हर पद पुस्तक के अपने शब्दों में है। पर्याय मत लिखिए।
एक वाक्य में पूरा अध्याय
‘भारत’ नाम भीतर से आया — एक वैदिक जन-समूह ‘भरत’ से; ‘इंडिया’ नाम बाहर से आया — एक नदी ‘सिंधु’ से; और भारतीय संविधान दोनों को एक ही पंक्ति में रख देता है: “भारत, अर्थात् इंडिया।”
पूरा अध्याय एक तालिका में★★
| भारत — भीतर से | इंडिया — बाहर से | |
|---|---|---|
| मूल | भरत — ऋग्वेद का एक वैदिक जन-समूह | सिंधु — एक नदी |
| शृंखला | भरत → भारतवर्ष → भारत | सिंधु → हिंदु → इंडोई/इंडिके → इंडिया |
| आधार | लोग | भूगोल (नदी) |
| किसने दिया | भारतीयों ने | विदेशियों ने (फारसी → यूनानी) |
| स्रोत | ऋग्वेद, महाभारत, विष्णु पुराण, अशोक का शिलालेख | फारसी लेख व शिलालेख, यूनानी व चीनी ग्रंथ |
यदि यह एक तालिका याद रह जाए, तो अध्याय का आधा हो गया।
अध्याय के दो महत्वपूर्ण प्रश्न (पृ. 75)
- भारत को हम कैसे परिभाषित कर सकते हैं?
- भारत के कुछ प्राचीन नाम क्या थे?
उद्धरण (पृ. 75): “भारत में प्रारंभिक काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता स्थापित हो गई थी, जो हिमालय और दो समुद्रों के बीच इस महान मानवता की जीवनधारा का अभिन्न अंग बन गई।” — श्री अरविंद
भाग 1 — भारत को परिभाषित करना (पृ. 77)
- आज का भारत एक आधुनिक राष्ट्र है, जिसकी परिभाषित सीमाएँ, राज्य और ज्ञात जनसंख्या है।
- किंतु यह 500, 2000 या 5000 वर्ष पूर्व बहुत अलग था।
- विश्व के इस भाग को हम प्राय: ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ कहते हैं।
- इसके भिन्न-भिन्न नाम रहे हैं और इसकी सीमाएँ भी बदलती रही हैं।
- भारत को उसके निवासियों और विदेशों से आए आगंतुकों — दोनों ने नाम दिए।
- ये नाम मिलते हैं — प्राचीन पुस्तकों, यात्रियों और तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों, और शिलालेखों में।
| पद | अर्थ |
|---|---|
| निवासी | वे लोग जो एक स्थान विशेष में रहते हैं |
चित्र 5.2 — प्राकृतिक सीमाएँ★
| दिशा | सीमा |
|---|---|
| उत्तर | हिमालय और हिंदुकुश |
| पश्चिम | अरब सागर |
| पूर्व | बंगाल की खाड़ी |
| दक्षिण | हिंद महासागर |
यही सीमाएँ आगे विष्णु पुराण और तमिल कविता — दोनों में लौटेंगी। (और यही वह चित्र है जिसका संदर्भ अध्याय 3, पृ. 46 के कालिदास वाले बॉक्स ने दिया था।)
भाग 2 — भारतीयों ने भारत नाम कैसे दिया (पृ. 77–80)★
(क) ऋग्वेद और सप्त सैंधव
- ऋग्वेद भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ है (वह कितना पुराना है — अध्याय 7 में)।
- उसमें उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का नाम ‘सप्त सैंधव’ है।
- अर्थ — ‘सात नदियों की भूमि’।
- ‘सैंधव’ शब्द सिंधु से आया है, जिसका आशय सिंधु नदी या सामान्यत: एक नदी से है।
! यह केवल उत्तर-पश्चिम का नाम था, संपूर्ण भारत का नहीं — यही अभ्यास-प्रश्न 2 का पहला कथन है।
चित्र 5.3 पर सात नदियाँ: सिंधु · झेलम · चनाब · रावी · ब्यास · सतलुज · सरस्वती
(ख) भरत — यहाँ सबसे अधिक गलती होती है★
- ‘भरत’ वह नाम है जो सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित हुआ था।
- वहाँ इसका अभिप्राय लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह से है — किसी राजा से नहीं।
- बाद के साहित्य में विभिन्न महाराजाओं के लिए ‘भरत’ नाम उल्लिखित हुआ।
- भारतवर्ष से आशय ‘भरत’ के देश से है।
- ‘भारतवर्ष’ स्पष्ट रूप से समूचे उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त हुआ है, और महाभारत में अनगिनत नदियों और लोगों के नाम सम्मिलित हैं।
(ग) जम्बूद्वीप
- ‘जम्बूद्वीप’ से आशय ‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ से है।
- यह भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य पेड़ है, जिसे ‘जम्बुल वृक्ष’, ‘मालाबार प्लम’ या ‘जामुन वृक्ष’ भी कहते हैं।
