चिह्न: 📖 = पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट रूप से परिभाषित · 📄 = पाठ में प्रयुक्त, अर्थ निहित · ➕ = पाठ से बाहर, समझ के लिए जोड़ा गया (संवर्धन)
भाग क · केंद्रीय अवधारणाएँ
1 📄 कांग्रेस प्रणाली(The Congress System)★★
📄 वह व्यवस्था जिसमें एक ही दल का प्रभुत्व रहा, पर लोकतांत्रिक तरीके से — क्योंकि प्रतिस्पर्धा और विविधता दल के भीतर मौजूद थी।
इस अध्याय के अनुसार उसके तीन लक्षण:
| # | लक्षण | 1971 तक क्या हुआ |
|---|---|---|
| 1 | चुनावी प्रभुत्व | ! 1967 में टूटा, ✓ 1971 में लौटा |
| 2 | दल के भीतर कई गुट | !★“इस कांग्रेस पार्टी के भीतर कई गुट नहीं थे” — लौटा नहीं |
| 3 | ★★हर तनाव और संघर्ष को पचा लेने की क्षमता | !★★“नयी कांग्रेस… इस क्षमता से हीन थी” — लौटा नहीं |
★★इसीलिए निष्कर्ष है: “इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस प्रणाली को पुनर्स्थापित ज़रूर किया, लेकिन कांग्रेस-प्रणाली की प्रकृति को बदलकर।”
2 📄 राजनीतिक उत्तराधिकार(Political Succession)★
📄 किसी सर्वोच्च नेता के जाने के बाद अगला नेता कैसे तय होगा — यह प्रश्न। ! 1964 में यह भारत की सबसे बड़ी परीक्षा थी, क्योंकि आशंका थी कि “बाकी बहुत से नव-स्वतंत्र देशों की तरह भारत भी… लोकतांत्रिक ढंग से हल नहीं कर पाएगा” और “असफल रहने की सूरत में… सेना राजनीतिक भूमिका में उतर आएगी।”
| वर्ष | विधि | परिणाम |
|---|---|---|
| 1964 | कामराज का सलाह-मशविरा | ★शास्त्री निर्विरोध |
| 1966 | कांग्रेस सांसदों का गुप्त मतदान | ★इंदिरा गाँधी, दो-तिहाई से अधिक मत |
3 📄 ‘खतरनाक दशक’(The Dangerous Decade)★★
पाठ: “1960 के दशक को ‘खतरनाक दशक’ कहा जाता है क्योंकि गरीबी, गैर-बराबरी, सांप्रदायिक और क्षेत्रीय विभाजन आदि के सवाल अभी अनसुलझे थे। संभव था कि… देश में लोकतंत्र की परियोजना असफल हो जाती अथवा खुद देश ही बिखर जाता।” (पृ. 74)
4 📄 गैर-कांग्रेसवाद(Non-Congressism)★★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| किसने नाम दिया | ★राममनोहर लोहिया |
| व्यावहारिक आधार | “कांग्रेस के वोट बँट जाने के कारण ही कांग्रेस सत्तासीन है” |
| तरीका | कुछ राज्यों में कांग्रेस-विरोधी मोर्चा; अन्य राज्यों में सीटों का चुनावी तालमेल |
| ★★सैद्धांतिक तर्क | “कांग्रेस का शासन अलोकतांत्रिक और गरीब लोगों के हितों के खिलाफ़ है, इसलिए गैर-कांग्रेसी दलों का एक साथ आना जरूरी है, ताकि गरीबों के हक में लोकतंत्र को वापस लाया जा सके।” |
★महत्व: यह केवल चुनावी चाल नहीं थी — लोहिया ने इसे एक लोकतांत्रिक सिद्धांत के रूप में पेश किया। ! पर उसकी सीमा भी थी: 1971 का ‘ग्रैंड अलायंस’ इसी रणनीति का राष्ट्रीय रूप था और उसे 60 से कम सीटें मिलीं।
5 📄 ‘राजनीतिक भूकंप’(Political Earthquake)
📄 1967 के चुनाव-परिणामों को दी गई संज्ञा — “तत्कालीन अनेक राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने चुनाव परिणामों को ‘राजनीतिक भूकंप’ की संज्ञा दी।” (पृ. 78)
क्यों:
- कांग्रेस को लोकसभा में “जैसे-तैसे बहुमत”, पर मतों और सीटों में रिकॉर्ड गिरावट
