Chapter 5कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

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★उत्तर लिखने का नियम: पहले पाठ्यपुस्तक का तथ्य, फिर एक उदाहरण या आँकड़ा, फिर एक पंक्ति का निष्कर्ष। इस अध्याय में तिथियाँ, आँकड़े और नाम ही अंक दिलाते हैं।


प्रश्न 1 ·1967 के चुनावों के बारे में कौन-सा बयान सही है?(पृ. 90)

✓ सही उत्तर: (क) — “कांग्रेस लोकसभा के चुनाव में विजयी रही, लेकिन कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव वह हार गई।”

कारण: पाठ कहता है — “कांग्रेस को जैसे-तैसे लोकसभा में बहुमत तो मिल गया था, लेकिन उसको प्राप्त मतों के प्रतिशत तथा सीटों की संख्या में भारी गिरावट आई थी” और “कांग्रेस नौ राज्यों में सरकार नहीं बना सकी।”

! अन्य विकल्प क्यों गलत हैंकारण
(ख)लोकसभा में कांग्रेस हारी नहीं — बहुमत मिला था
(ग)केंद्र में गठबंधन सरकार नहीं बनी; कांग्रेस ने अपने बहुमत से सरकार बनाई
(घ)! बहुमत बढ़ा नहीं, बल्कि “अब से पहले कांग्रेस को कभी न तो इतने कम वोट मिले थे और न ही इतनी कम सीटें”

प्रश्न 2 · जोड़ा मिलाइए(पृ. 90)

पद✓ मेलप्रमाण
(क) सिंडिकेट(iv) कांग्रेस के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं का एक समूह“इस समूह के नेताओं का पार्टी के संगठन पर नियंत्रण था” — पृ. 82
(ख) दल-बदल(i) कोई निर्वाचित जन-प्रतिनिधि जिस पार्टी के टिकट से जीता हो, उसे छोड़कर दूसरे दल में चला जाएपाठ की अपनी परिभाषा — पृ. 81
(ग) नारा(ii) लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाला एक मनभावन मुहावरा‘जय जवान-जय किसान’, ‘गरीबी हटाओ’
(घ) गैर-कांग्रेसवाद(iii) कांग्रेस और इसकी नीतियों के खिलाफ़ अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियों का एकजुट होनालोहिया की रणनीति — पृ. 78

प्रश्न 3 ·निम्नलिखित नारे से किन नेताओं का संबंध है?(पृ. 90)

नारा✓ नेता / पक्षसंदर्भ
(क) ‘जय जवान, जय किसान’★लालबहादुर शास्त्री1965 का युद्ध और खाद्यान्न-संकट — दोनों मोर्चों का संकल्प (पृ. 74)
(ख) ‘इंदिरा हटाओ!’★‘ग्रैंड अलायंस’ के विपक्षी दल (एसएसपी, पीएसपी, जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी, भारतीय क्रांतिदल)“विपक्षी गठबंधन के पास बस एक ही कार्यक्रम है: इंदिरा हटाओ” (पृ. 86)
(ग) ‘गरीबी हटाओ!’★★इंदिरा गाँधी1971 के चुनाव-अभियान का केंद्रीय नारा (पृ. 86)

★एक पंक्ति जोड़िए: “ध्यान देने योग्य है कि ‘इंदिरा हटाओ’ एक व्यक्ति के विरुद्ध था, जबकि ‘गरीबी हटाओ’ एक समस्या के विरुद्ध — और चुनाव यहीं तय हो गया।”

प्रश्न 4 ·1971 के ‘ग्रैंड अलायंस’ के बारे में कौन-सा कथन ठीक है?(पृ. 90)

✓ सही उत्तर: (क) — “इसका गठन गैर-कम्युनिस्ट और गैर-कांग्रेसी दलों ने किया था।”

प्रमाण: “सभी बड़ी गैर-साम्यवादी और गैर-कांग्रेसी विपक्षी पार्टियों ने एक चुनावी गठबंधन बना लिया था। इसे ‘ग्रैंड अलायंस’ कहा गया।” (पृ. 86)

! अन्य विकल्प क्यों गलत हैंकारण
(ख)! “‘ग्रैंड अलायंस’ के पास कोई सुसंगत राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था।”
(ग)! सभी गैर-कांग्रेसी दल इसमें नहीं थे — सीपीआई तो कांग्रेस (आर) के साथ गठजोड़ में थी।

प्रश्न 5 ·किसी राजनीतिक दल को अपने अंदरूनी मतभेदों का समाधान किस तरह करना चाहिए?

