कक्षा: XII | बोर्ड: RBSE (NCERT पाठ्यपुस्तक) | माध्यम: हिंदी कुल कालांश: 10 (प्रत्येक 40-45 मिनट) + 1 मूल्यांकन कालांश पुस्तक: भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग-3 | पृष्ठ: 258–285
अ. अधिगम उद्देश्य
| क्रम | उद्देश्य | संज्ञानात्मक स्तर |
|---|---|---|
| 1 | 10-11 मई 1857 के घटनाक्रम और विद्रोह के एक-जैसे ढर्रे का वर्णन कर सकेंगे | बोध |
| 2 | योजना-समन्वय के साक्ष्यों (संचार, पंचायतें) का विश्लेषण कर सकेंगे | विश्लेषण |
| 3 | नेतृत्व के पैटर्न (दबाव में स्वीकृति; दरबारी व ग़ैर-दरबारी नेता) की व्याख्या कर सकेंगे | बोध/विश्लेषण |
| 4 | अफ़वाहों-भविष्यवाणियों को 1820s की नीतियों के संदर्भ में पढ़ने की मानसिकता-विधि लागू कर सकेंगे | विश्लेषण/मूल्यांकन |
| 5 | अवध-प्रकरण (सहायक संधि → अधिग्रहण → एकमुश्त बंदोबस्त) से विद्रोह की सघनता समझा सकेंगे | विश्लेषण |
| 6 | आज़मगढ़ घोषणा आदि से विद्रोहियों की माँगों-कल्पनाओं का पुनर्निर्माण कर सकेंगे — स्रोत-सीमाओं सहित | मूल्यांकन |
| 7 | दमन की क़ानूनी-सैनिक-कूटनीतिक रणनीतियाँ बता सकेंगे | बोध |
| 8 | ★छवियों (ब्रिटिश चित्र बनाम राष्ट्रवादी कल्पना) का दृश्य-विश्लेषण कर सकेंगे | मूल्यांकन/सृजन |
★सर्वोच्च उद्देश्य (8): शीर्षक का दूसरा हिस्सा — ‘उसके व्याख्यान’ — यही अध्याय की विशिष्टता है: घटना और उसकी छवियाँ, दोनों इतिहास हैं।
ब. पूर्व-ज्ञान की जाँच
- अध्याय 9 — इस्तमरारी बंदोबस्त, राजस्व-असंतोष, 1857 के दो पूर्व-संकेत; ‘सरकारी स्रोत सावधानी से’ की विधि
- अध्याय 8 — ताल्लुक़-ज़मींदार शब्दावली
- कक्षा VIII — 1857 की प्रारंभिक कथा (मंगल पांडे आदि लोक-स्मृति — NCERT-पाठ से भेद स्पष्ट करना होगा)
- हिंदी साहित्य — सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता (सीधा सेतु!)
