कक्षा: XII | बोर्ड: RBSE (NCERT पाठ्यपुस्तक) | माध्यम: हिंदी कुल कालांश: 10 (प्रत्येक 40-45 मिनट) + 1 मूल्यांकन कालांश पुस्तक: भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग-2 | पृष्ठ: 170–195
अ. अधिगम उद्देश्य
| क्रम | उद्देश्य | संज्ञानात्मक स्तर |
|---|---|---|
| 1 | हम्पी की खोज की प्रक्रिया (मैकेन्जी से यूनेस्को तक) का क्रम बता सकेंगे और औपनिवेशिक ज्ञान-संग्रह के उद्देश्य की समीक्षा कर सकेंगे | बोध/मूल्यांकन |
| 2 | विजयनगर के राजनीतिक इतिहास (चार वंश, कृष्णदेव राय, 1565) की रूपरेखा बना सकेंगे | बोध |
| 3 | अमर-नायक प्रणाली का कार्य-चक्र समझाकर उसके दोहरे परिणाम (शक्ति + विघटन) का विश्लेषण कर सकेंगे | विश्लेषण |
| 4 | सुल्तान-राय संबंधों के प्रमाणों से यह स्थापित कर सकेंगे कि संघर्ष धार्मिक नहीं, आर्थिक-सामरिक था | विश्लेषण/मूल्यांकन |
| 5 | शहर के तीन अंचल, जल-प्रबंधन तथा सात किलेबंदियों की विशेषताएँ बता सकेंगे | बोध |
| 6 | महानवमी डिब्बा के अनुष्ठानों का धार्मिक-राजनीतिक-आर्थिक-सैनिक महत्त्व समझा सकेंगे | विश्लेषण |
| 7 | मन्दिर स्थापत्य के नवाचारों (राय गोपुरम्, मण्डप) को राजकीय वैधता से जोड़ सकेंगे | विश्लेषण |
| 8 | ★यात्री-वृत्तांत, अभिलेख व पुरातत्त्व के मिलान की विधि समझकर साक्ष्य की सीमाएँ (अदृश्य सामान्य जन व श्रमिक) पहचान सकेंगे | मूल्यांकन/सृजन |
★सर्वोच्च उद्देश्य (8): अध्याय का खंड 7 (“उत्तरों की खोज में प्रश्न”) ही उसका लक्ष्य है — भव्य भवनों के पीछे के अनाम मनुष्यों तक पहुँचने की दृष्टि। हर कालांश उसी की ओर बढ़ना चाहिए।
ब. पूर्व-ज्ञान की जाँच
- भाग-1, अध्याय 1 — पुरातत्त्व की विधियाँ, जॉन मार्शल, उत्खनन बनाम सर्वेक्षण, “जो नष्ट हो गया उसकी कल्पना”
- भाग-1, अध्याय 2 — अभिलेखशास्त्र; राजकीय वैधता के साधन
- अध्याय 5 (यात्रियों के नज़रिये) — ★विदेशी यात्री की दृष्टि की संभावनाएँ और सीमाएँ (इब्न बतूता, बर्नियर) — यहाँ पेस-नूनिज़ पर वही कसौटी लगेगी
- अध्याय 6 — मन्दिर-परंपरा, संरक्षण (Patronage) की अवधारणा
- कक्षा VII — दिल्ली सल्तनत, इक़्ता प्रणाली (अमर-नायक से तुलना हेतु)
स. आवश्यक सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| NCERT पाठ्यपुस्तक (भाग-2) | अनिवार्य |
| 02-Presentation.pptx | सभी कालांश |
| दक्षिण भारत का रेखा-मानचित्र + विश्व का सीमारेखा मानचित्र | कालांश 2, 9 |
| श्यामपट्ट/चार्ट पेपर | तीन-अंचल आरेख, तुलना-तालिकाएँ |
| ★हम्पी के रंगीन चित्र (विरुपाक्ष गोपुरम्, विट्ठल रथ, कमल महल, महानवमी डिब्बा) — प्रिंट या प्रोजेक्टर | कालांश 5-7 |
| ★अपने नगर/गाँव का मोटा नक्शा (विद्यार्थी बनाकर लाएँ) | कालांश 5 |
कालांश-वार योजना
🕐 कालांश 1 — एक खोया हुआ शहर कैसे मिला? (§1)
उपविषय: प्रस्तावना + हम्पी की खोज (पृ. 170-171)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
श्यामपट्ट पर केवल दो शब्द लिखिए: “विजयनगर” और “हम्पी”
“एक ही जगह के दो नाम — एक संस्कृत में ‘विजय का शहर’, दूसरा एक स्थानीय देवी के नाम से। कौन-सा नाम किसने रखा? कौन-सा बचा रहा और क्यों?”
