Chapter 3नियोजित विकास की राजनीति

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चिह्न: 📖 = पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट रूप से परिभाषित · 📄 = पाठ में प्रयुक्त, परिभाषा निहित · ➕ = पाठ से बाहर, समझ के लिए जोड़ा गया (संवर्धन)


भाग क · अध्याय के केंद्रीय पद

1 📖 विकास(Development)

पाठ का कथन: “विकास शब्द बड़ा व्यापक है। इस शब्द के भीतर आमतौर पर आधुनिक होने, तेज़ आर्थिक संवृद्धि हासिल करने तथा लोकतांत्रिक और अधिकार-आधारित समाज बनाने की आकांक्षा शामिल है।”

★★अध्याय की सबसे बड़ी सीख: विकास का अर्थ सबके लिए एक नहीं होता। एक उद्योगपति के लिए विकास का अर्थ है कारखाना; एक शहरी उपभोक्ता के लिए सस्ता सामान; एक आदिवासी के लिए विकास का अर्थ हो सकता है अपनी ज़मीन और जंगल का बचा रहना। ! इसीलिए विकास तकनीकी नहीं, राजनीतिक सवाल है।


2 📖 आधुनिकीकरण(Modernisation)

पाठ का कथन: “आधुनिकता का एक अर्थ पश्चिमीकरण भी लगाया गया।” — आज़ादी के बाद इसे पश्चिमी देशों जैसा औद्योगिक, नगरीय और वैज्ञानिक समाज बनने के अर्थ में लिया गया।

! आलोचना: आधुनिकीकरण का यह अर्थ पश्चिम की नकल मान लेता है और अपनी परंपरा, कृषि और गाँव को पिछड़ा मान बैठता है। ★कुमारप्पा और गांधीवादी धारा ने ठीक इसी का विरोध किया।


3 📖 नियोजन / योजना(Planning)

📄 अर्थ: सीमित संसाधनों को कहाँ, कितना और किस प्राथमिकता से लगाना है — यह पहले से तय करना, ताकि विकास अपने-आप बाज़ार के भरोसे न छूटे।

भारत में इसका औज़ार बनी — पंचवर्षीय योजना। ★तीन कारण जिनसे उस दौर में नियोजन पर व्यापक भरोसा था:

  1. सोवियत संघ का नियोजन से तेज़ औद्योगीकरण
  2. 1929 की महामंदी के बाद पश्चिम में भी राज्य की भूमिका का बढ़ना
  3. जापान और फ़्रांस जैसी अर्थव्यवस्थाओं का युद्धोत्तर पुनर्निर्माण नियोजन से

4 📖 पंचवर्षीय योजना(Five Year Plan / FYP)

पाठ का कथन: “भारत सरकार आगामी पाँच वर्षों के लिए अपनी आमदनी और खर्च का एक खाका पहले ही तैयार कर लेती है।”

📄 दो प्रकार का खर्च:

पदअर्थ
📖 गैरयोजना-व्यय (Non-Plan Expenditure)रोज़मर्रा की मदों पर सालाना खर्च
📖 योजना-व्यय (Plan Expenditure)पाँच वर्षों की अवधि में एक निश्चित योजना के तहत खर्च

★यही दो शब्द बताते हैं कि ‘पंचवर्षीय’ शब्द का असली मतलब क्या है।


5 📖 योजना आयोग(Planning Commission)

!★★तीन बातें — परीक्षा में यही पूछी जाती हैं:

#तथ्य
1! यह संवैधानिक निकाय नहीं है — “संविधान द्वारा स्थापित बाकी आयोगों अथवा दूसरे निकायों की तरह नहीं है”; पिछली कक्षा की पुस्तक ‘भारतीय संविधान: सिद्धांत और व्यवहार’ में इसका कहीं ज़िक्र नहीं
2गठन — मार्च 1950, भारत सरकार के एक प्रस्ताव (resolution) द्वारा
3★भूमिका सलाहकार की — “इसकी सिफ़ारिशें तभी प्रभावकारी होती हैं जब मंत्रिमंडल उन्हें मंज़ूर करे।”

➕ समझने की कुंजी: इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते थे। इसलिए इसकी ताक़त संस्थागत नहीं, राजनीतिक थी — और यह बात अध्याय के मुख्य तर्क (“अंतिम निर्णय राजनीतिक होना चाहिए”) को ही मज़बूत करती है।


6 📖 नीति आयोग(NITI Aayog)

पाठ का बॉक्स (पृ. 48) — “1 जनवरी 2015 को योजना आयोग की जगह नीति आयोग ने ले ली।” पूरा नाम: नेशनल इंस्टिट्यूशन फ़ॉर ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया (NITI = National Institution for Transforming India)