! यह मत-आधारित प्रश्न है — कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं। हर विकल्प के फ़ायदे और घाटे लिखिए।

विकल्प✓ फ़ायदे! घाटे
(क) पार्टी के अध्यक्ष द्वारा बताए गए मार्ग पर चलनानिर्णय तेज़; अनुशासन और स्पष्टता; गुटबाज़ी घटती है! आंतरिक लोकतंत्र समाप्त; ★यही तो कविराज की आलोचना है — “अत्यंत केंद्रीकृत और अलोकतांत्रिक पार्टी संगठन”
(ख) पार्टी के भीतर बहुमत की राय पर अमल करना★लोकतांत्रिक और पारदर्शी; निर्णय को व्यापक स्वीकृति! अल्पमत की आवाज़ लगातार दब सकती है; स्थायी गुटबाज़ी
(ग) हरेक मामले पर गुप्त मतदान कराना★दबाव-मुक्त राय; 1966 में इसी से इंदिरा गाँधी चुनी गईं! हर मामले में असंभव और धीमा; जवाबदेही घटती है; ★1969 में ‘अंतरात्मा की आवाज़’ ने ही पार्टी तोड़ दी
(घ) वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं से सलाह करना★अनुभव का लाभ; 1964 में कामराज ने यही किया और शास्त्री निर्विरोध चुने गए! ‘सिंडिकेट’ जैसा अनौपचारिक शक्ति-केंद्र बन सकता है; युवा नेतृत्व को जगह नहीं मिलती

★★निष्कर्ष लिखिए: “इस अध्याय का अनुभव बताता है कि कोई एक तरीका पर्याप्त नहीं है। 1964 में सलाह-मशविरा काम आया, 1966 में गुप्त मतदान, और 1969 में दोनों विफल रहे — क्योंकि तब मतभेद प्रक्रिया का नहीं, विचारधारा और सत्ता का था।”

प्रश्न 6 ·1967 की हार के कारण के रूप में किसे/किन्हें स्वीकार किया जा सकता है?

विकल्पनिर्णयतर्क
(क) करिश्माई नेता का अभाव✓ स्वीकार्य★“कांग्रेस पहली बार नेहरू के बिना मतदाताओं का सामना कर रही थी”; और नए प्रधानमंत्री को “राजनीति के लिहाज़ से कम अनुभवी माना जा रहा था।”
(ख) कांग्रेस पार्टी के भीतर टूट❌ स्वीकार्य नहीं! औपचारिक टूट 1969 में हुई, 1967 से दो साल बाद। इसलिए यह 1967 की हार का कारण नहीं हो सकता।
(ग) क्षेत्रीय, जातीय और सांप्रदायिक समूहों की लामबंदी✓ स्वीकार्य★मद्रास में डीएमके का हिंदी-विरोधी आंदोलन; और “इस अवधि में गंभीर किस्म के हिन्दू-मुस्लिम दंगे भी हुए।” राजस्थान के देवीसर गाँव की कथा भी जातीय समीकरण दिखाती है।
(घ) गैर-कांग्रेसी दलों के बीच एकजुटता✓ स्वीकार्य★★यही ‘गैर-कांग्रेसवाद’ है — मोर्चा और सीटों का तालमेल, ताकि कांग्रेस-विरोधी वोट न बँटे।
(ङ) कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद✓ स्वीकार्यइंदिरा गाँधी बनाम सिंडिकेट की खींचतान; विपक्ष को लगा कि “कांग्रेस की अंदरूनी उठापटक से उन्हें अवसर हाथ लगा है।”

!★(ख) और (ङ) का अंतर ज़रूर स्पष्ट कीजिए — ‘मतभेद’ 1967 से पहले थे; ‘टूट’ 1969 में हुई। यही इस प्रश्न का असली जाल है।

प्रश्न 7 ·1970 के दशक में इंदिरा गाँधी की सरकार किन कारणों से लोकप्रिय हुई थी?