★यहीं अध्याय की धुरी स्थापित कीजिए:
शहर 1565 में उजड़ गया — पर वह स्मृति में (हम्पी/पम्पादेवी), पत्थर में (भग्नावशेष) और शब्दों में (अभिलेख, यात्री) बचा रहा। यह अध्याय बताता है कि इन तीनों को जोड़कर इतिहासकार शहर को फिर से कैसे खड़ा करता है।
(ख) विकास — 25 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | प्रस्तावना — साम्राज्य का विस्तार (कृष्णा से सुदूर दक्षिण), 1565 लूट, दोआब की स्मृति | पाठ्यपुस्तक से पढ़वाइए |
| 2 | 1800 — मैकेन्जी: अभियंता-पुराविद; पहला सर्वेक्षण मानचित्र; प्रथम स्रोत = विरुपाक्ष मंदिर व पम्पादेवी पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियाँ | ★ज़ोर दीजिए — आरंभ मौखिक परंपरा से हुआ |
| 3 | आगे के चरण — 1836 अभिलेख, 1856 छायाचित्र | तीर-शृंखला श्यामपट्ट पर |
| 4 | 📦 स्रोत 1 — कॉलिन मैकेन्जी: 1754 जन्म, 1815 भारत का पहला सर्वेयर जनरल | पूरा पढ़वाइए |
| 5 | ★★मैकेन्जी के दो उद्धरण — “खराब प्रबंधन की दुर्गति” तथा “संस्थाओं, कानूनों के विषय में जानकारियाँ” | नीचे का कक्षा-प्रश्न |
| 6 | चित्र 7.2 — मैकेन्जी और उनके सहायक (स्नाजी, जैन पंडित, लच्छमैया) | 🔎 इन-टेक्स्ट प्रश्न पृ. 171 |
| 7 | पुनर्निर्माण की विधि — 4 स्रोतों का मिलान (पुरातत्त्व + अभिलेख + यात्री + चार भाषाओं का साहित्य) | तालिका |
★कक्षा-प्रश्न (उत्कृष्ट): “मैकेन्जी ने कहा कि ब्रिटिश शासन से पहले दक्षिण भारत ‘दुर्गति’ में था। यदि इतिहास खोजने वाला ही यह मानकर चले, तो उसकी खोज पर क्या असर पड़ेगा?”
अपेक्षित दिशा: ज्ञान-संग्रह का उद्देश्य शासन को आसान और न्यायोचित बनाना था — स्रोत पढ़ते समय संग्रहकर्ता का उद्देश्य भी पढ़ना चाहिए।
(ग) समेकन — 7 मिनट
तीर-शृंखला दोहरवाइए: 1800 मैकेन्जी → 1836 अभिलेख → 1856 छायाचित्र → (आगे कालांश 8 में: 1876 फ्लीट → 1902 मार्शल → 1976 → 1986 यूनेस्को)
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- हम्पी नाम का उद्भव किससे हुआ? (पम्पादेवी)
- मैकेन्जी की शुरुआती जानकारियाँ किन पर आधारित थीं? (विरुपाक्ष मंदिर तथा पम्पादेवी पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियाँ)
- भारत का पहला सर्वेयर जनरल कौन, कब? (मैकेन्जी, 1815)
🕐 कालांश 2 — राय, नायक और सुल्तान : स्थापना से व्यापार तक (§2, §2.1)
उपविषय: स्थापना, पड़ोसी, व्यापार (पृ. 171-172)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“किसी साम्राज्य की ताक़त उसकी तलवार में होती है या उसके बाज़ार में?” — दो-तीन उत्तर सुनिए; कालांश के अंत में लौटिए।
(ख) विकास — 28 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 1336 — हरिहर और बुक्का द्वारा स्थापना; ! काल-रेखा में “1336?” — अनिश्चितता | ★NCERT की भाषा दिखाइए |
| 2 | अस्थिर सीमाएँ — बहुभाषी, बहुधार्मिक जनसंख्या | — |
| 3 | 📦 बॉक्स — “कर्नाटक साम्राज्यमु”: समकालीन नाम | ★इतिहासकार की शब्दावली बनाम समकालीन शब्दावली |
| 4 | पड़ोसी — दक्कन सुल्तान, गजपति; ★संघर्ष का कारण: उर्वर घाटियाँ + व्यापार-संपदा (धार्मिक नहीं) | श्यामपट्ट पर रेखांकित |
| 5 | 📦 बॉक्स — “हाथी, घोड़े और लोग”: अश्वपति-गजपति-नरपति | तीन-स्तंभ तालिका |
| 6 | संपर्क से स्थापत्य में विचारों का आदान-प्रदान | 🧭 कालांश 5-6 का बीज |
| 7 | पूर्ववर्ती — चोल (तंजावुर-बृहदेश्वर), होयसाल (बेलूर-चन्नकेशव); राय ने परंपरा को नयी ऊँचाई दी | मानचित्र 1 पर दिखाइए |
| 8 | §2.1 — ★युद्धकला अश्वसेना पर आधारित → अरब-मध्य एशिया से घोड़ों का आयात; अरब व्यापारी, कुदिरई चेट्टी | तर्क-शृंखला तालिका |
| 9 | 1498 — पुर्तगाली; बेहतर सामरिक तकनीक (बंदूकें) | — |
| 10 | बाज़ार — मसाले, वस्त्र, रत्न; व्यापार = प्रतिष्ठा का मानक; दो-तरफ़ा लाभ (विलासिता + राजस्व) | — |
| 11 | 📦 स्रोत 2 — “राजा और व्यापारी” (अमुक्तमाल्यद, तेलुगु): चार नीतियाँ + अंतिम वाक्य का रहस्य | ★★पूरा पढ़वाइए |
★कक्षा-प्रश्न: “कृष्णदेव राय विदेशी व्यापारियों को तोहफ़े क्यों देता था — उदारता से या रणनीति से?”
