Chapter 5समकालीन विश्व में सुरक्षा

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व्यवस्था: पहले मूल धारणाएँ, फिर पारंपरिक सुरक्षा, फिर संधियाँ, फिर अपारंपरिक सुरक्षा, फिर खतरे के नये स्रोत, फिर भारत-विशिष्ट पद, और अंत में भ्रम-युग्मों की सूची। ★= अवश्य याद रखने योग्य · ! = यहीं भूल होती है पाठ्यपुस्तक के शब्द उद्धरण-चिह्नों में दिए गए हैं।


भाग 1 — मूल धारणाएँ

पदEnglishअर्थ
★★सुरक्षाSecurityपाठ्यपुस्तक: “सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है — खतरे से आजादी।” पर हर खतरे से नहीं — केवल ‘केंद्रीय मूल्यों’ को छूने वाले “बड़े गंभीर खतरों” से, जिनसे “अपूरणीय क्षति” पहुँचे
★केंद्रीय मूल्यCore valuesवे मूल्य जिन पर चोट पड़ने से जीवन या राज्य का अस्तित्व ही संकट में आ जाए। पारंपरिक धारणा में — संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता। ! पाठ स्वयं पूछता है — “किसके केंद्रीय मूल्य?”
★अपूरणीय क्षतिIrreparable damageऐसी क्षति जिसकी भरपाई न हो सके — यही ‘गंभीर खतरे’ की कसौटी है
★विवादग्रस्त धारणाContested conceptऐसी धारणा जिस पर सर्वसम्मत परिभाषा संभव नहीं। पाठ: “करीब 200 मुल्कों के 7 अरब लोग सुरक्षा की एक जैसी धारणा रखते हों?”
★★संदर्भीReferentवह इकाई जिसकी सुरक्षा की बात हो रही है। पारंपरिक धारणा में राज्य; अपारंपरिक में व्यक्ति, समुदाय और समूची मानवता
★★न्यूनतम मानकMinimum standardवह कसौटी जिससे तय हो कि कोई मसला ‘सुरक्षा का मसला’ है या नहीं — पाठ: “अगर किसी मसले से संदर्भी के अस्तित्व को खतरा हो रहा हो… चाहे इस खतरे की प्रकृति कुछ भी हो”

भाग 2 — पारंपरिक सुरक्षा

पदEnglishअर्थ
★★पारंपरिक सुरक्षा / राष्ट्रीय सुरक्षाTraditional / National securityसैन्य ख़तरे को सबसे ख़तरनाक मानने वाली धारणा; “इस ख़तरे का स्रोत कोई दूसरा मुल्क होता है”
★बाहरी सुरक्षाExternal securityसीमा के बाहर से आने वाले सैन्य खतरों से रक्षा
★आंतरिक सुरक्षाInternal securityदेश के भीतर की शांति और कानून-व्यवस्था; अलगाववाद और गृहयुद्ध
★★आत्मसमर्पणSurrender“दूसरे पक्ष की बात को बिना युद्ध किए मान लेना।” ! यह विकल्प तो है, पर ‘नीति’ कभी नहीं बनता
★★अपरोधDeterrence“युद्ध से होने वाले नाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहमकर हमला करने से बाज आये।” — युद्ध होने ही न दो
★★रक्षाDefence“युद्ध ठन जाय तो अपनी रक्षा करना”; “युद्ध को सीमित रखना अथवा उसको समाप्त करना।” — युद्ध हो जाए तो जीतो या रोको
★★शक्ति-संतुलनBalance of powerपड़ोसियों की सापेक्ष ताकत को अपने पक्ष में रखना। ★इरादा नहीं, क्षमता देखी जाती है। साधन — सैन्य, आर्थिक और प्रौद्योगिकीय शक्ति
★★गठबंधनAlliance“सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम।” प्राय: लिखित संधि; और ! “राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं”
★अराजकताAnarchy (अंतर्राष्ट्रीय)विश्व-राजनीति में “ऐसी कोई केंद्रीय सत्ता नहीं जो सबके ऊपर हो” — इसीलिए “हर देश को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है”
★न्याय-युद्धJust warयूरोपीय परंपरा — युद्ध केवल आत्म-रक्षा या जनसंहार से बचाने के लिए; और साधनों पर भी सीमा — निहत्थे को न मारें, उतना ही बल, बल अंतिम उपाय