#कारणप्रमाण
1★★‘गरीबी हटाओ’ का सकारात्मक कार्यक्रमविपक्ष के पास केवल ‘इंदिरा हटाओ’ था; नयी कांग्रेस के पास “एक मुद्दा… एक अजेंडा और कार्यक्रम”
2★वंचित तबकों में समर्थन-आधारभूमिहीन किसान, दलित और आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिलाएँ, बेरोज़गार नौजवान
3★★बड़े जनप्रिय आर्थिक कदमचौदह अग्रणी बैंकों का राष्ट्रीयकरण; ‘प्रिवी पर्स’ की समाप्ति
4भूमि सुधार“भूमि सुधार के मौजूदा कानूनों के क्रियान्वयन के लिए ज़बरदस्त अभियान”; भू-परिसीमन के नए कानून
5★★1971 के युद्ध में जीत और बांग्लादेश का उदय“इन घटनाओं से इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता में चार चाँद लग गए। विपक्ष के नेताओं तक ने उसके राज्यकौशल की प्रशंसा की।”
6छवि“गरीबों और वंचितों के रक्षक और एक मज़बूत राष्ट्रवादी नेता के रूप में देखा गया”
7लगातार दो जीतें1971 का लोकसभा चुनाव और 1972 के राज्य विधानसभा चुनाव — “कांग्रेस अब लगभग सभी राज्यों में सत्ता में थी”

प्रश्न 8 ·‘सिंडिकेट’ का क्या अर्थ है? उसने कांग्रेस में क्या भूमिका निभाई?

8.1 अर्थ

“कांग्रेसी नेताओं के एक समूह को अनौपचारिक तौर पर ‘सिंडिकेट’ के नाम से इंगित किया जाता था। इस समूह के नेताओं का पार्टी के संगठन पर नियंत्रण था।” (पृ. 82)

8.2 सदस्य

नेताप्रांत
★के. कामराज (अगुवा)मद्रास प्रांत के भूतपूर्व मुख्यमंत्री, फिर कांग्रेस अध्यक्ष
एस.के. पाटिलबंबई सिटी (अब मुंबई)
एस. निजलिंगप्पामैसूर (अब कर्नाटक)
एन. संजीव रेड्डीआंध्र प्रदेश
अतुल्य घोषपश्चिम बंगाल

8.3 भूमिका — चार बिंदु★

1★★“लालबहादुर शास्त्री और उसके बाद इंदिरा गाँधी, दोनों ही सिंडिकेट की सहायता से प्रधानमंत्री के पद पर आरूढ़ हुए थे।”

2“उसी ने इंदिरा गाँधी का कांग्रेस संसदीय दल के नेता के रूप में चुना जाना सुनिश्चित किया था।”

3“इंदिरा गाँधी के पहले मंत्रिपरिषद् में इस समूह की निर्णायक भूमिका रही। इसने तब नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में भी अहम भूमिका निभायी थी।”

4! 1969 की टूट के बाद सिंडिकेट के नेता कांग्रेस (ओ) में रहे, और “चूँकि इंदिरा गाँधी की कांग्रेस (आर) ही लोकप्रियता की कसौटी पर सफल रही, इसलिए भारतीय राजनीति के ये बड़े और ताकतवर नेता 1971 के बाद प्रभावहीन हो गए।”

★★अंत में एक पंक्ति: “सिंडिकेट का उदय और पतन दिखाता है कि 1960 के दशक तक कांग्रेस में असली शक्ति राज्य-स्तर के संगठनात्मक नेताओं के पास थी — और 1971 के बाद वह पूरी तरह सर्वोच्च नेता की लोकप्रियता में चली गई।”

प्रश्न 9 ·कांग्रेस पार्टी किन मसलों को लेकर 1969 में टूट की शिकार हुई?

★उत्तर को चार कड़ियों में क्रम से लिखिए — यही सर्वोत्तम संरचना है।

कड़ी 1 — सत्ता का प्रश्न

सिंडिकेट ने इंदिरा गाँधी को इस अपेक्षा से प्रधानमंत्री बनवाया था कि वे “उनकी सलाहों पर अमल करेंगी।” ! पर “इंदिरा गाँधी ने सरकार और पार्टी के भीतर खुद का मुकाम बनाना शुरू किया… धीरे-धीरे और बड़ी सावधानी से उन्होंने सिंडिकेट को हाशिए पर ला खड़ा किया।”

कड़ी 2 — विचारधारा का प्रश्न

★★“उन्होंने एक साधारण से सत्ता-संघर्ष को विचारधारात्मक संघर्ष में बदल दिया।” मई 1967 का दस-सूत्री कार्यक्रम — बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण, आम बीमा का राष्ट्रीयकरण, शहरी संपदा और आय का परिसीमन, खाद्यान्न का सरकारी वितरण, भूमि सुधार, ग्रामीण गरीबों को आवासीय भूखंड। ! “सिंडिकेट के नेताओं ने औपचारिक तौर पर… स्वीकृति दे दी, लेकिन इसे लेकर उनके मन में गहरे संदेह थे।”