अपेक्षित दिशा: “ये वस्तुएँ कभी भी तुम्हारे दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी” — घोड़ों की आपूर्ति का एकाधिकार = सैनिक श्रेष्ठता।
(ग) समेकन — 7 मिनट
आरंभ के प्रश्न पर लौटिए — उत्तर: दोनों, क्योंकि तलवार (अश्वसेना) बाज़ार (घोड़ों के आयात) से ही चलती थी।
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने की? (हरिहर-बुक्का, 1336)
- समकालीन लोग साम्राज्य को क्या कहते थे? (कर्नाटक साम्राज्यमु)
- कुदिरई चेट्टी कौन थे? (घोड़ों के स्थानीय व्यापारी)
- अमुक्तमाल्यद किसने, किस भाषा में लिखी? (कृष्णदेव राय, तेलुगु)
🕐 कालांश 3 — चरमोत्कर्ष से पतन तक (§2.2)
उपविषय: चार वंश, कृष्णदेव राय, 1565, सुल्तान-राय संबंध (पृ. 173-174)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“जिस साम्राज्य को सैनिक कमांडरों ने दो बार भीतर से हथियाया, उसे अंतत: बाहर से किसने गिराया? और क्या ‘बाहर’ और ‘भीतर’ का यह भेद सच में इतना साफ़ है?”
(ख) विकास — 28 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | चार वंश — संगम (1485 तक) → सुलुव (1503 तक, सैनिक कमांडर) → तुलुव → अरावीडु (1542 से) | ★स्मरण-सूत्र: सं-सु-तु-अ |
| 2 | कृष्णदेव राय (1509-29) — तुलुव वंश; विशेषता: विस्तार और दृढ़ीकरण | — |
| 3 | विजय-शृंखला: 1512 रायचूर दोआब → 1514 उड़ीसा → 1520 बीजापुर | तीर-शृंखला |
| 4 | शांति-समृद्धि; मन्दिर-निर्माण, गोपुरम; नगलपुरम् (माँ के नाम पर उपनगर) | — |
| 5 | ★“सबसे विस्तृत विवरण कृष्णदेव राय के या तुरंत बाद के कालों से” — स्रोत-पक्षपात | कक्षा-प्रश्न |
| 6 | 1529 मृत्यु → तनाव → विद्रोही नायक → 1542 अरावीडु | — |
| 7 | ★★1565 — राक्षसी-तांगड़ी (तालीकोटा): रामराय; बीजापुर + अहमदनगर + गोलकुण्डा; लूट; पूर्व की ओर स्थानांतरण (पेनुकोण्डा → चन्द्रगिरी) | मानचित्र पर दिखाइए |
| 8 | ★★★सुल्तान-राय संबंध जटिल थे — चार प्रमाण (दावेदारों का समर्थन, “यवन राज्य की स्थापना करने वाला” विरुद, बीजापुर का हस्तक्षेप, पारस्परिक स्थायित्व) | तालिका |
| 9 | 📦 बॉक्स — “यवन” | परिभाषा |
| 10 | रामराय की नीति — एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध करना → सुल्तान एक हो गए | ★विडंबना रेखांकित कीजिए |
★कक्षा-प्रश्न (सबसे महत्त्वपूर्ण): “यदि विजयनगर-सल्तनत संघर्ष धार्मिक होता, तो कृष्णदेव राय सुल्तानों के दावेदारों का समर्थन क्यों करता? और बीजापुर का सुल्तान विजयनगर का उत्तराधिकार-विवाद क्यों सुलझाता?”
अपेक्षित निष्कर्ष: राजनीति धर्म से नहीं, सत्ता के हित से चलती थी। “हिंदू बनाम मुसलमान” ढाँचा ऐतिहासिक रूप से ग़लत है।
(ग) समेकन — 7 मिनट
पूरी राजनीतिक तीर-शृंखला श्यामपट्ट पर बनवाइए: 1336? → संगम → सुलुव → तुलुव (कृष्णदेव 1509-29) → अरावीडु → 1565 → पेनुकोण्डा → चन्द्रगिरी
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- रायचूर दोआब किन नदियों के बीच है, कब जीता गया? (तुंगभद्रा-कृष्णा, 1512)
- तालीकोटा युद्ध का दूसरा नाम? (राक्षसी-तांगड़ी)
- विजयनगर को हराने वाली तीन सल्तनतें? (बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुण्डा)
- 1565 के बाद राजधानी कहाँ गई? (पेनुकोण्डा, फिर चन्द्रगिरी)
🕐 कालांश 4 — अमर-नायक प्रणाली : जिसने बनाया, उसी ने तोड़ा (§2.3)
उपविषय: नायक, अमर-नायक प्रणाली (पृ. 175)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“मान लीजिए आप सम्राट हैं। पूरा दक्षिणी प्रायद्वीप जीतना है, पर इतनी बड़ी सेना का ख़र्च केंद्र से नहीं उठ सकता। क्या करेंगे?” — विद्यार्थियों से समाधान माँगिए; फिर बताइए कि विजयनगर ने ठीक यही किया — और उसकी क़ीमत क्या चुकाई।
(ख) विकास — 28 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | नायक कौन — सेना प्रमुख, किलों पर नियंत्रण, सशस्त्र समर्थक; भ्रमणशील; ★किसान भी साथ चलते थे | — |
| 2 | भाषा — तेलुगु या कन्नड़; समर्पण पर भी अक्सर विद्रोह | — |
| 3 | ★★अमर-नायक प्रणाली = प्रमुख राजनीतिक खोज; ! “ऐसा प्रतीत होता है” — इक़्ता से तत्त्व | 🧭 कक्षा VII से जोड़िए |
| 4 | कार्य-चक्र के 6 चरण — क्षेत्र मिला → कर वसूली (किसान, शिल्पकर्मी, व्यापारी से) → भाग अपने पास (व्यक्तिगत + अश्व-गज दल) → दल = साम्राज्य की सैनिक शक्ति → भाग मन्दिर-सिंचाई पर → वार्षिक भेंट + दरबार में उपस्थिति | ★क्रमांकित तालिका श्यामपट्ट पर |
| 5 | नियंत्रण — स्थानांतरण | — |
| 6 | ★★सत्रहवीं शताब्दी — स्वतंत्र राज्य → केंद्रीय ढाँचे का विघटन | — |
| 7 | 📦 बॉक्स — “अमर”: समर (संस्कृत) / अमीर (फ़ारसी) | ★मिश्रित शब्दावली का प्रमाण |
| 8 | 🗣️ चर्चा कीजिए (पृ. 175) — चन्द्रगिरी, मदुरई, इक्केरी, तंजावुर, मैसूर चिह्नित कीजिए; नदियाँ-पहाड़ और संचार | मानचित्र-गतिविधि |
★कक्षा-प्रश्न (केंद्रीय विरोधाभास): “जो प्रणाली साम्राज्य की सबसे बड़ी ताक़त थी, वही उसके विघटन का कारण कैसे बनी?”