स. आवश्यक सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| NCERT पाठ्यपुस्तक (भाग-3) | अनिवार्य |
| 02-Presentation.pptx | सभी कालांश |
| भारत का मानचित्र (मानचित्र 1-2 हेतु) | कालांश 1, 8, 10 |
| ★चित्र 10.10–10.18 बड़े रूप में (प्रोजेक्टर) | कालांश 9 — दृश्य-विश्लेषण |
| ‘खूब लड़ी मर्दानी…’ कविता का पाठ | कालांश 9 |
| ★एक चपाती (प्रतीक-प्रदर्शन हेतु!) | कालांश 4 का hook |
कालांश-वार योजना
🕐 कालांश 1 — 10 मई की दोपहर से 11 मई की सुबह तक (प्रस्तावना)
उपविषय: मेरठ-दिल्ली घटनाक्रम; वैधता का प्रश्न (पृ. 258-259)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
“रमज़ान की एक भोर। बूढ़े बादशाह ने अभी सहरी खाई है। फाटक पर शोर है। नीचे घुड़सवार सिपाही चिल्ला रहे हैं — ‘हम मेरठ के सारे अंग्रेज़ पुरुषों को मारकर आए हैं…’ बादशाह के पास दो रास्ते हैं — और दोनों ख़तरनाक। वह क्या करेगा?” कथा-शैली में प्रस्तावना सुनाइए, फिर पाठ से मिलान।
(ख) विकास — 25 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 10 मई दोपहर बाद मेरठ — पैदल सेना → घुड़सवार → शहर; देहात के लोग साथ | घटना-क्रम पट्टी |
| 2 | निशाने — शस्त्रागार, गोरों के बंगले, रिकॉर्ड दफ़्तर, जेल, अदालत, डाकखाना, खजाना; टेलीग्राफ़ लाइन कटी | ★‘राज के प्रतीक’ रेखांकित |
| 3 | 11 मई तड़के लाल क़िला — कारतूस-कथन; बहादुर शाह की दुविधा → “नाममात्र” स्वीकृति | — |
| 4 | ★★वैधता-सूत्र: “विद्रोह ने एक वैधता हासिल कर ली क्योंकि अब उसे मुग़ल बादशाह के नाम पर चलाया जा सकता था” | वाक्य लिखवाइए |
| 5 | 12-13 मई की शांति → ख़बर फैलते ही गंगा घाटी-पश्चिमी छावनियाँ | मानचित्र 1 |
(ग) समेकन — 7 मिनट
प्रश्न: “सिपाहियों ने बैंक या बाज़ार से पहले रिकॉर्ड-दफ़्तर और टेलीग्राफ़ क्यों तोड़े?” (अ.9 के ‘काग़ज़ के राज’ से जोड़िए — रिकॉर्ड + संचार = राज की नसें।)
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- विद्रोह कब-कहाँ शुरू हुआ? 2. सिपाहियों ने बादशाह से क्या माँगा? 3. विद्रोह को वैधता कैसे मिली?
🕐 कालांश 2 — एक-जैसा ढर्रा और संचार (§1.1–1.2)
उपविषय: सैन्य विद्रोह का क्रम; रेजीमेंटों का संवाद; पंचायतें (पृ. 259-261)
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ★हर छावनी में क्रम — संकेत (तोप/बिगुल) → शस्त्रागार-ख़ज़ाना → जेल-टेलीग्राफ़-रिकॉर्ड रूम-बंगले → रिकॉर्ड जलाना → गोरों पर हमला | पाँच-चरण तालिका |
| 2 | हिंदी-उर्दू-फ़ारसी अपीलें — एकजुट होकर फ़िरंगियों का सफाया; फ़िरंगी-बॉक्स | — |
| 3 | आम लोग जुड़े — दायरा फैला; लखनऊ-कानपुर-बरेली में साहूकार-अमीर निशाना (“उत्पीड़क + अंग्रेज़ों का पिट्ठू”) | 🧭 अ.9 के दक्कन से तुलना |
| 4 | “ताश के क़िले की तरह बिखर गया” | — |
| 5 | स्रोत 1 — दिल्ली उर्दू अख़बार: असामान्य समय में सामान्य जीवन | 🔎 पूर्वाग्रह-प्रश्न |
| 6 | §1.2 — 7वीं अवध इर्रेग्युलर कैवेलरी का 48वीं को पत्र; संदेशवाहक | — |
| 7 | स्रोत 2 — सिस्टन-तहसीलदार प्रकरण | 🔎 नाटकीय वाचन |
| 8 | ★★सिपाही-पंचायतें — हियर्से-प्रकरण; चार्ल्स बॉल — कानपुर लाइनों में रात की पंचायतें; “कर्ताधर्ता खुद ही थे” | साक्ष्य-शृंखला |
★कक्षा-प्रश्न: “‘ढर्रा एक-जैसा’ होना संयोग हो सकता है क्या? समानता से इतिहासकार ‘योजना’ का अनुमान कैसे निकालता है?”