भाग 3 — सुरक्षा के तरीके और संधियाँ

पदEnglishअर्थ
★★निरस्त्रीकरणDisarmament“सभी राज्य… कुछ खास किस्म के हथियारों से बाज आयें।” — हथियार त्यागना
★★अस्त्र-नियंत्रणArms control“हथियारों को विकसित करने अथवा उनको हासिल करने के संबंध में कुछ कायदे-कानूनों का पालन।” — नियम के तहत रखना
★★विश्वास बहाली के उपायConfidence Building Measures (CBMs)“सूचनाओं तथा विचारों के नियमित आदान-प्रदान का फैसला।” मकसद — “ग़लतफहमी या गफलत में पड़कर जंग के लिए आमादा न हो जाएँ”
★जैविक हथियार संधिBiological Weapons Convention (BWC)1972; 155 से ज्यादा हस्ताक्षरकर्ता (पाठ्यपुस्तक का आँकड़ा) — निरस्त्रीकरण की श्रेणी में
★रासायनिक हथियार संधिChemical Weapons Convention (CWC)1997; 193 देश — निरस्त्रीकरण की श्रेणी में
★एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधिAnti-Ballistic Missile Treaty (ABM)1972 — अमरीका और सोवियत संघ को मिसाइलों को रक्षा-कवच के रूप में इस्तेमाल करने से रोका; सीमित संख्या की अनुमति, व्यापक उत्पादन पर रोक
सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि-2SALT IIअस्त्र-नियंत्रण संधि; ‘परिसीमन’ = सीमा बाँधना
सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधिSTARTअस्त्र-नियंत्रण संधि; ‘न्यूनीकरण’ = घटाना
★★परमाणु अप्रसार संधिNon-Proliferation Treaty (NPT)1968 की संधि; ! 1967 की रेखा — “जिन देशों ने 1967 से पहले परमाणु हथियार बना लिये थे या उनका परीक्षण कर लिया था उन्हें रखने की अनुमति दी गई। जो 1967 तक ऐसा नहीं कर पाये उन्हें वंचित किया गया।” मूल्यांकन: “समाप्त तो नहीं किया लेकिन… संख्या ज़रूर कम की”
★सामूहिक संहार के हथियारWeapons of Mass Destructionपरमाणु, जैविक और रासायनिक हथियार

भाग 4 — अपारंपरिक सुरक्षा

पदEnglishअर्थ
★★अपारंपरिक सुरक्षाNon-traditional security“सिर्फ सैन्य खतरों से संबद्ध नहीं” — इसमें “मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले व्यापक खतरे और आशंकाएँ” शामिल
★★मानवता की सुरक्षाHuman security“जनता-जनार्दन की सुरक्षा को राज्यों की सुरक्षा से बढ़कर” मानने वाला विचार। मूल वाक्य — “सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता”
★विश्व-रक्षा / विश्व सुरक्षाGlobal security1990 के दशक में उभरी धारणा — वैश्विक तापवृद्धि, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद और महामारियों के कारण; “कोई भी देश इन समस्याओं का समाधान अकेले नहीं कर सकता”
★★‘अभाव से मुक्ति’Freedom from wantआर्थिक सुरक्षा — भूख, गरीबी और अभाव से रक्षा
★★‘भय से मुक्ति’Freedom from fearहिंसा से सुरक्षा — युद्ध, दमन और खून-खराबे से रक्षा
★सहयोगमूलक सुरक्षाCooperative security“सैन्य-संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी सहयोग की ज़रूरत”; ★★“ऐसे अधिकांश मसलों में सैन्य-बल के प्रयोग से मामला और बिगड़ेगा।” बल अंतिम उपाय, और “सामूहिक स्वीकृति से और सामूहिक रूप में”