अपेक्षित दिशा: सैनिक शक्ति वितरित थी, केंद्रित नहीं — नायक जब चाहें स्वतंत्र हो सकते थे। विकेंद्रीकरण का अनिवार्य जोखिम।
(ग) समेकन — 7 मिनट
दो-स्तंभ तालिका बनवाइए: प्रणाली ने क्या दिया | प्रणाली ने क्या छीना
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- अमर-नायक किससे कर वसूलते थे? (किसान, शिल्पकर्मी, व्यापारी)
- वे राजस्व किन दो सार्वजनिक कार्यों पर खर्च करते थे? (मन्दिर, सिंचाई)
- राजा नायकों पर नियंत्रण कैसे दर्शाता था? (एक से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण)
- अमर-नायक प्रणाली के तत्त्व किस प्रणाली से लिए गए प्रतीत होते हैं? (दिल्ली सल्तनत की इक़्ता)
🕐 कालांश 5 — शहर की देह : जल, दीवारें, सड़कें (§3, §3.1, §3.2)
उपविषय: परिप्रदेश, जल-संपदा, किलेबंदियाँ (पृ. 176-178)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
📦 स्रोत 3 — पेस का “विशाल, फैला हुआ शहर” पढ़वाकर शुरू कीजिए (“रोम जितना विशाल… झीलें… खजूर के बगीचे”)।
“पेस ने शहर की तारीफ़ में महल नहीं, पानी और बग़ीचे गिनाए। क्यों?” संकेत: शुष्क क्षेत्र में जल-प्रबंध ही सबसे बड़ा चमत्कार था।
(ख) विकास — 27 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | चित्र 7.4 (नक्शा) — तीन अंचल पहचानिए | 🔎 इन-टेक्स्ट प्रश्न पृ. 176 |
| 2 | 📦 बॉक्स — “शहर के विषय में खोज”: अभिलेख + 6 यात्री | ★तालिका: 15वीं सदी = इटली-फ़ारस-रूस; 16वीं = तीनों पुर्तगाली |
| 3 | §3.1 — तुंगभद्रा का प्राकृतिक कुण्ड; उत्तर-पूर्व प्रवाह; ग्रेनाइट पहाड़ियों की करधनी | — |
| 4 | ★विरोधाभास: नदी पास, पर प्रायद्वीप का सबसे शुष्क क्षेत्र → बाँध, हौज़ | — |
| 5 | कमलपुरम् जलाशय (सिंचाई + राजकीय केंद्र तक नहर) और हिरिया नहर (संगम वंश; धार्मिक-शहरी केंद्र के बीच की घाटी की सिंचाई; आज भी दृश्य) | दो-पंक्ति तालिका |
| 6 | 📦 स्रोत 4 — जलाशय-निर्माण (पेस): 15 किमी दूर से पाइप, पहाड़ी तुड़वाई, ★15-20 हज़ार श्रमिक “चींटियों की तरह” | ★★पूरा पढ़वाइए; “चींटियों” पर रुकिए — कालांश 8 का बीज |
| 7 | §3.2 — अब्दुर रज़्ज़ाक: दुर्गों की सात पंक्तियाँ; खेत-जंगल भी घेरे | — |
| 8 | सबसे बाहरी दीवार — ★बिना गारे की फानाकार चिनाई, मिट्टी-मलवे का भीतरी भाग, निकले बुर्ज | तकनीक समझाइए |
| 9 | ★★★किलेबंदी में खेत — रज़्ज़ाक + पेस + पुरातत्त्व की पुष्टि = स्रोतों का मिलान | तीन-स्रोत आरेख |
| 10 | कारण — घेराबंदी की रणनीति (खाद्य से वंचित करना); अनाजगार बनाम ★“अधिक महँगी तथा व्यापक नीति” | 🔎 इन-टेक्स्ट प्रश्न पृ. 178 |
| 11 | तीन किलेबंदियाँ (शहर → नगरीय केंद्र → राजकीय केंद्र); प्रवेशद्वार — मेहराब-गुंबद, इंडो-इस्लामी शैली | 🔎 प्रश्न: यह शैली क्यों अपनाई? |
| 12 | सड़कें — घाटियों से घूमती; मंदिर-द्वारों से आगे, दोनों ओर बाज़ार | 🧭 कालांश 7 की रथ-गलियों का बीज |
(ग) समेकन — 5 मिनट
🗣️ चर्चा कीजिए (पृ. 179): अपने नगर/गाँव की रूपरेखा से तुलना — राजस्थान-संदर्भ: परकोटा, दरवाज़े, बावड़ियाँ, व्यवसाय-आधारित मुहल्ले (जयपुर/जोधपुर/बीकानेर)। (विद्यार्थियों के लाए नक्शों पर अगले कालांश के आरंभ में 5 मिनट और दीजिए।)
