खंड A — पाठ्यपुस्तक की प्रश्नावली, पूर्ण उत्तर सहित (पृ. 43–44) खंड B — अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न, परीक्षा-प्रारूप के अनुसार
ध्यान दें: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्रित नहीं है। सभी उत्तर पाठ के आधार पर शिक्षक द्वारा तैयार किए गए हैं।
खंड A — पाठ्यपुस्तक प्रश्नावली (पृ. 43–44)
प्रश्न 1. देशों की पहचान करें
उत्तर देखिए
उत्तर —
संकेत देश कारण (क) राजतंत्र, लोकतंत्र-समर्थक समूहों और अतिवादियों के बीच संघर्ष ★नेपाल “कुछ समय तक राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ।” (ख) चारों तरफ भूमि से घिरा देश ★नेपाल “चारों तरफ से जमीन से घिरे नेपाल को लगता है कि भारत उसको… समुद्र तक पहुँचने से रोकता है।” (ग) सबसे पहले अर्थव्यवस्था का उदारीकरण ★श्रीलंका “दक्षिण एशिया के देशों में सबसे पहले श्रीलंका ने ही अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।” (घ) सेना ने लोकतंत्र के ऊपर बाजी मारी ★पाकिस्तान बार-बार निर्वाचित सरकारें गिराकर सैनिक शासन कायम हुआ (ङ) दक्षिण एशिया के केंद्र में; सीमाएँ अधिकांश देशों से मिलती हैं ★भारत “भारत बीच में स्थित है और बाकी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं।” (च) पहले सुल्तान का शासन; अब गणतंत्र ★मालदीव “1968 तक सल्तनत हुआ करता था। 1968 में यह एक गणतंत्र बना।” (छ) छोटी बचत और सहकारी ऋण से ग़रीबी कम ★बांग्लादेश ग्रामीण बैंक (पृ. 35 का साइड-बॉक्स) (ज) हिमालयी देश, संवैधानिक राजतंत्र, भूमि से घिरा ★भूटान “भूटान 2008 में संवैधानिक राजतंत्र बन गया।” ! (ख) और (ज) दोनों भूमि से घिरे हैं — भेद यह है कि (ज) में ‘संवैधानिक राजतंत्र’ कहा गया है, जो भूटान है; नेपाल 2008 से गणराज्य है।
प्रश्न 2. दक्षिण एशिया के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ग़लत है?
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) दक्षिण एशिया में सिर्फ़ एक तरह की राजनीतिक प्रणाली चलती है।
कारण: पाठ्यपुस्तक स्पष्ट कहती है — “दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में एक-सी राजनीतिक प्रणाली नहीं है।” भारत और श्रीलंका में लोकतंत्र, पाकिस्तान और बांग्लादेश में लोकतांत्रिक तथा सैनिक दोनों तरह के शासन, नेपाल में 2006 तक संवैधानिक राजतंत्र और 2008 से गणराज्य, भूटान में संवैधानिक राजतंत्र, और मालदीव में 1968 तक सल्तनत — पाँच अलग-अलग रूप।
शेष तीनों कथन सही हैं — (ख) दिसंबर 1996 की फरक्का संधि — गंगा नदी के पानी में हिस्सेदारी पर। (ग) फरवरी 2004 में 12वें दक्षेस सम्मेलन (इस्लामाबाद) में SAFTA पर हस्ताक्षर हुए। (घ) “चीन और संयुक्त राज्य अमरीका दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।”
प्रश्न 3. पाकिस्तान के लोकतंत्रीकरण में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ हैं?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
(1) सामाजिक अभिजनों का दबदबा। ★“पाकिस्तान में लोकतंत्र के स्थायी न बन पाने के कई कारण हैं। यहाँ सेना, धर्मगुरु और भूस्वामी अभिजनों का सामाजिक दबदबा है। इसकी वज़ह से कई बार निर्वाचित सरकारों को गिराकर सैनिक शासन कायम हुआ।”
(2) भारत के साथ तनातनी। ★“पाकिस्तान की भारत के साथ तनातनी रहती है। इस वज़ह से सेना-समर्थक समूह ज्यादा मजबूत हैं।” सुरक्षा का प्रश्न सदा प्रमुख रहने से सेना को केंद्रीय भूमिका मिल जाती है।
(3) लोकतंत्र-विरोधी तर्क का प्रचार। ★“अक्सर ये समूह दलील देते हैं कि पाकिस्तान के राजनीतिक दलों और लोकतंत्र में खोट है। राजनीतिक दलों के स्वार्थ साधन तथा लोकतंत्र की धमाचौकड़ी से पाकिस्तान की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी। इस तरह ये ताकतें सैनिक शासन को जायज़ ठहराती हैं।”
(4) अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का अभाव। ★“पाकिस्तान में लोकतांत्रिक शासन चले — इसके लिए कोई खास अंतर्राष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलता। इस वज़ह से भी सेना को अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए बढ़ावा मिला है।”
(5) पश्चिमी देशों द्वारा सैनिक शासन को बढ़ावा। ★“अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने अपने-अपने स्वार्थों से गुज़रे वक्त में पाकिस्तान में सैनिक शासन को बढ़ावा दिया।” इसके तीन कारण —
- इन देशों को उस आतंकवाद से डर लगता है जिसे ये ‘विश्वव्यापी इस्लामी आतंकवाद’ कहते हैं;
- डर सताता है कि पाकिस्तान के परमाणविक हथियार कहीं आतंकवादी समूहों के हाथ न लग जाएँ;
- ये देश पाकिस्तान को “‘पश्चिम’ तथा दक्षिण एशिया में पश्चिमी हितों का रखवाला” मानते हैं।
★निष्कर्ष — दूसरा पक्ष अवश्य लिखिए
“लोकतंत्र तो खैर पाकिस्तान में पूरी तरह सफल नहीं हो सका है लेकिन इस देश में लोकतंत्र का जज्बा बहुत मज़बूती के साथ कायम रहा है। पाकिस्तान में अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है और वहाँ मानवाधिकार आंदोलन भी काफी मजबूत है।” इसका प्रमाण यह है कि 2008 से पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता शासन कर रहे हैं।
प्रश्न 4. नेपाल के लोग अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने में कैसे सफल हुए?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भाग 1 — पृष्ठभूमि
“नेपाल अतीत में एक हिन्दू-राज्य था फिर आधुनिक काल में कई सालों तक यहाँ संवैधानिक राजतंत्र रहा।” इस दौर में राजनीतिक पार्टियाँ और आम जनता “ज्यादा खुले और उत्तरदायी शासन की आवाज़ उठाते रहे”, पर ! “राजा ने सेना की सहायता से शासन पर पूरा नियंत्रण कर लिया और नेपाल में लोकतंत्र की राह अवरुद्ध हो गई।”
भाग 2 — पहला आंदोलन (1990)
★“एक मजबूत लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन की चपेट में आकर राजा ने 1990 में नए लोकतांत्रिक संविधान की माँग मान ली।” ! पर “नेपाल में लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा और समस्याओं से भरा रहा।”