भाग 5 — खतरे के नये स्रोत

पदEnglishअर्थ
★★आतंकवादTerrorism“राजनीतिक खून-खराबा जो जान-बूझकर और बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है।” ! “आतंकवाद कोई नयी परिघटना नहीं है”
★अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादInternational terrorism“एक से ज्यादा देशों में व्याप्त… निशाने पर कई देशों के नागरिक”
★मानवाधिकार — तीन कोटियाँHuman rights(1) राजनीतिक अधिकार (अभिव्यक्ति, सभा) (2) आर्थिक और सामाजिक अधिकार (3) उपनिवेशीकृत जनता तथा जातीय व मूलवासी अल्पसंख्यकों के अधिकार
★वैश्विक निर्धनताGlobal poverty760 करोड़ → 1000 करोड़; वृद्धि का 50% छह देशों में; और “सबसे ज्यादा सशस्त्र संघर्ष सहारा मरुस्थल के दक्षिणवर्ती देशों में — यह इलाका दुनिया का सबसे गरीब इलाका है”
★★आप्रवासीMigrant“जो अपनी मर्जी से स्वदेश छोड़ते हैं।” ! राज्य को स्वीकारने की बाध्यता नहीं
★★शरणार्थीRefugee“जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा अथवा राजनीतिक उत्पीड़न के कारण स्वदेश छोड़ने पर मज़बूर होते हैं।” राज्य से स्वीकार करने की उम्मीद
★★आंतरिक रूप से विस्थापित जनInternally Displaced Persons“जो अपना घर-बार छोड़ चुके हैं परंतु राष्ट्रीय सीमा के भीतर ही हैं।” ★उदाहरण — 1990 के दशक में कश्मीर घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित
★महामारीEpidemic / Pandemicआप्रवास, व्यवसाय, पर्यटन और सैन्य-अभियानों से फैलती है; निष्कर्ष — “राष्ट्रीय सीमाएँ अब पहले की तुलना में कम सार्थक रह गई हैं”
★वैश्विक तापवृद्धिGlobal warmingसमुद्रतल 2 मीटर उठे तो — बांग्लादेश का 20%, कमोबेश पूरा मालदीव, थाईलैंड की 50% आबादी खतरे में
★क्योटो प्रोटोकॉलKyoto Protocol1997 — “ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के संबंध में दिशा निर्देश”; भारत उन 160 देशों में शामिल जिन्होंने हस्ताक्षर किए

भाग 6 — भारत-विशिष्ट पद

पदअर्थ
★भारत की सुरक्षा-नीति के चार घटक(1) सैन्य-क्षमता (2) अंतर्राष्ट्रीय कायदे और संस्थाएँ (3) आंतरिक सुरक्षा (4) आर्थिक विकास
★1974 और 1998पहला परमाणु परीक्षण और परीक्षण के फ़ैसले (जिन्हें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के तर्क से उचित ठहराया गया)
★सार्वभौम और बिना भेदभाव वाली नीतिभारत की अप्रसार-संबंधी माँग — “हर देश को सामूहिक संहार के हथियारों से संबद्ध बराबर के अधिकार और दायित्व”
★नव-अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्थाNew International Economic Order — भारत द्वारा उठाई गई माँग
★गुटनिरपेक्षता“दो महाशक्तियों की खेमेबाजी से अलग… विश्व-शांति का तीसरा विकल्प”
★विउपनिवेशीकरणDecolonisation — नेहरू द्वारा समर्थित तीन प्रयासों में एक (एशियाई एकता और निरस्त्रीकरण के साथ)
★शांतिबहाली के मिशनUN Peacekeeping — “भारत ने अपनी सेना संयुक्त राष्ट्रसंघ के शांतिबहाली के मिशनों में भेजी है”
★अलगाववादी क्षेत्रनगालैंड, मिजोरम, पंजाब और कश्मीर — जहाँ उग्रवादी समूहों ने अलगाव की कोशिश की
★★लोकतंत्र = सुरक्षा का साधनअध्याय का अंतिम निष्कर्ष — “लोकतंत्र सिर्फ राजनीतिक आदर्श नहीं है; लोकतांत्रिक शासन जनता को ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने का साधन भी है।”

