Chapter 13कार्य का महत्व

Revision notes15 minSources checked

This note is written in Hindi.Read in Hindi →

कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 183–194 यह फ़ाइल परीक्षा से एक दिन पहले पढ़ने के लिए है। हर बात पुस्तक से है।


सबसे पहले — यह एक तालिका याद कर लीजिए★★

आर्थिक गतिविधियाँगैर-आर्थिक गतिविधियाँ
इनमें क्या हैअर्थ (द्रव्य, मुद्रा) सम्मिलित होता हैआय अथवा संपत्ति अर्जित नहीं होती
क्यों की जाती हैंअर्थोपार्जन के लिएकृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभूतियों के साथ
किससे जुड़ीवस्तु के नकद मूल्य सेअनुभूति और संबंध से

!! सबसे बड़ा जाल — “गैर-आर्थिक = कम महत्वपूर्ण”

★सही बात — “‘गैर-आर्थिक’ का अर्थ ‘बेकार’ नहीं है। इसका अर्थ केवल इतना है कि उसमें पैसा नहीं आता।”

पुस्तक स्वयं पृष्ठ 191 पर लिखती है — “गैर-आर्थिक गतिविधियों में धनराशि सम्मिलित नहीं होती है, फिर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन में महत्व रखते हैं।”

और दूसरी बात — विभाजनकामों का है,लोगों का नहीं★★★

व्यक्तिआर्थिकगैर-आर्थिक
रोहनसॉफ्टवेयर कंपनी में कार्य (वेतन)सप्ताह के अंत में स्वेच्छा से कंप्यूटर सिखाना
अनु की माँदुकान में सहयोगस्वैच्छिक समूह में सिलाई सिखाना
काव्या की चाचीडाकघर (वेतन) · ऑनलाइन कक्षाएँ (शुल्क)घरेलू काम

★बोर्ड-वाक्य: “हम लोगों को नहीं बाँट रहे — कामों को बाँट रहे हैं।”

1. अध्याय का उद्धरण (पृ. 183)

“जब आप कोई काम कर रहे हों, उससे बाहर कुछ न सोचें। उसे पूजा की तरह करें, सबसे बड़ी पूजा की तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे समर्पित कर दें।” — स्वामी विवेकानंद

★इस पूरे उद्धरण में ‘पैसा’ शब्द कहीं नहीं है।

अध्याय के दो महत्वपूर्ण प्रश्न:

  1. लोग विभिन्न प्रकार की किन-किन गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं?
  2. हमारे दैनिक जीवन में इनका क्या योगदान है? (★‘योगदान’, ‘कमाई’ नहीं)

★विषय-सूत्र: हमारे आस-पास का आर्थिक जीवन — यह पुस्तक का पहला अर्थशास्त्र-अध्याय है।

2. अनु और कबीर की कहानी (पृ. 183–184)★

पात्रकामकौन-सी गतिविधि
गीता मौसीभारतीय वायु सेना में पायलट (विमान चालक); “पूरा कस्बा उन पर गर्व करता है”आर्थिक
कबीर के दादा जीसीमा सुरक्षा बल से सेवानिवृत्त; अब नि:शुल्क भूगोल पढ़ाते हैंगैर-आर्थिक
कबीर के दादा जीसब्ज़ी उद्यान में काम, घर के अन्य कामगैर-आर्थिक
अनु के अप्पादुकान — वेशभूषा और सिले हुए वस्त्रआर्थिक
अनु की माँदुकान में सहयोगआर्थिक
अनु की माँस्वैच्छिक समूह में महिलाओं को सिलाई सिखानागैर-आर्थिक
रोहनसॉफ्टवेयर इंजीनियर, कंप्यूटर एप्लीकेशन बनाने वाली कंपनीआर्थिक
रोहनसप्ताह के अंत में महाविद्यालय के युवा विकास कार्यक्रम में स्वेच्छा से कंप्यूटर सिखानागैर-आर्थिक

★कहानी का अंतिम वाक्य: “क्या बात है अनु, हमारे आस-पास के लोग कितने प्रकार के कार्य करते हैं!”