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- विद्रोह की शुरुआत का संकेत क्या होता था? 2. 7वीं अवध कैवेलरी ने 48वीं को क्या लिखा? 3. पंचायतें कहाँ-कब जुटती थीं?
🕐 कालांश 3 — नेता और अनुयायी (§1.3 + स्रोत 3)
उपविषय: दरबारी-ग़ैर-दरबारी नेतृत्व; शाह मल, मौलवी अहमदुल्ला (पृ. 262-263)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“विद्रोहियों ने नेता ‘चुने’ नहीं — बनाए। बूढ़े बादशाह से लेकर हाथी पर बैठे फ़क़ीर तक — नेतृत्व की यह सूची ही 1857 की सामाजिक चौड़ाई है।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ★पैटर्न — नेतृत्व दबाव/मजबूरी में: बहादुर शाह (अनिच्छा), नाना साहिब (विकल्प नहीं छोड़ा), रानी झाँसी (जनता का दबाव), कुँवर सिंह, बिरजिस क़द्र | पाँच-पंक्ति तालिका |
| 2 | दरबार से बाहर — मेरठ का हाथी वाला फ़क़ीर; लखनऊ के धार्मिक नेता-स्वयंभू पैग़म्बर; शाह मल (बड़ौत), गोनू (सिंहभूम, कोल) | — |
| 3 | स्रोत 3(क) — शाह मल: चौरासी देस; रात में गाँव-गाँव; पुल-सड़कें तोड़ना (दो कारण!); “न्याय भवन”; गुप्तचर-नेटवर्क; “उनका राज आ गया”; जुलाई 1857 में मृत्यु | ★राज के प्रतीक बनाम विद्रोही-प्रतीक |
| 4 | स्रोत 3(ख) — मौलवी अहमदुल्ला शाह: हैदराबाद-शिक्षित; 1856 जिहाद-प्रचार; डंका शाह; फ़ैज़ाबाद जेल; 22वीं NI के नेता; चिनहाट — लॉरेंस की हार; जादुई शक्तियों का विश्वास = अधिकार | — |
| 5 | नाना साहिब का नेपाल-पलायन — “साहस-बहादुरी की कहानी का हिस्सा” — स्मृति-निर्माण का संकेत | 🧭 §5.6 का बीज |
★कक्षा-प्रश्न: “मौलवी की ताक़त बंदूक से ज़्यादा ‘अजेयता के विश्वास’ में थी — अफ़वाह और नेतृत्व का यह रिश्ता अगले कालांश की कुंजी है।”
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- रानी झाँसी ने नेतृत्व कैसे संभाला? 2. शाह मल ने अंग्रेज़ बंगले का क्या किया? 3. ‘डंका शाह’ कौन, क्यों? 4. चिनहाट में किसकी हार हुई?