भाग 7 — भ्रम-युग्म : यहीं गलती होती हैध्यान

युग्मकैसे अलग पहचानें
★★अपरोध बनाम रक्षाअपरोध = युद्ध होने ही न दो (ताला); रक्षा = हो जाए तो लड़ो (लाठी)
★★निरस्त्रीकरण बनाम अस्त्र-नियंत्रणत्यागना बनाम नियम के तहत रखना। BWC/CWC पहला; ABM/NPT/SALT/START दूसरा
★★1967 बनाम 19681968 = NPT का वर्ष; 1967 = वह रेखा जिससे पहले हथियार बना/परख लेने वालों को अनुमति मिली
★BWC बनाम CWCBWC = जैविक, 1972, 155+; CWC = रासायनिक, 1997, 193
★SALT बनाम STARTSALT = परिसीमन (Limitation — सीमा बाँधना); START = न्यूनीकरण (Reduction — घटाना)
★★आप्रवासी बनाम शरणार्थीअपनी मर्जी बनाम मज़बूरी; बाध्यता नहीं बनाम स्वीकार करने की उम्मीद
★★शरणार्थी बनाम आंतरिक विस्थापितसीमा पार की बनाम सीमा के भीतर ही। ! कश्मीरी पंडित = आंतरिक विस्थापित, शरणार्थी नहीं
★★95% बनाम बारहगुना95% = आज के सशस्त्र संघर्षों में आंतरिक युद्धों का हिस्सा; बारहगुना = 1946–91 में गृहयुद्धों की वृद्धि
★‘अभाव से मुक्ति’ बनाम ‘भय से मुक्ति’आर्थिक सुरक्षा बनाम हिंसा से सुरक्षा
★मानवता की सुरक्षा बनाम विश्व सुरक्षासंदर्भी व्यक्ति बनाम खतरे वैश्विक — “कोई भी देश अकेले समाधान नहीं कर सकता”
★1962 बनाम 1965/1971/1999चीन का हमला बनाम पाकिस्तान के हमले (1947-48 भी पाकिस्तान)
★1974 बनाम 1998पहला परमाणु परीक्षण बनाम परीक्षण के ‘फ़ैसले’
! ‘राष्ट्र बनाने की माँग’ बनाम ‘अधिक स्वायत्तता की माँग’पहला अलगाववाद (परंपरागत आंतरिक सुरक्षा का सरोकार); दूसरा सामान्य लोकतांत्रिक राजनीति — ‘खतरे की स्थिति नहीं’
! ‘पड़ोसी देश से कामगार’ बनाम ‘पड़ोसी राज्य से कामगार’‘देश’ = अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन (अपारंपरिक सरोकार); ‘राज्य’ = देश के भीतर आवाजाही — ‘खतरे की स्थिति नहीं’

भाग 8 — याद रखने के सूत्र

सूत्रक्या याद रहेगा
“खतरे से आजादी — पर केंद्रीय, और गंभीर”सुरक्षा की पूरी परिभाषा
“तीन विकल्प, दो नीतियाँ”आत्मसमर्पण/अपरोध/रक्षा — पर नीति सिर्फ बाद के दो पर
“ताला और लाठी”अपरोध और रक्षा
“त्यागो या नियम मानो”निरस्त्रीकरण और अस्त्र-नियंत्रण
“L = सीमा, R = कटौती”SALT (Limitation) और START (Reduction)
“संधि 68, रेखा 67”NPT का सबसे आम भ्रम
“मर्जी–मज़बूरी–सीमा”आप्रवासी · शरणार्थी · आंतरिक विस्थापित
“राज्य पूछता है ‘मैं सुरक्षित हूँ?’ — जनता पूछती है ‘और मैं?’”पारंपरिक बनाम अपारंपरिक
“सेना काम नहीं आती, सहयोग आता है”सहयोगमूलक सुरक्षा
“चार घटक — बंदूक, संधि, लोकतंत्र, रोटी”भारत की सुरक्षा-नीति