व्यवस्था: पहले मूल धारणाएँ, फिर सम्मेलन और संधियाँ, फिर वैश्विक संपदा, फिर आंदोलन, फिर भू-राजनीति, फिर मूलवासी, और अंत में भ्रम-युग्मों की सूची। ★= अवश्य याद रखने योग्य · ! = यहीं भूल होती है पाठ्यपुस्तक के शब्द उद्धरण-चिह्नों में दिए गए हैं।
भाग 1 — मूल धारणाएँ
| पद | English | अर्थ |
|---|---|---|
| ★★साझी संपदा | Common property resources | दो अर्थों में प्रयुक्त — (1) “जिन पर किसी एक का नहीं बल्कि पूरे समुदाय का अधिकार होता है” (पृ. 84); (2) “ऐसी संपदा जिस पर किसी समूह के प्रत्येक सदस्य का स्वामित्व हो” (पृ. 87)। उदाहरण — संयुक्त परिवार का चूल्हा, चारागाह, मैदान, कुआँ, नदी |
| ★★वैश्विक संपदा / मानवता की साझी विरासत | Global commons / Common heritage of mankind | “विश्व के कुछ हिस्से और क्षेत्र किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन साझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है।” ★चार — पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष |
| ★★साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ | Common but differentiated responsibilities (CBDR) | “पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है। इसे देखते हुए विभिन्न राज्यों की ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ होंगी।” 1992 के पृथ्वी सम्मेलन में स्वीकृत |
| ★टिकाऊ विकास | Sustainable development | “आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा होना चाहिए कि इससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे।” ! समस्या — “‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा” |
| ★ऐतिहासिक उत्तरदायित्व | Historical responsibility | भारत का मुख्य तर्क — “ग्रीनहाऊस गैसों के रिसाव की ऐतिहासिक और मौजूदा जवाबदेही ज्यादातर विकसित देशों की है।” |
| ★ग्रीन हाऊस गैसें | Greenhouse gases | कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रो-फ्लोरो कार्बन — “इनकी वैश्विक तापवृद्धि में कोई-न-कोई भूमिका ज़रूर है” |
| ★वैश्विक तापवृद्धि | Global warming | “विश्व का तापमान बढ़ता है और धरती के जीवन के लिए यह बात बड़ी प्रलयंकारी साबित होगी” |
| ★ओज़ोन परत में छेद | Ozone hole | “धरती के ऊपरी वायुमंडल में ओज़ोन गैस की मात्रा में लगातार कमी” → पारिस्थितिकी तंत्र और मनुष्य के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा; 1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिका के ऊपर खोज |
| ★जैव-विविधता | Biodiversity | “धरती की जैव-विविधता का भंडार” वनों में; हानि का कारण — “उन पर्यावासों का विध्वंस जो जैव-प्रजातियों के मामले में समृद्ध हैं” |
भाग 2 — सम्मेलन, रिपोर्टें और संधियाँ
| पद | वर्ष | अर्थ |
|---|---|---|
| ★क्लब ऑव रोम | 1972 | “वैश्विक मामलों से सरोकार रखने वाला एक विद्वत् समूह” — जिसने ‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ प्रकाशित की |