भाग 3 — त्रिकोणीय संघर्ष और 2002 का झटका
- ★“1990 के दशक में नेपाल के माओवादी नेपाल के अनेक हिस्सों में अपना प्रभाव जमाने में कामयाब हुए। माओवादी, राजा और सत्ताधारी अभिजन के खिलाफ़ सशस्त्र विद्रोह करना चाहते थे।”
- ★★“कुछ समय तक राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ।”
- ! “2002 में राजा ने संसद को भंग कर दिया और सरकार को गिरा दिया। इस तरह नेपाल में जो भी थोड़ा-बहुत लोकतंत्र था उसे राजा ने खत्म कर दिया।”
भाग 4 — ★★दूसरा आंदोलन (अप्रैल 2006) — यही प्रश्न का केंद्र है
- ★“अप्रैल 2006 में यहाँ देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन हुए।”
- ★“संघर्षरत लोकतंत्र-समर्थक शक्तियों ने अपनी पहली बड़ी जीत हासिल की जब राजा ज्ञानेन्द्र ने बाध्य होकर संसद को बहाल किया।” (संसद को अप्रैल 2002 में भंग किया गया था।)
- ★★नेतृत्व और चरित्र — “मोटे तौर पर अहिंसक रहे इस प्रतिरोध का नेतृत्व सात दलों के गठबंधन (सेवेन पार्टी अलाएंस), माओवादी तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया।”
भाग 5 — परिणाम
- संविधान लिखने के लिए संविधान-सभा का गठन हुआ।
- ★“2008 में नेपाल राजतंत्र को खत्म करने के बाद लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया।”
- ★“2015 में नेपाल ने नया संविधान अपनाया।”
★सफलता के तीन कारण (निष्कर्ष के रूप में)
- जन-आंदोलन का व्यापक और देशव्यापी होना;
- ★तीन अलग-अलग धाराओं — सात दलों का गठबंधन, माओवादी और सामाजिक कार्यकर्ता — का एक मंच पर आना;
- ★आंदोलन का “मोटे तौर पर अहिंसक” रहना, जिससे उसे व्यापक नैतिक वैधता मिली।
प्रश्न 5. श्रीलंका के जातीय-संघर्ष में किनकी भूमिका प्रमुख है?(4 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर — चार पक्ष हैं।
(1) बहुसंख्यक सिंहली समुदाय। ★“आज़ादी के बाद से श्रीलंका की राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के हितों की नुमाइंदगी करने वालों का दबदबा रहा है।” ★“सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना था कि श्रीलंका में तमिलों के साथ कोई ‘रियायत’ नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि श्रीलंका सिर्फ सिंहली लोगों का है।”
(2) तमिल समुदाय और लिट्टे। “ये लोग भारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी एक बड़ी तमिल आबादी के खिलाफ़ हैं। तमिलों का बसना श्रीलंका के आज़ाद होने के बाद भी जारी रहा।” उपेक्षा भरे बरताव से “एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज़ बुलंद हुई।” ★“1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम’ (लिट्टे) श्रीलंकाई सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष कर रहा है। इसने ‘तमिल ईलम’ यानी श्रीलंका के तमिलों के लिए एक अलग देश की मांग की।” किसी समय श्रीलंका के उत्तर पूर्वी हिस्से पर लिट्टे का नियंत्रण था।
(3) भारत। ★“भारत की तमिल जनता का भारत सरकार पर भारी दबाव था कि वह श्रीलंकाई तमिलों के हितों की रक्षा करे।” ★“1987 में भारतीय सरकार श्रीलंका के तमिल मसले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुई” — समझौता किया और भारतीय सेना भेजी। ! “आखिर में भारतीय सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में फंस गई”, और 1989 में भारत ने अपनी ‘शांति सेना’ लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली।
(4) अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ। ★“अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ के रूप में नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश युद्धरत दोनों पक्षों को फिर से आपस में बातचीत के लिए राजी कर रहे थे।”
अंत: ★“अंतत: सशस्त्र संघर्ष समाप्त हो गया क्योंकि 2009 में लिट्टे को खत्म कर दिया गया।”
प्रश्न 6. भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में क्या समझौते हुए?(4 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
(1) विश्वास बहाली के उपाय। ★“दोनों देश युद्ध के जोखिम कम करने के लिए विश्वास बहाली के उपाय करने पर सहमत हो गये हैं।”
(2) परमाणु ठिकानों पर हमला न करने का समझौता। ★1988 में — “भारत और पाकिस्तान के बीच एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों और सुविधाओं पर हमला न करने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए।” (घटनाक्रम बॉक्स, पृ. 32)
(3) लाहौर घोषणापत्र। ★फरवरी 1999 — “भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस-यात्रा कर लाहौर गए तथा शांति के एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए।”
(4) पुराने पर आज भी कायम — सिंधु-जल संधि। ★सितंबर 1960 में विश्व बैंक की मदद से हुई यह संधि “भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है।”
(5) अन्य कदम। “सामाजिक कार्यकर्ता और महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुई हैं।” नेता सम्मेलनों में भेंट करते हैं; “भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढ़ गया था और वीजा अधिक आसानी से दिए जाने लगे।”
! महत्वपूर्ण — यह वाक्य अवश्य जोड़िए: “हालाँकि, हाल के दिनों में स्थिति बदल गई है।”
(संदर्भ के लिए पुराने समझौते — 1966 ताशकंद समझौता, जुलाई 1972 शिमला-समझौता; तथा जुलाई 2001 की आगरा-बैठक असफल रही।)
प्रश्न 7. ऐसे दो मसलों के नाम बताएँ जिन पर भारत-बांग्लादेश के बीच आपसी सहयोग है और इसी तरह दो ऐसे मसलों के नाम बताएँ जिन पर असहमति है।(4 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
★सहयोग के मसले
