment Plan)
| प्रकार | कब | विवरण |
|---|---|---|
| रचनात्मक (Formative) | प्रत्येक कालांश के अंत | 3-4 मौखिक/लिखित प्रश्न (ऊपर दिए गए) |
| गतिविधि-आधारित | कालांश 6 | नारियल-वर्णन लेखन |
| स्रोत-आधारित | कालांश 7, 9 | स्रोत 10 तथा स्रोत 11 vs 13 पर लिखित कार्य |
| मानचित्र कौशल | कालांश 10 | प्रश्न 10 |
| परियोजना | अध्याय के बाद | प्रश्न 11 अथवा 12 |
| योगात्मक (Summative) | कालांश 11 | पूर्ण अध्याय-परीक्षा |
| PARAKH आधारित | पुनरावृत्ति में | 08-PARAKH-Question-Bank.md |
ल. शिक्षक के लिए विशेष सावधानियाँध्यान
| क्रम | सावधानी |
|---|---|
| 1 | ! स्रोत 16 (सती बालिका) — संयत स्वर; बाध्यता पर बल; किसी समुदाय पर आरोप नहीं; 1829 के क़ानूनी निषेध का उल्लेख उपयोगी |
| 2 | ! ‘हिंदू’ शब्द का बॉक्स — इसे भाषा-इतिहास के रूप में पढ़ाइए, न कि वर्तमान पहचान की बहस के रूप में। NCERT का वाक्य ही दोहराइए: “इनमें से कोई भी शब्द लोगों की धार्मिक पहचान का द्योतक नहीं था” |
| 3 | ! ‘अपविकसित’ पूर्व — यह बर्नियर का आरोप है, NCERT का मत नहीं। उद्धरण-चिह्न पहले ही समझाइए |
| 4 | ! दास प्रथा — तथ्यों को स्पष्ट रखिए, पर व्यक्तिगत/सामुदायिक दोषारोपण से बचिए। यह एक ऐतिहासिक संस्था थी |
| 5 | ! बर्नियर का मूल्यांकन संतुलित रखिए — NCERT स्वयं उसकी “गहन प्रेक्षण, आलोचनात्मक अंतर्दृष्टि तथा गहन चिंतन” की प्रशंसा करती है। केवल आलोचना पढ़ाना अनुचित होगा |
| 6 | ! ‘भारत बनाम विदेशी’ का ढाँचा न बनाइए — अध्याय का संदेश यह है कि हर स्रोत का एक दृष्टिकोण होता है, न कि यह कि विदेशी हमेशा ग़लत थे। अल-बिरूनी का ‘अपवित्रता’ वाला तर्क इसका सर्वोत्तम प्रमाण है |