कड़ी 3 — दो ठोस नीतियाँ

★चौदह अग्रणी बैंकों का राष्ट्रीयकरण और ‘प्रिवी पर्स’ की समाप्ति। ! इन्हीं दो मुद्दों पर उपप्रधानमंत्री एवं वित्तमंत्री मोरारजी देसाई से “गहरे मतभेद उभरे और इसके परिणामस्वरूप मोरारजी ने सरकार से किनारा कर लिया।”

कड़ी 4 — निर्णायक मोड़: राष्ट्रपति चुनाव, 1969

क्रमघटना
1ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु से पद खाली
2सिंडिकेट ने एन. संजीव रेड्डी को आधिकारिक उम्मीदवार बनवाया — इंदिरा गाँधी की असहमति के बावजूद
3★इंदिरा गाँधी ने उपराष्ट्रपति वी.वी. गिरि को स्वतंत्र उम्मीदवार बनने का बढ़ावा दिया
4कांग्रेस अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने ‘व्हिप’ जारी किया
5★★इंदिरा गाँधी ने “खुलेआम अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट डालने” को कहा
6★★गिरि विजयी — “आधिकारिक उम्मीदवार की हार से पार्टी का टूटना तय हो गया।”

परिणाम: कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को निष्कासित किया (11 नवंबर 1969 का पत्र); इंदिरा गाँधी ने कहा “उनकी पार्टी ही असली कांग्रेस है”; और नवंबर 1969 तक दो कांग्रेस बन गईं — कांग्रेस (ओ) ‘पुरानी’ और कांग्रेस (आर) ‘नयी’।

★अंतिम पंक्ति: “इंदिरा गाँधी ने इस टूट को ‘समाजवादी’ बनाम ‘पुरातनपंथी’ तथा ‘गरीबों के हिमायती’ बनाम ‘अमीरों के तरफ़दार’ की लड़ाई के रूप में पेश किया — और 1971 के चुनाव ने उनके इस पक्ष को जनादेश दे दिया।”

प्रश्न 10 · अवतरण-आधारित — सुदीप्त कविराज(पृ. 91)

अवतरण: “इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस को अत्यंत केंद्रीकृत और अलोकतांत्रिक पार्टी संगठन में तब्दील कर दिया, जबकि नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस शुरुआती दशकों में एक संघीय, लोकतांत्रिक और विचारधाराओं के समाहार का मंच थी। नयी और लोकलुभावन राजनीति ने राजनीतिक विचारधारा को महज चुनावी विमर्श में बदल दिया। कई नारे उछाले गए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उसी के अनुकूल सरकार की नीतियाँ भी बनानी थीं — 1970 के दशक के शुरुआती सालों में अपनी बड़ी चुनावी जीत के जश्न के बीच कांग्रेस एक राजनीतिक संगठन के तौर पर मर गई।”

(क)नेहरू और इंदिरा गाँधी की रणनीतियों में क्या अंतर था?

पहलूनेहरू के नेतृत्व मेंइंदिरा गाँधी के नेतृत्व में
संगठन“संघीय” — राज्य-इकाइयों की अपनी ताक़त! “अत्यंत केंद्रीकृत”
आंतरिक जीवन“लोकतांत्रिक”! “अलोकतांत्रिक”
विचारधारा“विचारधाराओं के समाहार का मंच” — विभिन्न धाराएँ साथ! “राजनीतिक विचारधारा… महज चुनावी विमर्श”
आधारगुटों और हितों का संतुलन★“पूर्णतया अपने सर्वोच्च नेता की लोकप्रियता पर आश्रित” (पाठ का अपना वाक्य, पृ. 89)

★पाठ से पुष्टि जोड़िए: कुट्टी का कार्टून (पृ. 88) — “मुख्यमंत्री चुनने की इंदिरा गाँधी की शैली पर एक कार्टूनिस्ट की टिप्पणी” — इसी केंद्रीकरण का चित्र है।

(ख)लेखक ने क्यों कहा है कि सत्तर के दशक में कांग्रेस ‘मर गई’?