(1) आर्थिक संबंध और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति। “पिछले बीस वर्षों के दौरान दोनों के बीच आर्थिक संबंध ज्यादा बेहतर हुए हैं। बांग्लादेश भारत के ‘लुक ईस्ट’ और 2014 से ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का हिस्सा है। इस नीति के अन्तर्गत म्यांमार के ज़रिए दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क साधने की बात है।” (2) आपदा-प्रबंधन और पर्यावरण। “आपदा-प्रबंधन और पर्यावरण के मसले पर भी दोनों देशों ने निरंतर सहयोग किया है।” (3) परिक्षेत्रों का आदान-प्रदान। ★“2015 में दोनों ने कुछ परिक्षेत्रों (एन्केलेव) का आदान-प्रदान किया।” (4) नदी-जल पर संधि। ★दिसंबर 1996 की फरक्का संधि — गंगा नदी के पानी में हिस्सेदारी पर।
! असहमति के मसले
(1) नदी-जल में हिस्सेदारी। “गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के जल में हिस्सेदारी सहित कई मुद्दों पर मतभेद हैं।” बांग्लादेश का आरोप कि “भारतीय सरकार नदी-जल में हिस्सेदारी के सवाल पर इलाके के दादा की तरह बरताव करती है।” (2) अवैध आप्रवास। “भारत में अवैध आप्रवास पर ढाका का खंडन।” (3) सुरक्षा-मुद्दे। “भारत-विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी जमातों को समर्थन” तथा “भारतीय सेना को पूर्वोत्तर भारत में जाने के लिए अपने इलाके से रास्ता देने से बांग्लादेश का इंकार।” (4) प्राकृतिक गैस। “ढाका के भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने के फैसले तथा म्यांमार को बांग्लादेशी इलाके से होकर भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने देने जैसे मसले।” (बांग्लादेश के अन्य आरोप — चटगाँव पर्वतीय क्षेत्र में विद्रोह को हवा देना, बांग्लादेश के प्राकृतिक गैस में सेंधमारी करना और व्यापार में बेईमानी बरतना।)
प्रश्न 8. दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय संबंधों को बाहरी शक्तियाँ कैसे प्रभावित करती हैं?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भूमिका: ★“कोई भी क्षेत्र हवा में नहीं होता। चाहे कोई क्षेत्र अपने को गैर इलाकाई ताकतों से अलग रखने की जितनी भी कोशिश करे उस पर बाहरी ताकतों और घटनाओं का असर पड़ता ही है।” ★“चीन और संयुक्त राज्य अमरीका दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।”
(1) चीन
- “पिछले दस वर्षों में भारत और चीन के संबंध बेहतर हुए हैं।”
- !★“चीन की रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के साथ है और यह भारत-चीन संबंधों में एक बड़ी कठिनाई है।”
- “विकास की ज़रूरत और वैश्वीकरण के कारण एशिया महादेश के ये दो बड़े देश ज्यादा नजदीक आये हैं। सन् 1991 के बाद से इनके आर्थिक संबंध ज्यादा मज़बूत हुए हैं।”
(2) संयुक्त राज्य अमरीका
- ★“शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमरीकी प्रभाव तेजी से बढ़ा है।”
- ★“अमरीका ने भारत और पाकिस्तान दोनों से अपने संबंध बेहतर किए हैं। वह भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।”
- “दोनों देशों में आर्थिक सुधार हुए हैं और उदार नीतियाँ अपनाई गई हैं। इससे दक्षिण एशिया में अमरीकी भागीदारी ज्यादा गहरी हुई है।”
- ★तीन ठोस कारण अमरीकी रुचि के — (क) “अमरीका में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की संख्या अच्छी-खासी है”; (ख) “इस क्षेत्र की जनसंख्या और बाजार का आकार भी भारी भरकम है”; (ग) “इस क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के भविष्य से अमरीका के हित भी बंधे हुए हैं।”
(3) पाकिस्तान के लोकतंत्रीकरण पर असर
★“अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने अपने-अपने स्वार्थों से गुज़रे वक्त में पाकिस्तान में सैनिक शासन को बढ़ावा दिया।” — यह बाहरी शक्ति का सीधा घरेलू असर है।
(4) कार्टून का संकेत (पृ. 42)
पाठ्यपुस्तक दो कार्टून देती है — चीन कहता है, “आप भारत के साथ केवल बुनियादी मुद्दों की बातें क्यों नहीं करते?”; और अमरीका टेनिस-अंपायर के रूप में तय करता है कि “गेंद भारत के पाले में है या पाकिस्तान के।” ★दोनों में समानता यह है कि दोनों बाहरी शक्तियाँ स्वयं को इस क्षेत्र के विवादों का निर्णायक मानती हैं।
★निष्कर्ष
“दक्षिण एशिया को संघर्षों की आशंका वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहेगा अथवा यह एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक हित एक हैं — यह बात किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।”
प्रश्न 9. दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक सहयोग की राह तैयार करने में दक्षेस (सार्क) की भूमिका और सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। दक्षिण एशिया की बेहतरी में ‘दक्षेस’ ज्यादा बड़ी भूमिका निभा सके, इसके लिए आप क्या सुझाव देंगे?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भाग 1 — भूमिका
- ★“दक्षेस (साउथ एशियन एसोशियन फॉर रिजनल कोऑपरेशन — SAARC) दक्षिण एशियाई देशों द्वारा बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई।”
- पहला सम्मेलन ढाका में हुआ, जहाँ दक्षिण एशिया के देशों ने दक्षेस के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए।
- ★1993 — सातवें सम्मेलन (ढाका) में SAPTA — आपसी व्यापार में दक्षेस के देशों को वरीयता देने की संधि।
- ★★2002 में SAFTA पर दस्तख़त; फरवरी 2004 में 12वें सम्मेलन में हस्ताक्षर; 1 जनवरी 2006 से प्रभावी। लक्ष्य — “इन देशों के बीच आपसी व्यापार में लगने वाले सीमा शुल्क को कम कर दिया जाए।”
- ★2007 में अफ़गानिस्तान दक्षेस का सदस्य बना।
- नवंबर 2014 में 18वाँ सम्मेलन काठमांडू में हुआ।
भाग 2 — ! सीमाएँ
- ★“दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली है।”
- ★आपसी अविश्वास: कुछ छोटे देश मानते हैं कि “‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।”
- ★द्विपक्षीय विकल्प की मौजूदगी: “भारत में कुछ लोगों का मानना है कि ‘साफ्टा’ के लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय व्यापार समझौता कर चुका है।” — यानी क्षेत्रीय मंच की प्रासंगिकता ही घट जाती है।