- ! “इंदिरा गाँधी के मंत्रिमंडल के आधे मंत्री चुनाव हार गए थे”
- ★चार दिग्गजों की हार — कामराज, एस.के. पाटिल, अतुल्य घोष, के.बी. सहाय
- ★★नौ राज्यों में सत्ता से बाहर
भाग ख · 1967 से जन्मी दो परिघटनाएँ
6 📄 गठबंधन और ‘संयुक्त विधायक दल’(Coalition / Samyukta Vidhayak Dal)★
पाठ: “1967 के चुनावों से गठबंधन की परिघटना सामने आयी। …अनेक गैर-कांग्रेसी पार्टियों ने एकजुट होकर संयुक्त विधायक दल बनाया और गैर-कांग्रेसी सरकारों को समर्थन दिया। इसी कारण इन सरकारों को संयुक्त विधायक दल की सरकार कहा गया।” ★खासियत: “अधिकतर मामलों में ऐसी सरकार के घटक दल विचारधारा के लिहाज से एक-दूसरे से भिन्न थे।”
| उदाहरण | घटक |
|---|---|
| ★बिहार | एसएसपी + पीएसपी (समाजवादी) + वामपंथी सीपीआई + दक्षिणपंथी जनसंघ |
| पंजाब | ‘पॉपुलर यूनाइटेड फ्रंट’ — दोनों अकाली गुट (संत और मास्टर), सीपीआई, सीपीआई (एम), एसएसपी, रिपब्लिकन पार्टी, भारतीय जनसंघ |
7 📖 दल-बदल(Defection)★★
पाठ की परिभाषा: “कोई जनप्रतिनिधि किसी खास दल के चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव लड़े और जीत जाए और चुनाव जीतने के बाद इस दल को छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल हो जाए, तो इसे दल-बदल कहते हैं।” (पृ. 81)
असर: 1967 के बाद तीन राज्यों — हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश — में गैर-कांग्रेसी सरकारें बहाल करने में दल-बदल की अहम भूमिका रही। ★और अंत में: “बाद के समय में दल-बदल रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया।” ➕ वह संशोधन था — 52वाँ संविधान संशोधन, 1985, जिसने संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी।
8 📖 ‘आया राम-गया राम’★★
पाठ: “विधायकों द्वारा तुरंत-फुरंत पार्टी छोड़कर दूसरी-तीसरी पार्टी में शामिल होने की घटना से भारत के राजनीतिक शब्दकोश में यह जुमला दाखिल हुआ।”
| मद | विवरण |
|---|---|
| कौन | हरियाणा के विधायक गया लाल |
| ★क्या किया | “एक पखवाड़े के अंदर तीन दफा अपनी पार्टी बदली” — कांग्रेस → यूनाइटेड फ्रंट → कांग्रेस → और लौटने के 9 घंटों के अंदर फिर यूनाइटेड फ्रंट |
| ★★जुमला किसने गढ़ा | कांग्रेस नेता राव वीरेन्द्र सिंह ने चंडीगढ़ में प्रेस के सामने — “गया राम था अब आया राम है।” |
भाग ग · पार्टी के भीतर की लड़ाई
9 📖 ‘सिंडिकेट’(The Syndicate)★★
पाठ: “कांग्रेसी नेताओं के एक समूह को अनौपचारिक तौर पर ‘सिंडिकेट’ के नाम से इंगित किया जाता था। इस समूह के नेताओं का पार्टी के संगठन पर नियंत्रण था।” (पृ. 82)
| सदस्य | प्रांत |
|---|---|
| ★के. कामराज (अगुवा) | मद्रास प्रांत के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और फिर कांग्रेस अध्यक्ष |
| एस.के. पाटिल | बंबई सिटी (अब मुंबई) |
| एस. निजलिंगप्पा | मैसूर (अब कर्नाटक) |
| एन. संजीव रेड्डी | आंध्र प्रदेश |
| अतुल्य घोष | पश्चिम बंगाल |
भूमिका: ★“लालबहादुर शास्त्री और उसके बाद इंदिरा गाँधी, दोनों ही सिंडिकेट की सहायता से प्रधानमंत्री के पद पर आरूढ़ हुए थे।” ! अंत: “भारतीय राजनीति के ये बड़े और ताकतवर नेता 1971 के बाद प्रभावहीन हो गए।”