🕐 कालांश 4 — अफ़वाहें, चपातियाँ और डर की जड़ें (§1.4–1.5)
उपविषय: कारतूस-आटा-चपाती; अफ़वाह-विधि; 1820s की नीतियाँ (पृ. 264-266)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
हाथ में चपाती लेकर: “1857 की शुरुआत में रात के अँधेरे में एक आदमी गाँव के चौकीदार को ऐसी ही एक चपाती देता था — साथ में हुक्म: पाँच और बनाओ, अगले गाँवों में पहुँचाओ। क्यों? — यह न तब कोई जानता था, न आज। पर सब समझते थे — कुछ होने वाला है।”
(ख) विकास — 27 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | कारतूस-अफ़वाह — एन्फ़ील्ड; ★स्रोत: कैप्टेन राइट की रिपोर्ट — दम दम का खलासी बनाम ब्राह्मण सिपाही (जनवरी 1857) — “जल्दी ही तुम्हारी जाति भ्रष्ट…” | कथा-वाचन |
| 2 | रिपोर्ट की विश्वसनीयता अनिश्चित — पर अफ़वाह अजेय; आटे में हड्डियों का चूरा; 23 जून 1857 (प्लासी-शताब्दी) की भविष्यवाणी | — |
| 3 | ★★विधि-सूत्र (§1.5): ताक़त सच-झूठ से नहीं — “अफ़वाह तभी फैलती है जब उसमें लोगों के ज़हन में गहरे दबे डर और संदेह की अनुगूँज सुनाई देती है” | वाक्य लिखवाइए |
| 4 | संदर्भ — बेंटिक-युग के ‘सुधार’: पश्चिमी शिक्षा; सती-अंत 1829; विधवा-विवाह क़ानून | — |
| 5 | रियासत-हड़प — “शासकीय दुर्बलता और दत्तकता अवैध” जैसे बहाने: अवध, झाँसी, सतारा; क़ब्ज़े के बाद अपने क़ानून-व्यवस्था-वसूली | — |
| 6 | ★★निष्कर्ष — पवित्र-मूल्यवान सब कुछ मिटाकर “हृदयहीन, परायी और दमनकारी” व्यवस्था; ईसाई प्रचारकों से बल | — |
★कक्षा-प्रश्न: “आज के ‘व्हाट्सऐप-अफ़वाह युग’ में NCERT का अफ़वाह-सूत्र कितना काम करता है? एक उदाहरण सोचिए — कौन-सा दबा डर उस अफ़वाह को उड़ाता है?” (सावधानी से, बिना समसामयिक विवाद के।)
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- कारतूस-अफ़वाह का दर्ज स्रोत? 2. 23 जून 1857 क्यों चुना गया? 3. सती-प्रथा कब ख़त्म? 4. किन तीन रियासतों के नाम पाठ में?
🕐 कालांश 5 — अवध : गिलास फल और बेजान देह (§2.1–2.2)
उपविषय: सहायक संधि; अधिग्रहण; वाजिद अली शाह की विदाई (पृ. 266-267)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“1851 में डलहौज़ी ने अवध को ‘गिलास फल (चेरी)’ कहा — जो एक दिन ख़ुद मुँह में आ गिरेगा। फल गिरा 1856 में। पर निगलते ही पता चला — यह चेरी नहीं, चिंगारी थी।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 1801 सहायक संधि अवध पर — शर्तें; नवाब की सैन्य-शक्ति गई → अंग्रेज़-निर्भरता → मुखियाओं-ताल्लुक़दारों पर नियंत्रण नहीं | संधि-बॉक्स (वेलेज़्ली 1798, चार शर्तें) + रेज़ीडेंट-बॉक्स |
| 2 | अंग्रेज़ों की दिलचस्पी — नील-कपास की मुफ़ीद ज़मीन; उत्तर भारत का बड़ा बाज़ार | — |
| 3 | ★1850s की शुरुआत तक — मराठा भूमि, दोआब, कर्नाटक, पंजाब, बंगाल; “एक सदी की विस्तार-प्रक्रिया 1856 में अवध के साथ मुकम्मल” | मानचित्र |
| 4 | §2.2 — वाजिद अली शाह: ‘कुशासन’ का आरोप, कलकत्ता निष्कासन; ‘अलोकप्रिय’ निष्कर्ष निराधार — विलाप करती भीड़ कानपुर तक | — |
| 5 | ★“देह से जान जा चुकी थी…” प्रेक्षक-कथन; लोकगीत — “अंगरेज बहादुर आइन, मुल्क लई लीन्हों”; गीत-बॉक्स | 🗣️ विदाई-दुख क्यों |
| 6 | भौतिक क्षति — दरबार-संस्कृति का अंत: संगीतकार, नर्तक, कवि, कारीगर, बावर्ची, नौकर, कर्मचारी — रोज़ी गई | ★अर्थ-सांस्कृतिक तंत्र |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- ‘गिलास फल’ किसने कहा, कब? 2. सहायक संधि किसने बनाई, अवध पर कब लगी? 3. संधि की चार शर्तें? 4. नवाब को कहाँ निष्कासित किया गया?