➕ मुख्य अंतर: नीति आयोग धन आवंटित नहीं करता; वह सलाह देने, नीति-सुझाव बनाने और केंद्र-राज्य संवाद (‘सहकारी संघवाद’) का मंच है। ★यानी योजना आयोग की ‘ऊपर से नीचे’ शैली की जगह ‘राज्यों के साथ मिलकर’ की शैली। ★पाठ्यपुस्तक स्वयं सुझाती है — niti.gov.in देखिए।


7 📖 वामपंथ(The Left)

पाठ का बॉक्स (पृ. 46): “वामपंथ उन लोगों अथवा समूहों की तरफ़ इशारा करता है जो गरीब और वंचित तबकों को फ़ायदा पहुँचाने वाली सरकारी नीतियों के पक्षधर होते हैं। वामपंथी सामाजिक न्याय की अपनी नीतियों के कारण समाजवाद और साम्यवाद के हिमायती होते हैं।”


8 📖 दक्षिणपंथ(The Right)

पाठ का बॉक्स (पृ. 46): “दक्षिणपंथी उन लोगों अथवा समूहों को कहा जाता है जो इस बात पर विश्वास करते हैं कि खुली प्रतिस्पर्धा और बाज़ारू अर्थव्यवस्था से ही तरक्की होती है। ऐसे लोग मानते हैं कि सरकार को अर्थव्यवस्था के मामले में दख़ल नहीं देना चाहिए।”

! सावधानी: ये आर्थिक नीति की श्रेणियाँ हैं। इन्हें आज के किसी दल पर सीधे चिपकाना गलत होगा — पाठ स्वयं इनका प्रयोग 1960 के दशक के संदर्भ में करता है।


9 📄 उदारवादी-पूँजीवादी मॉडल(Liberal-Capitalist Model)

प्रतिनिधि देश — यूरोप और अमरीका। उत्पादन के साधन निजी हाथों में; बाज़ार तय करता है क्या बने और कितना बने; राज्य की भूमिका सीमित।

10 📄 समाजवादी मॉडल(Socialist Model)

प्रतिनिधि देश — सोवियत संघ। उत्पादन के साधन राज्य के हाथ में; नियोजन तय करता है क्या बने; निजी संपत्ति सीमित।

★★भारत का चुनाव: “भारत ने इनमें से कोई भी एक मॉडल पूरी तरह नहीं अपनाया” — भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था (mixed economy) चुनी, पर सोवियत नियोजन-अनुभव से प्रभावित रहा — “कांग्रेस के अंदर समाजवादी विचारधारा के लोग… नेहरू तक शामिल थे”।


11 📄 ‘बॉम्बे प्लान’(The Bombay Plan, 1944)

★★पाठ का सबसे चौंकाने वाला तथ्य — “1944 में उद्योगपतियों के एक तबके ने आपस में मिलकर भारत की नियोजित अर्थव्यवस्था के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया। इसे ‘बॉम्बे प्लान’ कहा गया।”

! दो बातें अलग-अलग समझिए:

✓ बॉम्बे प्लान चाहता था❌ बॉम्बे प्लान ने यह नहीं माँगा
सरकार अर्थव्यवस्था में, विशेषकर औद्योगिक क्षेत्र में बड़ा निवेश करेउद्योगों का राष्ट्रीयकरण (यह प्रश्न 1 का सही उत्तर-विकल्प है)

★इसका महत्व: यह सिद्ध करता है कि “चाहे दक्षिणपंथी हों अथवा वामपंथी, उस वक्त सभी चाहते थे कि देश नियोजित अर्थव्यवस्था की राह पर चले।”

भाग ख · दोनों योजनाओं की शब्दावली

12 📄 पहली पंचवर्षीय योजना(1951–1956)

पहलूविवरण
मुख्य ज़ोर★कृषि — बाँध और सिंचाई
विभाजन का असरविभाजन के बाद कृषि-क्षेत्र संकट में; तत्काल निवेश ज़रूरी
मूलमंत्र★★“धीरज” — “इस योजना का मूलमंत्र था ‘धीरज’।”
अर्थशास्त्रीके.एन. राज (K. N. Raj)
राज का तर्क★“भारत को पहले दो दशक धीमी गति से चलना चाहिए… तेज़ी से विकास करने पर लोकतंत्र के पटरी से उतर जाने का ख़तरा है।”
मूल समस्या! पर्याप्त बचत (savings) का अभाव

13 📄 दूसरी पंचवर्षीय योजना(1956 से)

पहलूविवरण
मुख्य ज़ोर★★भारी उद्योग
शिल्पी★★पी.सी. महालनोबिस
मूलमंत्र★“तेज़ गति से संरचनात्मक बदलाव” — (रफ़्तार)
नीतिगत सहाराआयातित वस्तुओं पर भारी कर लगाकर घरेलू उद्योग को संरक्षण
परिणामबिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनें, संचार का विकास