- आगे जम्बूद्वीप भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया।
महाभारत में दोनों शब्द हैं — भारतवर्ष और जम्बूद्वीप; और विद्वान सामान्यत: सहमत हैं कि सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व से यह महाकाव्य लिखा जाने लगा था।
(घ) महाभारत के छह क्षेत्र★
| महाभारत में | आज |
|---|---|
| कश्मीर | लगभग आज का कश्मीर |
| कुरूक्षेत्र | आज हरियाणा का भाग |
| वंग | बंगाल का भाग |
| प्राग्ज्योतिष | कुछ-कुछ असम का भाग |
| कच्छ | आज का कच्छ |
| केरल | लगभग आज का केरल |
छह नाम, चारों कोने — उत्तर, पश्चिम, पूर्व, दक्षिण। यही पुस्तक का बिंदु है। (चित्र 5.4 के अन्य क्षेत्र याद करने की चीज़ नहीं हैं — पुस्तक स्वयं यह कहती है।)
(ङ) अशोक का शिलालेख — सबसे ठोस प्रमाण★
- अशोक की तिथि लगभग 250 सा.सं.पू. मानी जा सकती है।
- उन्होंने बहुत से शिलालेख छोड़े हैं।
- उनमें से एक में उन्होंने ‘जम्बूद्वीप’ नाम का प्रयोग संपूर्ण भारत का वर्णन करने के लिए किया।
- उस समय इसमें आज के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के भाग सम्मिलित थे।
ग्रंथों की तिथि अनिश्चित है, शिलालेख की नहीं — यही अध्याय 4 का सबक, यहाँ काम पर।
(च) विष्णु पुराण की परिभाषा★
उत्तर देखिए
उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् · वर्षं तद् भारतं नाम…
वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।
- यह नाम ‘भारत’ आज भी प्रयोग में है।
- उत्तर भारत में सामान्यतया ‘भारत’; दक्षिण भारत में प्राय: ‘भारतम्’।
- ‘हिमाच्छादित पर्वत’ = हिमालय।
भाग 3 — उत्तर और दक्षिण, एक ही परिभाषा (पृ. 80)★★
यह अध्याय का शिखर है।
| स्रोत | भाषा/काल | सीमाएँ |
|---|---|---|
| श्री अरविंद | आधुनिक | हिमालय और दो समुद्रों के बीच |
| विष्णु पुराण | संस्कृत, प्राचीन | समुद्र के उत्तर, हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण |
| तमिल कविता | 2000 वर्ष पूर्व, दक्षिण | केप कुमारी से महान पर्वत तक; पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर तक |
- भारत के लिए देश के विभिन्न भागों ने एक समान परिभाषा को अपनाया है।
- “इस तरह प्रतीत होता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे।”
एक संस्कृत ग्रंथ (उत्तर) और एक तमिल कविता (दक्षिण) — दोनों एक ही चतुर्भुज खींचते हैं। यही श्री अरविंद के उद्धरण की “एकता” है।
भाग 4 — विदेशियों ने इंडिया नाम कैसे रखा (पृ. 81–83)★
(क) फारसी
- विदेशियों में सर्वप्रथम प्राचीन ईरान (फारस) के निवासियों ने ‘भारत’ का उल्लेख किया था।
- छठी शताब्दी सा.सं.पू. में एक फारसी सम्राट ने सैन्य अभियान आरंभ किया और सिंधु नदी के क्षेत्र, जिसे ‘सिंधु’ कहा जाता था, पर नियंत्रण किया।
- इसलिए फारसियों ने भारत को ‘हिंद’, ‘हिंदु’ या ‘हिंदू’ कहा — ‘सिंधु’ का रूपांतरण।
!! पुस्तक की अपनी चेतावनी
“ध्यान रखिए कि प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है। यहाँ इसे हिंदू धर्म से संदर्भित नहीं किया गया है।” यह पुस्तक ने तिरछे अक्षरों में छापा है, और यही अभ्यास-प्रश्न 2 में लौटता है।
(ख) यूनानी
- इन्हीं फारसी स्रोतों के आधार पर प्राचीन यूनानियों ने इसे ‘इंडोई’ अथवा ‘इंडिके’ कहा।
- उन्होंने ‘हिंदू’ शब्द के पहले अक्षर ‘ह’ को हटा दिया, क्योंकि यह अक्षर यूनानी भाषा में नहीं था।
★शृंखला 1: सिंधु → हिंदु → इंडोई / इंडिके
(ग) चीनी
- प्राचीन चीनियों ने भी भारत से संपर्क स्थापित किया था।
- उन्होंने इंडिया का उल्लेख ‘यिन्तू’ या ‘यिंदू’ से किया — यह भी मूलत: ‘सिंधु’ से।
- ‘तियन्जू’ भी ‘सिंधु’ से लिया गया, पर उसे ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ के रूप में भी समझा जा सकता है — यह बताता है कि चीनियों का बुद्ध की भूमि के रूप में भारत के प्रति कितना सम्मान था।