10 📄 ‘कामराज योजना’(Kamaraj Plan, 1963)★
📄 के. कामराज का 1963 का प्रस्ताव — “कि सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को इस्तीफा दे देना चाहिए, ताकि अपेक्षाकृत युवा पार्टी कार्यकर्ता कमान सँभाल सकें।”
11 📄 दस-सूत्री कार्यक्रम(Ten-Point Programme, मई 1967)★★
📄 कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा इंदिरा गाँधी के प्रभाव से अपनाया गया कार्यक्रम — जिससे उन्होंने सरकार की नीतियों को “वामपंथी रंग” दिया।
| # | प्रावधान |
|---|---|
| 1 | बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण |
| 2 | आम बीमा का राष्ट्रीयकरण |
| 3 | शहरी संपदा और आय का परिसीमन |
| 4 | खाद्यान्न का सरकारी वितरण |
| 5 | भूमि सुधार |
| 6 | ग्रामीण गरीबों को आवासीय भूखंड |
! “सिंडिकेट के नेताओं ने औपचारिक तौर पर… स्वीकृति दे दी, लेकिन इसे लेकर उनके मन में गहरे संदेह थे।”
12 📄 ‘व्हिप’ और ‘अंतरात्मा की आवाज़’★★
| पद | अर्थ | 1969 में कौन |
|---|---|---|
| 📄 ‘व्हिप’ | दल का वह आधिकारिक निर्देश कि सदस्य किस तरह मत दें | कांग्रेस अध्यक्ष एस. निजलिंगप्पा — “सभी कांग्रेसी सांसद और विधायक पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार संजीव रेड्डी को वोट डालें” |
| ★★📄 ‘अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट’ | यानी “कांग्रेस के सांसद और विधायक अपनी मनमर्ज़ी से किसी भी उम्मीदवार को वोट डाल सकते हैं” | प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी, जो परोक्ष रूप से वी.वी. गिरि का समर्थन कर रही थीं |
★यह टकराव ही 1969 की टूट का निर्णायक मोड़ था।
13 📄 कांग्रेस (ओ) और कांग्रेस (आर)★★
| दल | पूरा नाम | कौन | दूसरा नाम |
|---|---|---|---|
| कांग्रेस (ओ) | कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन) | सिंडिकेट की अगुवाई वाला खेमा | ★‘पुरानी कांग्रेस’ |
| कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (रिक्विजिनिस्ट) | इंदिरा गाँधी की अगुवाई वाला खेमा | ★‘नयी कांग्रेस’ |
★तरकीब: “O” से Old — यानी पुरानी। ! यह जोड़ी सबसे ज़्यादा उलटी याद रहती है। विभाजन का समय: नवंबर 1969 तक।
भाग घ · 1969 की नीतियाँ
14 📄 बैंकों का राष्ट्रीयकरण★
📄 “चौदह अग्रणी बैंकों के राष्ट्रीयकरण… जैसी कुछ बड़ी और जनप्रिय नीतियों की घोषणा” — 1969। ➕ 19 जुलाई 1969 के अध्यादेश से; हर बैंक की जमा ₹50 करोड़ से अधिक; इन 14 बैंकों के पास देश की कुल बैंक-जमा का लगभग 85 प्रतिशत था। ! ➕ सर्वोच्च न्यायालय ने फरवरी 1970 में उस अध्यादेश को अवैध ठहराया, पर राष्ट्रीयकरण अंततः कायम रहा।
15 📖 ‘प्रिवी पर्स’(Privy Purse)★★
पाठ: देसी रियासतों के विलय से पहले सरकार ने आश्वासन दिया था कि शासक परिवार को निश्चित मात्रा में निजी संपदा रखने का अधिकार होगा और कुछ विशेष भत्ते दिए जाएँगे। दोनों “जिस राज्य का विलय किया जाना है उसका विस्तार, राजस्व और क्षमता कितनी है” — इसी आधार पर तय होते। “इस व्यवस्था को ‘प्रिवी पर्स’ कहा गया।”