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- दुर्गों की सात पंक्तियों का उल्लेख किसने किया? (अब्दुर रज़्ज़ाक — फ़ारस के शासक का दूत, कालीकट भेजा गया)
- दीवारों में गारे की जगह क्या तकनीक थी? (फानाकार पत्थर)
- हिरिया नहर किस वंश ने बनवाई (संभवत:)? (संगम)
- किलेबंदी की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता? (खेतों को भी घेरा गया)
🕐 कालांश 6 — राजकीय केंद्र : मंच, महल और पहेलियाँ (§3.3, §4)
उपविषय: शहरी केंद्र + राजकीय केंद्र (पृ. 178-183)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“हम्पी में मंदिर आज भी सिर उठाए खड़े हैं, पर महलों के नाम पर सिर्फ़ चबूतरे बचे हैं। दोनों एक ही शहर में, एक ही काल के — फिर यह भेद क्यों?” उत्तर कालांश के केंद्र में: मंदिर = पूरी राजगिरी; महल = विकारी (नाशवान) अधिरचना।
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | §3.3 — सामान्य आवासों के कम पुरातात्त्विक साक्ष्य; ★चीनी मिट्टी → अमीर व्यापारी (अनुमान); उत्तर-पूर्वी कोना | ! “हो सकता है” भाषा |
| 2 | ★★मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला — मक़बरे-मस्जिदें, पर स्थापत्य मंदिर-मण्डपों जैसा | साझा स्थापत्य-भाषा |
| 3 | बरबोसा — छप्पर के सुदृढ़ आवास; व्यवसाय-आधारित लंबी गलियाँ | — |
| 4 | क्षेत्र-सर्वेक्षण — अनेक पूजा स्थल-छोटे मंदिर; कुएँ, जलाशय = जन-जल-स्रोत | — |
| 5 | §4 — राजकीय केंद्र दक्षिण-पश्चिम में; ★नाम “राजकीय”, पर 60+ मन्दिर; ~30 महल-संरचनाएँ | कक्षा-प्रश्न: नाम कितना सही? |
| 6 | ★★★मंदिर = राजगिरी; धर्मेतर भवन = विकारी सामग्री — पूरे अध्याय की व्याख्या-कुंजी | आरंभ-प्रश्न का उत्तर |
| 7 | “राजा का भवन” — सबसे विशाल, पर आवास का साक्ष्य नहीं | ! नाम आधुनिक |
| 8 | सभा मंडप — लकड़ी के स्तंभों के छेद; प्रयोजन अस्पष्ट | — |
| 9 | ★★महानवमी डिब्बा — 11,000 वर्ग फीट × 40 फीट; लकड़ी की संरचना; उत्कीर्णित आधार | संख्या रेखांकित |
| 10 | महानवमी उत्सव — दशहरा/दुर्गा पूजा/नवरात्री; चार श्रेणियाँ: धर्मानुष्ठान (अश्व-पूजा, भैंसों की बलि) • मनोरंजन (नृत्य, कुश्ती) • शोभायात्रा • नायकों की भेंट + नियत कर | ★चार-स्तरीय महत्त्व-तालिका |
| 11 | अंतिम दिन — सेना का निरीक्षण | — |
| 12 | ★पहेली — चारों ओर स्थान शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं | NCERT की ईमानदारी |
| 13 | 📦 बॉक्स — “विजय का एक भवन?” (पेस): चित्रित मंच, कपड़े का कमरा, मूर्ति + सिंहासन | यात्री-वृत्तांत की अपूरणीयता |
| 14 | §4.2 — कमल महल: नाम 19वीं सदी के अंग्रेज़ यात्रियों का; मैकेन्जी के नक्शे से परिषदीय सदन का सुझाव; नौ मीनारें; इंडो-इस्लामी मेहराबें | 🔎 चित्र 7.13-7.15 प्रश्न |
| 15 | खड़ा रेखाचित्र (Elevation) बनाम नक्शा (Plan) | ★परिभाषा-जोड़ी |
| 16 | हज़ार राम मन्दिर — संभवत: केवल राजपरिवार; रामायण के दृश्यांश; “हाथियों का अस्तबल” — क्या सच में? | 🔎 पृ. 182 प्रश्न |
| 17 | नायकों ने महल-परंपरा जारी रखी (मदुरई सभा मण्डप) | 🗣️ चर्चा पृ. 183 |
★कक्षा-प्रश्न: “महानवमी उत्सव में धर्म कहाँ ख़त्म होता है और राजनीति कहाँ शुरू? क्या दोनों को अलग किया भी जा सकता है?”