| ★लिमिट्स टू ग्रोथ | 1972 | “दुनिया की बढ़ती जनसंख्या के आलोक में प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के अंदेशे को बड़ी खूबी से बताती है” |
| UNEP | — | संयुक्त राष्ट्रसंघ पर्यावरण कार्यक्रम — “पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं पर सम्मेलन कराये और अध्ययन को बढ़ावा दिया” |
| ★बर्टलैंड रिपोर्ट — ‘अवर कॉमन फ्यूचर’ | 1987 | “आर्थिक विकास के चालू तौर-तरीके आगे चलकर टिकाऊ साबित नहीं होंगे।” पृथ्वी सम्मेलन से पाँच साल पहले |
| ★★पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit) | 1992 | रियो डी जनेरियो, ब्राज़ील; संयुक्त राष्ट्रसंघ का; 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय निगम |
| ★अजेंडा-21 | 1992 | “विकास के कुछ तौर-तरीके”; ! आलोचना — “झुकाव पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है” |
| ★रियो-घोषणापत्र | 1992 | जिसमें ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत औपचारिक रूप से दर्ज़ है |
| ★UNFCCC | 1992 | यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कंवेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज — “जलवायु के परिवर्तन से संबंधित संयुक्त राष्ट्रसंघ का नियमाचार”; देश “अपनी क्षमता के अनुरूप, पर्यावरण के अपक्षय में अपनी हिस्सेदारी के आधार पर” प्रयास करेंगे |
| ★★क्योटो प्रोटोकॉल | 1997 | “जापान के क्योटो में 1997 में इस प्रोटोकॉल पर सहमति बनी”; “औद्योगिक देशों के लिए ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य निर्धारित”; ★चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को बाध्यताओं से अलग रखा गया |
| ★★भारत और क्योटो | 2002 | “भारत ने 2002 में क्योटो प्रोटोकॉल (1997) पर हस्ताक्षर किए और इसका अनुमोदन किया।” |
| ★★पेरिस जलवायु समझौता | 2016 (भारत का अनुमोदन) | “भारत ने 2 अक्तूबर 2016 को पेरिस जलवायु समझौते को अनुमोदित किया।” |
| ★अंटार्कटिका संधि | 1959 | वैश्विक संपदा की सुरक्षा का पहला बड़ा समझौता |
| ★मॉन्ट्रियल न्यायाचार | 1987 | ओज़ोन-संबंधी न्यायाचार (प्रोटोकॉल) |
| ★अंटार्कटिका पर्यावरणीय न्यायाचार | 1991 | अंटार्कटिका के पर्यावरण-संरक्षण के लिए |
| ★ग्रुप-8 की बैठक | जून 2005 | जहाँ भारत ने ध्यान दिलाया कि “विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दर विकसित देशों की तुलना में नाममात्र है” |
| ★1997 का पुनरावलोकन | 1997 | भारत द्वारा रियो-समझौतों के क्रियान्वयन की समीक्षा — निष्कर्ष: “कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है” |
भाग 3 — वैश्विक संपदा और अंटार्कटिका
| पद | अर्थ |
|---|---|
| ★★चार वैश्विक संपदाएँ | पृथ्वी का वायुमंडल · अंटार्कटिका · समुद्री सतह · बाहरी अंतरिक्ष |
| ! ‘टेढ़ी खीर’ | “‘वैश्विक संपदा’ की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है।” |
| ! अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्य | “पारिस्थितिकी से जुड़े हर मसले के साथ एक बड़ी समस्या यह जुड़ी है कि अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्यों और समय-सीमा को लेकर मतभेद पैदा होते हैं।” |
| ★क्रिल मछली | “समुद्री आहार शृंखला की धुरी है और जिस पर दूसरे जानवरों का आहार निर्भर है” |
| ★हिमानी परत | “ग्रीन हाऊस गैस के जमाव का महत्त्वपूर्ण सूचना-स्रोत… लाखों बरस पहले के वायुमंडलीय तापमान का पता किया जा सकता है” |
| ★अंटार्कटिका के सात दावेदार | ब्रिटेन, अर्जेन्टीना, चिले, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड — “संप्रभु अधिकार का वैधानिक दावा” |
| ★अंटार्कटिका के आँकड़े | 1 करोड़ 40 लाख वर्ग किमी · निर्जन क्षेत्र का 26% · स्थलीय हिम का 90% · धरती के स्वच्छ जल का 70% · समुद्र में 3 करोड़ 60 लाख वर्ग किमी अतिरिक्त विस्तार |
| ★★अंतर-पीढ़ीगत असमानता | “बाहरी अंतरिक्ष में जो दोहन-कार्य हो रहे हैं उनके फायदे न तो मौजूदा पीढ़ी में सबके लिए बराबर हैं और न आगे की पीढ़ियों के लिए।” |
भाग 4 — साझी संपदा और देवस्थान
| पद | अर्थ |
|---|---|
| ★समान अधिकार, समान उत्तरदायित्व | “ऐसे संसाधन की प्रकृति, उपयोग के स्तर और रख-रखाव के संदर्भ में समूह के हर सदस्य को समान अधिकार प्राप्त होंगे और समान उत्तरदायित्व निभाने होंगे।” |
| !★साझी संपदा के सिकुड़ने के चार कारण | निजीकरण · गहनतर खेती · आबादी की वृद्धि · पारिस्थितिकी तंत्र की गिरावट |
| ★पावन वन-प्रांत / देवस्थान | Sacred groves — “इस प्रथा में वनों के कुछ हिस्सों को काटा नहीं जाता। इन स्थानों पर देवता अथवा किसी पुण्यात्मा का वास माना जाता है।” |
| ★देवस्थान के क्षेत्रीय नाम | राजस्थान — वानी, केंकड़ी, ओरान · झारखंड — जहेरा थान, सरना · मेघालय — लिंगदोह · केरल — काव · उत्तराखंड — थान, देवभूमि · महाराष्ट्र — देव रहतिस |
| ★★देवस्थान का मूल सिद्धांत | “संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी जिसने इतने युगों से वनों को बचाए रखने की प्रतिबद्धता कायम रखी।” |
| ! कानूनी बनाम व्यावहारिक नियंत्रण | “कानूनी स्वामित्व राज्य का हो और व्यावहारिक नियंत्रण समुदाय के हाथ में। इन दोनों के नीतिगत मानक अलग-अलग हैं।” |
भाग 5 — भारत का पक्ष
| पद | अर्थ |
|---|---|
| ★प्रति व्यक्ति उत्सर्जन | विश्व औसत (2000) — 3.8 टन · भारत (2000) — 0.9 टन · भारत (2030 अनुमान) — 1.6 टन |
| ★नेशनल ऑटो-फ्यूल पॉलिसी | “वाहनों के लिए स्वच्छतर ईंधन अनिवार्य कर दिया है” |
| ★ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम, 2001 | “ऊर्जा के ज्यादा कारगर इस्तेमाल की पहलकदमी” |
| ★बिजली अधिनियम, 2003 | “नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा” |
| ★बायोडीजल राष्ट्रीय मिशन | “2011-12 तक बायोडीजल तैयार होने लगेगा और इसमें 1 करोड़ 10 लाख हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल होगा” |
| ★दक्षेस (SAARC) पर भारत का विचार | “दक्षेस में शामिल देश पर्यावरण के प्रमुख वैश्विक मसलों पर एक समान राय बनायें ताकि इस क्षेत्र की आवाज़ वज़नी हो सके” |