🕐 कालांश 6 — एक दुनिया का ख़ात्मा (§2.3)
उपविषय: ताल्लुक़दार-बेदख़ली; किसान; सिपाही — तीनों का संगम (पृ. 268-270)
(ख) विकास — 32 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ताल्लुक़दार — जागीरें-क़िले; ★बड़े के पास 12,000 पैदल तक, छोटे के पास 200; अधिग्रहण के फ़ौरन बाद सेनाएँ भंग, दुर्ग ध्वस्त | — |
| 2 | ★★एकमुश्त बंदोबस्त 1856 — ‘ताल्लुक़दार बिचौलिए, मालिकाना नहीं’; आँकड़े: गाँव 67% → 38%; दक्षिणी अवध सबसे प्रभावित | संख्या-चिप्स |
| 3 | अपेक्षा बनाम परिणाम — ‘असली मालिकों’ को ज़मीन? वसूली बढ़ी, बोझ कम नहीं; माँग में 30-70% इज़ाफ़ा | 🧭 अ.9 की रैयतवाड़ी-कहानी से तुलना |
| 4 | स्रोत 4 — हनवंत सिंह का कथन | 🔎 नाटकीय वाचन + तीनों प्रश्न |
| 5 | ★★सामाजिक व्यवस्था भंग — निष्ठा-संरक्षण के बंधन; ताल्लुक़दार “उत्पीड़क भी… पर दयालु अभिभावक” की छवि; बुरे वक्त की मदद बनाम अंग्रेज़ी गैर-लचीली वसूली; तीज-त्यौहार के क़र्ज़े ख़त्म | 🧭 अ.8 के ‘शोषक-संरक्षक’ द्वैत से |
| 6 | ★अवध की लड़ाई की बागडोर — ताल्लुक़दार + किसान; बेगम हज़रत महल के खेमे में; कुछ पराजय के बाद भी डटे | — |
| 7 | ★★सिपाही = वर्दी में किसान — कम वेतन-छुट्टी; 1820s दोस्ताना अफ़सर बनाम 1840s “कमतर नस्ल”, गाली-हिंसा; अवध = “बंगाल आर्मी की पौधशाला”; गाँव-बैरक का दोतरफ़ा प्रवाह; “भाई-बिरादर साथ आ जुटते थे” | दो-दशक तुलना |
(ग) समेकन — 5 मिनट
🗣️ चर्चा (पृ. 270) — राजस्थान में 1857: आउवा (ठाकुर कुशाल सिंह), नसीराबाद-नीमच-कोटा छावनियाँ बनाम अधिकांश रियासतों की अंग्रेज़-निष्ठा — दोनों पक्ष।
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- एकमुश्त बंदोबस्त से पहले-बाद ताल्लुक़दारों के गाँव? (67% → 38%) 2. राजस्व-माँग में कितना इज़ाफ़ा? (30-70%) 3. बेगम हज़रत महल कौन? 4. ‘पौधशाला’ किसे कहा गया?