(ग) समेकन — 5 मिनट
एक वाक्य लिखवाइए: “महानवमी वह मंच था जहाँ धर्म, राजस्व और सेना — तीनों एक साथ प्रदर्शित होते थे।”
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- महानवमी डिब्बा का आधार-क्षेत्र और ऊँचाई? (लगभग 11,000 वर्ग फीट; 40 फीट)
- महानवमी को बंगाल में क्या कहते हैं? (दुर्गा पूजा)
- कमल महल का नामकरण किसने किया? (उन्नीसवीं सदी के अंग्रेज़ यात्री)
- हज़ार राम मन्दिर की दीवारों पर किस महाकाव्य के दृश्य हैं? (रामायण)
🕐 कालांश 7 — धार्मिक केंद्र : देवता, राजा और गोपुरम् (§5)
उपविषय: राजधानी का चयन, विरुपाक्ष-विट्ठल, गोपुरम्-मण्डप (पृ. 184-188)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“राजधानी बसाने के लिए जगह चुननी हो तो आप क्या देखेंगे — पानी? सुरक्षा? व्यापार-मार्ग? विजयनगर के संस्थापकों ने इन सबके साथ एक और चीज़ देखी — देवता।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | चट्टानी उत्तरी भाग — तीन मान्यताएँ: बाली-सुग्रीव का वानर राज्य • पम्पादेवी का विरुपाक्ष हेतु तप (★विवाह आज भी प्रतिवर्ष) • पूर्वकालिक जैन मन्दिर | तालिका |
| 2 | मन्दिर-निर्माण की परंपरा — पल्लव, चालुक्य, होयसाल, चोल | — |
| 3 | ★★मन्दिर क्यों — ईश्वर से जुड़ाव; शिक्षा-केंद्र; भूमि-दान; धार्मिक + सामाजिक + सांस्कृतिक + आर्थिक केंद्र; सत्ता-संपत्ति-निष्ठा का माध्यम | पाँच कारण क्रम से |
| 4 | ★★★वैधता के तीन प्रतीक — विरुपाक्ष की ओर से शासन • आदेशों पर कन्नड़ लिपि में “श्री विरुपाक्ष” • “हिन्दू सूरतराणा” (अरबी ‘सुल्तान’ का संस्कृत अनुवाद) | ★“हिन्दू सूरतराणा” पर 5 मिनट रुकिए |
| 5 | नवाचार — राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ; मन्दिर-यात्राएँ = राजकीय अवसर (नायक साथ) | 🧭 चित्र 7.31 दिखाइए |
| 6 | §5.2 — राय गोपुरम् के तीन कार्य: देवालय बौने लगते • दूर से संकेत • ★साधन-तकनीक-कौशल = शासक की ताक़त की याद | — |
| 7 | ★★★सूक्ष्म बिंदु — राजा का द्वार देवता के गर्भगृह से ऊँचा | निबंध-सामग्री |
| 8 | विरुपाक्ष मन्दिर — प्राचीनतम अंश नवीं-दसवीं सदी; कृष्णदेव राय: राज्यारोहण पर मण्डप + पूर्वी गोपुरम्; ★देवालय परिसर के छोटे भाग तक सीमित रह गया | — |
| 9 | सभागारों के चार प्रयोग — संगीत-नृत्य-नाटक दर्शन; विवाह-उत्सव; झूला; विशिष्ट मूर्तियाँ | मन्दिर = उत्सव-स्थल |
| 10 | विट्ठल मन्दिर — महाराष्ट्र के विष्णु-रूप की कर्नाटक में पूजा = ★साम्राज्यिक संस्कृति हेतु परंपराओं का आत्मसात; रथ के आकार का मन्दिर | 🔎 चित्र 7.24 प्रश्न |
| 11 | रथ गलियाँ — गोपुरम् से सीधी; पत्थर का फर्श; दोनों ओर मण्डपों में दुकानें | 🧭 कालांश 5 की सड़कों से जोड़िए |
| 12 | नायकों के गोपुरम् (मदुरई, चित्र 7.26) | 🗣️ चर्चा पृ. 188 |
★कक्षा-प्रश्न (सर्वश्रेष्ठ): “एक हिंदू राजा अपने को ‘हिन्दू सूरतराणा’ — हिंदू सुल्तान — क्यों कहलवाना चाहेगा?”
अपेक्षित दिशा: ‘सुल्तान’ उस युग में राजत्व की सर्वोच्च प्रतिष्ठा का शब्द था — यह नकल नहीं, बराबरी का दावा है। सांस्कृतिक ग्रहण के तीन रूप एक साथ रखिए: उपाधि (सूरतराणा) + स्थापत्य (मेहराब-गुंबद) + देवता (विट्ठल)।
(ग) समेकन — 5 मिनट
🗣️ चर्चा कीजिए (पृ. 188) की “कैसे/क्यों” तालिका भरवाइए (मास्टर नोट्स §5.2.5)।
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- राजकीय आदेशों पर किस लिपि में क्या अंकित होता था? (कन्नड़ लिपि में “श्री विरुपाक्ष”)
- “हिन्दू सूरतराणा” का शाब्दिक अर्थ? (हिंदू सुल्तान — अरबी ‘सुल्तान’ का संस्कृत अनुवाद)
- विट्ठल मूलत: कहाँ पूजे जाने वाले किसके रूप हैं? (महाराष्ट्र; विष्णु)
- विरुपाक्ष मन्दिर का सबसे प्राचीन अंश किस काल का? (नवीं-दसवीं शताब्दी)
🕐 कालांश 8 — बाज़ार की आवाज़ें और पत्थर का मौन (§6 का आरंभ + स्रोत 5 + बॉक्स)
उपविषय: स्रोत 5, कृष्णदेव राय बॉक्स, प्रलेखन का आरंभ (पृ. 188, 191-192)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
📦 स्रोत 5 — “बाज़ार” नाटकीय ढंग से पढ़वाइए (एक विद्यार्थी पेस, एक नूनिज़)।
“हीरे-पन्ने से लेकर छिपकली तक — एक ही शहर के बाज़ार में। यह सूची हमें विजयनगर के समाज के बारे में क्या बताती है?”