- भारत-पाकिस्तान का सर्वग्रासी संघर्ष, जो “सबसे प्रमुख और सर्वग्रासी” है, पूरे मंच को जकड़ लेता है।
- आकार की विषमता — “भारत बीच में स्थित है और बाकी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं”, जिससे हर बहुपक्षीय बातचीत वास्तव में भारत बनाम शेष बन जाती है।
भाग 3 — ★सुझाव (यह भाग विद्यार्थी का अपना होना चाहिए)
- द्विपक्षीय विवादों को मंच से अलग रखिए — जैसा आसियान करता है; तभी बाकी सहयोग चल पाएगा।
- ★SAFTA को सचमुच लागू कीजिए — केवल सीमा शुल्क घटाना पर्याप्त नहीं; गैर-शुल्क बाधाएँ और परिवहन-संपर्क भी सुधारने होंगे।
- छोटे देशों को असमान लाभ दीजिए — भारत बड़ा है, इसलिए पहले खोले, ज्यादा खोले; इससे ‘दबदबे’ का डर घटेगा।
- ★लोगों के बीच संपर्क बढ़ाइए — वीजा में ढील, छात्र-विनिमय, चिकित्सा और पर्यटन; क्योंकि पाठ्यपुस्तक स्वयं कहती है कि सद्भाव और शत्रुता साथ-साथ बसते हैं।
- गैर-विवादास्पद क्षेत्रों से शुरू कीजिए — आपदा-प्रबंधन, पर्यावरण, ऊर्जा-ग्रिड और स्वास्थ्य; भारत-बांग्लादेश और भारत-नेपाल का अनुभव यही दिखाता है।
- नियमित शिखर सम्मेलन अनिवार्य बनाइए — बैठक न होना ही सबसे बड़ी विफलता है।
प्रश्न 10. दक्षिण एशिया के देश एक-दूसरे पर अविश्वास करते हैं। इससे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह क्षेत्र एकजुट होकर अपना प्रभाव नहीं जमा पाता। इस कथन की पुष्टि में कोई भी दो उदाहरण दें और दक्षिण एशिया को मजबूत बनाने के लिए उपाय सुझाएँ।(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भाग 1 — अविश्वास के उदाहरण (कोई दो)
(1) भारत-पाकिस्तान का पारस्परिक संदेह। ★“दोनों देशों की सरकारें लगातार एक दूसरे को संदेह की नज़र से देखती हैं।” भारत का आरोप कि पाकिस्तान कश्मीरी उग्रवादियों को हथियार, प्रशिक्षण और धन देता है और 1985–1995 में खालिस्तान-समर्थक उग्रवादियों को हथियार दिए; तथा आईएसआई पर बांग्लादेश और नेपाल के गुप्त ठिकानों से भारत-विरोधी अभियानों का आरोप। जवाब में पाकिस्तान का आरोप कि भारत सिंध और बलूचिस्तान में समस्या भड़काता है।
(2) साफ्टा को लेकर छोटे देशों का अविश्वास। ★“कुछ छोटे देश मानते हैं कि ‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।”
(3) श्रीलंका में भारतीय हस्तक्षेप की स्मृति। ★“भारतीय सेना की उपस्थिति को श्रीलंका की जनता ने भी कुछ ख़ास पसंद नहीं किया। श्रीलंकाई जनता ने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है।”
(4) नेपाल और बांग्लादेश की शिकायतें। नेपाल में “बहुत से लोग यह सोचते हैं कि भारत की सरकार नेपाल के अंदरूनी मामलों में दखल दे रही है”; बांग्लादेश का मानना कि भारत “नदी-जल में हिस्सेदारी के सवाल पर इलाके के दादा की तरह बरताव करती है।”
भाग 2 — ! इसका परिणाम
- “विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली है।”
- बाहरी शक्तियों को जगह मिलती है — “चीन और संयुक्त राज्य अमरीका दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं”, और अमरीका “भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।” जो क्षेत्र आपस में बात नहीं कर सकता, उसके विवाद बाहर तय होने लगते हैं।
भाग 3 — ★मजबूत बनाने के उपाय
- ★विश्वास बहाली के उपायों का विस्तार — पाठ्यपुस्तक स्वयं इसे भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में सफल बताती है।
- आर्थिक एकीकरण को राजनीतिक विवादों से अलग रखिए — SAFTA को सचमुच लागू कीजिए।
- साझे खतरों की पहचान — पाठ्यपुस्तक भारत-बांग्लादेश के संदर्भ में कहती है कि “साझे खतरों को पहचान कर तथा एक दूसरे की ज़रूरतों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता बरतकर सहयोग के दायरे को बढ़ाया जाए।”
- ★बड़े देश की जिम्मेदारी — भारत पहले और ज्यादा खोलकर ‘दबदबे’ के डर को घटा सकता है।
- लोगों के बीच संपर्क — वीजा, व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान; भारत-नेपाल की बिना पासपोर्ट-वीजा वाली संधि इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।
- गैर-विवादास्पद क्षेत्रों में सहयोग — आपदा-प्रबंधन, पर्यावरण, जल-प्रबंधन ग्रिड और बिजली उत्पादन, जहाँ पहले से सफलता मिली है।
प्रश्न 11. दक्षिण एशिया के देश भारत को एक बाहुबली समझते हैं जो इस क्षेत्र के छोटे देशों पर अपना दबदबा जमाना चाहता है और उनके अंदरूनी मामलों में दखल देता है। इन देशों की ऐसी सोच के लिए कौन-कौन सी बातें जिम्मेदार हैं?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
(1) आकार और शक्ति की विषमता। ★“भारत का आकार बड़ा है और वह शक्तिशाली है। इसकी वजह से अपेक्षाकृत छोटे देशों का भारत के इरादों को लेकर शक करना लाजिमी है।”
(2) भूगोल। ★“दक्षिण एशिया का भूगोल भी है जहाँ भारत बीच में स्थित है और बाकी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं।” इसीलिए “इस इलाके के सभी बड़े झगड़े भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच हैं।”
(3) प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप के उदाहरण।
- ★श्रीलंका, 1987 — भारत ने समझौता किया और सेना भेजी; “श्रीलंकाई जनता ने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है”, और 1989 में शांति सेना “लक्ष्य हासिल किए बिना” वापस बुलानी पड़ी।
- मालदीव, 1988 — भारतीय वायुसेना और नौसेना की तुरंत कार्रवाई (यह मालदीव के अनुरोध पर थी, पर क्षेत्र में इसे भारत की पहुँच का प्रमाण माना गया)।
(4) नदी-जल के मामलों में ‘दादागिरी’ की शिकायत। ★बांग्लादेश की सरकार का मानना कि “भारतीय सरकार नदी-जल में हिस्सेदारी के सवाल पर इलाके के दादा की तरह बरताव करती है।”
(5) आंतरिक मामलों में दखल का आरोप। ★नेपाल में “बहुत से लोग यह सोचते हैं कि भारत की सरकार नेपाल के अंदरूनी मामलों में दखल दे रही है और उसके नदी जल तथा पनबिजली पर आँख गड़ाए हुए है।” नेपाल के माओवादी और कुछ अन्य राजनीतिक समूह “भारत की सरकार और नेपाल के भविष्य में भारतीय सरकार की भूमिका को लेकर बहुत शंकित थे।”