| पक्ष | तर्क |
|---|---|
| ! विरोध में | ★“ये वंशानुगत विशेषाधिकार भारतीय संविधान में वर्णित समानता और सामाजिक-आर्थिक न्याय के सिद्धांतों से मेल नहीं खाते थे”; नेहरू ने भी असंतोष जताया था |
| ! समर्थन में | मोरारजी देसाई इसकी समाप्ति को नैतिक रूप से गलत मानते थे — “यह ‘रियासतों के साथ विश्वासघात’ के बराबर होगा” |
समाप्ति का रास्ता: 1970 में संविधान संशोधन राज्यसभा में विफल → अध्यादेश सर्वोच्च न्यायालय ने निरस्त किया → ★★1971 की भारी जीत के बाद संविधान संशोधन से कानूनी अड़चनें खत्म हुईं। ➕ वह संशोधन था — 26वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1971।
भाग ङ · 1971 के पद
16 📄 ‘ग्रैंड अलायंस’(Grand Alliance)★
📄 1971 के चुनाव के लिए बना “गैर-साम्यवादी और गैर-कांग्रेसी विपक्षी पार्टियों” का चुनावी गठबंधन।
| घटक | शासक दल का गठजोड़ |
|---|---|
| संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी) · प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) · भारतीय जनसंघ (बीजेएस) · स्वतंत्र पार्टी · भारतीय क्रांतिदल | कांग्रेस (आर) + भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) |
!★इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी: “‘ग्रैंड अलायंस’ के पास कोई सुसंगत राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था।” परिणाम — 60 से भी कम सीटें।
17 📄 ‘गरीबी हटाओ’★★
📄 इंदिरा गाँधी का 1971 का चुनावी नारा और उससे जुड़ा कार्यक्रम।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कार्यक्रम | सार्वजनिक क्षेत्र की संवृद्धि · ग्रामीण भू-स्वामित्व और शहरी संपदा का परिसीमन · आय और अवसरों की असमानता की समाप्ति · ‘प्रिवी पर्स’ की समाप्ति |
| ★लक्ष्य-वर्ग | भूमिहीन किसान · दलित और आदिवासी · अल्पसंख्यक · महिलाएँ · बेरोज़गार नौजवान |
| ★★उद्देश्य | ”…इंदिरा गाँधी की राजनीतिक रणनीति थी। इसके सहारे वे अपने लिए देशव्यापी राजनीतिक समर्थन की बुनियाद तैयार करना चाहती थीं।” |
! पाठ का अपना प्रश्न: “क्या यह नारा महज चुनावी छलावा था?” — इसका संतुलित उत्तर संवर्धन दस्तावेज़ §10 में है।
18 📄 ‘इंदिरा हटाओ’
📄 विपक्षी ‘ग्रैंड अलायंस’ का नारा। ★इंदिरा गाँधी ने इसी को अपने पक्ष में मोड़ा — “विपक्षी गठबंधन के पास बस एक ही कार्यक्रम है : इंदिरा हटाओ।”
भाग च · व्यक्ति और संस्थाएँ
| नाम | परिचय |
|---|---|
| ★लालबहादुर शास्त्री (1904–1966) | भारत के दूसरे प्रधानमंत्री; 1930 से स्वतंत्रता आंदोलन में; उ.प्र. मंत्रिमंडल में मंत्री; कांग्रेस के महासचिव; 1951–56 और 1957–64 में केंद्रीय मंत्री; ★रेल-दुर्घटना की नैतिक जिम्मेवारी लेकर रेलमंत्री पद से इस्तीफ़ा; ‘जय जवान-जय किसान’; निधन 11 जनवरी 1966, ताशकंद |
| ★★इंदिरा गाँधी (1917–1984) | 1966–1977 और 1980–1984 तक प्रधानमंत्री; 1959 में कांग्रेस अध्यक्ष; 1964–66 में शास्त्री मंत्रिमंडल में मंत्री; 1967, 1971 और 1980 के आम चुनावों में विजय; ‘गरीबी हटाओ’; प्रिवी पर्स की समाप्ति, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, आण्विक-परीक्षण, पर्यावरण-संरक्षण; नेहरू की पुत्री; ! 31 अक्तूबर 1984 को हत्या |