(ख) विकास — 27 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | स्रोत 5 का विश्लेषण — विलासिता + दैनिक ज़रूरत; “विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर”; सस्ता-प्रचुर खाद्य; मांस-विविधता; ★चूहे-बिल्ली-छिपकली → निर्धनतम वर्ग भी बाज़ार में | चार-निष्कर्ष तालिका |
| 2 | ! यात्री-दृष्टि की सीमा — अतिशयोक्ति संभव; असाधारण ही दर्ज़ होता है | 🧭 अध्याय 5 (बर्नियर) से तुलना |
| 3 | 📦 बॉक्स — “कृष्णदेव राय”: चिदम्बरम गोपुरम् की प्रतिमा (आदर्श रूप) बनाम पेस का वर्णन — “मझला कद… कुछ मोटा… चेचक के दाग़” | ★★★दो-स्तंभ तुलना |
| 4 | ★सूत्र-वाक्य लिखवाइए: “कला हमें आदर्श दिखाती है, विवरण हमें मनुष्य।” | — |
| 5 | §6 आरंभ — जानकारी का भण्डार कैसे जुड़ा; ASI + कर्नाटक विभाग; 1976 राष्ट्रीय महत्त्व; 1980 के दशक की प्रलेखन-परियोजना, ~20 वर्ष, विश्व-भर के दर्जनों विद्वान | — |
| 6 | ★श्रमिकों का प्रश्न फिर उठाइए — स्रोत 4 के “15-20 हज़ार, चींटियों की तरह” पर लौटिए | कालांश 9 का बीज |
★कक्षा-प्रश्न: “पेस ने राजा के चेहरे के दाग़ तक लिख दिए, पर 20,000 श्रमिकों में से एक का भी नाम नहीं लिखा। क्यों?”
(ग) समेकन — 5 मिनट
दो स्रोत-प्रकारों की शक्ति-सीमा तालिका: प्रतिमा/स्थापत्य बनाम यात्री-विवरण।
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- विजयनगर को “विश्व का सबसे अच्छे संभरण वाला शहर” किसने कहा? (पेस)
- बाज़ारों में फल-मांस की सूची किस यात्री ने दी? (नूनिज़)
- हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल कब घोषित किया गया? (1976)
- कृष्णदेव राय की प्रतिमा किस मन्दिर के गोपुरम् में है? (चिदम्बरम, तमिलनाडु)
🕐 कालांश 9 — मानचित्र में उतरता शहर और अनुत्तरित प्रश्न (§6 शेष + §7)
उपविषय: मानचित्र-निर्माण, लकड़ी की खोई दुनिया, उत्तरों की खोज में प्रश्न (पृ. 188-192)
(क) आरंभ — 5 मिनट
चित्र 7.27 → 7.28 → 7.29 → 7.30 क्रम से दिखाइए (प्रोजेक्टर/पुस्तक)।
“यह ‘ज़ूम-इन’ ही आधुनिक पुरातत्त्व है — पूरा क्षेत्र → एक वर्ग → उसका वर्ग → एक मन्दिर।”
(ख) विकास — 28 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | मानचित्र-विधि के तीन चरण — 25 वर्ग (A-Z अक्षर) → छोटे वर्ग → और छोटी इकाइयाँ | 🔎 पृ. 189 प्रश्न: कौन-सा अक्षर छूटा? पैमाना? |
| 2 | परिणाम — हज़ारों संरचनाएँ, सड़कें-बाज़ार पुन: प्राप्त; ★“एक समय जो बाज़ार जीवंत थे, उनका बस अब यही कुछ बचा है” | धीरे से पढ़िए — भावनात्मक शिखर |
| 3 | ★★फ़्रिट्ज़-मिशेल-नागराज राव का उद्धरण — लकड़ी की पूरी श्रेणी की कल्पना; प्लास्टर, चटकीले रंग | जो दिखता है ≠ जो था |
| 4 | 🔎 पृ. 190 के दोनों मानचित्र-प्रश्न कक्षा में हल करवाइए | गतिविधि |
| 5 | §7 — भवन क्या बताते हैं (7 बिंदु: व्यवस्था, तकनीक, प्रतिरक्षा, विचारों का फैलाव, प्रश्रयदाता के विचार, सांस्कृतिक चिह्न, अन्य स्रोतों से संयोजन) | तालिका |
| 6 | ★★★भवन क्या नहीं बताते — सामान्य पुरुष-महिलाएँ-बच्चे क्या सोचते थे; पहुँच थी या नहीं | — |
| 7 | ★★★नीला अनुच्छेद — नक्शे कौन बनाता था? राजगीर-मूर्तिकार कहाँ से? युद्ध-बंदी? वेतन? अधीक्षण? कच्चा माल? | पूरा पढ़वाइए |
| 8 | निष्कर्ष-सूत्र: “जो सबसे भव्य दिखता है, उसे बनाने वाले सबसे अधिक अदृश्य होते हैं।” | श्यामपट्ट पर |
| 9 | मानचित्र कार्य (अभ्यास 10) — विश्व मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान, रूस; यात्रियों के मार्ग | गतिविधि/गृहकार्य |
★कक्षा-प्रश्न (समापन): “अगर आपको विजयनगर के किसी एक अनाम व्यक्ति का इतिहास लिखने का मौक़ा मिले — पत्थर काटने वाला, बाज़ार की सब्ज़ीवाली, नहर खोदने वाला — तो आप कौन-से स्रोत ढूँढ़ेंगे?”