1★क्योंकि लेखक ‘कांग्रेस’ से एक राजनीतिक संगठन समझते हैं, न कि केवल एक चुनाव जीतने वाली मशीन।
चुनावी दृष्टि से कांग्रेस 1971 में सबसे मज़बूत थी — पर संगठन के रूप में वह खोखली हो चुकी थी।

2★★पाठ स्वयं इसकी पुष्टि करता है: “इस पार्टी का सांगठनिक ढाँचा भी अपेक्षाकृत कमजोर था। इस कांग्रेस पार्टी के भीतर कई गुट नहीं थे, यानी अब वह विभिन्न मतों और हितों को एक साथ लेकर चलने वाली पार्टी नहीं थी।”

3★और सबसे बड़ी क्षति: “कांग्रेस प्रणाली के भीतर हर तनाव और संघर्ष को पचा लेने की क्षमता थी… लेकिन नयी कांग्रेस… इस क्षमता से हीन थी।”

4नारे बड़े हुए, पर “इसका मतलब यह नहीं था कि उसी के अनुकूल सरकार की नीतियाँ भी बनानी थीं” — यानी
वादा और नीति के बीच की खाई।

★★एक पंक्ति में: “कांग्रेस चुनावी रूप से जीवित रही, पर संगठनात्मक रूप से मर गई — और लेखक इसी अंतर की ओर संकेत कर रहे हैं।”

(ग)कांग्रेस में आए बदलावों का असर दूसरी पार्टियों पर किस तरह पड़ा?

1★विपक्ष भी नेता-केंद्रित होता गया — जब मुकाबला एक सर्वोच्च नेता से हो, तो विपक्ष का एकमात्र
कार्यक्रम भी उसी व्यक्ति के इर्द-गिर्द बनता है। इसका प्रमाण स्वयं ‘इंदिरा हटाओ’ है।

2★★विपक्ष को एकजुट होना पड़ा — ‘गैर-कांग्रेसवाद’ (1967) और ‘ग्रैंड अलायंस’ (1971) — दोनों
कांग्रेस के बदलते स्वरूप की प्रतिक्रिया थे।

3गठबंधन और दल-बदल स्थायी परिघटना बन गए — 1967 के बाद यह भारतीय राजनीति की सामान्य विशेषता हो गई।

4★क्षेत्रीय दलों को जगह मिली — मद्रास में डीएमके की पूर्ण-बहुमत जीत इसका पहला बड़ा उदाहरण है।

5! और दीर्घकालीन असर: जब सत्ताधारी दल असहमति को अपने भीतर नहीं पचा सका, तो असहमति सड़कों पर उतरी — “जनाक्रोश तथा लामबंदी लगातार बढ़ती रही” — और वही अगले अध्याय का विषय है।

खंड ख · अतिरिक्त अभ्यास

ख.1 · वस्तुनिष्ठ प्रश्न(1 अंक)

#प्रश्नउत्तर
1नेहरू की मृत्यु कब हुई?मई 1964
2शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाने में किस कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका थी?के. कामराज
3शास्त्री कांग्रेस संसदीय दल के नेता कैसे चुने गए?निर्विरोध
4‘जय जवान-जय किसान’ का नारा किसने दिया?लालबहादुर शास्त्री
5शास्त्री का निधन कब और कहाँ हुआ?11 जनवरी 1966, ताशकंद
61966 में इंदिरा गाँधी ने किसे हराया और किस विधि से?मोरारजी देसाई को, गुप्त मतदान में
71960 के दशक को क्या कहा जाता है?‘खतरनाक दशक’
8अवमूल्यन के बाद 1 डॉलर की कीमत कितनी हुई?5 रुपये से बढ़कर 7 रुपये
91967 के चुनाव-परिणामों को क्या संज्ञा दी गई?‘राजनीतिक भूकंप’
10कांग्रेस कितने राज्यों में सरकार नहीं बना सकी?नौ
11किस राज्य में पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को पूर्ण बहुमत मिला?मद्रास — द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके)
12‘गैर-कांग्रेसवाद’ नाम किसने दिया?राममनोहर लोहिया
131967 में डीएमके किस आंदोलन के नेतृत्व से सत्ता में आई?हिंदी-विरोधी आंदोलन
14‘आया राम-गया राम’ किस विधायक से जुड़ा है?हरियाणा के गया लाल
15‘सिंडिकेट’ का अगुवा कौन था?के. कामराज
16दस-सूत्री कार्यक्रम कब अपनाया गया?मई 1967
171969 के राष्ट्रपति चुनाव में कौन जीता?वी.वी. गिरि (स्वतंत्र उम्मीदवार)
18कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार कौन थे?एन. संजीव रेड्डी
19निजलिंगप्पा का निष्कासन-पत्र किस तिथि का है?11 नवंबर 1969
20कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर) के पूरे नाम?कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन) और कांग्रेस (रिक्विजिनिस्ट)
211971 में कांग्रेस (आर) + सीपीआई को कितनी सीटें और वोट मिले?375 सीटें, 48.4 प्रतिशत वोट
22कांग्रेस (ओ) को कितनी सीटें मिलीं?16
231969 में कितने बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ?चौदह
24‘ज़ंजीर’ किस वर्ष की फ़िल्म है और निर्देशक कौन थे?1973; प्रकाश मेहरा

ख.2 · लघु उत्तरीय(2 अंक)

11960 के दशक को ‘खतरनाक दशक’ क्यों कहा जाता है?