भाग 6 — पर्यावरण आंदोलन
| पद | अर्थ |
|---|---|
| ★आंदोलनों की विविधता | “मौजूदा पर्यावरण आंदोलनों की एक मुख्य विशेषता उनकी विविधता है।” |
| ★★सामाजिक चेतना और नयी राजनीति | “सामाजिक चेतना के दायरे में ही राजनीतिक कार्रवाई के नये रूप जन्म लेते हैं या उन्हें खोजा जाता है।” |
| ★वन-आंदोलन के देश | मैक्सिको, चिले, ब्राज़ील, मलेशिया, इंडोनेशिया, महादेशीय अफ्रीका और भारत |
| ★खनिज-उद्योग के पाँच नुकसान | संसाधनों का दोहन · रसायनों का भरपूर उपयोग · भूमि और जलमार्गों का प्रदूषण · स्थानीय वनस्पतियों का विनाश · जन-समुदायों का विस्थापन |
| ★वेस्टर्न माइनिंग कारपोरेशन | ऑस्ट्रेलियाई बहुराष्ट्रीय कंपनी, जिसके विरुद्ध फिलीपीन्स में अभियान चला — ★“इस कंपनी का विरोध खुद इसके स्वदेश यानी ऑस्ट्रेलिया में हुआ” |
| ★★फ्रैंकलिन नदी आंदोलन | “1980 के दशक के शुरुआती और मध्यवर्ती वर्षों में विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन दक्षिणी गोलार्द्ध में चला। आस्ट्रेलिया में चला यह आंदोलन फ्रैंकलिन नदी तथा इसके परिवर्ती वन को बचाने का आंदोलन था।” |
| ★★नर्मदा आंदोलन | “भारत में बाँध-विरोधी और नदी हितैषी कुछ अग्रणी आंदोलन चल रहे हैं। इन आंदोलनों में नर्मदा आंदोलन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।” |
| ★★अहिंसा की साझी विशेषता | “भारत में बाँध विरोधी तथा पर्यावरण-बचाव के अन्य आंदोलन एक अर्थ में समानधर्मी हैं क्योंकि ये अहिंसा पर आधारित हैं।” |
| ★विजनपन | Wilderness — निर्जन, अछूता प्रकृति-क्षेत्र; यह दृष्टिकोण ऑस्ट्रेलिया, स्कैंडिनेविया, उत्तरी अमरीका और न्यूजीलैंड में हावी है |
| ★★उत्तरी वन-दृष्टि | “वन जनविहीन हैं… वनभूमि को निर्जन भूमि का दर्जा दिया गया है”; ! “यह दृष्टिकोण मनुष्य को प्रकृति का हिस्सा नहीं मानता” |
| ★★दक्षिणी वन-दृष्टि | “दक्षिणी देशों में पर्यावरण के अधिकांश मसले इस मान्यता पर आधारित हैं कि लोग वनों में भी रहते हैं।” |
| WWF | वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड — “इनमें से अनेक अभियानों की शुरुआत और वित्तीय मदद… ने की” |
भाग 7 — संसाधनों की भू-राजनीति
| पद | अर्थ |
|---|---|
| ★★संसाधनों की भू-राजनीति | “‘किसे, क्या, कब, कहाँ और कैसे हासिल होता है’ — ‘संसाधनों की भू-राजनीति’ इन्हीं सवालों से जूझती है।” |
| ★इमारती लकड़ी | “समुद्री नौवहन स्वयं इमारती लकड़ियों पर आधारित था इसलिए… 17वीं सदी से बाद के समय में प्रमुख यूरोपीय शक्तियों की प्राथमिकताओं में रही” |
| ★शीतयुद्ध के चार कदम | सेना की तैनाती · संसाधनों का भंडारण · मनपसंद सरकारों की बहाली · बहुराष्ट्रीय निगमों और हितसाधक समझौतों को समर्थन |
| ★★तेल के चार आँकड़े | खाड़ी का उत्पादन में हिस्सा 30% · ज्ञात भंडार में हिस्सा 64% · सऊदी अरब कुल भंडार का एक चौथाई और सबसे बड़ा उत्पादक · इराक का भंडार 112 अरब बैरल से ज्यादा का अनुमान |