यह प्रश्न सीधे PARAKH सृजनात्मकता-आयाम की तैयारी है।
(ग) समेकन — 7 मिनट
अध्याय के पाँच स्तंभ (मास्टर नोट्स भाग 6.1) की तालिका भरवाइए।
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- सम्पूर्ण क्षेत्र को कितने वर्गों में बाँटा गया था? (25)
- फ़्रिट्ज़-मिशेल के अनुसार किन वस्तुओं की “कल्पना करनी पड़ती है”? (नष्ट लकड़ी की वस्तुएँ — स्तंभ, टेक, धरन, छत, छज्जे, मीनारें)
- भवन किनके विचार ज़ाहिर करते हैं? (निर्माणकर्ता या प्रश्रयदाता के)
🕐 कालांश 10 — पुनरावृत्ति : काल-रेखाएँ, मानचित्र और सूत्र
उपविषय: काल-रेखा 1-2, मानचित्र 1, समग्र दृष्टि (पृ. 174, 193)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“आज हम पूरा अध्याय चार तीर-शृंखलाओं और एक मानचित्र में समेटेंगे।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | गतिविधि |
|---|---|
| 1 | काल-रेखा 1 — दिल्ली सल्तनत (1206) से मुगल (1526) तक; ★संदेश: विजयनगर क्षेत्रीय राज्यों के युग की एक कड़ी (बहमनी 1347, गजपति 1435, गोलकुंडा 1518…) |
| 2 | काल-रेखा 2 + 1976 जोड़कर: 1800 → 1856 ग्रिनलो → 1876 फ्लीट → 1902 मार्शल → 1976 → 1986 यूनेस्को ★मार्शल = अध्याय 1 का जोड़ |
| 3 | मानचित्र 1 अभ्यास — विजयनगर, बीजापुर-गोलकुंडा-अहमदनगर, कालीकट, गोवा, चन्द्रगिरि, तंजावुर, नायक-केंद्र; नदियाँ (कृष्णा, तुंगभद्रा) |
| 4 | चार तीर-शृंखलाएँ (राजनीतिक, कृष्णदेव-विजय, खोज-संरक्षण, शहर-प्रवेश) बोर्ड पर विद्यार्थियों से बनवाइए |
| 5 | पाँच भ्रांतियाँ (मास्टर नोट्स 6.3) — कथन बोलिए, कक्षा “सही/ग़लत + कारण” बताए |
| 6 | अभ्यास प्रश्न 1-9 का त्वरित मौखिक अभ्यास — उत्तर-ढाँचे |
(ग) समेकन — 5 मिनट
सूत्र-वाक्य लिखवाकर समापन: “विजयनगर हमें यह नहीं सिखाता कि अतीत कैसा था — यह सिखाता है कि अतीत को कैसे जाना जाता है।”
(घ) गृहकार्य
- अभ्यास प्रश्न 2, 4, 7 लिखित
- परियोजना कार्य 11 या 12 (समूह में, दो सप्ताह)
🕐 कालांश 11 — मूल्यांकन
| खंड | प्रारूप | अंक |
|---|---|---|
| क | 5 × MCQ (वंश-क्रम, यात्री-मिलान, तिथियाँ) | 5 |
| ख | 5 × एक-पंक्ति (कुदिरई चेट्टी, हिरिया नहर, श्री विरुपाक्ष, राक्षसी-तांगड़ी, 11,000 वर्ग फीट) | 5 |
| ग | 2 × लघूत्तर — जल-प्रबंध; अमर-नायक कार्य-चक्र | 6 |
| घ | 1 × निबंधात्मक — “सुल्तान-राय संबंध केवल शत्रुता के नहीं थे” — परीक्षण कीजिए अथवा महानवमी डिब्बा के अनुष्ठानों का महत्त्व | 6 |
| ङ | 1 × स्रोत-आधारित — स्रोत 2 अथवा स्रोत 5 पर तीन प्रश्न | 4 |
| च | मानचित्र — विजयनगर, तालीकोटा-क्षेत्र, कालीकट, गोवा, चन्द्रगिरि | 4 |
| योग | 30 |
द. समावेशी शिक्षण-संकेत
- दृश्य-अधिगम: यह अध्याय चित्र-प्रधान है (33 चित्र) — हर कालांश में कम से कम एक चित्र-विश्लेषण अनिवार्य रखिए।
- स्थानीय जोड़: राजस्थान के दुर्ग (चित्तौड़, कुंभलगढ़ — कुंभलगढ़ की दीवार बनाम विजयनगर की किलेबंदी), बावड़ियाँ बनाम हौज़, परकोटा-नगर — तुलना से अवधारणाएँ पक्की होती हैं।
- धीमे अधिगमकर्ता: चार तीर-शृंखलाएँ + तीन-अंचल तालिका — इतना आ जाए तो उत्तीर्णता-स्तर सुरक्षित।
- प्रतिभाशाली: “हिन्दू सूरतराणा”, स्रोत-पक्षपात, मैकेन्जी का उद्देश्य — इन तीन पर लघु-निबंध लिखवाइए।