| मोरारजी देसाई | बंबई प्रांत के मुख्यमंत्री रह चुके; 1966 में इंदिरा गाँधी से पराजित; बाद में उपप्रधानमंत्री और वित्तमंत्री; ! 1969 में बैंक-राष्ट्रीयकरण और प्रिवी पर्स पर मतभेद के कारण सरकार से बाहर |
| ★के. कामराज (1903–1975) | स्वतंत्रता-सेनानी; मद्रास के मुख्यमंत्री; ★शिक्षा का प्रसार और ‘दोपहर का भोजन’ योजना; ‘कामराज योजना’ (1963); कांग्रेस अध्यक्ष; सिंडिकेट के अगुवा |
| एस. निजलिंगप्पा (1902–2000) | संविधान सभा के सदस्य; मैसूर के मुख्यमंत्री; आधुनिक कर्नाटक के निर्माता; ★1968–71 में कांग्रेस अध्यक्ष — जिन्होंने इंदिरा गाँधी को निष्कासित किया |
| वी.वी. गिरि (1894–1980) | आंध्र प्रदेश के मज़दूर नेता; सिलोन में भारतीय उच्चायुक्त; केंद्रीय श्रम मंत्री; उ.प्र., केरल और मैसूर के राज्यपाल; उपराष्ट्रपति 1967–69; ★1969–1974 तक राष्ट्रपति — स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में विजयी |
| एन. संजीव रेड्डी | तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष; सिंडिकेट के सदस्य; ! 1969 में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार होकर भी हारे |
| ज़ाकिर हुसैन | तत्कालीन राष्ट्रपति, जिनकी मृत्यु से 1969 में पद खाली हुआ |
| ★राममनोहर लोहिया (1910–1967) | समाजवादी नेता एवं विचारक; ‘मैनकाइंड’ और ‘जन’ के संस्थापक संपादक; गैर-यूरोपीय समाजवादी सिद्धांत में मौलिक योगदान; ★★गैर-कांग्रेसवाद के रणनीतिकार; पिछड़े वर्गों को आरक्षण की वकालत; अंग्रेजी का विरोध |
| ★सी. नटराजन अन्नादुरई (1909–1969) | 1967 से मद्रास के मुख्यमंत्री; पत्रकार, लेखक एवं वक्ता; जस्टिस पार्टी से संबद्ध, फिर द्रविड़ कषगम (1934); ★1949 में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम का गठन; हिंदी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व; राज्यों की व्यापक स्वायत्तता के समर्थक |
| कर्पूरी ठाकुर (1924–1988) | बिहार के मुख्यमंत्री (दिसंबर 1970–जून 1971 और जून 1977–अप्रैल 1979); स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी नेता; लोहिया के प्रबल समर्थक; जेपी के आंदोलन में भागीदारी; ★बिहार में पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू करने वाले; अंग्रेज़ी के प्रबल विरोधी |
| मोहनलाल सुखाड़िया | राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री — देवीसर गाँव की चुनाव-कथा में उल्लिखित |
| गया लाल | हरियाणा के विधायक — ‘आया राम-गया राम’ के स्रोत |
| राव वीरेन्द्र सिंह | कांग्रेस नेता जिन्होंने चंडीगढ़ में कहा — “गया राम था अब आया राम है” |
| डी.एम.के. (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) | ★★1967 में मद्रास में पूर्ण बहुमत पाने वाली क्षेत्रीय पार्टी — “चुनावी इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी गैर-कांग्रेसी दल को किसी राज्य में पूर्ण बहुमत मिला” |