🕐 कालांश 7 — विद्रोही क्या चाहते थे? (§3)
उपविषय: स्रोत-समस्या; एकता की कल्पना; आज़मगढ़ घोषणा; प्रतीक-विरोध; वैकल्पिक सत्ता (पृ. 270-274)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“इतिहास में हारने वाले की आवाज़ कौन दर्ज करता है? विद्रोहियों में ज़्यादातर पढ़े-लिखे नहीं थे — उनकी ‘फ़ाइल’ दुश्मन के दफ़्तर में बनी। आज हम उन चंद काग़ज़ों को पढ़ेंगे जो ख़ुद उन्होंने छोड़े।”
(ख) विकास — 32 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | स्रोत-समस्या — “अहसानफ़रामोश-बर्बर झुंड” की ब्रिटिश-दृष्टि; कुचलना = आवाज़ दबाना; विडंबना-वाक्य | 🧭 अ.9 की विधि |
| 2 | §3.1 — घोषणाएँ: जाति-धर्म भेद बिना सबका आह्वान; मुस्लिम नाम से जारी पर हिंदू भावनाओं का ख़याल; “नफ़ा-नुकसान बराबर”; पूर्व-ब्रिटिश सहअस्तित्व का गौरवगान; मुहम्मद-महावीर की दुहाई | — |
| 3 | ★★बरेली-प्रकरण — हिंदुओं को भड़काने के 50,000 रु. — नाकामयाब | एकता की परीक्षा |
| 4 | ★★★स्रोत 5 — आज़मगढ़ घोषणा (25 अगस्त 1857) — पाँचों भाग तालिका से: ज़मींदार-व्यापारी-कर्मचारी-कारीगर-पंडित/फ़कीर — हर तबके की शिकायत + वादा | 🔎 समूह-कार्य: पाँच समूह, पाँच भाग |
| 5 | स्रोत 6 — सिपाहियों की अर्ज़ी — सेवा का इतिहास; 1857 के हुक्म; परेड-घेराव, 84 गिरफ़्तार; “दो साल… अक़ायद-मज़हब”; अंतिम प्रश्न-वाक्य | 🔎 स्रोत 4 से तुलना |
| 6 | §3.2 — फ़िरंगी राज की हर चीज़ खारिज; “अंग्रेज़ों पर भरोसा नहीं”; रोज़गार-धर्म-इज़्ज़त-अस्मिता; ‘व्यापक सार्वजनिक भलाई’ | — |
| 7 | ★★समतापरक झलक बनाम घोषणाएँ — सोपान-विरोध व्यवहार में (बेइज़्ज़ती, बहीखाते), पर घोषणाओं में केवल एकता-आह्वान | सूक्ष्म भेद |
| 8 | §3.3 — दिल्ली-लखनऊ-कानपुर में वैकल्पिक सत्ता: नियुक्तियाँ, वसूली-वेतन, लूट-रोक, कमान-शृंखला; प्रेरणा 18वीं सदी का मुग़ल जगत; अवध में 1858 के शुरू तक हुकुम | — |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- आज़मगढ़ घोषणा कब जारी हुई? 2. घोषणा में व्यापारियों से क्या वादा? 3. बरेली में अंग्रेज़ों ने कितने रुपये खर्च किए, नतीजा? 4. वैकल्पिक सत्ता की प्रेरणा किससे?
🕐 कालांश 8 — दमन : क़ानून, तोप और फूट (§4)
उपविषय: मार्शल लॉ; दिल्ली-अभियान; गाँव-दर-गाँव; ज़मींदार-आश्वासन (पृ. 275-277)
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | मई-जून 1857 के क़ानून — समूचे उत्तर भारत में मार्शल लॉ; फ़ौजी अफ़सर व आम अंग्रेज़ों तक को मुकदमा-सज़ा का अधिकार; “सामान्य प्रक्रिया रद्द”; ★“एक ही सज़ा — सज़ा-ए-मौत” | — |
| 2 | दिल्ली-मुहिम — सांकेतिक महत्त्व; दोतरफ़ा (कलकत्ता + पंजाब); जून से सितंबर-अंत; दोनों पक्षों को भारी नुकसान — “पूरे उत्तर भारत के विद्रोही दिल्ली में आ जमे” | मानचित्र 2 |
| 3 | गंगा के मैदान — गाँव-दर-गाँव; “सिर्फ़ सैनिक विद्रोह नहीं”; ★फॉरसिथ का अनुमान — अवध की 3/4 वयस्क पुरुष आबादी; मार्च 1858 अवध-पुनर्नियंत्रण | — |
| 4 | स्रोत 7 — “विद्रोही ग्रामीण”: “पल में बिखर जाते हैं, पल में फिर जुट जाते हैं” | 🔎 मुश्किलें-प्रश्न |
| 5 | ★★फूट की नीति — बड़े ज़मींदारों को जागीर-वापसी का आश्वासन; विद्रोही बेदख़ल, वफ़ादार ईनाम; बहुत सारे नेपाल में बीमारी-भूख से मरे | — |
| 6 | बिएतो के फ़ोटो — दिल्ली रिज; सिकंदरा बाग (2000+ शव) — “विद्रोह की निर्थकता की ठंडी चेतावनी” | ★फ़ोटो भी ‘दमन का दस्तावेज़’ |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- मार्शल लॉ कब लगा? 2. दिल्ली पर हमला किन दो दिशाओं से? 3. फॉरसिथ का अनुमान? 4. अवध पर दोबारा नियंत्रण कब?