(6) आर्थिक प्रभुत्व का भय। ★“कुछ छोटे देश मानते हैं कि ‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।”
(7) भूमि से घिरे देशों की निर्भरता। ★“चारों तरफ से जमीन से घिरे नेपाल को लगता है कि भारत उसको अपने भूक्षेत्र से होकर समुद्र तक पहुँचने से रोकता है।”
! दूसरा पक्ष — यह अवश्य लिखिए
भारत की अपनी दृष्टि भी है: ★“भारत सरकार को अक्सर महसूस होता है कि उसके पड़ोसी देश उसका बेज़ा फायदा उठा रहे हैं। भारत नहीं चाहता कि इन देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो। उसे भय लगता है कि ऐसी स्थिति में बाहरी ताकतों को इस क्षेत्र में प्रभाव जमाने में मदद मिलेगी।”
और सारे झगड़े भारत-केंद्रित नहीं हैं — नेपाल-भूटान (जातीय मूल के नेपालियों का भूटान आप्रवास), बांग्लादेश-म्यांमार (रोहिंग्या आप्रवास), और बांग्लादेश-नेपाल (हिमालयी नदियों के जल की हिस्सेदारी) के बीच भी मतभेद हैं।
निष्कर्ष: यह सोच पूरी तरह निराधार नहीं है, पर पूरी सच्चाई भी नहीं। असली कारण आकार, भूगोल और इतिहास का मेल है — और इसका उत्तर भारत की ओर से अधिक उदारता तथा छोटे देशों की ओर से अधिक विश्वास दोनों में है।
खंड B — अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
B.1 बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
12दक्षिण एशिया में कितने देश शामिल किए जाते हैं?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) सात — बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका।
13निम्नलिखित में से किसे दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) चीन — “चीन इस क्षेत्र का एक प्रमुख देश है लेकिन चीन को दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता।”
14दक्षेस की शुरुआत कब हुई?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 1985 — पहला सम्मेलन ढाका में।
15SAFTA कब से प्रभावी हुआ?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) 1 जनवरी 2006 (दस्तख़त 2002, हस्ताक्षर फरवरी 2004)
16अफ़गानिस्तान दक्षेस का सदस्य कब बना?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) 2007
17लिट्टे को कब खत्म किया गया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (घ) 2009
18भारतीय शांति सेना श्रीलंका में कब तक रही?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 1987–90; 1989 में “लक्ष्य हासिल किए बिना” वापस बुलायी गई।
19नेपाल में राजा ज्ञानेन्द्र ने संसद कब बहाल की?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) अप्रैल 2006
20नेपाल लोकतांत्रिक गणराज्य कब बना और नया संविधान कब अपनाया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 2008 / 2015
21सिंधु-जल संधि किसकी मदद से हुई?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) विश्व बैंक — सितंबर 1960
221998 में पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण कहाँ किए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) चगाई पहाड़ी (भारत — पोखरण)
23फरक्का संधि किन देशों के बीच और किस नदी पर है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) भारत-बांग्लादेश, गंगा — दिसंबर 1996
24पाकिस्तान में सर्वेक्षण के अनुसार कितने प्रतिशत लोगों ने ‘लोकतंत्र बेहतर है’ कहा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 37 — पाँचों देशों में सबसे कम।
25मानव विकास सूची में दक्षिण एशिया के किस देश का स्थान सबसे ऊपर है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) श्रीलंका — 76वाँ स्थान (भारत 130, बांग्लादेश 136, नेपाल 149, पाकिस्तान 150)
B.2 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (1–2 अंक)
26दक्षिण एशिया की चार प्राकृतिक सीमाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: उत्तर की विशाल हिमालय पर्वत-शृंखला, दक्षिण का हिंद महासागर, पश्चिम का अरब सागर और पूरब में बंगाल की खाड़ी।
27‘दक्षिण एशिया’ के बारे में पाठ्यपुस्तक का सबसे यादगार वाक्य लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: “यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सद्भाव और शत्रुता, आशा और निराशा तथा पारस्परिक शंका और विश्वास साथ-साथ बसते हैं।”
28मालदीव के राजनीतिक इतिहास के तीन पड़ाव बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: 1968 तक सल्तनत → 1968 में गणतंत्र और अध्यक्षात्मक प्रणाली → जून 2005 में संसद ने बहुदलीय प्रणाली अपनाने के पक्ष में एकमत से मतदान; मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने 2018 के चुनावों में जीत हासिल की।
29शेख मुजीबुर्रहमान का छ: सूत्री प्रस्ताव किस वर्ष और क्यों था?
उत्तर देखिए
उत्तर: 1966 — पूर्वी पाकिस्तान को ज्यादा स्वायत्तता देने के लिए।
30बांग्लादेश ने अपने संविधान में स्वयं को क्या घोषित किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: “एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समाजवादी देश।”
311975 में बांग्लादेश में क्या हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: शेख मुजीबुर्रहमान ने संविधान में संशोधन कराकर संसदीय प्रणाली की जगह अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली लागू की और अवामी लीग को छोड़कर अन्य सभी पार्टियाँ समाप्त कर दीं। इसी वर्ष अगस्त में सेना ने बग़ावत की और शेख मुजीब मारे गए।
32नेपाल के ‘त्रिकोणीय संघर्ष’ में कौन-से तीन पक्ष थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थक, और माओवादी।
33अप्रैल 2006 के नेपाली आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: सात दलों के गठबंधन (सेवेन पार्टी अलाएंस), माओवादियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने — और
यह प्रतिरोध “मोटे तौर पर अहिंसक” रहा।
34‘तमिल ईलम’ से क्या आशय है?