2‘दल-बदल’ की परिभाषा दीजिए।

3‘गैर-कांग्रेसवाद’ क्या था? लोहिया का तर्क बताइए।

4‘संयुक्त विधायक दल की सरकार’ से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।

5‘आया राम-गया राम’ मुहावरा कैसे प्रचलित हुआ?

6दस-सूत्री कार्यक्रम के कोई चार प्रावधान लिखिए।

7‘प्रिवी पर्स’ क्या था और उस पर आपत्ति क्यों हुई?

8‘ग्रैंड अलायंस’ में कौन-कौन से दल थे?

91967 के चुनाव में हारने वाले चार कांग्रेसी दिग्गजों के नाम लिखिए।

10कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर) में क्या अंतर था?

ख.3 · दीर्घ उत्तरीय(4 अंक)

1नेहरू और शास्त्री — दोनों के बाद उत्तराधिकार का प्रश्न कैसे हल हुआ? तुलना कीजिए।

21967 के चुनावों को ‘राजनीतिक भूकंप’ क्यों कहा गया? चार कारण दीजिए।

31967 के चुनावों से जन्मी दो नयी परिघटनाओं — गठबंधन और दल-बदल — की व्याख्या कीजिए।

4इंदिरा गाँधी ने सिंडिकेट का सामना किस रणनीति से किया?

51971 के चुनाव में ‘गरीबी हटाओ’ का नारा क्यों प्रभावी रहा?

ख.4 · निबंधात्मक(6 अंक)★

1★★“इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस प्रणाली को पुनर्स्थापित ज़रूर किया, लेकिन कांग्रेस-प्रणाली की प्रकृति को बदलकर।” — इस कथन की व्याख्या कीजिए।

2★1964 से 1971 तक कांग्रेस के सामने आई चुनौतियों और उनसे उबरने की प्रक्रिया का विवरण दीजिए।

3★★“पुरानी और नयी कांग्रेस में कौन-सी चीज़ समान थी?” — तुलनात्मक उत्तर लिखिए।

ख.5 · स्रोत-आधारित अभ्यास(5 अंक)

अवतरण पढ़िए: “इतिहास… लोकतंत्र की त्रासदी के ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है, जब जनसमर्थन की लहर के बूते अथवा किसी लोकतांत्रिक संगठन के बल पर सत्तासीन हुआ नेता राजनीतिक आत्ममोह का शिकार हो जाता है और चरित्रहीन चाटुकार दरबारियों की बातों में जीने लगता है…” — एस. निजलिंगप्पा का इंदिरा गाँधी को लिखा पत्र, 11 नवंबर 1969

(क) यह पत्र किस अवसर पर लिखा गया? (1)

कांग्रेस अध्यक्ष एस. निजलिंगप्पा द्वारा प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को पार्टी से निष्कासित करते समय।

(ख) इस निष्कासन तक बात कैसे पहुँची? (2)

1969 के राष्ट्रपति चुनाव में सिंडिकेट ने संजीव रेड्डी को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया और ‘व्हिप’ जारी किया; इंदिरा गाँधी ने वी.वी. गिरि का परोक्ष समर्थन करते हुए “अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट” डालने को कहा; गिरि जीत गए। “आधिकारिक उम्मीदवार की हार से पार्टी का टूटना तय हो गया।”

(ग) ★लेखक की चेतावनी आगे चलकर क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है? (2)

क्योंकि पाठ स्वयं आगे कहता है कि नयी कांग्रेस “पूर्णतया अपने सर्वोच्च नेता की लोकप्रियता पर आश्रित” हो गई और “जनता की आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति की लोकतांत्रिक ज़मीन छोटी पड़ती गई।” ★और अगले अध्याय में यही प्रवृत्ति “देश के संवैधानिक लोकतंत्र के अस्तित्व पर ही खतरा” बन जाती है।