| ★95 फीसदी | “दुनिया को परिवहन के लिए जितनी ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है उसका 95 फीसदी पेट्रोलियम से ही पूरा होता है” |
| ★पेट्रोलियम का इतिहास | “पेट्रोलियम का इतिहास युद्ध और संघर्षों का भी इतिहास है।” |
| ★★जलयुद्ध | Water wars — “साझे जल-संसाधन को लेकर पैदा मतभेद 21वीं सदी में फसाद की जड़ साबित हों… इसी को इंगित करने के लिए विश्व-राजनीति के कुछ विद्वानों ने ‘जलयुद्ध’ शब्द गढ़ा है” |
| ★जल-विवाद का ढाँचा | “जलधारा के उद्गम से दूर बसा हुआ देश उद्गम के नजदीक बसे हुए देश द्वारा इस पर बाँध बनाने, अत्यधिक सिंचाई करने या इसे प्रदूषित करने पर आपत्ति जताता है” |
| ★दो जल-संघर्ष | इज़रायल, सीरिया और जार्डन (1950-60 का दशक; जॉर्डन और यारमुक नदी) · तुर्की, सीरिया और इराक (फरात नदी) |
| नव-उपनिवेशवाद | कार्टून का शीर्षक (पृ. 93) — “हमने तुम्हारे देश को मटियामेट कर दिया है। अब उसके पुनर्निर्माण का खर्चा दो।” / “हम भुगतान के रूप में पेट्रोलियम जैसे प्राकृतिक संसाधन स्वीकार करते हैं।” |
भाग 8 — मूलवासी
| पद | अर्थ |
|---|---|
| ★★मूलवासी | Indigenous people — UN की 1982 की परिभाषा: “ऐसे लोगों का वंशज जो किसी मौजूदा देश में बहुत दिनों से रहते चले आ रहे थे। फिर किसी दूसरी संस्कृति या जातीय मूल के लोग विश्व के दूसरे हिस्से से उस देश में आये और इन लोगों को अधीन बना लिया।” |
| ★मूलवासियों की पसंद | “आज भी उस देश की संस्थाओं के अनुरूप आचरण करने से ज्यादा अपनी परंपरा, सांस्कृतिक रिवाज तथा अपने ख़ास सामाजिक, आर्थिक ढर्रे पर जीवन-यापन करना पसंद करते हैं” |
| ★★मूलवासियों का जुमला | “अपने मूल वासस्थान पर हक की दावेदारी में विश्वभर के मूलनिवासी यह जुमला इस्तेमाल करते हैं कि हम यहाँ ‘अनंत काल से रहते चले आ रहे हैं’।” |
| ★साझी विश्वदृष्टि | “भौगोलिक रूप से चाहे मूलवासी अलग-अलग जगहों पर कायम हैं लेकिन जमीन और उस पर आधारित विभिन्न जीवन-प्रणालियों के बारे में इनकी विश्वदृष्टि आश्चर्यजनक रूप से एक जैसी है।” |
| ★★भूमि की हानि | “भूमि की हानि का अर्थ है, आर्थिक-संसाधनों के एक आधार की हानि… उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?” |
| ★अनुसूचित जनजाति / आदिवासी | भारत में मूलवासियों के लिए प्रयुक्त शब्द — कुल जनसंख्या का आठ प्रतिशत |
| ★★विकास की कीमत | “ऐसी परियोजनाओं से विस्थापित होने वालों में यह समुदाय सबसे बड़ा है। दरअसल इन लोगों ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।” |
| ★वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इंडिजिनस पीपल | 1975 में गठन; UN में परामर्शदायी परिषद् का दर्ज़ा — और 10 अन्य स्वयंसेवी संगठनों को भी |
भाग 9 — भ्रम-युग्म : यहीं गलती होती हैध्यान
| युग्म | कैसे अलग पहचानें |
|---|---|
| ★★साझी संपदा बनाम वैश्विक संपदा | “चारागाह किसका है?” → गाँव का = साझी संपदा। “अंटार्कटिका किसका है?” → किसी का नहीं = वैश्विक संपदा। |