उत्तर देखिए
उत्तर: लिट्टे द्वारा माँगा गया — “श्रीलंका के तमिलों के लिए एक अलग देश।”
35श्रीलंका की चार बड़ी उपलब्धियाँ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) संघर्षों के बावजूद अच्छी आर्थिक वृद्धि और विकास के उच्च स्तर; (2) जनसंख्या की वृद्धि-दर पर सफलतापूर्वक नियंत्रण करने वाले विकासशील देशों में प्रथम; (3) दक्षिण एशिया में सबसे पहले अर्थव्यवस्था का उदारीकरण; (4) कई सालों से दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद — और लोकतांत्रिक राजव्यवस्था कायम रखी।
361948 के युद्ध का कश्मीर पर क्या परिणाम हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: कश्मीर के दो हिस्से हो गए — एक ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’ और दूसरा भारत का ‘जम्मू-कश्मीर प्रान्त’। दोनों के बीच एक नियंत्रण-सीमा रेखा है।
37सरक्रिक विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह कच्छ के रन में सीमारेखा का विवाद है। “यह विवाद छोटा जान पड़ता है लेकिन… इस विवाद का समाधान जिस ढंग से किया जाएगा उसका असर सरक्रिक इलाके से सटे समुद्री-संसाधन के नियंत्रण पर भी पड़ेगा।”
38भारत-नेपाल संधि की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: “इस संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के देश में बिना पासपोर्ट (पारपत्र) और वीज़ा के आ-जा सकते हैं और काम कर सकते हैं।”
39भूटान ने भारत की किस प्रकार मदद की?
उत्तर देखिए
उत्तर: “भूटान से अपने काम का संचालन कर रहे पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों और गुरिल्लों को भूटान ने अपने क्षेत्र से खदेड़ भगाया। भूटान के इस कदम से भारत को बड़ी मदद मिली है।”
401988 में मालदीव में क्या हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: “श्रीलंका से आए कुछ भाड़े के तमिल सैनिकों ने मालदीव पर हमला किया। मालदीव ने जब आक्रमण रोकने के लिए भारत से मदद माँगी तो भारतीय वायुसेना और नौसेना ने तुरंत कार्रवाई की।”
41ऐसे तीन विवाद बताइए जिनमें भारत शामिल नहीं है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) नेपाल-भूटान — जातीय मूल के नेपालियों के भूटान आप्रवास पर; (2) बांग्लादेश-म्यांमार — रोहिंग्या लोगों के आप्रवास पर; (3) बांग्लादेश-नेपाल — हिमालयी नदियों के जल की हिस्सेदारी पर।
B.3 लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
42“पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पाठ्यपुस्तक यह निष्कर्ष बांग्लादेश और नेपाल के अनुभवों के आधार पर निकालती है।
बांग्लादेश
में सैनिक शासन के बाद 1990 में जनता के व्यापक विरोध से इरशाद को पद छोड़ना पड़ा
और 1991 से बहुदलीय चुनावों पर आधारित प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र कायम है।
नेपाल
में 1990 और अप्रैल 2006 के दो आंदोलनों के बाद 2008 में राजतंत्र समाप्त हुआ और
लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
भूटान 2008 में संवैधानिक राजतंत्र और बहुदलीय लोकतंत्र
बना; मालदीव ने जून 2005 में एकमत से बहुदलीय प्रणाली अपनायी।
पाकिस्तान में 2008 से लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता शासन कर रहे हैं
, और वहाँ भी
“लोकतंत्र का जज्बा बहुत मज़बूती के साथ कायम रहा है।”
सर्वेक्षण का प्रमाण
— लोकतंत्र की उपयुक्तता पर दक्षिण एशिया में 88% सहमति।
43दक्षिण एशिया में लोकतंत्र के जन-समर्थन संबंधी सर्वेक्षण के निष्कर्ष बताइए और उनका महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पाँच बड़े देशों के 19 हजार से अधिक नागरिकों के साक्षात्कार पर आधारित सर्वेक्षण से यह
स्पष्ट हुआ कि “इन पाँचों देशों में लोकतंत्र को व्यापक जन-समर्थन हासिल है। इन देशों में हर वर्ग और धर्म के आम नागरिक लोकतंत्र को अच्छा मानते हैं और प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र की संस्थाओं का समर्थन करते हैं।”
आँकड़े ‘लोकतंत्र बेहतर’ — श्रीलंका 71, भारत 70, बांग्लादेश 69, नेपाल 62, पाकिस्तान 37;
‘अपने देश के लिए उपयुक्त’ — दक्षिण एशिया 88, बांग्लादेश 93, श्रीलंका 92, भारत 92, पाकिस्तान 84, नेपाल 79।
महत्व ★“ये निष्कर्ष बड़े महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि पहले से माना जाता रहा है कि लोकतंत्र सिर्फ विश्व के धनी देशों में फल-फूल सकता है। इस लिहाज से देखें तो दक्षिण एशिया के लोकतंत्र के अनुभवों से लोकतंत्र की वैश्विक कल्पना का दायरा बढ़ा है।”
44बांग्लादेश के निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (विस्तार 04-Revision-Notes.md §4 में।) 1947 से 1971 तक बांग्लादेश पाकिस्तान का अंग
था। शिकायतें थीं — पश्चिमी पाकिस्तान का दबदबा, उर्दू को लादा जाना, बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ
दुर्व्यवहार, तथा प्रशासन और राजनीतिक सत्ता में समुचित हिस्सेदारी का अभाव। शेख मुजीबुर्रहमान ने
नेतृत्व किया और स्वायत्तता की माँग की। 1970 के चुनावों में अवामी लीग ने पूर्वी पाकिस्तान की सारी सीटें जीतीं और संविधान सभा में बहुमत पाया, पर सरकार ने सभा आहूत करने से इंकार कर दिया और शेख़ मुजीब को गिरफ्तार कर लिया। जेनरल याहिया खान के सैनिक शासन में पाकिस्तानी सेना ने आंदोलन कुचलने की कोशिश की; हजारों लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग भारत पलायन कर गए। भारत ने आज़ादी की माँग का समर्थन किया और वित्तीय तथा सैन्य सहायता दी, जिससे 1971 में युद्ध छिड़ा और पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के साथ स्वतंत्र राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ का निर्माण हुआ।
45भारत और श्रीलंका के संबंधों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: तनाव का कारण — इस द्वीप में जारी जातीय संघर्ष; “जब तमिल आबादी राजनीतिक रूप से नाखुश हो और उसे मारा जा रहा हो तो ऐसे में भारतीय नेताओं और जनता का तटस्थ बने रहना असंभव लगता है।”