🕐 कालांश 9 — छवियों की लड़ाई (§5)
उपविषय: ब्रिटिश चित्र (रक्षक-औरतें-प्रतिशोध-दहशत-दया) बनाम राष्ट्रवादी कल्पना (पृ. 277-283)
(क) आरंभ — 5 मिनट
प्रोजेक्टर पर ‘इन मेमोरियम’ दिखाइए, बिना संदर्भ: “क्या दिख रहा है? क्या महसूस हो रहा है? …अब सोचिए — यही इस चित्र का काम था।”
(ख) विकास — 32 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | स्रोत-परिदृश्य — घोषणाएँ कम, सरकारी ब्योरे अपार; ब्रिटिश प्रेस की “लोमहर्षक” कहानियाँ; तसवीरों की सूची | — |
| 2 | ★‘रिलीफ़ ऑफ़ लखनऊ’ (बार्कर 1859) — लखनऊ-घेरा कथा (लॉरेंस→इंगलिस→25 सित. ऑट्रम-हेवलॉक→कैम्पबेल); चित्र-रचना: केंद्र के तीन नायक, उजाला, अगले भाग के शव, विजयी घोड़े | रचना-विश्लेषण |
| 3 | ★‘इन मेमोरियम’ (पेटन 1859) — लाचार औरतें-बच्चे; हिंसा अदृश्य — “सिर्फ़ एक इशारा”; विद्रोही ‘बर्बर’ पर अनुपस्थित; मिस व्हीलर — वीरता + बाइबल = ईसाइयत की रक्षा | दो-चित्र तुलना |
| 4 | ★‘जस्टिस’ (पन्च) — न्याय-स्त्री, कुचले सिपाही, काँपती भारतीय औरतें; कानपुर-पट्टी; शेर-बाघ कार्टून | 🔎 पृ. 281 प्रश्न |
| 5 | ★दहशत का प्रदर्शन — तोप से उड़ाना; पेशावर-चित्र: “निर्मम सत्ता का नाट्य मंचन”; 12 फाँसियाँ — “सामान्य दंड नहीं, दहशत का प्रदर्शन” | — |
| 6 | ‘क्लिमेंसी ऑफ़ केनिंग’ — दया का मज़ाक | — |
| 7 | ★★§5.6 राष्ट्रवादी कल्पना — “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम”; नायक-चित्रण; रानी झाँसी की ‘मर्दाना’ योद्धा-छवि; सुभद्रा कुमारी चौहान; फ़िल्म-पोस्टर | कविता-पाठ |
| 8 | ★★समापन-सूत्र — छवियाँ “संवेदनाओं को शक्ल भी देती हैं” — ब्रिटेन में दमन-आवाज़, भारत में राष्ट्रवादी कल्पना | 🗣️ पृ. 283 |
★कक्षा-प्रश्न: “रानी झाँसी को ‘मर्दानी’ कहकर सराहा गया — इस विशेषण में उस युग की कौन-सी धारणा छिपी है? क्या वीरता का कोई लिंग होता है?” (PARAKH-संवेदनशीलता से जोड़िए।)
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- ‘रिलीफ़ ऑफ़ लखनऊ’ के तीन नायक? 2. ‘इन मेमोरियम’ में हिंसा कैसे दिखाई गई? 3. मिस व्हीलर के चित्र में धरती पर क्या पड़ा है? 4. ‘खूब लड़ी मर्दानी…’ किसकी पंक्ति?