| ★★1992 बनाम 1997 बनाम 2002 | पृथ्वी सम्मेलन + UNFCCC बनाम क्योटो प्रोटोकॉल बनाम भारत का हस्ताक्षर और अनुमोदन |
| ★UNFCCC बनाम क्योटो प्रोटोकॉल | UNFCCC = सिद्धांतों की रूपरेखा (1992); क्योटो = उन्हीं सिद्धांतों के आलोक में बना समझौता (1997) |
| ★बर्टलैंड रिपोर्ट बनाम लिमिट्स टू ग्रोथ | ‘अवर कॉमन फ्यूचर’, 1987 — टिकाऊ विकास की चेतावनी बनाम ‘क्लब ऑव रोम’, 1972 — संसाधनों के विनाश का अंदेशा |
| ★अंटार्कटिका संधि बनाम पर्यावरणीय न्यायाचार | 1959 बनाम 1991 |
| ★1987 के दो पड़ाव | मॉन्ट्रियल न्यायाचार (ओज़ोन) और बर्टलैंड रिपोर्ट (टिकाऊ विकास) — दोनों 1987 के हैं |
| ★★26% बनाम 90% बनाम 70% | 26% = विश्व का निर्जन क्षेत्र · 90% = स्थलीय हिम · 70% = धरती का स्वच्छ जल |
| ★★30% बनाम 64% | 30% = खाड़ी का तेल-उत्पादन में हिस्सा · 64% = ज्ञात तेल-भंडार में हिस्सा |
| ★सऊदी अरब बनाम इराक | सऊदी — कुल भंडार का एक चौथाई और सबसे बड़ा उत्पादक · इराक — ज्ञात भंडार में दूसरा; 112 अरब बैरल से ज्यादा का अनुमान |
| ★★3.8 बनाम 0.9 बनाम 1.6 टन | विश्व औसत (2000) बनाम भारत (2000) बनाम भारत (2030 अनुमान) |
| ★★उत्तरी बनाम दक्षिणी अजेंडा | उत्तर — ओज़ोन छेद और तापवृद्धि बनाम दक्षिण — आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबंधन का रिश्ता |
| ★★उत्तरी बनाम दक्षिणी वन-दृष्टि | उत्तर — वन ‘निर्जन प्रांत’; “मनुष्य प्रकृति का हिस्सा नहीं” बनाम दक्षिण — “लोग वनों में भी रहते हैं” |
| ★फ्रैंकलिन बनाम नर्मदा | फ्रैंकलिन (ऑस्ट्रेलिया) = विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन · नर्मदा = भारत का सबसे प्रसिद्ध |
| ! 30 करोड़ बनाम 8 प्रतिशत | विश्व भर में मूलवासियों की कुल संख्या बनाम भारत की जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों का हिस्सा |
| ! मूलवासी बनाम शरणार्थी/विस्थापित | मूलवासी अपनी ही भूमि पर हैं — वे न शरणार्थी हैं, न स्वेच्छा से आए आप्रवासी। (अध्याय 5 के पदों से मिलाइए मत।) |
| ! ‘अध्याय सात’ का संदर्भ | ! पृ. 82 का यह संदर्भ अब अध्याय 5 की ओर इशारा करता है, अध्याय 7 की ओर नहीं |
भाग 10 — याद रखने के सूत्र
| सूत्र | क्या याद रहेगा |
|---|---|
| “जवाब ताकत से तय होते हैं” | पूरे अध्याय की धुरी |
| “निर्जन कम, बर्फ सबसे ज्यादा, पानी बीच में” | 26% · 90% · 70% (अंटार्कटिका) |
| “आज कम निकालते हैं, कल सबसे ज्यादा उन्हीं के पास” | 30% उत्पादन बनाम 64% भंडार |
| “सिद्धांत 92, समझौता 97, भारत 2002” | UNFCCC · क्योटो · भारत का अनुमोदन |
| “गाँव का चारागाह बनाम किसी का नहीं अंटार्कटिका” | साझी संपदा बनाम वैश्विक संपदा |
| “वायु–बर्फ–समुद्र–अंतरिक्ष” | चार वैश्विक संपदाएँ |
| “उत्तर कहता है वन खाली हैं, दक्षिण कहता है वहाँ लोग हैं” | दोनों वन-दृष्टियाँ |
| “श्रद्धा ने बचाया, कमी ने नहीं” | देवस्थान का कुंजी-वाक्य |
| “0.9 बनाम 3.8” | भारत का पूरा जलवायु-तर्क |
| “सबसे बड़ी कीमत उन्होंने चुकायी जिनकी आवाज़ सबसे कम है” | मूलवासी-खंड का निष्कर्ष |