1987 में भारत ने श्रीलंका से समझौता किया और शांति सेना भेजी, पर सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में फंस गई और श्रीलंकाई जनता ने इसे दखलंदाजी समझा; 1989 में शांति सेना “लक्ष्य हासिल किए बिना” वापस बुलायी गई। ★“1987 के सैन्य हस्तक्षेप के बाद से भारतीय सरकार श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में असलंग्नता की नीति पर अमल कर रही है।” सहयोग के क्षेत्र — मुक्त व्यापार समझौता (दिसंबर 1998)
और ‘सुनामी’ के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में भारतीय मदद, जिनसे “दोनों देश एक दूसरे के करीब आए हैं।”
46भारत-पाकिस्तान के बीच नदी-जल और सीमा-संबंधी विवादों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: 1960 तक सिन्धु नदी के इस्तेमाल को लेकर तीखे विवाद हुए। ★“संयोग से, 1960 में विश्व बैंक की मदद से भारत और पाकिस्तान ने ‘सिंधु-जल संधि’ पर दस्तख़त किए और यह संधि भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है।” हालाँकि “सिंधु जल-संधि की व्याख्या और नदी-जल के इस्तेमाल को लेकर अभी भी कुछ छोटे-मोटे विवाद हैं।” सीमा के मामले में — कच्छ के रन में सरक्रिक की सीमारेखा को लेकर
मतभेद हैं; “यह विवाद छोटा जान पड़ता है लेकिन इसके साथ एक चिन्ता जुड़ी हुई है — इसके समाधान का असर सटे समुद्री-संसाधन के नियंत्रण पर भी पड़ेगा।” इसके अलावा सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण को लेकर भी
तनातनी रहती है। “इन सभी मामलों के बारे में वार्ताओं के दौर चल रहे हैं।”
47SAFTA के बारे में तीन अलग-अलग दृष्टिकोणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
कुछ छोटे देश:
“‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।”
भारत:
“‘साफ्टा’ से इस क्षेत्र के हर देश को फायदा होगा और क्षेत्र में मुक्त व्यापार बढ़ने से राजनीतिक मसलों पर सहयोग ज्यादा बेहतर होगा।”
भारत में कुछ लोग:
“‘साफ्टा’ के लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय व्यापार समझौता कर चुका है।”
(तथ्य: 2002 में दस्तख़त, फरवरी 2004 में 12वें दक्षेस सम्मेलन में हस्ताक्षर, 1 जनवरी 2006 से प्रभावी; लक्ष्य — आपसी व्यापार में लगने वाले सीमा शुल्क को कम करना।)
B.4 अभिकथन–कारण प्रश्न (1 अंक)
निर्देश: (क) दोनों सही, कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है। (ख) दोनों सही, पर कारण व्याख्या नहीं करता। (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत। (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।
48अभिकथन (A): दक्षिण एशिया के अधिकांश बड़े झगड़ों का रिश्ता भारत से है।
कारण (R): दक्षिण एशिया के भूगोल में भारत बीच में स्थित है और बाकी देश उसकी सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं।
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) दोनों सही और कारण सही व्याख्या करता है।
49अभिकथन (A): पाकिस्तान में लोकतंत्र स्थायी नहीं बन सका।
कारण (R): पाकिस्तान में प्रेस पूरी तरह नियंत्रित है और मानवाधिकार आंदोलन कमज़ोर है।
उत्तर देखिए
उत्तर — (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत — पाठ्यपुस्तक कहती है कि “पाकिस्तान में अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है और वहाँ मानवाधिकार आंदोलन भी काफी मजबूत है।”
50अभिकथन (A): श्रीलंका का HDI स्थान दक्षिण एशिया में सबसे ऊपर है।
कारण (R): श्रीलंका ने दक्षिण एशिया में सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया और जनसंख्या-वृद्धि पर सफलतापूर्वक नियंत्रण किया।
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) दोनों सही और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
51अभिकथन (A): भारत ने 1989 में अपनी शांति सेना श्रीलंका से वापस बुला ली।
कारण (R): 2009 में लिट्टे को खत्म कर दिया गया।
उत्तर देखिए
उत्तर — (ख) दोनों कथन सही हैं, पर कारण अभिकथन की व्याख्या नहीं करता — 1989 और 2009 में बीस साल का अंतर है; वापसी का कारण यह था कि सेना “लक्ष्य हासिल किए बिना” लौटी और
श्रीलंकाई जनता ने उसकी उपस्थिति को दखलंदाजी माना।
B.5 स्रोत-आधारित प्रश्न (4 अंक)
52निम्नलिखित अवतरण पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए
उत्तर देखिए
“यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सद्भाव और शत्रुता, आशा और निराशा तथा पारस्परिक शंका और विश्वास साथ-साथ बसते हैं… इस तरह परिभाषित दक्षिण एशिया हर अर्थ में विविधताओं से भरा-पूरा इलाका है फिर भी भू-राजनीतिक धरातल पर यह एक क्षेत्र है।”
(क) दक्षिण एशिया में कौन-से सात देश शामिल हैं?
उत्तर: बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका।
(ख) इस क्षेत्र की चार प्राकृतिक सीमाएँ बताइए।
उत्तर: उत्तर — हिमालय; दक्षिण — हिंद महासागर; पश्चिम — अरब सागर; पूरब — बंगाल की खाड़ी।
(ग) भौगोलिक विशिष्टता का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर: “यह भौगोलिक विशिष्टता ही इस उप-महाद्वीपीय क्षेत्र के भाषाई, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अनूठेपन के लिए जिम्मेदार है।”
(घ) चीन को इस क्षेत्र का अंग क्यों नहीं माना जाता?
उत्तर: पाठ्यपुस्तक केवल यह बताती है कि “चीन इस क्षेत्र का एक प्रमुख देश है लेकिन चीन को दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता” — यह परिभाषा भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित है, न कि केवल भौगोलिक निकटता पर।
53निम्नलिखित अवतरण पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए
उत्तर देखिए
“बहरहाल, दक्षिण एशिया को संघर्षों की आशंका वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहेगा अथवा यह एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक हित एक हैं — यह बात किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।”
(क) यह अवतरण किन दो संभावनाओं की बात करता है?
उत्तर: (1) संघर्षों की आशंका वाला क्षेत्र बने रहना, या (2) एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरना जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक हित एक हों।
(ख) निर्णय किस पर निर्भर है?