📖 इस योजना की तीन आलोचनाएँ:

  1. ! कृषि की उपेक्षा — “अगर कृषि पर ज़्यादा निवेश किया गया होता तो…”
  2. ! मशीनों के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की कमी
  3. ! रोज़गार-सृजन कम — पूँजी-प्रधान उद्योग कम लोगों को काम देते हैं

14 आवंटन-सारणी(पृ. 52 का स्तंभ-चित्र — कुल योजना-व्यय का प्रतिशत)★★

क्षेत्रपहली योजनादूसरी योजनाबदलाव
कृषि और सामुदायिक विकास15.111.8⬇
सिंचाई और ऊर्जा1710.1⬇
उद्योग और खनन7.618.5⬆⬆

★याद रखने की तरकीब — “दो नीचे, एक ऊपर।” यही पूरा मोड़ है।

भाग ग · अध्याय के केस-स्टडी पद

15 📄 उड़ीसा / पोस्को विवाद

📄 पोस्को (POSCO) — दक्षिण कोरिया की इस्पात कंपनी, जिसने उड़ीसा में इस्पात संयंत्र का प्रस्ताव रखा। ★यह अध्याय की शुरुआती केस-स्टडी है।

★★चार टकराते हित — इसे पूरे अध्याय की कुंजी मानिए:

पक्षहित / चिंता
राज्य सरकारपूँजी-निवेश और रोज़गार
आदिवासी! विस्थापन और आजीविका का नुकसान
पर्यावरणविद! प्रदूषण
केंद्र सरकार! बुरी मिसाल बनने और भविष्य के निवेश में बाधा का डर

★★और अध्याय का शीर्षक-वाक्य: “खनन, पर्यावरण और अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों की राय जानना महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम निर्णय निश्चित तौर पर राजनीतिक निर्णय होना चाहिए।”


16 📄 ‘केरल मॉडल’(The Kerala Model)

📄 अर्थ: केरल में अपनाई गई वह विकास-नीति जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि-सुधार, कारगर खाद्य-वितरण और गरीबी-निवारण पर ज़ोर दिया गया।

★★इसका विरोधाभास ही इसका महत्व है:

प्रति व्यक्ति आय कम + औद्योगिक आधार कमज़ोर — फिर भी साक्षरता लगभग शत-प्रतिशत, जीवन-प्रत्याशा और स्वास्थ्य-सूचकांक उन्नत देशों जैसे।

📄 ‘नव लोकतांत्रिक पहल’ (New Democratic Initiatives) — योजना बनाने में जनता की भागीदारी, जिसके तहत योजना-व्यय का एक बड़ा हिस्सा पंचायतों और नगरपालिकाओं को सौंपा गया।

★अध्याय में इसका काम: यह दिखाना कि नियोजन का अर्थ केवल केंद्रीकृत नियोजन नहीं — विकेंद्रित नियोजन भी संभव है, और वह अलग नतीजे देता है।

भाग घ · अध्याय की दो जीवनियाँ

17 📄 पी.सी. महालनोबिस(P. C. Mahalanobis, 1893–1972)

पहलूविवरण
पहचान★सांख्यिकीविद् (statistician)
संस्था★भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता (Indian Statistical Institute)
पत्रिका‘सांख्य’ (Sankhya)
योगदान★★दूसरी पंचवर्षीय योजना का ढाँचा
मान्यताभारी उद्योग पर आधारित औद्योगीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख भूमिका के हिमायती

18 📄 जे.सी. कुमारप्पा(J. C. Kumarappa, 1892–1960)

पहलूविवरण
★असली नामजे.सी. कॉर्नेलियस
पहचानगांधीवादी अर्थशास्त्री
प्रसिद्ध पुस्तक★★‘इकॉनोमी ऑफ़ परमानेंस’ (Economy of Permanence — स्थायित्व की अर्थव्यवस्था)
विचार★ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, विकेंद्रित और सादा जीवन-आधारित विकास

★★इन दोनों को साथ रखिए — यही अध्याय की पूरी बहस है: महालनोबिस = भारी उद्योग, केंद्रीकृत, आधुनिक · कुमारप्पा = ग्रामोद्योग, विकेंद्रित, पारिस्थितिक।

भाग ङ · प्रश्न 4 के वे पद जो अध्याय में नहीं हैं(पर पूछे गए हैं)ध्यान

!! प्रश्न 4 (पृ. 53) में चार नाम हैं, पर उनमें से केवल महालनोबिस अध्याय में है। शेष हरित/श्वेत क्रांति वाले हटाए गए खंड से हैं — इसीलिए वे यहाँ ➕ के रूप में दिए जा रहे हैं।