भाग छ · ➕ संवर्धन-पद(पाठ से बाहर, पर उपयोगी)
| ➕ पद | अर्थ | अध्याय से कड़ी |
|---|---|---|
| ➕ दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) | संविधान की वह अनुसूची जो दल-बदल पर अयोग्यता का प्रावधान करती है; 52वें संविधान संशोधन, 1985 से जोड़ी गई | ★पाठ का वह वाक्य — “बाद के समय में दल-बदल रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया” |
| ➕ 26वाँ संविधान संशोधन, 1971 | प्रिवी पर्स, शासकों की मान्यता और सभी विशेषाधिकार समाप्त करने वाला संशोधन | प्रिवी पर्स-बॉक्स का अंतिम चरण |
| ➕ मध्यावधि चुनाव (Mid-term Election) | निर्धारित पाँच वर्ष से पहले लोकसभा भंग करके कराया गया चुनाव | ★1971 के चुनाव — दिसंबर 1970 में लोकसभा भंग हुई (लक्ष्मण के कार्टून में “MID-TERM RACE”) |
| ➕ त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) | जहाँ किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले | पाठ का हाशिया-प्रश्न (पृ. 80) |
| ➕ राष्ट्रपति शासन | अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में केंद्रीय शासन | “उन्हें… अथवा राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा” (पृ. 81) |
| ➕ एकल संक्रमणीय मत / वरीयता-क्रम | राष्ट्रपति-चुनाव की वह प्रणाली जिसमें मतदाता 1, 2, 3… की वरीयता देते हैं | ★★1969 में गिरि द्वितीय-वरीयता मतों से जीते — भारत का एकमात्र ऐसा राष्ट्रपति चुनाव |
| ➕ भू-परिसीमन (Land Ceiling) | कोई व्यक्ति अधिकतम कितनी भूमि रख सकता है, इसकी कानूनी सीमा | “उन्होंने भू-परिसीमन के कुछ और कानून भी बनवाए” (पृ. 86) |
भाग ज · ⚡ त्वरित पुनरावृत्ति — पंद्रह पद, पंद्रह पंक्तियाँ
| # | पद | एक पंक्ति |
|---|---|---|
| 1 | कांग्रेस प्रणाली | एक दल का प्रभुत्व, पर प्रतिस्पर्धा दल के भीतर |
| 2 | ‘खतरनाक दशक’ | गरीबी · गैर-बराबरी · सांप्रदायिक और क्षेत्रीय विभाजन |
| 3 | 1964 का उत्तराधिकार | कामराज का सलाह-मशविरा → शास्त्री निर्विरोध |
| 4 | 1966 का उत्तराधिकार | गुप्त मतदान → इंदिरा गाँधी, दो-तिहाई से अधिक मत |
| 5 | ‘राजनीतिक भूकंप’ | 1967 के चुनाव-परिणाम |
| 6 | गैर-कांग्रेसवाद | ★लोहिया का नामकरण — “गरीबों के हक में लोकतंत्र वापस लाने” के लिए |
| 7 | संयुक्त विधायक दल | 1967 के बाद की गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकारें |
| 8 | दल-बदल | जिस चिह्न से जीते, उसी दल को छोड़ देना |
| 9 | ‘आया राम-गया राम’ | गया लाल — एक पखवाड़े में तीन बार |
| 10 | सिंडिकेट | कामराज, पाटिल, निजलिंगप्पा, संजीव रेड्डी, अतुल्य घोष |
| 11 | दस-सूत्री कार्यक्रम | मई 1967 — नीतियों को “वामपंथी रंग” |
| 12 | ‘अंतरात्मा की आवाज़’ | ★★1969 के राष्ट्रपति चुनाव का निर्णायक दाँव |
| 13 | कांग्रेस (ओ) / (आर) | पुरानी (सिंडिकेट) / नयी (इंदिरा गाँधी) |
| 14 | प्रिवी पर्स | रियासतों के शासकों को मिले वंशानुगत विशेषाधिकार — 1971 के बाद समाप्त |
| 15 | ‘गरीबी हटाओ’ | ★★375 सीटें और 48.4% वोट — कांग्रेस का पुनर्स्थापन |