उत्तर: “किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर।”
(ग) कौन-सी दो बाहरी शक्तियाँ इस क्षेत्र में सक्रिय हैं?
उत्तर: चीन और संयुक्त राज्य अमरीका।
(घ) दूसरी संभावना की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम बताइए।
उत्तर: ★SAFTA — 2002 में दस्तख़त, फरवरी 2004 में हस्ताक्षर, 1 जनवरी 2006 से प्रभावी; इसके पीछे यही भावना है कि “यदि दक्षिण एशिया के सभी देश अपनी सीमारेखा के आर-पार मुक्त-व्यापार पर सहमत हो जाएँ तो इस क्षेत्र में शांति और सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।”
B.6 उच्च-क्रम चिंतन (HOTS)
54पृ. 41 का साइड-बॉक्स पूछता है — “अगर अमरीका के बारे में लिखे गए अध्याय को ‘अमरीकी वर्चस्व’ का शीर्षक दिया गया तो इस अध्याय को ‘भारतीय वर्चस्व’ क्यों नहीं कहा गया?”
उत्तर देखिए
उत्तर: (यह पाठ्यपुस्तक का अपना प्रश्न है — और अब एक हटाए गए अध्याय का संदर्भ देता है; देखिए
10-Verification-Log.md।)
भेद तीन हैं
पैमाने का भेद:
अमरीका का प्रभाव वैश्विक है; भारत का क्षेत्रीय। ‘वर्चस्व’ शब्द विश्व-व्यवस्था
के स्तर पर प्रयुक्त होता है।
साधन का भेद:
अमरीकी वर्चस्व सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक — तीनों स्तरों पर है; भारत के
पड़ोसियों के साथ संबंध मुख्यतः आर्थिक और भौगोलिक निर्भरता के हैं।
आत्म-धारणा का भेद:
पाठ्यपुस्तक स्वयं कहती है कि “भारत सरकार को अक्सर महसूस होता है कि उसके पड़ोसी देश उसका बेज़ा फायदा उठा रहे हैं” — यानी भारत स्वयं को वर्चस्वशाली नहीं मानता।
! पर प्रश्न का दूसरा पक्ष भी सही है — छोटे देशों की दृष्टि में यह वर्चस्व ही है (प्रश्न 11 देखिए)। इसीलिए पाठ्यपुस्तक ने यह प्रश्न पूछा, उत्तर नहीं दिया।
55“श्रीलंका ने गृहयुद्ध झेलकर भी सबसे अच्छा मानव विकास हासिल किया।” यह कैसे संभव हुआ?
उत्तर देखिए
उत्तर: (खुला प्रश्न।) पाठ्यपुस्तक चार कारण देती है — जनसंख्या-वृद्धि पर सफल नियंत्रण,
सबसे पहले अर्थव्यवस्था का उदारीकरण, अच्छी आर्थिक वृद्धि, और लोकतांत्रिक राजव्यवस्था का बना रहना। आँकड़े इसकी पुष्टि करते हैं — आयु प्रत्याशा 75.5, साक्षरता 91.2%, माध्यमिक नामांकन 98, बाल मृत्यु दर केवल 8.0, HDI स्थान 76।
★सबसे बड़ा सबक यह है कि संघर्ष और विकास परस्पर-निषेधी नहीं हैं — बशर्ते लोकतांत्रिक संस्थाएँ और सामाजिक नीतियाँ बनी रहें।
56दक्षिण एशिया में भारत की केंद्रीय स्थिति वरदान है या अभिशाप?
उत्तर देखिए
उत्तर: (खुला प्रश्न; दोनों पक्ष मान्य।)
वरदान भारत हर पड़ोसी से जुड़ा है, इसलिए वह क्षेत्रीय एकीकरण की धुरी बन सकता है —
भारत-नेपाल की बिना वीजा वाली संधि, भूटान की पनबिजली परियोजनाएँ, मालदीव और श्रीलंका को मदद
इसके प्रमाण हैं।
अभिशाप★“इस इलाके के सभी बड़े झगड़े भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच हैं”, और “छोटे देशों को लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा कायम करना चाहता है।” हर द्विपक्षीय विवाद पूरे क्षेत्रीय मंच को जकड़ लेता है।
निष्कर्षस्थिति तटस्थ है; उसे वरदान या अभिशाप भारत का अपना आचरण बनाता है।
57दक्षिण एशिया के पाँच देशों में से पाकिस्तान में ‘लोकतंत्र बेहतर है’ कहने वाले सबसे कम (37%) क्यों हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: (खुला प्रश्न।) पाठ्यपुस्तक इसका सीधा उत्तर नहीं देती, पर उसी अध्याय में कारण मौजूद हैं —
पाकिस्तान में लोकतंत्र बार-बार टूटा
(अयूब, याहिया, जियाउल-हक, मुशर्रफ), इसलिए लोगों का
लोकतांत्रिक सरकारों का अनुभव सीमित और अस्थिर रहा।
“राजनीतिक दलों के स्वार्थ साधन तथा लोकतंत्र की धमाचौकड़ी”
वाला तर्क वहाँ लंबे समय से प्रचारित
रहा है।
भारत के साथ स्थायी तनातनी
ने सुरक्षा को लोकतंत्र से ऊपर रख दिया।
! पर ध्यान दीजिए — पाकिस्तान में भी 84% लोग मानते हैं कि लोकतंत्र उनके देश के लिए उपयुक्त है।
यानी अस्वीकृति लोकतंत्र की नहीं, उसके अब तक के अनुभव की है।
उत्तर लिखने की रणनीति★
| अंक | क्या करें |
|---|---|
| 1 | केवल तथ्य — तिथि, नाम, संख्या। |
| 2 | दो अलग बिंदु, दोनों में एक-एक ठोस प्रमाण। |
| 4 | चार बिंदु, हर बिंदु में कीवर्ड मोटा और एक तथ्य या तिथि। |
| 6 | भूमिका → 5–6 बिंदु → निष्कर्ष। कम से कम तीन तिथियाँ या आँकड़े अवश्य। |
| देश-आधारित | देश का नाम पहले लिखिए, फिर तिथि, फिर विवरण — जैसे “नेपाल — अप्रैल 2006 — सात दलों का गठबंधन…” |
| मत-आधारित (9, 10, 11) | दोनों पक्ष + सुझाव/निष्कर्ष — यही पूरे अंक दिलाता है। |
| सभी में | पाठ्यपुस्तक के उद्धरण (“सद्भाव और शत्रुता… साथ-साथ बसते हैं”, “लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है”) अंक बढ़ाते हैं। |