3. आर्थिक गतिविधियाँ — परिभाषा (पृ. 185)★★

“आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें अर्थ (द्रव्य, मुद्रा) सम्मिलित होता है अथवा जिन्हें अर्थोपार्जन के लिए किया जाता है अथवा जो सम्मिलित पक्षों के लिए वस्तु के नकद मूल्य से संबंधित होती हैं।”

★पुस्तक ‘अथवा’ लिखती है, ‘और’ नहीं — तीनों कसौटियों का होना आवश्यक नहीं; कोई एक पर्याप्त है।

पुस्तक के पाँच उदाहरण:

  1. व्यापारी बाजार में स्कूल बैग बेचते हैं
  2. किसान अपनी उपज बाजार में बेचते हैं
  3. वकील अभियोजन का शुल्क लेते हैं
  4. ट्रक चालक वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं
  5. श्रमिक कार बनाने वाले कारखाने में काम करते हैं

4. गैर-आर्थिक गतिविधियाँ — परिभाषा (पृ. 186)★★

“गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे हैं जिनमें आय अथवा संपत्ति अर्जित नहीं होती है, बल्कि इन्हें कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभूतियों के साथ किया जाता है।”

★ये चार शब्द याद कर लीजिए — कृतज्ञता · स्नेह · सेवा · आदर

पुस्तक के चार उदाहरण:

  1. अभिभावकों द्वारा परिवार के लिए भोजन बनाना
  2. बच्चों की उनके विद्यालय के कार्य में सहायता करना
  3. युवाओं द्वारा दादा-दादी, नाना-नानी आदि की सेवा करना
  4. परिवार के सदस्यों द्वारा घर के नवीनीकरण में सहायता करना

5. हाशिये की परिभाषाएँ — पाँचों याद कीजिए★

पदपुस्तक की परिभाषापृ.
वस्तु का नकद मूल्यकिसी वस्तु का व्यक्ति द्वारा तय किया गया मौद्रिक मूल्य, जो उस वस्तु से मिलने वाले लाभ पर आधारित होता है185
बाजारवह स्थान जहाँ व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन करते हैं; अधिकांशत: यह लेन-देन धनराशि के लिए होता है185
शुल्ककिसी व्यावसायिक परामर्श या सेवाओं के लिए किया गया भुगतान — जैसे चिकित्सक या वकील को185
वेतनएक नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को नियमित रूप से प्रतिमाह किया जाने वाला नियत भुगतान187
मजदूरीएक विशिष्ट समय अवधि के लिए नियोक्ता द्वारा श्रमिक को किया गया भुगतान189
वस्तु के रूप में भुगतानकिए गए कार्य के लिए प्राप्त किया गया गैर-मौद्रिक भुगतान189

★‘बाजार’ की परिभाषा में एक छिपी बात है — पुस्तक स्वयं मानती है कि वस्तुओं के बदले वस्तुएँ भी ली-दी जा सकती हैं। यही आगे साहिल वाले उदाहरण से जुड़ जाता है।

6. अध्याय का सबसे अच्छा प्रश्न (पृ. 187)★★★

“कबीर के दादाजी आस-पास के बच्चों को स्वैच्छिक रूप से नि:शुल्क पढ़ाते हैं। यह आर्थिक गतिविधि है या गैर-आर्थिक? यह गतिविधि आपके अध्यापक द्वारा विद्यालय में पढ़ाए जाने से किस प्रकार भिन्न है?”

कबीर के दादाजीआपके अध्यापक
बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाते हैंविद्यालय में पढ़ाते हैं
कोई भुगतान नहींवेतन मिलता है
= गैर-आर्थिक= आर्थिक

★उत्तर एक वाक्य में: “काम एक ही है। अंतर काम में नहीं, भुगतान में है।”

★और पुस्तक स्वयं गीता मौसी के बारे में यही सिद्धांत दिखाती है:

“उनको वेतन मिलता है। वह देश की सेवा करती हैं और यह एक आर्थिक गतिविधि में सम्मिलित है।” ! यानी सेवा करने से गतिविधि गैर-आर्थिक नहीं हो जाती — कसौटी भाव नहीं, भुगतान है।

7. काव्या की कहानी (पृ. 188–189)★

पात्रकामभुगतान
काव्या के चाचानिर्माण कंपनी में तकनीशियन — बुलडोजर चलाते हैंप्रतिमाह वेतन
काव्या की चाचीगाँव के डाकघर में कार्यरतप्रतिमाह वेतन
काव्या की चाचीशाम को ऑनलाइन कक्षाएँ — परीक्षा की तैयारीसाप्ताहिक शुल्क
साहिलआम के बगीचे में ट्रैक्टर से खेत जोतनादैनिक मजदूरी + आमों के रूप में शेष भुगतान