★शृंखला 2: सिंधु → हिंदू → इंदू → यिंदू
(घ) जुआनज़ैंग
- जुआनज़ैंग (पूर्व में ह्वेनसांग उच्चारित) ने 7वीं सा.सं. में चीन से भारत की यात्रा की।
- उन्होंने भारत के कई भागों का भ्रमण किया, विद्वानों से मिले, बौद्ध ग्रंथों को एकत्रित किया और 17 वर्ष बाद चीन वापस लौट गए।
- वहाँ उन्होंने संस्कृत से चीनी भाषा में उन पांडुलिपियों का अनुवाद किया।
- आगे आने वाली शताब्दियों में कई अन्य चीनी विद्वानों ने भी भारत का भ्रमण किया।
(ङ) हिंदुस्तान — दो तथ्यध्यान
- ‘हिंदुस्तान’ शब्द आज से 1800 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम एक फारसी शिलालेख में प्रयोग किया गया था।
- बाद में, भारत पर आक्रमण करने वालों ने भारतीय उपमहाद्वीप को वर्णित करने के लिए इसी शब्द का प्रयोग किया।
दोनों तथ्य याद रखिए — 1800 वर्ष (2000 नहीं) और फारसी (यूनानी नहीं)। अभ्यास-प्रश्न 2 इन्हें एक साथ उलटता है।
भाग 5 — संविधान (पृ. 81–82)
- भारतीय संविधान सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया था।
- उसकी शुरुआत में ही ‘इंडिया, दैट इज़ भारत’ वाक्यांश है।
- संविधान के हिंदी अनुवाद में भी वही ‘भारत अर्थात इंडिया’ उल्लिखित है।
- चित्र 5.5 में संविधान के प्रथम पृष्ठ पर लिखा है — “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा।”
| पद | अर्थ |
|---|---|
| संविधान | किसी देश के आधारभूत सिद्धांतों और कानूनों को बताने वाला प्रलेख; भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ (अध्ययन कक्षा 7 में) |
पृ. 83 की तालिका — भरने के उत्तर★
| भाषा | उत्तर |
|---|---|
| फारसी | हिंद / हिंदु / हिंदू |
| यूनानी | इंडोई / इंडिके |
| चीनी | यिन्तू / यिंदू (तथा ‘तियन्जू’) |
| अरबी और फारसी | हिंदुस्तान |
| (अंग्रेजी और फ्रेंच पहले से भरे हैं — इंडिया और इन्डे) |
पुस्तक का अपना सार — “आगे बढ़ने से पहले…” (पृ. 84)
- भारत एक प्राचीन भूमि है, जिसे इसके इतिहास के क्रम में कई नाम दिए गए हैं।
- प्राचीन भारतीयों द्वारा दिए गए नामों में ‘जम्बूद्वीप’ तथा ‘भारत’ सम्मिलित हैं। बाद के समय में ‘भारत’ शब्द अधिक प्रचलित हुआ। अधिकांश भारतीय भाषाओं में यही नाम मिलता है।
- भारत आने वाले विदेशी आगंतुकों और आक्रमणकारियों ने भारत के लिए सिंधु या सिंधु नदी आधारित नामों को अपनाया। इसके परिणामस्वरूप ‘हिंदू’, ‘इंडोई’ तथा अंतत: इंडिया जैसे नाम बने।
अंतिम दस मिनट — रटने की सूची
★दो शृंखलाएँ — सबसे पहले यही भरत → भारतवर्ष → भारत सिंधु → हिंदु → इंडोई / इंडिके (और चीनी: सिंधु → हिंदू → इंदू → यिंदू)
अर्थ सप्त सैंधव = सात नदियों की भूमि · सैंधव ← सिंधु · भारतवर्ष = ‘भरत’ का देश · जम्बूद्वीप = जामुन वृक्ष के फल का द्वीप · तियन्जू = ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ भी · हिमाच्छादित पर्वत = हिमालय
संख्याएँ चित्र 5.1 — 2300 वर्ष पूर्व · अशोक — लगभग 250 सा.सं.पू. · तमिल कविता — 2000 वर्ष पूर्व · फारसी अभियान — छठी शताब्दी सा.सं.पू. · जुआनज़ैंग — 7वीं सा.सं., 17 वर्ष · हिंदुस्तान — 1800 वर्ष पूर्व · संविधान — 1950
कौन-सा नाम किसने दिया फारसी → हिंद/हिंदू · यूनानी → इंडोई/इंडिके · चीनी → यिन्तू/यिंदू, तियन्जू · अरबी-फारसी → हिंदुस्तान · अंग्रेजी → इंडिया · फ्रेंच → इन्डे
★छह जालियाँ जिनमें बच्चे गिरते हैं
- ‘भरत’ को राजा समझ लेना — ऋग्वेद में वह जन-समूह है।
- ‘सप्त सैंधव’ को पूरे भारत का नाम मान लेना — वह केवल उत्तर-पश्चिम है।
- ‘हिंदुस्तान’ को 2000 वर्ष पुराना कहना — वह 1800 वर्ष है।
- ‘हिंदुस्तान’ को यूनानी शिलालेख में बताना — वह फारसी शिलालेख था।
- ‘हिंदू’ को धार्मिक शब्द मानना — प्राचीन फारसी में वह भौगोलिक है।
- यह कहना कि ‘भारत’ नाम विदेशियों ने दिया — उलटा है।