➕ पदअर्थसही मेल
➕ चौधरी चरण सिंहकिसान-हितों के प्रमुख पैरोकार; बाद में भारत के प्रधानमंत्री(iii) किसान
➕ बिहार का अकाल1966-67 का भीषण अकाल, जिसने खाद्य-संकट को उजागर किया(ii) जोनिंग
➕ जोनिंग (Zoning)★अनाज की अंतर-राज्यीय आवाजाही पर रोक — यानी किसी क्षेत्र का अनाज उसी क्षेत्र में बेचा जाए—
➕ वर्गीज़ कूरियन★‘श्वेत क्रांति’ और अमूल के जनक; सहकारी डेयरी आंदोलन के प्रणेता(iv) सहकारी डेयरी
📄 पी.सी. महालनोबिसदूसरी योजना के शिल्पी ✓ (अध्याय में मौजूद)(i) औद्योगीकरण

★★सुंदर बात: ये चारों विकास के चार अलग-अलग रास्ते हैं — भारी उद्योग · किसान · राज्य-नियंत्रण की सीमा · सहकारिता। यह प्रश्न अपने-आप में पूरे अध्याय का सार है।

भाग च · ➕ संवर्धन-पद(पाठ से बाहर, पर समझ के लिए उपयोगी)

➕ पदअर्थअध्याय से कड़ी
➕ मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy)सार्वजनिक और निजी — दोनों क्षेत्र साथ-साथ★भारत के चुनाव का सही नाम यही है
➕ आयात-प्रतिस्थापन (Import Substitution)आयात घटाकर वही चीज़ें देश में बनाना★दूसरी योजना की “आयातित वस्तुओं पर भारी कर” वाली नीति
➕ सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU)सरकारी स्वामित्व वाला उद्योग — भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर इस्पात संयंत्रदूसरी योजना का ठोस रूप
➕ पूँजी-प्रधान बनाम श्रम-प्रधानमशीन ज़्यादा, लोग कम — बनाम — लोग ज़्यादा, मशीन कम! दूसरी योजना की रोज़गार वाली आलोचना
➕ विस्थापन और पुनर्वास (Displacement & Rehabilitation)परियोजना के लिए ज़मीन लेने पर लोगों का उजड़ना और उन्हें बसाना★उड़ीसा के आदिवासियों की चिंता
➕ सतत विकास (Sustainable Development)ऐसा विकास जो आने वाली पीढ़ियों की क्षमता न घटाए★कुमारप्पा की ‘इकॉनोमी ऑफ़ परमानेंस’ इसकी पूर्वसूचना है
➕ सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)केंद्र और राज्य साथ मिलकर नीति बनाएँ★नीति आयोग का घोषित उद्देश्य
➕ विकेंद्रित नियोजन (Decentralised Planning)योजना ऊपर से नहीं, स्थानीय स्तर से बने★‘केरल मॉडल’ और ‘नव लोकतांत्रिक पहल’

भाग छ · ⚡ त्वरित पुनरावृत्ति — 12 पद, 12 पंक्तियाँ

#पदएक पंक्ति
1विकासआधुनिक होना + तेज़ संवृद्धि + अधिकार-आधारित समाज — ! पर सबके लिए अर्थ अलग
2शीर्षक-वाक्य★★“अंतिम निर्णय निश्चित तौर पर राजनीतिक निर्णय होना चाहिए”
3दो सहमतियाँसंवृद्धि + सामाजिक न्याय · सरकार की प्रमुख भूमिका
4तीन मतभेदकेंद्रीय संगठन? · सरकारी उद्योग? · न्याय बनाम संवृद्धि
5दो मॉडलउदारवादी-पूँजीवादी बनाम समाजवादी — भारत ने कोई एक पूरी तरह नहीं अपनाया
6योजना आयोग! संवैधानिक नहीं · मार्च 1950 · प्रस्ताव से · सलाहकार
7बॉम्बे प्लान★★1944 · उद्योगपतियों ने स्वयं नियोजन माँगा · पर राष्ट्रीयकरण नहीं
8पहली योजना1951–56 · कृषि-सिंचाई · के.एन. राज · “धीरज”
9दूसरी योजना1956 · भारी उद्योग · महालनोबिस · “रफ़्तार”
10तीन आँकड़ेकृषि 15.1⬇11.8 · सिंचाई 17⬇10.1 · उद्योग 7.6⬆18.5
11केरल मॉडल★आय कम, फिर भी साक्षरता-स्वास्थ्य उन्नत — विकेंद्रित नियोजन
12नीति आयोग1 जनवरी 2015 · योजना आयोग की जगह