★राजमार्ग वाली पंक्ति: “इस राजमार्ग के बनने से अब निकट के नगर तक जाने का समय पाँच घंटे से घटकर केवल दो घंटे हो जाएगा।”

★और एक वाक्य जो छूट जाता है: “काव्या की चाची सुबह उठीं और अपना घरेलू काम निपटाने के बाद काम पर चली गईं।” — यह उनका तीसरा, गैर-आर्थिक काम है।

8. वेतन बनाम मजदूरी — यह अंतर पूछा जाता है★★

वेतनमजदूरी
किसेकर्मचारी कोश्रमिक को
कबप्रतिमाह, नियमित रूप सेएक विशिष्ट समय अवधि के लिए
कैसानियत भुगतानअवधि के अनुसार
उदाहरणगीता मौसी · रोहन · चाचा · चाचीसाहिल (दैनिक मजदूरी)

★“वेतन महीने का होता है; मजदूरी अवधि की होती है।”

! जाल: “साहिल को पूरा पैसा नहीं मिला, तो यह गैर-आर्थिक है।” — गलत। आम उसे काम के बदले मिले हैं — यह भुगतान है, उपहार नहीं।

9. मूल्य संवर्धन (पृ. 189–190)★★★

“आर्थिक गतिविधियों से किसी वस्तु के अन्य रूपों में रूपांतरण की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण पर उसके मूल्य में भी वृद्धि होती है। इसे मूल्य संवर्धन कहते हैं।”

राजेश का उदाहरण — काव्या के पिता, जो बढ़ई हैं

लकड़ी की लागत₹600
कुर्सी का विक्रय मूल्य₹1000
शेष राशि₹400
★यह ₹400 किसका मूल्य है?राजेश के कौशल, समय और प्रयास का मौद्रिक मूल्य

★★ये तीन शब्द याद रखिए — कौशल · समय · प्रयास

“राजेश ने लकड़ी से फर्नीचर बनाकर लकड़ी का मूल्य संवर्धन किया।”

! इसे ‘मुनाफ़ा’ मत लिखिए। पुस्तक इसे यह नाम नहीं देती।

और पुस्तक का समापन-वाक्य: “लकड़ी खरीदने से लेकर कुर्सी के बेचने तक की गतिविधियों में भुगतान सम्मिलित है। इसलिए यह सब आर्थिक गतिविधियों के भाग हैं।”

10. दूसरी तालिका (पृ. 191)★

#गतिविधि / व्यवसायकौन-सी?
1बेकरआर्थिक
2दर्जीआर्थिक
3किसान द्वारा अपने ट्रैक्टर की मरम्मत! गैर-आर्थिक
4चिकित्सकआर्थिक
5परिवार के लिए भोजन बनाने वाले अभिभावकगैर-आर्थिक
6वैज्ञानिकआर्थिक
7बीमार दादा-दादी एवं नाना-नानी की देखभाल करने वाला व्यक्तिगैर-आर्थिक
8–9(विद्यार्थी को भरने हैं)

!! पंक्ति 3 ही असली प्रश्न है

किसान अपना ही ट्रैक्टर ठीक कर रहा है — उसे कोई भुगतान नहीं मिल रहा, इसलिए गैर-आर्थिक। ★पर यदि वही किसान किसी और का ट्रैक्टर ठीक करके पैसे ले, तो वह आर्थिक हो जाएगा। यह वही सिद्धांत है जो दादाजी बनाम अध्यापक में था।

11. गैर-आर्थिक गतिविधियों का महत्व (पृ. 191–192)★★

(क) सेवा

“हमें मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों और गिरजाघरों आदि अनेक स्थानों पर सेवा कार्य देखने का अवसर मिलता है। उदाहरण के लिए, गुरुद्वारे में दर्शन हेतु आने वाले सभी श्रद्धालुओं को ‘लंगर’ या सामुदायिक रसोई में नि:शुल्क भोजन कराया जाता है। इन सेवा कार्यों से हमें संतुष्टि और कृतज्ञता की अनुभूति होती है और ये सेवा कार्य नि:स्वार्थ भाव से समाज में योगदान देते हैं।”