🕐 कालांश 10 — पुनरावृत्ति : घटना, कारण, छवि
(क) गतिविधियाँ — 35 मिनट
| क्रम | गतिविधि |
|---|---|
| 1 | काल-रेखा-खेल — 1801→1858 के 12 पड़ाव (मेरठ से रानी झाँसी तक) क्रम में लगवाइए |
| 2 | मानचित्र कार्य (अभ्यास 10) — तीन प्रेसीडेंसी-नगर बनाम विद्रोह-पट्टी; दूरी-निष्कर्ष |
| 3 | स्रोत-मिलान — कथन → स्रोत (उर्दू अख़बार/सिस्टन/हनवंत सिंह/आज़मगढ़/सिपाही-अर्ज़ी/ग्रामीण-रिपोर्ट) |
| 4 | चित्र-प्रश्नोत्तरी — छह चित्रों के नाम-चित्रकार-संदेश |
| 5 | पाँच भ्रांतियाँ (मास्टर 5.3) — सही/ग़लत + कारण |
| 6 | अभ्यास 1-9 के उत्तर-ढाँचे मौखिक |
(ख) समापन — 5 मिनट
सूत्र-वाक्य (मास्टर 5.4) + अगला अध्याय-सेतु: “1857 की स्मृति ही 20वीं सदी के आंदोलन की एक पूँजी बनी — आगे महात्मा गांधी।”
(ग) गृहकार्य
- अभ्यास 6, 7, 8 लिखित; परियोजना 12 (फ़िल्म-समीक्षा) वैकल्पिक।
🕐 कालांश 11 — मूल्यांकन
| खंड | प्रारूप | अंक |
|---|---|---|
| क | 5 × MCQ (तिथियाँ, स्थान-नेता मिलान) | 5 |
| ख | 5 × एक-पंक्ति (फ़िरंगी, रेज़ीडेंट, पौधशाला, डंका शाह, एकमुश्त बंदोबस्त) | 5 |
| ग | 2 × लघूत्तर — योजना-साक्ष्य; दमन-कदम | 6 |
| घ | 1 × निबंधात्मक — अवध क्यों व्यापक अथवा छवियों से क्या पता चलता है | 6 |
| ङ | 1 × स्रोत-आधारित — स्रोत 4/5/6 पर तीन प्रश्न | 4 |
| च | मानचित्र — विद्रोह-केंद्र | 4 |
| योग | 30 |
द. समावेशी शिक्षण-संकेत
- दृश्य-प्रधान समापन: §5 को जल्दबाज़ी में न निपटाएँ — यही अध्याय की विशिष्ट देन है; हर चित्र पर ‘क्या-कैसे-क्यों’ की तिहरी नज़र।
- राजस्थान-जोड़: आउवा-प्रकरण व छावनी-विद्रोह (चर्चा पृ. 270); रियासतों की दुविधा — RBSE राजस्थान-इतिहास पत्र से सीधा सेतु।
- साहित्य-सेतु: सुभद्रा कुमारी चौहान की पूरी कविता; लोकगीत “अंगरेज बहादुर आइन…” — भाषा-सौंदर्य के साथ स्रोत-पाठ।
- धीमे अधिगमकर्ता: काल-रेखा के 12 पड़ाव + नेता-स्थान तालिका + 3 आँकड़े (67→38%, 3/4, 50,000)।
- प्रतिभाशाली: ‘मर्दानी’ विशेषण की जेंडर-पड़ताल; अफ़वाह-सिद्धांत; घोषणाओं में ‘बहाली बनाम समता’ का तनाव — लघु-निबंध।