★ध्यान दीजिए — ‘कृतज्ञता’ और ‘सेवा’ वही दो शब्द हैं जो परिभाषा में थे। और एक नया जुड़ा — ‘संतुष्टि’।

(ख) सामुदायिक सहभागिता का महत्व

उदाहरणपुस्तक क्या कहती है
स्वच्छ भारत अभियानसभी भारतीय नागरिकों द्वारा सामूहिक प्रयासों पर आधारित; लोग मिल-जुलकर गलियों, सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखते हैं
वन महोत्सववृक्षों के महत्व और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता; वृक्षारोपण अभियानों के लिए समुदाय के सदस्यों को एक साथ लाना

★चार स्तर की सीढ़ी — घर → आस-पास का क्षेत्र → समाज → राष्ट्र

★★और ध्यान दीजिए — इस पूरे खंड में एक भी रुपया नहीं है, और फिर भी उसका शीर्षक ‘महत्व’ है।

12. आगे बढ़ने से पहले… (पृ. 193)

#बिंदु
1हमने आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियों के बारे में सीखा
2हमने आर्थिक गतिविधियों से उत्पन्न मूल्य संवर्धन के बारे में भी सीखा
3हमने समझा कि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ सामाजिक कल्याण एवं निजी कल्याण में योगदान देती हैं और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाती हैं

★तीसरे बिंदु के तीन पद अलग से याद कीजिए — ये पाठ में नहीं, केवल सारांश में आते हैं: सामाजिक कल्याण · निजी कल्याण · जीवन की समग्र गुणवत्ता

अभ्यास-प्रश्न 4 — पारिश्रमिक के चार प्रकार★★

प्रकारअर्थउदाहरण
वेतननियोक्ता द्वारा कर्मचारी को प्रतिमाह नियत भुगतानगीता मौसी · रोहन · चाचा · चाची
मजदूरीविशिष्ट समय अवधि के लिए श्रमिक को भुगतानसाहिल
शुल्कव्यावसायिक परामर्श या सेवाओं के लिए भुगतानवकील · चिकित्सक · चाची की ऑनलाइन कक्षाएँ
वस्तु के रूप में भुगतानगैर-मौद्रिक भुगतानसाहिल को मिले आम

★यह चार-पंक्ति की तालिका इस अध्याय की सबसे अधिक अंक दिलाने वाली सामग्री है।

अंतिम पन्ना — नौ जाल, एक बार पढ़ लीजिएध्यान

#जालसही बात
1“गैर-आर्थिक = कम महत्वपूर्ण”पृ. 191 का पूरा उपशीर्षक ही इसके विरुद्ध है
2“रोहन आर्थिक गतिविधि करता है”व्यक्ति नहीं, गतिविधि बँटती है
3“पढ़ाना हमेशा आर्थिक है”दादाजी नि:शुल्क पढ़ाते हैं
4“पैसा नहीं मिला तो गैर-आर्थिक”साहिल को आम मिले — वह भी भुगतान है
5“वेतन और मजदूरी एक ही हैं”वेतन प्रतिमाह नियत; मजदूरी विशिष्ट अवधि की
6“₹400 राजेश का मुनाफ़ा है”वह कौशल, समय और प्रयास का मौद्रिक मूल्य है
7“किसान का ट्रैक्टर मरम्मत करना आर्थिक है”अपना ही काम, कोई भुगतान नहीं
8“गीता मौसी सेवा करती हैं, इसलिए गैर-आर्थिक”पुस्तक इसे आर्थिक कहती है — वेतन मिलता है
9“बाजार का अर्थ केवल पैसा है”वस्तुओं के बदले वस्तुएँ भी हो सकती हैं

याद रखने के लिए — पाँच वाक्य★

  1. “‘गैर-आर्थिक’ का अर्थ ‘बेकार’ नहीं है।”
  2. “हम लोगों को नहीं बाँट रहे — कामों को बाँट रहे हैं।”
  3. “काम एक ही है; अंतर भुगतान में है।”
  4. “वेतन महीने का होता है; मजदूरी अवधि की होती है।”
  5. “मूल्य केवल सामान से नहीं आता — कौशल, समय और प्रयास से आता है।”